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 लग्जरी गाड़ियों की तेज गति ले रही दूसरों की जान

 नयी दिल्ली। पंजाब के जिरकपुर में बीएमडब्ल्यू कार की टक्कर लगने के बाद 19 वर्षीय युवक की मौत हो गई। यह घटना तेज रफ्तार लग्जरी कारों से होने वाले हादसों की फेहरिस्त में नई है, जो लापरवाही से गाड़ी चलाने के भयावह परिणामों और इस बात को रेखांकित करती है कि कई बार रफ्तार का रोमांच तबाही का कारण बन जाता है। इस महीने देश में ऐसी चार घटनाएं हो चुकी हैं। मंगलवार रात को जिरकपुर शहर में तेज़ रफ्तार बीएमडब्ल्यू कार ने एक बाइक को जोरदार टक्कर मार दी, जिससे उसपर सवार तीन युवक हवा में उछल गए। इस घटना में एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई तथा शेष गंभीर रूप से जख्मी हो गए। मोहाली निवासी कार चालक को गिरफ्तार कर लिया गया और फिर ज़मानत पर छोड़ दिया गया। इस घटना से 11 दिन पहले, महाराष्ट्र के पुणे में नशे की हालत में तेज गति से चलाई जा रही पोर्श कार ने कथित तौर पर दो आईटी पेशेवरों की जान ले ली थी। इस हादसे में अनीश अवधिया और अश्विनी कोस्टा की मौत हो गई। पोर्श कार को 17-वर्षीय एक किशोर नशे की हालत में चला रहा था। अंधाधुंध रफ्तार से भागती कार ने दोनों आईटी पेशेवरों की मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी थी। तेज़ गति से चलाई जा रही कारों से होने वाले हादसे वाहन सवारों के लिए भी घातक होते हैं।
 इस दुर्घटना से दो दिन पहले, नोएडा में तेज गति से जा रही एक बीएमडब्ल्यू कार ने 16 मई को सुबह छह बजे एक ई-रिक्शा को टक्कर मार दी थी, जिससे एक नर्स सहित दो लोगों की मौत हो गई और तीन घायल हो गए। इसके बाद 26 मई की सुबह उत्तर प्रदेश के इसी शहर में तेज गति से जा रही एक ऑडी कार ने 64 साल के बुजुर्ग को टक्कर मार दी थी। बुजुर्ग जनक देव शाह की मौके पर ही मौत हो गई। सेक्टर 53 के गिझोर गांव के रहने वाले शाह दूध लेने जा रहे थे। उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले में नोएडा और ग्रेटर नोएडा शामिल हैं। गौतमबुद्ध नगर में पिछले साल 1,176 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिसमें 470 लोगों की मौत हो गई और 858 घायल हो गये। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, साल 2022 में जिले में सड़क दुर्घटना में 437 लोगों की मौत हुई और 856 लोग घायल हो गए। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि 2022 में देश भर में 4.61 लाख सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिसमें 1.68 लाख लोग मारे गए और 4.43 लाख लोग घायल हुए। जान गंवाने वाले 1.68 लाख लोगों में से 1.19 लाख की जान तेज गति के कारण हुए हादसों में गई। पिछले साल अगस्त में हरियाणा के नूंह में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर एक पेट्रोल टैंकर से रोल्स रॉयस फैंटम की टक्कर हो गई, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी। ट्रक गलत दिशा से आ रहा था और लिमोजिन की गति करीब 230 किमी प्रति घंटा थी। ट्रक में सवार दोनों लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कार में सवार लोग जख्मी हुए थे। लक्जरी कारों से सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या के बारे में गैर-सरकारी संगठन ‘सेव लाइफ फाउंडेशन' के संस्थापक पीयूष तिवारी ने कहा कि यह समस्या देश में त्रुटिपूर्ण लाइसेंसिंग प्रणाली के कारण उत्पन्न हो रही है। उन्होंने कहा, ‘‘अगर आपके पास एलएमवी लाइसेंस है तो आप 800 सीसी के इंजन वाली कार से लेकर हाईपॉवर वाली सुपर कार तक कुछ भी चला सकते हैं। लाइसेंसिंग प्रणाली में सुधार जरूरी है। वाहन चलाने की क्षमता के आधार पर लाइसेंस दिया जाना चाहिए।'' नवंबर 2022 में टाटा संस के पूर्व अध्यक्ष साइरस मिस्त्री और उनके दोस्त जहांगीर पंडोल की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। दोनों एक मर्सिडीज-बेंज एसयूवी से जा रहे थे, जिसे जहांगीर की पत्नी अनाहिता पंडोले चला रही थीं। रिपोर्ट के अनुसार, कार की गति 100 किमी प्रति घंटे से अधिक थी और यह सड़क के डिवाइडर से टकरा गई। मोटर वाहन दुर्घटनाओं ने पैदल चलने वालों को भी नहीं बख्शा है। भारत में सड़क दुर्घटना 2022 की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्गों पर 20,513 दुर्घटनाओं में 10,160 पैदल यात्रियों की मौत हुई है। तिवारी ने कहा कि सड़कों को सुरक्षित बनाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है कि पैदल चलने वालों के अनुकूल संरचनाएं बनाई जाएं।

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