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रामप्पा मंदिर को विश्व धरोहर दर्जा मिलने बाद तेलंगाना में जश्न का माहौल

हैदराबाद। तेलंगाना के मुलुगु जिले में रामप्पा मंदिर के नाम से प्रसिद्ध ऐतिहासिक रुद्रेश्वर मंदिर को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर कर दर्जा प्रदान किये जाने से विभिन्न वर्गों- राजनीतिक नेताओं, धरोहर कार्यकर्ताओं और आम लोगों को अपार खुशी मिली है। उनको उम्मीद है कि स्मारक को अब अंतरराष्ट्रीय ख्याति मिलेगी। राज्य की महिला एवं बाल कल्याण मंत्री सत्यवती राठौड़, विधायक डी अनसूया उर्फ ​​सीताक्का, अन्य नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने मंदिर का दौरा किया और विश्व धरोहर का दर्जा मिलने पर हर्षोल्लास से सोमवार को पूजा की। मंदिर परिसर का दौरा करने वाली राठौड़ ने कहा कि वह मंदिर के विकास की सभी संभावनाओं की ओर मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव का ध्यान दिलाएंगी। उन्होंने कहा कि हैदराबाद से लगभग 200 किलोमीटर दूर इस मंदिर में यूनेस्को से मान्यता मिलने के बाद अद्भुत विकास होगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार 800 साल पुराने काकतीय युग के मंदिर परिसर को और विकसित करेगी व मंदिर में आने वालों को सभी सुविधाएं मुहैया कराएगी। मुलुगु के जिला कलेक्टर एस कृष्णा आदित्य ने बताया कि यूनेस्को का दर्जा जिले और तेलंगाना की पहचान है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और मंदिर अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करेगा। कलेक्टर ने कहा कि मंदिर में सोमवार सुबह (यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर दर्जा प्रदान करने के एक दिन बाद) पर्यटकों के आगमन में अचानक वृद्धि देखी गई है। उन्होंने कहा कि मुख्य मंदिर का जीर्णोद्धार कर दिया गया है, लेकिन इसके अलावा अन्य संरचनाएं हैं जिन पर ध्यान देने की जरूरत है। जाहिर है, एएसआई अब अपने बुनियादी ढांचे (बहाली, पुनर्गठन) में सुधार पर ध्यान केंद्रित करेगा। कलेक्टर ने कहा कि हाल में मंदिर परिसर में बुनियादी ढांचे में सुधार किया गया है और राज्य सरकार मंदिर पर और धन खर्च करने को तैयार है। काकतीय धरोहर न्यास (केएचटी) के संस्थापक-न्यासी व पूर्व आईएएस अधिकारी बीवी पापा राव ने इस मामले को आगे बढ़ाया था और वह पेरिस में 2019 में यूनेस्को के अधिकारियों के साथ एक बैठक में भी शामिल हुए थे। राव ने कहा कि यह उनके लिए एक दशक की लंबी यात्रा थी जो संयुक्त राष्ट्र निकाय द्वारा रविवार को रामप्पा मंदिर को विश्व धरोहर स्थल घोषित किये जाने के साथ समाप्त हुई। उन्होंने याद किया कि (अविभाजित आंध्र प्रदेश) की तत्कालीन संस्कृति मंत्री जे गीता रेड्डी ने समन्वयक के रूप में केएचटी के साथ 2010 में एक समिति का गठन किया था। राव ने कहा (2014 में) तेलंगाना के गठन के साथ केएचटी के प्रयासों को गति मिली और ट्रस्ट ने 2016 में नामांकन अभियान शुरू किया। राव ने तेलंगाना सरकार के सलाहकार के रूप में कार्य किया है। उन्होंने कहा कि साल 2019 में जब मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव ने जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ इस मुद्दे पर बात की तो रामप्पा मंदिर के लिये भारत की ओर से यूनेस्को के लिये नामित किया सका। मंदिर को विश्व मंच पर पहचान मिलना तेलंगाना के निवासियों के लिए गर्व की बात है। वारंगल के निवासी डी के रेड्डी ने कहा, ''वारंगल के मूल निवासी के रूप में, मुझे गर्व महसूस हो रहा है।'' रामप्पा मंदिर वारंगल से लगभग 60 किमी दूर है।
मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव के अलावा, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष व सांसद ए रेवंत रेड्डी और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष तथा लोकसभा सदस्य बंदी संजय कुमार ने मंदिर की यूनेस्को से मान्यता मिलने की सराहना की। केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने रविवार को कहा कि यूनेस्को ने तेलंगाना के मुलुगु जिले के पालमपेट में ऐतिहासिक रुद्रेश्वर मंदिर को विश्व विरासत स्थल का दर्जा प्रदान किया है, जिसे रामप्पा मंदिर भी कहा जाता है। रुद्रेश्वर मंदिर का निर्माण 1213 ईस्वी में काकतीय साम्राज्य के शासनकाल के दौरान काकतीय राजा गणपति देव के एक सेनापति रेचारला रुद्र द्वारा किया गया था। मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। 40 साल तक मंदिर में काम करने वाले मूर्तिकार के नाम पर इसे रामप्पा मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।

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