फसल परिवर्तन से बढ़ी आमदनी: गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के किसानों ने अपनाई गेहूं खेती
मरवाही । गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में किसानों द्वारा अपनाई गई नई कृषि पद्धति अब सफलता की मिसाल बनती जा रही है। कृषि विभाग की सलाह पर किसानों ने पारंपरिक धान की खेती छोड़कर गेहूं की खेती की ओर रुख किया है, जिससे उत्पादन और आमदनी दोनों में बढ़ोतरी हुई है।
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के ग्राम लटकोनी के किसान कई वर्षों से रबी मौसम में धान की खेती करते आ रहे थे। लेकिन कृषि विभाग के मार्गदर्शन में किसानों ने सामूहिक रूप से ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर गेहूं की खेती शुरू की। इसके लिए उन्हें कृषि विभाग द्वारा अनुदान पर गेहूं बीज भी उपलब्ध कराया गया।वहीं, जिले के उपसंचालक कृषि सत्यजीत कंवर के अनुसार फसल परिवर्तन से किसानों को उल्लेखनीय लाभ हुआ है। पहले जहां धान की खेती में उत्पादन सीमित था, वहीं अब गेहूं की खेती से बेहतर उत्पादन प्राप्त हो रहा है।
किसानों का कहना है कि पिछले 10 वर्षों से वे रबी सीजन में धान की खेती कर रहे थे, जिससे प्रति एकड़ मात्र 10 से 12 क्विंटल उत्पादन ही मिलता था। लेकिन अब गेहूं की खेती से उन्हें प्रति एकड़ 15 से 17 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त हो रहा है, जिससे उनकी आय में भी बढ़ोतरी हुई है। कृषि विभाग की पहल और किसानों की जागरूकता से फसल परिवर्तन की यह पहल जिले में एक नई दिशा दे रही है, जो अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणादायक बन रही है।



.jpg)


.jpg)



.jpg)
.jpg)

Leave A Comment