प्रधानमंत्री ने सोमनाथ में 'शौर्य यात्रा' में भाग लिया, परेड में 108 घुड़सवारों की टुकड़ी शामिल हुई
सोमनाथ (गुजरात). सोमनाथ मंदिर के लिये रविवार को निकाली गई शौर्य यात्रा में डमरू बजाते हुए पुजारियों का एक समूह और गुजरात के विभिन्न हिस्सों से लाए गए 108 अश्व शामिल थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक खुली छत वाली गाड़ी से इस भव्य यात्रा का अवलोकन किया। यात्रा शंख सर्कल से शुरू हुई और प्रधानमंत्री ने सोमनाथ मंदिर परिसर के सामने स्थित वीर हमीरजी गोहिल सर्कल की ओर लगभग एक किलोमीटर का सफर तय किया। डमरू बजाते हुए पुजारियों का एक समूह शौर्य यात्रा का हिस्सा था और प्रधानमंत्री के वाहन के आगे क्रम से चल रहा था। मोदी के हाथ में एक ढोल था, जिसे उन्होंने यात्रा की शुरुआत में थोड़ी देर बजाया और फिर सुरक्षाकर्मियों को सौंप दिया। यात्रा के आगे बढ़ने पर दोनों ओर सड़कों पर जमा भीड़ ने जयकारे लगाए और कई लोगों ने फूलों की पंखुड़ियां बरसाईं, जबकि कलाकारों ने यात्रा मार्ग पर नियमित अंतराल पर बने विभिन्न मंचों पर भारत के विभिन्न नृत्य रूपों का प्रदर्शन किया। यात्रा में 108 घोड़ों का दल सबसे अलग दिख रहा था, जिनके सवारों ने सफेद कमीज के साथ खाकी पतलून और केसरिया रंग की टोपी पहन रखी थी। पाटन जिले में पुलिस कांस्टेबल भरत कुमार जटाभाई ने ‘पीटीआई-भाषा' को बताया, "ये घोड़े और इनके सवार गुजरात के विभिन्न क्षेत्रों से लाए गए हैं। हम गुजरात पुलिस से हैं और हमने पिछले दस दिनों में इसका अभ्यास किया है। इस शौर्य यात्रा का हिस्सा बनकर मुझे गर्व महसूस हो रहा है।" उन्होंने कहा, "पाटन जिले से लगभग दस घोड़े लाए गए हैं।"
प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व की शौर्य यात्रा में शामिल होकर अत्यंत गौरवान्वित हूं। इस अवसर पर मंदिर की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति देने वाली मां भारती की अनगिनत वीर संतानों को श्रद्धांजलि अर्पित करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उनका अदम्य साहस और पराक्रम देशवासियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा।” उन्होंने ऐतिहासिक मंदिर में प्रार्थना की और फिर राजकोट जाने से पहले मंदिर के पास एक मैदान में आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान सभा को संबोधित किया। शौर्य यात्रा के मार्ग पर विभिन्न नृत्य मंडलियों ने भरतनाट्यम, कथक, कच्छी, गिद्धा, मणिपुरी नृत्य जैसी नृत्य प्रस्तुतियों का प्रदर्शन किया। कृपा ढाल उन कलाकारों में शामिल थीं, जिन्होंने कच्छी नृत्य का प्रतिनिधित्व किया, जबकि उनकी बेटी वाणी ढाल भरतनाट्यम टीम का हिस्सा थीं। उन्होंने बताया, "प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आयोजित शौर्य यात्रा में प्रस्तुति देना अत्यंत आनंदमय अनुभव था। विभिन्न नृत्य शैलियों ने इस आयोजन में भारत के रंग बिखेर दिए।"

.jpg)







.jpg)
Leave A Comment