अंतरिक्ष मलबे पर चौबीसों घंटे नजर रखेगा चीन का नया उपग्रह नेटवर्क, तैनाती शुरू
बीजिंग। चीन ने अंतरिक्ष मलबे का पता लगाने और चौबीसों घंटे उसकी निगरानी के लिए अपने पहले व्यावसायिक उपग्रह नेटवर्क की तैनाती शुरू कर दी है। 120 उपग्रहों वाले 'गांदे कॉन्स्टेलेशन' का पहला उपग्रह शुक्रवार को उत्तर-पश्चिम चीन से लिजियान-1 वाणिज्यिक रॉकेट के जरिए प्रक्षेपित किया गया। इस उपग्रह में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित ऑनबोर्ड कंप्यूटर लगाया गया है, जिससे यह धरती से न्यूनतम निर्देश के साथ निगरानी और खोजबीन कर सकेगा।
अंतरिक्ष मलबे से अभिप्राय पृथ्वी की कक्षा में चक्कर लगा रहे उन उपग्रहों से है, जिनका अब कोई उपयोग नहीं रह गया है। रॉकेट प्रक्षेपण, ग्रहों के मिशन और उपग्रहों की बढ़ती संख्या के साथ अंतरिक्ष मलबे की मात्रा भी लगातार बढ़ रही है। यह प्रक्षेपण ऐसे समय हुआ है, जब अमेरिका की 'स्पेसएक्स' कंपनी अपनी 'स्टारलिंक' प्रणाली और अन्य अमेरिकी अंतरिक्ष निगरानी कार्यक्रमों का विस्तार कर रही है। दूसरी ओर, चीन 2035 तक वैश्विक अंतरिक्ष महाशक्ति बनने के लक्ष्य के साथ अपनी क्षमताओं को तेजी से बढ़ा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह उपग्रह नेटवर्क उपग्रहों की अंतरिक्ष मलबे से टक्कर को रोकने, चीन के बढ़ते वाणिज्यिक उपग्रह बेड़े की सुरक्षा, अंतरिक्ष संबंधी स्वतंत्र निगरानी क्षमता को मजबूत करने और व्यावसायिक सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद करेगा। साथ ही, अंतरिक्ष वातावरण में चीन की नागरिक और सैन्य क्षमताओं को भी मजबूती मिलेगी। 'गांदे कॉन्स्टेलेशन' के मुख्य अभियंता फान वेई ने कहा कि यह मिशन चीन की व्यावसायिक अंतरिक्ष मलबा निगरानी क्षमता की कमी को दूर करेगा और अंतरिक्ष यातायात प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस परियोजना को तीन चरणों में पूरा किया जाएगा और 2030 से पहले सभी 120 उपग्रह तैनात करने का लक्ष्य रखा गया है।
पहले चरण, एलएक्स630 के तहत 14 उपग्रह स्थापित किए जाएंगे, जो पृथ्वी की निचली कक्षा (लो-अर्थ ऑर्बिट) में मौजूद वस्तुओं की व्यापक निगरानी और सूची तैयार करेंगे। इस प्रणाली को विकसित करने वालों के अनुसार, एआई आधारित ऑनबोर्ड कंप्यूटर उपग्रहों को नियमित निगरानी, आपातकालीन प्रतिक्रिया और तेजी से खोज-बीन जैसे कार्य न्यूनतम निर्देश के साथ करने में सक्षम बनाएगा। इनमें कक्षा बदलने की क्षमता भी होगी, जिससे वे नजदीक जाकर निरीक्षण और अन्य उन्नत अंतरिक्ष अभियानों को पूरा कर सकेंगे। विश्लेषकों का कहना है कि यह परियोजना केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि चीन की अंतरिक्ष रणनीति का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। पिछले साल, चीन के शेनझोउ-20 अंतरिक्ष यान को तियानगोंग अंतरिक्ष स्टेशन पर लंबे समय तक रुकना पड़ा था, क्योंकि मिशन के दौरान इसकी वापसी 'कैप्सूल' की खिड़की से अंतरिक्ष का मलबा टकरा गया था। शिन्हुआ के मुताबिक, एक सेंटीमीटर से बड़े अंतरिक्ष मलबे की संख्या 10 लाख से अधिक हो चुकी है। ये टुकड़े लगभग 7.9 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार वाले हैं और टकराने पर अत्यधिक गतिज ऊर्जा पैदा करते हैं, जिससे अंतरिक्ष यान को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। वैज्ञानिक एक ओर अंतरिक्ष यान की सुरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने पर काम कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अंतरिक्ष मलबे की निगरानी को भी तेज कर रहे हैं। यह कॉन्स्टेलेशन इसी दिशा में चीन की नवीनतम पहल माना जा रहा है।

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