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 कर्ज की लागत दबाव वाली, बैंकों को ब्याज दरें कम करने की जरूरत: सीतारमण

मुंबई.  केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि बैंक ब्याज दरें कुछ लोगों के लिए बेहद दबाव वाली हैं, और उन्हें सस्ता बनाने के लिए कदम उठाने की जरूरत है। वित्त मंत्री ने आर्थिक वृद्धि में सुस्ती की आशंका के बारे में व्यापक चिंताओं के बीच भरोसा दिलाया कि सरकार घरेलू और वैश्विक चुनौतियों से पूरी तरह अवगत है। उन्होंने कहा कि अनावश्यक चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि इस समय भारत में उद्योगों को बढ़ावा देने और नये संयंत्रों में निवेश करने की जरूरत है और ऐसे में कर्ज दरों को कम करने से विकसित भारत की आकांक्षा को साकार करने में मदद मिल सकती है। सीतारमण ने कहा, ‘‘महत्वपूर्ण बात यह है कि जब आप भारत की वृद्धि की जरूरतों को देखते हैं, और कई तबकों से यह राय सामने आती है कि उधार लेने की लागत वास्तव में बेहद दबाव बढ़ाने वाली है। ऐसे समय में जब हम चाहते हैं कि उद्योग तेजी से आगे बढ़ें और क्षमता निर्माण हो, बैंक ब्याज दरें कहीं अधिक सस्ती होनी चाहिए।'' उन्होंने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के वार्षिक व्यापार और आर्थिक सम्मेलन में बैंकों से ऋण देने के अपने मूल काम पर ध्यान केंद्रित करने को कहा। वित्त मंत्री ने कहा कि बीमा उत्पादों की गलत ढंग से बिक्री भी अप्रत्यक्ष रूप से किसी व्यक्ति या संस्था के लिए कर्ज लेने की लागत को बढ़ाती है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने पिछले सप्ताह भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए ब्याज दरों में कटौती करने का आग्रह किया था। गौरतलब है कि ज्यादातर वाणिज्यिक बैंक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आरबीआई की ब्याज दरों के आधार पर अपनी दरें तय करते हैं। सीतारमण ने कहा कि इस समय तीन या चार जल्दी खराब होने वाली वस्तुओं के एक समूह की वजह से महंगाई बढ़ रही है और बाकी वस्तुएं तीन या चार प्रतिशत स्तर पर हैं। वित्त मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस बहस में नहीं पड़ना चाहती हैं कि मुद्रास्फीति सूचकांकों को तैयार करते समय खाद्य कीमतों पर विचार किया जाना चाहिए या आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति को दरों पर फैसला करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति एक जटिल मुद्दा है, जो आम आदमी को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि सरकार खाद्य तेलों और दालों सहित आपूर्ति पक्ष के उपायों पर काम कर रही है। सीतारमण ने हालांकि यह भी जोड़ा कि भारत चक्रीय रूप से आपूर्ति संबंधी समस्याओं से जूझ रहा है और सरकार के प्रयास मुख्य रूप से अस्थिरता को कम करने के लिए भंडारण सुविधाओं को बेहतर बनाने पर केंद्रित हैं। वृद्धि में सुस्ती की आशंकाओं को लेकर व्यापक चिंताओं के बीच सीतारमण ने भरोसा दिया कि सरकार घरेलू और वैश्विक चुनौतियों से पूरी तरह अवगत है और कहा कि बेवजह चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि कई उच्च आवृत्ति संकेतक जमीन पर मजबूत गतिविधियों की ओर इशारा कर रहे हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि कुछ लोगों का मानना है कि सरकार के राजकोषीय समेकन से आर्थिक गतिविधियों को नुकसान हो रहा है, लेकिन उन्होंने ऐसी किसी भी बात से इनकार किया और कहा कि वृद्धि सरकार की प्राथमिकता है।

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