ब्रेकिंग न्यूज़

कतर ने आठ पूर्व भारतीय नौसैनिक रिहा किए; सात स्वदेश लौटे

नयी दिल्ली. कतर ने जेल में बंद भारतीय नौसेना के आठ पूर्व कर्मियों को रिहा कर दिया है और उनमें से सात सोमवार को स्वदेश लौट आए। इसे भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है जो कतर की अदालत द्वारा उन्हें मौत की सजा सुनाए जाने के लगभग साढ़े तीन महीने बाद मिली है। इन लोगों की मौत की सजा को बाद में जेल की सजा में बदल दिया गया था।
विदेश सचिव विनय क्वात्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खुद मामले में पूरे घटनाक्रम की लगातार निगरानी की और भारतीयों की वापसी सुनिश्चित करने के लिए किसी भी पहल से कभी पीछे नहीं हटे। भारतीय नागरिक रात लगभग 2:35 बजे एक निजी एयरलाइन के विमान से दिल्ली हवाई अड्डे पहुंचे।
क्वात्रा ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मोदी संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की अपनी दो दिवसीय यात्रा के संपन्न होने के बाद बुधवार को कतर की राजधानी दोहा की यात्रा करेंगे, लेकिन संकेत दिया कि इस यात्रा की योजना काफी पहले बनाई गई थी। विदेश सचिव ने विवरण दिए बिना कहा कि भारत आठवें भारतीय की शीघ्र वापसी सुनिश्चित करने के लिए कतर सरकार के साथ काम करना जारी रखेगा। विदेश मंत्रालय ने सुबह एक बयान में कहा कि भारतीयों की रिहाई और उनकी स्वदेश वापसी को संभव बनाने के कतर के अमीर शेख तमीम बिन हम्माद अल-थानी के फैसले की भारत सराहना करता है। ऐसा माना जाता है कि सभी आठ भारतीयों को रिहा करने का आदेश अमीर ने दिया।
         विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘भारत सरकार कतर में हिरासत में लिए गए दहरा ग्लोबल कंपनी के लिए काम करने वाले आठ भारतीय नागरिकों की रिहाई का स्वागत करती है।'' मंत्रालय ने एक संक्षिप्त बयान में कहा, ‘‘रिहा किए गए आठ भारतीयों में से सात भारत लौट आए हैं। हम इन नागरिकों की रिहाई और स्वदेश वापसी को संभव बनाने के लिए कतर के अमीर के फैसले की सराहना करते हैं।'' इन आठ लोगों में कैप्टन (सेवानिवृत्त) नवतेज गिल और सौरभ वशिष्ठ, कमांडर (सेवानिवृत्त) पूर्णेंदु तिवारी, अमित नागपाल, एसके गुप्ता, बीके वर्मा और सुगुनाकर पकाला तथा नाविक (सेवानिवृत्त) रागेश शामिल हैं। घटनाक्रम से परिचित लोगों ने बताया कि कमांडर तिवारी कुछ कागजी कार्रवाई लंबित होने के कारण वापस नहीं आ सके। वापस लौटे एक व्यक्ति ने कहा, "हम सरकार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आभारी हैं क्योंकि उनके हस्तक्षेप के बिना यह संभव नहीं होता।" नौसेना के पूर्व कर्मियों को 26 अक्टूबर को कतर की एक अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी।
खाड़ी देश की अपीलीय अदालत ने 28 दिसंबर को मृत्युदंड को कम कर दिया था और पूर्व नौसैन्य कर्मियों को तीन साल से लेकर 25 साल तक अलग-अलग अवधि के लिए जेल की सजा सुनाई थी। अपीलीय अदालत ने जेल की सजा के खिलाफ अपील करने के लिए उन्हें 60 दिन का समय भी दिया था।
           पिछले साल दिसंबर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दुबई में ‘कॉप 28' शिखर सम्मेलन के मौके पर कतर के अमीर शेख तमीम बिन हम्माद अल-थानी से मुलाकात की थी और कतर में भारतीय समुदाय के कल्याण पर चर्चा की थी। ऐसा माना जाता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने भारतीय नागरिकों की रिहाई सुनिश्चित करने में कतर के अधिकारियों के साथ बातचीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। निजी कंपनी अल दहरा के साथ काम करने वाले भारतीय नागरिकों को जासूसी के एक कथित मामले में अगस्त 2022 में गिरफ्तार किया गया था। पिछले साल 25 मार्च को भारतीय नौसेना के आठ कर्मियों के खिलाफ आरोप तय किए गए थे और उन पर कतर के कानून के तहत मुकदमा चलाया गया था। गत वर्ष मई में अल-दहरा ग्लोबल ने दोहा में अपना परिचालन बंद कर दिया और वहां काम करने वाले सभी लोग (मुख्य रूप से भारतीय) देश लौट आए। क्वात्रा ने सोमवार को कहा, "14 फरवरी को अपनी यूएई यात्रा पूरी करने के बाद, प्रधानमंत्री 14 फरवरी को दोपहर बाद दोहा, कतर की यात्रा करेंगे। यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री कतर के अमीर शेख तमीम बिन हम्माद और अन्य उच्च पदस्थ व्यक्तियों के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।" विदेश सचिव ने कहा कि भारतीयों की वापसी के लिए भारत कतर का आभारी है।
क्वात्रा ने कहा, "हम उनकी वापसी से संतुष्ट हैं। हम उन्हें रिहा करने के कतर सरकार और अमीर के फैसले की सराहना करते हैं।" उन्होंने कहा, "हम उनमें से सात भारतीय नागरिकों को वापस पाकर खुश हैं। आठवें भारतीय नागरिक को भी रिहा कर दिया गया है और हम कतर सरकार के साथ यह देखने के लिए काम करना जारी रखेंगे कि उसकी भारत वापसी कितनी जल्दी संभव होती है।" क्वात्रा ने कहा, "प्रधानमंत्री ने स्वयं व्यक्तिगत रूप से इस मामले पर लगातार नजर रखी है और वह भारतीय नागरिकों की घर वापसी सुनिश्चित करने वाली किसी भी पहल से कभी पीछे नहीं हटे।" यह पूछे जाने पर कि क्या कतर के अमीर ने भारतीयों को राज-क्षमा प्रदान की है, विदेश सचिव ने टिप्पणी करने से इनकार किया। उन्होंने कहा, ‘‘हम अलग-अलग शब्दावली आदि के बारे में बात कर सकते हैं.. चाहे यह रिहाई हो या क्षमा.. लेकिन मुझे लगता है कि हमें तथ्यों को देखना चाहिए कि वे क्या हैं। अल दहरा मामले में आठ में से सात भारतीय नागरिक अपने घर भारत वापस आ गए हैं।'' भारतीय नौसेना के पूर्व प्रवक्ता कैप्टन डीके शर्मा (सेवानिवृत्त) ने चुपचाप गहन कार्य करने के लिए विदेश मंत्रालय की सराहना की, जिसे प्रधानमंत्री मोदी का समर्थन प्राप्त था। उन्होंने कहा, ''यह देश के नेतृत्व द्वारा समर्थित कूटनीति की एक बड़ी उपलब्धि है।''
मामले से परिचित लोगों ने कहा कि कतर में विमान में सवार होने के बाद संबंधित भारतीयों के परिवारों को सूचित कर दिया गया था। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भारतीय नागरिकों की रिहाई को "बड़ी कूटनीतिक जीत" बताया। इसकी प्रवक्ता शाज़िया इल्मी ने कहा, "यह भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत है। इससे पता चलता है कि भारत ने कितनी अच्छी तरह से काम किया कि नौसेना के हमारे पूर्व कर्मी वापस आ गए हैं।" केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि यह खुशी का क्षण है जो किसी भी कीमत पर अपने नागरिकों की रक्षा करने की मोदी सरकार की गंभीरता एवं क्षमता पर विश्वास को और मजबूत करता है। उन्होंने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का मतलब दुनिया भर में भारत के लोगों के जीवन और स्वतंत्रता की गारंटी है।" कांग्रेस ने भी कतर से भारत के पूर्व नौसैनिकों की रिहाई का स्वागत किया।
         पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स' पर पोस्ट किया, ‘‘सभी देशवासियों के साथ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस भी खुद को इस खुशी में शामिल करती है कि कतर में अदालत से मौत की सजा पाने वाले भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी रिहा होकर घर वापस आ गए हैं।'' उन्होंने कहा, ‘‘हम उन्हें और उनके परिजनों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हैं।'' कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा, ‘‘यह एक बड़ी राहत है और सभी भारतीय नागरिकों के लिए एक हर्ष का विषय है कि कतर में मौत की सजा का सामना कर रहे हमारे देशवासी रिहा हो गए हैं और घर लौट आए हैं। उनकी रिहाई के लिए पर्दे के पीछे काम करने वाले सभी लोगों को बधाई।'' कमांडर तिवारी की बहन डॉ. मीतू भार्गव ने कहा कि उनका भाई अभी तक घर नहीं आया है लेकिन उसे रिहा कर दिया गया है और परिवार बहुत खुश है। उन्होंने प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री एस जयशंकर और सरकार के साथ-साथ कतर के अमीर को धन्यवाद देते हुए ग्वालियर में पीटीआई वीडियो से कहा, ‘‘अगर मेरा भाई आता तो हमारी खुशी पूरी हो जाती।'' इन सभी पूर्व अधिकारियों का भारतीय नौसेना में 20 वर्षों तक का "बेदाग कार्यकाल" रहा और उन्होंने बल में प्रशिक्षकों सहित महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया था।

Related Post

Leave A Comment

Don’t worry ! Your email address will not be published. Required fields are marked (*).

Chhattisgarh Aaj

Chhattisgarh Aaj News

Today News

Today News Hindi

Latest News India

Today Breaking News Headlines News
the news in hindi
Latest News, Breaking News Today
breaking news in india today live, latest news today, india news, breaking news in india today in english