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- -सभी विभागों को 31 मई तक अधिक से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण कर जेएसजेबी पोर्टल में उसका शत प्रतिशत एंट्री करने के दिए निर्देशबालोद। कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने संयुक्त जिला कार्यालय सभाकक्ष में मंगलवार 07 अप्रैल को विभिन्न विभागों के अधिकारियों की बैठक लेकर जिले में जल संचय, जन भागीदारी अभियान 2.0 के कार्यों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने बैठक में उपस्थित अधिकारियों को बालोद जिले में 31 मई तक अधिक से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण कर जेएसजेबी पोर्टल में उसका शत प्रतिशत एंट्री करने के निर्देश दिए। बैठक में श्रीमती मिश्रा ने बारी-बारी से विभागवार निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप प्रगतिरत एवं पूर्ण जल संरचनाओं के निर्माण के संबंध में जानकारी ली। बैठक में श्रीमती मिश्रा ने शिक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग, खाद्य, सहकारिता आदि विभागों के अधिकारियों के अलावा मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत एवं मुख्य नगर पालिका अधिकारियों से अपने-अपने विभागों के अंतर्गत जल संरचनाओं के निर्माण के संबंध में जानकारी ली। श्रीमती मिश्रा ने सभी अधिकारियों को इस कार्य को विशेष प्राथमिकता देते हुए निर्धारित समयावधि में पूरा करने के निर्देश दिए। बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुनील चंद्रवंशी, अपर कलेक्टर श्री चंद्रकांत कौशिक, जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता श्री पीयूष देवांगन सहित लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, लोक निर्माण विभाग एवं ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग के कार्यपालन अभियंताओं के अलावा विभिन्न अधिकारीगण उपस्थित थे।
- -कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने दी हार्दिक बधाई एवं शुभकानमाएंबालोद । उत्तरप्रदेश में आयोजित राष्ट्रीय पावरलिफ्टिंग प्रतियोगिता में बालोद जिले के भाई-बहन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रदेश का नाम रोशन किया है। उल्लेखीनय है कि भूमि नेभवानी ने 63 किलोग्राम सब-जूनियर वर्ग में स्वर्ण पदक जीतते हुए पहला स्थान प्राप्त किया, वहीं उनके भाई यश सिंह नेभवानी ने 59 किलोग्राम जूनियर वर्ग में रजत पदक हासिल किया। कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने उनकी इस उपलब्धि के लिए उन्हें हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी है। ज्ञातव्य हो कि 02 से 04 अप्रैल तक उत्तरप्रदेश में आयोजित राष्ट्रीय पावरलिफ्टिंग प्रतियोगिता में भूमि ने कुल 152.5 किलोग्राम वजन उठाकर प्रथम स्थान जबकि यश ने 227.5 किलोग्राम वजन उठाकर राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान प्राप्त किया। दोनों इससे पहले राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में भी पदक जीत चुके हैं। अब उनका लक्ष्य अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतना है।
- - स्व. योगेश यदु स्मृति शतरंज प्रतियोगिता में रोमांचक मुकाबला जारीरायपुर। प्रेस क्लब खेल मड़ई-2 के तहत आयोजित स्व. योगेश यदु स्मृति शतरंज प्रतियोगिता के नॉकआउट दौर में खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मुकाबले को बेहद रोमांचक बना दिया है। बुधवार को खेले गए मैच में प्रत्युष शर्मा और सुखनंदन बंजारे ने अपने-अपने मैच जीतकर अगले दौर में प्रवेश किया।पहले मैच में प्रत्युष शर्मा और पंकज सिंह आमने-सामने थे। दोनों खिलाड़ियों ने शुरुआत में संतुलित खेल दिखाया और कई बेहतरीन चालें चलकर एक-दूसरे से आगे बढ़ने की कोशिश की, लेकिन मिडिलगेम में प्रत्युष शर्मा ने आक्रामक रणनीति अपनाते हुए बढ़त बना ली। सटीक चालों और संयमित एंडगेम के दम पर प्रत्युष ने पंकज को पराजित कर अगले दौर में अपनी जगह पक्की कर ली।वहीं दूसरे मुकाबले में सुखनंदन बंजारे और पराग मिश्रा के बीच कड़ा संघर्ष देखने को मिला। यह मैच लंबे समय तक बराबरी पर रहा। दोनों खिलाड़ियों ने धैर्य और रणनीतिक समझ का परिचय दिया, लेकिन निर्णायक क्षण में सुखनंदन बंजारे ने अवसर का लाभ उठाते हुए बढ़त हासिल कर ली। अंततः सुखनंदन ने पराग मिश्रा को मात देकर जीत दर्ज की और टूर्नामेंट के अगले दौर में प्रवेश किया। अन्य मैच में सत्येंद्र सिंह, कुलदीप शुक्ला, दीपक पांडेय व हेमंत डोंगरे को वॉकओवर मिला।नॉकआउट दौर के अगले मुकाबलों को लेकर प्रतिभागियों और प्रेस क्लब सदस्यों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। मैच के दौरान खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करने के लिए प्रेस क्लब अध्यक्ष मोहन तिवारी, महासचिव गौरव शर्मा, कोषाध्यक्ष दिनेश यदु व संयुक्त सचिव भूपेश जांगड़े विशेष रूप से मौजूद रहे। मैच के निर्णायक विजय मिश्रा, शंकर चंद्राकर, अख्तर हुसैन व विनय घाटगे रहे।9 अप्रैल के मैच9 अप्रैल को दूसरे दौर के सभी मैच दोपहर 1 बजे से खेले जाएंगे।1. संदीप तिवारी/टीकम वर्मा के बीच।2. राजेंद्र निगम/मनोज नायक के बीच।3. अमृतेश्वर सिंह/स्टार जैन के बीच।4. विकास शर्मा/संजय बनवासी के बीच।5. महादेव तिवारी/हितेश मेहता के बीच6. लक्ष्मण लेखवानी/भीमराव चंद्रिकापुरे के बीच।
- -यह हमारी अमूल्य धरोहर है, आने वाली पीढ़ियों को मिलेगा ज्ञान - डॉ. गौरव सिंहरायपुर / भारत सरकार के ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के अंतर्गत कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने आज शासकीय संस्कृत कॉलेज, रायपुर पहुंचकर वहां संरक्षित ऐतिहासिक महत्व की पाण्डुलिपियों एवं ताम्रपत्रों का अवलोकन किया।इस अवसर पर कॉलेज के लाईब्रेरियन डॉ. सुनील कुमार सोनी ने कलेक्टर को विभिन्न पाण्डुलिपियों के विषय में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि “संहिता वेद” वेदों में सबसे प्राचीन तथा मूल भाग है जिसमें देवताओं की स्तुति, छन्दोबद्ध मंत्र, श्लोकों का संग्रह है।डॉ. सोनी ने “पुन्याह वाचन मातृका” की जनकारी देते हुए बताया कि यह हिन्दु धर्म के अनुसार किसी भी शुभ कार्य को प्रारंभ करने के लिए देवी पूजन का प्रावधान है, इसी के माध्यम से लोगों द्वारा अपने पूर्वजों का ध्यान कर उनकी पूजा कर आशीर्वाद लिया जाता है तत्पश्चात् कार्य आरंभ किया जाता है इस पाण्डुलिपि में उन्हीं पूजा, विधि, मंत्रों एवं अनुष्ठान के बारे में बताया गया है। यह पाण्डुलिपियाँ कागज पर लिखी गई हैं। उन्होेंने ने बताया कि ये सभी पाण्डुलिपियां लगभग 200 वर्ष पुरानी हैं, जिन्हें दूधाधारी मठ से एकत्रित कर संरक्षित किया गया है।उन्होंने ताड़पत्र पर लिखी गई पाण्डुलिपि “इति तर्क संग्रह दीपिका” के बारे में बताया कि इस पाण्डुलिपि में न्याय और वैशेषिक दर्शन के सिद्धांतों का संक्ष्प्ति परिचय प्राप्त होता है। तर्क संग्रह के मूल ग्रंथ में जिन सिद्धांतों को लिखा गया था, उसकी विस्तृत आलोचना होने के कारण उन सिद्धांतों का संशोधन रूप तर्क संग्रह दीपिका लिखा गया, इन्हीं सिद्धान्तों को ताड़पत्र पर लिखा गया है। उन्होेंने बारह राशियों के प्रतीक चिन्ह, उनकी विशेषताएं इत्यादि का वर्णन संक्षेप में बताया जिसे ताड़पत्र पर उकेरकर लिखा गया है।
- - द्रोणाचार्य विद्यालय परिसर में अवैध कब्जे को लेकर शिकायत- धमधा नाका अंडरब्रिज और सिंधिया नगर क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट व सड़क सीमेंटीकरण की मांग- जनदर्शन में आज 140 आवेदन प्राप्त हुएदुर्ग / जिला कार्यालय के सभाकक्ष में कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह ने जनदर्शन कार्यक्रम में पहुंचे जनसामान्य लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनी। उन्होंने जनदर्शन में पहुंचे सभी लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और समुचित समाधान एवं निराकरण करने संबंधित विभागों को शीघ्र कार्यवाही कर आवश्यक पहल करने को कहा। जनदर्शन में अपर कलेक्टर श्री विरेन्द्र सिंह भी उपस्थित थे। जनदर्शन में अवैध कब्जा, आवासीय पट्टा, प्रधानमंत्री आवास, भूमि सीमांकन कराने, सीसी रोड निर्माण, ऋण पुस्तिका सुधार, आर्थिक सहायता राशि दिलाने सहित विभिन्न मांगों एवं समस्याओं से संबंधित आज 140 आवेदन प्राप्त हुए।इसी कड़ी में जुनवानी-खम्हरिया मार्ग चौड़ीकरण से प्रभावित वार्ड क्रमांक 1 के निवासियों ने पुनर्व्यवस्थापन की मांग की। उन्होंने बताया कि लोक निर्माण विभाग द्वारा जुनवानी खम्हरिया नगर होते हुए आईआईटी भिलाई पहुंच मार्ग के दोनों तरफ प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण से करीब 50 वर्षों से रह रहे कई मकान और दुकान प्रभावित होंगे। रहवासियों ने वैकल्पिक व्यवस्था कराकर कब्जा खाली कराकर निर्माण कार्य शुरू कराने के लिए आवेदन दिया। इस पर कलेक्टर ने ईई लोक निर्माण विभाग को कार्यवाही करने को कहा।कोलिहापुरी के किसानों ने खेतों से पानी निकासी की समस्या के समाधान कराने आवेदन दिया। किसानों ने बताया कि कोलिहापुरी गांव में वालफोर्ट मंगलम सिटी का निर्माण होने के कारण बॉड्रीवाल का निर्माण किया जा रहा है, जिसके कारण किसानों के खेतों में बारिश का पानी निकासी नही हो पा रहा है। लगभग 100 किसानों की खेती प्रभावित हो रही है। किसानों ने पानी निकासी की व्यवस्था कराने की मांग की, ताकि उनकी कृषि प्रभावित न हो। इस पर कलेक्टर ने निरीक्षण कर तहसीलदार दुर्ग को आवश्यक कार्यवाही करने कहा।वृंदा नगर बोरसी में वार्डवासियों ने नाले के गंदे पानी के तालाब में सीधे जाने की समस्या को लेकर कार्यवाही करने की मांग की। बस्ती का गंदा पानी नाली के माध्यम से सीधे तालाब में प्रवाहित हो रहा है, जिससे तालाब का पानी अत्यधिक दुषित एव अनुपयोगी हो चुका है। तालाब क्षेत्रवासियों के दैनिक उपयोग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्तमान में गंदगी और मच्छरों के बढ़ने से जनस्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। निवासियों ने नाली डायवर्जन या अन्य स्थायी समाधान कराने आवेदन दिया। इस पर कलेक्टर ने नगर निगम दुर्ग को आवश्यक कार्यवाही करने को कहा।धमधा नाका अंडरब्रिज और सिंधिया नगर क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट व सड़क सीमेंटिकरण की मांग की। क्षेत्र के रहवासियों ने बताया कि अंडरब्रिज में रोशनी की व्यवस्था नहीं होने से दुर्घटना का खतरा बना रहता है, वहीं सड़क की खराब स्थिति से लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है। इस पर कलेक्टर ने एनएचएआई को निरीक्षण कर आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए।उतई क्षेत्र के द्रोणाचार्य विद्यालय परिसर में अवैध कब्जे को लेकर शिकायत की गई। स्कूल के पंद्रह-बीस पान ठेले, मटेरियल सप्लायर ऑफिस और मुर्गी दुकानें परिसर में संचालित हैं, जिससे छात्र और महिला शिक्षकों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। पान ठेलों में नशीले गुटखे तम्बाखू खुले आम बिक रहा है इससे हमारी भावी पीढ़ी पर इसका प्रतिकूल असर पड़ सकता है। क्षेत्रवासियों ने भूमि कब्जामुक्त करने और सुरक्षा बाउंड्रीवाल बनाने की मांग की है। इस पर कलेक्टर ने सीएमओ उतई को निरीक्षण कर तत्काल कार्यवाही करने को कहा।
- रायपुर / प्रदेश में चल रहे जनगणना कार्य की शुरूआत हो चुकी है। मकानों में नंबरिंग की जा चुकी है। कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह आज इसका जायज़ा लेने राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों में गए। उनके साथ निगम आयुक्त श्री विश्वदीप, जिला पंचायत सीईओ श्री कुमार बिश्वरंजन, एसडीएम श्री नंदकुमार चौबे भी मौजूद थे। कलेक्टर डॉ. सिंह ने मकानों में किए गए नंबरिंग का अवलोकन किया और नागरिकों से जनगणना कार्य में सहयोग करने का आग्रह किया। उल्लेखनीय है कि जनगणना कार्य शुरू हो चुकी है जिसमें 17 अप्रैल से 01 मई तक स्व-गणना की जाएगी एवं 02 मई से 31 मई तक मकान सूचीकरण का कार्य किया जाएगा, जिसमें आमजनों से कुल 33 प्रश्नों का जवाब मांगा जाएगा।
- -सीईओ जिला पंचायत ने जिला स्तरीय पुरातत्व समिति के सदस्यों की बैठक लेकर दिए आवश्यक दिशा-निर्देश-अभियान के क्रियान्वयन के संबंध में दिया गया प्रशिक्षणबालोद। संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के निर्देशानुसार बालोद जिले में ज्ञान भातरम् पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान के क्रियान्यवन का कार्य प्रारंभ हो गया है। बालोद जिले में इसका सफल क्रियान्वयन सुनिश्चित करने हेतु कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा की अध्यक्षता में जिला स्तरीय पुरातत्व समिति का भी गठन किया गया। इसके साथ ही पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान के कार्यों का सफल क्रियान्वयन हेतु जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुनील चंद्रवंशी को नोडल अधिकारी एवं डिप्टी कलेक्टर श्रीमती प्राची ठाकुर को सहायक नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। इसके अलावा जनसंपर्क अधिकारी श्री चंद्रेश ठाकुर, जिला शिक्षा अधिकारी श्रीमती मधुलिका तिवारी, सहायक अधीक्षक श्री भूपेन्द्र तांडेकर एवं शासकीय नवीन काॅलेज घोटिया के सहायक प्राध्यापक श्री दीपक मेश्राम को समिति का सदस्य बनाया गया है। कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय समिति के माध्यम से जिले में पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान के सफल क्रियान्वयन के साथ-साथ पाण्डुलिपियों की पहचान एवं दस्तावेजी गतिविधियां संचालित की जाएगी। कलेक्टर एवं समिति के अध्यक्ष श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के निर्देशानुसार सीईओ जिला पंचायत एवं समिति के नोडल अधिकारी श्री सुनील चंद्रवंशी ने आज अपने कक्ष में जिला स्तरीय समिति के सदस्यों एवं जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों तथा मुख्य नगर पालिका अधिकारियों की बैठक लेकर जिले में पाण्डुलिपियों के सर्वेक्षण अभियान का सफल क्रियान्वयन तथा पाण्डुलिपियों की पहचान एवं दस्तोवजीकरण गतिविधियों को संपादित करने हेतु तैयार की गई रणनीति के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। बैठक में डिप्टी कलेक्टर एवं सहायक नोडल अधिकारी श्रीमती प्राची ठाकुर, जनसंपर्क अधिकारी एवं जिला स्तरीय समिति के सदस्य श्री चंद्रेश ठाकुर, सहायक प्राध्यापक श्री दीपक मेश्राम सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारीगण उपस्थित थे।बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं नोडल अधिकारी श्री सुनील चंद्रवंशी ने कहा कि संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार की पहल पर प्रारंभ ज्ञान भारतम् पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान भारत के अमूल्य पाण्डुलिपि विरासत के संरक्षण, संवर्धन और दस्तावेजीकरण के लिए प्रारंभ की गई एक राष्ट्रीय पहल है। उन्होंने कहा कि इन पाण्डुलिपियों में हमारी सभ्यता का ज्ञान, परंपरा, विज्ञान, दर्शन और सांस्कृतिक स्मृतियां सुरक्षित है। जिन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है। इस अभियान के अंतर्गत ताड़ पत्र, दुर्लभ हस्तलिखित ग्रंभ, पाण्डुलिपियों तथा अन्य प्राचीन दस्तावेजों का चिन्हांकन एवं सूचीकरण किया जा रहा है। श्री चंद्रवंशी ने बताया कि नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में पाडुलिपियों की पहचान एवं दस्तावेजीकरण के लिए सर्वेयर नियुक्त किए जाएंगे। इसके अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों के लिए ग्राम पंचायत सचिवों एवं शहरी क्षेत्रों के लिए वार्ड मुहर्रिरों को सर्वेयर नियुक्त किया गया है। सर्वे का संपूर्ण कार्य ज्ञान भारतम् मोबाईल एप्प के माध्यम से किया जाएगा। इसके साथ ही इस अभियान से आम नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित करने गतिविधियां भी आयोजित की जाएगी। बैठक में उपस्थित अधिकारियों को आज ज्ञान भारतम् मोबाईल एप्प के माध्यम से पाण्डुलिपियों सर्वेक्षण अभियान के क्रियान्वयन के संबंध में प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया। इस दौरान पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से ज्ञान भारतम् मोबाईल एप्प के माध्यम से सर्वेक्षण कार्य के विभिन्न प्रक्रियाओं के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। बैठक में बताया गया कि विद्यालयों एवं महाविद्यालयों, शासकीय पुस्तकालयों, संग्रहालयों, शिक्षण एवं शोध संस्थानों, संस्कृत पाठ शालाएं, मठ, मंदिर, आश्रम, गुरूकुल एवं जिले में स्थित ट्रस्टों के अलावा संग्रह कर्ताओं, पुरोहितों, धर्माचार्यों, ज्योतिषाचार्यों, आयुर्वेदाचार्यों के साथ-साथ संस्कृत विद्वानों के पास भी पाण्डुलिपि की संग्रह होने की संभावना है। बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों एवं मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को सर्वेक्षण कार्य को निर्धारित समयावधि में सफलतापूर्वक संपन्न करने के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण का कार्य संग्रहकर्ता एवं जिम्मेदार प्रभारी अधिकारी के सहमति से किया जाएगा।
- रायपुर। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘‘बिहान’’ अंतर्गत स्व-सहायता समूह की महिलाओं को विभिन्न आजीविका मूलक गतिविधियों से जोड़कर उनके परिवार की वार्षिक आय 01 लाख रूपये या उससे अधिक आय अर्जित करने में सक्षम बनाकर आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। जिसके तहत् बालोद जिले में 20 हजार 982 लखपति दीदी बनायी गई है। इसके विस्तृत स्वरूप में लखपति ग्राम की अवधारणा भी विकसित की गई है जो कि ग्रामीण विकास की एक ऐसी दूरदर्शी सोच है, जिसके केंद्र में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की आर्थिक उन्नति है। बालोद जिले में इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गाँव का प्रत्येक परिवार सालाना कम से कम 01 लाख रुपये या उससे अधिक की शुद्ध आय अर्जित कर सके। यहाँ इस अवधारणा के निम्न मुख्य पहलुओं को लेकर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं विभागीय उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में बालोद जिले में कार्य कराया जा रहा है। लखपति ग्राम का लक्ष्य केवल गरीबी रेखा से बाहर निकलना नहीं है बल्कि ग्रामीण परिवारों को ’लखपति दीदी’ के रूप में विकसित करके उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। यह स्थायी आजीविका और बेहतर जीवन स्तर पर केंद्रित है जिसके तहत् बहुआयामी आजीविका स्त्रोत को प्राथमिकता दी गई जिसमें एक परिवार केवल एक स्त्रोत जैसे सिर्फ खेती पर निर्भर रहकर लखपति नहीं बन सकता। इसके लिए 03-04 विभिन्न आय के स्रोतों को अपनाया गया है। उन्नत कृषि अंतर्गत जैसे बेमौसमी सब्जियाँ, नकदी फसलें और जैविक खेत, पशुपालन अंतर्गत डेयरी, बकरी पालन, मुर्गी पालन या मत्स्य पालन, गैर कृषि उद्यम अंतर्गत मशरूम उत्पादन, सिलाई या छोटे ग्रामीण उद्योग, कौशल विकास अंतर्गत प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत तकनीकी प्रशिक्षण शामिल है।जिले में लखपति ग्राम की सफलता हेतु निम्न बिन्दुओं को आधार बनाकर क्रियान्वयन किया जा रहा है। प्रत्येक परिवार की उनकी वर्तमान आय और भविष्य के लक्ष्यों के आधार पर एक ’आजीविका योजना’ तैयार कराया गया है। तत्पश्चात् वित्तीय समावेशन के माध्यम से कम ब्याज पर बैंक ऋण 4054 एसएचजी को 114 करोड़ ऋण प्रदाय किया गया है एवं वूमेन लेड इंटरप्राईज फायनेंस के तहत् 801 एसएचजी को 10 करोड़ का ऋण दिया किया गया है। इसी क्रम में स्व-सहायता समूह द्वारा उत्पादित वस्तुओं को क्षेत्रीय सरस मेला, स्थानीय बाजार एवं शासकीय कार्यालय मंे स्टाॅल लगाकर विक्रय किया जा रहा है। स्वयं सहायता समूहों और ग्राम संगठनों के माध्यम से सामूहिक शक्ति का उपयोग कर एक तंत्र का निर्माण किया गया है।इस अवधारणा को धरातल पर उतारने के लिए ’आजीविका सखियों’ और ’पशु सखियों’ की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, जो घर-घर जाकर महिलाओं को तकनीकी जानकारी और प्रशिक्षण प्रदान करती हैं। बालोद जिले के लिए यह गौरव का विषय है कि डौंडी विकासखंड का औराटोला गाँव जिले का प्रथम ’लखपति ग्राम’ बनकर उभरा है। इस गाँव ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि सही मार्गदर्शन और दृढ़ इच्छा शक्ति हो तो सामूहिक प्रयास से गरीबी को मात दी जा सकती है। औराटोला की सफलता के पीछे बिहान योजना और महिलाओं की अटूट मेहनत है। यहाँ की महिलाओं ने पारंपरिक खेती के दायरे से बाहर निकलकर बहुआयामी आजीविका को अपनाया। गाँव में अब दर्जनों ऐसी महिलाएं हैं जिनकी वार्षिक आय 01 लाख रुपये से अधिक है। इसके अंतर्गत महिलाओं ने खाली पड़ी जमीनों पर उन्नत किस्म की सब्जियाँ उगाना शुरू किया, उन्नत नस्ल के पशु और वैज्ञानिक तरीके से देखरेख करना, गाँव में उन महिलाओं का समूह बनाया गया जो अन्य महिलाओं को भी आर्थिक नियोजन सिखाती हैं। बालोद जिले के औराटोला जैसे गाँवों की प्रेरणा लेकर यहाँ तीन महिलाओं की काल्पनिक लेकिन यथार्थवादी सफलता की कहानियाँ दर्शाती हैं कि कैसे अलग-अलग क्षेत्रों में काम करके महिलाएँ ’लखपति दीदी’ बन रही हैं।कुमेश्वरी मसिया ने बताया कि उसने प्रेरणा स्वयं सहायता समूह से जुड़कर मत्स्य विभाग से मत्स्य पालन का प्रशिक्षण लिया। उन्होंने समूह के माध्यम से 50 हजार रूपये का ऋण लिया और तालाब की सफाई करवाकर उसमें रोहू और कतला मछलियों के बीज डाले। मछली पालन के साथ-साथ कुमेश्वरी नें पैतृक भूमि 20 डिसमिल में सब्जी बाड़ी का कार्य प्रारंभ किया। मछलीपालन हेतु वर्तमान में मत्स्य विभाग द्वारा उन्हें मछली जाल एवं आईस बाॅक्स प्रदाय किया गया है। परिणाम स्वरूप आज कुमेश्वरी साल में दो बार मछली की खेप बेचती हैं और सब्जी बेचकर एवं खर्च काटकर उनकी वार्षिक शुद्ध आय 01 लाख 17 हजार रूपये तक पहुँच गई है।बिहान योजना के तहत अटल महिला स्व-सहायता समूह के अध्यक्ष लाकेश्वरी दीदी बताती है कि समूह के 10 सदस्यों ने फाईल पैड बनाने का प्रशिक्षण लिया और सभी सदस्य सहमत होकर बिहान के माध्यम से 01 लाख रूपये बैंक से ऋण लेकर फाईल पैड की एक छोटी यूनिट स्थापित किया और फाईल पैड विक्रय हेतु उन्होंने केवल शहर पर निर्भर रहने के बजाय आसपास के लोकल बुक डिपो, एवं शासकीय कार्यालय में कम कीमत पर फाईल पैड उपलब्ध कराया जा रहा हैं। फाईल पैड अच्छी गुणवत्ता और कम दाम के कारण उनके मांग बढ़ गई इस प्रकार सभी खर्च निकालने पर प्रत्येक माह सभी सदस्य 07 से 08 हजार रूपये आय अर्जित कर रही है।प्रेरणा स्व-सहायता समूह की लोकेश्वरी साहू ने लखपति दीदी पहल के तहत पशु पालन हेतु ’पशु सखी’ से प्रशिक्षण लिया और बिहान के माध्यम से 01 लाख का ऋण लेकर दो उन्नत नस्ल की जर्सी गायें खरीदीं। उन्होंने पारंपरिक चारे के बजाय ’अजोला’ और संतुलित पशु आहार का उपयोग शुरू किया। पशु पालन के साथ-साथ लोकेश्वरी ने आरसेटी के माध्यम से सिलाई मशीन का प्रशिक्षण लेकर सिलाई कार्य प्रारंभ की एवं मशरूम उत्पादन हेतु लोकेश्वरी दीदी ने कृषि विज्ञान केन्द्र अरौद से मशरूम का प्रशिक्षण प्राप्त कर मशरूम उत्पादन प्रारंभ किया प्रति दिन 10-15 कि.ग्रा. मशरूम उत्पादन कर 200 रू. प्रति कि.ग्रा. की दर से लोकल बाजार, सी.एल.एफ. मीटिंग एवं स्कूल, जनपद एवं जिला कार्यालय एवं अन्य विभागों में जाकर विक्रय कर रही है। लोकेश्वरी साहू बताती है कि वह केवल दूध बेचना ही नहीं बल्कि बचे हुए दूध से खोवा और पनीर बनाना भी सीखा, जिससे मुनाफा दोगुना हो गया। परिणाम स्वरूप दूध और दुग्ध उत्पादों की बिक्री, सिलाई कार्य एवं मशरूम से उनकी मासिक आय 11 हजार रूपये से ऊपर हो गई। जिससे वे साल भर में एवं अन्य कृषि कार्यो से 02 लाख 60 हजार रूपये से अधिक कमा रही हैं।जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुनील कुमार चंद्रवंशी ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मंशानुरूप एवं उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन तथा कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के निर्देशन में बिहान टीम के साथ इस लखपति पहल की मुहिम को जिले में पूरी सक्रियता से आगे बढ़ाया जा रहा है। इससे मुख्यतः संभावित लखपति दीदी के वर्तमान आय, आंकलन एवं अभिसरण के माध्यम से आवश्यक वित्तीय एवं तकनीकी हस्तक्षेप पर फोकस किया गया है। प्रत्येक परिवार हेतु कार्य योजना तैयार कर माइक्रो लेवल पर इसके क्रियान्वयन एवं मैन्युुअल तथा डिजिटल माॅनिटरिंग की व्यवस्था सुनिश्चित् की गई है। अभी तक जिले में 26 हजार लक्ष्य के विरूद्ध 20 हजार 982 दीदीयों को लखपति श्रेणी में लाया जा चुका है। शेष को जनवरी से मार्च तक के चैथे क्वार्टर की डिजिटल आजीविका रजिस्टर की एंट्री अप्रैल में होनी है लक्ष्य पूर्ण कर लिया जाएगा। लखपति दीदी पहल के क्रियान्वयन में इस विषय पर विशेष ध्यान दिया गया है कि उनके वर्तमान आय स्त्रोत को ही विकसित कर दो से तीन गतिविधियों से जोड़कर आय में बढ़ोतरी किया जाना है। इसी क्रम में बालोद जिले में विकासखंड डौंडी के ग्राम औराटोला के कुल 65 परिवार 06 स्व-सहायता समूह के 65 सदस्य लखपति दीदी बनी है। उक्तानुसार प्राप्त ग्राम सभा के प्रस्ताव अनुसार ग्राम औराटोला को लखपति ग्राम बनाई गई है। इसी प्रकार जिले के अन्य विकासखंड में लखपति ग्राम बनाने की कार्यवाही की जा रही है। राज्य कार्यालय से तकनीकी सलाहकार एजेंसी ट्रीप टीम द्वारा भौतिक सत्यापन कर लिया गया है यथाशीघ्र राज्य स्तर से भी ग्राम औराटोला को लखपति ग्राम घोषित करने कार्यवाही की जाएगी।लखपति ग्राम केवल एक आर्थिक आंकड़ा नहीं है बल्कि यह ग्रामीण भारत के आत्मविश्वास का प्रतीक है। औराटोला की सफलता यह सिखाती है कि कौशल विकास ही असली ताकत है। सरकारी योजनाओं जैसे लखपति दीदी और बिहान का सही समय पर लाभ उठाना विकास की कुंजी है। परिवार के सदस्यों का सहयोग और महिलाओं का नेतृत्व ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदल सकता है। यह गाँव अब केवल बालोद जिले के लिए ही नहीं बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए एक रोल मॉडल बन चुका है। अन्य ग्राम पंचायतों की महिलाएं और ग्रामीण अब औराटोला का भ्रमण कर यहाँ के मॉडल्स को समझने आ रहे है
- -किसानों को 314 करोड़ रुपये से अधिक की सहायतारायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किसानों की आय में वृद्धि एवं कृषि क्षेत्र में स्थायित्व लाने के उद्देश्य से फसल विविधीकरण को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी कड़ी में कृषक उन्नति योजना अंतर्गत वर्ष 2025-26 में राज्य के 25.28 लाख किसानों को 12 हजार करोड़ रूपए की आदान सहायता के रूप में प्रदाय किए गए।राज्य सरकार ने धान पर निर्भरता कम करते हुए किसानों को दलहनी, तिलहनी एवं मोटे अनाज सहित अन्य लाभकारी फसलों की ओर प्रोत्साहित किया जा रहा है। योजना के तहत उन किसानों को प्रोत्साहन दिया गया है, जिन्होंने धान के अतिरिक्त दलहनी-तिलहनी फसलें, कोदो-कुटकी, रागी, मक्का एवं कपास जैसी फसलों का उत्पादन किया है।प्राप्त जानकारी के अनुसार कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत राज्य के 3 लाख 6 हजार 685 किसानों को 10 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से कुल 311 करोड़ 87 लाख 79 हजार रुपये की आदान सहायता राशि प्रदान की गई है। यह सहायता सीधे किसानों के बैंक खातों में अंतरित की गई है, जिससे उन्हें खेती की लागत में राहत मिली है। इसके अतिरिक्त, जिन किसानों ने पारंपरिक धान की खेती को छोड़कर पूर्ण रूप से वैकल्पिक फसलों को अपनाया है, उन्हें विशेष प्रोत्साहन के तहत 11 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से सहायता दी गई है। इस श्रेणी में 2 हजार 235 किसानों को कुल 2 करोड़ 72 लाख 97 हजार रुपये की राशि प्रदान की गई है।इस प्रकार, कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत कुल 314 करोड़ 60 लाख 76 हजार रुपये की राशि किसानों के खातों में सीधे हस्तांतरित कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया गया है। राज्य सरकार की यह पहल न केवल किसानों की आय में वृद्धि कर रही है, बल्कि कृषि क्षेत्र में संतुलन, पोषण सुरक्षा और टिकाऊ खेती को भी बढ़ावा दे रही है। फसल विविधीकरण से जहां एक ओर किसानों को बाजार में बेहतर मूल्य मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर भूमि की उर्वरता में भी सुधार हो रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार की यह दूरदर्शी नीति किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा प्रदान कर रही है।
- -पक्का घर बना सम्मानजनक जीवन का आधाररायपुर / बीजापुर जिले के उसूर विकासखंड अंतर्गत धर्मावरम ग्राम से एक सकारात्मक बदलाव की कहानी सामने आई है, जो नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से हो रहे विकास की नई तस्वीर बयान करती है। कभी नक्सल प्रभावित यह इलाका अब शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से विकास की मुख्यधारा से जुड़ता दिखाई दे रहा है।इसी परिवर्तन की मिसाल हैं 60 वर्षीय श्रीमती गुण्डी बुचम्मा, जिन्होंने वर्षों तक कच्चे एवं खपरैल वाले मकान में कठिन परिस्थितियों के बीच जीवन व्यतीत किया। बारिश के मौसम में घर की छत से पानी टपकना, असुरक्षा और असुविधा उनके जीवन का हिस्सा था। किन्तु अब प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत उन्हें पक्का मकान प्राप्त हुआ है, जिसने उनके जीवन में एक नया आत्मविश्वास और सुरक्षा प्रदान की है।यह पक्का मकान उनके लिए केवल एक आवास नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन और स्थायित्व का प्रतीक बन गया है। उनके पुत्र जगत बुचम्मा के अनुसार, अब परिवार सुरक्षित वातावरण में रह रहा है और दैनिक जीवन में काफी सुविधा महसूस कर रहा है।स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में नक्सल प्रभाव के कारण विकास कार्य बाधित होते थे, लेकिन वर्तमान में प्रशासन की सक्रियता और सुरक्षा व्यवस्था के सुदृढ़ होने से योजनाओं का क्रियान्वयन तेज हुआ है। शासन की योजनाएं अब दूरस्थ और अंदरूनी क्षेत्रों तक प्रभावी रूप से पहुंच रही हैं, जिससे आमजन का विश्वास भी लगातार बढ़ रहा है। धर्मावरम की यह कहानी केवल एक परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बदलते बीजापुर की तस्वीर है, जहां अब भय और असुरक्षा की जगह विकास, विश्वास और उम्मीद ने ले ली है। शासन की सतत पहल से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन की यह प्रक्रिया निरंतर आगे बढ़ रही है।
- रायपुर /छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल द्वारा आयोजित संचालक, संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं, नवा रायपुर से प्राप्त प्रस्ताव के आधार पर फार्मासिस्ट ग्रेड-2 के रिक्त पदों पर भर्ती हेतु लिखित परीक्षा (HSP-25) का आयोजन 12 अप्रैल 2026 (रविवार) को किया जाएगा। यह परीक्षा सुबह 11:00 बजे से दोपहर 01:15 बजे तक जिले के विभिन्न परीक्षा केन्द्रों में संचालित होगी।परीक्षा से संबंधित गोपनीय सामग्री का वितरण 12 अप्रैल 2026 को प्रातः 7:00 बजे से जिला कोषालय, कलेक्टर परिसर रायपुर से किया जाएगा। यह परीक्षा में जिले के 17 परीक्षा केंद्रों में आयोजित होगी जिसमें कुल 5577 परीक्षार्थी शामिल होंगे। परीक्षा के सुचारू संचालन के लिए श्री उपेन्द्र किण्डो, डिप्टी कलेक्टर रायपुर को नोडल अधिकारी तथा श्री केदारनाथ पटेल, रोजगार अधिकारी, विशेष रोजगार कार्यालय रायपुर को सहायक नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
- -स्व-सहायता समूह से जुड़कर बनीं आत्मनिर्भर, प्रतिमाह कमा रही 10 हजार से 40 हजार रूपए तकरायपुर। जहां चाह-वहां राह, इस युक्ति को चरितार्थ किया है सविता ने, मुंगेली जिले के पथरिया विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम अमलडीहा निवासी श्रीमती सविता यादव आज स्व-सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल बन गई हैं। कभी आर्थिक तंगी और कर्ज के बोझ से जूझने वाली सविता यादव आज अपने हुनर और मेहनत के दम पर सशक्त जीवन जी रही हैं। आर्थिक सशक्तिकरण के साथ ही सविता यादव के जीवन में कई सकारात्मक परिवर्तन आए हैं। अब वे अपने परिवार की जरूरतों को आसानी से पूरा कर पा रही हैं, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी बेहतर ध्यान दे रही हैं। समूह में उनके सक्रिय योगदान और उत्कृष्ट कार्य को देखते हुए वे वर्तमान में आरबीके के पद पर भी कार्यरत हैं।सविता यादव ने बताया कि समूह से जुड़ने से पहले उनकी आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। परिवार की आजीविका मजदूरी पर निर्भर थी और सीमित आय के कारण घर की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो जाता था। मजबूरी में उन्हें गांव के साहूकारों से ऊंचे ब्याज पर कर्ज लेना पड़ता था, जिससे वे कर्ज के जाल में फंसी रहती थीं। बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी आवश्यक जरूरतें भी प्रभावित होती थीं। सविता यादव के जीवन में सकारात्मक बदलाव तब आया, जब वे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के अंतर्गत गौरी महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने बचत, बैंकिंग और वित्तीय प्रबंधन के महत्व को समझा। उन्हें रिवॉल्विंग फंड, कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड तथा बैंक लिंकेज के माध्यम से आसान शर्तों पर ऋण प्राप्त हुआ।प्राप्त ऋण राशि का सदुपयोग करते हुए सविता यादव ने अपने गांव में सिलाई सेंटर की शुरुआत की। अपने कौशल और मेहनत के बल पर उन्होंने इस कार्य को आगे बढ़ाया और धीरे-धीरे उनकी आय में वृद्धि होने लगी। जहां पहले उनकी मासिक आय लगभग 10 हजार रुपये थी, वहीं अब बढ़कर 40 हजार रुपये तक पहुंच गई है। सविता यादव आज न केवल खुद आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि अपने गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा स्रोत बन गई हैं।
- -तकनीक, तत्परता और जनसहभागिता से सुरक्षित हो रहे कवर्धा के वनरायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के कवर्धा परियोजना मंडल में वनों की सुरक्षा अब तकनीक और त्वरित कार्रवाई के समन्वय से और अधिक प्रभावी हो गई है। 25 हजार 436 हेक्टेयर के विशाल वन क्षेत्र, जो 25 बीटों में विभाजित है, की निगरानी के लिए ‘फायर अलर्ट’ सिस्टम सक्रिय किया गया है, जिससे आग की घटनाओं पर समय रहते नियंत्रण संभव हो पा रहा है।उल्लेखनीय है कि वन विभाग द्वारा FMIS (फॉरेस्ट मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम) के माध्यम से सभी मैदानी अधिकारियों और कर्मचारियों को जोड़ा गया है। जैसे ही किसी क्षेत्र मंय आग लगने की सूचना मिलती है, संबंधित कर्मचारियों को तत्काल अलर्ट प्राप्त होता है और वे बिना विलंब मौके पर पहुंचकर आग पर नियंत्रण पा लेते हैं।अग्नि सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए मानव संसाधन और उपकरणों को भी सुदृढ़ किया गया है। प्रत्येक बीट में अग्नि सुरक्षा श्रमिकों की तैनाती की गई है, जो लगातार सतर्क रहते हैं। फायर सीजन शुरू होने से पहले ही संवेदनशील क्षेत्रों में फायर लाइन तैयार कर ली गई है, जिससे आग के फैलाव को रोका जा सके। साथ ही, सभी परिक्षेत्रों में आधुनिक फायर ब्लोअर उपलब्ध कराए गए हैं, जो त्वरित नियंत्रण में सहायक साबित हो रहे हैं। सूचना के त्वरित आदान-प्रदान के लिए सोशल मीडिया समूह भी बनाए गए हैं, जहां आग से संबंधित सूचना तुरंत साझा की जाती है। इसके साथ ही, वन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले ग्रामीणों को जागरूक कर उनकी सहभागिता सुनिश्चित की जा रही है, जिससे सामूहिक प्रयासों से बेहतर परिणाम मिल रहे हैं।अग्नि नियंत्रण के बाद की पूरी जानकारी विभागीय वेबसाइट पर दर्ज की जाती है, जिससे कार्यों में पारदर्शिता बनी रहती है। इन सभी प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। मार्च 2026 तक इस परियोजना मंडल में केवल 23 अग्नि प्रकरण दर्ज किए गए हैं, जिनमें भी त्वरित कार्रवाई के चलते आग पर शीघ्र काबू पा लिया गया। इससे वन संपदा और वन्य जीवों को होने वाली संभावित क्षति को न्यूनतम किया जा सका है। इस प्रकार तकनीक, सजगता और जनसहभागिता के समन्वित प्रयासों से कवर्धा के वन अब अधिक सुरक्षित हो रहे हैं और यह पहल एक प्रभावी मॉडल के रूप में उभर रही है।
- -शिक्षा में आगे बढ़ने का दे रही अवसर, बढ़ रहा दिव्यांग विद्यार्थियों का आत्मविश्वासरायपुर । मेहनत, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ यदि कोई आगे बढ़े तो कोई भी बाधा उसकी सफलता की राह में रुकावट नहीं बन सकती। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा दिव्यांग विद्यार्थियों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के उद्देश्य से संचालित “क्षितिज अपार संभावनाएं” योजना ऐसे ही विद्यार्थियों के जीवन में नई उम्मीद जगा रही है। यह योजना दिव्यांग छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहन राशि प्रदान कर उनकी पढ़ाई को आगे बढ़ाने के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास को भी मजबूत कर रही है।कबीरधाम जिले में इस योजना के माध्यम से वर्ष 2023 से 2026 तक कुल 35 दिव्यांग विद्यार्थियों को 4 लाख 76 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जा चुकी है। इसमें सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत 6 दिव्यांगजनों को 2 लाख 90 हजार रुपये तथा शिक्षा प्रोत्साहन योजना के तहत 29 दिव्यांग विद्यार्थियों को 1 लाख 86 हजार रुपये की सहायता राशि दी गई है। इस योजना के माध्यम से दिव्यांग विद्यार्थियों को न केवल आर्थिक सहयोग मिल रहा है, बल्कि उन्हें अपने सपनों को साकार करने का नया हौसला भी मिल रहा है। शासन की यह पहल दिव्यांग विद्यार्थियों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हुए उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है।कवर्धा के ऐसे ही एक होनहार छात्र रवियांशु साहू ने अपनी दिव्यांगता को कमजोरी नहीं, बल्कि हौसले की ताकत बनाकर यह साबित कर दिया है कि कठिन परिस्थितियों में भी मेहनत और लगन से बड़ी उपलब्धि हासिल की जा सकती है। कवर्धा के दुर्गावती चौक स्थित स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में अध्ययनरत रवियांशु साहू ने कक्षा 10वीं की परीक्षा में कुल 600 अंकों में से 378 अंक (63 प्रतिशत) प्राप्त किए। रवियांशु 40 प्रतिशत अस्थि बाधित दिव्यांग हैं, इसके बावजूद उन्होंने निरंतर परिश्रम और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ पढ़ाई करते हुए यह सफलता हासिल की। शिक्षा सत्र 2024-25 में कक्षा 10वीं में दिव्यांगजनों की श्रेणी में जिला कबीरधाम में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्र रवियांशु साहू को समाज कल्याण विभाग द्वारा 2 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। यह राशि उन्हें उनकी शैक्षणिक उपलब्धि के लिए प्रोत्साहन स्वरूप दी गई।
- -आंगनवाड़ी केंद्र में कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को कराया गया योग, स्वस्थ तन-मन पर दिया गया जोरकोरिया। जिले के आंगनवाड़ी केंद्र कटगोडी में मंगलवार को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं को योगाभ्यास कराया गया। यह पहल कलेक्टर श्रीमती चंदन त्रिपाठी के मार्गदर्शन में संचालित की जा रही है, जिसके अंतर्गत विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों में योग को बढ़ावा दिया जा रहा है।आयुष जिलाधिकारी डॉ. एलविना ग्रेस टोप्पो ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं एवं नन्हे बच्चों में योग के प्रति रुचि जागृत करना तथा 'स्वस्थ तन, स्वस्थ मन' की अवधारणा को साकार करना है।उन्होंने कहा कि योगाभ्यास हर वर्ग और हर आयु के लोगों के लिए लाभकारी है, लेकिन इसे शुरू करने से पहले विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में करना आवश्यक है। वर्तमान समय में भागदौड़ भरी जीवनशैली, तनाव और अनियमित खानपान के कारण लोग शारीरिक एवं मानसिक समस्याओं से जूझ रहे हैं, ऐसे में योग एक प्रभावी समाधान के रूप में उभर रहा है। कार्यक्रम के माध्यम से स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने और नियमित योगाभ्यास को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का संदेश भी दिया गया।
- -जल संचयन हेतु समुदाय की सहभागिता पर जोर-राजस्व शिविर में पटवारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के दिए निर्देशबलौदाबाजार। कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने मंगलवार को साप्ताहिक समय -सीमा की बैठक में राज्य और केंद्र शासन की.विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने भूमिगत जल के रिचार्ज हेतु सभी शासकीय भवनों में सोखता गढ्ढा और रेन वाटर हार्वेस्टिंग की संरचनाएँ निर्मित करने और जन भागीदारी से जल संचयन के कार्य पूर्ण करने पर जोर दियाकलेक्टर ने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये कि नहरों के आसपास भी ऐसी संरचनाएं निर्मित करें जो पानी रोककर भूमिगत जल रिचार्ज में सहायक हों।उन्होंने खेतों के सबसे निचले क्षेत्र में भी जल संरक्षण की संरचना बनाने के निर्देश दिए हैं। श्री शर्मा ने आंगनवाड़ी,शासकीय और निजी स्कूलों में भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग और सोखता पिट निर्माण के निर्देश दिए। उन्होंने इस संबंध में जन जागरूकता हेतु अधिक से अधिक प्रचार प्रस्ताव के साथ आम नागरिकों से इस कार्य में सहयोग की अपील भी की है । जल संचयन की संरचनाओं के गुणवत्ता पूर्ण निर्माण में बाद उसकी फोटो और अनिवार्य जियो टैगिंग के भी निर्देश उन्होंने दिए।बैठक में उन्होंने लोक सेवा गारंटी के तहत विभिन्न प्रकरणों के समय सीमा में निराकरण और पोर्टल में तत्काल एंट्री के निर्देश भी दिए हैं,ऐसा न करने पर संबंधित अधिकारी -कर्मचारी पर लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी । उन्होंने राजस्व पखवाड़े में पटवारियों को अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश देते हुए मामलों का ऑन द स्पॉट निराकरण करने को कहा है। श्री शर्मा ने जनगणना के कार्यों को संवेदनशीलता और कर्मठता से पूर्ण करने के निर्देश भी दिए।उन्होंने कहा जनगणना सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल है इस कार्य में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शासकीय ज़मीन पर अतिक्रमण के मामलों को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने भूराजस्व संहिता के तहत कठोर कार्रवाई के निर्देश सभी अनुविभागीय अधिकारियों को दिए हैं।प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत भूमिहीन नागरिकों को भी लाभान्वित किया जाना है। उन्होंने सभी अनुविभागीय अधिकारियों को पंचायत स्तर पर आबादी भूमि का चिन्हांकन कर भूमिहीनों को योजना का लाभ दिलाने के निर्देश दिए हैं।
- बलौदाबाजार । भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन,हर घर जल के अंतर्गत विकासखंड पलारी के ग्राम पंचायत तेलास में ग्राम के प्रत्येक घर तक स्वच्छ पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित हुई है। इसके साथ हर घर जल प्रमाणीकरण प्राप्त किया है। उपलब्धि के उपरांत जलापूर्ति योजना का विधिवत हस्तांतरण ग्राम पंचायत को कर दिया गया है।योजना के सफल क्रियान्वयन में जनप्रतिनिधियों, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग एवं ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी रही। ग्राम पंचायत स्तर पर पाइपलाइन विस्तार, घरेलू नल कनेक्शन एवं जल संरचनाओं का निर्माण गुणवत्ता के साथ पूर्ण किया गया।योजना के दीर्घकालिक संचालन एवं रख-रखाव को सुनिश्चित करने हेतु ग्राम पंचायत में आवश्यक व्यवस्थाएं स्थापित की गई हैं।योजना के संचालन हेतु प्रति परिवार ₹80 प्रतिमाह जल कर निर्धारित किया गया है।जल आपूर्ति के नियमित संचालन के लिए स्थानीय स्तर पर पंप ऑपरेटर नियुक्त कोयन गया है। योजना के संचालन, रख-रखाव एवं निगरानी की जिम्मेदारी ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति को सौंपी गई है।जल वाहिनी टीम द्वारा समय-समय पर जल की गुणवत्ता की जांच सुनिश्चित की जा रही है।
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-उप मुख्यमंत्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा स्वीकृति आदेश जारी
रायपुर ।नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने कोरबा नगर निगम में चार प्रमुख सड़कों के डामरीकरण के लिए पांच करोड़ 93 लाख 45 हजार रुपए मंजूर किए हैं। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन मंत्री श्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद विभाग ने संचालनालय से इनकी मंजूरी के आदेश जारी कर दिए हैं। उप मुख्यमंत्री श्री साव ने कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करते हुए समय-सीमा में काम पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं।नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने कोरबा नगर निगम के कोरबा जोन में सुनालिया ब्रिज से पॉवर हाउस रोड फाटक अंडर ब्रिज रोड तक डामरीकरण के लिए एक करोड़ 12 लाख 55 हजार रुपए स्वीकृत किए हैं। कोरबा जोन में ही पॉवर हाउस रोड फाटक से पुराने बस स्टैंड अंडर ब्रिज तक डामरीकरण के लिए एक करोड़ 56 लाख 90 हजार रुपए मंजूर किए गए हैं। विभाग ने कोसाबाड़ी जोन अंतर्गत जैन चौक से घंटा घर सड़क तक डामरीकरण के लिए एक करोड़ 25 लाख रुपए तथा घंटा घर से कोसाबाड़ी चौक तक डामरीकरण कार्य के लिए एक करोड़ 99 लाख रुपए मंजूर किए हैं। - रायपुर । महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 9 से 23 अप्रैल 2026 तक देशभर में आठवें ‘पोषण पखवाड़ा-2026’ का आयोजन किया जा रहा है। इस वर्ष का विषय “जीवन के पहले छह वर्षों में मस्तिष्क के विकास को अधिकतम करना” रखा गया है, जो बच्चों के शुरुआती वर्षों में पोषण, देखभाल और शिक्षा के महत्व को रेखांकित करता है। इस राष्ट्रीय अभियान की शुरुआत 9 अप्रैल को नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन से केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी के नेतृत्व में की जाएगी, जिसमें राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर एवं सचिव श्री अनिल मलिक की उपस्थिति रहेगी।छत्तीसगढ़ में भी इस राष्ट्रीय अभियान के अनुरूप राज्य स्तरीय कार्यक्रमों की शुरुआत की जाएगी। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा सभी जिलों के आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से व्यापक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें माताओं, बच्चों, परिवारों और समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने पोषण के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा है कि “एक स्वस्थ बच्चा एक मजबूत राष्ट्र की नींव होता है।” उन्होंने ‘पोषण अभियान’ को जन आंदोलन बताते हुए प्रत्येक मां और बच्चे तक समुचित पोषण पहुंचाने का आह्वान किया है।पोषण पखवाड़ा-2026 के तहत विशेष रूप से मातृ एवं शिशु पोषण, जन्म से 3 वर्ष तक के बच्चों में मस्तिष्क विकास हेतु प्रारंभिक प्रोत्साहन, 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों के लिए खेल-आधारित शिक्षा, स्क्रीन टाइम में कमी और आंगनबाड़ी केंद्रों को सामुदायिक सहयोग से सशक्त बनाने पर फोकस किया जाएगा। वैज्ञानिक तथ्यों के अनुसार, बच्चे के मस्तिष्क का लगभग 85 प्रतिशत विकास छह वर्ष की आयु तक हो जाता है, जिससे इन वर्षों में पोषण और देखभाल की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।राज्य में इस अवधि के दौरान ‘पोषण पंचायत’, जागरूकता अभियान, प्रारंभिक शिक्षण गतिविधियां, स्वास्थ्य एवं पोषण परामर्श सत्र और व्यवहार परिवर्तन से जुड़ी पहलें संचालित की जाएंगी। साथ ही, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका को सशक्त करते हुए जमीनी स्तर पर सेवाओं की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने पर जोर दिया जाएगा।उल्लेखनीय है कि पोषण अभियान आज एक राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन का रूप ले चुका है, जिसका उद्देश्य कुपोषण मुक्त भारत का निर्माण करना है। ‘पोषण पखवाड़ा’ इसी दिशा में जागरूकता, जनभागीदारी और सामुदायिक एकजुटता को बढ़ावा देने का एक सशक्त माध्यम है।छत्तीसगढ़ में इस अभियान के माध्यम से यह संदेश दिया जाएगा कि पोषण, देखभाल, प्रारंभिक शिक्षा और समाज की भागीदारी मिलकर ही एक स्वस्थ, शिक्षित और सशक्त भविष्य की नींव रख सकते हैं।
- -आयोग चुनावों को लोकतंत्र के उत्सव के रूप में लेता है : मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमाररायपुर। भारत निर्वाचन आयोग ने 07 अप्रैल को नई दिल्ली में असम, केरल और पुडुचेरी की विधानसभाओं के आगामी आम चुनावों के लिए अंतर्राष्ट्रीय निर्वाचन आगंतुक कार्यक्रम (IEVP), 2026 की शुरुआत की। मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार ने निर्वाचन आयुक्त डॉ. एस.एस. संधू और डॉ. विवेक जोशी के साथ भारत अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन संस्थान (IIIDEM) में इस कार्यक्रम का उद्घाटन किया। मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत निर्वाचन आयोग (ECI) भारत में चुनावों को लोकतंत्र के उत्सव के रूप में लेता है और इसे ‘मिशन मोड’ में सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य करता है। उन्होंने प्रतिभागियों से राज्यों के दौरे का आनंद लेने तथा भारत की विविधता को सीखने, देखने व अनुभव करने का आह्वान किया।कार्यक्रम के प्रथम चरण में प्रतिनिधि 8-9 अप्रैल 2026 को असम, केरल और पुडुचेरी का दौरा करेंगे। द्वितीय चरण में प्रतिनिधि 20 अप्रैल 2026 से पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु राज्यों का दौरा करेंगे।कार्यक्रम के पहले चरण में दिल्ली स्थित पांच विदेशी मिशनों के प्रतिनिधियों सहित 23 देशों के 43 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। प्रतिनिधियों को IIIDEM में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) का प्रदर्शन दिखाया गया तथा उन्होंने ‘मॉक पोल’ (दिखावटी मतदान) के माध्यम से मतदान प्रक्रिया का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया।प्रतिनिधियों ने भारत की चुनाव प्रक्रिया में तकनीकी हस्तक्षेपों एवं प्रशासनिक सुरक्षा उपायों में गहरी रुचि दिखाई। इस दौरान विशेषज्ञों के साथ संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने अपनी शंकाओं का समाधान प्राप्त किया।प्रतिनिधि 8 अप्रैल को असम, केरल एवं केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की यात्रा करेंगे। वे प्रेषण एवं वितरण केंद्रों, जिला नियंत्रण कक्षों तथा मीडिया निगरानी केंद्रों सहित विभिन्न व्यवस्थाओं का अवलोकन करेंगे तथा 9 अप्रैल 2026 की सुबह वास्तविक मतदान प्रक्रिया के साक्षी बनेंगे। अंतर्राष्ट्रीय निर्वाचन आगंतुक कार्यक्रम (IEVP) भारत निर्वाचन आयोग का एक प्रमुख कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य अन्य देशों के चुनाव प्रबंधन निकायों (EMBs) एवं अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ सहयोग एवं सहभागिता को बढ़ावा देना है। यह कार्यक्रम भारत के चुनावी ढांचे, संस्थागत तंत्र एवं परिचालन व्यवस्था का व्यापक अवलोकन प्रदान करता है तथा विदेशी प्रतिनिधियों को चुनाव प्रबंधन की सर्वोत्तम प्रथाओं एवं नवाचारों से अवगत कराता है। IEVP अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के समक्ष भारत की चुनावी प्रणाली की सुदृढ़ता को प्रदर्शित करता है तथा विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में अपनाई जाने वाली श्रेष्ठ चुनावी प्रक्रियाओं को साझा करने का अवसर प्रदान करता है।
- -कुल 90.5 किमी लंबाई के 15 फोरलेन सड़कों का होगा निर्माण-फोरलेन सड़कों के विस्तार से सुरक्षित यातायात के साथ आर्थिक प्रगति का आधार भी मजबूत होगा – उप मुख्यमंत्री अरुण सावरायपुर । प्रदेशवासियों को यातायात के लिए मजबूत और चौड़ी सड़कें उपलब्ध कराने लोक निर्माण विभाग ने 15 फोरलेन सड़कों के निर्माण के लिए 708 करोड़ 21 लाख 35 हजार रुपए मंजूर किए हैं। हाल ही में समाप्त हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 में स्वीकृत इस राशि से विभिन्न जिलों में कुल 90.5 किमी फोरलेन सड़कों का निर्माण किया जाएगा। इनके निर्माण से प्रमुख सड़कों पर सुगम यातायात और जॉम से मुक्ति के साथ ही यात्रा का समय घटेगा। फोरलेन सड़कों से सुरक्षित यातायात के साथ ही आर्थिक विकास को भी मजबूती मिलेगी। इससे कृषि, व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को भी बढ़ावा मिलेगा।लोक निर्माण विभाग ने दुर्ग जिले में दुर्ग-धमधा-बेमेतरा अंडर ब्रिज से अग्रसेन चौक तक 0.5 किमी फोरलेन मार्ग के लिए तीन करोड़ 41 लाख रुपए, स्मृति नगर पेट्रोल पंप से आई.आई.टी. जेवरा सिरसा तक 7 किमी फोरलेन सड़क के लिए 20 करोड़ 64 लाख रुपए, मिनी माता चौक से महाराजा चौक-ठगड़ा बांध तक 4.70 किमी फोरलेन मार्ग के लिए 28 करोड़ 58 लाख रुपए तथा महाराजा चौक से बोरसी चौक तक 1.80 किमी फोरलेन सड़क के लिए 23 करोड़ 97 लाख रुपए मंजूर किए हैं।विभाग ने रायगढ़ में ढिमरापुर चौक से कोतरा थाना चौक तक 2.50 किमी के फोरलेन चौड़ीकरण के लिए 41 करोड़ 49 लाख रुपए, रायगढ़-कोतरा-नंदेली राज्य मार्ग के किमी 1 से किमी 5 तक के फोरलेन चौड़ीकरण के लिए 55 करोड़ 29 लाख रुपए, रायगढ़-लोईंग-महापल्ली मुख्य जिला मार्ग के किमी 1 से किमी 5 तक विद्युतीकरण सहित फोरलेन चौड़ीकरण के लिए 81 करोड़ 48 लाख रुपए तथा 6 किमी तमनार फोरलेन बायपास के निर्माण के लिए 152 करोड़ 17 लाख रुपए स्वीकृत किए हैं।रायपुर जिले में अभनपुर राष्ट्रीय राजमार्ग-30 में 2.8 किमी लंबाई के फोरलेन में उन्नयन के लिए 17 करोड़ 9 लाख रुपए, राजिम में नवीन मेला स्थल से लक्ष्मण झूला तक 3.50 किमी फोरलेन सड़क के निर्माण के लिए 34 करोड़ 20 लाख रुपए, अंबिकापुर में गांधी चौक से रेलवे स्टेशन तक 5 किमी लंबाई के फोरलेन चौड़ीकरण के लिए 61 करोड़ 34 लाख रुपए, बिलासपुर में 13.40 किमी कोनी-मोपका फोरलेन बायपास मार्ग के लिए 82 करोड़ 80 लाख 26 हजार रुपए एवं कोटा-लोरमी-पंडरिया मार्ग में 21 किमी सड़क के फोरलेन चौड़ीकरण और मजबूतीकरण के लिए 14 करोड़ 71 लाख रुपए मंजूर किए गए हैं।लोक निर्माण विभाग ने जशपुर जिले में कुल 7.30 किमी लंबाई के तीन सड़कों के फोरलेन में उन्नयन एवं मजबूतीकरण के लिए 36 करोड़ 85 लाख रुपए स्वीकृत किए हैं। इनमें 2 किमी लंबा पत्थलगांव के इंदिरा चौक से जशपुर रोड, 1.50 किमी लंबा इंदिरा चौक से अंबिकापुर रोड तथा 3.80 किमी लंबा इंदिरा चौक से रायगढ़ रोड शामिल हैं। विभाग ने कबीरधाम जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-30 के किमी 50 से किमी 57 तक फोरलेन में उन्नयन और डिवाइडर निर्माण के लिए भी 54 करोड़ 21 लाख रुपए मंजूर किए हैं।“राज्य में बेहतर और सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। फोरलेन सड़कों का विस्तार केवल यातायात सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रदेश की आर्थिक प्रगति का मजबूत आधार भी तैयार करता है। लोक निर्माण विभाग द्वारा अधोसंरचना विकास में बड़े पैमाने पर निवेश कर कनेक्टिविटी को सुदृढ़ किया जा रहा है। इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच संतुलित विकास को नई गति मिलेगी।” – श्री अरुण साव, उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री
- रायपुर । किसी समय बस्तर का नाम सुनते ही जेहन में केवल घने जंगल और माओवाद की दहशत उभरती थी। बस्तर जिले के दरभा ब्लॉक का कोलेंग गांव भी एक ऐसे ही इलाका था, जहां विकास की किरणें नक्सली साये और दुर्गम रास्तों के कारण पहुँचने से कतराती थीं। लेकिन आज तस्वीर बदल चुकी है। कभी गोलियों की गूंज के लिए पहचाने जाने वाले इस क्षेत्र में अब की-बोर्ड की टिक-टिक और डिजिटल लेनदेन की गूंज सुनाई दे रही है। इस परिवर्तन की कहानी गांव के ही एक शिक्षित युवा संतोष कुमार के इर्द-गिर्द घूमती है। हायर सेकेंडरी तक शिक्षा प्राप्त करने के बाद संतोष ने शहर की ओर रुख करने के बजाय अपने ही गांव की मिट्टी को सींचने का फैसला किया। पिछले तीन वर्षों से वे ग्राम पंचायत कॉम्प्लेक्स में एक कॉमन सर्विस सेंटर का संचालन कर रहे हैं। जिस क्षेत्र में कभी नेटवर्क की समस्या और संचार के साधनों का अभाव था, वहाँ संतोष अपनी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति से ग्रामीणों को सुविधाएं सुलभ करवा रहे हैं। आज उनकी वजह से कोलेंग सहित क्षेत्र के चांदामेटा, मुण्डागांव, छिंदगुर, कांदानार, सरगीपाल, काचीरास आदि गांवों के ग्रामीणों को छोटी-छोटी जरूरतों, जैसे नकदी निकासी, बैंक खाता खोलने या आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए दरभा या जगदलपुर तक जाने की जरूरत नहीं पड़ती है।संतोष की सेवाएं केवल बैंकिंग तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे ई-श्रम कार्ड, किसान पंजीयन और पैन कार्ड जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज भी गांव में ही तैयार कर रहे हैं। विशेष रूप से पिछले वर्ष आधार पंजीयन की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने गांव में ही आधार कार्ड बनाने की सुविधा शुरू की है, जो इस दुर्गम क्षेत्र के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। अब यहाँ के निवासियों को जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र जैसे जरूरी कागजात बनवाने के लिए मीलों का सफर तय नहीं करना पड़ता, जिससे उनके समय और मेहनत के साथ-साथ पैसों की भी बड़ी बचत हो रही है।नक्सलवाद के प्रभाव और नेटवर्क की चुनौतियों को मात देते हुए संतोष ने यह साबित कर दिया है कि यदि इरादे मजबूत हों, तो विकास की धारा को सबसे अंतिम छोर तक पहुँचाया जा सकता है। इस कार्य से जहाँ वे स्वयं हर महीने लगभग 15 हजार रुपये की आय अर्जित कर आत्मनिर्भर बने हैं, वहीं वे अपने गांव सहित क्षेत्र को भी डिजिटल युग की मुख्यधारा से जोड़ रहे हैं। संतोष कुमार का यह प्रयास न केवल कोलेंग की डिजिटल दूरियों को पाट रहा है, बल्कि यह उस आत्मविश्वास का भी प्रतीक है जो बस्तर के युवाओं में अब माओवाद की दहशत को पीछे छोड़कर अपने भविष्य को संवारने के लिए जागृत हो रहा है। आज कोलेंग इलाके में डिजिटल लेनदेन की सुगमता, बदलते बस्तर और सशक्त होते ग्रामीण भारत की एक जीवंत तस्वीर पेश करती है।
- रायपुर । वन धन विकास केंद्र आदिवासी समुदायों को सशक्त बनाने के लिए में शुरू की गई एक अनूठी पहल है। ये केंद्र स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को जोड़कर, लघु वन उत्पादों (MFP) के मूल्यवर्धन, प्रसंस्करण और विपणन के माध्यम से आदिवासियों की आय और आजीविका को बढ़ाते हैं। ये समूह जंगलों में मिलने वाली औषधीय जड़ी-बूटियों से च्यवनप्राश, वासावलेह, कौंचपाक और आरोग्य अमृत जैसे उत्पाद तैयार कर रहे हैं, जिससे उन्हें स्थायी रोजगार मिल रहा है।जशपुर जिले के पंचक्की स्थित वन धन विकास केंद्र (VDVK) के अंतर्गत संचालित स्व-सहायता समूह ग्रामीण उद्यमिता और जनजातीय सशक्तिकरण का अच्छा उदाहरण बनकर सामने आए हैं। इस पहल से उरांव जनजाति के लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। पहले ये लोग मुख्य रूप से खेती और मजदूरी पर निर्भर थे, लेकिन अब प्रधानमंत्री जनजातीय वन धन विकास योजना (PMJVM) के तहत छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ (CGMFED) और ट्राइफेड (TRIFED) के सहयोग से सफल उद्यमी बन गए हैं।वित्तीय वर्ष 2025-26 में इन समूहों ने 23.16 लाख रूपए की वार्षिक बिक्री दर्ज की है, जबकि पिछले पाँच वर्षों में औसत वार्षिक बिक्री 31.9 लाख रूपए रही है। यह उनकी लगातार मेहनत और उत्पादों की गुणवत्ता का परिणाम है।इस सफलता में प्रशिक्षण और संस्थागत सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। CGMFED द्वारा समूहों को उत्पाद की गुणवत्ता, स्वच्छता, पैकेजिंग और मूल्य संवर्धन का प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही विशेषज्ञों द्वारा तकनीकी मार्गदर्शन, मशीनरी और विपणन में भी सहायता प्रदान की गई। समूहों ने ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ ब्रांड के तहत अपनी पहचान बनाई है और ‘संजीवनी’ आउटलेट्स के माध्यम से अपने उत्पादों की बिक्री कर रहे हैं। इसके अलावा, आयुष विभाग से आवश्यक लाइसेंस प्राप्त कर उत्पादों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता भी सुनिश्चित की गई है। इस पहल से समूह के सदस्यों की आय बढ़ी है और उनके जीवन स्तर में सुधार हुआ है।अब वे अपने बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर अधिक ध्यान दे पा रहे हैं। बेहतर कार्य के लिए समूहों को सम्मान भी मिला है, जिससे उनका आत्मविश्वास और सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ी है। वन धन विकास केंद्र पंचक्की की यह सफलता दर्शाती है कि सही प्रशिक्षण, सहयोग और सामूहिक प्रयास से जनजातीय समुदायों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जा सकता है।
- -सभी अधिकारी कर्मचारी अपने मोबाईल से ऑन-बोर्ड होंगेआई-गॉट साधना सप्ताह के अंतर्गत छत्तीसगढ़ मिशन कर्मयोगी कार्यशाला हुई आयोजितरायपुर । मुख्य सचिव श्री विकासशील ने राज्य शासन के सभी विभाग के प्रमुख अधिकारियों से कहा है कि वे मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत आई-गॉट ट्रेनिंग कार्यक्रम से अपने विभाग को अनिवार्य रूप से ऑन-बोर्ड कर लें। उन्होंने कहा कि सभी विभाग ऑन-बोर्ड हो जाये मुख्य सचिव ने सभी विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों को भी अपने मोबाईल से ऑन-बोर्ड होने को कहा है। राज्य शासन के सभी विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों को उनकी आवश्यकता अनुसार विभागीय स्किल डेवलपमेंट के लिए प्रशिक्षित किया जा सकेगा। मुख्य सचिव ने सभी विभाग प्रमुखों से कहा है कि वे अपने-अपने विभाग की आवश्यकता अनुसार अधिकारी-कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण कोर्स तय कर लें, जिससे उन्हे प्रशिक्षित किया जा सके। आज आई-गॉट प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत साधना सप्ताह के मौके पर सभी विभागों के अधिकारी-कर्मचारी को कर्मयोगी मिशन के तहत प्रशिक्षण हेतु कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में राज्य शासन के विभागों के प्रमुख अधिकारी सहित विभागीय सचिव, संयुक्त सचिव, उप सचिव, अवर सचिव, अनुभाग अधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम में सभी जिलों के प्रमुख अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए शामिल हुए।कार्यशाला के प्रारंभ में बताया गया की कर्मचारियों को डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म आई-गॉट और ई-एच.आर.एम.एस. से जुड़ते हुए उनकी क्षमता एवं कौशल विकास को बढ़ावा देना है। मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि ‘आई-गॉट’ प्लेटफॉर्म पर ए.आई का उपयोग बढ़ रहा है और यह कर्मचारियों को स्मार्ट एवं प्रभावी प्रशिक्षण प्रदान करने में सहायक सिद्ध होगा। उन्होंने शत् प्रतिशत ऑनबोर्डिंग सुनिश्चित करने और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए सकारात्मक परिणाम प्राप्त करने पर जोर दिया। कार्यशाला में अधिकारियों-कर्मचारियों को यह भी अवगत कराया गया कि प्रशिक्षण केवल कौशल विकास तक ही नहीं, बल्कि जागरूकता बढ़ाने का भी महत्वपूर्ण माध्यम है, जिससे प्रत्येक कर्मचारी अपने विभाग की योजनाओं और कार्यप्रणाली से भली-भांति परिचित हो सकेंगे।
- रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन, जल संसाधन विभाग द्वारा बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के विकासखण्ड-बलरामपुर की खटवा बरदर डायवर्सन योजना के लिए 19 करोड़ 02 लाख रुपये स्वीकृत किये गये हैं। योजना के निर्माण से 400 हेक्टेयर खरीफ एवं 80 हेक्टेयर रबी सहित कुल 480 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। मुख्य अभियंता हसदेव गंगा कछार जल संसाधन विभाग अम्बिकपुर को डायवर्सन योजना के कार्यों को पूर्ण कराने के लिए प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है।











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