IISc बेंगलुरु AI की मदद से सांप के काटने के इलाज के लिए विकसित कर रहा व्यापक प्रभावी एंटीवेनम
नई दिल्ली। भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से ऐसे व्यापक रूप से प्रभावी एंटीवेनम विकसित करने पर काम कर रहा है, जो कई प्रजातियों के सांपों के काटने के इलाज में कारगर हो सके। इससे भारत में हर साल हजारों लोगों की जान लेने वाली सर्पदंश की समस्या से निपटने में मदद मिल सकती है।
IISc के अनुसार, भारत में हर साल अनुमानित 58,000 लोगों की मौत सांप के काटने से होती है। अलग-अलग सांपों और क्षेत्रों में पाए जाने वाले जहर की संरचना में काफी विविधता होने के कारण प्रभावी एंटीवेनम विकसित करना एक बड़ी वैज्ञानिक चुनौती है। संस्थान के मुताबिक, AI इस जटिल डेटा का पहले की तुलना में कहीं अधिक तेजी और बड़े पैमाने पर विश्लेषण करने में मदद कर सकता है।
IISc के Centre for Ecological Sciences (CES) की Evolutionary Venomics Lab (EVL), Anthropic के AI for Science programme के माध्यम से Claude AI का इस्तेमाल कर रही है। शोधकर्ता जटिल जहर संबंधी डेटा को व्यवस्थित करने और ऐसे साझा विषैले लक्ष्यों की पहचान करने का प्रयास कर रहे हैं, जिन्हें अलग-अलग सांपों के जहर के खिलाफ व्यापक रूप से प्रभावी एंटीवेनम विकसित करने में इस्तेमाल किया जा सके।
कई प्रजातियों के काटने में काम आ सकेगा एंटीवेनम
शोध का प्रमुख उद्देश्य ऐसा एंटीवेनम विकसित करना है जो अलग-अलग प्रजातियों के सांपों के काटने के मामलों में प्रभावी हो। इससे अस्पतालों को बड़ी संख्या में अलग-अलग प्रकार के एंटीवेनम रखने की आवश्यकता कम हो सकती है।IISc ने कहा कि AI, विकासवादी जीव विज्ञान और ट्रांसलेशनल साइंस के मेल से सर्पदंश के उपचार की अगली पीढ़ी की चिकित्सा विकसित करने की संभावनाएं तलाशना महत्वपूर्ण है।
EVL इससे पहले भी एंटीवेनम के क्षेत्र में महत्वपूर्ण शोध कर चुकी है। प्रयोगशाला ने 2024 में सिंथेटिक एंटीवेनम विकसित किया था। इसके बाद 2025 में शोधकर्ताओं ने ‘वेनम मैप्स’ तैयार किए।
रसेल वाइपर के जहर का तैयार किया ‘वेनम मैप’
इन वेनम मैप्स में स्थानीय जलवायु परिस्थितियों का इस्तेमाल करके रसेल वाइपर के जहर की विशेषताओं का अनुमान लगाने का प्रयास किया गया है। रसेल वाइपर देश के विभिन्न हिस्सों में पाया जाने वाला बेहद खतरनाक सांप है और दुनिया में सर्पदंश से होने वाली मौतों और गंभीर चोटों के प्रमुख कारणों में से एक माना जाता है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, वेनम मैप्स चिकित्सकों को सर्पदंश के मरीजों के लिए अधिक उपयुक्त उपचार चुनने में मदद कर सकते हैं।इसके लिए रसेल वाइपर के जहर की संरचना, उसकी गतिविधि और विषाक्तता को सटीक रूप से समझना जरूरी है। शोधकर्ता यह भी पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि जैविक और अजैविक कारक इसके जहर की विशेषताओं को किस तरह प्रभावित करते हैं।
सांप के जहर के विषैले प्रभाव उसमें मौजूद विभिन्न एंजाइमों की सांद्रता से जुड़े होते हैं। इनकी मात्रा और गतिविधि जलवायु तथा सांप के शिकार की उपलब्धता जैसे कारकों से प्रभावित हो सकती है।
IISc के शोध के अनुसार, वेनम मैप्स ने पहली बार यह दिखाने में मदद की है कि तापमान, आर्द्रता और वर्षा जैसी जलवायु परिस्थितियां रसेल वाइपर के जहर के जैव-रासायनिक कार्यों को प्रभावित कर सकती हैं।
AI आधारित यह शोध भविष्य में ऐसे एंटीवेनम के विकास का रास्ता खोल सकता है जो भारत में अलग-अलग क्षेत्रों और कई सांप प्रजातियों के सर्पदंश के उपचार में अधिक व्यापक रूप से इस्तेमाल किए जा सकें।









.jpg)
Leave A Comment