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 पीएमजीकेएवाई-4 के तहत मुफ्त खाद्यान्न वितरण शुरू, अब तक 14,700 टन अनाज वितरित हुआ

नयी दिल्ली। केंद्र ने सोमवार को कहा कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) के चौथे चरण के तहत सात राज्यों में मुफ्त खाद्यान्न वितरण शुरू हो चुका है और लाभार्थियों को अब तक करीब 14,700 टन खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा चुका। केंद्र ने बताया कि मई और जून में योजना के तीसरे चरण के तहत करीब 70.6 लाख टन खाद्यान्न का वितरण किया गया। सरकार ने राशन कार्ड की सुवाह्यता (पोर्टबिलिटी) सुविधा को लेकर कहा कि बाकी चार राज्यों - असम, छत्तीगढ़, दिल्ली और पश्चिम बंगाल में जल्द ही इसका कार्यान्वयन होने की उम्मीद है। इसके तहत किसी एक राज्य का कार्डधारी दूसरे राज्य में होने पर वहीं से अपने हिस्से का राशन ले सकता है। पीएमजीकेएवाई सबसे पहले मार्च 2020 में शुरू की गई थी। कोविड से पैदा हुई आर्थिक मुश्किलों को ध्यान में रखते हुए इसे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के दायरे में आने वाले 80 करोड़ लाभार्थियों को राहत प्रदान करने के लिए पिछले साल शुरू किया गया था। पिछले साल योजना को दो चरणों में नवंबर तक के लिये बढ़ा दिया गया। तीसरे चरण में इस साल योजना को पहले दो महीने के लिये -मई और जून- में लागू किया गया। इसके बाद चौथे चरण के तहत इसे नवंबर 2021 तक के लिये बढ़ा दिया गया। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत लाभार्थियों को उन्हें राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत मिलने वाली सस्ती राशन के अतिरिक्त प्रति व्यक्ति पांच किलो खाद्यान्न प्रति माह उपलब्ध कराया जाता है। खाद्य सचिव सुधांशु पांडे ने आभासी संवाददाता सम्मेलन में बताया कि योजना के तीसरे चरण में, ‘‘आवंटित खाद्यान्न में से 89 प्रतिशत लाभार्थियों को वितरण किया गया। मई में यह आवंटन 94 प्रतिशत तक रहा और एक सप्ताह के समय में यह इस स्तर तक पहुंच सकता है।'' पांडे ने कहा कि अलग अलग राज्य राशन वितरण का अलग अलग चक्र अपनाते हैं इसलिये आवंटन में कुछ देरी हुई। बहरहाल, तमिलनाडु, राजस्थान और झारखंड में राशन वितरण में तेजी आ रही है। ‘‘हम राज्यों से कह रहे हैं कि एनएफएसए का राशन कोटा और पीएमजीकेएवाई के तहत दिये जाने वाले खाद्यान्न का अलग अलग वितरण करें।'' खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "सात राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में खाद्यान्न वितरण का चौथा चरण शुरू हो चुका है। पांच जुलाई तक करीब 14,700 टन खाद्यान्न वितरण कर लिया गया है।" केंद्र सरकार पहले ही योजना के तहत जुलाई-नवंबर 2021 अवधि के लिए सभी राज्यों के लिये 198.78 लाख टन खाद्यान्न आवंटित कर चुकी है। करीब 16 राज्यों और संघ शासित प्रदेशें ने अनाज उठाना शुरू कर दिया है। इन राज्यों ने पांच जुलाई तक करीब चार लाख टन खाद्यान्न का उठाव किया है। अधिकारी ने कहा कि ज्यादातर राज्यों ने आश्वासन दिया है कि खाद्यान्न वितरण सुनियोजित तरीके से किया जायेगा। पांडे ने बताया कि पिछले साल योजना को आठ महीने चलाया गया था और इस साल यह अवधि सात महीने की होगी। कुल 15 महीनों के लिए योजना के कार्यान्वयन में 2,28,000 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। पांडे ने राशन कार्ड पोर्टेबिलिटी सुविधा 'एक देश एक राशन कार्ड' (ओएनओआरसी) के कार्यान्वयन में प्रगति को लेकर कहा कि सरकार को उम्मीद है कि बाकी चार राज्य जल्द ही इसका कार्यान्वयन कर लेंगे। ‘‘दिल्ली और पश्चिम बंगाल सरकारें इसे जल्द लागू करने जा रही हैं। क्योंकि इन राज्यों में सभी इलेक्ट्रानिक पाइंट आफ सेल (ईपीओएस) मशीनें लग चुकी हैं, उनका परीक्षण किया जा चुका है। दोनों टीमें आपसी समन्वय से काम कर रही हैं।'' छत्तीसगढ़ में ईपीओएस मशीनों की खरीद शुरू हो चुकी है। वहीं असम में आधार कम लोगों के पास होने की वजह से देरी हो रही है। देश के 32 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में यह सुविधा लागू हो चुकी है जिसके तहत लाभार्थी देश के किसी भी हिस्से में राशन कार्ड के जरिए अपने कोटे का खाद्यान्न हासिल कर सकता है। मंत्रालय के मुताबिक औसत रूप से करीब 69 लाख लाभार्थी मासिक रूप से 1.5 करोड़ पोर्टेबिलिटी सुविधा के तहत लेन-देन कर रहे हैं।

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