बस्तर में पल्स पोलियो अभियान के तहत आज 85 प्रतिशत बच्चों को दी गई पल्स पोलियो की खुराक
जगदलपुर में महापौर और कलेक्टर ने महारानी अस्पताल में, विधायक चित्रकोट ने गृहग्राम धरमाऊर में बच्चों को पिलाई पल्स पोलियो की दवाई
जगदलपुर । जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त तत्वावधान में बस्तर जिले को पोलियो मुक्त बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय पल्स पोलियो टीकाकरण अभियान का शानदार आगाज हो चुका है। इस महाअभियान के पहले ही दिन बस्तर के 85 प्रतिशत बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाई गई है। अभियान की सफलता और जन-जागरूकता को गति देने के लिए क्षेत्र के प्रमुख जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक प्रमुखों ने खुद कमान संभाली। इसी कड़ी में चित्रकोट विधायक विनायक गोयल ने अपने गृह ग्राम धरमाऊर में, कलेक्टर आकाश छिकारा और महापौर संजय पाण्डे ने महारानी अस्पताल में बच्चों को दवा पिलाई। साथ ही चित्रकोट और तोकापाल जनपद अध्यक्ष श्रीमती रामबती भण्डारी ने अपने गृह ग्राम दुगनपाल में बच्चों को अपने हाथों से 'दो बूंद जिंदगी कीÓ पिलाकर इस कार्य की शुरुआत की।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय बसाक ने बताया बस्तर जिले में इस बार 0 से 5 वर्ष की आयु वर्ग के कुल 1,20,804 बच्चों को जीवन रक्षक पोलियो की दवा पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस महाअभियान के तहत पहले दिन सभी निर्धारित बूथों पर दवा पिलाई गई, जिसके बाद आगामी 29 और 30 जून को स्वास्थ्य कर्मियों की टीमें घर-घर जाकर छूटे हुए बच्चों को कवर करेंगी ताकि कोई भी बच्चा सुरक्षा चक्र से बाहर न छूटे। उल्लेखनीय है कि बस्तर जिले का पोलियो उन्मूलन का इतिहास अत्यंत गौरवशाली रहा है, जहाँ वर्ष 1996 से अब तक पोलियों का एक भी मामला सामने नहीं आया है। इसके साथ ही, छत्तीसगढ़ राज्य में वर्ष 2002 से पोलियो का कोई भी पॉजिटिव प्रकरण दर्ज नहीं हुआ है और इस गौरवशाली निरंतरता को बनाए रखना ही इस अभियान का मुख्य ध्येय है।
प्रशासन ने शहरी और संवेदनशील क्षेत्रों के लिए विशेष रणनीति तैयार की है, जिसके तहत अकेले जगदलपुर शहरी क्षेत्र में 72 बूथ स्थापित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त बाजार, मेले, मड़ई, उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों, ईंट भ_ा, भवन निर्माण स्थलों, घुमंतू बस्तियों, बस स्टैंड तथा रेलवे स्टेशनों पर आने-जाने वाले बच्चों के लिए 20 मोबाइल और 24 ट्रांजिस्ट टीमों के साथ 1,932 टीकाकरण कर्मी और 97 सुपरवाइजर तैनात किए गए हैं, ताकि शंखनाद के इस पहले दिन की सफलता को अंतिम छोर तक पहुँचाया जा सके।













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