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नई दिल्ली। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा है कि कश्मीर में अब अलगाववाद इतिहास बनकर रह गया है। X पर एक पोस्ट में केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा, एकीकरण की मोदी सरकार की नीतियों ने जम्मू-कश्मीर से अलगाववाद को खत्म कर दिया है। हुर्रियत से जुड़े दो संगठनों ने अलगाववाद से सभी रिश्ते तोड़ने की घोषणा की है। श्री अमित शाह ने कहा कि वह भारत की एकता को मजबूत करने की दिशा में इस कदम का स्वागत करते हैं और ऐसे सभी समूहों से अनुरोध करते हैं कि वे आगे आएं और अलगाववाद को हमेशा के लिए खत्म करें। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि यह प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के विकसित, शांतिपूर्ण और एकीकृत भारत बनाने के विजन की बड़ी जीत है।
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नई दिल्ली। नया इनकम टैक्स बिल संसद के अगले सत्र यानी मानसून सत्र में पेश किया जाएगा। यह जानकारी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को लोकसभा में दी। नया इनकम टैक्स बिल-2025 छह दशक पुराने इनकम टैक्स एक्ट-1961 का स्थान लेगा। यह प्रत्यक्ष कर कानूनों को सरल बनाएगा, अस्पष्टताएं दूर करेगा और कर विवादों को कम करेगा।
वित्त मंत्री ने कहा कि सरलीकरण की प्रक्रिया तीन मुख्य सिद्धांतों पर आधारित है, जिसमें स्पष्टता के लिए पाठ्य और संरचनात्मक सरलीकरण, निश्चितता और निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए कर नीति में कोई भी बदलाव नहीं और करदाताओं के लिए पूर्वानुमान को बनाए रखने के लिए कर दरों में कोई संशोधन नहीं शामिल हैं।ग्लोबल बेस्ट प्रैक्टिस पर आधारित, इस बिल का उद्देश्य कर नियमों में स्पष्टता प्रदान करके व्यापार में आसानी लाना है। नए इनकम टैक्स बिल में शब्दों की संख्या को घटाकर 2,59,676 कर दिया गया है। यह आंकड़ा पुराने इनकम टैक्स बिल में 5,12,535 पर था।आधिकारिक सरकारी बयान में कहा गया कि नए इनकम टैक्स बिल में चैप्टर्स की संख्या को घटाकर 23 कर दिया गया है, जबकि पुराने इनकम टैक्स बिल में यह संख्या 47 थी। इसके अलावा सेक्शंस की संख्या 819 से घटाकर 536 कर दी गई है।इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि नए इनकम टैक्स बिल-2025 से देश में टैक्स सिस्टम अधिक पारदर्शी होगा और इसके साथ ही इससे करदाताओं का विश्वास बढ़ेगा।सरकार ने आयकर विधेयक 2025 को 13 फरवरी, 2025 को लोकसभा में पेश किया था, जो मौजूदा आयकर अधिनियम 1961 की जगह लेगा। इस विधयेक का उद्देश्य 1961 के अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों को बड़े पैमाने पर संरक्षित करते हुए भाषा को सुव्यवस्थित करना और दक्षता बढ़ाने के लिए पुराने प्रावधानों को हटाना है। -
नई दिल्ली। भारत का रक्षा उत्पादन वित्त वर्ष 2023-24 में रिकॉर्ड 1.27 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। यह मेक इन इंडिया पहल से प्रेरित होकर 2014-15 से 174% की वृद्धि दर्शाता है। रक्षा बजट में 2013-14 के 2.53 लाख करोड़ रुपए से 2025-26 में 6.81 लाख करोड़ रुपए तक की वृद्धि, सैन्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए देश के दृढ़ संकल्प को उजागर करती है।
देश अब स्वदेशी विनिर्माण में एक उभरती हुई शक्ति के रूप में स्थापितदरअसल, देश का रक्षा उत्पादन “मेक इन इंडिया” पहल के शुभारंभ के बाद से असाधारण गति से बढ़ा है। कभी विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर रहने वाला हमारा देश अब स्वदेशी विनिर्माण में एक उभरती हुई शक्ति के रूप में स्थापित हो चुका है और अब घरेलू क्षमताओं के माध्यम से अपनी सैन्य ताकत को आकार दे रहा है। यह बदलाव आत्मनिर्भरता के प्रति मजबूत वचनबद्धता को दर्शाता है, जो यह सुनिश्चित करता है कि भारत न केवल अपनी सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करे, बल्कि एक मजबूत रक्षा उद्योग का निर्माण भी करे जो आर्थिक विकास में योगदान देता हो।रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और आधुनिकीकरण के लिए सरकार है प्रतिबद्धताआत्मनिर्भरता और आधुनिकीकरण के लिए यह प्रतिबद्धता सरकार की हाल ही में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) द्वारा एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन सिस्टम (एटीएजीएस) की खरीद को दी गई मंजूरी में परिलक्षित होती है, जो सेना की मारक क्षमता बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस सौदे में 155 मिमी/52 कैलिबर की 307 इकाइयों के साथ 327 हाई मोबिलिटी 6×6 गन टोइंग वाहन शामिल हैं।यह 7,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से भारतीय-स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित व निर्मित (आईडीडीएम) श्रेणी के तहत 15 आर्टिलरी रेजिमेंटों को सुसज्जित करेंगे। भारत फोर्ज और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स के साथ डीआरडीओ द्वारा विकसित एटीएजीएस एक अत्याधुनिक तोपखाना प्रणाली है, जिसमें 40+ किलोमीटर रेंज, उन्नत फायर कंट्रोल, सटीक लक्ष्यीकरण, स्वचालित लोडिंग तथा रिकॉइल प्रबंधन है, जिसका भारतीय सेना द्वारा सभी इलाकों में गहन परीक्षण किया गया है।स्वदेशी रक्षा उत्पादन में अब तक की सबसे अधिक वृद्धि हासिल कीगौरतलब हो, सभी रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (डीपीएसयू), रक्षा वस्तुएं बनाने वाली अन्य सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों और निजी कंपनियों के आंकड़ों के अनुसार, देश का रक्षा उत्पादन का मूल्य बढ़कर 1,27,265 करोड़ रुपए के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जो 2014-15 के 46,429 करोड़ रुपये से 174% की प्रभावशाली वृद्धि दर्शाता है।देश का रक्षा उत्पादन “मेक इन इंडिया” पहल के शुभारंभ के बाद से असाधारण गति से बढ़ाआपको बता दें, इस वृद्धि को मेक इन इंडिया पहल से बल मिला है, जिसने धनुष आर्टिलरी गन सिस्टम, एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन सिस्टम (एटीएजीएस), मुख्य युद्धक टैंक (एमबीटी) अर्जुन, लाइट स्पेशलिस्ट व्हीकल्स, हाई मोबिलिटी व्हीकल्स, लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस, एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (एएलएच), लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर (एलयूएच), आकाश मिसाइल सिस्टम, वेपन लोकेटिंग रडार, 3डी टैक्टिकल कंट्रोल रडार और सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो (एसडीआर) सहित उन्नत सैन्य प्लेटफार्मों के विकास को सक्षम किया है। इसके साथ ही विध्वंसक, स्वदेशी विमान वाहक, पनडुब्बियां, फ्रिगेट, कोरवेट, फास्ट पेट्रोल वेसल, फास्ट अटैक क्राफ्ट तथा ऑफशोर पेट्रोल वेसल जैसी नौसैनिक संपत्तियां भी विकसित की हैं।
65 प्रतिशत रक्षा उपकरण घरेलू स्तर पर बन रहें हैंअब 65% रक्षा उपकरण घरेलू स्तर पर निर्मित किए जाते हैं, जो पहले की 65-70% आयात निर्भरता से एक महत्वपूर्ण बदलाव है। एक मजबूत रक्षा औद्योगिक आधार में 16 डीपीएसयू, 430 से अधिक लाइसेंस प्राप्त कंपनियां और लगभग 16,000 एमएसएमई शामिल हैं, जो स्वदेशी उत्पादन क्षमताओं को मजबूत करते हैं। वहीं, निजी क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जो कुल रक्षा उत्पादन में 21% का योगदान देता है और नवाचार एवं दक्षता को बढ़ावा देता है। भारत ने 2029 तक रक्षा उत्पादन में 3 लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा है, जिससे वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में इसकी स्थिति मजबूत होगी।रक्षा निर्यात में अभूतपूर्व बढ़ोतरीभारत का रक्षा निर्यात वित्त वर्ष 2013-14 में 686 करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2023-24 में 21,083 करोड़ रुपए के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है, जो पिछले एक दशक की तुलना में 30 गुना वृद्धि को दर्शाता है। रक्षा निर्यात में साल-दर-साल 32.5% की बढ़ोतरी हुई, जो वित्त वर्ष 2022-23 में 15,920 करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2023-24 में 21,083 करोड़ रुपए हो गया।भारत के विविध निर्यात पोर्टफोलियो में बुलेटप्रूफ जैकेट, डोर्नियर (डीओ-228) विमान, चेतक हेलीकॉप्टर, तीव्र गति की इंटरसेप्टर नौकाएं और हल्के वजन वाले टारपीडो शामिल हैं।उल्लेखनीय है कि ‘मेड इन बिहार’ का उपयोग अब रूसी सेना के साजो-सामान का हिस्सा है, जो भारत के उच्च विनिर्माण मानकों को दर्शाता है।भारत अब 100 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण निर्यात करता हैंभारत अब 100 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण निर्यात करता है, जिसमें 2023-24 में अमेरिका, फ्रांस और आर्मेनिया शीर्ष खरीदार के रूप में उभरे। सरकार का लक्ष्य 2029 तक रक्षा निर्यात को 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाना है, जिससे आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में भारत की भूमिका मजबूत होगी।रक्षा क्षेत्र में विकास और नवाचार को बढ़ावा देने में सरकारी पहलआपको बता दें, हाल के वर्षों में, केंद्र सरकार ने देश की रक्षा उत्पादन क्षमताओं को बढ़ाने और आत्मनिर्भरता हासिल करने के उद्देश्य से कई परिवर्तनकारी गतिविधियों को क्रियान्वित किया है। ये उपाय निवेश आकर्षित करने, घरेलू विनिर्माण को बढ़ाने और खरीद प्रक्रियाओं को सुचारू बनाने के लिए तैयार किए गए हैं। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमाओं को उदार बनाने से लेकर स्वदेशी उत्पादन को प्राथमिकता देने तक, ये पहल भारत के रक्षा औद्योगिक आधार को मजबूत करने की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।निम्नलिखित बिन्दु उन प्रमुख सरकारी पहलों को रेखांकित करते हैं, जो रक्षा क्षेत्र में विकास और नवाचार को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण रहे हैं।* उदारीकृत एफडीआई नीति– विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए सितंबर 2020 में रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को उदार बनाया गया था, जिससे स्वचालित मार्ग से 74% तक और सरकारी मार्ग से 74% से अधिक एफडीआई की अनुमति मिल गई। अप्रैल 2000 से रक्षा उद्योग में कुल एफडीआई 21.74 मिलियन डॉलर है।* टाटा एयरक्राफ्ट कॉम्प्लेक्स– अक्टूबर 2024 में सी-295 विमान के निर्माण के लिए वडोदरा में टाटा एयरक्राफ्ट कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन किया गया, जिससे कार्यक्रम के तहत 56 में से 40 विमान भारत में निर्मित होने के साथ रक्षा में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।* मंथन– बेंगलुरु में एयरो इंडिया 2025 के दौरान आयोजित वार्षिक रक्षा नवाचार कार्यक्रम मंथन ने रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्रों के प्रमुख नवप्रवर्तकों, स्टार्टअप्स, एमएसएमई, शिक्षाविदों, निवेशकों तथा उद्योग जगत के अधिकारियों को एक साथ लाया, जिससे तकनीकी प्रगति और आत्मनिर्भर भारत के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता में विश्वास की पुष्टि हुई।* रक्षा परीक्षण अवसंरचना योजना (डीटीआईएस)- डीटीआईएस का उद्देश्य एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र में आठ ग्रीनफील्ड परीक्षण और प्रमाणन सुविधाएं स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करके स्वदेशीकरण को बढ़ावा देना है, जिसमें मानव रहित हवाई प्रणाली, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, इलेक्ट्रो-ऑप्टिक्स तथा संचार जैसे क्षेत्रों में सात परीक्षण सुविधाएं पहले से ही स्वीकृत हैं।* घरेलू खरीद को प्राथमिकता– रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डीएपी)-2020 के तहत घरेलू स्रोतों से पूंजीगत वस्तुओं की खरीद पर जोर दिया गया है।* घरेलू खरीद आवंटन– रक्षा मंत्रालय ने चालू वित्त वर्ष के दौरान आधुनिकीकरण बजट का 75% यानि 1,11,544 करोड़ रुपये घरेलू उद्योगों के माध्यम से खरीद के लिए निर्धारित किया है।दरअसल, रक्षा उत्पादन और निर्यात में भारत की उल्लेखनीय प्रगति इसके आत्मनिर्भर तथा विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी सैन्य विनिर्माण केंद्र के रूप में परिवर्तन को रेखांकित करती है। रणनीतिक नीतिगत हस्तक्षेप, घरेलू भागीदारी में वृद्धि और स्वदेशी नवाचार पर ध्यान केंद्रित करने से देश की रक्षा क्षमताओं में काफी तेजी आई है। -
नई दिल्ली। भारत में सबमरीन केबल नेटवर्क के लिए एक ग्लोबल ट्रांजिट हब बनने की प्रबल संभावना है। इसकी वजह, देश का रणनीतिक रूप से अहम स्थान पर होना और बढ़ता हुआ डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर है। यह बयान ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम (बीआईएफ) की अध्यक्ष, अरुणा सुंदरराजन ने मंगलवार को दिया।
सबमरीन केबल इन्फ्रास्ट्रक्चर को चार से पांच गुना बढ़ाने की जरूरतउन्होंने कहा कि बढ़ती हुई डेटा खपत को पूरा करने के लिए सबमरीन केबल इन्फ्रास्ट्रक्चर को चार से पांच गुना बढ़ाने की जरूरत है। सुंदरराजन ने कहा, “भारत में सबमरीन केबल नेटवर्क के एक ग्लोबल ट्रांजिट हब के रूप में उभरने की प्रबल संभावना है। इसके लिए हमें अपने सबमरीन केबल इन्फ्रास्ट्रक्चर को चार से पांच गुना बढ़ाना होगा।”सबमरीन केबल नेटवर्क वर्ल्ड डेटा ट्रैफिक का 95 प्रतिशत से अधिक का वहन करता हैराष्ट्रीय राजधानी में ‘इंटरनेशनल सबमरीन केबल सिस्टम कॉन्फ्रेंस’ में बोलते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे समय पर सबमरीन केबल नेटवर्क को प्राथमिकता देना आवश्यक है, जहां भू-राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। इस इवेंट में, टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) के चेयरमैन अनिल कुमार लाहोटी ने कहा कि सबमरीन केबल नेटवर्क वर्ल्ड डेटा ट्रैफिक का 95 प्रतिशत से अधिक का वहन करता है।भारत पहले से ही वैश्विक सबमरीन केबल नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा हैउन्होंने बताया कि हाल ही में ग्लोबल केबल नेटवर्क में आई रुकावटों ने सबमरीन केबल इन्फ्रास्ट्रक्चर के महत्व को उजागर किया। भारत पहले से ही वैश्विक सबमरीन केबल नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है,जिसके अंतर्गत लगभग 17 अंतरराष्ट्रीय सबमरीन केबल नेटवर्क मुंबई, चेन्नई, कोचीन, तूतीकोरिन और त्रिवेंद्रम में मौजूद 14 लैंडिंग स्टेशनों से जुड़े हुए हैं।भारती एयरटेल ने चेन्नई में सीईए-एमई-डब्ल्यूई 6 सबमरीन केबल बिछाई, जिससे देश की अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी मजबूत हुई हैटाटा कम्युनिकेशंस, भारती एयरटेल, ग्लोबल क्लाउड एक्सचेंज और बीएसएनएल जैसी भारतीय दूरसंचार कंपनियां इन महत्वपूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर का संचालन करती हैं। हाल ही में, भारती एयरटेल ने चेन्नई में सीईए-एमई-डब्ल्यूई 6 सबमरीन केबल बिछाई, जिससे देश की अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी मजबूत हुई है। इसके अलावा, दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनी मेटा ने ‘प्रोजेक्ट वाटरवर्थ’ शुरू किया है। इसके तहत भारत, अमेरिका, ब्राजील और साउथ अफ्रीका को जोड़ते हुए एक सबमरीन केबल नेटवर्क बिछाया जाएगा। -
नई दिल्ली। भारत 1998 से दूध उत्पादन में प्रथम स्थान पर है और अब वैश्विक दूध उत्पादन में 25 प्रतिशत का योगदान देता है। पिछले 10 वर्षों में दूध उत्पादन में 63.56 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। भारत में दूध उत्पादन 2014-15 के दौरान 146.3 मिलियन टन से बढ़कर 2023-24 के दौरान 239.2 मिलियन टन हो गया है।
दूध उत्पादन में पिछले 10 वर्षों के दौरान देश में वार्षिक वृद्धि दर 5.7 प्रतिशत है, जबकि विश्व में दूध उत्पादन 2 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से बढ़ रहा है। देश में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता पिछले दशक में 48 प्रतिशत बढ़ी है, जो वर्ष 2023-24 के दौरान 471 ग्राम/व्यक्ति/दिन से अधिक है, जबकि दुनिया में प्रति व्यक्ति उपलब्धता 322 ग्राम/व्यक्ति/दिन है।पशुपालन और डेयरी विभाग देश भर में निम्नलिखित योजनाओं को लागू कर रहा है-–राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (एनपीडीडी): एनपीडीडी को निम्नलिखित 2 घटकों के साथ कार्यान्वित किया जाता है:एनपीडीडी का घटक ‘ए’ राज्य सहकारी डेयरी संघों/जिला सहकारी दूध उत्पादक संघों/स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी)/दूध उत्पादक कंपनियों/किसान उत्पादक संगठनों के लिए गुणवत्तायुक्त दूध परीक्षण उपकरणों के साथ-साथ प्राथमिक शीतलन सुविधाओं के लिए बुनियादी ढांचे के सृजन/सुदृढ़ीकरण पर केंद्रित है।एनपीडीडी योजना के घटक ‘बी’ “सहकारिता के माध्यम से डेयरी” का उद्देश्य संगठित बाजार तक किसानों की पहुंच बढ़ाकर, डेयरी प्रसंस्करण सुविधाओं और विपणन बुनियादी ढांचे को उन्नत करके और उत्पादक स्वामित्व वाली संस्थाओं की क्षमता में वृद्धि करके दूध और डेयरी उत्पादों की बिक्री में वृद्धि करना है।–डेयरी गतिविधियों में संलग्न डेयरी सहकारी समितियों और किसान उत्पादक संगठनों (एसडीसीएफपीओ) को सहायता प्रदान करना: राज्य डेयरी सहकारी संघों को गंभीर प्रतिकूल बाजार स्थितियों या प्राकृतिक आपदाओं के कारण उत्पन्न संकट से निपटने के लिए कार्यशील पूंजी ऋण के संबंध में ब्याज अनुदान प्रदान करके सहायता प्रदान करना।–पशुपालन अवसंरचना विकास निधि (एएचआईडीएफ): एएचआईडीएफ को व्यक्तिगत उद्यमियों, डेयरी सहकारी समितियों, किसान उत्पादक संगठनों, निजी कंपनियों, एमएसएमई और धारा 8 कंपनियों द्वारा पशुपालन क्षेत्र में प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के लिए उनके निवेश के लिए अनुसूचित बैंकों द्वारा स्थापित पात्र परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए लागू किया जा रहा है। इस योजना के तहत डेयरी प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन अवसंरचना, पशु चारा विनिर्माण संयंत्र, नस्ल सुधार प्रौद्योगिकी और नस्ल गुणन फार्म, पशु अपशिष्ट से धन प्रबंधन (कृषि अपशिष्ट प्रबंधन) और पशु चिकित्सा टीका और दवा उत्पादन सुविधाओं की स्थापना के लिए ऋण सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी हैं।–राष्ट्रीय गोकुल मिशन (आरजीएम): गोवंशीय पशुओं के दूध उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाने के लिए सरकार देशी नस्लों के विकास और संरक्षण तथा गोवंशीय आबादी के आनुवंशिक उन्नयन के लिए राष्ट्रीय गोकुल मिशन का क्रियान्वयन कर रही है।–राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम): उद्यमिता विकास के लिए व्यक्ति, एफपीओ, एसएचजी, धारा 8 कंपनियों और नस्ल सुधार बुनियादी ढांचे के लिए राज्य सरकार को प्रोत्साहन प्रदान करके मुर्गी पालन, भेड़, बकरी और सूअर पालन में उद्यमिता विकास और नस्ल सुधार पर तीव्र ध्यान केंद्रित करना।–पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एलएचडीसीपी): इसका उद्देश्य पशु रोगों के विरुद्ध रोगनिरोधी टीकाकरण, पशु चिकित्सा सेवाओं की क्षमता निर्माण, रोग निगरानी तथा पशु चिकित्सा अवसंरचना को सुदृढ़ बनाना है।पशुपालन एवं डेयरी विभाग लोगों को दूध के पोषण संबंधी लाभों के बारे में जागरूक करने के लिए आधिकारिक चैनलों के माध्यम से लगातार सोशल मीडिया अभियान चला रहा है। इन अभियानों में जागरूकता पोस्ट, इन्फोग्राफिक्स, रील्स और हैशटैग और डिजिटल आउटरीच के माध्यम से जुड़ाव शामिल हैं। -
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने आज पहली बार एक लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया। जिसमें बुनियादी ढांचा मजबूत करने, यमुना की सफाई, महिला सम्मान योजना, प्रदूषण से राहत देने के साथ ही औद्योगिक विकास के लिए अहम प्रावधान किए गए। इसके साथ ही दिल्ली में आयुष्मान भारत योजना के तहत 10 लाख रुपये का इलाज मुफ्त करने का प्रावधान भी बजट में किया गया है। 100 करोड़ रुपये के बजट से 100 झुग्गी झोपड़ी कॉलोनियों में अटल कैंटीन की स्थापना कर जरूरतमंदों को सस्ता और पौष्टिक भोजन प्रदान करने की घोषणा भी बजट में की गई।
दिल्ली के बजट में 30 फीसदी से ज्यादा इजाफादिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आज दिल्ली विधानसभा में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए एक लाख करोड़ रुपये खर्च का बजट पेश किया। चालू वित्त वर्ष के लिए दिल्ली का बजट 76 हजार करोड़ रुपये है। इस हिसाब से आगामी वित्त वर्ष के बजट में 31.5 फीसदी वृद्धि की गई है। मुख्यमंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा कि वित्त वर्ष 2023-24 में 78,800 करोड़ का बजट पेश किया गया था, जो 2024-25 का घटकर 76 हजार करोड़ रह गया। ये दिल्ली में सबसे खराब स्थिति थी। इस बार का दिल्ली का बजट एक लाख करोड़ रुपए का है, जो ऐतिहासिक है।महिला सम्मान और आयुष्मान भारत के लिए आवंटनमहिला समृद्धि योजना के लिए बजट में 5100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री गुप्ता ने कहा कि इसके जरिए दिल्ली की महिलाओं को हर महीने 2500 रुपए दिए जाएंगे। आयुष्मान योजना के लिए 2,144 हजार करोड़ रुपये का बजट रखा है। केंद्र सरकार से 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज तो मिलेगा ही। साथ ही दिल्ली सरकार भी इसमें अपनी ओर से 5 लाख रुपए जोड़ रही है। इससे दिल्ली में अब आयुष्मान योजना के तहत 10 लाख का इलाज मुफ्त मिलेगा। मातृत्व वंदन परियोजना के लिए 210 करोड़ रुपए का प्रावधान किया। योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को एकमुश्त 21 हजार रुपए दिए जाएंगे। इसके अलावा दिल्ली में महिला सुरक्षा के लिए 50 हजार अतिरिक्त कैमरे लगाए जाएंगे।बजट में नई औद्योगिक नीति लाने का ऐलानमुख्यमंत्री गुप्ता ने अपने बजट भाषण में कहा कि दिल्ली कभी व्यापार, संस्कृति और औद्योगिक गतिविधियों का केंद्र थी। आज कुप्रबंधन की शिकार है। कोई अधिकारी जाकर व्यापारी को धमका देता है। अब हमने संकल्प लिया है कि दिल्ली को देश का सबसे बड़ा व्यापारिक केंद्र बनाएंगे। हम नवाचार, औद्योगिक क्रांति की नींव रख रहे हैं। ये बजट नीतियों की घोषणा नहीं है, व्यापारियों, स्टार्टअप को सुविधाएं देने का रोड मैप है। हमारी सरकार नई औद्योगिक नीति लेकर आएगी। इससे औद्योगिक मुद्दों का समाधान होगा। एक नई वेयर हाउसिंग पॉलिसी को नया रूप दिया जा रहा है। सिंगल विंडो सिस्टम लाया जाएगा। डीडीए के साथ बात करके लीज वाली इंडस्ट्रियल प्रॉपर्टी को फ्री होल्ड करने का काम करेंगे।बजट में दिल्ली में पहली बार ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट की घोषणादिल्ली के बजट में राष्ट्रीय राजधानी में पहली बार ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट का आयोजन करने का ऐलान किया गया है। मुख्यमंत्री गुप्ता ने कहा दिल्ली में पहली बार ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट का आयोजन किया जाएगा। हमारी कोशिश रहेगी कि हर दो साल में एक बार ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट का आयोजन किया जाए। अब फाइलों में योजनाएं नहीं अटकेंगी, बल्कि जमीन पर उद्योग फूले-फलेंगे।यमुना और सीवर की सफाई के लिए 9 हजार करोड़ रुपये का बजटबजट में दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान यमुना की सफाई के अहम मुद्दे का भी ख्याल रखा गया है। सीएम रेखा गुप्ता ने कहा दिल्ली में यमुना गंदी है और तकलीफ की बात है। लेकिन अब स्वच्छता, स्वच्छ पानी और स्वच्छ यमुना दिल्ली की नई पहचान बनेगी। दिल्ली में हर नागरिक को साफ पानी और सफाई उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। इसके लिए बजट में 9 हजार करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। यह पुरानी सरकारों से तिगुना है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) के तहत गरीब परिवारों द्वारा रिफिल कराए गए एलपीजी सिलेंडरों की संख्या बीते पांच वर्षों में दोगुनी हो गई है। यह जानकारी सरकार द्वारा संसद में दी गई। सरकार के मुताबिक, पीएमयूवाई योजना के तहत लाभार्थी परिवारों की एलपीजी खपत बढ़कर 4.5 सिलेंडर प्रति वर्ष हो गई है।
रिफिल सिलेंडर की संख्या पांच साल में दोगुनी हुईपेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने संसद को बताया कि 1 मार्च 2025 तक देश भर में 10.33 करोड़ पीएमयूवाई कनेक्शन दिए जा चुके हैं। इस योजना के तहत रिफिल सिलेंडर की संख्या पांच साल में दोगुनी हो गई है।चालू वित्त वर्ष के पहले 11 महीनों में 41.95 करोड़ रिफिल वितरित किए गए, जबकि 2023-24 के 12 महीनों में 39.38 करोड़ रिफिल वितरित किए गए थे। वहीं, 2019-20 में रिफिल की संख्या 22.80 करोड़ थी, जो पांच साल पहले की तुलना में इस वित्त वर्ष में लगभग 100 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है।वित्त वर्ष 2024-25 फरवरी तक में तेल कंपनियां प्रतिदिन लगभग 12.6 लाख एलपीजी रिफिल वितरित की हैंसरकार ने कहा कि पीएमयूवाई की शुरुआत के बाद से, तेल विपणन कंपनियों ने फरवरी 2025 तक पीएमयूवाई ग्राहकों को प्रारंभिक इंस्टॉलेशन रिफिल सहित कुल 234.02 करोड़ एलपीजी रिफिल वितरित किए हैं। वित्त वर्ष 2024-25 (फरवरी 2025 तक) में तेल कंपनियां प्रतिदिन लगभग 12.6 लाख एलपीजी रिफिल वितरित कर रही हैं।योजना के तहत सितंबर 2019 में 8 करोड़ एलपीजी कनेक्शन जारी करने का लक्ष्य हासिल कर लिया गया थापीएमयूवाई को मई 2016 में देश भर के गरीब परिवारों की महिलाओं को जमा-मुक्त एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। इस योजना के तहत सितंबर 2019 में 8 करोड़ एलपीजी कनेक्शन जारी करने का लक्ष्य हासिल कर लिया गया था। शेष गरीब परिवारों को कवर करने के लिए उज्ज्वला 2.0 योजना का दूसरा चरण अगस्त 2021 में शुरू किया गया और जनवरी 2023 तक 1.60 करोड़ कनेक्शन जारी किए जा चुके हैं।सितंबर 2023 में केंद्र सरकार ने 75 लाख अतिरिक्त पीएमयूवाई एलपीजी कनेक्शन जारी करने की मंजूरी दी थीइसके अलावा, सितंबर 2023 में केंद्र सरकार ने 75 लाख अतिरिक्त पीएमयूवाई एलपीजी कनेक्शन जारी करने की मंजूरी दी थी। सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने 8 जुलाई 2024 तक 75 लाख पीएमयूवाई कनेक्शन जारी करने का काम पूरा कर लिया है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा का एक लेख साझा करते हुए कहा कि हाल ही में संपन्न 100-दिवसीय सघन टीबी मुक्त भारत अभियान ने टीबी मुक्त भारत के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया है।
टीबी के खिलाफ भारत की लड़ाई में उल्लेखनीय प्रगतिप्रधानमंत्री कार्यालय ने एक्स पोस्ट में कहा, “टीबी के खिलाफ भारत की लड़ाई में उल्लेखनीय प्रगति देखी जा रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने हाल ही में संपन्न 100-दिवसीय सघन टीबी मुक्त भारत अभियान पर महत्वपूर्ण जानकारी दी है, जिसने टीबी मुक्त भारत के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया है, इसे अवश्य पढ़ें।”100-दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान ने नवाचार की शक्ति का किया प्रदर्शनवहीं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा ने एक्स पोस्ट में कहा कि इस विश्व क्षयरोग दिवस पर मैं इस बात पर बहुत गर्व के साथ विचार करता हूं कि भारत टीबी के खिलाफ लड़ाई में किस तरह से अपनी रणनीति को फिर से लिख रहा है। हाल ही में संपन्न 100-दिवसीय सघन टीबी मुक्त भारत अभियान ने न केवल नवाचार की शक्ति का प्रदर्शन किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि समुदायों को संगठित करना कार्यक्रम संबंधी दृष्टिकोण को बदलने जितना ही महत्वपूर्ण है। मामलों का पता लगाने में तेजी लाकर, मृत्यु दर को कम करके और नए संक्रमणों को रोककर, इस अभियान ने टीबी मुक्त भारत के लिए एक मजबूत नींव रखी है। भारत सिर्फ टीबी से नहीं लड़ रहा है, हम इसे हरा रहे हैं।यह अभियान देश के कोने-कोने तक पहुंचाकेंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा ने लेख में कहा कि यह अभियान 7 दिसंबर, 2024 को टीबी के मामलों का पता लगाने, मृत्यु दर को कम करने और नए मामलों को रोकने के उद्देश्यों के साथ शुरू किया गया था। 100-दिवसीय सघन टीबी मुक्त भारत अभियान ने टीबी का समय रहते पता लगाने के लिए अत्याधुनिक रणनीतियां शुरू कीं, जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि बिना लक्षण वाले लोगों की भी पहचान की गई- जिनका अन्यथा निदान नहीं हो पाता और उनका इलाज किया गया। पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों को सीधे उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों के पास ले जाया गया, जिनमें मधुमेह, धूम्रपान करने वाले, शराब पीने वाले, एचआईवी से पीड़ित, बुजुर्ग, कम बीएमआई वाले और टीबी रोगियों के घरेलू संपर्क शामिल थे। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संचालित एक्स-रे ने संदिग्ध टीबी मामलों को तुरंत चिह्नित किया और स्वर्ण-मानक न्यूक्लिक एसिड एम्पलीफिकेशन टेस्ट (एनएएटी) का उपयोग कर पुष्टि की गई। इन प्रयासों ने सुनिश्चित किया कि संक्रामक मामलों की पहचान की गई और उनका जल्दी से जल्दी इलाज किया गया, जिससे संक्रमण पर लगाम लगी और लोगों की जान बच गई। यह अभियान देश के कोने-कोने तक पहुंचा, जिसमें कमजोर आबादी वाले 12.97 करोड़ लोगों की जांच की गई। इस गहन प्रयास के कारण 7.19 लाख टीबी रोगियों की पहचान की गई, जिनमें से 2.85 लाख मामले बिना लक्षण वाले थे।केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा- ‘100 दिवसीय अभियान अभी शुरुआत है’केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा ने अपने लेख के माध्यम से कहा है कि 100 दिवसीय अभियान अभी शुरुआत है। भारत इन प्रयासों को पूरे देश में बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हर नागरिक चाहे वे कहीं भी रहते हों, को आधुनिक निदान, गुणवत्तापूर्ण उपचार और अटूट सामुदायिक समर्थन तक पहुंच प्राप्त हो। जिस तरह भारत ने कोविड-19 परीक्षण को तेज़ी से बढ़ाया, उसी तरह स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय अगली पीढ़ी के टीबी निदान में निवेश कर रहा है ताकि अंतिम मील तक तेज़ और अधिक सटीक परीक्षण लाया जा सके। -
नयी दिल्ली. उत्तर प्रदेश के एटा लोकसभा क्षेत्र में स्थित महान कवि गोस्वामी तुलसीदास और अमीर खुसरो की जन्मस्थलियां भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधिकार के तहत ‘संरक्षित स्मारक नहीं हैं तथा किसी योजना के अंतर्गत इनके विकास एवं संरक्षण का कोई प्रस्ताव नहीं है। केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में लोकसभा को यह जानकारी दी। उनसे सवाल किया गया था कि क्या एटा संसदीय क्षेत्र में स्थित खुसरो और तुलसीदास की जन्मस्थली क्रमश: पटियाली और सोरों को उनके साहित्यिक और सांस्कृतिक योगदान के मद्देनजर किसी विशेष योजना के तहत संरक्षित और विकसित करने का प्रस्ताव है? शेखावत ने कहा कि एएसआई देश भर में 3,698 केंद्रीय संरक्षित स्मारकों या स्थलों का संरक्षण करता है। उनका कहना था, ‘‘हालांकि, एटा लोकसभा क्षेत्र में स्थित अमीर खुसरो और तुलसीदास जी के जन्मस्थान पटियाली और सोरों एएसआई के अधिकार क्षेत्र के तहत संरक्षित स्मारक नहीं हैं। वर्तमान में किसी भी योजना के तहत इन स्मारकों के संरक्षण और विकास का कोई प्रस्ताव नहीं है।" पटियाली और सोरों कासगंज जिले के अंतर्गत आते हैं।
उल्लेखनीय है कि ख़ुसरो का जन्म 13वीं शताब्दी में और गोस्वामी तुलसीदास का 16वीं शताब्दी में हुआ था। तुलसीदास ने पवित्र ग्रंथ ‘रामचरितमानस' की रचना की थी। खुसरो भी विद्वान थे तथा उन्हें उनके दोहों के लिए याद किया जाता है। -
नई दिल्ली। दिल्ली में एक अनोखे और मीठे अंदाज में बजट सत्र की शुरुआत हुई। सोमवार को मंत्री प्रवेश वर्मा ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को हाथ से खीर खिलाई। वहीं मुख्यमंत्री ने प्रवेश वर्मा और कैबिनेट के अन्य सदस्यों को खीर परोसकर इस खास मौके को यादगार बनाया। यह पहल दिल्ली सरकार के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है, क्योंकि 27 साल बाद दिल्ली सरकार अपना बजट पेश करने जा रही है।
दिल्ली सरकार अब केंद्र सरकार के साथ मिलकर कदमताल करेगीमुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस मौके पर कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दिल्ली सरकार को यह मौका मिला है। हमने जनता से मिले हजारों सुझावों को इस बजट में शामिल करने की कोशिश की है।” उन्होंने बताया कि दिल्ली की जनता ने व्हाट्सएप और अन्य माध्यमों से करीब 3500 ईमेल और 6000 संदेश भेजकर अपने विचार साझा किए। सीएम ने इसे ‘डबल इंजन सरकार’ का बजट करार देते हुए कहा कि दिल्ली सरकार अब केंद्र के साथ मिलकर काम करेगी।बजट सत्र के पहले दिन विभिन्न वर्गों के लोग हुए शामिलबजट सत्र के पहले दिन विभिन्न वर्गों के लोग शामिल हुए। वकील, छात्र, महिलाएं, सिख समुदाय और ऑटो ड्राइवर जैसे तमाम लोग खीर खाते नजर आए। सीएम ने इसे दिल्ली की आम जनता का बजट बताया और कहा कि यह विकसित दिल्ली के सपने की शुरुआत है। उन्होंने अपनी पूरी टीम को शुभकामनाएं दीं और इस मौके को ऐतिहासिक करार दिया।बजट में सबकी भागीदारीरेखा गुप्ता ने भगवान श्री राम के 14 साल बाद वनवास से लौटने की तुलना इस घटना से की। उन्होंने कहा, “27 साल बाद हम पहली बार खीर समारोह के साथ बजट सत्र की शुरुआत कर रहे हैं। आज मैंने सभी वर्गों के लोगों को बुलाया ताकि यह बजट सबकी भागीदारी से बने। इस बजट को लेकर दिल्लीवासियों में उत्साह देखा जा रहा है। यह बजट दिल्ली के विकास के लिए एक नई दिशा तय करने का वादा करता है। केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से तैयार इस बजट से लोगों को बड़ी उम्मीदें हैं।” -
नई दिल्ली। केंद्र सरकार देश के प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नियमित एवं दीर्घकालिक आधार पर गुणवत्ता वाला और पीने योग्य नल का पानी उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। ऐसे में केंद्र सरकार अगस्त, 2019 से राज्यों के साथ साझेदारी में जल जीवन मिशन (जेजेएम) को लागू कर रही है। जल राज्य का विषय होने के कारण, जल जीवन मिशन के तहत पेयजल आपूर्ति योजनाओं/कार्यों की योजना, अनुमोदन, कार्यान्वयन, संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों की है। भारत सरकार तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करके राज्यों की सहायता करती है।
लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में जल शक्ति राज्य मंत्री श्री वी. सोमण्णा ने जानकारी देते हुए कहा कि राज्य नल कनेक्शन प्रदान किए गए घरों और शेष घरों पर क्षेत्र सर्वेक्षण के माध्यम से या इस संबंध में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अपनाई गई पद्धति के अनुसार डेटा (नल कनेक्शनों की कवरेज और मिशन की प्रगति से संबंधित) की रिपोर्ट करते हैं। जल शक्ति मंत्रालय द्वारा ऐसे सर्वेक्षणों का विवरण नहीं रखा जाता है।जेजेएम डैशबोर्ड पर राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, देश में लगभग 89 प्रतिशत स्कूलों और 85 प्रतिशत आंगनवाड़ियों में नल के पानी की आपूर्ति हो चुकी है।यह जानकारी आज द्वारा दी गई।इसके साथ उन्होंने बताया कि राज्यों शासित प्रदेशों में नल कनेक्शनों की कवरेज को दर्ज करने के लिए, जल शक्ति मंत्रालय ने एक मजबूत ऑनलाइन जेजेएम डैशबोर्ड विकसित किया है जो मिशन की राज्य/केंद्र शासित प्रदेश, जिला और गांव-वार प्रगति की जानकारी प्रदान करता है। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा जेजेएम डैशबोर्ड पर जेजेएम की प्रगति के बारे में डेटा की रिपोर्टिंग के बाद, इसे रिकॉर्ड किया जाता है और जेजेएम डैशबोर्ड पर दिखाई देना शुरू हो जाता है जो सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध है और इसे https://ejalshakti.gov.in/jjmreport/JJMIndia.aspx पर एक्सेस किया जा सकता है। -
गांधीनगर । नीति आयोग द्वारा गुजरात के गांधीनगर स्थित गिफ्ट सिटी में “भारतीय नवाचार इकोसिस्टम में तालमेल का निर्माण” विषय पर शनिवार को एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसकी मेजबानी गुजरात विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (गुजकॉस्ट),विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, गुजरात सरकार ने की। कार्यशाला में नवाचार और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रख्यात नेताओं द्वारा संचालित कई संवादात्मक चर्चाएं शामिल थीं।
डॉ. वी.के. सारस्वत ने उद्घाटन भाषण में भारत के नवाचार परिदृश्य को आगे बढ़ाने में सरकारी निकायों, शिक्षाविदों और उद्योग के बीच सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने अनुवाद संबंधी शोध पर अधिक ध्यान देने का आह्वान किया जो सार्थक नवाचार को बढ़ावा देता है और प्रभावशाली स्टार्टअप बनाता है। उन्होंने कहा कि यह नवाचार की ओर वैश्विक बदलाव को दर्शाता है।डॉ. सारस्वत ने डीपटेक स्टार्टअप को समर्थन देने के महत्व पर भी प्रकाश डाला और भारत को सेवा-आधारित से उत्पाद-आधारित उद्योग मॉडल में बदलने की आवश्यकता पर बल दिया। इसके अतिरिक्त, डॉ. सारस्वत ने देश भर में अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन की गई प्रमुख सरकारी पहलों के बारे में बहुमूल्य जानकारी साझा की।इस दौरान, “भारत नवाचार करता है: राष्ट्रीय नवाचार इकोसिस्टम का अवलोकन” विषय पर केंद्रित सत्र में नवाचार-अनुकूल भारत के निर्माण के लिए रणनीतियों की खोज की गई।इसका संचालन अटल नवाचार मिशन के पूर्व एमडी डॉ. आर. रामनन ने किया। इसके बाद “नवाचार नीति और राज्य योजनाएं: सर्वश्रेष्ठ से सीखना” विषय पर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें नवाचार को बढ़ावा देने में राज्य-स्तरीय पहलों और सर्वोत्तम प्रथाओं पर प्रकाश डाला गया, जिसकी अध्यक्षता डॉ. रश्मि शर्मा, प्रमुख, एनसीएसटीसी, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार ने की।एक अन्य ज्ञानवर्धक सत्र, “नवाचार के सारथी: अग्रणी नवाचार” में जमीनी स्तर के नवोन्मेषकों और स्टार्ट-अप की प्रेरक कहानियों पर चर्चा की गई, जिसका संचालन राष्ट्रीय नवाचार फाउंडेशन (एनआईएफ) के निदेशक डॉ. अरविंद रानाडे ने किया।इसके अतिरिक्त, “विश्व में उभरता भारत: भारत के वैश्विक नवाचार पदचिह्न को मजबूत करना” में वैश्विक नवाचार परिदृश्य में भारत की बढ़ती उपस्थिति पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें विश्व बौद्धिक संपदा संगठन के डॉ. सच्चा वुन्श-विंसेंट और गुजरात प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. राजुल गज्जर जैसे अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का प्रमुख योगदान रहा। विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (डब्ल्यूआईपीओ) के डॉ. साचा वुन्श-विंसेंट ने भारत की अनूठी विकास यात्रा के लिए अगले 10 वर्षों के लिए कार्य बिंदुओं की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि भारत का आईपी प्रोफाइल छोटा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसमें वृद्धि हुई है, भारतीय मूल के पेटेंट दाखिल करने में वृद्धि हुई है, और देश निकट भविष्य में और अधिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्लस्टर जोड़ेगा। -
नई दिल्ली। प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय पासला कृष्ण मूर्ति की बेटी कृष्णा भारती का रविवार को निधन हो गया। वह 92 वर्ष की थीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृष्णा भारती के निधन पर शोक जताया है।
प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, पीएम मोदी ने एक एक्स पोस्ट कहा, “पासला कृष्णा भारती जी के निधन से बहुत दुःख हुआ। वे गांधीवादी मूल्यों के प्रति समर्पित थीं और उन्होंने अपना जीवन बापू के आदर्शों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने अपने माता-पिता की विरासत को शानदार ढंग से आगे बढ़ाया, जो हमारे स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सक्रिय थे। मुझे भीमावरम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उनसे मुलाकात याद है। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदना।”प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आंध्र प्रदेश के भीमावरम में 2022 में स्वतंत्रता सेनानी अल्लूरी सीताराम राजू की प्रतिमा के अनावरण कार्यक्रम में गांधीवादी कृष्णा भारती के पैर छुए थे। उस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने पासला कृष्ण मूर्ति के अन्य पारिवारिक सदस्यों से भी मुलाकात की थी।कृष्णा भारती ने संक्षिप्त बीमारी के बाद हैदराबाद के स्नेहपुरी कॉलोनी स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। आंध्र प्रदेश के पश्चिमी गोदावरी जिले की रहने वाली, वह स्वतंत्रता सेनानी पासला कृष्ण मूर्ति और अंजा लक्ष्मी की दूसरी बेटी थीं।कृष्णा भारती, गांधीवादी मूल्यों में दृढ़ विश्वास रखती थीं और उन्होंने जीवन भर उन्हीं मूल्यों को बनाए रखा। उन्होंने दलितों के उत्थान के लिए भी प्रयास किया। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों और गोशालाओं को दान दिया था। वह अविवाहित थी। उनके चार भाई और तीन बहनें हैं।वहीं,आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कृष्णा भारती के निधन पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने समाज के कमजोर वर्गों के शैक्षणिक उत्थान के लिए उनके योगदान को याद किया। -
शिवपुरी. मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले में रविवार सुबह एक एसयूवी के पुलिया से टकरा जाने के कारण दो महिला चिकित्सकों की मौत हो गई और चार अन्य लोग घायल हो गए। पुलिस ने यह जानकारी दी। उपमंडल पुलिस अधिकारी विजय यादव ने बताया कि महाराष्ट्र से छह चिकित्सकों के एक समूह को ले जा रहा एसयूवी वाहन सुबह करीब साढ़े सात बजे कोलारस थाना क्षेत्र के अंतर्गत गुना-शिवपुरी रोड पर एक पुलिया से टकराकर खाई में गिर गया। यादव ने कहा कि संबंधित लोग महाराष्ट्र के निवासी थे और तीर्थयात्रा पर अयोध्या से उज्जैन जा रहे थे।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि दुर्घटना में तन्वी आचार्य (50) की मौके पर ही मौत हो गई और गंभीर रूप से घायल नीलम पंडित (55) ने बाद में दम तोड़ दिया। उन्होंने कहा कि घायलों की पहचान मुंबई के दादर निवासी उदय जोशी (64) और उनकी पत्नी सीमा जोशी (59), पालघर जिले के वसई निवासी सुबोध पंडित (62) और ठाणे जिले के भिवंडी निवासी अतुल आचार्य (55) के रूप में हुई है। यादव ने बताया कि घायलों का शिवपुरी जिला अस्पताल में इलाज जारी है। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों का यह समूह 10 दिन पहले तीर्थयात्रा के लिए रवाना हुआ था और अयोध्या से उज्जैन जा रहा था। -
नयी दिल्ली. बागवानी वैज्ञानिक और पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित कृष्ण लाल चड्ढा का बीमारी के बाद यहां निधन हो गया। उनके परिजन ने रविवार को यह जानकारी दी। कृष्ण लाल चड्ढा (88) के परिवार में एक पुत्र और एक पुत्री हैं।
चड्ढा को 2012 में भारत के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। उन्होंने कृषि और बागवानी पर 30 पुस्तकें लिखीं हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व राष्ट्रीय प्राध्यापक चड्ढा का जन्म 1936 में सियालकोट (वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ था। उच्च शोध के लिए उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नयी दिल्ली में प्रवेश लिया और 1964 में पीएचडी की। उन्होंने कई सरकारी और पेशेवर एजेंसियों की अध्यक्षता की, इसके अलावा वे बागवानी विकास के लिए राष्ट्रीय योजना आयोग के कार्य समूह, तेल पाम की खेती के लिए एक राष्ट्रीय समिति, कीटनाशकों के लिए एक पंजीकरण समिति और पश्चिम बंगाल, हरियाणा तथा गुजरात राज्यों में बागवानी के लिए उच्च-शक्ति समितियों के सदस्य भी रहे। वह जैविक उत्पादों के लिए राष्ट्रीय संचालन समिति के सदस्य भी रहे।
चड्ढा ने ‘इंडियन सोसाइटी ऑफ एग्रीबिजनेस प्रोफेशनल्स', ‘इंटरनेशनल मैंगो वर्किंग ग्रुप' और ‘इंडियन एग्रीबिजनेस सिस्टम्स (एग्रीवॉच)' में अध्यक्ष पद संभाला तथा कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के सलाहकार भी रहे। वह बागवानी विज्ञान के लिए ‘इंटरनेशनल सोसायटी फॉर हार्टिकल्चरल साइंस के फेलो भी थे। -
नयी टिहरी. उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले में ऋषिकेश-गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर बगड़धार के निकट एक कार के गहरी खाई में गिरने से उसमें सवार पुलिस के एक उपनिरीक्षक की मौत हो गयी। पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी। आगराखाल पुलिस चौकी के प्रभारी आमिर खान ने यहां बताया कि दुर्घटना के समय कार चंबा से ऋषिकेश की ओर जा रही थी कि तभी अचानक वह अनियंत्रित होकर 200 मीटर गहरी खाई में गिर गयी। उन्होंने बताया कि अपराह्न करीब पौने एक बजे दुर्घटना की सूचना मिलने पर पुलिस तथा प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। उन्होंने बताया कि दुर्घटना के समय कार में देहरादून में स्थानीय खुफिया इकाई (एलआईयू)-विशेष शाखा में तैनात पुलिस उपनिरीक्षक अरविंद डंगवाल (45) अकेले ही थे जिनकी मौके पर ही मौत हो गयी। खान ने बताया कि डंगवाल टिहरी के अंजनीसैंण के रहने वाले थे और हादसे के वक्त अंजनीसैंण से देहरादून वापस जा रहे थे।
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भुवनेश्वर. भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने ओडिशा के कई जिलों में सोमवार के लिए आंधी-तूफान का पूर्वानुमान व्यक्त किया है। आईएमडी के भुवनेश्वर केंद्र के अनुसार, बालासोर, भद्रक, जाजपुर, केंद्रपाड़ा, कटक और जगतसिंहपुर जिलों में बादलों की गरज और बिजली चमकने के साथ बारिश के आसार हैं। मौसम विभाग ने रविवार शाम के बुलेटिन में कहा कि तटीय जिलों में हल्की बारिश होने की संभावना है।
तटीय ओडिशा और आंतरिक क्षेत्रों में शनिवार को हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई, जबकि गंजम जिले में भारी बारिश हुई। रंगीलुंडा में सबसे अधिक यानी आठ सेमी बारिश दर्ज की गई, उसके बाद छत्रपुर में सात सेमी और अस्का, बुगुडा तथा गंजम में पांच-पांच सेमी बारिश दर्ज की गई। पुरी जिले के काकटपुर और गोप में भी पांच-पांच सेमी बारिश हुई। आईएमडी ने राज्य में अगले चार से पांच दिनों में दिन के तापमान में चार से छह डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होने का भी अनुमान जताया है। -
नई दिल्ली। भारत और किर्गिस्तान के बीच चल रहा संयुक्त विशेष बल अभ्यास ‘खंजर-XII’ 23 मार्च को टोखमोक में सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। यह अभ्यास 10 मार्च को शुरू हुआ था और इसका उद्देश्य दोनों देशों के सैन्य बलों के बीच सहयोग को मजबूत करना, उच्च ऊंचाई पर युद्ध कौशल को निखारना और आतंकवाद विरोधी रणनीतियों को बेहतर बनाना था।
इस अभ्यास में भारत के पैराशूट रेजिमेंट (स्पेशल फोर्स) और किर्गिस्तान की स्कॉर्पियन ब्रिगेड के विशेष बलों ने हिस्सा लिया। दोनों सेनाओं ने स्नाइपिंग, जटिल इमारतों में घुसपैठ, पहाड़ी युद्धकला और विशेष आतंकवाद-रोधी अभियानों का अभ्यास किया।अभ्यास के दौरान नवरोज पर्व का भी जश्न मनाया गया, जो भारत और किर्गिस्तान के जवानों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत बनाने का महत्वपूर्ण अवसर बना। समापन समारोह में किर्गिज रक्षा मंत्रालय ने भारत के दो जवानों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पदक प्रदान किए, जबकि दो अन्य जवानों को उनके पेशेवर मानकों के लिए प्रशंसा पत्र दिए गए।समारोह में दोनों देशों के रक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारी और मित्र देशों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। उन्होंने इस अभ्यास को क्षेत्रीय स्थिरता और रक्षा सहयोग को मजबूत करने में महत्वपूर्ण बताया। अभ्यास के बाद एक व्यापक समीक्षा बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए और भविष्य में सहयोग के नए अवसरों पर चर्चा की।गौरतलब है कि ‘खंजर’ अभ्यास पहली बार 2011 में शुरू हुआ था और अब यह एक वार्षिक आयोजन बन गया है। इस अभ्यास का आयोजन भारत और किर्गिज़स्तान में बारी-बारी से किया जाता है। पिछला संस्करण जनवरी 2024 में भारत में हुआ था। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का हाल ही में लोकप्रिय अमेरिकी पॉडकास्टर लेक्स फ्रिडमैन के साथ पॉडकास्ट अब 10 से अधिक भाषाओं में उपलब्ध है। पीएम मोदी ने रविवार को लोगों से इस पॉडकास्ट को सुनने की अपील की और कहा कि इसका उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा लोगों तक बातचीत को पहुंचाना है।
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “हाल ही में लेक्स फ्रिडमैन के साथ किया गया पॉडकास्ट अब कई भाषाओं में उपलब्ध है। इसका मकसद बातचीत को बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचाना है। जरूर सुनें।” इस पॉडकास्ट के अनुवाद दूरदर्शन ने अपनी विभिन्न क्षेत्रीय भाषा चैनलों पर पोस्ट किए हैं। अब यह एपिसोड गुजराती, तेलुगु, पंजाबी, बंगाली, कन्नड़, मराठी, असमिया, ओडिया, तमिल और मलयालम में भी सुना जा सकता है।यह पॉडकास्ट 16 मार्च को यूट्यूब पर अपलोड किया गया था, जिसमें पीएम मोदी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), क्रिकेट, फुटबॉल, चीन, अमेरिका, पाकिस्तान और अपने शुरुआती जीवन सहित कई मुद्दों पर खुलकर चर्चा की। पीएम मोदी ने भारत में चुनावी प्रक्रिया का जिक्र करते हुए बताया कि 2024 लोकसभा चुनाव में 98 करोड़ लोगों ने मतदान के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था। यह संख्या उत्तर अमेरिका और यूरोपियन यूनियन की कुल जनसंख्या से भी अधिक है। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले हर व्यक्ति को यह सुनना चाहिए। 2024 के आम चुनाव में 980 मिलियन (98 करोड़) पंजीकृत मतदाता थे, जिनके पास वैध आईडी और सभी आवश्यक जानकारी थी।”पीएम मोदी ने चुनाव में लोगों की भागीदारी का उल्लेख करते हुए बताया कि दूरदराज के गांवों में भी मतदान केंद्र बनाए गए थे। उन्होंने उदाहरण दिया कि गुजरात के गिर जंगल में सिर्फ एक मतदाता के लिए पोलिंग बूथ बनाया गया था, जहां हेलीकॉप्टर के जरिए मतदान दल को पहुंचाया गया।पॉडकास्ट में पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की देशभक्ति और उनके अटूट समर्पण की सराहना की। उन्होंने ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” नीति और अपनी “इंडिया फर्स्ट” नीति में समानता बताते हुए कहा कि दोनों ही नेता अपने देशहित को सर्वोपरि रखते हैं।पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार की नीतियों में भरोसा सबसे महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने जोर दिया कि सरकारी योजनाओं का लाभ जाति, धर्म या विचारधारा के भेदभाव के बिना सभी जरूरतमंदों तक पहुंचाया जाना चाहिए। -
नई दिल्ली। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) UG 2025 के लिए ऑनलाइन आवेदन फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि बढ़ा दी है। अब अभ्यर्थी 24 मार्च 2025 तक फॉर्म जमा कर सकते हैं।
वहीं एनटीए ने परीक्षा शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि भी बढ़ा दी है, जो अब 25 मार्च 2025 तक होगी। इसके अलावा, उम्मीदवार अपने आवेदन फॉर्म में सुधार 26 मार्च से 28 मार्च 2025 तक कर सकेंगे।एनटीए के अनुसार, CUET UG 2025 परीक्षा 8 मई से 1 जून 2025 (संभावित तिथियां) के बीच आयोजित की जाएगी। यह परीक्षा कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में भारत के विभिन्न शहरों और विदेश के 15 शहरों में आयोजित होगी। इस परीक्षा के माध्यम से छात्र केंद्रीय, राज्य, डीम्ड और निजी विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए आवेदन कर सकते हैं।गौरतलब प्रवेश परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 1 मार्च 2025 से शुरू हो चुकी है और उम्मीदवार https://cuet.nta.nic.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। एनटीए ने छात्रों की मांग को ध्यान में रखते हुए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाई है। वहीं, CUET PG 2025 परीक्षा, जो 13 मार्च को शुरू हुई थी, वह 1 अप्रैल 2025 को समाप्त होगी। -
नई दिल्ली। गोवा में इन दिनों पारंपरिक शिगमो महोत्सव की धूम मची हुई है। दो सप्ताह तक चलने वाला यह भव्य सांस्कृतिक उत्सव 15 मार्च से शुरू हुआ था और 29 मार्च तक सम्पन्न होगा। यह त्योहार वसंत ऋतु के आगमन का स्वागत करने के लिए मनाया जाता है इस दौरान रंग-बिरंगी झांकियों, लोक नृत्यों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आयोजन किया जाता है, जो गोवा की समृद्ध विरासत को दर्शाता है।
गोवा के पर्यटन मंत्री रोहन खंवटे ने कहा, “गोवा में दो बड़े त्योहार -कार्निवल और शिगमो हैं। हाल ही में कार्निवल पूरे जोश और उत्साह के साथ मनाया गया और अब हम शिगमो का जश्न मना रहे हैं, जो 15 दिनों तक चलता है और लगभग 18 विधानसभा क्षेत्रों में मनाया जाता है। शिगमो हमारा पारंपरिक और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है।”शिगमो महोत्सव, जिसे स्थानीय भाषा में शिगमोस्तव कहा जाता है, गोवा के हिंदू समुदाय के लिए विशेष महत्व रखता है। यह फाल्गुन महीने में मनाया जाता है। मंत्री खंवटे ने कहा कि गोवा अब पर्यटकों के लिए समुद्र तटों के अलावा अन्य आकर्षण भी बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा, “अब हम गोवा में पर्यटन को समुद्र तटों से आगे ले जाना चाहते हैं। पर्यटक यहां आकर नई चीजें देखना चाहते हैं, इसलिए हम अपने उत्सवों को और भव्य बना रहे हैं। हम चिखल कालो (मिट्टी का त्योहार) और साओ जोआओ (संत जॉन द बैपटिस्ट का सम्मान करने वाला पर्व) जैसे नए त्योहार भी जोड़ रहे हैं।”त्योहार में शामिल एक पर्यटक ने कहा, “यह हमारा गोवा और भारत का पहला दौरा है। हमें इतना भव्य अनुभव मिलने की उम्मीद नहीं थी। यह बहुत रंगीन है और लोग काफी दोस्ताना हैं। हम खुश हैं कि हमने इस उत्सव को देखा।”ईरान से आए एक अन्य पर्यटक ने कहा, “यह बहुत खूबसूरत समारोह है और हम यहां आकर बहुत खुश हैं। मैंने पहले कभी ऐसा त्योहार नहीं देखा। उम्मीद है कि यह लंबे समय तक चलता रहेगा।” -
कोटा (राजस्थान),। राजस्थान के झालावाड़ जिले के बकानी कस्बे में घरेलू विवाद के दौरान गुस्से में महिला ने कथित तौर पर अपने पति की जीभ काट ली। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि आरोपी रवीना सैन (23) के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 115(2) और 118(2) के तहत जानबूझकर चोट पहुंचाने और गंभीर रूप से घायल करने को लेकर मामला दर्ज किया गया है। इस घटना की सूचना शुक्रवार शाम को पुलिस को दी गई।
सहायक उपनिरीक्षक बृजराज सिंह के अनुसार, बकानी कस्बे के कन्हैयालाल सैन (25) और पास के सुनेल गांव की आरोपी रवीना सैन की डेढ़ साल पहले शादी हुई थी। पुलिस के अनुसार दंपति के बीच सामंजस्य नहीं था और पति-पत्नी में अकसर झगड़ा होता था। सिंह ने बताया कि बृहस्पतिवार रात भी दोनों के बीच झगड़ा हुआ। उन्होंने कहा कि परिवार के सदस्यों ने बताया कि गुस्से में आरोपी महिला ने कन्हैयालाल की जीभ का एक हिस्सा काट लिया। एएसआई ने बताया कि परिवार के सदस्य कन्हैयालाल को स्थानीय अस्पताल ले गए जहां चिकित्सकों ने उसे झालावाड़ मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेफर कर दिया जहां उसका इलाज चल रहा है। उन्होंने बताया कि परिवार के सदस्यों के अनुसार, चिकित्सकों ने उन्हें बताया कि जीभ के उस हिस्से को सिला जा सकता है। एएसआई ने बताया कि घटना के बाद आरोपी रवीना ने खुद को एक कमरे में बंद कर लिया और दरांती से अपनी कलाई काटने की कोशिश की, लेकिन परिवार के सदस्यों ने रोक लिया। उन्होंने बताया कि कन्हैयालाल के भाई की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है। सिंह ने बताया कि पीड़ित का उपचार किया जा रहा है और उसके बयान अभी दर्ज किया जाना है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज रविवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने लोहिया को एक दूरदर्शी नेता, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और सामाजिक न्याय के प्रबल समर्थक के रूप में याद किया। प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा,”डॉ. राम मनोहर लोहिया जी को उनकी जयंती पर नमन। वे एक दूरदर्शी दूनेता, प्रखर स्वतंत्रता सेनानी और सामाजिक न्याय के प्रतीक थे। उन्होंने वंचितों को सशक्त बनाने और एक मजबूत भारत के निर्माण के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।”
भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी डॉ. लोहिया को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें भारत की राजनीतिक और सामाजिक धारा का महत्वपूर्ण व्यक्तित्व बताया। नड्डा ने कहा, “महान स्वतंत्रता सेनानी और सप्त क्रांति के प्रणेता डॉ. राम मनोहर लोहिया जी की जयंती पर उन्हें सादर नमन। उन्होंने भारतीय राजनीति में पवित्रता और पारदर्शिता की ऊंची मान्यताएं स्थापित कीं। उनके राष्ट्रवादी विचार और सामाजिक सशक्तिकरण के कार्य हमें हमेशा प्रेरित करते रहेंगे।”गृह मंत्री अमित शाह ने भी डॉ. लोहिया को याद करते हुए कहा कि उन्होंने जीवनभर अपने सिद्धांतों और देशभक्ति के मूल्यों को अपनाया। शाह ने कहा, “डॉ. राम मनोहर लोहिया जी का जीवन महिलाओं की शिक्षा, सामाजिक समानता और राजनीतिक शुचिता के लिए समर्पित रहा। उनकी विचारधारा सभी के लिए प्रेरणादायी है। उनकी जयंती पर मैं उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।”डॉ. राम मनोहर लोहिया का जन्म 23 मार्च 1910 को उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर जिले के अकबरपुर में हुआ था। 12 अक्टूबर 1967 को उनका निधन हो गया। लोहिया ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाई और बाद में देश की समाजवादी राजनीति के प्रमुख नेता बने। वे प्रजा सोशलिस्ट पार्टी और बाद में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी से जुड़े रहे। स्वतंत्रता के बाद भी वे भारतीय राजनीति में सक्रिय रहे और सामाजिक न्याय व सशक्तिकरण की वकालत करते रहे।1962 में, लोहिया ने फूलपुर सीट से तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के खिलाफ चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए थे। हालांकि, 1963 में उन्होंने फर्रुखाबाद उपचुनाव जीतकर सांसद बने। 1967 में, वे कन्नौज सीट से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। डॉ. लोहिया का योगदान भारतीय राजनीति और समाज में आज भी प्रासंगिक है। -
नई दिल्ली। आज रविवार को पूरे देश में ‘फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल’ का आयोजन किया गया, जिसमें लखनऊ, दिल्ली और उत्तराखंड समेत कई राज्यों में लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस आयोजन का उद्देश्य लोगों को फिटनेस के प्रति जागरूक करना और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना था।
लखनऊ में सामाजिक परिवर्तन स्थल पर केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने साइकिल चलाकर लोगों को फिट रहने का संदेश दिया। उनके साथ उत्तर प्रदेश के खेल मंत्री गिरीश चंद्र यादव भी साइकिलिंग में शामिल हुए। मांडविया ने कहा कि साइकिल चलाना सेहत के लिए फायदेमंद है और यह प्रदूषण को कम करने में भी मदद करता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे हर रविवार एक घंटा साइकिल चलाकर खुद को फिट रखें। इस मौके पर करीब 1000 बच्चे और युवा भी साइकिलिंग में शामिल हुए।दिल्ली में भी इस इवेंट में सैकड़ों लोगों ने भाग लिया। पुश-अप्स विश्व चैंपियन रोहताश चौधरी ने इस आयोजन को शहीद भगत सिंह को समर्पित करने का सुझाव दिया, क्योंकि आज 23 मार्च शहीद दिवस भी है। रोहताश ने लोगों से नियमित रूप से साइकिल चलाने की अपील की और बताया कि फिटनेस के लिए रोजाना कम से कम आधा घंटा साइकिलिंग करनी चाहिए। उन्होंने अपनी प्रेरक कहानी साझा करते हुए बताया कि 2007 में एक हादसे के बाद उनकी सात सर्जरी हुई थीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। 2015 में उन्होंने कनाडा का पुश-अप्स रिकॉर्ड तोड़कर इसे भगत सिंह को समर्पित किया था।उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने शासन के तीन साल पूरे होने के अवसर पर देहरादून में एक साइकिल रैली को हरी झंडी दिखाई। उन्होंने खुद भी साइकिल चलाई और लोगों को फिटनेस के प्रति जागरूक किया। यह रैली राज्य में सेवा, सुशासन और विकास के तीन साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित की गई थी।इस आयोजन में भारतीय पैरा-बैडमिंटन खिलाड़ी नितेश कुमार भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि आजकल लोग गैजेट्स पर अधिक समय बिताते हैं, जिससे मोटापा और मानसिक बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। नितेश ने इस इवेंट को शानदार पहल बताते हुए कहा कि साइकिलिंग जैसी गतिविधियाँ लोगों को स्वस्थ रखने में मदद करेंगी।यह आयोजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए फिट इंडिया मूवमेंट का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाना है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज रविवार को भगत सिंह, शिवराम राजगुरु और सुखदेव थापर को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दिन को पूरे देश में शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है। भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को 23 मार्च 1931 को ब्रिटिश सरकार ने फांसी दे दी थी। वे भारत को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने के लिए अंतिम सांस तक लड़े। प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा,”आज हमारा राष्ट्र भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के सर्वोच्च बलिदान को याद कर रहा है। उनकी निडरता और न्याय के लिए संघर्ष हमें हमेशा प्रेरित करता रहेगा।”
पीएम मोदी ने एक वीडियो संदेश में इन तीनों क्रांतिकारियों के स्वतंत्रता संग्राम में दिए गए योगदान को याद किया। उन्होंने भगत सिंह के बचपन की एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा, “एक दिन एक बच्चा खेत में लकड़ी बो रहा था। पिता ने पूछा कि वह क्या बो रहा है, तो बच्चे ने जवाब दिया – बंदूकें। पिता ने पूछा, ‘बंदूकों का क्या करोगे?’ बच्चे ने कहा, ‘देश को आजाद कराऊंगा।’ वह बच्चा कोई और नहीं बल्कि शहीद भगत सिंह थे।”प्रधानमंत्री ने कहा कि भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव का बलिदान आज भी हर भारतीय के दिलों में बसा हुआ है। उन्होंने एक श्लोक उद्धृत करते हुए कहा, “‘नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि, नैनं दहति पावकः’ यानी जो देश के लिए बलिदान देते हैं, उन्हें कोई शस्त्र काट नहीं सकता और न ही आग जला सकती है।”उन्होंने कहा कि शहीद दिवस हमें उन वीरों की याद दिलाता है, जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। यह दिन हमें स्वतंत्रता संग्राम के बलिदान को याद रखने और उस स्वतंत्रता को संजोए रखने की प्रेरणा देता है।

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