सरकार आदिवासी समुदाय के विकास, सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध : जावड़ेकर
नयी दिल्ली। सरकार आदिवासी समुदाय के विकास और सशक्तिकरण के लिए संकल्पबद्ध है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इन समुदायों को वन संसाधनों के प्रबंधन में और अधिक शक्तियां देने के लिए आदिवासी मामलों के मंत्रालय के साथ गठबंधन करते हुए मंगलवार को यह बात कही। एक कार्यक्रम में पर्यावरण मंत्रालय और आदिवासी मामलों के मंत्रालय ने संयुक्त रूप से निर्णय किया कि वन अधिकार कानून (एफआरए), 2006 को लागू करना सुनिश्चित किया जाए और आदिवासी समुदायों के अधिकारों की पहचान की प्रक्रिया पूरी की जाए। जावड़ेकर ने कहा, ‘‘(नरेंद्र) मोदी सरकार आदिवासी समुदायों के विकास और सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है। आज का कदम आदिवासियों के सर्वांगीण विकास और वन अधिकार कानून को सही मायने में लागू करने के लिए ऐतिहासिक है।'' उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के सात वर्षों के शासनकाल में आदिवासी समुदायों के सशक्तिकरण के लिए कई कदम उठाए गए हैं और वन कोष से लाखों आदिवासियों को फायदा मिला। केंद्रीय पर्यावरण सचिव आर पी गुप्ता और आदिवासी मामलों के सचिव अनिल कुमार झा ने आदिवासी जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकार कानून को मान्यता) कानून, 2006 को प्रभावी तरीके से लागू करने पर संयुक्त बयान जारी किया। इस कानून को आम तौर पर एफआरए के नाम से जाना जाता है।


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