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 "प्राकृतिक खेती" एक बड़े आंदोलन के रूप में उभर रही है - बजरंगी प्रसाद यादव

 रायपुर। भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा के राष्ट्रीय मंत्री और छत्तीसगढ़ प्रभारी बजरंगी प्रसाद यादव ने कहा है कि आज के समय में कृषि में रासायनिक खादों और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग ने न केवल हमारी फसलों को जहरीला बना दिया है, बल्कि इसका सीधा असर मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर पड़ रहा है। इस गंभीर समस्या के समाधान के रूप में "प्राकृतिक खेती" एक बड़े आंदोलन के रूप में उभर रही है। यह पद्धति पूरी तरह से सिंथेटिक रसायनों से मुक्त है, जो हमारे भोजन को शुद्ध और पौष्टिक बनाती है। श्री यादव शनिवार को यहाँ कृषि विश्वविद्यालय स्थित स्वामी विवेकानन्द सभागार में भाजपा किसान मोर्चा द्वारा आयोजित प्राकृतिक खेती कार्यशाला व उन्नत किसान सम्मेलन को सम्बोधित कर रहे थे।
भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय मंत्री श्री यादव ने कहा कि कृषि को रसायन मुक्त बनाने, मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से प्राकृतिक खेती अपनाने से हवा, पानी और भोजन में घुल रहे रसायनों पर रोक लगेगी, जिससे कैंसर, लिवर और किडनी से जुड़ी बीमारियों में भारी कमी आएगी। इसके साथ ही, यह खेती प्रकृति के अनुकूल है, जो मित्र कीटों, पक्षियों और पर्यावरण के पूरे चक्र को सुरक्षित रखती है। यह केवल एक खेती की पद्धति नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने का एक महाअभियान है। यह कृषि क्षेत्र का नया सवेरा है। ‘प्राकृतिक खेती’ से धरती अनेक विकारों से मुक्त होगी और मानव स्वास्थ्य को दीर्घायु का वरदान मिलेगा। 
प्राकृतिक खेती से मिट्टी के जैविक कार्बन में वृद्धि होती है - रामविचार नेताम
कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए प्रदेश सरकार के कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा  कि लगातार यूरिया और डीएपी के इस्तेमाल से देश की उपजाऊ मिट्टी कड़क और बेजान होती जा रही है। कृषि वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यदि मिट्टी का स्वास्थ्य नहीं सुधारा गया, तो भविष्य में खाद्यान्न संकट खड़ा हो सकता है। ऐसे में प्राकृतिक खेती मिट्टी के लिए 'संजीवनी' साबित हो रही है। इस पद्धति में गाय के गोबर और गोमूत्र से तैयार 'जीवामृत' का उपयोग किया जाता है, जो मिट्टी में सुप्त पड़े केंचुओं और लाभकारी सूक्ष्मजीवों को सक्रिय कर देता है। श्री नेताम ने इस सम्बन्ध में हुए वैज्ञानिक अध्ययनों की चर्चा करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती अपनाने के महज कुछ ही वर्षों के भीतर मिट्टी के जैविक कार्बन में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। मिट्टी स्पंज की तरह काम करने लगती है, जिससे उसकी नमी सोखने की क्षमता बढ़ जाती है। इसका सीधा फायदा यह होता है कि सूखे की स्थिति में भी फसलें लंबे समय तक टिकी रहती हैं और भू-जल स्तर पर भी अनुकूल प्रभाव पड़ता है।
कार्यशाला में प्राकृतिक खेती की नवीन तकनीकों, जैविक संसाधनों के प्रभावी उपयोग, मिट्टी की सेहत, जल संरक्षण, कीट प्रबंधन और किसानों की आय बढ़ाने के उपायों पर विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन भी प्रदान किया गया। इस दौरान भाजपा प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय, रायपुर ग्रामीण विधायक मोतीलाल साहू, रायपुर शहर जिला अध्यक्ष रमेश ठाकुर, अभिनेष कश्यप,मोनू वर्मा,ओमप्रकाश देवांगन, देवेंद्रसिंह ठाकुर सहित किसान मोर्चा के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थिति रहे।
 

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