भाजपा ने छात्र कल्याण के प्रति प्रधान की 'आजीवन' प्रतिबद्धता और 'अहम' भूमिका की सराहना की
नयी दिल्ली. केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा देने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने उनके योगदान की सराहना की। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का सार्वजनिक जीवन और छात्र कल्याण के प्रति आजीवन समर्पण उनकी यात्रा का ''प्रमाण'' है। जितेंद्र सिंह, पीयूष गोयल, वीरेंद्र कुमार, गिरिराज सिंह और जी. किशन रेड्डी समेत कई अन्य केंद्रीय मंत्रियों ने भी धर्मेंद्र प्रधान के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनका (प्रधान का) कार्यकाल शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दृढ़ प्रतिबद्धता का परिचायक रहा। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में धर्मेंद्र प्रधान ने भारत की शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाने और ऐतिहासिक राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 को सफलतापूर्वक लागू करने सहित कई योजनाओं में 'अहम भूमिका' निभाई। नितिन नवीन ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "बड़े हितों को प्राथमिकता देते हुए उनका (प्रधान का) पद छोड़ने का फैसला सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और निस्वार्थ सेवा के सर्वोच्च मानकों को दर्शाता है। पार्टी इस फैसले में धर्मेंद्र प्रधान जी के साथ मजबूती से खड़ी है।" केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि शिक्षा मंत्री के रूप में धर्मेंद्र प्रधान का कार्यकाल शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दृढ़ प्रतिबद्धता का परिचायक रहा और यह कार्य 'दृढ़ विश्वास, ऊर्जा व स्पष्ट उद्देश्य' के साथ किया गया। उन्होंने कहा कि प्रधान ने शिक्षा क्षेत्र की जटिल चुनौतियों का सामना करते हुए हमेशा विद्यार्थियों को केंद्र में रखा। जितेंद्र सिंह ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "धर्मेंद्र प्रधान के भारत के शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के साथ यह उनके विद्यार्थियों और सार्वजनिक जीवन से गहरे तथा लंबे जुड़ाव को स्वीकार करने का अवसर है। बहुत कम नेता ऐसे रहे हैं, जिनका युवा भारत की आकांक्षाओं और चिंताओं से इतना गहरा रिश्ता रहा हो।" उन्होंने कहा, "अब जब वह आगे बढ़ रहे हैं, तो वह भारत में शिक्षा के भविष्य को लेकर एक महत्वपूर्ण और लगातार आगे बढ़ने वाली चर्चा की विरासत छोड़कर जा रहे हैं।" संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि सच्चे नेतृत्व का आकलन दशकों के काम से होता है और धर्मेंद्र प्रधान का सफर सार्वजनिक जीवन तथा छात्र कल्याण के प्रति आजीवन प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने कहा, "केंद्रीय मंत्रिमंडल में उनके (प्रधान के) साथ काम करते हुए मैंने भारत की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और करोड़ों युवा विद्यार्थियों को हर फैसले के केंद्र में रखने के प्रति उनकी सच्ची प्रतिबद्धता देखी है। इतने महत्वपूर्ण क्षेत्र का नेतृत्व करने के लिए अपार धैर्य की जरूरत होती है और उन्होंने साहस तथा स्पष्ट सोच के साथ इस जिम्मेदारी को निभाया।" रीजीजू ने एक पुराने कार्यक्रम की अपनी और धर्मेंद्र प्रधान की साथ वाली तस्वीर भी साझा की।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि छात्र आंदोलनों से अपने शुरुआती जुड़ाव से लेकर सार्वजनिक जीवन और शासन में निभाई गई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों तक, धर्मेंद्र प्रधान ने हमेशा प्रतिबद्धता, अनुशासन और लोगों, खासकर भारत के युवाओं की आकांक्षाओं, से "गहरा जुड़ाव" दिखाया है। उन्होंने कहा, "शिक्षा सुधार कोई अल्पकालिक प्रक्रिया नहीं है। इसके लिए निरंतर प्रयास, व्यापक विचार-विमर्श और शिक्षा की परिवर्तनकारी शक्ति में अटूट विश्वास की जरूरत होती है। प्रधान जी ने पूरी निष्ठा और स्पष्ट उद्देश्य के साथ इन गुणों को मंत्रालय में उतारा।" भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने कहा कि किसी भी मजबूत राष्ट्र की पहचान उसकी शिक्षा व्यवस्था से होती है और धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पूरे सार्वजनिक जीवन में इस विचार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। प्रधान ने कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में देशभर में हुए छात्रों के प्रदर्शन तथा नीट प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर उन्हें पद से हटाने की मांग के बीच, शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। तावड़े ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का सार्वजनिक जीवन छात्र आंदोलनों से शुरू हुआ था और देश के शिक्षा मंत्री का दायित्व संभालना उनकी राजनीतिक यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। भाजपा के राज्यसभा सदस्य ने कहा, ''अपने कार्यकाल के दौरान प्रधान ने शिक्षा के महत्व को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में बनाए रखने का लगातार प्रयास किया।'' तावड़े ने कहा, ''मैं आपके सार्वजनिक जीवन की भावी जिम्मेदारियों के लिए शुभकामनाएं देता हूं और आशा करता हूं कि 'राष्ट्र प्रथम' की आपकी भावना 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की दिशा में हमेशा बनी रहेगी।'' भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए प्रधान के इस्तीफे को देश के युवाओं और 'जेनरेशन-जेड' (जेन-जेड) के प्रति संवेदनशीलता का अभूतपूर्व उदाहरण बताया। 'जेन-जेड' से अभिप्राय 1997 से 2012 के बीच जन्मी पीढ़ी से है। तिवारी ने कहा कि (प्रधान का) यह इस्तीफा कठिन समय में छात्रों के साथ खड़े रहने की सत्तारूढ़ दल की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।




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