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प्रयागराज। प्रयागराज के महाकुंभ में मौनी अमावस्या के अवसर पर बुधवार को हुई भगदड़ की घटना की जांच के लिए गठित न्यायिक आयोग ने अपना काम शुरू कर दिया है। गौरतलब है मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाकुंभ हादसे के तुरंत बाद जांच के लिए न्यायिक आयोग के गठन की घोषणा की थी। आयोग के सदस्य 10 जनपथ लखनऊ स्थित अपने कार्यालय में पहुंच गए हैं।
वहीं इस मामले में राज्यपाल की राय है कि 29 जनवरी को महाकुंभ प्रयागराज में मौनी अमावस्या के दौरान मेला क्षेत्र में हुई भगदड़ की घटना के संबंध में लोकहित में जांच कराना आवश्यक है। इसलिए राज्यपाल द्वारा जांच आयोग अधिनियम द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करके तीन-सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया गया है। इस आयोग की अध्यक्षता इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति हर्ष कुमार कर रहे हैं। उनके साथ सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी वी.के. गुप्ता तथा सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डी.के. सिंह बतौर सदस्य शामिल हैं।आयोग को अपनी जांच रिपोर्ट एक माह के भीतर राज्य सरकार को सौंपनी होगी, हालांकि आवश्यकतानुसार इसकी अवधि बढ़ाई जा सकती है। आयोग को निम्नलिखित बिंदुओं पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी – उन कारणों एवं परिस्थितियों का पता लगाना जिसके कारण उक्त घटना घटित हुई। भविष्य में इस प्रकार की घटना की पुनरावृत्ति को रोकने के संबंध में सुझाव देना।उल्लेखनीय है कि मौनी अमावस्या पर्व पर महाकुंभ में मची भगदड़ में 30 लोगों की मौत हो गई थी। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को 25-25 लाख मुआवजा देने का ऐलान किया। इससे पहले सीएम योगी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो संदेश जारी कर कहा कि महाकुंभ, प्रयागराज में हुई घटना अत्यंत दुखद है, मर्माहत करने वाली है। मृतकों को विनम्र श्रद्धांजलि व मेरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिजनों के साथ हैं। -
नई दिल्ली।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महत्वपूर्ण खनिजों के बारे में केन्द्रीय मंत्रिमंडल के बुधवार के फैसले को आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। सोशल मीडिया पोस्ट में प्रधानमंत्री ने कहा कि नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन-एन.सी.एम.एम. से संबंधित मंत्रिमंडल के फैसले से भारत की उच्च प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा, रक्षा और अन्य महत्वपूर्ण उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा।
कच्चे तेल के आयात को कम करने, किसानों को सशक्त बनाने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने में मिलेगी मदद
उन्होंने कहा कि एथेनॉल खरीद की संशोधित दर से जुड़े फैसले से एथेनॉल उत्पादन बढ़ाने और ब्लेडिंग लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे कच्चे तेल के आयात में कमी आएगी, किसान सशक्त होंगे और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा। गौरतलब हो, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल की समिति (सीसीईए) ने केन्द्र सरकार के एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम के तहत 1 नवंबर, 2024 से 31 अक्टूबर 2025 तक एथेनॉल आपूर्ति वर्ष (ईएसवाई) 2024-25 के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) के लिए एथेनॉल खरीद मूल्य में संशोधन को मंजूरी दे दी है। एथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2024-25 (1 नवंबर 2024 से 31 अक्टूबर 2025) के लिए सी-हैवी मोलासेस (सीएचएम) से प्राप्त ईबीपी कार्यक्रम के लिए एथेनॉल की एक्स-मिल कीमत 56.58 रुपए प्रति लीटर से 57.97 रुपए प्रति लीटर तय की गई है।
इस मंजूरी से न केवल सरकार को एथेनॉल आपूर्तिकर्ताओं के लिए मूल्य स्थिरता और लाभकारी मूल्य प्रदान करने की नीति जारी रखने में सुविधा होगी, बल्कि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने, विदेशी मुद्रा की बचत करने और पर्यावरण को लाभ पहुंचाने में भी मदद मिलेगी। गन्ना किसानों के हित में जीएसटी और परिवहन शुल्क पहले की तरह अलग से देय होंगे। सीएचएम इथेनॉल की कीमतों में 3 प्रतिशत की वृद्धि से बढ़े हुए मिश्रण लक्ष्य को पूरा करने के लिए एथेनॉल की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
सरकार एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम लागू कर रही है
सरकार एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम लागू कर रही है जिसके तहत तेल विपणन कंपनियां 20 प्रतिशत तक एथेनॉल के साथ मिश्रित पेट्रोल बेचती हैं। वैकल्पिक और पर्यावरण अनुकूल ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए यह कार्यक्रम पूरे देश में लागू किया जा रहा है। इसका उद्देश्य ऊर्जा आयात पर निर्भरता को कम करना और कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देना भी है। पिछले दस वर्षों (31.12.2024 तक) के दौरान, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) द्वारा पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण के परिणामस्वरूप लगभग 1,13,007 करोड़ रुपए से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है और लगभग 193 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल की जगह इथेनॉल मिश्रित तेल का उपयोग हुआ है।सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) द्वारा एथेनॉल मिश्रण, एथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2013-14 (ईएसवाई-वर्तमान में वर्ष की 1 नवंबर से अगले वर्ष की 31 अक्टूबर तक इथेनॉल आपूर्ति अवधि के रूप में परिभाषित) में 38 करोड़ लीटर से बढ़कर ईएसवाई 2023-24 में 707 करोड़ लीटर हो गया है जिससे 14.60 प्रतिशत का औसत मिश्रण प्राप्त हुआ है।सरकार ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य पहले के 2030 की जगह 2025-26 कर दिया है। “भारत में एथेनॉल मिश्रण के लिए रोडमैप 2020-25” को सार्वजनिक रूप से जारी कर दिया गया है। इस दिशा में तेल विपणन कंपनियों ने चालू ईएसवाई 2024-25 के दौरान 18 प्रतिशत मिश्रण का लक्ष्य हासिल करने की योजना बनाई है। एथेनॉल आसवन क्षमता को बढ़ाकर प्रति वर्ष 1713 करोड़ लीटर करना, एथेनॉल की कमी वाले राज्यों में समर्पित एथेनॉल संयंत्र (डीईपी) स्थापित करने के लिए दीर्घकालिक ऑफ-टेक समझौते (एलटीओए), सिंगल फीड डिस्टिलरी को मल्टी फीड में बदलने के लिए प्रोत्साहित करना, ई-100 और ई-20 ईंधन की उपलब्धता, फ्लेक्सी ईंधन वाहनों की शुरूआत जैसी पहल की गई हैं। ये सभी कदम व्यापार करने में आसानी और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी योगदान देते हैं।ईबीपी कार्यक्रम के तहत सरकार द्वारा किए गए उपायों के कारण देश भर में ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड डिस्टिलरीज के नेटवर्क, भंडारण और लॉजिस्टिक सुविधाओं के अलावा रोजगार के अवसरों और विभिन्न हितधारकों के बीच देश के भीतर मूल्य के बंटवारे के रूप में निवेश हुआ है। सभी डिस्टिलरी इस योजना का लाभ उठा सकेंगी और उनमें से बड़ी संख्या में ईबीपी कार्यक्रम के लिए इथेनॉल की आपूर्ति किए जाने की उम्मीद है। इससे विदेशी मुद्रा बचत, कच्चे तेल के विकल्प के रूप में, पर्यावरणीय लाभ और गन्ना किसानों को जल्दी भुगतान में मदद मिलेगी। -
नई दिल्ली। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति ने बुधवार को विभिन्न राज्यों में आपदा शमन (Disaster Mitigation) के लिए 3027.86 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। उच्च स्तरीय समिति ने सबसे अधिक सूखा प्रभावित 12 राज्यों को 2022.16 करोड़ रुपए की कुल लागत वाली परियोजना को भी मंजूरी दी। सरकार ने देश में डिजास्टर रिस्क रिडक्शन (Disaster Risk Reduction) प्रणाली मजबूत करके आपदाओं के दौरान जानमाल और जैव विविधता को होने वाले किसी भी बड़े नुकसान को रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं। चालू वित्त वर्ष के दौरान राज्यों को 24,981 करोड़ रुपये से अधिक की राशि पहले ही जारी की जा चुकी है। केन्द्रीय गृह मंत्री ने 19 राज्यों के उच्च प्राथमिकता वाले 144 जिलों में जंगलों में आग लगने की घटनाएं कम करने के उद्देश्य से व्यय 818.92 करोड़ रुपये की लागत के वन अग्नि प्रबंधन के लिए शमन परियोजना (Mitigation Project for Forest Fire Management) को भी मंजूरी दी है।
गृह मंत्रालय के अनुसार केन्द्रीय वित्त मंत्री, कृषि मंत्री और नीति आयोग के उपाध्यक्ष की सदस्यता वाली समिति ने 10 राज्यों के ऐसे 50 जिलों में बिजली गिरने के जोखिम को कम करने के लिए बिजली सुरक्षा पर शमन परियोजना (Mitigation Project on Lightning Safety) पर विचार किया जो बिजली गिरने की घटनाओं से सबसे अधिक प्रभावित हैं। साथ ही, उच्च स्तरीय समिति ने सबसे अधिक सूखा प्रभावित 12 राज्यों के 49 जिलों को उत्प्रेरक सहायता (Catalytic Assistance) प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय आपदा शमन निधि (NDMF) से फंडिंग के प्रस्तावों पर भी विचार किया।उच्च स्तरीय समिति ने सबसे अधिक सूखा प्रभावित 12 राज्यों को उत्प्रेरक सहायता के लिए 2022.16 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय वाली परियोजना को मंजूरी दी है, जिसमें केन्द्र सरकार का हिस्सा 1200 करोड़ रुपये होगा। जिन 12 राज्यों के लिए यह धनराशि मंजूर की गई है उनमें आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश शामिल हैं।समिति ने 10 राज्यों में कुल 186.78 करोड़ रुपये की लागत से बिजली सुरक्षा पर शमन परियोजना को भी मंजूरी दी है। इन 10 राज्यों में आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मेघालय, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।इसके अतिरिक्त केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 19 राज्यों के उच्च प्राथमिकता वाले 144 जिलों में 818.92 करोड़ रुपए के कुल व्यय के वन अग्नि प्रबंधन के लिए शमन परियोजना को भी मंजूरी दी है। जिसमें से राष्ट्रीय आपदा शमन निधि (NDMF) और राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष (NDRF) का केन्द्रीय हिस्सा 690.63 करोड़ रुपए होगा।परियोजना का प्राथमिक उद्देश्य देश में जंगलों में लगने वाली आग की घटनाओं के प्रबंधन के दृष्टिकोण को बदलने और ‘बेहतर तरीके से निर्माण करें’ के प्रयासों के लिए शमन परियोजना को लागू करना है।आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मणिपुर, महाराष्ट्र, मिजोरम, मध्य प्रदेश, मेघालय, नागालैंड, ओडिशा, तमिलनाडु, तेलंगाना और उत्तराखंड जंगलों में आग लगने की घटनाओं में कमी लाने, जंगलों में आग लगने पर उनसे निपटने की तैयारियों के साथ-साथ आग के बाद के आकलन और स्थिति को सामान्य बनाने के लिए आवश्यक गतिविधियों को अंजाम देने को लेकर अपने-अपने प्रस्ताव पेश करेंगे।मंत्रालय ने बताया कि चालू वित्त वर्ष के दौरान राज्यों को 24,981 करोड़ रुपए से अधिक की राशि पहले ही जारी की जा चुकी है। इसमें राज्य आपदा मोचन कोष (SDRF) से 27 राज्यों को 17479.60 करोड़ रुपए, राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष (NDRF) से 18 राज्यों को 4808.30 करोड़ रुपए, राज्य आपदा न्यूनीकरण कोष (SDMF) से 13 राज्यों को 1973.55 करोड़ रुपए तथा राष्ट्रीय आपदा न्यूनीकरण कोष (NDMF) से 8 राज्यों को 719.72 करोड़ रुपए शामिल हैं। -
प्रयागराज। मौनी अमावस्या पर बुधवार को महाकुंभ में और भी बड़ा हादसा हो सकता था, लेकिन योगी सरकार की प्री प्लांड तैयारियों और अधिकारियों की सक्रियता ने इसे सीमित कर दिया। यहां आए साधु, संतों और श्रद्धालुओं ने योगी सरकार द्वारा यहां की गई व्यवस्थाओं और सुविधाओं को लेकर यह प्रतिक्रिया दी। उनका कहना है कि महाकुंभ में योगी सरकार ने बहुत बेहतर व्यवस्था की है, अगर ऐसा न होता, तो बुधवार को हुआ हादसा और बड़ा हो सकता था।
घटना की सूचना मिलते ही सीएम योगी ने अधिकारियों से अपडेट लियायोगी सरकार, मेला प्रशासन और मेला पुलिस की सजगता और सक्रियता ने इस हादसे को सीमित कर दिया। खुद सीएम योगी इस घटना की पल-पल की रिपोर्ट लेते रहे। घटना की सूचना मिलते ही सीएम योगी ने अधिकारियों से अपडेट लिया और तड़के ही अपने सरकारी आवास पर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव गृह, डीजीपी, एडीजी लॉ एंड ऑर्डर के साथ उच्च स्तरीय बैठक कर आवश्यक दिशा निर्देश दिए।महाकुंभ में अफवाह की वजह से घटना घटीश्री पंच दशनाम आवाहन अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी प्रकाशानंद ने कहा कि महाकुंभ में अफवाह की वजह से यह घटना घटी, लेकिन योगी की सरकार ने, उनकी पुलिस ने इस घटना पर तुरंत एक्शन लिया, जिससे बहुतों की जान बच गई। जिस तरह की भीड़ थी, ये हादसा बहुत बड़ा हो सकता था। ये योगी सरकार की व्यवस्था थी, यूपी पुलिस का क्विक रिस्पांस था, जिसने घटना को सीमित कर दिया। इसके लिए योगी सरकार को साधुवाद।अमृत स्नान शांतिपूर्ण ढंग से हुआ संपन्ननारायण सेवा संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने कहा कि मौनी अमावस्या पर देश और दुनिया से करोड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। शासन-प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए घटना को नियंत्रित कर लिया। सरकार और व्यवस्था में लगे अधिकारियों की मेहनत से महाकुंभ का अमृत स्नान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो रहा है।अफवाहों पर ध्यान न देने की अपीलअग्रवाल ने कहा कि अमृत स्नान पर आए श्रद्धालुओं और संतों से सावधानी बरतने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील करता हूं। सभी से सहयोग की अपेक्षा के साथ प्रशासन के प्रयासों की सराहना करता हूं।एक प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक योगी सरकार ने मौनी अमावस्या की फुलप्रूफ प्लानिंग की थी, जो घटना घटी, उसके लिए काफी हद तक पब्लिक भी जिम्मेदार है। यदि धक्का-मुक्की नहीं होती, तो यह घटना नहीं घटती। विपक्ष तो गिद्ध की भूमिका निभा रहा है।कुछ लोगों की लापरवाही से हुई घटनागोपालगंज बिहार से आई कुमकुम श्रीवास्तव ने बताया कि महाकुंभ आकर बहुत अच्छा लगा। योगी सरकार ने अच्छी व्यवस्था की है, लेकिन जो घटना घटी, उसके लिए भारी भीड़ और कुछ लोगों की लापरवाही की बड़ी भूमिका है। प्रशासन की ओर से तो बार-बार कहा जा रहा था कि जिस स्थान पर आएं, वहीं स्नान करें, तो फिर संगम नोज जाने की क्या आवश्यकता थी। - प्रयागराज। उत्तर प्रदेश सरकार ने महाकुंभ मेले में मची भगदड़ के बाद पांच मुख्य बदलाव किए हैं। महाकुंभ नगर को नो व्हीकल जोन घोषित कर दिया गया है यानि किसी भी तरह के वाहन को प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। महाकुंभ में मौनी अमावस्या पर पवित्र स्नान के लिए मेला क्षेत्र में करोड़ों श्रद्धालुओं के उमड़ने के दौरान भगदड़ मच गई थी। इस भगदड़ में 30 लोगों की मौत हो गई और 60 अन्य घायल हो गए। घटना को लेकर सरकार ने बताया कि संगम तट पर पहुंचने की कोशिश में श्रद्धालुओं के बैरिकेड्स को धक्का दिए जाने के कारण भगदड़ मची।मेला क्षेत्र में सभी प्रकार के वाहनों के प्रवेश को किया वर्जितइस हादसे के बाद, राज्य सरकार ने पांच प्रमुख बदलावों का फैसला किया, जिन्हें प्रशासन ने लागू कर दिया है। महाकुंभ मेला क्षेत्र में सभी प्रकार के वाहनों को सख्त वर्जित कर दिया गया है और पूरी तरह से नो-व्हीकल जोन में तब्दील कर दिया गया है। मेला क्षेत्र में वीवीआईपी पास को रद्द कर दिया गया है। किसी भी स्पेशल पास वाहनों को अंदर जाने की अनुमति नहीं होगी।श्रद्धालुओं की आवाजाही के लिए एकतरफा यातायात व्यवस्था लागूश्रद्धालुओं की आवाजाही को सुचारू बनाने के लिए एकतरफा यातायात व्यवस्था लागू की गई है। शहर में भीड़भाड़ को कम करने के लिए पड़ोसी जिलों से आने वाले वाहनों को जिले की सीमाओं पर ही रोका जा रहा है। व्यवस्था बनाए रखने के लिए 4 फरवरी तक शहर में चार पहिया वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा।मेला में भीड़ को मैनेज करने के लिए आईएएस अधिकारी आशीष गोयल और भानु गोस्वामी को तत्काल प्रयागराज पहुंचने का निर्देशइन पांच बदलावों के अलावा, मेला क्षेत्र में भीड़ को अच्छे से मैनेज करने के लिए आईएएस अधिकारी आशीष गोयल और भानु गोस्वामी को तत्काल प्रयागराज पहुंचने का निर्देश दिया गया है। दोनों नौकरशाहों ने विजय किरण के साथ 2019 अर्धकुंभ के सफल प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उस आयोजन के दौरान भानु गोस्वामी ने जिला मजिस्ट्रेट और कुंभ मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष के रूप में कार्य किया, जबकि आशीष गोयल प्रयागराज के आयुक्त थे, जो प्रबंधन की देखरेख करते थे।इसके अतिरिक्त, बड़े पैमाने पर आयोजनों को संभालने में पिछले अनुभव वाले पांच विशेष सचिव स्तर के अधिकारियों को महाकुंभ संचालन में सहायता के लिए नियुक्त किया गया है। त्रासदी के बाद, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन और अंतर-विभागीय समन्वय पर ध्यान केंद्रित करते हुए कई दिशा निर्देश जारी किए।रेल अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करने के निर्देशउन्होंने मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) द्वारा महाकुंभ व्यवस्थाओं की समीक्षा करने का आदेश दिया। एडीजी और प्रयागराज के जिला मजिस्ट्रेट को शहर से सभी भक्तों की सुरक्षित और सुचारू विदाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।देर रात वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में सीएम योगी ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और कई जिलों के अधिकारियों को संबोधित किया। उन्होंने रेल अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए। परिवहन निगम को भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त बसें चलाने के निर्देश दिए गए हैं।राज्य सरकार ने भगदड़ के कारणों की जांच के लिए तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग की घोषणा कीउन्होंने कहा कि कहीं भी भीड़ का दबाव नहीं बढ़ना चाहिए और सड़कों पर यातायात या लोगों की भीड़ नहीं होनी चाहिए। सड़कों पर कब्जा जमाए बैठे रेहड़ी-पटरी वालों को यातायात में व्यवधान को रोकने के लिए खाली जगहों पर स्थानांतरित किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि मेला देखने आए लोगों को मेला मैदान में घूमते समय अनावश्यक प्रतिबंधों का सामना न करना पड़े इस पर नजर रखी जाए।बुधवार को राज्य सरकार ने भगदड़ के कारणों की जांच के लिए तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग की घोषणा की। इस पैनल में न्यायमूर्ति हर्ष कुमार, पूर्व महानिदेशक वी.के. गुप्ता और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी वी.के. सिंह शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को 25-25 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है।(
- मुंबई ।मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर ने भक्तों के लिए एक नया दिशा-निर्देश जारी किया है। मंदिर प्रशासन के अनुसार आज गुरुवार से मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए ड्रेस कोड लागू किया जा रहा है। इस नई व्यवस्था के तहत, स्कर्ट, कटे-फटे कपड़े और रिवीलिंग ड्रेस पहनकर मंदिर में प्रवेश नहीं मिलेगा।सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष आचार्य पवन त्रिपाठी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मुंबई स्थित सिद्धिविनायक मंदिर सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के सनातनी और गणेश भक्तों के आस्था का एक प्रमुख केंद्र है। यहां पर लाखों लोग दर्शन के लिए आते हैं और यहां आने वाले श्रद्धालुओं के जीवन की मनोरथ पूरी होती है। लेकिन, जब लोग किसी पवित्र स्थल पर जाते हैं, तो वहां कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक होता है, ताकि उस स्थान की पवित्रता बनी रहे।उन्होंने आगे कहा कि यह निर्णय मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के सुझावों के आधार पर लिया गया है। कई भक्तों ने मंदिर में दर्शन करने के दौरान कुछ श्रद्धालुओं के पहनावे को लेकर चिंता व्यक्त की थी, जिनके कपड़े शालीन नहीं होते थे। इस पर विचार करते हुए, सिद्धिविनायक ट्रस्ट ने निर्णय लिया कि दर्शन के लिए आने वालों को शालीन कपड़े पहनने होंगे। यह कोई राजनीति का विषय नहीं है।यह एक धार्मिक और आस्था से जुड़ा मामला है। जब लोग किसी मंदिर में जाते हैं, तो वह सामान्यत: स्नान कर, अच्छे और शालीन कपड़े पहनकर जाते हैं। हम यही चाहते हैं कि मंदिर में आने वाले श्रद्धालु इसका पालन करें। श्रद्धालुओं तक धीरे-धीरे इस नियम के बारे में जानकारी पहुंचेगी और वे इसका पालन करेंगे।आचार्य पवन त्रिपाठी ने आगे कहा कि देशभर में कई मंदिरों में ड्रेस कोड लागू है और वहां जाने वाले श्रद्धालु पहले से ही इन नियमों से परिचित होते हैं। हमें विश्वास है कि सिद्धिविनायक मंदिर में भी यह नियम समय के साथ स्वीकृत हो जाएगा और श्रद्धालु इसका पालन करेंगे। यह निर्णय सिर्फ़ सिद्धिविनायक मंदिर की पवित्रता और भक्तों की आस्था को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
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नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक उम्मीदवार ने बुधवार को एक चुनावी जनसभा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पैर छू लिए तो उन्होंने झुकते हुए तीन बार पार्टी प्रत्याशी के पैर छू लिए। यह वाकया तब हुआ जब प्रधानमंत्री मोदी पांच फरवरी को होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव के मद्देनजर उत्तर-पूर्वी दिल्ली के करतार नगर में एक जनसभा को संबोधित करने पहुंचे थे। मोदी के मंच पर पहुंचने के बाद क्षेत्र के भाजपा उम्मीदवार एक-एक कर मोदी से मिल रहे थे। इसी दौरान पटपड़गंज विधानसभा क्षेत्र से पार्टी के उम्मीदवार रवींद्र नेगी जब प्रधानमंत्री के निकट पहुंचे तो उन्होंने झुककर अपने बाएं हाथ से मोदी के दोनों पैर छुए। इसके बाद, प्रधानमंत्री मोदी भी उनकी ओर झुक गए और लगातार तीन बार नेगी के पैर छूते नजर आए। इस दौरान, नेगी खड़े थे और वह मुस्कुरा भी रहे थे। बाद में प्रधानमंत्री ने उन्हें आगे बढ़ने का इशारा किया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से लोगों द्वारा साझा किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी को अक्सर देखा गया है कि जब कोई बुजुर्ग महिला या पुरुष उनके पैर छूता है तो वह भी उनके पैर छू लेते हैं। लेकिन यह संभवत: पहली बार है जब मोदी को किसी भाजपा उम्मीदवार के पैर छूते हुए देखा गया। नेगी पूर्वी दिल्ली की पटपड़गंज विधानसभा सीट से भाजपा के उम्मीदवार हैं। उनका मुकाबला आम आदमी पार्टी के अवध ओझा और कांग्रेस के चौधरी अनिल कुमार से है। पिछले विधानसभा चुनाव में यहां से दिल्ली के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने जीत दर्ज की थी। साल 2020 के इस विधानसभा चुनाव में सिसोदिया को नेगी से कड़ी टक्कर मिली थी। सिसोदिया 3,200 से अधिक मतों से यह चुनाव जीत पाए थे। नेगी (48) वर्तमान में दिल्ली नगर निगम के सदस्य हैं और विनोद नगर वार्ड-198 से पार्षद हैं। वह क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहते हैं और उनकी छवि कट्टर हिन्दू की भी है। -
अयोध्या. उत्तर प्रदेश के अयोध्या में मौनी अमावस्या पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गयी और एक अनुमान के मुताबिक पिछले 72 घंटे में 50 लाख से भी अधिक श्रद्धालु यहां पहुंचे हैं। देर शाम तक अयोध्या श्रद्धालुओं से पटी नजर आई और श्रद्धालु राम मंदिर व हनुमानगढ़ी के बाहर देर रात तक कतार में खड़े दिखाई दिये। एक बयान के मुताबिक, पिछले 72 घंटे में 50 लाख से भी अधिक श्रद्धालु राम नगरी पहुंच हैं और यह क्रम वसंत पंचमी तक जारी रहेगा। मौनी अमावस्या पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सरयू नदी के घाटों पर डुबकी लगाई।
अयोध्या पहुंच रहे श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सेहत का ख्याल रखने के लिए विशेष इंतजाम किये गए हैं और अयोध्या धाम में पहुंची भीड़ को देखते हुए मेला क्षेत्र में सभी तरह के वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग ने वसंत पंचमी तक के लिए सभी चिकित्सकों की छुट्टियां रद कर 24 घंटे आकस्मिक सेवाओं को चालू रखने का निर्देश दिया है। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. पुष्पेंद्र कुमार ने बताया कि 13 जगहों पर अस्थायी स्वास्थ्य शिविर का संचालन 26 फरवरी तक जारी रहेगा। वहीं पुलिस महानिरीक्षक प्रवीण कुमार ने बताया कि भीड़ को देखते हुए यातायात परिवर्तन किया गया है और राजमार्ग पर बड़े वाहनों को रोक दिया गया है। नगर आयुक्त संतोष शर्मा ने बताया कि लगभग 30 हजार श्रद्धालुओं के ठहरने का इंतजाम किया गया है। अपर पुलिस महानिदेशक (जोन लखनऊ) एसबी शिरोडकर भी बुधवार को तैयारियों के मद्देनजर अयोध्या पहुंचे और स्नान के दौरान श्रद्धालुओं की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उनके साथ पुलिस उपमहानिरीक्षक (देवी पाटन मंडल) अमित पाठक भी मौजूद रहे। वहीं मंडलायुक्त गौरव दयाल व पुलिस महानिरीक्षक प्रवीण कुमार ने नियंत्रण कक्ष से प्रमुख स्थलों का जायजा लिया। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए बुधवार को 16,300 करोड़ रुपये के 'राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन' (एनसीएमएम) को स्वीकृति दी। इस मिशन को अगले सात वर्षों में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से 18,000 करोड़ रुपये का निवेश भी मिलने की संभावना है। देश के भीतर और अपतटीय स्थानों पर महत्वपूर्ण खनिजों की खोज को बढ़ावा देने पर यह निवेश किया जाएगा। तांबा, लिथियम, निकेल, कोबाल्ट और दुर्लभ पृथ्वी खनिज जैसे महत्वपूर्ण खनिज तेजी से बढ़ती हरित ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के विकास में अहम भूमिका निभाएंगे। पवन टर्बाइन और बिजली नेटवर्क से लेकर इलेक्ट्रिक वाहनों और बैटरी निर्माण तक में इनका इस्तेमाल कच्चे माल के तौर पर बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में यह मिशन शुरू करने का फैसला किया गया। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद संवाददाताओं को इस फैसले की जानकारी दी। वैष्णव ने कहा कि एनसीएमएम का उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों के आयात पर देश की निर्भरता को कम करना और इस मामले में आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा, "इस मिशन के तहत 24 महत्वपूर्ण खनिजों को चिह्नित किया गया है। इसके लिए 16,300 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।" राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन के तहत महत्वपूर्ण खनिजों के अन्वेषण, खनन, प्रसंस्करण और उत्पादन बंद हो चुके उत्पादों से इन खनिजों की वसूली जैसे मूल्य शृंखला से जुड़े सभी चरण शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि मिशन के तहत महत्वपूर्ण खनिजों के प्रोत्साहन के लिए एक व्यापक योजना तैयार की गई है। सरकार को उम्मीद है कि यह मिशन देश के भीतर और इसके अपतटीय क्षेत्रों में महत्वपूर्ण खनिजों की खोज को तेज करेगा। इस बीच खान मंत्रालय ने एक विज्ञप्ति में कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल की तरफ से इस मिशन के लिए आवंटित 16,300 करोड़ रुपये के अलावा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के भी इसमें अगले सात वर्षों में 18,000 करोड़ रुपये का निवेश करने की संभावना है। इसका उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों की खनन परियोजनाओं के लिए नियामकीय मंजूरी की प्रक्रिया को त्वरित बनाना है। इसके अलावा मिशन महत्वपूर्ण खनिजों के अन्वेषण के लिए वित्तीय प्रोत्साहन देगा और इन संसाधनों को 'ओवरबर्डन' और 'टेलिंग्स' से दोबारा निकालने की गतिविधि को बढ़ावा देगा। 'ओवरबर्डन' मिट्टी और चट्टान की वह परत होती है जिसे खनिजों तक पहुंचने के लिए हटाया जाता है। वहीं 'टेलिंग्स' वे पदार्थ होते हैं जो खनिजों को निकालने के बाद या बाद में बचे रह जाते हैं। वैष्णव ने कहा कि एनसीएमएम का उद्देश्य भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों और निजी क्षेत्र की कंपनियों को विदेशों में महत्वपूर्ण खनिज परिसंपत्तियों का अधिग्रहण करने और संसाधन समृद्ध देशों के साथ व्यापार बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना है। यह मिशन देश के भीतर महत्वपूर्ण खनिजों के भंडार के विकास का भी प्रस्ताव करता है। मिशन में खनिज प्रसंस्करण पार्कों की स्थापना और महत्वपूर्ण खनिजों के पुनर्चक्रण का समर्थन करने के प्रावधान भी शामिल हैं। इसमें महत्वपूर्ण खनिज प्रौद्योगिकियों में शोध को बढ़ावा देने और उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है। एनसीएमएम अपने उद्देश्यों को पाने के लिए संबंधित मंत्रालयों, सार्वजनिक उपक्रमों, निजी कंपनियों और अनुसंधान संस्थानों के साथ मिलकर काम करेगा। सरकार ने महत्वपूर्ण खनिजों की खोज और खनन को बढ़ावा देने के लिए 2023 में खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 में संशोधन किया था। इस संशोधन के बाद रणनीतिक महत्व वाले खनिजों के 24 ब्लॉकों की नीलामी की गई। इसके साथ भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) ने पिछले तीन वर्षों में महत्वपूर्ण खनिजों के लिए 368 अन्वेषण परियोजनाएं शुरू की हैं जिनमें से 195 परियोजनाएं इस समय चल रही हैं। अगले वित्त वर्ष में जीएसआई विभिन्न महत्वपूर्ण खनिजों के लिए 227 परियोजनाएं शुरू करेगा।
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भोपाल. महाकुंभ के लिए हजारों श्रद्धालुओं को ले जा रहे कई वाहन बुधवार को प्रयागराज में भारी भीड़ के कारण मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा पर ही फंस गए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, मध्य प्रदेश के रीवा जिले में फंसे श्रद्धालुओं के लिए भोजन और आवास का इंतजाम कर दिया गया है। रीवा शहर उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से 130 किमी दूर स्थित है।
यादव ने कहा कि बुधवार को मौनी अमावस्या के अवसर पर देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु पवित्र स्नान करने के लिए प्रयागराज पहुंच रहे हैं। उन्होंने बताया कि त्योहार के मद्देनजर रीवा जिले में मध्य प्रदेश-उत्तर प्रदेश सीमा पर श्रद्धालुओं के लिए व्यापक व्यवस्था कर दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा, ''प्रयागराज में भारी भीड़ के कारण हजारों श्रद्धालुओं के वाहन आज रीवा जिले के चाकघाट थाना क्षेत्र की सीमा पर फंस गये हैं।'' उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और श्रद्धालुओं के लिए भोजन और आवास की उचित व्यवस्था का ध्यान रख रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, ''इसके साथ ही स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के लिए डॉक्टरों की एक टीम भी मौके पर उपलब्ध करायी गयी है.'' यादव ने श्रद्धालुओं से धैर्य बनाए रखने और प्रशासन के दिशानिर्देशों का पालन करने की अपील की। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के तहत अब तक 8.5 करोड़ से ज्यादा लोगों को ₹1.2 लाख करोड़ का मुफ्त इलाज मिल चुका है। 2018 में शुरू हुई यह दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना बन चुकी है। इसके तहत गरीब और निम्न-मध्यम वर्गीय परिवारों को हर साल ₹5 लाख तक का मुफ्त इलाज मिलता है। यह योजना शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों के जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान करती है ताकि वे महंगे इलाज के कारण कर्ज में न डूबें।
29 जनवरी तक तमिलनाडु में सबसे ज्यादा लोग इस योजना का लाभ उठा चुके हैं जहां 90.49 लाख लोगों को मुफ्त इलाज मिला है। इसके बाद कर्नाटक (66.04 लाख), राजस्थान (57.41 लाख), केरल (54.64 लाख), आंध्र प्रदेश (49.67 लाख) और गुजरात (45.46 लाख) का स्थान है। लक्षद्वीप में सबसे कम सिर्फ 780 लोगों ने इस योजना का लाभ लिया है।PM -JAY की सबसे खास बात यह है कि इसमें परिवार के सदस्यों की संख्या या उम्र की कोई सीमा नहीं है। परिवार का कोई भी सदस्य इस योजना का लाभ उठा सकता है। इस योजना के तहत इलाज से जुड़ा हर खर्च कवर किया जाता है, जैसे दवाइयां, जांच, डॉक्टर और सर्जन की फीस, आईसीयू और अस्पताल में भर्ती होने का खर्च यहां तक कि मरीज को छुट्टी मिलने के बाद 15 दिनों तक फॉलो-अप इलाज भी मुफ्त दिया जाता है।अब तक सरकार ने 36.54 करोड़ से ज्यादा आयुष्मान कार्ड जारी किया है ताकि लोगों को आसानी से मुफ्त इलाज मिल सके। सबसे ज्यादा कार्ड उत्तर प्रदेश (5.19 करोड़) में जारी किए गए हैं जबकि सबसे कम लक्षद्वीप (35,343) में दिए गए हैं। फिलहाल 31,077 सरकारी और निजी अस्पताल इस योजना के तहत मरीजों का इलाज कर रहे हैं। वरिष्ठ नागरिकों को और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 अक्टूबर को आयुष्मान वय वंदना योजना शुरू की। इस नई योजना के तहत बुजुर्गों को हर साल अलग से ₹5 लाख तक का मुफ्त इलाज मिलेगा। इस योजना के चलते लाखों परिवारों को बड़ी राहत मिली है और यह भारत में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। -
नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को सऊदी अरब में सड़क दुर्घटना में नौ भारतीय नागरिकों की मौत पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने पीड़ितों के परिवारों को पूर्ण सहायता का आश्वासन दिया।
पीड़ित परिवारों को पूर्ण सहायता प्रदान करने का दिया आश्वासनविदेश मंत्री जयशंकर ने एक्स पर लिखा, “इस दुर्घटना और जानमाल के नुकसान के बारे में जानकर दुख हुआ। जेद्दा में हमने महावाणिज्यदूत से बात की, जो संबंधित परिवारों के संपर्क में हैं। वह इस दुखद स्थिति में उन्हें पूरा सहयोग दे रहे हैं।” इससे पहले, जेद्दा में भारत के महावाणिज्य दूतावास ने जानकारी दी कि यह दुर्घटना सऊदी अरब के पश्चिमी क्षेत्र में जीजान के पास हुई। महावाणिज्य दूतावास मक्का, मदीना, यानबू, ताइफ, तबुक, कुनफुदा, अलबहा, आभा, जीजान और नजरान शहरों को भी कवर करता है।हमारी संवेदनाएं प्रभावित परिवारों के साथ हैमहावाणिज्य दूतावास ने सोशल मीडिया पर पोस्ट में कहा गया, “हमारी संवेदनाएं प्रभावित परिवारों के साथ हैं। जेद्दा में भारतीय महावाणिज्य दूतावास पूरी सहायता प्रदान कर रहा है और अधिकारियों तथा परिवारों के संपर्क में है। हम घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं। आगे की पूछताछ के लिए एक समर्पित हेल्पलाइन स्थापित की गई है।” साथ ही संबंधित परिवारों की मदद के लिए विशेष रूप से स्थापित चार हेल्पलाइन नंबरों का विवरण दिया गया है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए लोगों से 5 फरवरी को होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा के नेतृत्व वाली डबल इंजन वाली सरकार के लिए वोट करने का आग्रह किया।
उन्होंने मतदाताओं से भाजपा को एक मौका देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “आपने मुझे पिछले 25 सालों में काम करने का मौका नहीं दिया। आपने 25 साल तक कांग्रेस और आप को देखा है, अब कमल को मौका दीजिए। जैसे परिवार का मुखिया अपने प्रियजनों का ख्याल रखता है, वैसे ही मैं आपका ख्याल रखूंगा। भाजपा का ट्रैक रिकॉर्ड दिखाता है कि हम अपने वादों को पूरा करते हैं।”भाजपा के चुनावी वादों पर तेजी से कार्रवाई का आश्वासन देते हुए पीएम मोदी ने घोषणा की, “8 फरवरी के बाद दिल्ली में भाजपा सरकार अपने सभी वादों को समयबद्ध तरीके से पूरा करेगी। यह ‘मोदी की गारंटी’ है। आज, ‘मोदी की गारंटी’ का मतलब है सभी गारंटियों को पूरा करने की गारंटी।” उन्होंने प्रमुख मुद्दों को संबोधित करके दिल्ली के निवासियों को राहत पहुंचाने का वादा किया।आज पूरी दिल्ली कह रही है- ‘5 फरवरी आएगी, AAP-दा जाएगी, भाजपा आएगी’उन्होंने कहा, “दिल्ली को ऐसी सरकार चाहिए जो गरीबों के लिए घर बनाए, शहर का आधुनिकीकरण करे, हर घर में पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करे और उन्हें टैंकर माफियाओं से मुक्त करे। इसलिए आज पूरी दिल्ली कह रही है, ‘आपदा जाएगी, भाजपा आएगी’।”हर नागरिक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में कर रहा काम‘विकसित भारत’ के विजन पर रोशनी डालते हुए पीएम मोदी ने कहा, “हर नागरिक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में काम कर रहा है। इसके लिए यह जरूरी है कि राजधानी विकास का मॉडल बने। लेकिन आज दिल्ली की हालत देखकर क्या आपको लगता है कि यह हासिल हो सकता है? मुझे कुछ कहने की जरूरत नहीं है, दिल्लीवासी खुद ही हर दिन अपनी पीड़ा व्यक्त करते हैं।”पीएम मोदी ने कहा, आप-दा वाले कह रहे हैं कि हरियाणा वाले दिल्ली के पानी में जहर मिलाते हैं। ये सिर्फ हरियाणा का नहीं बल्कि भारतीयों का अपमान है, हमारे संस्कारों का अपमान, हमारे चरित्र का अपमान है। ये वो देश है, जहां पानी पिलाना धर्म माना जाता है। इस देश के लोगों पर ऐसा झूठा आरोप कि कुछ भी बोल रहे हैं। मुझे पक्का विश्वास है कि ऐसी ओछी बाते करने वालों को दिल्ली इस बार सबक सिखाएगी। इन आप-दा वालों की लुटिया यमुना जी में ही डूबेगी।पीएम मोदी ने महाकुंभ भगदड़ पर भी जताया दुखघोंडा निर्वाचन क्षेत्र में विशाल रैली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने महाकुंभ भगदड़ पर भी दुख जताया। उन्होंने कहा, “हमने आज की घटना में कुछ लोगों को खो दिया है और कुछ गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। मैं प्रभावित परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।” प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया कि वे उत्तर प्रदेश सरकार के साथ लगातार संपर्क में हैं और महाकुंभ में अमृत स्नान अब सामान्य रूप से शुरू हो गया है।रैली में एक भावुक क्षण में, पटपड़गंज विधानसभा से भाजपा उम्मीदवार रविंदर सिंह नेगी ने प्रधानमंत्री मोदी के पैर छुए, और जवाब में, प्रधानमंत्री ने भी वही किया, जिससे भीड़ की तालियां बज उठीं। प्रधानमंत्री मोदी ने भारी भीड़ का आभार व्यक्त करते हुए कहा, “यह दृश्य दिल्ली के मूड और उसके जनादेश के संदेश को दर्शाता है। दिल्ली बदल रही है। झूठे वादे अब नहीं चलेंगे। लूट और झूठ नहीं चलेगा। दिल्ली के लोग एक डबल इंजन वाली भाजपा सरकार चाहते हैं जो गरीबों के कल्याण और शहर के विकास दोनों को सुनिश्चित करे।” - प्रयागराज । प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ मेले में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। उत्तर प्रदेश सरकार के मुताबिक आज बुधवार दोपहर 12 बजे तक 42 लाख 40 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम में स्नान किया। यह दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि मौनी अमावस्या के अवसर पर यह दूसरा अमृत स्नान है।हालांकि, सुबह के समय भारी भीड़ के कारण भगदड़ जैसी स्थिति बन गई जिससे कई लोग घायल हो गए। सुरक्षा कारणों से संतों की शाही स्नान शोभायात्रा को कुछ समय के लिए रोक दिया गया। इसके बावजूद संत और श्रद्धालु छोटे-छोटे समूहों में संगम स्नान के लिए पहुंच रहे हैं। पंचायती निरंजनी अखाड़े के साधु चिदानंद पुरी ने कहा, “अचानक हुई इस घटना की वजह से हमारे अखाड़े की शोभायात्रा नहीं निकल सकी। अब हम छोटे-छोटे समूहों में संगम स्नान कर रहे हैं।”केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की। उन्होंने सोशल माडिया प्लेटफाॅर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “महाकुंभ में हुई इस दुखद घटना से मैं बहुत दुखी हूं। जिन्होंने अपनों को खोया है, उनके प्रति मेरी संवेदनाएं। घायलों को उचित इलाज मिल रहा है और मैं लगातार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रशासन से संपर्क में हूं।”वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस घटना पर शोक व्यक्त करते हुए कहा, “प्रयागराज महाकुंभ में हुई दुर्घटना बहुत दुखद है। जिन श्रद्धालुओं ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके प्रति मेरी गहरी संवेदना। मैंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बात की है और प्रशासन पीड़ितों की हर संभव मदद में लगा हुआ है।”महाकुंभ में आगे भी महत्वपूर्ण स्नान तिथियां रहेंगी जिनमें 3 फरवरी (बसंत पंचमी), 12 फरवरी (माघी पूर्णिमा) और 26 फरवरी (महाशिवरात्रि) शामिल हैं। प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं से सुरक्षा नियमों का पालन करने की अपील की है ताकि आगे कोई दुर्घटना न हो और महाकुंभ का आयोजन सुचारू रूप से चलता रहे।
- मुंबई. कार्य-जीवन संतुलन बनाने पर बहस और एलएंडटी के चेयरमैन एस.एन. सुब्रह्मण्यन के सप्ताह में 90 घंटे काम करने की टिप्पणी के बीच एक सर्वेक्षण में शामिल 78 प्रतिशत कर्मचारियों ने परिवार को प्राथमिकता देने की बात कही। वैश्विक स्तर पर नौकरियों की जानकारी देने वाली वेबसाइट इनडीड की ‘फ्यूचर करियर रेजोल्यूशन' रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय कर्मचारियों की प्राथमिकताओं में महत्वपूर्ण बदलाव आया है, जिसमें लगभग पांच में से चार (78 प्रतिशत) ने कहा कि वे 2025 में करियर में उन्नति के बजाय जीवनसाथी, बच्चों और माता-पिता के साथ समय बिताने को प्राथमिकता देना चाहते हैं। इसमें कहा गया, कर्मचारी कम तनाव चाहते हैं और मानसिक स्वास्थ्य पर अधिक ध्यान देना चाहते हैं। साथ ही अच्छी तनख्वाह वाली ऐसी नौकरी चाहते हैं जिससे वे जीवन का आनंद उठा सकें और जिसमें परिवार तथा व्यक्तिगत हितों के लिए लचीलापन हो। इंडीड के विपणन निदेशक (ऑस्ट्रेलिया, भारत और सिंगापुर) राचेल टाउनस्ले ने कहा, ‘‘ हम निश्चित रूप से भारतीय कामगारों के लिए महत्वपूर्ण चीजों में बदलाव देख रहे हैं। अधिक से अधिक लोग हमें बता रहे हैं कि वे काम और घरेलू जीवन के बीच बेहतर संतुलन बनाना चाहते हैं। हालांकि, अधिक कमाई करना महत्वपूर्ण है, लेकिन अधिकतर लोगों के लिए अच्छे करियर का मतलब तरक्की से नहीं बल्कि सुरक्षित महसूस करने व उचित भुगतान पाने से है। '' रिपोर्ट दिसंबर, 2024 से जनवरी, 2025 के बीच इंडीड की पूर्वानुमान विश्लेषण प्रणाली वालूवॉक्स द्वारा किए गए सर्वेक्षण पर आधारित है। इसमें सिंगापुर, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के 6,126 कर्मचारियों और नौकरी चाहने वालों से संपर्क किया गया। इसमें भारत के 2,507 लोग शामिल थे। इसमें पाया गया कि बदलती प्राथमिकताओं के साथ-साथ भारतीय कर्मचारी नौकरी बाजार के प्रति भी आशावादी बने हुए हैं। रिपोर्ट में कहा गया, 55 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने उभरते क्षेत्रों और उद्योगों में अवसरों के विस्तार पर विश्वास व्यक्त किया है। इसमें शामिल भारतीयों में से 59 प्रतिशत से अधिक कर्मचारियों को नियुक्ति प्रक्रियाओं में भी बदलाव की उम्मीद है, जिसमें पारंपरिक डिग्री-आधारित योग्यता की तुलना में कौशल-आधारित भर्ती पर अधिक ध्यान दिया जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया, यह प्रवृत्ति प्रौद्योगिकी तथा कृत्रिम मेधा (एआई) जैसे उभरते उद्योगों में नौकरी की बढ़ती मांग को दर्शाती है, जहां व्यावहारिक विशेषज्ञता तथा व्यावहारिक कौशल अक्सर औपचारिक शैक्षिक योग्यता से अधिक महत्वपूर्ण होते हैं।
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नयी दिल्ली. कोविड-19 महामारी के दौरान सरकारी स्कूलों में नामांकन में देखी गई वृद्धि की स्थिति अब उलट गई है, सरकारी स्कूलों में नामांकित 6-14 वर्ष की आयु के बच्चों का अनुपात लगभग 2018 के स्तर पर वापस आ गया है। मंगलवार को जारी वार्षिक शिक्षा स्थिति रिपोर्ट (एएसईआर) की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गयी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि विद्यार्थी महामारी की वजह से लिखने-पढ़ने व सीखने की क्षमता को हुई हानि से न सिर्फ पूरी तरह उबर चुके हैं, बल्कि कुछ मामलों में प्राथमिक कक्षाओं में सीखने का स्तर पहले के स्तर से भी अधिक है। रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि 14-16 साल के आयु वर्ग के 82 प्रतिशत से अधिक बच्चे स्मार्टफोन का उपयोग करना जानते हैं, केवल 57 प्रतिशत ही शैक्षिक उद्देश्य के लिए इसका उपयोग करते हैं। रिपोर्ट में कहा गया, “कोविड-19 के दौरान सरकारी स्कूलों में नामांकन में जो वृद्धि देखी गई थी, वह उलट गई है। ग्रामीण भारत में 2006 से निजी स्कूलों में नामांकन लगातार बढ़ रहा है। निजी स्कूलों में नामांकित 6-14 वर्ष के बच्चों का अनुपात 2006 में 18.7 प्रतिशत से बढ़कर 2014 में 30.8 प्रतिशत हो गया और 2018 में उसी स्तर पर बना रहा।” इसमें कहा गया, “महामारी के वर्षों के दौरान, सरकारी स्कूलों में नामांकन में बड़ा उछाल आया और सरकारी स्कूलों में नामांकित 6-14 वर्ष के बच्चों का अनुपात 2018 में 65.6 प्रतिशत से बढ़कर 2022 में 72.9 प्रतिशत हो गया। 2024 में यह संख्या 66.8 प्रतिशत पर वापस आ गयी। सभी कक्षाओं और छात्र-छात्राओं के लिहाज से यह पूर्ण उलटफेर के साथ लगभग 2018 के स्तर पर वापस आ गया है। यह विशेष रूप से आश्चर्यजनक नहीं है क्योंकि अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों में भी सुधार हुआ है।” वार्षिक शिक्षा स्थिति रिपोर्ट (एएसईआर) 2024 एक राष्ट्रव्यापी ग्रामीण घरेलू सर्वेक्षण है, जो भारत के 605 ग्रामीण जिलों के 17,997 गांवों के 6,49,491 बच्चों के बीच किया गया। सर्वेक्षण किये गये प्रत्येक जिले में एक गैर सरकारी संगठन “प्रथम” की सहायता से एक स्थानीय संगठन या संस्था द्वारा सर्वेक्षण किया गया। कुछ राज्यों ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है और महामारी से पहले के अपने सीखने के स्तर को पार कर लिया है, जबकि अन्य अब भी पूरी तरह से उबर नहीं पाए हैं। फिर भी, लगभग सभी राज्यों ने 2022 की तुलना में सुधार दिखाया है। रिपोर्ट में कहा गया “वास्तव में, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और तमिलनाडु जैसे कम प्रदर्शन करने वाले राज्यों ने उल्लेखनीय सुधार किया है।” पहली बार, राष्ट्रव्यापी घरेलू सर्वेक्षण में डिजिटल साक्षरता पर एक अनुभाग शामिल था, जो 14-16 साल के आयु वर्ग के बड़े बच्चों पर लागू था। इसमें स्मार्टफोन की पहुंच, स्वामित्व और उपयोग पर स्वयं से पूछे गए प्रश्नों के साथ-साथ कुछ बुनियादी डिजिटल कौशल का व्यक्तिगत मूल्यांकन भी शामिल था। रिपोर्ट में कहा गया है कि “14-16 साल के आयु वर्ग के 82.2 प्रतिशत बच्चों ने बताया कि वे स्मार्टफोन का उपयोग करना जानते हैं। इनमें से 57 प्रतिशत ने बताया कि उन्होंने पिछले सप्ताह शैक्षणिक गतिविधि के लिए इसका उपयोग किया था, जबकि 76 प्रतिशत ने बताया कि उन्होंने इसी अवधि के दौरान सोशल मीडिया के लिए इसका उपयोग किया था।” रिपोर्ट में पाया गया कि पहली कक्षा में पांच वर्ष या उससे कम आयु के बच्चों का अनुपात समय के साथ घट रहा है। इसमें कहा गया है, “2018 में यह आंकड़ा 25.6 प्रतिशत था, 2022 में यह 22.7 प्रतिशत था और 2024 में राष्ट्रीय स्तर पर कक्षा-एक में कम उम्र के बच्चों का प्रतिशत अब तक के सबसे निचले स्तर 16.7 पर पहुंच गया।”
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सिंहभूम ।झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के सोनुआ थाना क्षेत्र में बुधवार सुबह पुलिस एवं सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में दो माओवादी नक्सली मारे गए हैं। इनमें एक महिला भी शामिल है। मुठभेड़ के बाद सर्च ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों के कुछ हथियार और सामान बरामद किए गए हैं।
चाईबासा के एसपी आशुतोष शेखर ने मुठभेड़ में दो नक्सलियों के मारे जाने की पुष्टि की है। इसके बाद पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी रखा गया है। मारे गए नक्सलियों की पहचान फिलहाल पुलिस ने आधिकारिक तौर पर उजागर नहीं की है, लेकिन इनमें से एक भाकपा माओवादी नक्सली संगठन का जोनल कमांडर संजय गंझू बताया जा रहा है।बताया गया कि एसपी को सूचना मिली थी कि नक्सलियों के हथियारबंद दस्ते ने पश्चिमी सिंहभूम जिले के सोनुआ थाना क्षेत्र के जंगल में कैंप कर रखा है और किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की तैयारी कर रहा है।सूचना के आधार पर जिला पुलिस बल एवं सीआरपीएफ ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। इस दौरान नक्सलियों ने उन पर गोलीबारी शुरू कर दी। जवाब में सुरक्षा बलों ने भी मोर्चा लेकर फायरिंग की।इस दौरान गोली लगने से दो नक्सलियों की मौत हो गई। बाकी नक्सली घने जंगलों में भागने में सफल रहे।ठीक आठ दिन पहले 22 जनवरी को बोकारो जिले के तेजनारायणपुर थाना क्षेत्र में पुलिस एवं सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में एक पुरुष और एक महिला नक्सली मारे गए थे। मारे गए नक्सलियों की पहचान शांति और मनोज बास्के के रूप में हुई थी। शांति गिरिडीह जिले के खुखरा थाना क्षेत्र अंतर्गत धावाटांड गांव की रहने वाली थी।सीपीआई माओवादी नक्सली संगठन में शांति का ओहदा एरिया कमांडर का था। इस मुठभेड़ में मारा गया दूसरा नक्सली मनोज भी इसी जिले के पीरटांड़ थाना क्षेत्र का निवासी था। - नयी दिल्ली. ‘इंजीनियरिंग में स्नातक योग्यता परीक्षा' (गेट) और ‘स्नातकोत्तर उपाधि हेतु संयुक्त प्रवेश परीक्षा' (जैम) के प्रयागराज केंद्रों में परीक्षा देने वाले परीक्षार्थी कुंभ मेले के कारण अब लखनऊ के केंद्रों में परीक्षा देंगे। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। ‘गेट' परीक्षा एक और दो फरवरी को होगी, वहीं ‘जैम' 2025 परीक्षा भी दो फरवरी को होनी है।‘गेट' के आयोजक संस्थान आईआईटी रुड़की और ‘जैम' के आयोजक संस्थान आईआईटी दिल्ली ने एक संयुक्त बयान में कहा, ‘‘अनेक उम्मीदवारों ने ज्ञापन देकर प्रयागराज, उत्तर प्रदेश में परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने में अपनी कठिनाई जाहिर की है क्योंकि महाकुंभ में एक और दो फरवरी को बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।'' उन्होंने कहा कि इसलिए प्रयागराज में इन परीक्षाओं के केंद्रों को अब लखनऊ में स्थानांतरित कर दिया गया है।
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नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में महाकुंभ मेला क्षेत्र में बुधवार को हुए हादसे पर पीएम मोदी ने दुख जताया है। उन्होंने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है। पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, “प्रयागराज महाकुंभ में हुआ हादसा अत्यंत दुखद है। इसमें जिन श्रद्धालुओं ने अपने परिजनों को खोया है, उनके प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। इसके साथ ही मैं सभी घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।”
इससे पहले उन्होंने सीएम योगी से फोन पर हुई बातचीत के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा, “स्थानीय प्रशासन पीड़ितों की हरसंभव मदद में जुटा हुआ है। इस सिलसिले में मैंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बातचीत की है और मैं लगातार राज्य सरकार के संपर्क में हूं।”मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी महाकुंभ हादसे को लेकर मीडिया से बात की थी। सीएम योगी ने कहा, “महाकुंभ मेला क्षेत्र में मची घटना को लेकर प्रधानमंत्री मोदी से चार बार फोन पर बात हुई है। प्रयागराज में भीड़ का भारी दबाव है और जो घटना घटी है, वह बैरिकेड को फांदने के कारण हुई है। फिलहाल हालात नियंत्रण में हैं। प्रशासन सबके सहयोग के लिए तत्पर है। “उन्होंने श्रद्धालुओं से संयम बनाए रखने की अपील की। बोले, “मैं लोगों से अपील करूंगा कि वह प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और अफवाहों पर ध्यान न दें। आज करीब 9 से 10 करोड़ श्रद्धालु प्रयागराज में हैं। मैं सभी से कहूंगा कि वह जिस भी घाट पर हैं, वहीं स्नान करें। संगम नोज पर स्नान जरूरी नहीं हैं, सभी श्रद्धालु वहां जाने से बचें। सकुशल स्नान कराना हमारी प्राथमिकता है। प्रयागराज में भीड़ का भारी दबाव है, इसलिए पहले श्रद्धालु स्नान करेंगे और उसके बाद ही संत स्नान करेंगे।”मुख्यमंत्री ने आगे कहा, ” विभिन्न अखाड़ों के संतों ने विनम्रतापूर्वक कहा है कि श्रद्धालु पहले पवित्र स्नान करें और भीड़ कम होने पर अखाड़े पवित्र स्नान के लिए आगे बढ़ेंगे। संगम नोज, नाग वासुकी मार्ग और संगम मार्ग पर काफी भीड़ है। मेरी श्रद्धालुओं से अपील है कि वे किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें। पूरे कुंभ क्षेत्र में घाट बनाए गए हैं, श्रद्धालुओं को सिर्फ संगम नोज की ओर जाने की जरूरत नहीं है। श्रद्धालुओं को अपने नजदीकी घाटों पर पवित्र स्नान करना चाहिए। हम घायल व्यक्तियों का उचित उपचार सुनिश्चित कर रहे हैं। रेलवे ने प्रयागराज क्षेत्र के विभिन्न स्टेशनों से श्रद्धालुओं को उनके गंतव्य तक वापस ले जाने के लिए विशेष रेलगाड़ियों का आयोजन किया है।”बता दें कि गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती नदियों के पवित्र संगम से लगभग एक किलोमीटर दूर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब बैरिकेड्स टूट गए और इसके कारण भीड़ में भगदड़ मच गई। -
नई दिल्ली। भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने बुधवार सुबह आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपण यान जीएसएलवी-एफ15 के जरिए अपना 100वां मिशन, एनवीएस-02 नेविगेशन सैटेलाइट लॉन्च किया है। अपनी इस कामयाबी को लेकर इसरो ने कहा कि भारत अंतरिक्ष नेविगेशन में नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया।
जीएसएलवी-एफ15 रॉकेट ने सुबह 6:23 बजे उड़ान भरी, जिसमें एनवीएस-02 नेविगेशन सैटेलाइट अंतरिक्ष में पहुंचाया गया। यह लॉन्च इसरो की एक बड़ी उपलब्धि है, जो देश की अंतरिक्ष अनुसंधान क्षमताओं को दर्शाती है। इस मौके पर इसरो की अंतरिक्ष यात्रा के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक पड़ाव की बात करना भी अहम होगा। जी हां, अंतरिक्ष में इसरो ने आज सेंचुरी जरूर लगाई है लेकिन शुरुआत से लेकर अब तक इसरो की अंतरिक्ष यात्रा के कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक पड़ाव रहे हैं जिनके बारे में यहां बताया गया है।ये हैं इसरो के अंतरिक्ष यात्रा के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक पड़ाव :-1962 में अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए आर के रामनाथन भारतीय राष्ट्रीय समिति का गठन किया गया।– भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक विक्रम साराभाई के मार्गदर्शन में शुरुआत हुई।– 1963 में ऊपरी वायुमंडलीय क्षेत्र में दबाव को समझने के उद्देश्य से पहला रॉकेट लॉन्च किया।– 1975 में भारत में पूरी तरह से डिजाइन किया गया पहला भारतीय उपग्रह आर्यभट्ट रूस से लॉन्च किया गया।– 1977 में दूरसंचार के लिए पहला उपग्रह बनाया गया।– 1979 में पहला रिमोट सेंसिंग उपग्रह भास्कर-1 लॉन्च किया गया।– 1980 में भारत का पहला सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल बनाया गया।– 1988 में पहला भारतीय रिमोट सेंसिंग (आईआरएस) उपग्रह आईआरएस-1ए के साथ प्रक्षेपित किया गया।– 2008 में भारत का पहला मानवरहित चंद्र मिशन चंद्रयान-1 सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया– 2009 में सभी मौसमों में काम करने की क्षमता वाला रडार इमेजिंग सैटेलाइट RISAT-2 लॉन्च किया गया।– 2013 में मंगल ऑर्बिट मिशन प्रक्षेपित किया, जिसका नाम मंगलयान रखा गया।– 2017 में इसरो ने एक लॉन्चर से 104 उपग्रह प्रक्षेपित करने का रिकॉर्ड बनाया।– 2019 में चंद्रयान-2 लॉन्च चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाले पहले अंतरिक्ष मिशन के रूप में लॉन्च– 2023 में इसरो ने चंद्रयान-3 के सफल प्रक्षेपण के साथ एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की।– 2024 में इसरो ने SPADEX यानी स्पेस डॉकिग एक्सपेरिमेंट मिशन लॉन्च किया।– जनवरी 2024 में इसरो ने अपना स्पेस डॉकिंग एक्सपेरिमेंट (SPADEX) सफलतापूर्वक पूरा किया।– भारत सैटेलाइट डॉकिंग हासिल करने वाला चौथा देश बना। -
प्रयागराज। प्रयागराज महाकुंभ में भगदड़ के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पहला बयान सामने आया है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि मां गंगा में स्नान करने के लिए कई घाट बनाए गए हैं। जो श्रद्धालु जिस घाट के पास हैं, वहीं स्नान करें और संगम नोज की ओर जाने की कोशिश न करें। उन्होंने कहा कि सभी श्रद्धालु शांति बनाए रखें और कुंभ में व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, " महाकुंभ में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ है। प्रयागराज में आज लगभग 8-10 करोड़ श्रद्धालु मौजूद हैं। कल लगभग 5.5 करोड़ श्रद्धालुओं ने महाकुंभ का स्नान किया था। श्रद्धालुओं के संगम नोज पर जाने से भारी दबाव बना हुआ है। रात 1-2 बजे के बीच अखाड़ा मार्ग पर बैरिकेड्स को फांद कर आने में कुछ श्रद्धालु गंभीर रूप से घायल हुए हैं। उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया है। कुछ श्रद्धालु गंभीर रूप से घायल हैं। प्रशासन स्थानीय स्तर पर श्रद्धालुओं को सकुशल स्नान कराने के लिए लगातार लगा हुआ है... प्रधानमंत्री मोदी प्रात: से लगभग 4 बार श्रद्धालुओं के बारे में जानकारी ले चुके हैं। भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी प्रात: से ही श्रद्धालुओं के बारे में लगातार जानकारी ले रहे हैं... प्रयागराज में हालात वर्तमान में नियंत्रण में हैं लेकिन भीड़ का दबाव बहुत बना हुआ है। संतों के साथ भी मेरी बात हुई है, उन्होंने बड़ी विनम्रता से कहा है कि पहले श्रद्धालु स्नान करके निकल जाएंगे उसके बाद ही हम स्नान के लिए संगम की तरफ करेंगे। सभी अखाड़े इसके लिए सहमत हैं। लोगों से अपील है कि अफवाह पर ध्यान न दें। संयम से काम लें। ये आयोजन लोगों का है। प्रशासन उनकी सेवा के लिए लगा है। सरकार मजबूती के साथ हर प्रकार का सहयोग करने के लिए तत्पर है... आवश्यक नहीं है कि संगम नोज की तरफ ही आएं। 15-20 किलोमीटर के दायरे में अस्थायी घाट बनाए गए हैं, आप जहां पर हैं वहीं पर स्नान करें।"
प्रयागराज में बुधवार को महाकुंभ के दौरान संगम पर स्नान के लिए उमड़ी भारी भीड़ के बीच भगदड़ मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, वहां अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया। कई लोगों के घायल होने की आशंका है। बुधवार को मौनी अमावस्या के मौके पर लाखों श्रद्धालु पवित्र स्नान के लिए पहुंचे थे, लेकिन भीड़ अचानक बेकाबू हो गई, जिससे यह हादसा हुआ।महाकुंभ में भगदड़ की खबर पर, विशेष कार्याधिकारी कुंभ मेला प्राधिकरण अकांक्षा राणा ने कहा, “संगम नोज पर बैरियर टूटने के बाद भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई। इस घटना में कुछ लोग घायल हुए हैं, जिनका इलाज चल रहा है। कोई भी गंभीर नहीं है…” -
महाकुम्भ नगर। महाकुंभ में मौनी अमावस्या के पवित्र अवसर पर करोड़ों श्रद्धालु प्रयागराज पहुंच रहे हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करने के लिए मेला प्रशासन ने खास तैयारी की है। श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की अफवाहों से बचने और सतर्क रहने की सलाह दी गई है। इसके अलावा आपात स्थिति में मेला पुलिस, ट्रैफिक पुलिस और स्पेशल डॉक्टरों की टीम श्रद्धालुओं की देखरेख के लिए 24 घंटे तैनात की गई है।
अमृत स्नान मौनी अमावस्या को लेकर विशेष तैयारियांवरिष्ठ पुलिस अधीक्षक महाकुंभ नगर राजेश द्विवेदी ने बताया कि दूसरे अमृत स्नान मौनी अमावस्या को लेकर विशेष तैयारियां की गई हैं। खासकर श्रद्धालुओं को जागरूक किया जा रहा है कि वो सजग रहें और किसी तरह की अफवाह में न फंसें। व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस का सहयोग करें और किसी भी तरह की समस्या में पुलिस का सहयोग लें। पुलिस और प्रशासन श्रद्धालुओं की मदद के लिए 24 घंटे उपलब्ध हैं।प्रशासन के अनुसार, आपको क्या करना है--संगम घाट पहुंचने के लिए अलग-अलग लेन से ही जाएं।-गंगा स्नान के लिए जाते समय अपनी लेन में बने रहें।-आने वाले श्रद्धालु स्नान और दर्शन करने के बाद सीधे पार्किंग की ओर जाएं।-मंदिरों में दर्शन के लिए जाते समय अपनी लेन में बने रहें, वहां से अपने गंतव्य स्थान के लिए प्रस्थान करें।-जरूरत पड़ने पर पुलिस का सहयोग लें, पुलिस आपकी मदद के लिए है।-ट्रैफिक पुलिस भी आपकी मदद के लिए तत्पर है।-स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर नजदीकी सेक्टर में बने हॉस्पिटल में जांच कराएं।-बैरिकेडिंग और पांटून पुलों पर धैर्य बनाए रखें, जल्दबाजी और धक्कामुक्की से बचें।-कागज, जूट या इको फ्रेंडली बर्तनों और कुल्हड़ों का ही प्रयोग करें।-सभी घाट संगम घाट हैं, जिस घाट पर पहुंच जाएं, वहीं स्नान करें।क्या नहीं करना है--श्रद्धालु कहीं एक साथ एक स्थान पर न रुकें।-किसी भी स्थिति में आने और जाने वाले श्रद्धालु आमने-सामने न पड़ें।-मेले में किसी के द्वारा फैलाई गई अफवाहों से बचें।-सोशल मीडिया पर फैलाए गए किसी भी भ्रम को सच न मानें।-मंदिरों में दर्शन के लिए किसी भी प्रकार की हड़बड़ी न दिखाएं।-होल्डिंग एरिया के बजाय रास्तों पर न रुकें, किसी तरह का अवरोध न उत्पन्न करें।-व्यवस्था या सुविधा को लेकर किसी के भी बहकावे में आने से बचें।-किसी प्रकार की भ्रामक खबरों को आगे बढ़ाने से बचें।-पवित्र स्नान के लिए किसी भी प्रकार की जल्दबाजी न करें।-प्लास्टिक की पन्नियों और बर्तनों के इस्तेमाल से बचें। - महाकुम्भ नगर। महाकुम्भ में पहली बार देश के तीन पीठों के शंकराचार्य एक ही मंच पर मिले और सनातन के लिए संयुक्त धर्मादेश जारी किया जिसमें देश की एकता, अखंडता, सामाजिक समरसता और सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण निर्णय किए गए। श्री शंकराचार्य शिविर, ज्योतिर्मठ बद्रिकाश्रम के प्रभारी मुकुंदानंद ब्रह्मचारी ने बताया कि इस आयोजन में श्रृंगेरी पीठ के शंकराचार्य विदुशेखर भारती जी ने कहा कि आदि गुरु शंकराचार्य जी ने लोक उद्धार के लिए एक विशिष्ट ग्रंथ प्रश्नोत्तर मल्लिका लिखी जिसमें उन्होंने स्वयं प्रश्न करके उत्तर दिया। श्रृंगेरी पीठ के शंकराचार्य ने बताया कि इस ग्रंथ में एक प्रश्न है कि माता कौन है? जिसका जवाब में आदि शंकराचार्य जी ने लिखा, ‘‘धेनु: अर्थात गो माता।'' उन्होंने कहा, ‘‘आदि शंकराचार्य जी ने अपनी मल्लिका में दिखाया है कि गो माता की क्या महिमा है। इसलिए गो माता को राष्ट्र माता घोषित करना चाहिए और इसकी विशेष रूप से रक्षा होनी चाहिए।'' तीन पीठों के शंकराचार्यों ने समवेत रूप से एक संयुक्त धर्मादेश भी जारी किया। श्रृंगेरी शारदा पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी विधु शेखर भारती जी, द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी और ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज ने परम धर्मसंसद में हिस्सा लिया और सनातन संस्कृति की रक्षा और उन्नयन के लिए 27 धर्मादेश भी जारी किए। इस अवसर पर शंकराचार्य स्वामी सदानंद ने संस्कृत भाषा के महत्व पर जोर दिया। वहीं, ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने संस्कृत भाषा के लिए बजट दिए जाने पर जोर दिया। धर्मादेश में नदियों और परिवार रूपी संस्था को बचाने के लिए सबको आगे आने का आह्वान किया और धार्मिक शिक्षा को हिंदुओं का मौलिक अधिकार बनाने पर भी जोर दिया गया।
- महाकुंभ नगर। महाकुंभ में पहली बार पूर्वोत्तर का शिविर लगाया गया है जिससे बड़ी संख्या में पूर्वोत्तर के श्रद्धालु महाकुंभ का हिस्सा बन रहे हैं। पूर्वोत्तर के सुदूर क्षेत्रों से आए 20 से अधिक संत महात्मा बुधवार को मौनी अमावस्या पर अखाड़ों के साथ पहली बार अमृत स्नान करेंगे। सेक्टर सात में प्राग्ज्योतिष क्षेत्र नाम से लगे शिविर में निर्मोही अनी अखाड़े के महामंडलेश्वर महंत केशव दास जी महाराज ने बताया, “मौनी अमावस्या पर अखाड़ों के साथ पूर्वोत्तर से 22 संत भी अमृत स्नान करेंगे। इनमें से ज्यादातर संत पहली बार अमृत स्नान करेंगे।” उन्होंने बताया कि पहली बार प्रयागराज महाकुंभ में पूर्वोत्तर का शिविर लगने से हजारों की संख्या में पूर्वोत्तर से लोग यहां आ रहे हैं। लोगों में महाकुंभ का हिस्सा बनने को लेकर भारी उत्साह है। इस शिविर में प्रभु पीतांबर देव गोस्वामी, पद्मश्री से सम्मानित चित्त महाराज समेत पूर्वोत्तर क्षेत्र के सभी प्रमुख संत शामिल हो रहे हैं। महंत केशव दास जी महाराज ने बताया कि पूर्वोत्तर को कामाख्या देवी मंदिर के लिए जाना जाता है। मेले में कामाख्या मंदिर की प्रतिकृति पहली बार स्थापित हुई है। यहां कामाख्या का जल, गंगा जल मिलाकर भक्तों को दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पूर्वोत्तर में वैष्णव परंपरा अति प्राचीन है जो नामघर परंपरा से संचालित होती है। पहली बार यहां कुंभ में नामघर की स्थापना की गई है। जिस प्रकार उत्तर भारत में मंदिर होते हैं, उसी तरह, पूर्वोत्तर में नामघर होते हैं। यह परंपरा शंकरदेव जी द्वारा विकसित की गई। इस नामघर के लिए दीपक जलाने, कीर्तन आदि का एक विधान है और उसी विधान के साथ यहां नामघर की स्थापना हुई है। इसमें श्रीमंत शंकरदेव महापुरुष द्वारा रचित भागवत का अखंड पाठ होगा। उन्होंने इस शिविर के बारे में बताया, “नॉर्थ ईस्ट नाम अंग्रेजों का दिया हुआ है। इसका पुराना नाम प्राग्ज्योतिषपुर है। इसलिए इस शिविर का नाम प्राग्ज्योतिष क्षेत्र रखा गया है।” महंत केशव दास जी महाराज ने बताया कि इस शिविर में बैंबू डांस, अप्सरा नृत्य, राम विजय भावना का भी प्रदर्शन होगा। उन्होंने कहा, ‘‘इन सांस्कृतिक तत्वों को एक साथ महाकुंभ में पहली बार प्रस्तुत किया जा रहा है।'' file photo
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देवरिया (उप्र) .देवरिया जिले के महुआ डीह थाना अंतर्गत हेतिमपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक ट्रक की चपेट में आने से मोटरसाइकिल सवार चार युवकों की मौत हो गई। अपर पुलिस अधीक्षक दीपेंद्र नाथ चौधरी ने मंगलवार को बताया कि सोमवार रात चारों युवक एक ही मोटरसाइकिल पर सवार होकर कसया से हाटा की तरफ जा रहे थे और उसी दौरान एक ट्रक की चपेट में आने से चारों की मौके पर मौत हो गई। अपर पुलिस अधीक्षक ने बताया कि मृतकों की पहचान नितेश (23), अतुल कुमार सिंह (24), पिंटू कुमार गौड़ (22) तथा अंकित गौड़ (24) के तौर पर हुई है। उन्होंने कहा कि किसी ने भी हेलमेट नहीं पहना था।
चौधरी ने कहा कि इस मामले में अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है, तथा ट्रक का चालक फरार है जिसकी की तलाश की जा रही है।


















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