मोदी सरकार में भाजपा सहयोगियों को अधिक स्थान मिले; 11 मंत्री पद राजग सहयोगियों को
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सहयोगियों को पांच कैबिनेट मंत्री पद मिले हैं क्योंकि पार्टी लोकसभा में बहुमत के लिए सहयोगियों पर निर्भर है। निवर्तमान सरकार में सहयोगी दलों के पास एक भी कैबिनेट पद नहीं था। निवर्तमान मंत्रिपरिषद में भाजपा के सहयोगी दलों से दो राज्य मंत्री थे - अपना दल (एस) की अनुप्रिया पटेल और आरपीआई (ए) के रामदास आठवले - इस बार दो स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और चार राज्य मंत्री हैं। जनता दल (सेक्युलर) के एच डी कुमारस्वामी, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के जीतन राम मांझी, जनता दल (यूनाइटेड) के राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह, तेलुगु देशम पार्टी के किंजरापु राम मोहन नायडू और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के चिराग पासवान ने रविवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली। शिवसेना के प्रतापराव जाधव और राष्ट्रीय लोक दल के जयंत चौधरी ने स्वतंत्र प्रभार के राज्य मंत्री के रूप में शपथ ली। दूसरी नरेन्द्र मोदी सरकार में भाजपा के सहयोगी दलों से कोई स्वतंत्र प्रभार वाला राज्य मंत्री नहीं था। आठवले और पटेल को राज्य मंत्री के रूप में बरकरार रखा गया है, जबकि सहयोगी दलों से कनिष्ठ मंत्रियों में जनता दल (यूनाइटेड) के रामनाथ ठाकुर और तेलुगु देशम पार्टी के चंद्रशेखर पेम्मासानी शामिल हैं। भाजपा को पिछले दो कार्यकालों - 16वीं और 17वीं लोकसभा - में पूर्ण बहुमत प्राप्त था, जिसका असर मंत्रिपरिषद में भी दिखाई दिया और केवल कुछ गठबंधन सहयोगियों को ही जगह दी गई। 2014 में भाजपा के 282 सीट के साथ सत्ता में आने के बाद गठित पहले मोदी मंत्रिमंडल में चार कैबिनेट पद सहयोगी दलों को मिले थे। लोक जनशक्ति पार्टी के रामविलास पासवान को उपभोक्ता मामलों का मंत्रालय, तेलुगू देशम पार्टी के अशोक गजपति राजू को नागरिक उड्डयन मंत्रालय, शिरोमणि अकाली दल की हरसिमरत कौर बादल को खाद्य प्रसंस्करण मंत्री और शिवसेना के अनंत गीते को भारी उद्योग और सार्वजनिक उद्यम मंत्री बनाया गया था। पहली मोदी सरकार में भी चार राज्य मंत्री पद भाजपा के सहयोगी दलों को मिले थे, जिनमें राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के नेता उपेंद्र कुशवाहा को मानव संसाधन विकास मंत्रालय भी शामिल था। तेलुगू देशम पार्टी के वाई एस चौधरी नवंबर 2014 में विज्ञान और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में राज्य मंत्री बने। जुलाई 2016 में मंत्रिपरिषद में हुए फेरबदल में आरपीआई (एस) के रामदास आठवले सामाजिक न्याय मंत्रालय में राज्य मंत्री और अपना दल (एस) की पटेल स्वास्थ्य मंत्रालय में राज्य मंत्री बनीं थीं। इनमें से दो मंत्रियों ने आंध्र प्रदेश को विशेष दर्जा देने की अपनी पार्टी की मांग को लेकर मार्च 2018 में इस्तीफा दे दिया था। एक हफ्ते बाद, तेलुगू देशम पार्टी ने राजग छोड़ दिया। दिसंबर 2018 में, कुशवाहा ने मोदी पर बिहार के लिए अपने चुनावी वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाते हुए मंत्रालय से इस्तीफा दे दिया और गठबंधन छोड़ दिया। दूसरी मोदी सरकार में, जब भाजपा 303 की बेहतर संख्या के साथ लोकसभा में वापस आई, तो सहयोगी दलों के सात नेताओं ने अपने पांच साल के कार्यकाल में विभिन्न मंत्री पदों पर कार्य किया। जीतने के तुरंत बाद, इसने लोक जनशक्ति पार्टी, शिवसेना और शिरोमणि अकाली दल जैसे सहयोगियों को मंत्री पद दिया। पासवान को उपभोक्ता मामलों का मंत्रालय दिया गया, एक पद जो उन्होंने अक्टूबर 2020 में अपनी मृत्यु तक संभाला। हरसिमरत बादल को फिर से खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय का प्रभार दिया गया, जो उन्होंने सितंबर 2020 तक संभाला, जब उन्होंने किसानों के विरोध के मद्देनजर इस्तीफा दे दिया। बाद में शिरोमणि अकाली दल ने गठबंधन छोड़ दिया। शिवसेना के अरविंद सावंत को भारी उद्योग और सार्वजनिक उद्यम मंत्री बनाया गया था, लेकिन 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के बाद भाजपा और उनकी पार्टी के बीच चल रहे सत्ता संघर्ष के बीच उन्होंने नवंबर 2019 में इस्तीफा दे दिया। रामविलास पासवान के निधन के बाद लोक जनशक्ति पार्टी के दो गुटों में विभाजित होने के बाद, उनके भाई पशुपति पारस को जुलाई 2021 में खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय दिया गया। उन्होंने 2024 के आम चुनावों से ठीक पहले इस्तीफा दे दिया क्योंकि भाजपा ने रामविलास के बेटे चिराग पासवान के नेतृत्व वाले गुट लोजपा (आरवी) के साथ सीट समझौता किया था। जनता दल (यूनाइटेड) के रामचंद्र प्रसाद को जुलाई 2021 में इस्पात मंत्री बनाया गया और वह 6 जुलाई 2022 तक इस पद पर बने रहे। दूसरे मोदी मंत्रिमंडल में आठवले ने सामाजिक न्याय राज्य मंत्री का पद संभाला और अनुप्रिया पटेल वाणिज्य राज्य मंत्री थीं।








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