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प्रतिस्पर्धा के बजाय अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर आधारित है भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम: इसरो प्रमुख

बेंगलुरु.  भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष वी. नारायणन ने मंगलवार को कहा कि भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम एक जन-केंद्रित और अनुप्रयोग-उन्मुखी पहल के रूप में परिकल्पित किया गया है और यह प्रतिस्पर्धा के बजाय अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर आधारित है। देश की अंतरिक्ष यात्रा के छह दशक को रेखांकित करते हुए नारायणन ने कहा कि इस कार्यक्रम ने विश्व स्तर पर सम्मान हासिल किया है और यह न केवल भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी सेवा करता है, जिसमें सहयोग इसका मूल सिद्धांत है। इसरो प्रमुख ने अमेरिका-भारत 'स्पेस बिजनेस फोरम' के उद्घाटन समारोह में भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में अमेरिका के योगदान को रेखांकित किया। देश में अंतरिक्ष संबंधी कार्य स्वतंत्रता के 15 वर्ष बाद यानी 1962 में शुरू हुए और भारत द्वारा प्रक्षेपित किया गया पहला रॉकेट अमेरिका में निर्मित था और नासा ने इसकी आपूर्ति की थी। नारायणन ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय अंतरिक्ष मिशन मुख्य रूप से आम लोगों के लाभ के लिए है।
अंतरिक्ष विभाग के सचिव नारायणन ने कहा, ''भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम किसी से प्रतिस्पर्धा करने के लिए नहीं, बल्कि भारत के आम आदमी के लाभ के लिए उन्नत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी लाने के लिए शुरू किया गया था।'' उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कार्यक्रम का दृष्टिकोण समय के साथ-साथ वैश्विक जरूरतों को पूरा करने के लिए विस्तृत हुआ है, साथ ही यह मानव-केंद्रित भी बना हुआ है। उन्होंने कहा, ''आज, हमारा दृढ़ता से मानना है कि यह कार्यक्रम न केवल भारत के आम आदमी के लिए है, बल्कि वैश्विक समुदाय की भी सेवा करता है और यह एक मानव-केंद्रित, अनुप्रयोग-उन्मुखी कार्यक्रम है।'' उन्होंने अंतरिक्ष अन्वेषण और वाणिज्य के क्षेत्र में गहन अंतरराष्ट्रीय साझेदारी का आह्वान किया।
अमेरिकी प्रतिनिधियों और उद्योग जगत के दिग्गजों का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि यह मंच अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते तालमेल का प्रतीक है। नारायणन ने कहा, ''इस तरह का कार्यक्रम सहयोगात्मक होना चाहिए। एक अंतरराष्ट्रीय सहयोगात्मक कार्यक्रम। इसी संदर्भ में अमेरिका-भारत 'स्पेस बिजनेस फोरम' अमेरिका से लगभग 14 व्यापारिक साझेदारों को लाया है।'' हाल की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए नारायणन ने चंद्रयान मिशन, निसार उपग्रह और वाणिज्यिक प्रक्षेपण जैसी संयुक्त उपलब्धियों को रेखांकित किया और कहा कि यह सहयोग एक समान साझेदारी में तब्दील हो गया है। उन्होंने कहा, ''इस मिशन ने भारत और अमेरिका के बीच सिर्फ सहयोग नहीं, बल्कि भावनात्मक सहयोग का भी विश्व में प्रदर्शन किया और एक मजबूत जुड़ाव को दर्शाया।'' भविष्य की योजनाओं को ध्यान में रखते हुए, इसरो अध्यक्ष ने एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य की रूपरेखा प्रस्तुत की, जिसमें चंद्रयान-4 और चंद्रयान-5, मंगल और शुक्र मिशन, भू अवलोकन और दिशा सूचक उपग्रह समूहों का विस्तार तथा गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने 2028 तक अपने पहले अंतरिक्ष स्टेशन मॉड्यूल को लॉन्च करने और 2035 तक पूरी तरह से चालू बहु-मॉड्यूल भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। साथ ही यह 2040 तक मानव को चंद्र मिशन के तहत चंद्रमा पर भेजने की दिशा में भी काम कर रहा है। नारायणन ने कहा कि इसरो पहले से ही 30,000 किलोग्राम की 'एलईओ' क्षमता वाले अगली पीढ़ी के प्रक्षेपण यानों पर काम कर रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि 2040 तक मानव चंद्र मिशन को पूरा करने के लिए निरंतर तकनीकी विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से कई गुना विस्तार की आवश्यकता होगी।

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