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स्वच्छ वायु कार्यक्रम के दायरे में लाये गए पांच में से एक शहर में प्रदूषण के आंकड़े का अभाव:रिपोर्ट


नयी दिल्ली.
  भारत के राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के दायरे में लाये गए प्रत्येक पांच में से एक शहर में वायु गुणवत्ता की निरंतर निगरानी करने वाला केंद्र (सीएएक्यूएमएस) नहीं है। एक नये अध्ययन में यह जानकारी दी गई है। स्वतंत्र शोध संगठन ‘सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर' (सीआरईए) ने भी कहा कि दिल्ली जनवरी में देश का सर्वाधिक प्रदूषित शहर था, जहां पीएम2.5 (हवा में 2.5 माइक्रॉन से कम व्यास के कण)की औसत मासिक सांद्रता महीने के हर दिन राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानकों को पार करती रही। प्रत्येक दिन के लिए पीएम2.5 और पीएम10 की निर्धारित सीमा क्रमश: 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है। जनवरी में भारत के 10 शीर्ष सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में, बिहार में दो, राजस्थान में दो, उत्तर प्रदेश में दो, असम और हिमाचल प्रदेश में एक-एक थे। सीआरईए का विश्लेषण यह प्रदर्शित करता है कि एनसीएपी के तहत कवर किये गए 131 शहरों में केवल 101 में, ‘रियल टाइम' प्रदूषण स्तर पर पारदर्शी सूचना के बिना जनवरी 2024 तक सीएएक्यूएमएस स्थापित की गई। रांची, जम्मू, गुंटुर, नेल्लोर, जम्मू, वडोदरा, मदुरै और रायबरेली सहित 30 शहरों में सीएएक्यूएमएस नहीं है। सरकार ने 131 शहरों में 2026 तक सूक्ष्म कणों के सकेंद्रण में 40 प्रतिशत कमी लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। सीआरईए के विशेषज्ञ सुनिल दहिया ने कहा, ‘‘उत्तर भारत में हवा की मंद गति और कम तापमान ने स्थिर वायुमंडलीय दशाएं पैदा की, जिसने उत्सर्जन के तीव्रता से छितराव को बाधित किया। नतीजतन, जमीन के नजदीक प्रदूषकों का संचयन हुआ जिससे प्रदूषण स्तर बढ़ा।

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