- Home
- देश
-
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने मंगलवार को जानकारी देते हुए कहा कि दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत देशभर में 10.05 करोड़ ग्रामीण महिला परिवारों को 90.90 लाख स्वयं सहायता समूहों (SHG) में संगठित किया गया है। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उनकी आय में वृद्धि करना है।
सरकार ने जानकारी दी कि वित्त वर्ष 2013-14 से लेकर अब तक SHG द्वारा 10.20 लाख करोड़ रुपये का बैंक लोन लिया गया है, जिसका उपयोग महिलाओं ने छोटे व्यवसाय शुरू करने और अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने में किया गया। ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी ने लोकसभा में बताया कि 28 फरवरी, 2025 तक SHG और उनके संघों को सरकार ने 51,368.39 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की है। इसमें रिवॉल्विंग फंड और कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड शामिल हैं।यह मिशन देशभर में तेजी से लागू किया जा रहा है। वर्तमान में यह 28 राज्यों और 6 केंद्र शासित प्रदेशों के 745 जिलों और 7,144 ब्लॉकों में चल रहा है। केवल दिल्ली और चंडीगढ़ को छोड़कर यह योजना पूरे देश में लागू है। वहीं महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में भी सरकार मदद कर रही है। इसके लिए “सरस मेला” जैसे आयोजन किए जाते हैं, जहां SHG की महिलाएं अपने उत्पाद बेचती हैं। इसके अलावा, SHG के उत्पादों को “सरस कलेक्शन” के नाम से सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) पर बेचा जा रहा है। सरकार ने फ्लिपकार्ट समर्थ, अमेजन सहेली और मीशो जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के साथ समझौता किया है, ताकि SHG के उत्पाद ऑनलाइन भी बिक सकें। इसके लिए मंत्रालय ने अपना ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया है, जिससे महिलाओं को डिजिटल माध्यम से अपने उत्पाद बेचने में मदद मिल रही है। - नई दिल्ली। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने 16-20 मार्च तक भारत की अपनी आधिकारिक यात्रा के तीसरे दिन मंगलवार को नई दिल्ली में अक्षरधाम मंदिर का दौरा किया। लक्सन ने एक्स पर लिखा, “न्यूजीलैंड के हिंदू समुदाय ने हमारे देश के लिए बहुत बड़ा योगदान दिया है। आज दिल्ली में, मैंने कई कीवी-हिंदुओं के लिए पवित्र स्थान – बीएपीएस स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर में नमन किया।”न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने पीएम मोदी के साथ राजधानी के गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब का किया दौरासोमवार शाम को न्यूजीलैंड के नेता ने हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय चर्चा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ राजधानी में गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब का दौरा किया। लक्सन ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मैंने गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब का दौरा किया, जो गहरी आस्था और इतिहास का स्थान है। सेवा और मानवता के प्रति सिख समुदाय की अटूट प्रतिबद्धता सराहनीय है।”प्रधानमंत्री मोदी ने न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री के भारत से गहरे लगाव का किया जिक्रमंगलवार शाम को दिल्ली की अपनी यात्रा समाप्त कर मुंबई के लिए रवाना होने से पहले न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री ने इंडिया गेट जाने का भी समय निकाला। सोमवार को लक्सन और कीवी प्रतिनिधिमंडल का भारत में स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री के भारत से गहरे लगाव का जिक्र किया।न्यूजीलैंड में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों के प्रति प्रधानमंत्री लक्सन का है विशेष स्नेहप्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “हम सबने देखा कि कैसे कुछ दिन पहले उन्होंने ऑकलैंड में होली का त्योहार मनाया! न्यूजीलैंड में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों के प्रति प्रधानमंत्री लक्सन का स्नेह इस बात से भी देखा जा सकता है कि उनके साथ एक बड़ा सामुदायिक प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है।”दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर दिया बलदोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न क्षेत्रों पर गहन चर्चा की और रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग को मजबूत एवं संस्थागत बनाने का निर्णय लिया। सोमवार को दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय चर्चा के बाद जारी भारत-न्यूजीलैंड संयुक्त वक्तव्य में कहा गया, “प्रधानमंत्रियों ने दोनों देशों के लोगों के बीच मजबूत संबंधों पर संतोष व्यक्त किया।”
- नई दिल्ली। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इटली के ट्यूरिन में आयोजित विशेष ओलंपिक विश्व शीतकालीन खेल 2025 में भारतीय एथलीटों के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना की है। भारतीय दल ने 33 पदक जीतकर वैश्विक मंच पर देश को गौरवान्वित किया।श्री मोदी ने आज संसद भवन में एथलीटों से मुलाकात की और उनकी लगन और उपलब्धियों के लिए उन्हें बधाई दी।प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा;"मुझे हमारे एथलीटों पर बहुत गर्व है जिन्होंने इटली के ट्यूरिन में आयोजित विशेष ओलंपिक विश्व शीतकालीन खेलों में देश को गौरव दिलाया है! हमारे प्रतिभाशाली खिलाडि़यों ने 33 पदक जीते हैं। संसद में खिलाडि़यों के दल से मुलाकात की और उनकी उपलब्धियों के लिए उन्हें बधाई दी।
-
श्योपुर/भोपाल. मध्यप्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान (केएनपी) में मादा चीता 'गामिनी' और उसके चार शावकों को सोमवार को जंगल में छोड़ा गया। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि गामिनी और उसके चार शावकों को जंगल में छोड़े जाने के बाद केएनपी में खुले में विचरण करने वाले चीतों की संख्या बढ़कर 17 हो गयी है, जबकि नौ चीते बाड़ों में हैं। अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक उत्तम कुमार शर्मा ने एक बयान में बताया कि दक्षिण अफ्रीकी मादा चीता 'गामिनी' और उसके चार शावकों (दो नर और दो मादा, उम्र 12 महीने) को श्योपुर जिले के खजुरी वन क्षेत्र में सफलतापूर्वक छोड़ा गया है और सभी चीते स्वस्थ हैं। पर्यटन क्षेत्र में चीतों को छोड़े जाने के बाद अब आगंतुकों को सफारी के दौरान चीतों को देखने का अवसर मिल सकता है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उनको जंगल में छोड़े जाने को चीता परियोजना और वन्यजीव संरक्षण के लिए एक ‘‘महत्वपूर्ण दिन'' करार दिया। यादव ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका से मध्यप्रदेश में लाए गए चीते न केवल भारत के लिए बल्कि जैव विविधता की दृष्टि से एशिया के लिए भी एक महत्वपूर्ण परियोजना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केएनपी क्षेत्र में चीतों की बढ़ती संख्या से पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार उपलब्ध होगा और चंबल क्षेत्र की समग्र अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। उन्होंने मीडिया को दिए संदेश में कहा कि इस अंतरमहाद्वीपीय परियोजना के लिए कूनो (श्योपुर) का चयन करना प्रदेश के लिए सौभाग्य की बात है। यादव ने चीता परियोजना के सफल कार्यान्वयन के लिए राज्य वन विभाग के समर्पण और कड़ी मेहनत की सराहना की। शर्मा ने एक विज्ञप्ति में कहा, ‘‘गामिनी और सभी चार शावक स्वस्थ हैं। यह वन क्षेत्र अहेरा पर्यटन क्षेत्र का हिस्सा है।'' विज्ञप्ति में कहा गया, ‘‘गामिनी और उसके चार शावकों को छोड़े जाने के बाद अब कुनो राष्ट्रीय उद्यान के जंगल में 17 चीते (जिनमें से 11 शावकों ने यहं जन्म लिया है) हैं। सभी चीते स्वस्थ हैं और जंगल में ठीक-ठाक रह रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, गामिनी ने 10 मार्च 2024 को छह शावकों को जन्म दिया था, लेकिन बाद में दो शावकों की मौत हो गई थी। इससे पहले, 21 फरवरी को चीता 'ज्वाला' और उसके चार शावकों को कूनो राष्ट्रीय उद्यान के जंगल में छोड़ा गया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़कर चीता पुनर्वास परियोजना की शुरुआत की थी।
-
नयी दिल्ली. राजस्थान के रावतभाटा में भारत के स्वनिर्मित 700 मेगावाट के परमाणु ऊर्जा संयंत्र को रविवार देर रात उत्तरी ग्रिड से जोड़ दिया गया, जिससे परमाणु ऊर्जा की कुल स्थापित क्षमता 8,880 मेगावाट हो गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। भारत की परमाणु ऊर्जा 'न्यूक्लियर पॉवर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड(एनपीसीआईएल)' ने एक बयान में कहा कि परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड द्वारा निर्धारित शर्तों सहित सभी पूर्व-आवश्यकताओं का अनुपालन करने के बाद, रावतभाटा स्थित राजस्थान परमाणु ऊर्जा परियोजना (आरएपीपी) की सातवीं इकाई को रविवार देर रात दो बजकर 37 मिनट पर उत्तरी ग्रिड से जोड़ दिया गया। नियामक मंजूरी के अनुरूप इकाई का पावर स्तर चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया जाएगा।
-
नई दिल्ली। भारत मूर्त विरासत के सबसे बड़े भंडारों में से एक है, जहां प्रागैतिहासिक काल से लेकर औपनिवेशिक काल तक के स्मारक, स्थल और पुरावशेष मिलते हैं। हालांकि एएसआई, राज्य पुरातत्व विभाग और इनटेक जैसे विभिन्न संगठनों ने इस विरासत के कुछ हिस्सों का दस्तावेजीकरण किया है, लेकिन बहुत कुछ बिखरा हुआ या अलिखित है।
एकीकृत डेटाबेस के ना होने से अनुसंधान, संरक्षण और प्रबंधन चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इसी मुद्दे पर निर्मित विरासत, स्थलों और पुरावशेषों का व्यवस्थित रूप से दस्तावेजीकरण और डिजिटलीकरण करने के लिए स्मारक और पुरावशेषों पर राष्ट्रीय मिशन (एनएमएमए) शुरू किया गया था। मानकीकृत दस्तावेज़ीकरण, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और जन जागरूकता के माध्यम से, एनएमएमए का मकसद भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को सुनिश्चित करते हुए एक व्यापक राष्ट्रीय डेटाबेस बनाना है।स्मारकों और पुरावशेषों पर राष्ट्रीय मिशनवर्ष 2007 में स्थापित एनएमएमए, भारत की निर्मित विरासत और पुरावशेषों के डिजिटलीकरण और दस्तावेज़ीकरण के लिए ज़िम्मेदार है। इसने स्मारकों और पुरावशेषों के लिए राष्ट्रीय रजिस्टर संकलित करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है।एनएमएमए की उपलब्धियांपुरातन वस्तुओं का डिजिटलीकरण: 12,34,937 पुरावशेषों का डिजिटलीकरण किया गया है, जिसमें एएसआई संग्रहालयों/मंडलों/शाखाओं से 4,46,068 और अन्य संस्थानों से 7,88,869 पुरावशेष शामिल हैं।निर्मित विरासत और स्थल: 11,406 स्थलों और स्मारकों का दस्तावेजीकरण किया गया है। बजट आवंटन: वित्त वर्ष 2024-25 में एनएमएमए के लिए 20 लाख रुपये आवंटित किए गए।एनएमएमए के उद्देश्य:बेहतर प्रबंधन और अनुसंधान के लिए निर्मित विरासत, स्मारकों और पुरावशेषों का राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करना और उसका दस्तावेज़ीकरण करना। केंद्रीय, राज्य, निजी संस्थानों और विश्वविद्यालयों में पुरावशेषों का एक समान दस्तावेज़ीकरण सुनिश्चित करना। सांस्कृतिक विरासत संरक्षण के बारे में जागरूकता बढ़ाना।राज्य विभागों, स्थानीय निकायों, संग्रहालयों, गैर सरकारी संगठनों और विश्वविद्यालयों के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण प्रदान करना। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई), राज्य विभागों और अन्य हितधारकों के बीच सहयोग बढ़ाना। प्रकाशन और अनुसंधान।प्राचीन स्मारक, पुरातत्व स्थल और अवशेष अधिनियम 1958प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल और अवशेष अधिनियम 1958 (एएमएएसआर अधिनियम 1958) संसद द्वारा इस मकसद से अधिनियमित किया गया था, कि “प्राचीन और ऐतिहासिक स्मारकों और पुरातात्विक स्थलों और राष्ट्रीय महत्व के अवशेषों के संरक्षण, पुरातात्विक उत्खनन के विनियमन और मूर्तियों, नक्काशी और अन्य समान वस्तुओं के संरक्षण के लिए प्रावधान किया जा सके।एएमएएसआर अधिनियम 1958 के अनुसार, प्राचीन स्मारकों की परिभाषाएं निम्नलिखित हैं“प्राचीन स्मारक” का अर्थ है, कोई भी संरचना, निर्माण, या स्मारक, या कोई टीला या दफनाने का स्थान, या कोई गुफा, चट्टान की मूर्ति, शिलालेख, या एकाश्म, जो ऐतिहासिक, पुरातात्विक, या कलात्मक रुचि का है और जो कम से कम एक सौ वर्षों से अस्तित्व में है, और इसमें शामिल हैं।किसी प्राचीन स्मारक के अवशेष।किसी प्राचीन स्मारक का स्थल। किसी प्राचीन स्मारक के स्थल से सटे भूमि का ऐसा भाग, जो ऐसे स्मारक को बाड़ लगाने, ढकने या अन्यथा संरक्षित करने के लिए ज़रूरी हो।किसी प्राचीन स्मारक तक पहुंचने और उसके सुविधाजनक निरीक्षण के साधन।राष्ट्रीय स्मारक और पुरावशेष मिशन (एनएमएमए) द्वारा, निर्मित विरासत के दस्तावेज़ीकरण के दायरे को स्वतंत्रता-पूर्व काल से जुड़ी किसी भी संरचना को परिभाषित करके बढ़ाया गया है, और ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए वर्ष 1950 को कट-ऑफ तिथि माना गया है।पुरावशेष एवं कला निधिपुरावशेष एवं कला निधि अधिनियम, 1972 के अनुसार, पुरावशेष एवं कला निधि की निम्नलिखित परिभाषाएं हैं: “पुरावशेष” में शामिल हैं। कोई भी सिक्का, मूर्तिकला, पेंटिंग, शिलालेख या कलात्मक/शिल्पकारी कार्य। किसी इमारत या गुफा से अलग की गई कोई भी वस्तु। कोई भी वस्तु जो विज्ञान, कला, साहित्य, धर्म, रीति-रिवाज या बीते युगों की राजनीति को दर्शाती हो। ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण कोई भी वस्तु।कोई भी वस्तु, जिसे केंद्र सरकार द्वारा पुरावशेष घोषित किया गया हो, जो कम से कम 100 वर्षों से अस्तित्व में हो। कोई भी पांडुलिपि, अभिलेख या अन्य दस्तावेज जो वैज्ञानिक, ऐतिहासिक, साहित्यिक या सौंदर्य संबंधी मूल्य का हो और जो कम से कम पचहत्तर वर्षों से अस्तित्व में हो; “कला-निधि” का अर्थ है, कोई मानवीय कलाकृति, जो पुरावशेष न हो, जिसे केन्द्र सरकार ने आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, उसके कलात्मक या सौन्दर्यात्मक मूल्य को ध्यान में रखते हुए, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए कला-निधि घोषित किया हो।डिजिटलीकरण के दिशा-निर्देशराष्ट्रीय डिजिटल डेटाबेस बनाने के लिए, एनएमएमए ने समान दस्तावेज़ीकरण के लिए मानक तय किए हैं। निर्मित विरासत/स्थलों (द्वितीयक स्रोतों से) की तस्वीरें अनकंप्रेस्ड टिफ प्रारूप (300 डीपीआई रिज़ॉल्यूशन) में होनी चाहिए। पुरावशेषों की तस्वीरें अनकंप्रेस्ड टिफ प्रारूप (300 डीपीआई ) में ली जानी चाहिए। यदि तस्वीरें एनईएफ/आरएडब्ल्यू प्रारूप में ली गई हैं, तो उन्हें बिना किसी बदलाव के टिफ में परिवर्तित किया जाना चाहिए।लघु चित्रों की तस्वीरें या तो टिफ (300 डीपीआई) में उपयुक्त पृष्ठभूमि के साथ ली जा सकती हैं या स्कैन की जा सकती हैं। सभी दस्तावेज़ एमएस एक्सेल प्रारूप में संग्रहीत किए जाने चाहिए, जिसमें प्रत्येक पुरावशेष, विरासत स्थल या निर्मित संरचना के लिए अलग-अलग शीट हों।फ़ोटो को दस्तावेज़ीकरण शीट में शामिल किया जाना चाहिए और मास्टर इमेज के रूप में अलग से संग्रहीत किया जाना चाहिए।डिजिटल स्पेस में भारतीय विरासतआईएचडीएस पहल का मकसद, केवल दस्तावेज़ीकरण की सीमाओं से आगे जाकर, भारत की विरासत को संरक्षित करने और साझा करने के लिए आधुनिक डिजिटल तकनीकों का उपयोग करना है। इसका मकसद विद्वानों और आम जनता के लिए गहन अनुभव और विश्लेषणात्मक उपकरण तैयार करना है।आईएचडीएस के उद्देश्यभारतीय सांस्कृतिक संपत्तियों पर जोर देते हुए डिजिटल विरासत प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान को बढ़ावा देना।डिजिटल विरासत संग्रह बनाने में जनता को शामिल करने के लिए क्राउडसोर्सिंग ढांचा विकसित करना।अंतर्विषयी अनुसंधान में मदद करने के लिए मल्टीमीडिया विरासत संसाधनों के लिए भंडारण, संरक्षण और वितरण तंत्र की स्थापना करना।विरासत संरक्षण में डिजिटल प्रौद्योगिकियों की भूमिका3डी स्कैनिंग, वर्चुअल रियलिटी, कंप्यूटर विज़न और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे डिजिटल उपकरणों ने विरासत संरक्षण के स्वरूप को बदल दिया है। ये प्रौद्योगिकियां निम्नलिखित की अनुमति देती हैं।पांडुलिपियों, स्मारकों और कलाकृतियों के उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाले डिजिटल अभिलेखागार का निर्माण।खत्म हो चुकीं या क्षतिग्रस्त विरासत संरचनाओं का वर्चुअल पुनर्निर्माण।शिक्षा और पर्यटन के लिए इंटरैक्टिव अनुभव।इतिहासकारों, वास्तुकारों और वैज्ञानिकों के लिए बढ़ी हुई शोध क्षमताएं।प्रौद्योगिकी सहयोग की मददभारत की सांस्कृतिक विरासत का डिजिटलीकरण और दस्तावेज़ीकरण, इसके संरक्षण और पहुंच के लिए बेहद ज़रूरी है। स्मारक और पुरावशेषों पर राष्ट्रीय मिशन (एनएमएमए) अभिलेखों को मानकीकृत करके, हितधारकों को प्रशिक्षित करके और जन जागरूकता को बढ़ावा देकर इस प्रयास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।प्रौद्योगिकी और सहयोग की मदद से, एनएमएमए यह सुनिश्चित करता है कि भारत की विशाल विरासत का व्यवस्थित रूप से दस्तावेजीकरण और संरक्षण हो सके और इसे अनुसंधान और शिक्षा के लिए उपलब्ध कराया जा सके। एक एकीकृत और व्यापक डेटाबेस, न केवल इनके संरक्षण में सहायता करेगा, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत करेगा। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में संपन्न महाकुंभ को 1857 के आंदोलन और महात्मा गांधी के दांडी मार्च की तरह महत्वपूर्ण ऐतिहासिक क्षण बताते हुए मंगलवार को कहा कि सबके प्रयास से यह संभव हो सका।
इस आयोजन ने पूरे विश्व को भारत की ताकत दिखाईसंसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में महाकुंभ पर एक बयान में प्रधानमंत्री ने इसे देश की एकता, संस्कृति और सामर्थ्य का जीवंत उदाहरण बताते हुए कहा कि इस आयोजन ने पूरे विश्व को भारत की ताकत दिखाई। उन्होंने देशवासियों, उत्तर प्रदेश की जनता, खासकर प्रयागराज के लोगों और सभी कर्मयोगियों को इस सफल आयोजन के लिए धन्यवाद दिया।पूरे विश्व ने भारत के विशाल स्वरूप को देखापीएम मोदी ने कहा, “मैं कोटि-कोटि देशवासियों को नमन करता हूं, जिनकी वजह से महाकुंभ इतना भव्य हुआ। गंगा को धरती पर लाने के लिए भागीरथ ने जो प्रयास किया था, वैसा ही महाप्रयास इस आयोजन में दिखा। मैंने लाल किले से ‘सबका प्रयास’ की बात कही थी, और महाकुंभ में यह साकार हुआ। पूरे विश्व ने भारत के विशाल स्वरूप को देखा।”उन्होंने इसे जनता की श्रद्धा और संकल्प का परिणाम बताया। प्रधानमंत्री ने महाकुंभ को राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक बताते हुए कहा कि इसने देश के सामर्थ्य पर उठने वाली शंकाओं को खत्म कर दिया।यह हमारे इतिहास में एक ऐसा मोड़ है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगाउन्होंने पिछले साल हुए राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह का जिक्र करते हुए कहा, “राम मंदिर के बाद महाकुंभ ने यह साबित किया कि भारत अगले एक हजार साल के लिए तैयार है। यह हमारे इतिहास में एक ऐसा मोड़ है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा।”उन्होंने स्वामी विवेकानंद के शिकागो भाषण, 1857 के स्वतंत्रता संग्राम, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के दांडी मार्च जैसे ऐतिहासिक पलों का उल्लेख करते हुए महाकुंभ को भी उसी कड़ी का हिस्सा बताया।पीएम ने कहा कि महाकुंभ का उत्साह डेढ़ महीने तक दिखापीएम ने कहा कि महाकुंभ का उत्साह डेढ़ महीने तक दिखा। लोग सुविधाओं और चिंताओं से ऊपर उठकर इसमें शामिल हुए। उन्होंने अपने हाल के मॉरीशस दौरे का जिक्र किया, जहां वे त्रिवेणी संगम का पवित्र जल लेकर गए थे। उन्होंने कहा, “जब गंगाजल को वहां अर्पित किया गया, तो श्रद्धा का माहौल देखते बनता था। यह दिखाता है कि हमारी संस्कृति को अपनाने की भावना कितनी मजबूत हो रही है।”आज की युवा पीढ़ी अपनी परंपराओं को गर्व के साथ अपना रहीउन्होंने जोर देकर कहा कि आज की युवा पीढ़ी अपनी परंपराओं को गर्व के साथ अपना रही है, जो देश की बड़ी ताकत है। पीएम मोदी ने महाकुंभ को एकता का सबसे बड़ा उदाहरण बताया। उन्होंने कहा, “देशभर से लोग प्रयागराज आए। अलग-अलग भाषाएं बोलने वाले, अलग-अलग राज्यों के लोग संगम तट पर जुटे। वहां छोटे-बड़े का कोई भेद नहीं था। ‘मैं’ नहीं, ‘हम’ की भावना दिखी। यह एकता आज के दौर में हमारी सबसे बड़ी पूंजी है, जब दुनिया में बिखराव बढ़ रहा है।”महाकुंभ से देश को कई प्रेरणाएं मिलीउन्होंने कहा कि महाकुंभ से देश को कई प्रेरणाएं मिली हैं, जिनमें एकता के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण भी शामिल है।प्रधानमंत्री ने नदियों के संकट पर चिंता जताते हुए कहा, “हमारे देश में कई नदियां हैं, लेकिन कुछ संकट में हैं। हमें नदी उत्सवों को बढ़ावा देना होगा ताकि आज की पीढ़ी पानी के महत्व को समझे।”यह आयोजन हमें नए संकल्पों की ओर ले जाता हैउन्होंने महाकुंभ को सामाजिक भाईचारे और विरासत के गर्व का प्रतीक बताते हुए कहा कि जब समाज अपनी परंपराओं से जुड़ता है, तो ऐसी भव्य तस्वीरें सामने आती हैं, जैसी प्रयागराज में दिखीं। पीएम मोदी ने कहा, “यह आयोजन हमें नए संकल्पों की ओर ले जाता है। यह हमारी ताकत, एकता और संस्कृति का उत्सव था, जिसे दुनिया ने देखा।” -
नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को नई दिल्ली स्थित नए संसद भवन में प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (पीएमआईएस) के लिए एक मोबाइल ऐप लॉन्च किया। इस ऐप के जरिए प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के लिए आवेदन करना आसान हो जाएगा। इसके साथ ही प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना से जुड़ी जानकारियां देने के लिए पहले सुविधा केंद्र की शुरुआत की गई है। यह केंद्र कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (एमसीए) और भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने बनाया है। यहां से युवाओं को इंटर्नशिप के बारे में जानकारी और मदद मिलेगी।
इंटर्नशिप करने के लिए आवेदन करने की आखिरी तारीख बढ़ाकर की गई 31 मार्चप्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के तहत इंटर्नशिप करने के लिए आवेदन करने की आखिरी तारीख पहले 12 मार्च थी, लेकिन इसको बढ़ाकर 31 मार्च तक कर दिया गया है। मोबाइल ऐप के लॉन्च होने के बाद युवाओं के लिए सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और देश की टॉप-500 कंपनियों में इंटर्नशिप करना और भी आसान हो जाएगा। आवेदक प्रधानमंत्री इंटर्नशिप स्कीम की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर भी आवेदन कर सकते हैं।पहले दौर में 1.27 लाख युवाओं को मिला इंटर्नशिप करने का अवसरइस योजना के तहत पहले दौर में 1.27 लाख युवाओं को इंटर्नशिप करने का अवसर मिला था। अब दूसरे दौर में 1.25 लाख से ज्यादा युवाओं को इंटर्नशिप का मौका देने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार ने इस योजना के पायलट प्रोजेक्ट के लिए 840 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं, जिसमें से 48 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।योजना के लिए पात्र आवेदक की आयु 21 से 24 वर्ष होनी चाहिएइस योजना के लिए पात्र आवेदक की आयु 21 से 24 वर्ष होनी चाहिए, उसने कक्षा 10वीं और 12वीं उत्तीर्ण की हो। इसके साथ ही उसके पास स्नातक की डिग्री, आईटीआई डिप्लोमा या अन्य तकनीकी योग्यता हो।योजना के तहत इंटर्न को मिलेगा यह लाभयोजना के तहत इंटर्न को 5 हजार रुपये का मासिक वजीफा, आकस्मिक खर्चों के लिए 6 हजार रुपये का एकमुश्त अनुदान दिया जाता है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत बीमा कवरेज भी मिलता है। -
भुवनेश्वर. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री रहे भाजपा के वरिष्ठ नेता देबेंद्र प्रधान का सोमवार को निधन हो गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। वह 84 वर्ष के थे। उनके पुत्र धर्मेन्द्र प्रधान, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली मौजूदा केंद्र सरकार में शिक्षा मंत्री हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओडिशा इकाई के पूर्व अध्यक्ष देबेंद्र प्रधान ने नयी दिल्ली में अंतिम सांस ली। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि देबेंद्र प्रधान एक लोकप्रिय जननेता और योग्य सांसद थे।
माझी ने कहा, ‘‘उन्होंने (देबेंद्र प्रधान ने) 1999 से 2001 तक केन्द्रीय परिवहन एवं कृषि मंत्री के रूप में अपने कर्तव्यों का कुशलतापूर्वक निर्वहन किया। एक जनप्रतिनिधि एवं सांसद के रूप में उन्होंने अनेक कल्याणकारी कार्य किए जिसके लिए उन्हें आम जनता का काफी स्नेह मिला। उन्होंने अपना पूरा जीवन सेवा और दृढ़ संकल्प की भावना के साथ राज्य के विकास के लिए समर्पित कर दिया।'' माझी ने कहा कि देश और राज्य ने देबेंद्र प्रधान के रूप में एक प्रतिष्ठित लोक सेवक खो दिया है। मुख्यमंत्री ने उनके बेटे से भी बात की और अपनी संवेदना व्यक्त की। ओडिशा विधानसभा में विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने कहा कि देबेंद्र प्रधान को उनके अद्वितीय संगठनात्मक कौशल और अडिग व्यक्तित्व के लिए हमेशा याद किया जाएगा। पटनायक ने कहा, ‘‘डॉ. प्रधान के निधन से राज्य ने एक प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्ति और लोकप्रिय राजनेता खो दिया है।'' -
नयी दिल्ली. सरकार ने सोमवार को संसद को बताया कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने चालू वित्त वर्ष में 6 मार्च तक स्वायत्त प्रक्रिया के माध्यम से रिकॉर्ड 2.16 करोड़ दावों का निपटारा किया, जो पिछले वित्त वर्ष के आंकड़े के दोगुने से भी अधिक है। पिछले वित्तीय वर्ष में ईपीएफओ (कर्मचारी भविष्य निधि संगठन) ने 89.52 लाख दावों का निपटारा किया था।
श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने लोकसभा को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि अब 60 प्रतिशत अग्रिम (निकासी) दावों का निपटारा ‘ऑटो मोड' के माध्यम से किया जाता है। मंत्री ने कहा कि स्वचालित माध्यम से अग्रिम (आंशिक निकासी) दावों के निपटारे की सीमा भी बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दी गई है। मंत्री ने सदन को बताया कि बीमारी/अस्पताल में भर्ती होने से संबंधित दावों के अलावा, आवास, शिक्षा और विवाह के लिए आंशिक निकासी की भी स्वचालित माध्यम से व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि स्वचालित माध्यम के तहत दावों का तीन दिन के भीतर निपटारा किया जाता है।मंत्री ने कहा कि ईपीएफओ ने चालू वित्त वर्ष के दौरान 6 मार्च 2025 तक 2.16 करोड़ दावा निपटान का ऐतिहासिक उच्च स्तर हासिल किया, जो वित्त वर्ष 2023-24 में 89.52 लाख से अधिक है। उन्होंने सदन को बताया कि इसके अलावा, सदस्यों के विवरण में सुधार की प्रक्रिया को सरल बना दिया गया है तथा आधार-सत्यापित यूएएन (सार्वभौम खाता संख्या) वाले सदस्य, ईपीएफओ के हस्तक्षेप के बिना, इसमें स्वयं सुधार कर सकते हैं। वर्तमान में, इस तरह के 96 प्रतिशत सुधार बिना किसी ईपीएफ कार्यालय के हस्तक्षेप के किए जा रहे हैं, और 99 प्रतिशत से अधिक दावे ऑनलाइन माध्यम से प्राप्त होते हैं। छह मार्च 2025 तक 7.14 करोड़ दावे ऑनलाइन माध्यम से दायर किए गए हैं। -
नयी दिल्ली. भारत और न्यूजीलैंड ने सोमवार को रक्षा संबंधों को संस्थागत बनाने के लिए एक महत्वाकांक्षी समझौते पर हस्ताक्षर किए और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने न्यूजीलैंड के अपने समकक्ष क्रिस्टोफर लक्सन से मुलाकात के दौरान उनके देश में कुछ खालिस्तान समर्थक तत्वों द्वारा भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम दिए जाने पर चिंता से अवगत कराया। मोदी और लक्सन के बीच वार्ता के बाद दोनों पक्षों ने शिक्षा, खेल, कृषि और जलवायु परिवर्तन सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए छह समझौतों पर हस्ताक्षर किए तथा रक्षा उद्योग क्षेत्र में सहयोग के लिए खाका तैयार करने का निर्णय लिया। मोदी और लक्सन ने दोनों देशों के बीच ‘‘संतुलित, महत्वाकांक्षी, व्यापक और पारस्परिक रूप से लाभकारी'' मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए वार्ता शुरू करने का स्वागत किया। विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्व) जयदीप मजूमदार ने संकेत दिया कि दोनों देश इस वर्ष के अंत तक एफटीए पर हस्ताक्षर करने का प्रयास करेंगे। मोदी ने अपने मीडिया वक्तव्य में कहा कि भारत और न्यूजीलैंड एक स्वतंत्र, खुले, सुरक्षित और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र का समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हम विस्तारवाद की नहीं, बल्कि विकास की नीति में विश्वास करते हैं।'' उनकी यह टिप्पणी क्षेत्र में चीन के विस्तारवादी रुख पर बढ़ती वैश्विक चिंताओं के बीच आई है। एक संयुक्त वक्तव्य के अनुसार, दोनों नेताओं ने ऐसे हिंद-प्रशांत क्षेत्र का समर्थन करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि की जहां संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाएगा। लक्सन रविवार को पांच दिवसीय यात्रा पर राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे, जिसका मुख्य उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच गहन आर्थिक भागीदारी को बढ़ावा देना है। एफटीए वार्ता के संदर्भ में, मोदी और लक्सन ने डिजिटल भुगतान क्षेत्र में सहयोग के शीघ्र कार्यान्वयन की संभावना तलाशने के लिए दोनों पक्षों के संबंधित अधिकारियों के बीच चर्चा पर सहमति व्यक्त की। संयुक्त वक्तव्य के अनुसार, व्यापार समझौते के लिए वार्ता के संदर्भ में, दोनों पक्षों ने पेशेवरों और कुशल कामगारों की आवाजाही को सुविधाजनक बनाने वाली व्यवस्था पर चर्चा शुरू करने को लेकर सहमति व्यक्त की, जिसका मुख्य उद्देश्य अनियमित प्रवास की चुनौती से निपटना है। बातचीत में मोदी ने 2019 में क्राइस्टचर्च में हुए आतंकवादी हमले और 26/11 मुंबई हमले का जिक्र करते हुए कहा कि किसी भी रूप में आतंकवाद ‘‘अस्वीकार्य'' है। उन्होंने कहा, ‘‘आतंकवादी हमलों के दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है। हम आतंकवादी, अलगाववादी और कट्टरपंथी तत्वों के खिलाफ मिलकर सहयोग करना जारी रखेंगे।'' मोदी ने कहा, ‘‘इस संदर्भ में, हमने न्यूजीलैंड में कुछ गैरकानूनी तत्वों द्वारा भारत विरोधी गतिविधियों के बारे में अपनी चिंता साझा की। हमें विश्वास है कि हमें इन सभी गैरकानूनी तत्वों के खिलाफ न्यूजीलैंड सरकार से सहयोग मिलता रहेगा।'' प्रेस वार्ता में मजूमदार ने कहा कि मोदी-लक्सन के बीच वार्ता में न्यूजीलैंड में कुछ खालिस्तान समर्थक तत्वों की गतिविधियों का मुद्दा उठा। उन्होंने कहा, ‘‘हम अपने मित्रों को उनके देशों में भारत विरोधी तत्वों की गतिविधियों और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले तथा हमारे राजनयिकों पर हमले की धमकी देने के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा अन्य लोकतांत्रिक स्वतंत्रताओं के दुरुपयोग के बारे में सचेत करते हैं।'' मजूमदार ने कहा, ‘‘न्यूजीलैंड की सरकार ने पहले भी हमारी चिंताओं को ध्यान में रखा है तथा इस पर विचार किया है।'' उन्होंने कहा, ‘‘आज भी हमें यही जवाब मिला है।'' मोदी ने कहा कि दोनों पक्षों ने रक्षा एवं सुरक्षा साझेदारी को मजबूत एवं संस्थागत बनाने का निर्णय लिया है तथा रक्षा उद्योग क्षेत्र में सहयोग के लिए एक खाका तैयार किया जाएगा। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने और मोदी ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चुनौतीपूर्ण रणनीतिक दृष्टिकोण पर चर्चा की। लक्सन ने कहा, ‘‘मैंने समृद्ध हिंद-प्रशांत में योगदान देने के लिए अपने-अपने हितों पर साझा चिंताओं को दूर करने की हमारी मजबूत प्रतिबद्धता दोहराई।'' प्रस्तावित एफटीए पर मोदी ने कहा कि डेयरी, खाद्य प्रसंस्करण और फार्मा जैसे क्षेत्रों में आपसी सहयोग और निवेश को बढ़ावा दिया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-न्यूजीलैंड रक्षा संबंधों पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा, ‘‘हमने अपनी रक्षा और सुरक्षा साझेदारी को मजबूत और संस्थागत बनाने का निर्णय लिया है। संयुक्त अभ्यास, प्रशिक्षण, बंदरगाह यात्राओं के साथ-साथ रक्षा उद्योग में भी आपसी सहयोग के लिए खाका बनाया जाएगा।'' दोनों पक्षों के बीच हस्ताक्षरित समझौतों में भारत के केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) और न्यूजीलैंड की सीमा शुल्क सेवा के बीच पारस्परिक मान्यता समझौता भी शामिल है। संयुक्त वक्तव्य में कहा गया कि रक्षा समझौता समग्र रक्षा संबंधों को और मजबूत करेगा।
समुद्री सुरक्षा के संदर्भ में, न्यूजीलैंड ने भारत के संयुक्त समुद्री बलों से जुड़ने का स्वागत किया। मोदी और लक्सन दोनों ने न्यूजीलैंड की कमान टास्क फोर्स 150 के दौरान रक्षा संबंधों में प्रगति का स्वागत किया। दोनों नेताओं ने वैश्विक चुनौतियों पर भी बात की। पश्चिम एशिया की स्थिति पर, मोदी और लक्सन ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए अपने दृढ़ समर्थन की पुष्टि की। संयुक्त वक्तव्य में कहा गया कि उन्होंने स्थायी शांति सुनिश्चित करने के लिए वार्ता जारी रखने का अपना आह्वान दोहराया, जिसमें सभी बंधकों की रिहाई और गाजा में तेज, सुरक्षित और निर्बाध मानवीय पहुंच शामिल है। मोदी और लक्सन ने यूक्रेन में युद्ध पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया और अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों और क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के सम्मान के आधार पर न्यायपूर्ण और स्थायी शांति के लिए समर्थन व्यक्त किया। संयुक्त वक्तव्य में कहा गया कि दोनों नेताओं ने सीमा पार आतंकवाद समेत सभी तरह के आतंकवाद की निंदा की। इसमें कहा गया कि मोदी और लक्सन ने सभी देशों की ओर से संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों और व्यक्तियों के खिलाफ तत्काल, निरंतर और ठोस कार्रवाई करने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने आतंकवाद के वित्तपोषण नेटवर्क और सुरक्षित ठिकानों को नष्ट करने, ऑनलाइन सहित आतंकवादी बुनियादी ढांचे को नष्ट करने तथा आतंकवाद के अपराधियों को शीघ्र न्याय के दायरे में लाने का आह्वान किया। -
नयी दिल्ली. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अमेरिका की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड ने सोमवार को कई मुद्दों पर चर्चा की, जिसमें विशेष रूप से रक्षा, प्रौद्योगिकी और सूचना साझा करने के क्षेत्रों में भारत एवं अमेरिका के बीच संबंधों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। आधिकारिक बयान के अनुसार, राजनाथ और गबार्ड ने समुद्री क्षेत्र में द्विपक्षीय रणनीतिक सहयोग की भी समीक्षा की। गबार्ड भारत की ढाई दिन की यात्रा पर रविवार तड़के राष्ट्रीय राजधानी आईं। यह अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के किसी शीर्ष अधिकारी की भारत की पहली उच्चस्तरीय यात्रा है। राजनाथ ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि उन्हें अमेरिकी राष्ट्रीय खुफिया प्रमुख से मिलकर ‘‘खुशी'' हुई और उन्होंने भारत-अमेरिका साझेदारी को और मजबूत बनाने के तरीकों पर चर्चा की। रक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘हमने भारत-अमेरिका साझेदारी को और गहरा करने के उद्देश्य से रक्षा और सूचना साझा करने समेत कई मुद्दों पर चर्चा की।'' समझा जाता है कि दोनों पक्षों ने क्षेत्र में चीनी सेना की बढ़ती सैन्य आक्रामकता की पृष्ठभूमि में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उभरती सुरक्षा स्थिति पर भी विचार-विमर्श किया। बयान में कहा गया, ‘‘राजनाथ सिंह और तुलसी गबार्ड ने भारत और अमेरिका के बीच सैन्य अभ्यास, रणनीतिक सहयोग, रक्षा औद्योगिक आपूर्ति शृंखलाओं के एकीकरण और सूचना-साझा करने में सहयोग, विशेष रूप से समुद्री क्षेत्र में, समेत विभिन्न क्षेत्रों में की गई महत्वपूर्ण प्रगति की समीक्षा की।'' बयान में कहा गया कि दोनों नेताओं ने अत्याधुनिक रक्षा नवाचार और विशिष्ट प्रौद्योगिकियों में सहयोग के अवसरों की भी तलाश की, जो पारस्परिक रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए उनकी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। बयान के मुताबिक, राजनाथ ने ‘‘भारतीय संस्कृति और विरासत के प्रति दृढ़ सद्भावना'' के लिए अमेरिकी राष्ट्रीय खुफिया निदेशक का ‘‘आभार'' व्यक्त किया, और कहा कि ऐसी भावनाएं भारत और अमेरिका के बीच मित्रता के बंधन को और गहरा करती हैं। बयान में कहा गया, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हाल की बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान से पता चलता है कि चर्चाओं में भारत-अमेरिका द्विपक्षीय रक्षा साझेदारी की बढ़ती ताकत की पुष्टि की गई है।'' इससे एक दिन पहले, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल और गबार्ड ने रविवार को द्विपक्षीय वार्ता की थी और दुनियाभर के शीर्ष खुफिया अधिकारियों के एक सम्मेलन की अध्यक्षता की थी। ऐसा माना जा रहा है कि डोभाल और गबार्ड ने आमने-सामने की बैठक में भारत-अमेरिका वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के अनुरूप मुख्य रूप से खुफिया जानकारी साझा करने के तंत्र को मजबूत करने और सुरक्षा क्षेत्र में मिलकर काम करने के तरीकों पर चर्चा की। गबार्ड, कनाडा के खुफिया विभाग के प्रमुख डेनियल रोजर्स और ब्रिटेन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जोनाथन पॉवेल दुनियाभर के उन शीर्ष खुफिया अधिकारियों में शामिल हैं, जिन्होंने यहां भारत द्वारा आयोजित सुरक्षा सम्मेलन में हिस्सा लिया। बंद कमरे में हुई इस वार्ता पर कोई आधिकारिक बयान नहीं जारी किया गया है। माना जा रहा है कि खुफिया और सुरक्षा विभागों के शीर्ष अधिकारियों ने आतंकवाद और उभरती प्रौद्योगिकियों से उत्पन्न खतरों से निपटने के लिए खुफिया जानकारी साझा करने तथा आपसी सहयोग बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया।
-
नई दिल्ली। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। राष्ट्रपति भवन में प्रधानमंत्री लक्सन और उनके प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भारत और न्यूजीलैंड के बीच घनिष्ठ और मैत्रीपूर्ण संबंध हैं। यह, लोकतंत्र, कानून के शासन और लोगों के बीच मजबूत संबंधों में निहित साझा मूल्यों पर आधारित हैं।
राष्ट्रपति ने पिछले वर्ष अगस्त में न्यूजीलैंड की अपनी राजकीय यात्रा की यादें ताजा की और कहा कि न्यूजीलैंड की प्राकृतिक सुंदरता और वहां के लोगों की सांस्कृतिक विविधता ने उनके मन पर अमिट छाप छोड़ी है। उन्होंने कहा कि शैक्षिक आदान-प्रदान भारत-न्यूजीलैंड संबंधों का एक महत्वपूर्ण पहलू है।उन्होंने संस्थागत आदान-प्रदान, भारत में न्यूजीलैंड के विश्वविद्यालयों द्वारा परिसरों की स्थापना और दोहरी डिग्री के माध्यम से दोनों देशों के बीच इसमें सीमाशैक्षिक सहयोग बढ़ाने की अपार संभावनाओं पर प्रकाश डाला। राष्ट्रपति ने भारत और न्यूजीलैंड के बीच द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक संबंधों के विकास पर भी संतोष व्यक्त किया। शुल्क, बागवानी, वानिकी, आपदा प्रबंधन और पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर शामिल हैं। राष्ट्रपति ने न्यूजीलैंड की प्रगति में प्रतिभाशाली और मेहनती भारतीय समुदाय के महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की।दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि अगस्त 2024 में राष्ट्रपति की न्यूजीलैंड की ऐतिहासिक राजकीय यात्रा और प्रधानमंत्री लक्सन की यात्रा के दौरान आज घोषित महत्वपूर्ण परिणाम भारत-न्यूजीलैंड साझेदारी को सकारात्मक गति प्रदान करेंगे। -
नई दिल्ली। बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के सह-अध्यक्ष बिल गेट्स ने सोमवार को नीति आयोग के विकसित भारत स्ट्रेटजी रूम (वीबीएसआर) का दौरा किया, जहां उन्होंने देश भर के नीति निर्माताओं के लिए साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने को बढ़ाने के लिए डिजाइन किए गए एडवांस एआई-सक्षम इमर्सिव सेंटर का अनुभव किया।
सेंटर में आधुनिक टेक्नोलॉजी का किया गया है उपयोगइस सेंटर में आधुनिक टेक्नोलॉजी का उपयोग किया गया है, जो केंद्र, राज्य, जिले और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों को रियल टाइम डेटा का विश्लेषण करने की अनुमति देता है, जिससे अधिकारी एक जागरूक नीतिगत निर्णय ले सकते हैं। डेटा-संचालित गवर्नेंस में एक क्रांतिकारी कदम के रूप में ‘विकसित भारत स्ट्रेटजी रूम’ को 7 मार्च, 2024 को लॉन्च किया गया था। 27 इंटरैक्टिव स्क्रीनों और इसके केंद्र में स्थित टचस्क्रीनों के माध्यम से चलने वाला यह सेंटर राज्यों, क्षेत्रों और सरकारी कार्यक्रमों के आंकड़ों का पता लगाने के लिए एक डायनामिक प्लेटफॉर्म प्रदान करता है।11 जुलाई, 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी किया था इस केंद्र का दौरामशीन लर्निंग और नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग का उपयोग करके डेवलप किया गया इसका एआई-संचालित सॉफ्टवेयर नीति निर्माताओं को जटिल डेटा का कुशलतापूर्वक विश्लेषण करने में मदद करता है। 11 जुलाई, 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस केंद्र का दौरा किया था, जो विकसित भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में इसकी भूमिका को दिखाता है।भारत में कई तरह के एसआई संचालित सेंटर खुल रहे हैंवीबीएसआर की सफलता से प्रेरित होकर पूरे भारत में कई तरह के एसआई संचालित सेंटर खुल रहे हैं। बिहार में बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान (बीआईपीएआरडी) ने जेननेक्स्ट लैब की स्थापना की है, जो बेहतर प्रशासन के लिए रियल टाइम डेटा संग्रह और परिभाषित करने पर ध्यान केंद्रित करता है।इसके अलावा, लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए) फ्यूचर्स लीडर्स को रियल टाइम डेटा विश्लेषण और इंटरैक्टिव निर्णय लेने वाले उपकरणों से लैस करने के लिए एक एआई स्ट्रैटजी रूम बना रही है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (PMAY-U) के तहत अब तक 90.60 लाख मकान झुग्गीवासियों को दिए जा चुके हैं। यह जानकारी केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के राज्य मंत्री तोखन साहू ने संसद में दी। उन्होंने बताया कि देशभर में 6.54 करोड़ लोग 2011 की जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक झुग्गियों में रहते हैं।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि 118.64 लाख मकानों को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 112.46 लाख मकानों का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। अब तक 90.60 लाख मकानों का निर्माण पूरा हो चुका है और लाभार्थियों को सौंप दिए गए हैं। सरकार ने योजना की अवधि 31 दिसंबर 2025 तक बढ़ा दी है, ताकि पहले से स्वीकृत मकानों का निर्माण पूरा किया जा सके। हालांकि, फंडिंग पैटर्न और कार्यान्वयन प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया गया है।PMAY-U के तहत मकान चार तरीकों से बनाए जाते हैं-लाभार्थी आधारित व्यक्तिगत मकान निर्माण (BLC), सस्ती आवासीय साझेदारी (AHP), झुग्गी पुनर्विकास (ISSR) और क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी योजना (CLSS)। हर राज्य में निर्माण का समय अलग होता है, हालांकि आमतौर पर 12 से 36 महीने लगते हैं।गौरतलब है कि सरकार ने 1 सितंबर 2024 से PMAY-U 2.0 ‘सभी के लिए आवास’ मिशन शुरू किया है, जिसके तहत 1 करोड़ अतिरिक्त लाभार्थियों को मकान देने का लक्ष्य रखा गया है। अब तक 30 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने इस योजना के लिए समझौता किया है, और 6.77 लाख नए मकानों को मंजूरी दी गई है। सरकार का उद्देश्य सभी जरूरतमंद परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराना और झुग्गीवासियों के जीवन स्तर में सुधार लाना है। -
नई दिल्ली।भारत और न्यूजीलैंड ने रक्षा, शिक्षा, खेल, बागवानी, वानिकी के क्षेत्रों में पांच समझौतों पर हस्ताक्षर किए। दोनों पक्षों ने अधिकृत आर्थिक पारस्परिक मान्यता समझौते का भी आदान-प्रदान किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीने आज नई दिल्ली में न्यूजीलैंड के अपने समकक्ष क्रिस्टोफर लक्सन के साथ बातचीत की।
चर्चा में भारत-न्यूजीलैंड संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। अपने प्रेस वक्तव्य में पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की और दोनों पक्षों ने रक्षा और सुरक्षा साझेदारी को मजबूत और संस्थागत बनाने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि संयुक्त अभ्यास, प्रशिक्षण, बंदरगाह यात्राओं के साथ-साथ रक्षा उद्योग में भी आपसी सहयोग के लिए रोडमैप तैयार किया जाएगा।पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच पारस्परिक रूप से लाभकारी मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू करने का निर्णय लिया गया है, जिससे आपसी व्यापार और निवेश की संभावना बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि खेलों में खिलाड़ियों के प्रशिक्षण और आदान-प्रदान के साथ-साथ दोनों ने खेल विज्ञान, मनोविज्ञान और चिकित्सा में सहयोग पर भी जोर दिया। पीएम मोदी ने कहा कि अगले वर्ष दोनों देशों के बीच खेल संबंधों के 100 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाने का निर्णय लिया गया है।उन्होंने कहा कि भारत न्यूजीलैंड में कुछ गैरकानूनी तत्वों द्वारा भारत विरोधी गतिविधियों के बारे में अपनी चिंताओं को साझा करता है और विश्वास व्यक्त करता है कि भारत को इन सभी अवैध तत्वों के खिलाफ न्यूजीलैंड सरकार का समर्थन प्राप्त होता रहेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि चाहे 2019 का क्राइस्टचर्च आतंकी हमला हो या 2008 का मुंबई हमला, किसी भी रूप में आतंकवाद अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि आतंकी हमलों के दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है।पीएम मोदी ने कहा कि भारत और न्यूजीलैंड आतंकवादी, अलगाववादी और कट्टरपंथी तत्वों के खिलाफ सहयोग करना जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष एक स्वतंत्र, खुले, सुरक्षित और समृद्ध हिंद-प्रशांत का समर्थन करते हैं और विस्तारवाद नहीं बल्कि विकास की नीति में विश्वास करते हैं। वहींं लक्सन ने अपने बयान में कहा कि दोनों पक्ष पारस्परिक रूप से लाभकारी मुक्त व्यापार समझौते को प्राप्त करने के लिए तत्पर हैं। उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड भारत में अपनी राजनयिक उपस्थिति बढ़ाएगा। श्री लक्सन आज शाम राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करेंगे।इससे पहले आज न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री ने राजघाट में महात्मा गांधी की समाधि पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री लक्सन की यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना है, तथा सभी क्षेत्रों में संबंधों को गहरा करने और लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा देने की उनकी प्रतिबद्धता की पुष्टि करना है। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री कल भारत की पांच दिवसीय यात्रा पर नई दिल्ली पहुंचे।उनके साथ एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी है, जिसमें मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, व्यवसाय, मीडिया और भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्य शामिल हैं। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री बुधवार को मुंबई का दौरा करेंगे। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अमेरिकी पॉडकास्टर लेक्स फ्रीडमैन के साथ किया गया पॉडकास्ट अंतर्राष्ट्रीय जगत में छाया हुआ है। यही नहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार सुबह (भारतीय समयानुसार) पीएम मोदी के इस पॉडकास्ट को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर शेयर किया है।
तीन घंटे के पॉडकास्ट में पीएम मोदी ने रखे तमाम महत्वपूर्ण बिंदुबताना चाहेंगे, तीन घंटे के इस पॉडकास्ट में पॉडकास्टर लेक्स फ्रिडमैन के साथ बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने तमाम महत्वपूर्ण बिंदु रखे हैं जिनकी चर्चा दुनियाभर में हो रही है।दुनियाभर में छाया पीएम मोदी का पॉडकास्टपॉडकास्ट में जिस तरीके से प्रधानमंत्री ने हर सवाल का बेबाकी से जवाब दिया उससे दुनिया एक बार फिर प्रधानमंत्री मोदी की कायल हो गई है। इससे पहले भी देखा गया है कि प्रधानमंत्री मोदी इस तरह से जब भी अपनी बात कहते हैं तो वैश्विक स्तर पर मंत्र के रूप में उसे लिया जाता है।अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी पीएम मोदी के पॉडकास्ट का लिंक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर किया है। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर के मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। प्रधानमंत्री के शानदार पॉडकास्ट से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इतने प्रभावित हुए हैं कि वो पॉडकास्ट का लिंक शेयर करने से खुद को रोक नहीं पाए।इसके अलावा दुनियाभर के तमाम बड़े नेता भी पीएम मोदी के इस पॉडकास्ट को शेयर कर रहे हैं। पॉडकास्ट में पीएम मोदी ने ट्रंप के साथ अपने सौहार्द के बारे में बात की थी, साथ ही उनके आपसी विश्वास और अपने-अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देने की प्रतिबद्धता पर भी जोर दिया। उन्होंने ट्रंप की “विनम्रता” की सराहना करते हुए कहा कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति अपने पहले कार्यकाल की तुलना में दूसरे कार्यकाल के लिए कहीं अधिक तैयार दिखाई दिए।पीएम मोदी ने अमेरिका के प्रति ट्रंप के अटूट समर्पण की प्रशंसा कीपीएम मोदी ने अमेरिका के प्रति ट्रंप के अटूट समर्पण की भी प्रशंसा की। पीएम मोदी ने कहा “गोली लगने के बाद भी, वह अमेरिका के लिए अडिग रहे। उनका जीवन उनके देश के लिए था। यह उनकी अमेरिका फर्स्ट भावना को दर्शाता है, ठीक वैसे ही जैसे मैं राष्ट्र पहले – भारत पहले में विश्वास करता हूं।” उन्होंने 2019 में ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम में ट्रंप के व्यक्तिगत हाव-भाव को याद किया, जहां उन्होंने दर्शकों के बीच बैठना चुना था, पीएम मोदी ने इसे उनकी विनम्रता का प्रमाण बताया। पीएम मोदी ने संभावित दूसरे कार्यकाल के लिए ट्रंप की स्पष्ट दृष्टि और अच्छी तरह से परिभाषित रोडमैप की भी प्रशंसा की।व्हाइट हाउस की अपनी यात्रा पर विचार करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि कैसे ट्रंप ने राष्ट्रपति निवास के दौरे पर व्यक्तिगत रूप से उनका मार्गदर्शन करके प्रोटोकॉल तोड़ा। वर्षों से व्यक्तिगत रूप से न मिलने के बावजूद, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उनका संचार और विश्वास मजबूत बना हुआ है।उन्होंने हाल ही में हुई अपनी मुलाकात को गर्मजोशी भरी मुलाकात और पारिवारिक बताया, और DOGE (सरकारी दक्षता विभाग) के प्रति एलन मस्क के उत्साह का उल्लेख किया। अपने प्रशासन के तहत शासन सुधारों पर प्रकाश डालते हुए, पीएम मोदी ने मस्क के दक्षता और पारदर्शिता के सिद्धांतों और उनकी सरकार के प्रयासों के बीच समानताएं बताईं। -
नई दिल्ली। गृह मंत्रालय ने देश की सुरक्षा को खतरा पैदा करने वाले 67 प्रतिबंधित संगठनों की नवीनतम सूची जारी की है। गृह मंत्रालय ने अवैध गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत इन संगठनों को आतंकवादी या गैरकानूनी घोषित किया है। इस सूची में 45 संगठनों को आतंकवादी संगठन के रूप में चिह्नित किया गया है, जबकि 22 संगठनों को गैरकानूनी संगठन घोषित किया गया है।
इन प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों में लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, हिज्बुल मुजाहिदीन, अल-कायदा, इस्लामिक स्टेट (ISIS), खालिस्तान लिबरेशन फोर्स, यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (ULFA), नक्सली संगठन (CPI-Maoist), लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (LTTE) और जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश जैसे संगठन शामिल हैं। ये संगठन भारत में आतंकी हमलों, उग्रवाद और हिंसक गतिविधियों में शामिल रहे हैं।इसके अलावा, सरकार ने कई संगठनों को गैरकानूनी घोषित किया है, इनमें स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI), जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF), पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और इसके सहयोगी संगठन, खालिस्तान समर्थक संगठन ‘सिख्स फॉर जस्टिस’ (SFJ) और मणिपुर के कुछ उग्रवादी संगठन शामिल हैं। ये संगठन अलगाववादी गतिविधियों और हिंसा में शामिल रहे हैं, जिससे देश की शांति और स्थिरता को खतरा हुआ है।सरकार द्वारा इन संगठनों पर प्रतिबंध लगाने से उनकी संपत्तियां जब्त की जा सकती हैं, उनके वित्तीय लेन-देन रोके जा सकते हैं, और उनके सदस्यों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। यह प्रतिबंध भारत में आतंकवाद और उग्रवाद पर लगाम लगाने के लिए उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। गृह मंत्रालय समय-समय पर इस सूची को अपडेट करता रहता है ताकि उभरते खतरों से निपटा जा सके और देश की सुरक्षा को मजबूत किया जा सके। -
नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अध्यक्ष वी. नारायणन ने बताया कि केंद्र सरकार ने चंद्रयान-5 मिशन को मंजूरी दे दी है। यह मिशन भारत के 2040 तक चंद्रमा पर मानव मिशन भेजने के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके अलावा, सरकार ने 2035 तक “भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन” स्थापित करने की योजना को भी स्वीकृति दी है।
चेन्नई में एक कार्यक्रम के दौरान नारायणन ने बताया कि इसरो आने वाले वर्षों में कई बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा, “हमारे कई महत्वपूर्ण मिशन जारी हैं। चंद्रयान-4 का मुख्य उद्देश्य चंद्रमा की सतह से सैंपल इकट्ठा करना है, जबकि चंद्रयान-5, जिसे तीन दिन पहले मंजूरी मिली, इसमें 350 किलोग्राम का रोवर होगा। इस मिशन में भारत और जापान मिलकर काम कर रहे हैं।” इससे साफ है कि भारत अंतरिक्ष में अपनी क्षमताओं को और मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।इसरो अब तक तीन चंद्रयान मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दे चुका है। चंद्रयान-3 की सफलता ने भारत को उन देशों की सूची में शामिल कर दिया है, जिन्होंने चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग की है। इससे पहले, केंद्र सरकार ने चंद्रयान-4 मिशन को भी मंजूरी दी थी, जिसका उद्देश्य चंद्रमा पर उतरकर सुरक्षित वापसी और सैंपल कलेक्शन की तकनीक का परीक्षण करना है। इन सभी मिशनों से यह साफ है कि भारत अपने अंतरिक्ष कार्यक्रमों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है।नारायणन ने बताया कि भारत अब तक 131 उपग्रह लॉन्च कर चुका है, जिनमें से कई SAARC देशों को भी दिए गए हैं। पिछले 10 वर्षों में इसरो ने 433 उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण किया है, जिनमें से 34 अन्य देशों के थे। उन्होंने कहा कि इसरो ने 90% की सफलता दर हासिल की है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी उपलब्धि है। यह आंकड़े दिखाते हैं कि भारत अब न केवल अपने लिए, बल्कि अन्य देशों के लिए भी एक भरोसेमंद लॉन्च सेवा प्रदाता बन चुका है।वहीं भारत अब तमिलनाडु के तटीय गांव कुलसेकरपट्टिनम में दूसरा स्पेसपोर्ट बना रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 फरवरी 2024 को इस परियोजना का उद्घाटन किया था। यह स्पेसपोर्ट छोटे उपग्रहों (500 किलोग्राम तक) को लॉन्च करने के लिए स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (SSLV) के उपयोग के लिए बनाया जा रहा है। इस परियोजना का निर्माण 5 मार्च 2025 से शुरू हो चुका है। इस स्पेसपोर्ट की मदद से भारत छोटे उपग्रहों के वैश्विक लॉन्च बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में काम करेगा।कार्यक्रम के दौरान, इसरो प्रमुख ने पूर्व अध्यक्ष के. सिवन की कड़ी मेहनत की तारीफ की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री का एक ही लक्ष्य है- भारत को विकसित बनाना। मैं एक साधारण परिवार से हूं, लेकिन मेरे साथ काम करने वाले सभी सहयोगियों को धन्यवाद देता हूं।”इसरो की यह नई पहल भारत को अंतरिक्ष क्षेत्र में वैश्विक शक्ति बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम है। आने वाले वर्षों में, भारत न केवल चंद्रमा पर मानव मिशन भेजने की तैयारी कर रहा है, बल्कि अपने स्वदेशी अंतरिक्ष स्टेशन की स्थापना की योजना भी बना रहा है। इससे भारत को अंतरिक्ष में दीर्घकालिक शोध करने और वैश्विक स्तर पर अपनी उपस्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी। - भुवनेश्वर. प्रसिद्ध उड़िया कवि और पूर्व प्रशासनिक अधिकारी रमाकांत रथ का रविवार को यहां खारवेल नगर स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। वह 90 वर्ष के थे। परिवार के सदस्यों ने यह जानकारी दी। पद्म भूषण से सम्मानित रथ के परिवार में तीन बेटी और एक बेटा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रथ के निधन पर शोक व्यक्त किया है।मुर्मू ने प्रसिद्ध उड़िया कवि के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि रथ भारतीय साहित्य जगत में एक प्रमुख व्यक्ति थे। मुर्मू ने पोस्ट में कहा, “उन्हें पद्म भूषण समेत कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उन्होंने उड़िया साहित्य में अपने अविस्मरणीय योगदान से अखिल भारतीय साहित्य को समृद्ध किया है।'' राष्ट्रपति ने रथ के शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की।मोदी ने प्रख्यात कवि और विद्वान के निधन पर शोक व्यक्त किया और कहा कि रथ की रचनाएं, विशेषकर उनकी कविताएं, समाज के सभी वर्गों में व्यापक रूप से लोकप्रिय थीं। प्रधानमंत्री कार्यालय ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘रमाकांत रथ जी ने एक प्रभावी प्रशासक और विद्वान के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी रचनाएं, विशेषकर कविताएं, समाज के सभी वर्गों में व्यापक रूप से लोकप्रिय हैं। उनके निधन से मुझे बहुत दुख हुआ है। दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और प्रशंसकों के साथ हैं। ओम शांति : प्रधानमंत्री मोदी। '' ओडिशा के कई नेताओं और प्रतिष्ठित हस्तियों ने रथ के निधन पर शोक व्यक्त किया और उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए उनके घर पर एकत्र हुए। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने रथ के निधन पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि रमाकांत रथ को भारतीय प्रशासनिक सेवा और साहित्य जगत में उनके योगदान के लिए हमेशा याद किया जाएगा। माझी ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए भगवान जगन्नाथ से प्रार्थना की और शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।रमाकांत रथ का जन्म 13 दिसंबर 1934 को कटक में हुआ था। रेवेंशॉ कॉलेज (अब विश्वविद्यालय) से अंग्रेजी साहित्य में एमए करने के बाद वर्ष 1957 में वह भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल हुए। राज्य और केंद्र सरकारों में कई महत्वपूर्ण पद संभालने के बाद वह 1992 में ओडिशा के मुख्य सचिव के पद से सेवानिवृत्त हुए। रथ के प्रमुख काव्य संग्रहों में केते दिनारा (1962), सप्तम ऋतु (1977), सचित्र अंधारा (1982), श्री राधा (1985) और श्रेष्ठ कविता (1992) शामिल हैं। उनकी कई कविताओं का अंग्रेजी और अन्य भाषाओं में अनुवाद भी किया गया है। उन्हें वर्ष 1977 में साहित्य अकादमी पुरस्कार, वर्ष 1984 में सरला पुरस्कार, वर्ष 1990 में विषुव सम्मान और 2009 में साहित्य अकादमी फेलोशिप से सम्मानित किया गया था। साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2006 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। रथ 1993 से 1998 तक केंद्रीय साहित्य अकादमी के उपाध्यक्ष और 1998 से 2003 तक अध्यक्ष भी रहे।
- भुवनेश्वर. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तीन दिवसीय यात्रा पर 21 मार्च को ओडिशा आएंगे और इस दौरान राज्य में कई विकास परियोजनाओं की शुरुआत करेंगे। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक वरिष्ठ नेता ने रविवार को यह जानकारी दी। भाजपा की ओडिशा इकाई के अध्यक्ष मनमोहन सामल ने बताया कि शाह 21 मार्च की शाम झारसुगुड़ा हवाई अड्डे पर पहुंचेंगे और एमसीएल अतिथि गृह में रुकेंगे। उन्होंने बताया कि शाह 22 मार्च को झारसुगुड़ा के पीएचडी मैदान में एक जनसभा को संबोधित करने से पहले संबलपुर स्थित मां समलेश्वरी मंदिर में पूजा अर्चना करेंगे। भाजपा नेता के मुताबिक जनसभा को संबोधित करने के अलावा केंद्रीय मंत्री वहां कुछ परियोजनाओं की आधारशिला भी रखेंगे। सामल ने संवाददाताओं को बताया कि इसके बाद वह भुवनेश्वर होते हुए पुरी जाएंगे और रात्रि विश्राम तटीय शहर में करेंगे। उन्होंने बताया कि अब तक तय कार्यक्रम के अनुसार शाह 23 मार्च को पुरी में श्री जगन्नाथ मंदिर जाएंगे और जटनी में प्रस्तावित फॉरेंसिक विश्वविद्यालय की आधारशिला रखेंगे। इस बीच, ओडिशा के शीर्ष भाजपा नेताओं ने रविवार को संबलपुर जिले के बुर्ला में बैठक की और केंद्रीय मंत्री के दौरे की तैयारियों की समीक्षा की। पार्टी नेता के मुताबिक, शाह के दौरे के दौरान ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे।
- कोलकाता. पश्चिम बंगाल के पश्चिमी जिलों में मंगलवार तक लू चलने तथा राज्य के गांगेय क्षेत्र में अगले पांच दिनों के दौरान अधिकतम तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस की क्रमिक गिरावट होने की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने रविवार को यह जानकारी दी। विभाग ने बताया कि पश्चिम बंगाल के गंगा तटीय क्षेत्रों के शेष जिलों में मंगलवार तक दिन के दौरान गर्मी रहेगी। उसने बताया कि पश्चिम बंगाल के गंगा तटीय क्षेत्रों के सभी जिलों में 20 मार्च से हल्की से मध्यम बारिश या गरज के साथ छींटे पड़ने की संभावना है। आईएमडी के पूर्वानुमान के अनुसार, पुरुलिया, बांकुरा और पश्चिम बर्धमान के पश्चिमी जिलों में मंगलवार तक भीषण गर्मी पड़ने की संभावना है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, कोलकाता में न्यूनतम तापमान 26.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस मौसम के सामान्य तापमान से 3.9 डिग्री अधिक है जबकि अधिकतम तापमान 33.7 डिग्री सेल्सियस रहा, जो इस अवधि के दौरान औसत दैनिक तापमान के आसपास है।
-
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय क्रिकेट टीम के हाल के वर्षों में अपने चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ दबदबा बनाए रखने के संदर्भ में रविवार को कहा कि वह क्रिकेट विशेषज्ञ नहीं हैं लेकिन नतीजों से पता चलता है कि कौन सी टीम बेहतर है। मोदी ने रविवार को अमेरिका के लोकप्रिय पॉडकास्टर लेक्स फ्राइडमैन के साथ बातचीत के दौरान अपने विचार साझा किए। फुटबॉल के संदर्भ में उन्होंने महान डिएगो माराडोना को अपने जमाने का वास्तविक नायक करार दिया लेकिन साथ ही कहा कि वर्तमान पीढ़ी का पसंदीदा खिलाड़ी लियोनल मेस्सी है। भारत और पाकिस्तान की क्रिकेट टीमों के संदर्भ में मोदी ने कहा, ‘‘‘मैं कोई विशेषज्ञ नहीं हूं और मैं इस खेल के तकनीकी पक्षों के बारे में नहीं जानता। इसका जवाब केवल विशेषज्ञ ही दे सकते हैं लेकिन कुछ दिन पहले भारत और पाकिस्तान के बीच मैच खेला गया था। इसके नतीजे से पता चलता है कि कौन सी टीम बेहतर है। हम इसको इसी तरह से जानते हैं।'' भारतीय क्रिकेट टीम ने हाल में चैंपियंस ट्रॉफी जीती थी और अपने अजेय अभियान की राह में पाकिस्तान को करारी शिकस्त दी थी। मोदी ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि खेलों में पूरी दुनिया को ऊर्जावान बनाने की ताकत है। खेल की भावना विभिन्न देशों के लोगों को एक साथ जोड़ती है। इसलिए मैं कभी नहीं चाहूंगा कि खेलों को श्रेय ना दिया जाए। मैं वास्तव में मानता हूं कि खेल मानव विकास में प्रमुख भूमिका निभाते हैं, वे सिर्फ खेल नहीं हैं। वे लोगों को गहरे स्तर पर जोड़ते हैं। '' भारत में फुटबॉल की लोकप्रियता के संदर्भ में उन्होंने मध्य प्रदेश के शहडोल की अपनी यात्रा को याद किया, जहां उन्होंने निवासियों के बीच खेल के प्रति गहरा प्रेम देखा जो अपने क्षेत्र को ‘मिनी ब्राजील' कहते थे। प्रधानमंत्री ने बिचारपुर के संदर्भ में यह बात कही। मोदी ने कहा, ‘‘शहडोल नाम का एक जिला है, जो पूरी तरह से आदिवासी क्षेत्र है, जहां आदिवासी समुदाय के लोग रहते हैं। जब मैंने वहां का दौरा किया, तो मैंने लगभग 80 से 100 युवा लड़कों और यहां तक कि अधिक उम्र के लोगों को देखा, जो सभी खेल की जर्सी पहने हुए थे।'' प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘मैंने उनसे पूछा कि आप सब कहां से हैं तो उन्होंने जवाब दिया हम मिनी ब्राजील से हैं। उन्होंने बताया कि उनके गांव में चार पीढ़ियों से फुटबॉल खेला जा रहा है। यहां से लगभग 80 राष्ट्रीय स्तर के फुटबॉल खिलाड़ी निकले हैं और उनका पूरा गांव फुटबॉल के लिए समर्पित हैं।'' मोदी ने कहा, ‘‘उन्होंने मुझे बताया कि उनके वार्षिक फुटबॉल मैच के दौरान आसपास के गांवों से लगभग 20,000 से 25,000 दर्शक देखने आते हैं।" मोदी से जब उनके पसंदीदा फुटबॉल खिलाड़ी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘‘अगर हम अतीत की बात करें तो 1980 के दशक में एक नाम जो हमेशा सामने आता था वह माराडोना का था। उस पीढ़ी के लिए, उन्हें एक वास्तविक नायक के रूप में देखा जाता था। अगर आप आज की पीढ़ी से पूछेंगे, तो वे तपाक से कहेंगे (लियोनल) मेस्सी।
-
नयी दिल्ली. चीन के साथ पूर्व में तनाव के बावजूद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विवाद के बजाय बातचीत का समर्थन किया और कहा कि भारत और चीन के बीच मतभेद स्वभाविक हैं लेकिन मजबूत सहयोग दोनों पड़ोसियों के हित में है और यह वैश्विक स्थिरता के लिए भी आवश्यक है। अमेरिकी पॉडकास्टर लेक्स फ्रीडमैन के साथ एक पॉडकास्ट में, मोदी ने कहा कि भारत और चीन सीमा पर 2020 में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर झड़पों से पहले वाली स्थितियों को बहाल करने के लिए काम कर रहे हैं। वर्ष 1975 के बाद पहली बार दोनों देशों के बीच टकराव ने संघर्ष का रूप ले लिया था। इस संघर्ष में दोनों पक्षों के जवानों की मौत हुई थी। मोदी ने पिछले साल अक्टूबर में चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ अपनी बैठक का जिक्र करते हुए कहा, “हालांकि, राष्ट्रपति शी के साथ हाल में हुई बैठक के बाद हमने सीमा पर सामान्य स्थिति की वापसी देखी है। हम अब 2020 से पहले की स्थितियों को बहाल करने के लिए काम कर रहे हैं।'' उन्होंने कहा, ‘‘धीरे-धीरे लेकिन निश्चित रूप से, विश्वास, उत्साह और ऊर्जा वापस आनी चाहिए। लेकिन स्वाभाविक रूप से, इसमें कुछ समय लगेगा, क्योंकि पांच साल हो गए हैं।'' मोदी ने कहा कि भारत और चीन के बीच सहयोग न केवल दोनों देशों के लिए लाभकारी है, बल्कि वैश्विक स्थिरता और समृद्धि के लिए भी आवश्यक है। उन्होंने कहा, ‘‘चूंकि 21वीं सदी एशिया की सदी है, हम चाहते हैं कि भारत और चीन स्वस्थ और स्वाभाविक तरीके से प्रतिस्पर्धा करें। प्रतिस्पर्धा बुरी चीज नहीं है, लेकिन इसे कभी संघर्ष में नहीं बदलना चाहिए।'' मोदी ने कहा कि भारत और चीन के बीच संबंध नए नहीं हैं क्योंकि दोनों देशों की संस्कृति और सभ्यताएं प्राचीन हैं। उन्होंने कहा, ‘‘आधुनिक दुनिया में भी, वे एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि आप ऐतिहासिक रिकॉर्ड को देखें तो सदियों से भारत और चीन ने एक-दूसरे से सीखा है।'' उन्होंने कहा, ‘‘साथ मिलकर, उन्होंने हमेशा किसी न किसी तरह से वैश्विक भलाई में योगदान दिया है। पुराने रिकॉर्ड बताते हैं कि एक समय भारत और चीन अकेले दुनिया के सकल घरेलू उत्पाद का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा रखते थे। भारत का कितना बड़ा योगदान था। मेरा मानना है कि गहरे सांस्कृतिक संबंधों के साथ हमारे संबंध बेहद मजबूत रहे हैं।'' तीन घंटे से अधिक समय तक चली बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर हम सदियों पीछे मुड़कर देखें तो भारत और चीन के बीच संघर्ष का कोई वास्तविक इतिहास नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘यह हमेशा एक-दूसरे से सीखने और एक-दूसरे को समझने के बारे में रहा है। एक समय चीन में बौद्ध धर्म का गहरा प्रभाव था और उस दर्शन का उद्भव भारत में हुआ।'' उन्होंने कहा, ‘‘भविष्य में भी हमारे संबंध उतने ही मजबूत रहने चाहिए और आगे बढ़ते रहने चाहिए। मतभेद स्वाभाविक हैं। जब दो पड़ोसी देश होते हैं, तो कभी-कभी असहमति होती है।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि परिवार में भी सब कुछ सही नहीं होता “लेकिन हमारा प्रयास यह सुनिश्चित करना है कि मतभेद, विवाद में तब्दील नहीं हों”। उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए हम सक्रिय रूप से बातचीत की दिशा में काम कर रहे हैं। विवाद के बजाय, हम बातचीत पर जोर देते हैं, क्योंकि केवल बातचीत के माध्यम से हम एक स्थायी सहकारी संबंध का निर्माण कर सकते हैं जो दोनों देशों के सर्वोत्तम हितों को पूरा करता है।''
-
जम्मू. जम्मू कश्मीर में माता वैष्णो देवी मंदिर में तीर्थयात्रियों का दान वित्तीय वर्ष 2024-25 (जनवरी तक) में 171.90 करोड़ रुपये हो गया है, जो 2020-21 में 63.85 करोड़ रुपये था। यह जानकारी श्राइन बोर्ड ने दी है। श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (एसएमवीडीएसबी) ने कहा है कि इसी अवधि के दौरान मंदिर में चढ़ाया गया सोना भी नौ किलोग्राम से बढ़कर 27.7 किलोग्राम हो गया है और चांदी 753 किलोग्राम से बढ़कर 3,424 किलोग्राम हो गई है। जम्मू के आरटीआई आवेदक रमन शर्मा द्वारा दायर एक आवेदन का जवाब देते हुए श्राइन बोर्ड ने कहा कि वित्त वर्ष 2020-21 में दान या भेंट के रूप में 63.85 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, इसके बाद वित्त वर्ष 2021-22 में 166.68 करोड़ रुपये, वित्त वर्ष 2022-23 में 223.12 करोड़ रुपये, वित्त वर्ष 2023-24 में 231.50 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2024-25 (इस साल जनवरी तक) में 171.90 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। जम्मू कश्मीर के रियासी जिले में त्रिकुटा पहाड़ियों पर स्थित इस मंदिर में 2020 में केवल 17.20 लाख तीर्थयात्री आए, जो पिछले तीन दशकों में सबसे कम है। यह मंदिर अपने इतिहास में पहली बार कोरोना महामारी के प्रकोप के कारण पांच महीने तक बंद रहा था। इसे 16 अगस्त 2020 को तीर्थयात्रियों के लिए फिर से खोल दिया गया था।



.jpg)











.jpg)











