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 वर्षा ऋतु के दौरान संक्रामक रोगों से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

0- सीएमएचओ ने अधिकारियों को दिए आवश्यक निर्देश   
बिलासपुर. आगामी वर्षा ऋतु के मद्देनजर जिले में संक्रामक रोगों के प्रकोप और मौसमी बीमारियों से आम जनता को बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड  पर आ गया है। सीएमएचओ ने पूर्व तैयारियां सुनिश्चित करने अधिकारी-कर्मचारियों को आवश्यक निर्देश दिए है। वर्षा ऋतु में उल्टी-दस्त, आंत्रशोथ, पीलिया और वेक्टर जनित बीमारियों (जैसे मलेरिया) के फैलने का खतरा सबसे अधिक रहता है। जिसे रोकने के लिए जिला मुख्यालय सहित सभी विकासखंडों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में महामारी नियंत्रण कक्ष को सक्रिय कर दिया गया है। आपात स्थिति में तुरंत संपर्क करने के लिए जिला स्तरीय नियंत्रण कक्ष के प्रभारी व जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. प्रमोद कुमार तिवारी (मोबाइल नं. 87706-64365) और डिस्ट्रिक्ट एपिडेमियोलॉजिस्ट श्री पंकज सिंह (मोबाइल नं. 75870-38622) के नंबर भी जारी किए गए हैं। इसके साथ ही आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए गठित रैपिड रिस्पांस टीम को पुनः सक्रिय कर वाहनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए है। 
दवाइयों के प्रबंधन को लेकर सीएमएचओ ने निर्देश दिया है कि सभी स्वास्थ्य संस्थाओं में क्लोरीन टैबलेट, ब्लीचिंग पाउडर, ओ.आर.एस. पैकेट, एंटीबायोटिक्स, मेट्रानिडाजोल, एंटी एमेटिक्स, एंटी मलेरियल्स, आई.वी. फ्लूइड्स के साथ-साथ एंटी स्नेक वीनम (सांप काटने की दवा) और एंटी रेबीज सीरम की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। सभी स्वास्थ्य केंद्रों में ओ.आर.एस. कॉर्नर बनाए जाएंगे। जल जनित संक्रामक रोगों से बचाव के लिए सभी ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों के पेयजल स्रोतों की पहचान और मानचित्रीकरण कर नियमित जलशुद्धिकरण के निर्देश दिए गए हैं। कुओं में आम दिनों में सप्ताह में एक बार और प्रकोप की स्थिति में प्रतिदिन ब्लीचिंग पाउडर डाला जाएगा। इसके अतिरिक्त पीएचई विभाग के सहयोग से खराब पड़े हैंडपंपों की मरम्मत कराकर उनमें क्लोरीन की गोली या लिक्विड डाला जाएगा। शहरी क्षेत्रों में भी नगरीय निकायों के माध्यम से पेयजल की पाइप लाइनों का निरीक्षण कर टूट-फूट को तत्काल सुधारा जाएगा ताकि गंदे पानी से प्रदूषण न हो। बीमारी के फैलने के कारणों को खत्म करने के लिए व्यापक स्तर पर जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। आम जनता को जागरूक किया जाएगा कि वे सड़ी-गली सब्जियां, कटे हुए फल, बासी मांस या मछली का सेवन न करें। बाजार में ऐसी दूषित सामग्रियों की बिक्री पाए जाने पर उन्हें तत्काल नष्ट कराया जाएगा और दुकानदारों को खाद्य सामग्रियों को अनिवार्य रूप से ढककर बेचने की हिदायत दी गई है। 
  संक्रामक रोगों की त्वरित सूचना के लिए आईएचआईपी, आईडीएसपी मोबाइल एप्लीकेशन का उपयोग किया जाएगा, जिससे ग्रामीण स्तर पर बीमारी फैलते ही तुरंत इवेंट अलर्ट जारी हो सके। इसके लिए सभी आर.एच.ओ. और ए.एन.एम. को इलेक्ट्रॉनिक टैबलेट एवं मोबाइल दिए गए हैं। बीमारी के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए सिम्स के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में स्थापित स्टेट रेफरल लेबोरेटरी में सैंपल भेजकर जांच कराई जाएगी। जिला एवं विकासखंड स्तर पर संबंधित अधिकारियों को अपने क्षेत्रों के गांवों का सतत भ्रमण कर पैनी नजर रखने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। 
 

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