ब्रेकिंग न्यूज़

 राजनांदगांव जिले के 8555 कृषकों द्वारा समितियों के माध्यम से 2843 मीट्रिक टन खाद का उठाव किया गया

 - संतुलित उर्वरक उपयोग के प्रति किसानों का बढ़ रहा रूझान
राजनांदगांव । उप संचालक कृषि श्री टीकम सिंह ठाकुर ने बताया कि इस वर्ष खरीफ में धान सहित दलहन-तिलहन फसलों में परम्परागत खाद के साथ वैकल्पिक खाद एवं नैनो यूरिया व डीएपी के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए समितियों एवं निजी क्षेत्रों में खरीफ पूर्व तैयारी के दृष्टि से वर्ष हेतु 68690 मीट्रिक टन का लक्ष्य रखा गया है। जहां सहकारी एवं निजी क्षेत्र को मिलाकर जिले में कुल 40670 मीट्रिक टन खाद उपलब्ध है। जिसमें 16190 मीट्रिक टन यूरिया, 4195 मीट्रिक टन डीएपी, 10242 मीट्रिक टन एनपीके, 3447 मीट्रिक टन एमओपी एवं 6596 मीट्रिक टन सिंगल सुपर फास्फेट खाद उपलब्ध हैं। जो गतवर्ष इसी अवधि की तुलना से 82 प्रतिशत अधिक है। सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को लगातार खाद वितरण किया जा रहा है। जिले में 8555 किसानों को खाद प्रदाय किया जा चुका हैं। जिसमें 1174 मीट्रिक टन यूरिया, 324 मीट्रिक टन डीएपी, 715 मीट्रिक टन एनपीके, 211 मीट्रिक टन एमओपी एवं 419 मीट्रिक टन सिंगल सुपर फास्फेट खाद किसानों को आगामी खरीफ फसलों हेतु वितरण किया जा चुका है।
मिश्रित उर्वरकों के प्रति एकड़ उपयोग हेतु कृषि विभाग द्वारा सभी समितियों में कृषि वैज्ञानिकों के सलाह अनुसार तैयार किए गए खाद की मात्रा का पोस्टर व पॉम्पलेट वितरण कर किसानों को जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है। जिसमें किसान 1 एकड़ धान फसल हेतु डीएपी के स्थान पर दो बोरी एनपीके खाद जैसे 12 : 32 : 16, 20 : 20 : 0 : 13, 16 : 16 : 16, 24 : 24 : 0 एवं 28 : 28 : 0 का उपयोग कर यूरिया की खपत को कम कर सकते हैं। जैसी उपयोगी सलाह किसानों को उपलब्ध कराई जा रही हैं। डोंगरगांव विकासखंड के सेवा सहकारी समिति, खुर्सीपार में खाद का उठाव करने वाले किसान श्री मेहरूराम पटेल तथा सेवा सहकारी समिति मडिय़ान के किसान श्री टुमेश साहू द्वारा बताया गया कि यूरिया, डीएपी और एमओपी को अलग-अलग लेने के स्थान पर इस बार मिश्रित खाद के रूप में यूरिया और एनपीके खाद का उठाव उनके द्वारा किया गया है। जिससे धान में प्रति एकड़ लगने वाले पोषक तत्वों की पर्याप्त मात्रा मिल जाती है और फसल की बुवाई के समय भी उपयोग करना बहुत आसान है। इसी प्रकार सेवा सहकारी समिति घुपसाल के किसान श्री हेमलाल द्वारा बताया गया कि उनके द्वारा यूरिया, डीएपी के ज्यादा मात्रा के स्थान पर 20:20:0:13 जैसे वैकल्पिक खाद को पसंद कर रहे है, जिससे नत्रजन और फास्फोरस जैसे पोषक तत्व एक साथ पर्याप्त संतुलित मात्रा में प्राप्त हो जाते है।
उप संचालक कृषि श्री टीकम सिंह ठाकुर ने सभी समितियों एवं निजी उर्वरक विक्रेताओं से अपील करते हुए कहा है कि किसानों को उर्वरकों के उठाव में किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा अनुशंसित मात्रा के अनुसार पॉश मशीन के माध्यम से नियमानुसार उर्वरकों का वितरण एवं जानकारी का संधारण सुनिश्चित किया जाए, ताकि अनावश्यक खाद की कालाबाजारी को रोका जा सके।

Related Post

Leave A Comment

Don’t worry ! Your email address will not be published. Required fields are marked (*).

Chhattisgarh Aaj

Chhattisgarh Aaj News

Today News

Today News Hindi

Latest News India

Today Breaking News Headlines News
the news in hindi
Latest News, Breaking News Today
breaking news in india today live, latest news today, india news, breaking news in india today in english