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 विविधता में एकता का संदेश देती राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी 2026

-सांस्कृतिक विविधता का उत्सव, लोक- नृत्यों ने बंधा समा, दर्शक हुए मंत्रमुग्ध 
 बालोद।  बालोद जिले के ग्राम दुधली के प्रथम राष्ट्रीय रोवर रेंजर्स जंबूरी में हर प्रांत की लोक-संस्कृति, वेशभूषा, संगीत और नृत्य ने ऐसा समां बांधा कि “विविधता में एकता” का संदेश हर पल जीवंत दिखाई दिया। जिसमें खास कर राजस्थान की प्रस्तुतियों में पारंपरिक परिधान, लोकधुनें और गीतों की उमंग-ऊर्जा से भरे कार्यक्रमों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। लोकनृत्यों और गीतों के माध्यम से मरुधरा की सांस्कृतिक शान झलकी। वहीं पंजाब की प्रस्तुति में जोश, फुर्ती और आत्मविश्वास साफ नजर आया। “सारी दुनिया तों अन्नदाता होन्दा” जैसे संदेशों के साथ भांगड़ादृगिद्दा ने कृषि संस्कृति और श्रम की महत्ता को रेखांकित किया। इसी प्रकार दिल्ली को “शहरों का शहर नहीं, बल्कि देश की धड़कन” के रूप में प्रस्तुत किया गया। फिल्मी गीतों, आधुनिक रैंप प्रस्तुतियों और सांस्कृतिक कोलाज ने राजधानी की बहुरंगी पहचान को उभारा।
  तेलंगाना राज्य की प्रस्तुतियों में लोकनृत्य, वाद्य और समकालीन रंगमंच का सुंदर समन्वय देखने को मिला, जिसने दक्षिण भारतीय सांस्कृतिक धारा को प्रभावी ढंग से सामने रखा। छत्तीसगढ़ लोकनृत्यों की मिठास भरी प्रस्तुति में सुआ, मदार और ददरिया जैसे लोकनृत्यों का समावेश रहा। सादगी, सामूहिकता और लोकजीवन की खुशबू से भरे इन नृत्यों ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।  मध्य प्रदेश की लोककलाओं ने अपनी विशिष्टता से मंच को समृद्ध किया, जहाँ पारंपरिक नृत्य-गीतों के माध्यम से राज्य की सांस्कृतिक गहराई दिखाई दी। उड़ीसा की प्रस्तुति में पारंपरिक ओडिसी नृत्य की मोहक मुद्राओं और भाव-भंगिमाओं ने शास्त्रीय कला की गरिमा और सौंदर्य को उजागर किया। हिमाचल प्रदेश के पारंपरिक  नृत्य ने पहाड़ों की सरलता, उत्सवधर्मिता और सामूहिक आनंद का संदेश दिया। इसी प्रकार उत्तराखंड की प्रस्तुतियों में पहाड़ी लोकसंस्कृति, गीत-संगीत और परंपराओं की सजीव झलक देखने को मिली। 
      उत्तर प्रदेश की प्रस्तुति में फागुन माह की होली का उल्लास छाया रहा। “फागुन माह में होली खेले सांवरा, राधा संग” जैसे होली गीतों ने पूरे कार्यक्रम को रंगों से सराबोर कर दिया। वहीं साउथ ईस्ट सेंट्रल रेलवे राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया। इसी प्रकार अन्य राज्यों ने भी राज्यों से जुड़े सांस्कृतिक झलक प्रस्तुत कर लोगो का मन मोह लिया। “भारत मां आजाद रहे, यही हमारा नारा हैय सभी धर्मों के लोग कहें, भारत देश हमारा हैं के नारे के एकता, समरसता और राष्ट्रप्रेम को और सुदृढ़ परिलक्षित किया। लोकनृत्य, गीत, परंपराएं और समकालीन प्रस्तुतियाँ मिलकर इस जंबूरी को सांस्कृतिक महाकुंभ बना दी। जहाँ हर प्रतिभागी ने भारत की बहुरंगी आत्मा को करीब से महसूस किया।
 एथनिक फैशन शो में विभिन्न राज्यों के पारंपरिक परिधान को दिखाया आकर्षक 
लोक नृत्य के पश्चात एथनिक फैशन शो में विभिन्न राज्यों से आए रोवर रेंजर्स ने आकर्षक ढंग से अपने पारम्परिक पहनावे का प्रदर्शन रैंप वॉक के माध्यम से किया। जिसमें दर्शकों ने इस अद्भुत रैम्प वॉक को खूब सराहा।

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