न्यायपालिका संविधान की संरक्षक है और विधायिका नागरिकों की आंकाक्षाओं का प्रतिनिधित्व करती है- नरेंद्र मोदी
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि सरकार न्यायिक प्रणाली में प्रौद्योगिकी की संभावनाओं को डिजिटल इंडिया मिशन का एक अनिवार्य हिस्सा मानती है। उन्होंने कहा कि देश में ई-कोर्ट परियोजना को मिशन के रूप में लागू किया जा रहा है।
नई दिल्ली में आयोजित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के संयुक्त सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि न्यायपालिका संविधान की संरक्षक है और विधायिका नागरिकों की आंकाक्षाओं का प्रतिनिधित्व करती है। उन्होंने कहा कि इन दो संवैधानिक संस्थाओं का संतुलन देश में प्रभावी और समयबद्ध न्यायिक व्यवस्था का रोड़मैप तैयार करेगा। भारत के प्रधान न्यायाधीश एन वी रमणा, विधि और न्याय मंत्री किरेन रिजीजू, कई राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री सम्मेलन में मौजूद थे।
यह सम्मेलन सहज और सुविधाजनक तरीके से न्याय उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित करने और न्याय प्रणाली के समक्ष उत्पन्न चुनौतियों पर काबू पाने के आवश्यक उपायों पर विचार-विमर्श का एक अवसर है। इसके पहले यह सम्मेलन 2016 में आयोजित किया गया था। सरकार ने ई-कोर्ट मिशन मोड प्रोजेक्ट के तहत व्यवस्था को बेहतर बनाने और न्यायिक प्रक्रियाओं को डिजिटल तकनीक से जोड़ने के कई उपाय किए हैं।


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