शबरी की वेदना देख आंखें हुईं नम
0- महाराष्ट्र मंडल में रामकथा के दौरान हुआ एक पात्रीय नाटक में शबरी को जीवंत किया चंचल ने
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल के छत्रपति शिवाजी महाराज सभागृह में जब एक पात्रीय नाटक शबरी का मंचन हुआ, तो शबरी की वेदना देख दर्शकदीर्घा में बैठे लोगों की आंखें नम हो गईं। वहीं जब श्रीराम ने शबरी को दर्शन दिए, तो शबरी के साथ दर्शक भी तृप्त नजर आए। 15 मिनट के एकांकी नाटक को महाराष्ट्र मंडल और रंगभूमि के कलाकारों ने राम कथा के दौरान छत्रपति शिवाजी महाराज सभागृह में प्रस्तुत किया।
आचार्य रंजन मोड़क के निर्देशन में चंचल ध्रुव ने एकमात्रीय नाटक में शबरी की भूमिका इतनी संजीदगी से निभाई कि दर्शकों की आंखें नम हो गईं। चेहरे पर झुर्रियां, झुकी हुई कमर और चलने के लिए लाठी का सहारा, शबरी के उम्र के पड़ाव को चंचल ने मंच पर सटीकता से पेश किया। राम भजन करते हुए जब शबरी ने ‘राम आएंगे, तो अंगना सजाऊंगी’ का गायन किया, तो दर्शक भी खुद को रोक नहीं पाए और राम के भजन में डूब गए।
आचार्य मोड़क के अनुसार वंदना ठाकुर की कविता का आलेख लोकेश साहू ने तैयार किया। कार्यक्रम का संचालन चैतन्य मोड़क, मंच सज्जा अजय पोतदार, रूप सज्जा अक्षदा मातुरकर, ध्वनि व्यवस्था संतोष नियाल, नेपथ्य में प्रकाश गुरव की भूमिका रही। राम की संक्षिप्त भूमिका में भूपेंद्र साहू भी ध्यान खींचते हैं।













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