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अर्थव्यवस्था को कांटों से भरी झाड़ी में फंसी साड़ी की तरह सही सलामत निकाला : वित्त मंत्री

नयी दिल्ली.  वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कहा कि सरकार ने पिछले दस साल में देश की अर्थव्यवस्था को कांटों में फंसी साड़ी की तरह सही-सलामत निकालकर भविष्योन्मुखी सुधारों की राह पर चलाने का प्रयास किया है। वित्त मंत्री सीतारमण ने राज्यसभा में श्वेत पत्र पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि निरंतर प्रयासों और प्रभावी नीतिगत योजनाओं ने भारतीय अर्थव्यवस्था को पटरी पर ला दिया है तथा इसके परिणामस्वरूप यह दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हो गई है। उन्होंने दावा किया प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में भारत विश्‍व की तीन सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शुमार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी व्यक्तिगत रूप से जमीनी स्तर पर विकास परियोजनाओं की प्रगति की निगरानी करते हैं। संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के दौरान आर्थिक कुप्रबंधन की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले शासन के दौरान 18 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएं रुकी हुई थीं। उन्होंने कहा, ‘‘मोदी सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में 17 लाख करोड़ रुपये से अधिक की 348 लंबित परियोजनाओं को मंजूरी दी।'' वित्त मंत्री ने लोगों तक लाभ नहीं पहुंचाने के लिए संप्रग सरकार की आलोचना की और यह आरोप भी लगाया कि उसने शासनकाल के दौरान सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय जैसी केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग किया था। महंगाई के मोर्चे पर वित्त मंत्री ने बताया कि अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान मुद्रास्फीति की दर 4 प्रतिशत से नीचे थी जबकि संप्रग शासन के दौरान मुद्रास्फीति की औसत दर 8.2 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। उन्होंने कहा कि इस सरकार को जो अर्थव्यवस्था विरासत में मिली थी, उसके बारे में विपक्ष द्वारा बड़े-बड़े दावे किए गए। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष के लोग भी कहते हैं कि अटल बिहार वाजपेयी सरकार से जो विरासत संप्रग सरकार को मिली, उसी कारण उसके पहले पांच वर्ष में अर्थव्यवस्था बहुत अच्छी रही। सीतारमण ने कहा कि संप्रग सरकार ने राजनीतिक लाभ के लिए गलत राजकोषीय नीतियां बनाई तथा सब्सिडी और फिजूलखर्ची की गई। उन्होंने बुनियादी ढांचे की जरूरतों को दरकिनार कर पूर्वोत्तर राज्यों की आकांक्षाओं की अनदेखी करने के लिए भी पूर्ववर्ती सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि पहले ही इस बात को स्पष्ट किया जा चुका है कि यदि यह श्वेत पत्र पहले लाया जाता तो लोगों एवं निवेशकों का अपने देश, अर्थव्यवस्था और संस्थानों पर विश्वास डोलने लगता। उन्होंने कहा कि प्रश्न किया जाता है कि यह श्वेत पत्र अभी क्यों लाया गया? उन्होंने कहा कि एक निर्वाचित सरकार के नाते उनका यह दायित्व है कि वह संसद के दोनों सदनों के माध्यम से जनता को यह जानकारी दें कि अर्थव्यवस्था की स्थिति दस वर्ष पहले क्या थी और आज वह किस स्तर पर पहुंच गयी है। सीतारमण ने कहा, ‘‘हम दो पटरियों पर चल रहे थे। एक थी- अर्थव्यवस्था को दुरूस्त करना, पूर्व के गलत कामों को सही करना, अड़चनों को दूर करना और इनके साथ ही भविष्योन्मुखी सुधारों की ओर भी ध्यान देना...। '' उन्होंने कहा कि 1991 में आर्थिक सुधारों की प्रक्रिया शुरू हुई थी लेकिन उसे 2004 के बाद पूरा नहीं किया गया, आगे नहीं बढ़ाया गया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने सुधारों विशेषकर भविष्योन्मुखी सुधारों पर जोर दिया। वित्त मंत्री ने एक तमिल कहावत का उदाहरण देते हुए कहा कि 2014 में जो अर्थव्यवस्था उनकी सरकार को मिली थी, उसकी तुलना कांटेदार झाड़ी में फंसी साड़ी से की जा सकती है जिसे कांटों से सही सलामत निकालने की चुनौती रहती है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अर्थव्यवस्था को उस कांटेदार झाड़ी से निकाला। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था की यह ‘हालात' थी कि यह विश्व की पांच कमजोर अर्थव्यवस्था में एक थी और आज सरकार के प्रयासों के कारण यह विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गयी है। सीतारमण ने कहा कि आज अर्थव्यवस्था की जो स्थिति है, उसके आधार पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विश्वास के साथ यह कह रहे हैं कि उनके तीसरे कार्यकाल में भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश होगा।

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