गणपति वंदना
स्वरचित - डॉ. दीक्षा चौबे
- दुर्ग ( वरिष्ठ साहित्यकार और शिक्षाविद)
विघ्न विनाशक गौरी नन्दन ।
गणपति को करते हम वंदन ।
एकदन्त लम्बोदर काया ।
मोदक लड्डू भोग लगाया ।
रिद्धि सिद्धि हैं साथ बिराजे ।
हास सदा ही मुख पर साजे ।
अष्टसिद्धि नवनिधि के दाता ।
निरख मुदित हो गौरी माता ।
घर में आये गौरीनंदन ।
पावन होता घर का आँगन ।
सुंदर पूजन थाल सजाओ ।
ढोल शंख घण्टा बजवाओ ।
तोरण बन्दनवार सजाओ ।
पुष्पों की माला पहनाओ ।
विघ्न हमारे सब हर लेना ।
घर सबका सुख से भर देना ।
कृपा दृष्टि प्रभु जग पर रखना ।
दया वृष्टि सब जन पर करना ।
धन्य भाग जो आप पधारे ।
दर्शन देकर भाग्य सँवारे ।


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