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गंगोत्री, यमुनोत्री मंदिरों के कपाट खुले, चारधाम यात्रा शुरू

देहरादून.  छह माह बंद रहने के बाद अक्षय तृतीया के पर्व पर रविवार को गंगोत्री और यमुनोत्री धामों के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ फिर से खोल दिए गए तथा इसके साथ ही उत्तराखंड में इस वर्ष की चारधाम यात्रा की शुरुआत हो गयी। इस वर्ष पहली बार गंगोत्री सहित तीन धामों में गैर सनातनियों के प्रवेश पर प्रतिबंध और विशेष शर्तें लागू की गई हैं। उत्तरकाशी जिले में स्थित दोनों धामों में पहली पूजा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम से की गयी जबकि गंगोत्री मंदिर के कपाट खुलने के मौके पर प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी पहुंचे और चारधाम यात्रा के सफल आयोजन तथा देश-प्रदेश की सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। धार्मिक विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गंगोत्री मंदिर के कपाट अपराह्न करीब 12:15 बजे तथा यमुनोत्री मंदिर के कपाट 12:35 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। इस दौरान दोनों धामों में मौजूद सैकड़ों श्रद्धालु 'हर-हर गंगे' और 'जय मां यमुना' के जयकारे लगा रहे थे। मुख्यमंत्री धामी ने गंगोत्री धाम में प्रधानमंत्री मोदी के नाम से पहली पूजा कर देश और प्रदेश की समृद्धि की प्रार्थना की। धामी ने कहा कि उत्तराखंड के चारधाम देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए आस्था के प्रमुख केंद्र हैं और राज्य सरकार ने यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुगम बनाने के लिए व्यापक प्रबंध किए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का यह प्रयास है कि यहां आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को दिव्य धामों का आशीर्वाद मिलने के साथ ही उनकी यात्रा का अनुभव सुरक्षित, सुखद और यादगार हो। साथ ही धामी ने श्रद्धालुओं से 'ग्रीन और क्लीन' चारधाम यात्रा के लिए सहयोग की अपील भी की। उत्तराखंड के चारधामों में शामिल अन्य दो धाम-रुद्रप्रयाग जिले में स्थित केदारनाथ मंदिर के कपाट 22 अप्रैल को तथा चमोली जिले के बदरीनाथ मंदिर के कपाट 23 अप्रैल को खोले जाएंगे। इस वर्ष तीन धामों में गैर सनातनियों के प्रवेश को लेकर अलग-अलग शर्तें तय की गई हैं। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने दोनों मंदिर परिसरों में प्रवेश के लिए सनातन धर्म के प्रति आस्था का हलफनामा अनिवार्य किया है, जबकि गंगोत्री मंदिर समिति ने पंचगव्य (गोबर, गोमूत्र, दूध, दही और घी) ग्रहण करने के बाद ही प्रवेश की अनुमति देने की घोषणा की है। हालांकि, यमुनोत्री मंदिर समिति ने अलग रुख अपनाते हुए बिना जाति-धर्म पूछे श्रद्धाभाव से आने वाले सभी श्रद्धालुओं के स्वागत का निर्णय लिया है। इसके अलावा, इस बार चारों धामों के मंदिर परिसरों में मोबाइल फोन और कैमरों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। पिछले वर्ष चारधाम यात्रा में 51 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे थे, जबकि इस वर्ष अब तक करीब 19 लाख श्रद्धालु ऑनलाइन और ऑफलाइन पंजीकरण करा चुके हैं। उच्च गढ़वाल हिमालयी क्षेत्र में स्थित ये चारों धाम सर्दियों में भारी बर्फबारी और भीषण ठंड के कारण हर साल अक्टूबर-नवंबर में बंद कर दिए जाते हैं और अप्रैल-मई में पुनः श्रद्धालुओं के लिए खोले जाते हैं।

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