ईरान पर अमेरिकी हमले जारी, हूती विद्रोहियों का सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर हमले का दावा
दुबई. अमेरिकी सेना ने बुधवार को घोषणा की कि वह ईरान पर लगातार 12वीं रात भी हवाई हमले कर रही है। दोनों देश महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों पर नियंत्रण को लेकर आमने-सामने हैं। इस बीच, यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने बृहस्पतिवार तड़के दावा किया कि उन्होंने लाल सागर में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर हमला किया है। लाल सागर में हूतियों के इस हमले से उस युद्ध का दायरा और बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है, जिसने पहले ही वैश्विक अर्थव्यवस्था को झकझोर दिया है तथा ईंधन और अन्य वस्तुओं की कीमतों में दुनिया भर में तेज वृद्धि हुई है। खाड़ी क्षेत्र में दोनों पक्षों के बीच टकराव गहराने के साथ ही संघर्ष समाप्त कराने के लिए चल रहे कूटनीतिक प्रयासों में भी किसी प्रगति के संकेत नहीं मिले हैं। 'यूएस सेंट्रल कमांड' (सेंटकॉम) ने कहा कि इन हमलों का उद्देश्य ''क्षेत्रीय समुद्री मार्गों से गुजरने वाले असैन्य नाविकों और वाणिज्यिक जहाजों को खतरा पहुंचाने की ईरान की क्षमता को और कमजोर करना है।'' अमेरिका, होर्मुज जलडमरूमध्य पर फिर से नियंत्रण स्थापित करने और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को सामान्य करने का प्रयास कर रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को चेतावनी दी थी कि यदि ईरान जलडमरूमध्य में किसी जहाज पर हमला करेगा तो अमेरिका उसके जवाब में एक पुल या बिजली संयंत्र को नष्ट कर देगा। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, ''अब से, इस्लामी गणराज्य ईरान जब भी होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी जहाज पर मिसाइल, रॉकेट, ड्रोन या किसी अन्य हथियार से निशाना साधेगा, अमेरिका उसके एक पुल या बिजली संयंत्र पर बमबारी करेगा और उसे नष्ट कर देगा।'' वहीं, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि उनका देश ''जैसे को तैसा'' की रक्षा नीति अपनाएगा। उन्होंने बुधवार को 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''ईरान या उसके बुनियादी ढांचे के खिलाफ किसी भी प्रकार की आक्रामक कार्रवाई का शक्तिशाली और निर्णायक जवाब दिया जाएगा।'' अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सामान्यतः ऐसे बुनियादी ढांचे पर हमला प्रतिबंधित है, जब तक कि उनका उपयोग सैन्य उद्देश्यों के लिए न किया जा रहा हो। हूतियों ने अपनी समाचार एजेंसी सबा के माध्यम से जारी एक बयान में दावा किया कि उन्होंने लाल सागर में 'एंसेलिया' और 'लायला' नामक दो तेल टैंकरों को निशाना बनाया जिससे दोनों जहाजों में आग लग गई। यदि इस दावे की पुष्टि होती है, तो यह इस सप्ताह की शुरुआत में बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से सऊदी अरब से जुड़े जहाजों की आवाजाही पर नाकेबंदी की घोषणा के बाद किसी पोत पर हूतियों का पहला हमला होगा। हूतियों ने यह नाकेबंदी यमन पर सऊदी अरब की नाकेबंदी और विद्रोहियों के कब्जे वाली राजधानी सना के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हाल में हुए हमले के विरोध में घोषित की थी। अरब प्रायद्वीप के दक्षिणी सिरे पर स्थित बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ने वाला वैश्विक समुद्री व्यापार का एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है। दुनिया के कुल व्यापार का लगभग 12 प्रतिशत इसी संकरे समुद्री मार्ग से होकर मिस्र की स्वेज नहर के रास्ते यूरोप और एशिया के बीच संचालित होता है। हूतियों के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर कहा कि सऊदी अरब से जुड़े जहाजों की नाकेबंदी तब तक जारी रहेगी, जब तक हूतियों के खिलाफ कई वर्षों से लागू सऊदी नाकेबंदी नहीं हटा ली जाती। अधिकारी ने हमले के बारे में कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं दी। सऊदी अरब के सरकारी मीडिया ने सामान्य परिवहन प्राधिकरण के एक अज्ञात अधिकारी के हवाले से बताया कि लाल सागर में रात के समय यात्रा के दौरान एंसेलिया पर हुए हमले के बाद उसमें आग लग गई। 'सऊदी प्रेस एजेंसी' ने बताया कि हमले से जहाज के अगले हिस्से में आग लगी, हालांकि इसमें कोई हताहत नहीं हुआ। एजेंसी ने लायला का कोई उल्लेख नहीं किया। यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर (यूकेएमटीओ) ने कहा कि उसे सूचना मिली है कि लाल सागर में सऊदी अरब के अल-शुकैक से लगभग 130 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में एक टैंकर ''अज्ञात प्रक्षेपास्त्र'' की चपेट में आया। यूकेएमटीओ के अनुसार, इस घटना में भी किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।










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