पैंथर्स पार्टी के संस्थापक भीम सिंह का जम्मू में निधन
जम्मू. जम्मू कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी के संस्थापक और पूर्व विधायक प्रोफेसर भीम सिंह का मंगलवार को जम्मू में निधन हो गया। 81 वर्षीय भीम सिंह करीब एक महीने से बीमार थे। सिंह उधमपुर जिले के भुगतेरियां गांव के निवासी थे। उनके परिवार में पत्नी जय माला और लंदन में रह रहा बेटा अंकित लव है। सिंह ने यहां जीएमसी अस्पताल में अंतिम सांस ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रमुखों ने सिंह के निधन पर शोक व्यक्त किया, जो जम्मू क्षेत्र में एक प्रमुख राजनीतिक चेहरा बनकर उभरे। प्रोफेसर भीम सिंह के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक जताया। अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट किया, ‘‘प्रोफेसर भीम सिंह जी को एक जमीनी नेता के रूप में याद किया जाएगा, जिन्होंने जम्मू कश्मीर के कल्याण के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। वह बहुत पढ़े-लिखे और विद्वान थे। मैं उनके साथ मुलाकात के क्षण को हमेशा याद रखूंगा। उनके निधन से दुखी हूं। उनके परिवार और समर्थकों के प्रति संवेदना। ओम शांति।'' उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि सिंह के निधन के बारे में जानकर उन्हें गहरा दुख हुआ है। उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘दुख की इस घड़ी में शोक संतप्त परिवार और दोस्तों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदना। ओम शांति।'' वहीं, पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा ने भी प्रोफेसर भीम सिंह के निधन पर शोक जताया। उन्होंने कहा, ‘‘जेके पैंथर्स पार्टी के संस्थापक प्रोफेसर भीम सिंह के निधन के बारे में जानकर दुख हुआ। उनकी आत्मा को मेरी हार्दिक श्रद्धांजलि। उन्हें ऐसे जमीनी नेता के तौर पर याद किया जाएगा जिन्होंने जम्मू कश्मीर के कल्याण के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। उनके परिजनों एवं समर्थकों के प्रति भी मेरी हार्दिक संवेदनाए।'' सिंह एक मानवाधिकार कार्यकर्ता, लेखक और उच्चतम न्यायालय के वकील भी थे, जिन्हें उच्चतम न्यायालय बार एसोसिएशन के वरिष्ठ कार्यकारी सदस्य के रूप में निर्विरोध चुना गया था। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि पैंथर्स पार्टी के संस्थापक-संरक्षक के निधन से उन्हें गहरा दुख हुआ है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘‘वह शायद स्वतंत्रता के बाद जम्मू कश्मीर के पहले प्रमुख मुखर, तेजतर्रार राजनीतिक कार्यकर्ता थे और उन्होंने शुरुआती वर्षों से ही एक छात्र नेता और फिर कांग्रेस पार्टी के सदस्य के रूप में प्रभाव डालना शुरू कर दिया था। मेरी सम्मानजनक संवेदना।'' मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता एम.वाई. तारिगामी ने कहा, ‘‘प्रो. सिंह धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के लिए प्रतिबद्ध नेता थे, जिन्होंने राज्य विधायिका के अंदर और बाहर समाज के दलित और हाशिए के वर्गों के अधिकारों के लिए अथक संघर्ष किया। ऐसे समय में जब राजनीतिक क्षेत्र में ध्रुवीकरण और विभाजन का बोलबाला है, वह सांप्रदायिक सद्भाव के लिए खड़े रहे और सांप्रदायिक आधार पर लोगों और क्षेत्रों को विभाजित करने पर तुली हुई ताकतों के खिलाफ जी जान से लड़ाई लड़ी।'' पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के प्रमुख सज्जाद लोन ने सिंह को श्रद्धांजलि दी और उन्हें ‘‘शाश्वत'' कहा। लोन ने कहा, ‘‘कई हिस्सों से जुड़ा एक शख्स। शाश्वत, निस्वार्थ और एक योद्धा। वह मेरे पिता के सहयोगी और दोस्त थे। फलस्तीन, इराक तक - भीम सिंह जी के सभी दोस्त थे। एक जन्मजात साहसी। उनकी आत्मा को शांति मिले।'' अक्टूबर 1982 में अपनी पैंथर्स पार्टी शुरू करने से पहले सिंह ने कांग्रेस की जम्मू कश्मीर युवा इकाई के अध्यक्ष से लेकर राष्ट्रीय महासचिव तक पार्टी में कई प्रमुख पदों पर कार्य किया। उन्होंने लंदन विश्वविद्यालय में कानून का अध्ययन किया। वह 1971 में यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन यूनियन के सचिव चुने जाने वाले पहले भारतीय थे। सिंह, जिन्होंने 1988 में उधमपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था, कांग्रेस उम्मीदवार से हार गए थे। चुनाव में धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए वह भारत निर्वाचन आयोग के खिलाफ भूख हड़ताल पर बैठ गए। निर्वाचन आयोग के आदेश के खिलाफ उनकी समीक्षा याचिका के जवाब में जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय ने चार साल बाद उनके पक्ष में फैसला सुनाया, लेकिन तब तक, संसद का सत्र पहले ही भंग हो चुका था। उच्चतम न्यायालय ने 1985 में जम्मू कश्मीर विधानसभा के सदस्य के रूप में उनके निलंबन के बाद तत्कालीन राज्य सरकार को सिंह को उनके अवैध कारावास के लिए 50,000 रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया था। 2002 के विधानसभा चुनावों में उनकी जम्मू कश्मीर पैंथर्स पार्टी ने चार सीटें जीतीं और मुफ्ती मोहम्मद सईद के नेतृत्व वाली सरकार में गठबंधन सहयोगी बन गईं। सिंह ने पाकिस्तान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के 200 से अधिक लोगों को कानूनी सहायता भी प्रदान की थी, जो देश भर की विभिन्न जेलों में दशकों से बंद थे। उनकी मदद से इनमें से अधिकांश कैदी रिहा हुए। मोटरसाइकिल पर दुनिया भर के 130 से अधिक देशों की यात्रा करने वाले दिग्गज नेता फलस्तीनी नेता यासर अराफात, क्यूबा के क्रांतिकारी फिदेल कास्त्रो, इराकी राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन और लीबिया के तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी जैसे दिग्गजों के दोस्त थे।









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