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नब्बे एकड़ में फैला लोधी गार्डन 90 वर्ष का हुआ

 नयी दिल्ली. सदियों पुराने मकबरों, दुर्लभ पौधों और पक्षियों की प्रजातियों का घर लोधी गार्डन बृहस्पतिवार को 90 वर्ष का हो गया। राष्ट्रीय राजधानी के मध्य स्थित इस उद्यान को नौ अप्रैल 1936 को 'लेडी विलिंगडन पार्क' के नाम से शुरू किया गया था, जिसका नाम उस समय के वायसराय की पत्नी के नाम पर रखा गया था। करीब 90 एकड़ में फैला यह हरित क्षेत्र लोधी एस्टेट और खान मार्केट के बीच स्थित है तथा शहर के "फेफड़े" की तरह काम करता है और सुबह-शाम की सैर, जॉगिंग तथा शांत वातावरण में समय बिताने के लिए लोगों की पसंदीदा जगहों में एक है। लोधी गार्डन को उस समय के खैरपुर गांव को हटाकर विकसित किया गया था।

 
वर्ष 1911 के दिल्ली दरबार में ब्रिटिश शासन ने भारत की राजधानी को कलकत्ता (अब कोलकाता) से दिल्ली स्थानांतरित करने की घोषणा की थी। इसके बाद नयी राजधानी 'नयी दिल्ली' का निर्माण किया गया, जिसका औपचारिक उद्घाटन 13 फरवरी 1931 को तत्कालीन वायसराय लॉर्ड इरविन ने किया था। समृद्ध वनस्पति और जीव-जंतुओं के कारण लोधी गार्डन देशी और विदेशी पर्यटकों के साथ-साथ पिकनिक मनाने वालों के बीच भी बेहद लोकप्रिय है। यहां ऐतिहासिक स्मारकों के अलावा नीम, जामुन, रॉयल बॉटल पाम, बांस और सफेदा जैसे कई प्रकार के पेड़-पौधे पाए जाते हैं। साथ ही तोते, मैना, किंगफिशर और हॉर्नबिल सहित अनेक पक्षियों की प्रजातियां भी यहां देखी जा सकती हैं। लोधी गार्डन में स्थापत्य शैलियों की विविधता देखने को मिलती है, जिसमें सैय्यद, लोदी से लेकर मुगल काल तक की वास्तुकला शामिल है। इंटैक के अनुसार, वर्तमान परिदृश्य का विकास 1968 में अमेरिकी वास्तुकार जोसेफ एलन स्टीन ने किया था, जिसे बाद में जापानी वास्तुकारों के एक समूह ने संशोधित किया। दिल्ली स्थित गैर-लाभकारी संस्था इंटैक, इस उद्यान के पास ही स्थित है। यह संस्था देश में असुरक्षित धरोहरों के संरक्षण के लिए काम करती है इंटैक मुख्यालय के विरासत शिक्षा एवं संचार सेवा (एचईसीएस) विभाग की प्रमुख पूर्णिमा दत्त ने  कहा कि यह उद्यान "हमारा पड़ोसी" होने के साथ-साथ विद्यार्थियों के लिए "जीवंत कक्षा" की तरह है, क्योंकि यहां पौधे, पेड़ों, पक्षियों, तितलियों और अन्य जीव-जंतुओं की अनेक प्रजातियां हैं। उन्होंने कहा, "इंटैक और लोधी गार्डन के बीच बहुत ही घनिष्ठ संबंध है। हम रोज यहां से गुजरते हैं और इससे जुड़ी कई यादें हैं।'' दत्त ने बताया कि इंटैक ने अतीत में इस उद्यान में कुछ संरक्षण कार्य भी किए हैं और कई वर्ष पहले इस पर एक पुस्तिका भी प्रकाशित की गई थी।

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