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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो दिवसीय जापान यात्रा के दौरान भारत-जापान के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों और सांस्कृतिक जुड़ाव को और प्रगाढ़ बनाने के उद्देश्य से जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा और उनकी पत्नी को भारतीय परंपरा, कला और शिल्पकला की झलक से सजे विशेष उपहार भेंट किए। यह उपहार भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाने के साथ-साथ जापान की परंपरा और जीवनशैली से भी जुड़ाव स्थापित करते हैं।
पीएममोदी ने जापान के प्रधानमंत्री को बेशकीमती पत्थरों और चांदी की चॉपस्टिक से बना बाउल सेट भेंट किया है। यह अनूठा सेट भारतीय शिल्पकला और जापानी खानपान परंपरा का संगम है। इसमें एक बड़ा भूरा मूनस्टोन बाउल, चार छोटे बाउल और चांदी की चॉपस्टिक्स शामिल हैं। इसका डिज़ाइन जापान की डोनबुरी और सोबा खाने की रस्मों से प्रेरित है।इस बाउल में प्रयुक्त मूनस्टोन आंध्र प्रदेश से प्राप्त किया गया है, जो अपनी चमकदार आभा के लिए प्रसिद्ध है। मूनस्टोन प्रेम, संतुलन और संरक्षण का प्रतीक माना जाता है। वहीं, मुख्य बाउल का आधार राजस्थान के मकराना संगमरमर पर तैयार किया गया है और पर्चिनकारी शैली में अर्ध-कीमती पत्थरों की नक्काशी की गई है। यह शैली ताजमहल सहित भारत की कई ऐतिहासिक धरोहरों में दिखाई देती है।इसके अलावा, प्रधानमंत्री मोदी ने जापानी प्रधानमंत्री की पत्नी को पश्मीना शॉल एक पेपर मेश बॉक्स में भेंट किया, जिसे कश्मीर के कारीगरों ने बारीकी से तैयार किया है। यह शॉल लद्दाख की चांगथांगी बकरी की ऊन से बनाई गई है, जो अपनी हल्की, मुलायम और गुणवत्ता के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। कश्मीरी कारीगरों द्वारा हाथ से बुनी गई इस शॉल में सदियों पुरानी परंपरा की झलक है, जिसे कभी शाही परिवार बहुत पसंद करते थे।शॉल का आधार हाथीदांत (आइवरी) रंग का है, जिस पर रस्ट, गुलाबी और लाल रंग में कोमल फूलों और पेसले पैटर्न की कढ़ाई की गई है। यह पारंपरिक कश्मीरी शिल्प और सदियों पुरानी बुनाई कला की झलक पेश करता है।इस शॉल को एक हैंड-पेंटेड बॉक्स में सजाकर रखा गया है। इस बॉक्स पर हाथ से बनाए गए पुष्प और पक्षियों के चित्र हैं, जो इसकी सुंदरता और सांस्कृतिक महत्व को और बढ़ा देते हैं।इन उपहारों के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की विविध कला और शिल्पकला को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित किया है। इसके साथ ही उन्होंने भारत-जापान के बीच सांस्कृतिक और पारंपरिक रिश्तों को और मजबूत किया। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को चीन के तियानजिन पहुंचे। चीन के उद्योग एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ली लेचेंग, तियानजिन सरकार के निदेशक यू यूनलिन और चीनी राजदूत ज़ू फेइहोंग ने पीएम मोदी का स्वागत किया। वह यहां शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी द्वारा शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले कई नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें करने की उम्मीद है।
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “चीन के तियानजिन पहुंच गया हूं। एससीओ शिखर सम्मेलन में विचार-विमर्श और विभिन्न विश्व नेताओं से मुलाकात के लिए उत्सुक हूं।एससीओ शिखर सम्मेलन 31 अगस्त से 1 सितंबर तक चीन में आयोजित किया जा रहा है। यह पिछले सात वर्षों में पीएम मोदी की पहली चीन यात्रा होगी और जून 2020 में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर दोनों देशों के सैनिकों के बीच गलवान घाटी में हुए टकराव के बाद पहली यात्रा होगी।इससे पहले, दो देशों की यात्रा पर रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने अपने प्रस्थान वक्तव्य में कहा था, “मैं राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निमंत्रण पर तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन की यात्रा करूंगा। भारत एससीओ का एक सक्रिय और रचनात्मक सदस्य है। अपनी अध्यक्षता के दौरान, हमने नवाचार, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्रों में नए विचार प्रस्तुत किए हैं और सहयोग की पहल की है।”उन्होंने कहा कि भारत “साझा चुनौतियों का समाधान करने और क्षेत्रीय सहयोग को गहरा करने के लिए एससीओ सदस्यों के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।”प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मैं शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति शी जिनपिंग, राष्ट्रपति पुतिन और अन्य नेताओं से मिलने के लिए भी उत्सुक हूं।वहीं, दोनों नेताओं ने 2024 में रूस के कज़ान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मौके पर एक बैठक की थी। द्विपक्षीय वार्ता में सफलता तब संभव हुई जब भारत और चीन ने चार साल से चल रहे सीमा टकराव को समाप्त करने के लिए लगभग 3,500 किलोमीटर लंबी एलएसी पर गश्त करने पर एक समझौता किया।SCO एक स्थायी अंतर-सरकारी अंतर्राष्ट्रीय संगठन है, जिसकी स्थापना 15 जून, 2001 को शंघाई में हुई थी। भारत 2017 से एससीओ का सदस्य है। एससीओ के सदस्य देश हैं- चीन, रूस, भारत, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, पाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, ईरान और बेलारूस।इसके अलावा, एससीओ में दो पर्यवेक्षक देश-अफगानिस्तान और मंगोलिया और 14 संवाद साझेदार हैं, जिनमें तुर्की, कुवैत, अजरबैजान, आर्मेनिया, कंबोडिया और नेपाल, श्रीलंका, सऊदी अरब, मिस्र, कतर, बहरीन, मालदीव, म्यांमार और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। -
नई दिल्ली। गुजरात में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग ने अगले सात दिनों तक राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश की चेतावनी जारी की है। वहीं, कुछ जिलों में भारी वर्षा की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार, शनिवार को आनंद, खेड़ा, पंचमहल और दाहोद जिलों में अत्यधिक भारी वर्षा हो सकती है। इन जिलों में प्रशासन को सतर्क रहने और राहत-बचाव टीमों को तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले पांच दिनों तक गुजरात के कई इलाकों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। खासकर दक्षिण गुजरात के तटीय क्षेत्रों में तूफानी लहरें उठने की आशंका है। ऐसे में मछुआरों को फिलहाल समुद्र में न जाने की सख्त सलाह दी गई है।मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस समय मानसून की द्रोणिका और दो चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय हैं, जिसके कारण राज्य के कई हिस्सों में बारिश का दौर तेज हो सकता है। अहमदाबाद में भी आज गरज-चमक के साथ मध्यम से भारी बारिश होने की संभावना है। प्रशासन ने निचले इलाकों में रह रहे लोगों को सतर्क रहने और आपात स्थिति में तुरंत हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करने की अपील की है। वहीं, आपदा प्रबंधन दल को हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत राहत और बचाव कार्य किया जा सके।मौसम वैज्ञानिक रामाश्रय यादव ने बताया कि 30 अगस्त को गुजरात क्षेत्र के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जिसमें आनंद, खेडा, पंचमहल और दाहोद जिलों में बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। इसके अलावा, गुजरात के अन्य कई जिलों जैसे वडोदरा, भरूच, नर्मदा, सूरत, तापी, नवसारी, वलसाड और डांग में भी भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना के साथ ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।उन्होंने कहा कि सौराष्ट्र क्षेत्र में राजकोट, जामनगर, अमरेली, भावनगर, मोरबी, गिर सोमनाथ, बोटाद और कच्छ जैसे जिले भी ऑरेंज अलर्ट के दायरे में हैं, जहां बहुत भारी बारिश के साथ-साथ गरज-चमक के साथ तूफान की चेतावनी है। अगले पांच दिनों तक गुजरात के सभी जिलों में व्यापक रूप से तूफानी गतिविधियों की उम्मीद है, जिसमें हवा की गति 30-40 किमी/घंटा रहने की संभावना है, जो गुजरात तट पर कभी-कभी 60 किमी/घंटा तक पहुंच सकती है।मौसम वैज्ञानिक ने निवासियों को सलाह दी है कि वे जलभराव और व्यवधान की संभावना के कारण सतर्क रहें और सुरक्षा दिशानिर्देशों का पालन करें। -
नयी दिल्ली. कोहिमा, विशाखापत्तनम, भुवनेश्वर, आइजोल, गंगटोक, ईटानगर और मुंबई भारत में महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित शहर बनकर उभरे हैं, जबकि पटना, जयपुर, फरीदाबाद, दिल्ली, कोलकाता, श्रीनगर और रांची इस मामले में सबसे निचले पायदान पर हैं। बृहस्पतिवार को जारी राष्ट्रीय वार्षिक महिला सुरक्षा रिपोर्ट एवं सूचकांक (एनएआरआई) 2025 तो कुछ यही बयां करता है। यह राष्ट्रव्यापी सूचकांक 31 शहरों की 12,770 महिलाओं पर की गई रायशुमारी पर आधारित है। इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा स्कोर 65 फीसदी रखा गया है और शहरों को उक्त मानक से ‘काफी ऊपर', ‘ऊपर', ‘समान', ‘नीचे' या ‘काफी नीचे' श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। सूचकांक में शीर्ष स्थान हासिल करने वाले कोहिमा और विशाखापत्तनम जैसे शहरों के अच्छे प्रदर्शन के पीछे मजबूत लैंगिक समानता, नागरिक भागीदारी, पुलिस व्यवस्था और महिला-अनुकूल बुनियादी ढांचे का हाथ बताया गया है। वहीं, इसमें सबसे निचले पायदान पर काबिज पटना और जयपुर जैसे शहरों के खराब प्रदर्शन के लिए कमजोर संस्थागत प्रतिक्रिया, पितृसत्तात्मक मानदंडों और शहरी बुनियादी ढांचे में कमी जैसे कारकों को जिम्मेदार ठहराया गया है। ‘एनएआरआई-2025' में कहा गया है, “कोहिमा, विशाखापत्तनम, भुवनेश्वर, आइजोल, गंगटोक, ईटानगर और मुंबई राष्ट्रीय सुरक्षा रैंकिंग में सबसे आगे हैं, जिसके लिए मुख्यत: उच्च लैंगिक समानता, बेहतर बुनियादी ढांचा, पुलिस व्यवस्था और नागरिक भागीदारी जिम्मेदार है। वहीं, रांची, श्रीनगर, कोलकाता, दिल्ली, फरीदाबाद, पटना और जयपुर सबसे निचले स्थान पर हैं, जिसके पीछे खराब बुनियादी ढांचा, पितृसत्तात्मक मानदंड और कमजोर संस्थागत जवाबदेही जैसे कारकों का हाथ है।” रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल मिलाकर सर्वेक्षण में शामिल 10 में से छह महिलाओं ने अपने शहर में “सुरक्षित” महसूस करने की बात कही, लेकिन 40 प्रतिशत ने अब भी खुद को “उतना सुरक्षित नहीं” या “असुरक्षित” माना। सर्वेक्षण से पता चला है कि रात में सुरक्षित महसूस करने की धारणा में भारी गिरावट आई है, खासकर सार्वजनिक परिवहन में और मनोरंजन स्थलों पर। इसमें पाया गया है कि शैक्षणिक संस्थानों में 86 फीसदी महिलाएं दिन में सुरक्षित महसूस करती हैं, लेकिन रात में या परिसर के बाहर वे अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता में घिरी रहती हैं। सर्वेक्षण के अनुसार, लगभग 91 फीसदी महिलाएं कार्यस्थल पर सुरक्षित महसूस करती हैं, लेकिन उनमें से लगभग आधी महिलाओं को यह स्पष्ट नहीं है कि उनके कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम (पीओएसएच) नीति लागू है या नहीं। इसमें कहा गया है कि जिन महिलाओं ने कार्यस्थल पर पीओएसएच नीति होने की बात कही, उनमें से अधिकतर ने इन्हें प्रभावी माना। सर्वेक्षण में शामिल केवल एक-चौथाई महिलाओं ने कहा कि उन्हें अधिकारियों के सुरक्षा संबंधी शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई करने का भरोसा है। उनहत्तर फीसदी महिलाओं ने कहा कि मौजूदा सुरक्षा प्रयास कुछ हद तक पर्याप्त हैं, जबकि 30 प्रतिशत से ज्यादा ने महत्वपूर्ण कमियों का जिक्र किया। केवल 65 फीसदी ने 2023-2024 के दौरान इसमें वास्तविक सुधार आने की बात कही। सात प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि 2024 में उन्हें सार्वजनिक स्थानों पर उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। 24 साल से कम उम्र की महिलाओं के मामले में यह आंकड़ा 14 प्रतिशत पाया गया। सर्वेक्षण में आस-पड़ोस (38 प्रतिशत) और सार्वजनिक परिवहन (29 प्रतिशत) को उन जगहों के रूप में चिह्नित किया गया, जहां महिलाओं को अधिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। इसमें पाया गया कि सिर्फ हर तीन में से एक पीड़ित ही उत्पीड़न की घटनाओं की शिकायत करने के लिए आगे आती है। ‘एनएआरआई-2025' के अनुसार, “सर्वेक्षण में शामिल हर तीन में से दो महिलाएं उत्पीड़न की शिकायत नहीं करती हैं, जिसका मतलब यह है कि एनसीआरबी (राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो) के पास अधिकांश घटनाएं दर्ज ही नहीं होतीं।” इसमें अपराध के आंकड़ों को एनएआरआई जैसे धारणा-आधारित सर्वेक्षणों के साथ एकीकृत करने का आह्वान किया गया है। राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने ‘एनएआरआई-2025' जारी करते हुए कहा कि सुरक्षा को केवल कानून-व्यवस्था के मुद्दे के रूप में नहीं देखा जा सकता, बल्कि यह महिलाओं के जीवन के हर पहलू को प्रभावित करती है, चाहे वह उनकी शिक्षा हो या स्वास्थ्य, कार्य के अवसर अथवा आवागमन की स्वतंत्रता हो। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं असुरक्षित महसूस करती हैं, तो “वे खुद को सीमित कर लेती हैं, और महिलाओं का खुद को सीमित कर लेना न केवल उनके अपने विकास, बल्कि देश के विकास के लिए भी ठीक नहीं है।
- नयी दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुकुल शिक्षा को मुख्यधारा की शिक्षा के साथ जोड़ने का आह्वान करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि गुरुकुल शिक्षा का मतलब आश्रम में रहना नहीं बल्कि देश की परंपराओं के बारे में सीखना है। आरएसएस के सौ साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह के दौरान एक सवाल पर भागवत ने कहा कि वह संस्कृत को अनिवार्य बनाने के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन देश की परंपरा और इतिहास को समझना महत्वपूर्ण है। भागवत ने यह भी कहा कि वह प्रौद्योगिकी और आधुनिक शिक्षा के खिलाफ नहीं हैं और यह लोगों के हाथ में है कि वे इन दोनों का उपयोग किस प्रकार करते हैं। उन्होंने कहा, "वैदिक काल के प्रासंगिक 64 पहलुओं को पढ़ाया जाना चाहिए। गुरुकुल शिक्षा को मुख्यधारा में शामिल किया जाना चाहिए, न कि उसे प्रतिस्थापित किया जाना चाहिए।" आरएसएस सरसंघचालक ने कहा कि मुख्यधारा को गुरुकुल शिक्षा से जोड़ा जाना चाहिए, जिसका मॉडल फिनलैंड के शिक्षा मॉडल के समान है।उन्होंने कहा, ‘‘शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी देश फिनलैंड में शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए एक अलग विश्वविद्यालय है। स्थानीय आबादी कम होने के कारण कई लोग विदेश से आते हैं, इसलिए वे सभी देशों के छात्रों को स्वीकार करते हैं।'' उन्होंने कहा, "आठवीं कक्षा तक की शिक्षा छात्रों की मातृभाषा में दी जाती है... इसलिए गुरुकुल शिक्षा का मतलब आश्रम में जाकर रहना नहीं है, इसे मुख्यधारा से जोड़ना होगा।" नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) को सही दिशा में उठाया गया सही कदम बताते हुए भागवत ने कहा कि हमारे देश में शिक्षा प्रणाली बहुत पहले ही नष्ट हो गई थी। उन्होंने कहा, "नयी शिक्षा प्रणाली इसलिए शुरू की गई क्योंकि हम हमेशा विदेशी आक्रमणकारियों के गुलाम रहे, जो उस समय के शासक थे। वे इस देश पर शासन करना चाहते थे, इसका विकास नहीं करना चाहते थे। इसलिए उन्होंने सभी प्रणालियां इस बात को ध्यान में रखते हुए बनाईं कि हम इस देश पर कैसे शासन कर सकते हैं...लेकिन अब हम आजाद हैं। इसलिए हमें केवल देश नहीं चलाना है, हमें लोगों को चलाना है।"आरएसएस प्रमुख ने कहा कि बच्चों को अतीत के बारे में सभी आवश्यक जानकारी दी जानी चाहिए, ताकि उनमें गर्व पैदा हो सके कि ‘‘हम भी कुछ हैं, हम भी कुछ कर सकते हैं।'' उन्होंने कहा, "हमने यह कर दिखाया है। यह सब बदलना ही था। पिछले कुछ सालों में थोड़ा बहुत बदलाव आया है और इसके बारे में जागरूकता बढ़ी है।" भागवत से पूछा गया कि क्या संस्कृत को अनिवार्य किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "अगर आप अपनी परंपरा को समझना चाहते हैं और भारत को जानना चाहते हैं, तो संस्कृत भाषा का ज्ञान बहुत ज़रूरी है।" उन्होंने कहा, "यह जरूरी है। तभी हम मूल स्रोतों से सही मायने में समझ पाएंगे। हमें अनुवादों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, क्योंकि कई अनुवादों में त्रुटियां होती हैं। मूल स्रोतों तक पहुंचने के लिए संस्कृत सीखना ज़रूरी है।" आरएसएस सरसंघचालक ने कहा कि इसलिए, इन सभी बातों को नयी शिक्षा नीति में शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ चीज़ें हुई हैं, कुछ होने वाली हैं, लेकिन शिक्षा में इस व्यवस्था को बदलना, प्रशासन में इस व्यवस्था को बदलना ज़रूरी है। भागवत ने कहा कि तकनीक और आधुनिक शिक्षा में कुछ भी ग़लत नहीं है, और यह लोगों के हाथ में है कि वे इसका इस्तेमाल कैसे करते हैं। उन्होंने कहा, "लोगों को तकनीक का मालिक होना चाहिए; तकनीक हमारा मालिक नहीं बन सकती। इसलिए शिक्षा जरूरी है। अगर तकनीक अशिक्षितों के हाथों में पड़ गई, तो इसका उल्टा असर हो सकता है। शिक्षा का मतलब सिर्फ़ जानकारी रटना नहीं है। मनुष्य को मनुष्य बनना चाहिए।" उन्होंने कहा, "हमें अंग्रेज बनने की जरूरत नहीं है, लेकिन अंग्रेजी सीखने में कोई बुराई नहीं है। एक भाषा के रूप में, इसका कोई बुरा प्रभाव नहीं है।"
- नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जापान और चीन के दौरे पर रवाना होने से पहले बृहस्पतिवार को विश्वास जताया कि यह यात्रा राष्ट्रीय हितों एवं प्राथमिकताओं को आगे ले जाएंगी और क्षेत्रीय एवं वैश्विक शांति को बहाल करने में फलदायी सहयोग के निर्माण में योगदान देगी। मोदी अपनी यात्रा के पहले चरण में 29 और 30 अगस्त को जापान का दौरा करेंगे।इसके बाद मोदी जापान से शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए दो दिवसीय चीन यात्रा पर जाएंगे। मोदी ने प्रस्थान करने से पहले एक बयान में कहा कि वह तियानजिन में शिखर सम्मेलन के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग से मिलने के लिए उत्सुक हैं। मोदी जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के साथ वहां शिखर वार्ता करेंगे।प्रधानमंत्री ने जापान यात्रा पर कहा, “हम अपनी विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी के अगले चरण को आकार देने पर ध्यान केंद्रित करेंगे। दोनों देशों के बीच साझेदारी ने पिछले 11 वर्षों में लगातार और महत्वपूर्ण प्रगति की है।” उन्होंने कहा, “हम अपने सहयोग को नई उड़ान देने, आर्थिक व निवेश संबंधों के दायरे एवं महत्वाकांक्षाओं का विस्तार करने, कृत्रिम मेधा (एआई) व सेमीकंडक्टर सहित नई और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग को आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे।” प्रधानमंत्री ने कहा कि यह यात्रा भारत-जापान सभ्यतागत और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने का भी एक अवसर होगी। मोदी अपनी यात्रा के दूसरे चरण में 31 अगस्त और एक सितंबर को चीन के तियानजिन शहर का दौरा करेंगे।मोदी ने बयान में कहा कि भारत साझा चुनौतियों का समाधान करने और क्षेत्रीय सहयोग को गहरा करने के लिए एससीओ सदस्यों के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “मैं राष्ट्रपति शी चिनफिंग के निमंत्रण पर जापान से तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन जाऊंगा।” मोदी ने कहा, “भारत एससीओ का एक सक्रिय और रचनात्मक सदस्य है। एससीओ की अध्यक्षता के दौरान हमने नए विचार प्रस्तुत किए और नवाचार, स्वास्थ्य एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्रों में सहयोग की पहल की।” उन्होंने कहा, “मैं शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति शी चिनफिंग, राष्ट्रपति पुतिन और अन्य नेताओं से मिलने के लिए भी उत्सुक हूं।” प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि उनकी यात्रा भारत के राष्ट्रीय हितों को आगे ले जाएगी।उन्होंने कहा, “मुझे विश्वास है कि जापान और चीन की मेरी यात्राएं हमारे राष्ट्रीय हितों व प्राथमिकताओं को आगे ले जाएंगी और क्षेत्रीय एवं वैश्विक शांति, सुरक्षा तथा सतत विकास को आगे बढ़ाने में उपयोगी सहयोग के निर्माण में योगदान देंगी।”
- चंद्रपुर. महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले की राजुरा तहसील में बृहस्पतिवार को एक ट्रक और ऑटोरिक्शा की टक्कर हो जाने से तीन महिलाओं सहित छह लोगों की मौत हो गई। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि राजुरा-गडचंदूर रोड पर कपाणगांव के पास शाम करीब चार बजे हुए इस हादसे में दो लोग घायल भी हुए। दुर्घटना के समय ऑटोरिक्शा में सात यात्री सवार थे।राजुरा थाने के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ऑटोरिक्शा को विपरीत दिशा से आ रहे ट्रक ने टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि पूरा ऑटोरिक्शा चकनाचूर हो गया। उन्होंने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और सभी पीड़ितों को अस्पताल पहुंचाया गया, जिसमें से तीन लोगों की पहले ही मौत हो चुकी थी। उन्होंने बताया कि घायलों में से तीन को चंद्रपुर जिला अस्पताल रेफर किया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें भी मृत घोषित कर दिया। अधिकारी ने बताया कि मृतकों की पहचान वर्षा मांडले (41), तनु पिंपलकर (18), ताराबाई पापुलवार (60), रवींद्र बोबडे (48), शंकर पिपेरे (50) और ऑटोरिक्शा चालक प्रकाश मेश्राम (50) के रूप में हुई है। उन्होंने बताया कि ट्रक को जब्त कर लिया गया है, लेकिन उसका चालक फरार है और चालक के खिलाफ मामला दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है।
- नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि यह बेहद खुशी की बात है कि बिहार पुरुष हॉकी एशिया कप 2025 की मेजबानी कर रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह टूर्नामेंट रोमांचक मैचों, असाधारण प्रतिभा के प्रदर्शन और यादगार क्षणों से भरपूर होगा जो भावी पीढ़ियों को प्रेरित करेगा। मोदी ने कहा कि शुक्रवार को राष्ट्रीय खेल दिवस और मेजर ध्यानचंद की जयंती भी है और इसी दिन बिहार के ऐतिहासिक शहर राजगीर में पुरुष हॉकी एशिया कप 2025 शुरू हो रहा है। उन्होंने एक्स पर कहा, ‘‘मैं एशिया कप में भाग लेने वाली सभी टीमों, खिलाड़ियों, अधिकारियों और समर्थकों को अपनी शुभकामनाएं देता हूं।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि हॉकी के लिए हमेशा भारत और एशिया के लाखों लोगों के दिलों में एक खास जगह रही है। मोदी ने कहा, ‘‘मुझे विश्वास है कि यह टूर्नामेंट रोमांचक मैचों, असाधारण प्रतिभा के प्रदर्शन और यादगार क्षणों से भरपूर होगा, जो खेल प्रेमियों की भावी पीढ़ियों को प्रेरित करेगा।'' उन्होंने कहा कि यह बहुत खुशी की बात है कि बिहार पुरुष हॉकी एशिया कप 2025 की मेजबानी कर रहा है।मोदी ने कहा कि हाल के दिनों में बिहार ने एक प्रमुख खेल केंद्र के रूप में अपनी पहचान बनाई है। उसने खेलो इंडिया यूथ गेम्स 2025, एशिया रग्बी अंडर20 सेवंस चैम्पियनशिप 2025, आईएसटीएएफ सेपकटकरा विश्व कप 2024 और महिला एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी 2024 जैसे प्रमुख टूर्नामेंटों की मेजबानी की है। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘यह बिहार के बढ़ते बुनियादी ढांचे, जमीनी स्तर पर उत्साह और विविध खेल विधाओं में प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।'' भारत एशिया कप के अपने पहले मैच में शुक्रवार को चीन का सामना करेगा।
- नयी दिल्ली. भारत और भूटान ने कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। बृहस्पतिवार को जारी एक सरकारी बयान के अनुसार, कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी और भूटान सरकार के कृषि एवं पशुधन मंत्रालय (एमओएएल) के सचिव थिनले नामग्याल ने कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने के लिए थिम्पू में एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर खाद्य सुरक्षा, सतत कृषि और ग्रामीण समृद्धि के प्रति दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।बयान में कहा गया है, ‘‘यह समझौता ज्ञापन में उल्लेखित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के लिए एक रूपरेखा के रूप में काम करेगा, जिसमें कृषि अनुसंधान और नवाचार, पशुधन स्वास्थ्य और उत्पादन, कटाई-पश्चात प्रबंधन, मूल्य श्रृंखला विकास और ज्ञान, कौशल एवं विशेषज्ञता का आदान-प्रदान शामिल है।'' इस समझौता ज्ञापन को लागू करने के लिए, संयुक्त तकनीकी कार्य समूह (जेटीडब्ल्यूजी) का पहला सत्र आयोजित किया गया। दोनों देशों ने संयुक्त कार्य समूह (जेटीडब्ल्यूजी) के लिए विचारणीय विषयों और तत्काल कार्रवाई हेतु सहयोग के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर सहमति व्यक्त की। चतुर्वेदी ने प्राथमिकताओं और चुनौतियों के बारे में बात की, साथ ही कृषि क्षेत्र के विकास के लिए भारत सरकार द्वारा शुरू की गई पहल का उल्लेख किया। संयुक्त कार्य समूह (जेटीडब्ल्यूजी) सत्र के दौरान, भारत और भूटान ने कृषि, पशुधन, कृषि विपणन एवं सहकारिता, खाद्य प्रसंस्करण, बीज क्षेत्र, अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी सहयोग, और क्षमता निर्माण सहित सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों पर विस्तृत चर्चा की। दोनों पक्षों ने अगली संयुक्त कार्य समूह बैठक भारत में पारस्परिक रूप से सुविधाजनक तिथि पर आयोजित करने पर सहमति व्यक्त की।
- नयी दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने बृहस्पतिवार को कहा कि संघ आरक्षण का समर्थन करता रहा है और तब तक करता रहेगा जब तक इसके लाभार्थियों को यह महसूस नहीं हो जाता कि इसकी अब आवश्यकता नहीं है और वे अपने पैरों पर खड़े हो सकते हैं। अपनी तीन दिवसीय व्याख्यान शृंखला के अंतिम दिन इस मुद्दे पर पूछे गए सवालों के जवाब में भागवत ने समाज में जाति आधारित भेदभाव को समाप्त करने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि आरएसएस इसके लिए काम कर रहा है। आरएसएस प्रमुख ने कहा, "संघ पहले से ही संविधान द्वारा प्रदत्त आरक्षण का समर्थन करता है।यह हमेशा रहेगा। और जब तक आरक्षण के लाभार्थियों को यह महसूस नहीं होता कि अब इसकी आवश्यकता नहीं है, भेदभाव समाप्त हो गया है और वे अपने पैरों पर खड़े हो सकते हैं, तब तक हम इसका समर्थन करेंगे।" उन्होंने कहा कि जब बालासाहेब देवरस आरएसएस प्रमुख थे, तब संघ ने आरक्षण के पक्ष में एक प्रस्ताव पारित किया था। भागवत ने कहा, "जब प्रस्ताव लाया गया था, तो इस पर बिल्कुल अलग-अलग विरोधी विचार थे। हमारे तत्कालीन सरसंघचालक (आरएसएस प्रमुख) बालासाहेब जी ने पूरे सत्र के दौरान विचारों को सुना और कहा, 'कल्पना कीजिए कि आप उन लोगों के परिवार में पैदा हुए हैं जिन्होंने एक हज़ार साल तक जातिगत भेदभाव का दंश झेला है और फिर अगले सत्र में बोलें।'" उन्होंने कहा कि अगले सत्र में आरक्षण के समर्थन में प्रस्ताव "सर्वसम्मति से" पारित कर दिया गया।भागवत ने कहा कि संघ यह सुनिश्चित करने के लिए प्रयास करता रहता है कि समाज के ऐसे कमज़ोर वर्गों को आरक्षण का लाभ मिले। उन्होंने कहा, "लेकिन जब हम ऐसा करते हैं, तो लोग कहते हैं कि आरएसएस भाजपा का वोट बैंक बढ़ाने के लिए ऐसा कर रहा है। ऐसा नहीं होना चाहिए।" भागवत ने कहा कि आरएसएस के स्वयंसेवक वंचित वर्ग के लोगों पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ मजबूती से खड़े हैं। संघ ऐसे अत्याचारों के खिलाफ मजबूती से क्यों नहीं खड़ा दिखता, इस सवाल पर उन्होंने कहा, ‘‘जहां भी ऐसी घटनाएं होती हैं, स्वयंसेवकों को वहां जाना चाहिए। उन्हें सत्य और न्याय के लिए खड़ा होना चाहिए और पीड़ितों को न्याय सुनिश्चित करना चाहिए। यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसी घटनाओं से समाज में झगड़े न हों। स्वयंसेवकों से यही सब अपेक्षित है।" उन्होंने कहा, "अगर किसी कारणवश ऐसा नहीं होता है, तो यह हमारी गलती है। संघ के स्थानीय स्वयंसेवकों के ध्यान में यह बात लाएं। इसका ध्यान रखा जाएगा।"मनुस्मृति में वर्ण व्यवस्था के संदर्भ में पूछे गए एक सवाल के जवाब में भागवत ने कहा कि 1972 में कर्नाटक के उडुपी शहर में एकत्रित "सभी धार्मिक नेताओं" ने कहा था कि हिंदू धर्मग्रंथों में छुआछूत के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा, "यदि ऐसा कोई संदर्भ है, तो हम उसे स्वीकार नहीं करते। यहां (भारत में) लोग जो चाहते हैं, वही होता है। हम पुस्तकों और धर्मग्रंथों में लिखी बातों का पालन नहीं करते। यही कारण है कि हमारे पास एक भी धर्मग्रंथ नहीं है। और लोगों ने अपनी सुविधानुसार (धर्मग्रंथों के) पाठ की अलग-अलग व्याख्या की है।" आरएसएस प्रमुख ने कहा कि देश के धार्मिक नेताओं को एक नयी स्मृति बनाने के बारे में सोचना चाहिए जिसमें भारतीय समाज के सभी वर्गों, संप्रदायों, जातियों और उपजातियों को शामिल किया जाए और उनके लिए "व्यावहारिक आचरण" की शिक्षा दी जाए। भागवत ने कहा कि आरएसएस देश में सामाजिक समरसता लाने के लिए प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा, "हर कोई समाज का हिस्सा है। कोई ऊंच-नीच नहीं है। सबका समान सम्मान है। सब अपने हैं। यह भावना जागृत करनी होगी। यह करना ही होगा। संघ यह कर रहा है।"
- बहराइच. बहराइच की एक अदालत ने बृहस्पतिवार को दहेज की मांग को लेकर अपनी पत्नी का गला घोंटने के जुर्म में एक व्यक्ति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस अधीक्षक रामनयन सिंह ने बताया कि 27 जनवरी 2024 को तुलसीराम निषाद नामक व्यक्ति ने पुलिस के समक्ष रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनके दामाद लवलेश ने फोन पर सूचना दी कि उनकी पुत्री अंजली ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली है। तुलसीराम ने आरोप लगाया था कि दामाद लवलेश उनकी पुत्री को दहेज के लिए प्रताड़ित करता था।एसपी ने बताया कि मृतका अंजलि की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला घोंटकर हत्या की बात सामने आई थी। मृतका के पिता की तहरीर पर 27 जनवरी 2024 को थाना रामगांव में आरोपी लवलेश के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विवेचना के उपरान्त अदालत में आरोप पत्र दाखिल हुआ। एसपी ने बताया कि बृहस्पतिवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश आनन्द शुक्ला ने अभियुक्त लवलेश निषाद को दोषी करार देते हुए उसे सश्रम आजीवन कारावास तथा 12 हजार रुपए अर्थदण्ड की सजा सुनाई है। आदेश के अनुसार अर्थदण्ड ना अदा करने की स्थिति में अभियुक्त को चार माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
- 0- हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में मोबाइल सेवाओं को मज़बूत करने के लिए तत्काल उपाय करने के निर्देश दिएनई दिल्ली। केंद्रीय संचार और उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गुरुवार को हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मोबाइल संपर्क सेवा बहाल करने के संबंध में एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में सचिव (दूरसंचार) डॉ. नीरज मित्तल, संचार मंत्रालय, भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) और अन्य दूरसंचार संचालकों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।केंद्रीय मंत्री महोदय श्री सिंधिया ने सभी प्रभावित क्षेत्रों, विशेष रूप से जम्मू के डोडा और उधमपुर जिलों में, जहाँ बाढ़ का सबसे अधिक प्रभाव पड़ा हैसेवाएँ बहाल करने के लिए तत्काल युद्धस्तर पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। अंतर-जिला और घाटी संपर्क में क्रमिक प्रतिबंधों पर भी कड़ी नज़र रखी जा रही है ताकि सेवाएँ शीघ्र अति शीघ्र सामान्य हो सकें।केंद्रीय मंत्री महोदय को बताया गया कि अधिकांश फाइबर कट पहले ही बहाल कर दिए गए हैं, और ज़मीनी स्तर पर टीमें क्षतिग्रस्त फाइबर को जल्दी से ठीक कर रही हैं, लूप बना रही हैं और सेवाओं को फिर से चालू कर रही हैं। दूरसंचार विभाग द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में इंट्रा-सर्किल रोमिंग (आईसीआर) लागू की गई, जिससे उपभोक्ता उन जगहों पर अन्य नेटवर्क से जुड़ सकते हैं जहाँ उनका प्राथमिक नेटवर्क बाधित था। श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस बात पर बल दिया कि नागरिकों को अपने परिवारों और आवश्यक सेवाओं से जुड़े रहने में सक्षम बनाने के लिए हर संभव कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दूरसंचार टीमों की त्वरित कार्रवाई और राज्य अधिकारियों के समन्वित सहयोग से, सेवाओं की पूर्ण बहाली शीघ्र ही हो जाएगी।
- नई दिल्ली। सैन्य चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में, आर्मी हॉस्पिटल रिसर्च एंड रेफरल (एएचआरआर) 28 अगस्त, को अत्याधुनिक एएलएलवाई अडैप्टिव मोतियाबिंद उपचार प्रणाली का उपयोग करके रोबोटिक कस्टम लेज़र मोतियाबिंद सर्जरी करने वाला भारत का पहला और दक्षिण एशिया का दूसरा सरकारी संस्थान बन गया। यह उपलब्धि नेत्र रोग विभाग की पहली फेम्टो-सेकंड लेज़र असिस्टेड मोतियाबिंद सर्जरी (एफएलएसीएस) के साथ रोबोटिक, ब्लेडलेस और कंप्यूटर-निर्देशित नेत्र शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में सफल प्रवेश का प्रतीक है।यह सर्जरी ब्रिगेडियर एस.के. मिश्रा ने एक 61 वर्षीय रोगी पर की। यद्यपी पारंपरिक सर्जरी अब भी प्रभावी है, एफएलएसीएस एक प्रमुख प्रौद्योगिकिय प्रगति का प्रतिनिधित्व करता है, क्योंकि फेमटोसेकंड लेज़र सर्जरी के महत्वपूर्ण चरणों, जैसे कॉर्निया चीरा, कैप्सूलोटॉमी और मोतियाबिंद विखंडन को माइक्रोन-स्तर की सटीकता के साथ स्वचालित करता है।एएचआरआर में इस अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी का समेकन सशस्त्र बलों की अपने कर्मियों और उनके परिवारों को सबसे उन्नत, सुरक्षित और प्रभावी स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। एफएलएसीएस सटीकता और सर्वोत्तम परिणाम सुनिश्चित करता है, जो सैन्य चिकित्सा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह, थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेन्द्र द्विवेदी और सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा महानिदेशक सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन के मार्गदर्शन में, एएचआरआर में नेत्र विज्ञान विभाग आंखों की देखभाल में नैदानिक उत्कृष्टता और नवोन्मेषण की अपनी विरासत को निरंतर सुदृढ़ कर रहा है।
- नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने भारतीय वस्त्र क्षेत्र के लिए कपास की उपलब्धता बढ़ाने के लिए 19 अगस्त 2025 से 30 सितंबर, 2025 तक कपास पर आयात शुल्क में अस्थायी छूट दी थी। निर्यातकों को और अधिक समर्थन देने के लिए केंद्र सरकार ने कपास (एचएस 5201) पर आयात शुल्क छूट की सीमा को 30 सितंबर 2025 से 31 दिसंबर 2025 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। इस संदर्भ में अधिसूचना जारी की जाएगी।
- कुलशेखरपट्टिनम (तमिलनाडु). भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख वी. नारायणन ने कहा है कि तूतीकोरिन जिले में देश के दूसरे प्रक्षेपण परिसर का निर्माण दिसंबर 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है और इस अंतरिक्ष केंद्र से प्रति वर्ष लगभग 25 प्रक्षेपण होने की संभावना है। बुधवार को यहां प्रक्षेपण स्थल के लिए भूमि पूजन में भाग लेने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि यहां से 500 किलोग्राम का पेलोड 400 किलोमीटर की ऊंचाई तक ले जाने में सक्षम लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान (एसएसएलवी) का उपयोग करके उपग्रहों का प्रक्षेपण किया जाएगा।यह परिसर 2300 एकड़ भूमि पर बनाया जा रहा है और आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में स्थित परिसर के बाद यह इस तरह का दूसरा परिसर होगा। उन्होंने कहा, ‘‘दिसंबर 2026 तक काम पूरा हो जाएगा - यही हमारा लक्ष्य है। हम अगले साल के अंत तक रॉकेट प्रक्षेपण की योजना बना रहे हैं। प्रधानमंत्री उचित समय पर सही प्रक्षेपण तिथि की घोषणा करेंगे।'' उन्होंने आगे कहा, ‘‘सालाना 20-25 उपग्रह प्रक्षेपण होंगे।''प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने फरवरी 2024 में वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से तटीय गांव कुलशेखरपट्टिनम में लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान परिसर (एसएलसी) की आधारशिला रखी थी। पीएसएलवी और जीएसएलवी की तुलना में एसएसएलवी भिन्न होते हैं। पीएसएलवी और जीएसएलवी भारी वजन ले जा सकते हैं और आमतौर पर गहन अंतरिक्ष अन्वेषण कार्यक्रमों में उपयोग किए जाते हैं। पीएसएलवी और जीएसएलवी भारत के पहले अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित किए जाते हैं।
- नयी दिल्ली. भारत और कनाडा ने बृहस्पतिवार को एक-दूसरे की राजधानियों में अपने-अपने राजनयिकों की नियुक्ति की घोषणा की। भारत ने जहां वरिष्ठ राजनयिक दिनेश के पटनायक को बृहस्पतिवार को ओटावा में अपना अगला उच्चायुक्त नियुक्त किया। वहीं, कनाडा ने क्रिस्टोफर कूटर को नयी दिल्ली में अपना नया उच्चायुक्त बनाने की घोषणा की। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब भारत और कनाडा 2023 में एक सिख अलगाववादी नेता की हत्या के बाद द्विपक्षीय संबंधों में आई तल्खी को दूर करने की कोशिशों में जुटे हैं।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके कनाडाई समकक्ष मार्क कार्नी ने 17 जून को कनाडा के कनानसकीस में जी-7 शिखर सम्मेलन के इतर हुई मुलाकात में द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने पर ध्यान केंद्रित किया था। पटनायक भारतीय विदेश सेवा के 1990 बैच के अधिकारी हैं। वह वर्तमान में स्पेन में भारत के राजदूत के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में बताया कि पटनायक को कनाडा में भारत का अगला उच्चायुक्त नियुक्त किया गया है। बयान में कहा गया है, “उनके (पटनायक के) जल्द अपना नया कार्यभाल संभालने की उम्मीद है।”वहीं, ओटावा में कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने घोषणा की कि कूटर भारत में देश के अगले उच्चायुक्त होंगे। यह पद पहले कैमरून मैके के पास था। आनंद ने कहा, “नये उच्चायुक्त की नियुक्ति भारत के साथ राजनयिक संबंधों को गहरा करने और द्विपक्षीय सहयोग को गति देने के लिए कदम-दर-कदम आगे बढ़ने के कनाडा के दृष्टिकोण को दर्शाती है।” उन्होंने कहा, “यह नियुक्ति कनाडा में रहने वाले लोगों के लिए सेवाएं बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही यह कनाडा की अर्थव्यवस्था को समर्थन देने के लिए द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगी।” कनाडा सरकार की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि ये नियुक्तियां दोनों देशों के नागरिकों और व्यवसायों के लिए आवश्यक राजनयिक सेवाएं बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।कूटर के पास 35 वर्षों का कूटनीतिक अनुभव है। हाल ही में उन्होंने इजराइल में कनाडा के प्रभारी राजदूत के रूप में काम किया। वह दक्षिण अफ्रीका, नामीबिया, लेसोथो, मॉरीशस और मेडागास्कर में कनाडा के उच्चायुक्त के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। कूटर ने 1998 से 2000 तक नयी दिल्ली स्थित कनाडाई उच्चायोग में प्रथम सचिव के रूप में भी कार्य किया था। जून में प्रधानमंत्री मोदी और उनके कनाडाई समकक्ष कार्नी ने भारत-कनाडा संबंधों में स्थिरता बहाल करने के लिए “रचनात्मक” कदम उठाने पर सहमति जताई थी, जिसमें एक-दूसरे की राजधानियों में दूतों की शीघ्र वापसी भी शामिल है। साल 2023 में कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंट का हाथ होने के आरोप लगाए थे, जिसके बाद दोनों देशों के बीच संबंध अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे। पिछले साल अक्टूबर में भारत ने कनाडा से अपने उच्चायुक्त और पांच अन्य राजनयिकों को वापस बुला लिया था, जब ओटावा ने उन्हें निज्जर मामले से जोड़ने की कोशिश की थी। भारत ने इतनी ही संख्या में कनाडाई राजनयिकों को निष्कासित भी कर दिया था। हालांकि, अप्रैल में संसदीय चुनाव में लिबरल पार्टी के नेता कार्नी की जीत ने द्विपक्षीय संबंधों को पुनः स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू करने में मदद की।
- गढ़चिरौली. महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए चार नक्सलियों के सिर पर कुल 14 लाख रुपये का इनाम था। पुलिस ने बृहस्पतिवार यह जानकारी दी। एक अधिकारी ने बताया कि मालु पाडा (41), क्रांति उर्फ जमुना हलामी (32), ज्योति कुंजाम (27) और मंगी मदकम (22) को 27 अगस्त को ढेर किया गया था। सुरक्षा बलों को यह विश्वसनीय सूचना मिली थी कि प्रतिबंधित संगठन की गढ़चिरौली डिवीजन गट्टा एलओएस, कंपनी नंबर 10 और कुछ अन्य फॉर्मेशन महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ सीमा के भामरगढ़ उप-मंडल के कोपरशी जंगल में डेरा डाले हुए हैं। गढ़चिरौली के पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय की एक विज्ञप्ति में कहा गया, "अतिरिक्त एसपी (अभियान) एम रामेश के नेतृत्व में एक अभियान शुरू किया गया और सी-60 के 20 दल और सीआरपीएफ की क्यूएटी के दो दलों को 25 अगस्त को कोपरशी जंगल क्षेत्र के लिए वाना किया गया। घने जंगल की कठिन भौगोलिक स्थिति और प्रतिकूल मौसम के बावजूद, पुलिस दल दो दिन लगातार बारिश के बाद इलाके में पहुंचा।"विज्ञप्ति में कहा गया, "27 अगस्त की सुबह तलाशी अभियान के दौरान, पुलिस दल पर माओवादियों ने अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसपर पुलिस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। अंततः माओवादी पुलिस का दबाव बढ़ने पर घने जंगल की ओर भाग निकले। लगभग आठ घंटे तक चली मुठभेड़ के बाद, एक पुरुष और तीन महिलाओं के शव बरामद किए गए।" विज्ञप्ति के अनुसार, छत्तीसगढ़ निवासी मालु पाडा (41) कंपनी नंबर 10 का सदस्य था और प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के 'प्लेटफॉर्म पार्टी कमेटी सदस्य' (पीपीसीएम) के रूप में काम कर रहा था। इसमें कहा गया है कि उसके सिर पर छह लाख रुपये का इनाम था। गढ़चिरौली के निवासी और कंपनी नंबर 10 की सदस्य क्रांति उर्फ जमुना हलामी (32) के सिर पर चार लाख रुपये का इनाम था। छत्तीसगढ़ निवासी और आहरी दलाम की सदस्य ज्योति कुंजाम (27) के सिर पर दो लाख रुपये का इनाम था। विज्ञप्ति के मुताबिक, मंगी मदकम (22) के सिर पर भी दो लाख रुपये का इनाम था।विज्ञप्ति में बताया गया कि प्रतिकूल परिस्थितियों में 48 घंटे चले इस अभियान के दौरान मौके से एक एसएलआर राइफल, दो इंसास राइफल, एक .303 राइफल, 92 कारतूस और तीन वॉकी-टॉकी सेट बरामद किए गए। साल 2021 से गढ़चिरौली पुलिस के निरंतर प्रयासों से कुल 91 कट्टर माओवादी मारे गए हैं, 128 गिरफ्तार किए गए हैं जबकि 75 ने आत्मसमर्पण किया है।
- नयी दिल्ली. सीट बेल्ट नहीं बांधने के कारण सड़क दुर्घटनाओं में वर्ष 2023 में 16,025 लोगों की मौत हो गई। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) की एक रिपोर्ट में यह कहा गया है। 'भारत में सड़क दुर्घटनाएं 2023' शीर्षक वाली रिपोर्ट के अनुसार, मृतकों में 8,441 चालक थे, जबकि शेष 7,584 यात्री थे। रिपोर्ट के अनुसार, देश में हर घंटे 55 सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। ‘‘देश में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस विभागों ने वर्ष 2023 के दौरान कुल 4,80,583 सड़क दुर्घटनाओं की सूचना दी है, जिनमें 1,72,890 लोगों की जान गई और 4,62,825 लोग घायल हुए।''रिपोर्ट में कहा गया है कि सड़क दुर्घटनाओं की स्थिति में घातक और गंभीर चोटों से बचने के लिए हेलमेट और सीट बेल्ट जैसे सुरक्षा उपकरणों का उपयोग जरूरी है। इनका उपयोग नहीं करना घातक हो सकता है। रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘ वर्ष 2023 में हेलमेट नहीं पहनने के कारण कुल 54,568 लोगों की जान गई। इनमें 39,160 (71.8 प्रतिशत) लोग वाहन चालक थे जबकि 15,408 (28.2 प्रतिशत) यात्री थे।'' कुछ अपवादों को छोड़कर, दोपहिया वाहन चलाने वाले सभी लोगों के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य है।रिपोर्ट के अनुसार, जानलेवा सड़क दुर्घटनाओं की संख्या 2023 में 3.04 प्रतिशत बढ़कर 1,60,509 हो गई, जो 2022 में 1,55,781 थी। 2023 में हुई कुल दुर्घटनाओं में से 33.4 प्रतिशत जानलेवा थीं। रिपोर्ट के अनुसार 68.4 प्रतिशत सड़क हादसे तेज रफ्तार के कारण हुए। इससे 68.1 प्रतिशत मौत और 69.2 प्रतिशत घायल होने के मामले दर्ज किए गए। शराब/नशीले पदार्थों का सेवन, लाल बत्ती तोड़ना और मोबाइल फोन का उपयोग, ये सभी मिलकर कुल दुर्घटनाओं का 3.9 प्रतिशत और कुल मौत का 4.3 प्रतिशत रहे। 'गलत दिशा में गाड़ी चलाना' 2023 में सड़क दुर्घटनाओं का तीसरा सबसे बड़ा कारण था। इसके कारण 5.3 प्रतिशत दुर्घटनाएं, 5.5 प्रतिशत मौत और 5.3 प्रतिशत घायल हुए।
- नयी दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार को निर्यातकों को अमेरिकी शुल्क के प्रभाव से बचाने के लिए संभावित सहायता उपायों पर चर्चा करने हेतु एक अंतर-मंत्रालयी बैठक की अध्यक्षता की। सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में वित्त, वाणिज्य, कपड़ा, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई), रसायन और मत्स्य पालन मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। यह चर्चा ट्रंप प्रशासन द्वारा 27 अगस्त से अमेरिकी बाजार में भारतीय सामानों पर 50 प्रतिशत का भारी शुल्क लगाए जाने के मद्देनजर हुई है।निर्यातकों के अनुसार, श्रम-प्रधान क्षेत्रों जैसे झींगा, रसायन, वस्त्र, चमड़ा और जूते तथा रत्न और आभूषण पर इस शुल्क का प्रभाव पड़ेगा क्योंकि इन क्षेत्रों की वस्तुएं अमेरिकी बाजार में कम प्रतिस्पर्धी हो जाएंगी। इसका कारण यह है कि बांग्लादेश, वियतनाम और थाईलैंड जैसे प्रतिस्पर्धी देशों पर अपेक्षाकृत कम शुल्क लगाया जा रहा है। सूत्रों ने बताया कि मंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों से प्रतिक्रिया मांगी और निर्यातकों के लिए विचार किए जा सकने वाले समर्थन उपायों पर चर्चा की।
- नयी दिल्ली. अमेरिका के 50 प्रतिशत शुल्क के प्रभावी होने के बाद अगले छह महीने में भारत के कपड़ा निर्यात का करीब एक-चौथाई हिस्सा बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। विशेषज्ञों ने बृहस्पतिवार को कहा कि अमेरिका देश के परिधान उद्योग के लिए सबसे बड़ा निर्यात बाजार है और अब निर्यातक ऑर्डर रद्द होने की समस्या से जूझ रहे हैं। कपास के शुल्क मुक्त आयात को तीन महीने के लिए बढ़ाकर 31 दिसंबर तक करने से हालांकि घरेलू कपड़ा उद्योग को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। इस कदम से सरकार का प्रयास अपनी निर्यात रणनीति को पुनः तैयार करके और भारत के मौजूदा मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का लाभ उठाकर अमेरिका के अलावा अन्य वैकल्पिक गंतव्यों की तलाश करके उच्च शुल्क के प्रभाव को कम करना है। भारतीय वस्त्र उद्योग परिसंघ (सीआईटीआई) की महासचिव चंद्रिमा चटर्जी ने कहा, ‘‘ अगर मैं कुछ हद तक व्यापार प्रणाली में बदलाव होने की बात को ध्यान में रखूं तो अगले छह महीने में कम से कम 20-25 प्रतिशत की गिरावट की आशंका हैं। ऐसा किए जाने पर निर्यात में 28 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है जिसमें सबसे अधिक प्रभावित होने वालों में परिधान एवं सिले हुए उत्पाद शामिल हैं।''सरकार ने कपास के शुल्क मुक्त आयात की अवधि बृहस्पतिवार को तीन महीने के लिए बढ़ाकर 31 दिसंबर तक कर दी। इस कदम का मकसद अमेरिका के 50 प्रतिशत उच्च शुल्क का सामना कर रहे कपड़ा निर्यातकों को समर्थन प्रदान करना है। इससे पहले 18 अगस्त को वित्त मंत्रालय ने 19 अगस्त से 30 सितंबर तक कपास आयात पर शुल्क छूट की अनुमति दी थी। चटर्जी ने कहा, ‘‘ हम बहुत राहत महसूस कर रहे हैं क्योंकि पहले दी गई छूट से कपास के लिए दिए जाने वाले नए ऑर्डर पर कोई लाभ नहीं मिल रहा था क्योंकि इसे भेजने में कम से कम 45-50 दिन लगते हैं। इसलिए अब अपेक्षाकृत लंबी छूट से नए ऑर्डर पर लाभ होगा।'' दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखे पत्र में परिधान निर्यात संवर्धन परिषद (एईपीसी) के चेयरमैन सुधीर सेखरी ने कहा कि भारतीय आयात पर अमेरिका के 50 प्रतिशत शुल्क की घोषणा देश के कपड़ा एवं परिधान उद्योग के लिए चिंता का गंभीर विषय है।सेखरी ने कहा, ‘‘ अमेरिका सबसे बड़े निर्यात गंतव्यों में से एक है। इस तरह के उच्च शुल्क से अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा जिससे निर्यातकों एवं उपभोक्ताओं दोनों को नुकसान होगा।'' उन्होंने कहा, ‘‘ हमारा उद्योग पहले से ही शुल्क वृद्धि के प्रभावों का सामना कर रहा है जिसमें संभावित नुकसान और ऑर्डर रद्द होने की आशंका है। हम अमेरिकी शुल्क के प्रभाव को कम करने के लिए वैकल्पिक बाजारों और रणनीतियों की तलाश कर रहे हैं। हम कपड़ा मंत्रालय और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के साथ भी सक्रिय रूप से चर्चा कर रहे हैं। दोनों मंत्रालयों के मंत्रियों के साथ बैठकों में हमें हर संभव समर्थन का आश्वासन दिया गया है।'' वित्त वर्ष 2024-25 में कपड़ा एवं और परिधान क्षेत्र का कुल आकार 179 अरब अमेरिकी डॉलर रहा था। इसमें 142 अरब डॉलर का घरेलू बाजार और 37 अरब डॉलर का निर्यात शामिल है।
- नयी दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने निर्यातकों के एक प्रतिनिधिमंडल को बृहस्पतिवार को आश्वासन दिया कि अमेरिकी शुल्क के कारण उत्पन्न इस चुनौतीपूर्ण समय में सरकार उनके साथ मजबूती से खड़ी है और उनकी चिंताओं को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है। फियो ने एक बयान में यह जानकारी दी। भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (फियो) के अध्यक्ष एस. सी. रल्हन के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल को यह आश्वासन दिया गया। मंत्री ने साथ ही कहा कि सरकार उच्च अमेरिकी शुल्क के कारण उत्पन्न समस्याओं से निपटने में हर संभव प्रयास कर रही है। प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिकी शुल्क में वृद्धि से भारतीय निर्यातकों के समक्ष उत्पन्न चुनौतियों से उन्हें अवगत कराया। रल्हन ने बातचीत के दौरान निर्यातक समुदाय की तात्कालिक चिंताओं, विशेष रूप से बाजार पहुंच, प्रतिस्पर्धी क्षमता और रोजगार सृजन पर उच्च शुल्क के प्रतिकूल प्रभावों का उल्लेख किया।उन्होंने देश की वृद्धि और रोजगार सृजन के प्रमुख चालक रहे निर्यातकों पर दबाव कम करने के लिए त्वरित एवं सुनियोजित नीतिगत उपायों की आवश्यकता बतायी। फियो ने कहा, ‘‘ वित्त मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि सरकार इस समय भारतीय निर्यातकों के साथ मजबूती से खड़ी है। साथ ही सरकार निर्यातक समुदाय की सभी चिंताओं को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है और उनके हितों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेगी।'' बयान के अनुसार, मंत्री ने श्रमिकों की आजीविका की सुरक्षा के महत्व का भी उल्लेख किया और उद्योग जगत से वैश्विक चुनौतियों के बावजूद कर्मचारियों को नौकरी की निरंतरता का आश्वासन देने का आह्वान किया। इसमें कहा गया, ‘‘ उन्होंने कहा कि सरकार वृद्धि की गति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भारत की स्थिरता बनाए रखने के लिए निर्यातकों को व्यापक समर्थन प्रदान करेगी।'' भारतीय वस्तुओं पर अमेरिका का 50 प्रतिशत शुल्क बुधवार से प्रभावी हो गया। इससे झींगा, परिधान, हीरे, चमड़ा एवं जूते चप्पल तथा रत्न व आभूषण जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों में निर्यात पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है।
- नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री जन-धन योजना के 11 साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि इस योजना ने लोगों को अपना भाग्य खुद लिखने की शक्ति दी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब अंतिम पर खड़ा व्यक्ति वित्तीय रूप से जुड़ जाता है तो पूरा देश एक साथ आगे बढ़ता है। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री जन-धन योजना आज ही के दिन शुरू की गई थी। यह एक राष्ट्रीय मिशन है जिसमें देश के सभी परिवारों के व्यापक वित्तीय समावेशन के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण शामिल है। इस योजना में प्रत्येक परिवार के लिए कम से कम एक बुनियादी बैंकिंग खाता, वित्तीय साक्षरता, ऋण, बीमा और पेंशन सुविधा तक पहुंच के साथ बैंकिंग सुविधाओं तक सार्वभौमिक पहुंच की परिकल्पना की गई है। मोदी ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘जब अंतिम व्यक्ति वित्तीय रूप से जुड़ा होता है, तो पूरा देश एक साथ आगे बढ़ता है। प्रधानमंत्री जन-धन योजना से यही हासिल हुआ।इसने सम्मान बढ़ाया और लोगों को अपना भाग्य खुद लिखने की शक्ति दी।'' प्रधानमंत्री ने एक अन्य पोस्ट में ‘माइगोव' द्वारा किया गया एक पोस्ट साझा किया जिसमें बताया गया कि कैसे प्रधानमंत्री जन-धन योजना ने पूरे भारत में जीवन बदल दिया। इस पोस्ट में कहा गया, ‘‘गणित के सूत्र नहीं, बल्कि भारत के विकास के सूत्र। भारत की वित्तीय क्रांति एक विचार से प्रेरित है: नवाचार के माध्यम से समावेशन। अंतिम छोर तक बैंकिंग से लेकर महिला-नेतृत्व वाले सशक्तीकरण तक, पारदर्शी डीबीटी हस्तांतरण से लेकर शासन में विश्वास तक, प्रधानमंत्री जन-धन योजना ने भारत में बैंकिंग, बचत और विकास के तरीके को बदल दिया है।'' ‘माइगोव' के एक अन्य पोस्ट में कहा गया, ‘‘11 साल पहले, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत से वादा किया था कि कोई भी गरीब परिवार बैंकिंग की दुनिया से बाहर नहीं रहेगा। जन-धन कभी भी केवल खातों के बारे में नहीं था, यह एक माँ के लिए सम्मान के साथ बचत करने, एक किसान को बिचौलियों के बिना सहायता प्राप्त करने और एक ग्रामीण को राष्ट्र के विकास का हिस्सा महसूस करने के लिए दरवाजे खोलने के बारे में था।'' इसमें कहा गया, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी के दृष्टिकोण ने वित्तीय समावेशन को वास्तविकता में बदल दिया, जिससे हर घर में आशा और हर जीवन में आत्मविश्वास आया।'
- नई दिल्ली। हरियाणा सरकार ने महिलाओं के लिए एक बड़ा एलान किया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने आज गुरुवार को कैबिनेट बैठक के बाद घोषणा की कि राज्य की पात्र महिलाओं को हर महीने 2100 रुपए की वित्तीय सहायता दी जाएगी। इस योजना का नाम ‘दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना’ रखा गया है और इसकी शुरुआत 25 सितंबर 2025 को दीन दयाल उपाध्याय की जयंती पर होगी। यह योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।मुख्यमंत्री सैनी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि योजना के पहले चरण में उन परिवारों की महिलाएं शामिल होंगी जिनकी सालाना आय 1 लाख रुपए से कम है। बाद में धीरे-धीरे अन्य परिवारों की महिलाओं को भी इसमें जोड़ा जाएगा। योजना का लाभ उन महिलाओं को मिलेगा जिनकी उम्र 23 साल या उससे अधिक है। इसमें विवाहित और अविवाहित दोनों शामिल होंगी, लेकिन शर्त यह है कि महिला पिछले 15 साल से हरियाणा की स्थायी निवासी हो।सरकार ने स्पष्ट किया है कि परिवार में पात्र महिलाओं की संख्या पर कोई सीमा नहीं होगी। अगर एक परिवार में तीन महिलाएं पात्र हैं, तो तीनों को यह लाभ मिलेगा। लेकिन यदि किसी महिला को पहले से किसी अन्य सरकारी योजना के तहत 2100 रुपए से ज्यादा की राशि मिल रही है, तो उसे इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। इसके अलावा, स्टेज-3 और स्टेज-4 कैंसर पीड़ित महिलाओं और 54 दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित महिलाओं को अगर पहले से पेंशन मिल रही है, तो उन्हें इस योजना का अतिरिक्त लाभ भी मिलेगा। राज्य सरकार का अनुमान है कि पहले चरण में लगभग 19 से 20 लाख महिलाएं इस योजना से लाभान्वित होंगी। अगले सात दिनों में योजना का गजट नोटिफिकेशन जारी होगा और इसके लिए एक मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया जाएगा।-
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नैनीताल. उत्तराखंड के नैनीताल में डेढ़ सौ साल से ज्यादा पुराने 'ओल्ड लंदन हाउस' में भीषण आग लगने के कारण झुलसकर एक बुजुर्ग महिला की मौत हो गयी। पुलिस ने यह जानकारी दी। घटना में जान गंवाने वाली महिला प्रसिद्ध इतिहासकार और पर्यावरणविद डॉ. अजय रावत की बहन थीं।
पुलिस ने यहां बताया कि मल्लीताल क्षेत्र में मोहनको चौराहे पर स्थित इस इमारत में बुधवार रात आग लग गयी जिस पर अग्निशमन सेवा, पुलिस, वायुसेना फायर टेंडर एवं अन्य बचाव दलों की मदद से कई घंटे बाद रात करीब दो बजे काबू पाया जा सका। घनी आबादी वाले क्षेत्र में लगी आग पर नियंत्रण करने के लिए बचाव एवं राहत अभियान में विभिन्न एजेंसियों के 40 से अधिक कर्मी जुटे रहे। घटना की सूचना मिलते ही कुमांउ की पुलिस महानिरीक्षक रिद्धिम अग्रवाल और नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रह्लाद नारायण मीणा भी मौके पर पहुंचे और बचाव अभियान की निगरानी की। डॉ. रावत ने बताया कि उनकी बहन शांता बिष्ट की आग में झुलसकर मृत्यु हो गयी है। वह 82 वर्ष की थीं।
इमारत के पास ही अपनी मोबाइल फोन की दुकान के मालिक विनोद कुमार वर्मा ने बताया कि उन्होंने रात करीब 10 बजे धुआं निकलते देखा जिसके तुरंत बाद आग की लपटें दिखाई देने लगीं। उन्होंने तत्काल अग्निशमन विभाग को सूचना दी, जिसके बाद दमकल का एक वाहन मौके पर पहुंचा और आग बुझाने का प्रयास किया। हालांकि, उसके टैंक का पानी जल्द ही खत्म हो गया जिसके बाद उसे दोबारा पानी भरने के लिए वापस भेजना पड़ा। घटना के बाद अफरातफरी मच गयी और लोग इधर-उधर भागते दिखाई दिए। बाद में, भवाली, भीमताल, रामनगर, हल्द्वानी समेत कई जगहों से दमकल वाहन मंगाए गए जिन्होंने आग बुझाने में मदद की। एक स्थानीय निवासी सिद्धार्थ शाह ने कहा कि आग की लपटें इतनी उंची थीं कि उसमें अंदर जाना असंभव था। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों ने आग को बुझाने का भरसक प्रयास किया लेकिन वह काबू में नहीं आ रही थी। उपजिलाधिकारी नवाजिश खालिक ने कहा कि अग्निशमन विभाग और जल संस्थान की टीमों के साथ शहर के सभी ‘हाइड्रेंटस' यानी आग बुझाने के लिए पानी की आपूर्ति करने वाले स्रोतों का निरीक्षण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए विभाग की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी। आग के कारणों का फिलहाल पता नहीं चला है।
आग में जलकर इमारत पूरी तरह से नष्ट हो गयी। 'ओल्ड लंदन हाउस' को 1863 में बनाया गया था, जब नैनीताल को यूनाइटेड प्रोविंस की ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में विकसित किया गया था। यह उस दौर में बनीं कई शानदार इमारतों में से एक थी। नैनीताल के एसएसपी मीणा ने कहा कि नुकसान का आकलन किया जा रहा है और आसपास के घरों में भी तलाश करके देखा जा रहा है कि कहीं कोई वहां फंसा तो नहीं है। यह इमारत प्रोफेसर अजय रावत की बहनों कर्णलता रावत और शांता बिष्ट का आवास था। कर्णलता रावत यहां मोहन लाल शाह बालिका विद्यालय की प्रधानाचार्य के तौर पर सेवानिवृत्त हुई थीं लेकिन यह विडंबना है कि 2020 में उनकी मौत भी आग में झुलसकर ही हुई थी। घटना के दौरान महिला के पुत्र निखिल बिष्ट अपनी मां को बचाने के लिए असहाय होकर चिल्लाते रहे और फिर बेहोश हो गए। निखिल बिष्ट ने 'बर्फी' समेत कई हिंदी फिल्मों में आर्ट निर्देशक के रूप में काम किया है और वह नैनीताल आकर अपनी बुजुर्ग मां की देखभाल कर रहे थे। - नयी दिल्ली.रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सतीश कुमार का कार्यकाल एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया गया है। उनका कार्यकाल 31 अगस्त, 2025 को समाप्त होने वाला था।सरकार ने 27 अगस्त 2025 को एक आदेश में कहा, ‘‘मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में भारतीय रेलवे प्रबंधन सेवा (सेवानिवृत्त) सतीश कुमार के कार्यकाल को एक सितंबर 2025 से एक वर्ष की अवधि के लिए अनुबंध के आधार पर पुनर्नियुक्ति पर, मौजूदा नियम और शर्तों पर या अगले आदेश तक (जो भी पहले हो) विस्तार देने को मंजूरी दे दी है।'' एक सितंबर 2024 को कुमार की प्रारंभिक नियुक्ति के साथ ही वह बोर्ड के इतिहास में अनुसूचित जाति वर्ग से पहले अध्यक्ष और सीईओ बने। अधिकारियों ने बताया कि भारतीय रेलवे मैकेनिकल इंजीनियर्स सेवा (आईआरएसएमई) के 1986 बैच के प्रतिष्ठित अधिकारी कुमार ने 34 वर्षों से अधिक के अपने शानदार करियर के दौरान भारतीय रेलवे में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने बताया, ‘‘कुमार ने मार्च 1988 में भारतीय रेलवे में अपना करियर शुरू किया था। तब से, उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों और मंडलों में विभिन्न महत्वपूर्ण भूमिकाओं में काम किया है और रेलवे प्रणाली में नवाचार, दक्षता और सुरक्षा में सुधार लाए हैं।'' अधिकारियों ने कहा, ‘‘कुमार का एक महत्वपूर्ण योगदान ‘फॉग सेफ डिवाइस' पर उनका कार्य है। यह एक ऐसा नवाचार है जो कोहरे की स्थिति के दौरान सुरक्षित रेल परिचालन सुनिश्चित करने में सहायक सिद्ध हुआ है।




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