ब्रेकिंग न्यूज़

 पीएम मोदी ने केदारनाथ धाम के कपाट खुलने पर बधाई दी और श्रद्धालुओं से 5 संकल्प अपनाने का आग्रह किया

नई दिल्ली। देवभूमि उत्तराखंड की पवित्र धरती पर श्री केदारनाथ धाम के कपाट पूरे विधि-विधान के साथ बुधवार को सभी श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने प्रार्थना की कि बाबा केदार सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें और आपकी यात्राओं को शुभ करें। पीएम मोदी ने श्रद्धालुओं से 5 संकल्प अपनाने की अपील भी की।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “केदारनाथ धाम और चार धाम की यह यात्रा हमारी आस्था, एकता और समृद्ध परंपराओं का दिव्य उत्सव है। इन यात्राओं से हमें भारत की सनातन संस्कृति के दर्शन भी होते हैं। इस वर्ष चार धाम यात्रा के आरंभ उत्सव पर, उत्तराखंड आने वाले सभी श्रद्धालुओं के लिए मैंने एक पत्र के माध्यम से अपनी भावनाएं व्यक्त की हैं। मेरी कामना है कि बाबा केदार सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें और आपकी यात्राओं को शुभ करें।”
देशवासियों के नाम अपने एक संदेश में पीएम मोदी ने लिखा, “देवभूमि उत्तराखंड की पावन धरती पर चारधाम यात्रा का शुभारंभ हो गया है। 19 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुल चुके हैं और आज से केदारनाथ धाम की यात्रा प्रारंभ हो रही है। 23 अप्रैल को बद्रीनाथ धाम के कपाट भी श्रद्धालुओं के लिए खुल जाएंगे। बाबा केदार के दर्शन समेत चारों धामों की यह पावन यात्रा भारत की सनातन सांस्कृतिक चेतना का एक भव्य उत्सव है। जगद्गुरु आदि शंकराचार्य ने बद्रीनाथ और केदारनाथ की यात्राओं से भारतीय संस्कृति को एक नई दिशा दी थी। जगद्गुरु रामानुजाचार्य और जगतगुरु मध्वाचार्य ने भी अपने धर्म विचारों को समृद्ध करने के लिए बद्रीनाथ की यात्रा की थी।”
उन्होंने अपने संदेश में लिखा, “आज भी हिमालय की गोद में विराजमान ये चारों धाम हमारी शाश्वत आस्था और विश्वास के दिव्य केंद्र हैं। हर वर्ष विविध भाषाओं, परंपराओं और संस्कृतियों के लोग यहां पहुंचते हैं और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के भाव को और अधिक सशक्त करते हैं। इस वर्ष की यात्रा भी इसी परंपरा का विस्तार है।”
पीएम मोदी ने लिखा, “हमारे शास्त्रों में कहा गया है, ‘अग्निष्टोमादिभिर्यज्ञैरिष्ट्वा विपुलदक्षिणैः। न तत्फलमवाप्नोति तीर्थाभिगमनेन यत्॥’ भाव ये है कि बड़े-बड़े यज्ञों और दान आदि से हमें अपार पुण्य प्राप्त होते हैं। और इन अनुष्ठानों से भी कहीं अधिक पुण्य, हमें तीर्थ यात्राओं से प्राप्त होता है।”
देशवासियों के नाम संदेश में पीएम मोदी ने लिखा, “विकसित भारत के संकल्प में विकसित उत्तराखंड की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। कुछ वर्ष पहले, बाबा केदार के द्वार पर मैंने कहा था कि ये दशक उत्तराखंड का दशक होगा। आज उत्तराखंड की प्रगति इस विश्वास को साकार कर रही है। उत्तराखंड आज पर्यटन, आध्यात्मिकता और आर्थिक प्रगति, तीनों क्षेत्रों में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। पिछले कुछ वर्षों से उत्तराखंड में विकास का जो महायज्ञ चल रहा है, उसने चारधाम यात्रा को पहले से अधिक सुगम, सुरक्षित और दिव्य बनाया है। इससे यहां आने वाले श्रद्धालुओं, संतजनों और पर्यटकों को बहुत सुविधा हो रही है। इन सारे कामों में उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता का ध्यान रखने का पूरा प्रयास किया जा रहा है।”
प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड आने वाले हर अतिथि से अनुरोध किया कि वे इस नए अनुभव का आनंद जरूर लें। उन्होंने कहा, “सभी यात्रीगण अपनी यात्रा के दौरान डिजिटल उपवास रखने और उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता को जीने का प्रयास भी करें। इससे आपको एक अलग संतुष्टि भी मिलेगी।” इस दौरान, पीएम मोदी ने श्रद्धालुओं से पांच संकल्प अपनाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा, “चार धाम की हर यात्रा में हम एक संकल्प लेकर अपने मूल स्थान से देवभूमि के लिए आते रहे हैं। इसी क्रम में, मैं भी आपसे पांच संकल्पों का आग्रह करना चाहता हूं।”
पीएम मोदी ने ‘स्वच्छता सर्वोपरि’ को पहला संकल्प बताया। उन्होंने कहा, “धाम और उसके आसपास स्वच्छता बनाए रखें। नदियों को साफ रखने के लिए अपना योगदान दें। सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्त यात्रा का संकल्प लें और इस पावन धरा की गरिमा को बनाए रखें।” दूसरे संकल्प में प्रकृति और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता का उल्लेख किया गया। पीएम मोदी ने कहा, “हिमालय की इस दिव्य धरा के प्रति संवेदनशील रहे। प्रकृति के संतुलन को बनाए रखते हुए, ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसे प्रयासों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में योगदान दें।”
सेवा, सहयोग और एकता पर बल के रूप में तीसरे संकल्प की बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “पुरातन काल से हमारी तीर्थ यात्राएं सर्वजन की सेवा और सामाजिक समरसता को स्थापित करने का माध्यम रही हैं। आज भी लोग इसी सेवाभाव से तीर्थयात्रियों की सेवा करते हैं। मैं चारधाम आने वाले हर तीर्थयात्री से भी आग्रह करता हूं कि वे अपनी यात्रा के हर दिन, किसी ना किसी रूप में, लोगों की सेवा का एक काम अवश्य करें। सहयात्रियों की सहायता करें और देश की विभिन्न जगहों से आए लोगों से जुड़ें। उनकी परंपराओं का सहभागी बनकर ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को इस यात्रा के माध्यम से सशक्त करें।”
अपने चौथे संकल्प में पीएम मोदी ने कहा, “अपने मूल स्थान से चलकर यात्रा से घर लौटने तक अपने कुल खर्च का पांच प्रतिशत हिस्सा लोकल उत्पादों को खरीदने पर जरूर खर्च करें। अगर किसी स्थानीय चीज की जरूरत इस मौसम में नहीं भी है, तो भी उसे भविष्य के इस्तेमाल के भाव से ही खरीदने का प्रयास करें।”
वहीं, पांचवें और आखिरी संकल्प की बात करते हुए उन्होंने लिखा, “यात्रा के नियमों और यातायात निर्देशों का पालन करें। एक जिम्मेदार और सजग नागरिक के रूप में इस तीर्थ यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाएं। हम ये प्रयास करें कि हमारी यात्रा से, इस यात्रा के आयोजन और प्रबंधन में जितने भी लोग लगे हुए हैं, उन्हें कोई असुविधा ना हो।”
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में बड़ी संख्या में हमारे क्रिएटर्स, इंफ्लूएंसर्स चारधाम दर्शन के लिए जाने लगे हैं। मैं सभी से ये आग्रह करूंगा कि वो उत्तराखंड की स्थानीय कहानियों और यहां की छोटी-छोटी परंपराओं को भी जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास करें। मुझे विश्वास है कि इन संकल्पों के साथ आपकी यह यात्रा एक अनुपम अनुभव से जुड़ेगी। चारधाम यात्रा का हर पड़ाव आपको प्रकृति की पवित्रता, हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों से और अधिक जोड़ेगा।
उन्होंने अपने संदेश के आखिर में फिर से दोहराते हुए लिखा, “बाबा केदार के साथ ही चारों धामों का आशीर्वाद आपके जीवन में नई ऊर्जा, नई प्रेरणा और नए संकल्पों का संचार करे। मेरी यही कामना है। आप सभी को एक सफल, सुरक्षित, दिव्य और आत्मीय यात्रा के लिए हार्दिक शुभकामनाएं।”

Related Post

Leave A Comment

Don’t worry ! Your email address will not be published. Required fields are marked (*).

Chhattisgarh Aaj

Chhattisgarh Aaj News

Today News

Today News Hindi

Latest News India

Today Breaking News Headlines News
the news in hindi
Latest News, Breaking News Today
breaking news in india today live, latest news today, india news, breaking news in india today in english