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 अल नीनो के प्रभाव को देखते हुए किसानों को वैकल्पिक फसल एवं जल संरक्षण उपाय अपनाने की सलाह

बिलासपुर. जिले में इस वर्ष अल नीनो के प्रभाव के कारण मानसून की अनिश्चितता और सामान्य से कम वर्षा की संभावना को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को वैकल्पिक कृषि रणनीतियां अपनाने की सलाह दी है। विभाग ने किसानों से उपलब्ध वर्षा एवं जल संसाधनों के अनुरूप कम अवधि वाली धान की किस्मों का चयन करने तथा जल संरक्षण तकनीकों को अपनाने का आग्रह किया है।
  कृषि विभाग ने किसानों को एमटीयू-1010, एमटीयू-1156, एमटीयू-1153 तथा आईआर-64 जैसी कम अवधि वाली धान किस्मों की खेती करने की सलाह दी गई है। साथ ही पारंपरिक रोपाई के स्थान पर डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) अथवा खुर्रा बुवाई जैसी तकनीकों के उपयोग से पानी की बचत करने पर जोर दिया गया है। विभाग ने बताया कि जिन किसानों द्वारा खुर्रा बुवाई की जा चुकी है, वे वर्षा में विलंब की स्थिति में उपलब्ध संसाधनों से हल्की सिंचाई कर बीज अंकुरण सुनिश्चित करें तथा प्रारंभिक अवस्था में खरपतवार नियंत्रण पर विशेष ध्यान दें। यदि लंबे समय तक वर्षा नहीं होती और पुनर्बुवाई की आवश्यकता पड़ती है, तो किसान दन्तेश्वरी, इंदिरा बरानी एवं सहभागी जैसी कम अवधि वाली धान किस्मों का चयन कर सकते हैं। अत्यधिक विलंबित बुवाई की स्थिति में किसानों को खुर्रा बोनी के स्थान पर लेही पद्धति अपनाने तथा रोपाई के लिए बोरवेल अथवा अन्य उपलब्ध सिंचाई स्रोतों की सहायता से नर्सरी तैयार रखने की सलाह दी गई है, ताकि पर्याप्त वर्षा होने पर तुरंत रोपाई की जा सके।
  कृषि विभाग ने किसानों को धान के साथ-साथ कोदो, कुटकी, रागी, कुल्थी, उड़द, मूंग, तिल, रामतिल और मूंगफली जैसी कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों को अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया है। इसके अलावा उपलब्ध जल संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करने तथा स्प्रिंकलर एवं ड्रिप सिंचाई जैसी सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों को बढ़ावा देने की अपील की गई है। विभाग ने किसानों से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ लेने तथा मौसम एवं फसल संबंधी तकनीकी सलाह के लिए कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र के संपर्क में नियमित रूप से बने रहने का आग्रह किया है, ताकि संभावित अल्पवृष्टि अथवा सूखे की स्थिति में फसल नुकसान के जोखिम को कम किया जा सके।

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