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राम मंदिर के लिए अयोध्या भेजा जा रही है चन्द्रपुर से सागौन की लकड़ी - मंत्री

चन्द्रपुर . महाराष्ट्र के चन्द्रपुर जिले से पूजा और सैकड़ों कलाकारों की प्रस्तुति के बाद उच्च गुणवत्ता वाली सागौन की लड़की की एक खेप ने अयोध्या के राम मंदिर के लिए अपनी यात्रा शुरू की है। वन एवं सांस्कृतिक मामलों तथा मत्स्य पालन राज्य मंत्री सुधीर मुंगंटीवार ने बताया कि रामायण में वर्णित दंडकारण्य और वर्तमान चन्द्रपुर से बेहद उच्च गुणवत्ता वाली सागौन की लकड़ी भेजी जा रही है। मंत्री ने बताया कि करीब 1,855 क्यूबिक फुट लकड़ी का यह खेप अयोध्या रवाना हुआ है जहां इसका उपयोग मंदिर का मुख्य द्वार, गर्भगृह का द्वार और मंदिर के अन्य  द्वारों के निर्माण में किया जाएगा। लकड़ी की यह खेप 1,946 कलाकारों की प्रस्तुति के बाद पूरे धूमधाम से रवाना हुई। कई फिल्मी हस्तियां भी इस दौरान मौके पर उपस्थित थीं। अधिकारियों ने बताया कि सर्वोत्तम गुणवत्ता और पौराणिक महत्व वाली सामग्री यहां से उत्तर प्रदेश के अयोध्या में बन रहे मंदिर में भेजी जा रही है। मंत्री ने बताया कि भगवान राम की प्रतिमा बनाने के लिए नेपाल से दो विशाल शालिग्राम पत्थर लाए गए हैं।
मुंगंटीवार ने बताया कि अयोध्या मंदिर के न्यासियों ने देहरादून में स्थित वन अनुसंधान संस्थान से संपर्क किया था और उन्हें बताया गया कि सागौन की लकड़ी सबसे अच्छी चन्द्रपुर में मिलती है। उन्होंने कहा, ‘‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय के अनुरोध पर हमने उच्च गुणवत्ता वाली सागौन की लकड़ी भेजने का फैसला लिया है। यह हमारे लिए बहुत सम्मान की बात है कि हम भगवान राम के मंदिर के लिए सागौन की लकड़ी अयोध्या भेज रहे हैं।'' मुंगंटीवार ने कहा कि मंत्री ने कहा कि भगवान राम की दादी इंदुमति विदर्भ क्षेत्र, वर्तमान महाराष्ट्र, की थीं। उन्होंने कहा, ‘‘यह ऐतिहासिक क्षण है कि दादी की जन्मधरती से पोते का मंदिर बनाने के लिए सागौन की लकड़ी भेजी जा रही है।'' श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के एक पदाधिकारी ने पिछले सप्ताह बताया था कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का कार्य तय समय से महीनों पहले पूरा होने की संभावना है। राम जन्मभूमि में न्यास कार्यालय के प्रभारी प्रकाश गुप्ता ने बताया, ‘‘हमें विश्वास है कि मंदिर का निर्माण कार्य तय समय से तीन महीने पहले पूरा हो जाएगा। इसलिए हमने उसकी समय सीमा दिसंबर 2023 से घटाकर सितंबर 2023 कर दी है। अब मंदिर को उसका अंतिम रूप सितंबर में मिल जाएगा।'

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