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नयी दिल्ली. उत्तरी दिल्ली के बुराड़ी इलाके में चार मंजिला इमारत ढहने से दो लड़कियों समेत तीन लोगों की मौत हो गयी। पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि ‘ऑस्कर पब्लिक स्कूल' के पास नवनिर्मित इमारत सोमवार शाम ढह गई थी। अब तक, 12 लोगों को बचाया गया है। पुलिस के अनुसार दो मृतकों की पहचान साधना (17) और राधिका (7) के रुप में हुई है जबकि तीसरे व्यक्ति की अब तक पहचान नहीं हो सकी है। उसने बताया कि बचाव अभियान जारी है और मलबे में और लोगों के फंसे होने की आशंका है।
दिल्ली पुलिस ने सोमवार की रात एक बयान में कहा कि उसे शाम लगभग सात बजे इमारत ढहने की सूचना मिली। उसने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही बचान अभियान शुरू किया गया। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि बचाव अभियान जारी है और पुलिस, दमकल विभाग, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल समेत कई एजेंसी के अधिकारी घटनास्थल पर मौजूद है। पुलिस ने इलाके की घेराबंदी की है औऱ आसपास के लोगों से पूछताछ कर पता कर रही है कि इमारत के भीतर कितने लोग अब भी फंसे हुए हैं। उन्होंने कहा, ''हमने मामले की जांच शुरू कर दी है और कई टीमें गठित की गई हैं। इमारत के मालिक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है।" घटना के तुरंत बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा कि प्रभावित लोगों को सहायता प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा, "बुराड़ी में इमारत ढहने की घटना बेहद दुखद है। मैंने त्वरित राहत और बचाव कार्य सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय प्रशासन से बात की है। प्रभावित लोगों को हरसंभव मदद प्रदान की जाएगी।" पूर्व मुख्यमंत्री और आप अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से कहा कि स्थानीय पार्टी विधायक को राहत एवं बचाव कार्य में सहायता करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा, "यह घटना बहुत दुखद है। बुराड़ी से हमारे विधायक संजीव झा को निर्देश दिया गया है कि वे तुरंत पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ वहां जाएं और बचाव कार्य में प्रशासन की मदद करें। साथ ही स्थानीय लोगों की हरसंभव मदद करें।" इस बीच, दिल्ली अग्निशमन सेवा प्रमुख ने मंगलवार सुबह बचाव अभियान का वीडियो जारी किया।
अग्निशमन सेवा प्रमुख अतुल गर्ग ने कहा, "कुछ कर्मी कल रात से बिना आराम किए काम कर रहे हैं। दिल्ली अग्निशमन सेवा के कर्मी मलबा हटाने और फंसे हुए लोगों को बचाने में सभी एजेंसियों की मदद कर रहे हैं। -
भुवनेश्वर. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि वह कच्चे माल का निर्यात और तैयार उत्पादों का देश में आयात स्वीकार नहीं कर सकते। साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मूल्यवर्धन देश में ही होना चाहिए। भुवनेश्वर में ‘उत्कर्ष ओडिशा, मेक इन ओडिशा कॉन्क्लेव' का उद्घाटन करते हुए मोदी ने कहा कि वह पूर्वी भारत को देश के विकास का इंजन मानते हैं और राज्य इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा, ‘‘ केवल कच्चे माल के निर्यात से देश का विकास संभव नहीं है। इसलिए हम पूरे परिवेश को बदल रहे हैं और नए दृष्टिकोण के साथ काम कर रहे हैं।'' प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘ खनिजों को यहां निकाला जाता है और उन्हें किसी अन्य देश में निर्यात किया जाता है, जहां उनका मूल्यवर्धन किया जाता है और नए उत्पाद बनाए जाते हैं। इन तैयार उत्पादों को फिर भारत वापस भेज दिया जाता है। मोदी को यह स्वीकार्य नहीं है।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि करोड़ों लोगों की आकांक्षाएं भारत को विकास के पथ पर आगे बढ़ा रही हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘ आज भारत करोड़ों लोगों की आकांक्षाओं से प्रेरित होकर विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। यह एआई (कृत्रिम मेधा) का युग है और हर कोई इसके बारे में बात कर रहा है। हालांकि, सिर्फ एआई नहीं, बल्कि भारत की आकांक्षाएं हमारे देश की शक्ति हैं। आकांक्षाएं तब बढ़ती हैं जब लोगों की जरूरतें पूरी होती हैं। पिछले दशक में देश ने करोड़ों लोगों को सशक्त बनाने का लाभ देखा है। ओडिशा भी उसी आकांक्षा का प्रतिनिधित्व करता है।'' प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘ ओडिशा उत्कृष्ट है और नए भारत की मौलिकता और आशावाद का प्रतिनिधित्व करता है। ओडिशा में अवसर हैं और यहां के लोगों ने बेहतर प्रदर्शन करने की भावना प्रदर्शित की है।'' मोदी ने कहा कि 21वीं सदी ‘कनेक्टेड इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी' की सदी है।
उन्होंने कहा, ‘‘ भारत अभूतपूर्व गति से और व्यापक स्तर पर विशेष बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रहा है। यह भारत को निवेश के लिए एक बेहतरीन गंतव्य बनाएगा।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि आसियान देशों ने ओडिशा के साथ व्यापार संबंधों को मजबूत करने में रुचि दिखाई है। उन्होंने कहा, ‘‘ मैं पूर्वी भारत को देश के विकास का इंजन मानता हूं और इसमें ओडिशा की महत्वपूर्ण भूमिका है। इतिहास बताता है कि जब भारत ने वैश्विक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया, तो पूर्वी भारत का भी इसमें महत्वपूर्ण योगदान रहा।'' प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘‘ मुझे पूरा विश्वास है कि ओडिशा बहुत जल्द विकास की उन ऊंचाइयों को छुएगा, जिसकी किसी ने कभी कल्पना भी नहीं की होगी। मुझे खुशी है कि मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी का पूरा दल राज्य के विकास को गति देने के लिए प्रतिबद्ध है।'' मोदी ने कहा कि अनुसंधान एवं नवोन्मेषण समय की मांग हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘ सरकार अनुसंधान के लिए एक जीवंत परिवेश बनाने के लिए काम कर रही है और इसके लिए एक विशेष कोष भी बनाया गया है। उद्योगों को आगे आकर सरकार के साथ मिलकर काम करना चाहिए। '' राज्य के लंबे तट का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यहां पुराने बंदरगाहों का विकास किया जा रहा है और नए बंदरगाहों का निर्माण हो रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्य में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘ आज भारत में शादी करने, भारत में इलाज कराने पर जोर है। इस जगह की प्राकृतिक सुंदरता इसके लिए अनुकूल है।'' एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि दो दिन के इस सम्मेलन में बड़े उद्योगपतियों सहित करीब 7,500 कारोबारी प्रतिनिधियों के भाग लेने की उम्मीद है। उद्घाटन समारोह में वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल, आदित्य बिड़ला समूह के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला और जिंदल स्टील एंड पावर के चेयरमैन नवीन जिंदल मौजूद थे। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
प्रधानमंत्री ने ‘मेक इन ओडिशा' प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया, जिसमें जीवंत औद्योगिक परिवेश विकसित करने में राज्य की उपलब्धियों को दिखाया गया है। बयान में कहा गया, यह सम्मेलन उद्योग जगत की हस्तियों, निवेशकों और नीति निर्माताओं के लिए एक पसंदीदा निवेश गंतव्य के रूप में ओडिशा द्वारा प्रदान किए जाने वाले अवसरों पर चर्चा करने को एक मंच के रूप में काम करेगा। इस सम्मेलन में मुख्य कार्यपालक अधिकारियों (सीईओ) और कारोबार जगत के दिग्गज लोगों के साथ गोलमेज चर्चा और क्षेत्रवार सत्र भी आयोजित किए जाएंगे। -
महाकुंभनगर/ करीब डेढ़ महीने तक चलने वाले दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन महाकुंभ मेले में कुल 40 करोड़ लोगों के जुटने की संभावना के बीच निर्बाध दूरसंचार नेटवर्क मुहैया कराने के लिए दूरसंचार कंपनियों और मेला प्रशासन ने अपने स्तर पर पूरी तैयारी की है। कुछ किलोमीटर के दायरे में एक ही दिन करोड़ों लोगों की मौजूदगी की संभावना को देखते हुए उन्हें मोबाइल फोन नेटवर्क और इंटरनेट सुविधा मुहैया कराना एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आया है। हालांकि, दूरसंचार सेवा प्रदाताओं ने महाकुंभ के सफल आयोजन की तैयारी में जुटे मेला प्रशासन के साथ मिलकर इसके पुख्ता बंदोबस्त किए हैं। दूरसंचार कंपनियों ने मेला क्षेत्र में अतिरिक्त ऑप्टिकल फाइबर बिछाने के साथ नए टावर एवं बेस ट्रांसिवर स्टेशन (बीटीएस) और सेल ऑन व्हील्स (ट्रांसपोर्टेबल टावर) भी लगाए हैं। इससे मेला क्षेत्र में मजबूत और निर्बाध कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। महाकुंभ के एकीकृत नियंत्रण एवं कमान केंद्र (आईसीसीसी) के अधिकारियों ने कहा कि आपातकालीन संचार और संकट की किसी भी स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया के लिए मेला क्षेत्र में तीन आपदा प्रबंधन केंद्र स्थापित किए गए हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘सभी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं ने लाखों श्रद्धालुओं और आगंतुकों के लिए निर्बाध संचार सुनिश्चित कराने के मकसद से यहां अपनी सेवाओं को बढ़ाया है।'' इसके अलावा दूरसंचार कंपनियों एयरटेल, बीएसएनएल, जियो और वोडाफोन आइडिया द्वारा संचालित तीन आपदा प्रबंधन केंद्र भी मेला क्षेत्र में स्थापित किए गए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘प्राकृतिक या किसी मानव-निर्मित आपदा की स्थिति में महत्वपूर्ण संचार चैनल मुहैया कराने के लिए इन केंद्रों को नवीनतम तकनीक से लैस किया गया है, जिससे उपस्थित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।'' हर 12 साल पर प्रयागराज में संगम तट पर आयोजित होने वाला महाकुंभ 13 जनवरी से शुरू होकर 45 दिन तक चलेगा। अबतक आठ करोड़ से अधिक तीर्थयात्री संगम पर पवित्र डुबकी लगा चुके हैं। बुधवार को मौनी अमावस्या के पवित्र स्नान पर 10 करोड़ और लोगों के डुबकी लगाने की उम्मीद है। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के सीमित क्षेत्र में इकट्ठा होने से उनके लिए समुचित दूरसंचार नेटवर्क मुहैया करा पाना बेहद चुनौतीपूर्ण काम है। हालत यह होती है कि कभी-कभी एक वर्गमीटर क्षेत्र में ही आधा दर्जन से अधिक लोग मौजूद होते हैं। इनमें से तमाम लोग इंटरनेट का उपयोग करने की भी कोशिश करते हैं। महाकुंभ नगर के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट विवेक चतुर्वेदी ने कहा कि श्रद्धालुओं को निर्बाध फोन कनेक्शन मिलने से कई तरह की समस्याओं का समाधान हो जाता है। उन्होंने कहा, ‘‘भीड़ में अपने प्रियजनों को खोने की चिंता कम हो जाती है क्योंकि कोई भी व्यक्ति आसानी से उनसे फोन पर बात कर सकता है क्योंकि अब मोबाइल फोन की पहुंच पहले के कुंभ की तुलना में बहुत अधिक है। इसके अलावा डिजिटल भुगतान से नकदी ले जाने की जरूरत भी कम हो जाती है।'' दूरसंचार मंत्रालय ने भी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को लोगों की भारी भीड़ का समर्थन करने के लिए उन्नत प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करने और नेटवर्क को अनुकूलित करने का निर्देश दिया था। इस पहल के तहत मेला क्षेत्र के आसपास मौजूद सरकारी भवनों पर स्थायी टावर भी लगाए गए हैं जिससे शहर में मोबाइल कनेक्टिविटी की समस्या का समाधान हो जाएगा।
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बलिया . जिले के रसड़ा कोतवाली क्षेत्र के संवरा गांव में स्थित बड़ौदा यूपी बैंक की शाखा में 21 लाख रुपये की चोरी हो गयी। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। बलिया के पुलिस अधीक्षक (एसपी) ओमवीर सिंह ने मंगलवार को बताया कि आज सुबह ‘डायल 112' के माध्यम से यह सूचना मिली कि थाना रसड़ा क्षेत्र अंतर्गत बड़ौदा यूपी बैंक की शाखा संवरा में 21 लाख रुपये की चोरी हो गयी है। उन्होंने बताया कि घटना की सूचना मिलने पर उन्होंने पुलिस अधिकारियों के साथ घटनास्थल का निरीक्षण किया। एसपी ने कहा कि घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद यह पाया गया कि बैंक की शाखा में किसी ने जबरन प्रवेश नहीं किया है। उनके मुताबिक, शाखा प्रबंधक ने बताया कि उनके ‘कैश चेस्ट' में जो पैसा था, वह गायब है। सिंह ने बताया कि ‘कैश चेस्ट' की दो चाभियां होती हैं और जब तक दोनों चाभियां ना लगे तब तक इसका ताला नहीं खुल सकता है। उन्होंने बताया कि एक चाभी कैशियर के पास तथा दूसरी चाभी प्रबंधक के पास होती है। एसपी ने कहा कि प्रथम दृष्टया घटनास्थल का निरीक्षण करने से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि बैंक शाखा के कर्मियों की मिलीभगत है। उन्होंने कहा कि इसकी जांच के लिए तीन टीमों का गठन किया गया है जिसमें अपर पुलिस अधीक्षक (उत्तरी), क्षेत्राधिकारी रसड़ा व सर्वीलांस टीम सम्मलित है। -
नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 31 जनवरी को सुबह 11 बजे लोकसभा में संसद के दोनों सदनों के संयुक्त सत्र को संबोधित करेंगी। इस संबोधन के साथ ही बजट सत्र की औपचारिक शुरुआत हो जाएगी। संसद का यह बजट सत्र दो चरणों में आयोजित किया जाएगा। पहला चरण 31 जनवरी से 13 फरवरी तक चलेगा जिसमें 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश किया जाएगा। दूसरा चरण 10 मार्च से लेकर 4 अप्रैल तक चलेगा।
राष्ट्रपति के संबोधन पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के लिए 3, 4 और 6 फरवरी का समय तय किया गया है। 6 फरवरी को चर्चा के बाद सरकार की ओर से जवाब दिया जाएगा। वहीं संसद की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने के लिए केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने 30 जनवरी को सभी दलों की एक बैठक बुलाई है। उन्होंने विपक्षी नेताओं से रचनात्मक चर्चाओं में सहयोग देने की अपील की है।बजट को लेकर उम्मीद जताते हुए किरेन रिजिजू ने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को संतुलित और व्यापक बजट पेश करेंगी। उन्होंने कहा कि बजट सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति के संबोधन से होगी वहीं जनता को सकारात्मक और जनहितैषी बजट की उम्मीद है। - नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश के दूरदर्शी किसान हरिमन शर्मा को भारतीय कृषि में उनके परिवर्तनकारी योगदान के लिए सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म श्री से सम्मानित किया गया है। उन्होंने एचआरएमएन-99 नामक एक अभिनव, स्व-परागण युक्त और कम ठंड में उपजने वाली सेब की किस्म विकसित की है, जिसने देश में सेब की बागवानी में क्रांति ला दी है। अब सेब की बागवानी व्यापक हो गई है और रसदार पौष्टिक सेब की यह किस्म लोगों तक पहुंच गई है।सेब की इस प्रजाति की बागवानी से देश में हजारों किसान लाभान्वित हुएएचआरएमएन-99 सेब की किस्म की विशेषता इसकी धारीदार लाल-पीली त्वचा, मुलायम और रसदार गूदा तथा प्रति पौधा सालाना 75 किलोग्राम तक फल देने की क्षमता है। सेब की इस प्रजाति की बागवानी से देश में हजारों किसान लाभान्वित हुए हैं। हरिमन शर्मा के विशिष्ट नवाचार से भारत में सेब की बागवानी में उल्लेखनीय बदलाव आया है, साथ ही इसने बड़े पैमाने पर किसानों को अतिरिक्त आय और पोषण के बेहतर स्रोत अपनाने के लिए प्रेरित किया है। उनके प्रयासों से कभी अमीरों का आहार माना जाने वाला सेब अब आम आदमी की पहुंच में आ गया है।पनियाला की पहाड़ी गलियों से राष्ट्रपति भवन के भव्य कक्ष तक का हरिमन शर्मा का सफरबचपन में ही अनाथ हो गये हरिमन शर्मा का बिलासपुर (हिमाचल प्रदेश) स्थित छोटे से गांव पनियाला की पहाड़ी गलियों से राष्ट्रपति भवन के भव्य कक्ष तक का सफर कृषक समुदाय के साथ ही देश के छात्रों, शोधकर्ताओं और बागवानी करने वालों के लिए काफी प्रेरणादायक है। तमाम मुश्किलों के बावजूद उन्होंने मैट्रिक तक की शिक्षा पूरी की और खेती-किसानी और फल उपजाने के प्रति अपना जुनून बनाए रखा।पनियाला की गर्म जलवायु के बावजूद 2001 में पौधे ने फल दियेदरअसल एचआरएमएन-99 सेब किस्म की उपज की कहानी 1998 में तब शुरू हुई जब हरिमन शर्मा ने अपने घर के पिछले हिस्से में घर में इस्तेमाल किये गये सेब के कुछ बीज लगा दिये। इनमें से एक बीज उल्लेखनीय रूप से अगले वर्ष अंकुरित हो गया और 1,800 फीट की ऊंचाई पर स्थित पनियाला की गर्म जलवायु के बावजूद 2001 में पौधे ने फल दिये।ग्राफ्टिंग द्वारा कई पौधे लगाएहरिमन शर्मा ने यह देखते हुए सावधानीपूर्वक मातृ पौधे की देखभाल की और ग्राफ्टिंग द्वारा कई पौधे लगाए और अंततः सेब का एक समृद्ध बाग स्थापित कर लिया। अगले दशक में, उन्होंने विभिन्न कलमों में ग्राफ्टिंग तकनीकों का प्रयोग कर सेब की अभिनव किस्म को परिष्कृत करने पर ध्यान केंद्रित किया। समान जलवायु परिस्थितियों वाले क्षेत्रों में इस सफलता को दोहराने के प्रयासों के बावजूद शुरुआत में उनके काम पर कृषि और वैज्ञानिक समुदायों का अधिक ध्यान नहीं गया।अब उन क्षेत्रों में भी सेब की खेती संभव हो सकती है, जहां पहले इसे अव्यवहारिक माना जाता थाव्यावसायिक सेब की अन्य किस्मों को समशीतोष्ण जलवायु और लंबे समय तक शीतकालीन मौसम की आवश्यकता होती है, पर इसके विपरीत एचआरएमएन-99 की बागवानी उष्णकटिबंधीय, उपोष्णकटिबंधीय और मैदानी क्षेत्रों में हो सकती है, जहां गर्मियों में तापमान 40-45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। इससे अब उन क्षेत्रों में भी सेब की खेती संभव हो सकती है, जहां पहले इसे अव्यवहारिक माना जाता था।एनआईएफ ने सेब की किस्म की विशिष्टता सत्यापित कीवर्ष 2012 में, भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के एक स्वायत्त संस्थान, राष्ट्रीय नवाचार फाउंडेशन (एनआईएफ)-भारत ने इसका पता लगाया। एनआईएफ ने सेब की किस्म की विशिष्टता सत्यापित करते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके), कृषि विश्वविद्यालयों, राज्य कृषि विभागों, किसानों और देश भर के स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर आणविक अध्ययन, फल गुणवत्ता परीक्षण और बहु-स्थान परीक्षणों की सुविधा प्रदान कर इसकी विशिष्टता प्रमाणन में सहयोग दिया।सेब की यह किस्म 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पहुंच गईआपको बता दें कि इन सहयोगी प्रयासों से, सेब की यह किस्म 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पहुंच गई। इनमें बिहार, झारखंड, मणिपुर, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, दादरा और नगर हवेली, कर्नाटक, हरियाणा, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, केरल, उत्तराखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, पांडिचेरी, हिमाचल प्रदेश शामिल हैं। साथ ही इसे नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में भी लगाया गया है। एनआईएफ ने इसका पंजीकरण नई दिल्ली के पौधा किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण में करने में सहायता प्रदान की।अपने अभिनव प्रयास के लिए हरिमन शर्मा को वर्ष 2017 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने 9वें राष्ट्रीय द्विवार्षिक ग्रासरूट इनोवेशन और उत्कृष्ट पारंपरिक ज्ञान पुरस्कारों के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया था। इसके अलावा भी उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया हैं। इनमें कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय नवोन्मेषी किसान पुरस्कार (2016), आईएआरआई फेलो पुरस्कार (2017), डीडीजी, आईसीएआर द्वारा किसान वैज्ञानिक उपाधि (2017), राष्ट्रीय सर्वश्रेष्ठ किसान पुरस्कार (2018), राष्ट्रीय कृषक सम्राट सम्मान (2018) जगजीवन राम कृषि अभिनव पुरस्कार (2019) और कई राज्य और केंद्र सरकार के पुरस्कार शामिल हैं। हरिमन शर्मा ने नवंबर 2023 में मलेशिया में आयोजित चौथे आसियान इंडिया ग्रासरूट इनोवेशन फोरम (एआईजीआईएफ) में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया।
- जम्मू।, दिल्ली से श्रीनगर के बीच ट्रेन सुविधा होने से माता वैष्णो देवी की तीर्थयात्रा को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यह बात मंदिर बोर्ड के एक शीर्ष अधिकारी ने कही। अधिकारी ने बताया कि इसे देखते हुए कटरा रेलवे स्टेशन पर एक तीर्थयात्री सुविधा केंद्र भी स्थापित किया गया है ताकि लोग आसानी से तीर्थयात्रा के लिए पंजीकरण करा सकें। श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (एसएमवीडीएसबी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अंशुल गर्ग ने क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के मकसद से कटरा को एक क्षेत्रीय केंद्र के रूप में स्थापित करने की महत्वाकांक्षी योजनाओं की रूपरेखा प्रस्तुत की। इनके तहत त्रिकुटा हिल्स परिक्रमा मार्ग में चार मंदिर और शिव खोरी मंदिर तक संपर्क में सुधार के लिए एक हेलीपैड का विकास समेत कई प्रमुख परियोजनाएं कार्यान्वित हो रही हैं।श्राइन बोर्ड के खेल परिसर कटरा में रविवार को 76वें गणतंत्र दिवस पर आयोजित समारोह के दौरान गर्ग ने जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने बहुप्रतीक्षित दिल्ली-श्रीनगर रेल मार्ग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इससे तीर्थयात्रियों के लिए आधार शिविर कटरा एक महत्वपूर्ण पारगमन स्टेशन के रूप में स्थापित हो जाएगा। विशेष रूप से ‘डिजाइन' की गई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन ने हाल ही में कटरा-श्रीनगर खंड पर 25 जनवरी को अपना पहला ‘ट्रायल रन' पूरा कर लिया। गर्ग ने कहा, ‘‘इसको देखते हुए, तीर्थस्थल बोर्ड ने कटरा रेलवे स्टेशन पर एक यात्री सुविधा केंद्र शुरू किया है, ताकि तीर्थयात्री रेलवे स्टेशन से ही यात्रा के लिए अपना पंजीकरण आसानी से पूरा कर सकें।'' उन्होंने कहा कि इस पवित्र तीर्थस्थल पर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है और लगातार तीसरे वर्ष तीर्थयात्रियों की वार्षिक संख्या 90 लाख से अधिक पहुंच गई। पारंपरिक मार्ग को बेहतर बनाने के प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि अनुमानित 20 करोड़ रुपये की लागत से एक बड़ी परियोजना पर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा बाणगंगा क्षेत्र में तीन मंजिला शुभ्रा भवन सहित अन्य परियोजनाओं को पूरा किया जाएगा और जल निकासी प्रणाली को उन्नत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ‘‘लेजर लाइट और साउंड'' परियोजना का भी प्रस्ताव रखा जाएगा। सीईओ ने भवन क्षेत्र में भीड़भाड़ कम करने के लिए ‘स्काईवॉक' की तरह 25 करोड़ रुपये की लागत से बने निकास मार्ग और नए वैष्णवी भवन का भी जिक्र किया।
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नयी दिल्ली। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वामी विवेकानंद के बाद भारत की संस्कृति और विरासत को विश्व मंच पर नयी पहचान दिलाने वाले पहले नेता हैं। सूचना एवं प्रसारण मंत्री वैष्णव ने यह टिप्पणी तब की जब उन्होंने और संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने मीडिया और मनोरंजन उद्योग के लिए ई-मार्केटप्लेस ‘वेव्स बाजार' की शुरुआत की। यह कंटेंट निर्माताओं को बाजार से जोड़ने, सहयोग करने और विकास करने के लिए एक मंच प्रदान करता है। ई-मार्केटप्लेस की शुरुआत ऐसे समय में की गई है जब भारत इस साल पहली बार ‘वर्ल्ड ऑडियो वीडियो एंड इंटरटेनमेंट समिट' (वेव्स) की मेजबानी करने जा रहा है। वैष्णव ने कहा कि आर्थिक मामलों के लिए दावोस जिस तरह का मंच है, प्रधानमंत्री मोदी ने रचनात्मक अर्थव्यवस्था के लिए उसी तरह ‘वेव्स' की शुरुआत की है। वैष्णव ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के बाद मोदी पहले ऐसे नेता हैं जिन्होंने भारत की संस्कृति और विरासत को विश्व मंच पर नयी पहचान दिलाई है। उन्होंने कहा, ‘‘विवेकानंद के बाद पहली बार भारत से ऐसा नेतृत्व उभरा जो अपनी संस्कृति पर गर्व करता है और इसे विश्व मंच पर पेश कर रहा है।'' इससे पहले, वैष्णव और शेखावत ने ‘वेव्स बाजार' की शुरुआत की। दोनों मंत्रियों ने ‘वेव्स सीआईसी-वाह उस्ताद चैलेंज' का भी आरंभ किया, जो शास्त्रीय और अर्द्ध-शास्त्रीय संगीत में भारत की सबसे असाधारण गायन प्रतिभाओं की खोज और प्रचार के लिए समर्पित है। अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली घराने द्वारा संस्कृति मंत्रालय और दूरदर्शन के सहयोग से आयोजित वाह उस्ताद प्रतियोगिता शास्त्रीय रूप से प्रशिक्षित गायकों को अपना कौशल दिखाने के लिए एक प्रतिष्ठित मंच प्रदान करती है। शेखावत ने कहा, ‘‘सांस्कृतिक विरासत भारत की सबसे बड़ी संपत्ति है। वेव्स इस क्षमता को विश्व मंच पर ले जाने के लिए एक मंच होगा और सभी उभरते कलाकारों के लिए अपने कौशल का प्रदर्शन करने का एक अवसर होगा।''
- कोच्चि। प्रसिद्ध मलयालम लेखक ई संतोष कुमार को उनके उपन्यास 'थापोमायियुदे अचन' के लिए प्रतिष्ठित फेडरल बैंक साहित्य पुरस्कार 2024 से सम्मानित किया गया है। उन्हें एक प्रशस्तिपत्र, एक लाख रुपये की राशि और एक स्मृति चिन्ह दिया गया। बैंक की ओर से सोमवार को जारी एक बयान में कहा गया कि पुरस्कार विजेता लेखक बेन्यामिन, फातिमा ई.वी. और राहुल राधाकृष्णन के एक प्रतिष्ठित पैनल ने सम्मान के लिए उपन्यास 'थापोमायियुदे अचन' का चयन किया। संतोष कुमार को यह पुरस्कार शनिवार को कोझिकोड में केरल साहित्य महोत्सव में दिया गया।यहां जारी एक बयान में संतोष कुमार के हवाले से कहा गया है, "समकालीन शरणार्थी मुद्दे जैसे विविध विषयों को उठाने के कारण इस उपन्यास को लिखना एक चुनौतीपूर्ण लेकिन पुरस्कृत सफर बन गया।
- नयी दिल्ली।‘द लैंसेट इन्फेक्शिय स डिजीज जर्नल' में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार पशुओं के काटने की हर चार में से तीन घटनाओं में कुत्ते शामिल होते हैं और भारत में रेबीज के कारण हर वर्ष 5,700 से अधिक लोगों की मृत्यु होने का अनुमान है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने मार्च 2022 से अगस्त 2023 तक देशभर के 15 राज्यों के 60 जिलों में एक सर्वेक्षण किया। इस दौरान 78,800 से अधिक परिवारों में 3,37,808 व्यक्तियों से परिवार में पशुओं के काटने, एंटी-रेबीज टीकाकरण और पशुओं के काटने से होने वाली मौतों के बारे में पूछा गया। आईसीएमआर-राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान, चेन्नई के शोधकर्ताओं समेत विभिन्न शोधकर्ताओं ने पाया कि पशुओं के काटने की हर चार में से तीन घटनाओं के लिए कुत्ते जिम्मेदार थे। सर्वेक्षण में शामिल 2,000 से अधिक लोगों ने पशुओं के काटने की पूर्व की घटना के बारे में जानकारी दी, जिनमें से 76.8 प्रतिशत (1,576) घटनाओं में कुत्तों ने काटा। इसके अलावा शोध के लेखकों ने कहा कि प्रति हजार लोगों में से छह को किसी जानवर ने काटा है, "जिसका अर्थ है कि राष्ट्रीय स्तर पर 91 लाख लोगों को जानवर काट चुके हैं।” उन्होंने कहा, “हमारा अनुमान है कि भारत में प्रतिवर्ष रेबीज से 5,726 लोगों की मृत्यु होती है।” शोध लेखकों ने कहा कि इन अनुमानों से यह समझने में मदद मिल सकती है कि देश 2030 तक मनुष्यों में कुत्तों से होने वाले रेबीज के मामलों को समाप्त करने के वैश्विक लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है या नहीं।
- नयी दिल्ली,। उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि ईंधन के प्रकार को दर्शाने वाले रंग आधारित स्टिकर लगाने का उसका निर्देश एक अप्रैल, 2019 से पहले खरीदे गए और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) राज्यों में पंजीकृत वाहनों पर भी लागू होगा। न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने 13 अगस्त 2018 के अपने आदेश को संशोधित करते हुए एनसीआर क्षेत्र में एक अप्रैल 2019 से पहले बेचे गए सभी वाहनों को इसमें शामिल कर लिया। पीठ ने कहा, “यह आदेश एनसीआर क्षेत्र के सभी वाहनों के लिए लागू था और 2 अक्टूबर, 2018 तक कार्यान्वयन किया जाना था। उक्त आदेश के मद्देनजर हम 13 अगस्त, 2018 के आदेश को संशोधित करते हैं और निर्देश देते हैं कि 1 अप्रैल, 2019 से पहले बेचे गए वाहनों के संबंध में उक्त आदेश के प्रावधान लागू होंगे और 1 अप्रैल, 2019 को या उसके बाद बेचे गए वाहनों के मामले में जो आदेश के प्रावधानों का अनुपालन नहीं करते हैं, एमवी अधिनियम, 1988 की धारा 192 के तहत संबंधित सरकारों द्वारा उन पर कार्रवाई शुरू की जाएगी।” मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 192 के अनुसार बिना पंजीकरण के वाहन चलाने पर जुर्माना या कारावास की सजा दी जा सकती है। पीठ ने कहा कि उसके आदेश के अनुसार होलोग्राम आधारित हल्के नीले रंग के स्टिकर पेट्रोल और सीएनजी ईंधन से चलने वाले वाहनों में इस्तेमाल किए जाएंगे, जबकि डीजल से चलने वाले वाहनों पर नारंगी रंग का स्टिकर लगाया जाएगा। इसमें कहा गया है, “जैसा कि हमने 13 अगस्त, 2018 के आदेश को संशोधित करते हुए निर्देश दिया है कि एनसीआर राज्यों में पंजीकृत सभी वाहनों के संबंध में उक्त आदेश की आवश्यकता का अनुपालन किया जाएगा। हम संबंधित एनसीआर राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देते हैं कि 1 अप्रैल, 2019 से पहले एनसीआर राज्यों में पंजीकृत वाहनों के संबंध में भी आदेश के प्रावधानों को लागू किया जाए।” पीठ ने यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया कि एक अप्रैल, 2019 से पहले या बाद में एनसीआर राज्यों में पंजीकृत वाहन आदेशों का अनुपालन करें...। एनसीआर राज्यों में राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हरियाणा आते हैं।पीठ ने कहा कि जहां तक दिल्ली का सवाल है, वहां एक हलफनामा है जिसमें कहा गया है कि डीलरों को मूल निर्माताओं द्वारा उच्च सुरक्षा पंजीकरण प्लेट (एचएसआरपी) रंग आधारित स्टिकर लगाने के काम के लिए अधिकृत किया गया था। पीठ ने कहा, “हम एनसीआर राज्यों को आज से एक महीने के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश देते हैं, जिसमें वे यह सुनिश्चित करेंगे कि 1 अप्रैल, 2019 से पहले बेचे गए प्रत्येक वाहन उक्त आदेश के प्रावधानों के अनुरूप हों।” शीर्ष अदालत ने केंद्र से रंग आधारित स्टिकर से संबंधित आदेशों के अनुपालन के संबंध में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से रिपोर्ट मांगने का निर्देश देते हुए कहा कि रिपोर्ट संकलित कर 17 मार्च तक या उससे पहले प्रस्तुत की जानी चाहिए, ताकि 21 मार्च को आवश्यक निर्देश दिए जा सकें।
- आगरा,। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर सोमवार की सुबह एक भीषण सड़क हादसे में दिल्ली निवासी एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत हो गई। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस ने कहा कि यह हादसा आगरा जिले के फतेहाबाद क्षेत्र में तब हुआ जब दिल्ली के उत्तम नगर निवासी एक परिवार की कार कथित तौर पर अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकराई और फिर सामने से आ रहे एक ट्रक की चपेट में आ गई। पुलिस ने बताया कि हादसे में पति-पत्नी और उनके दो बच्चों की मौत हो गई जो महाकुंभ में स्नान के बाद दिल्ली लौट रहे थे। सूचना मिलने पर थाना फतेहाबाद प्रभारी डीपी तिवारी अन्य पुलिसकमियों के साथ मौके पर पहुंचे तो पाया कि कार में चारों मृतकों के शव फंसे हुए हैं। पुलिस ने कटर से कार के दरवाजे को कटवाकर शवों को बाहर निकाला और शवों को पोस्टमार्टम के लिए डॉ.सरोजनी नायडू मेडिकल अस्पताल भिजवाया। पुलिस ने कहा कि कार में मिले कागजात के आधार पर मृतकों की पहचान की गई। मृतकों की पहचान दिल्ली में उत्तम नगर के सुभाष पार्क के गली नंबर तीन के निवासी 41 वर्षीय ओम प्रकाश, उनकी पत्नी पूर्णिमा, नौ साल की बेटी अहाना, दो साल के बेटे विनायक के रूप में हुई है। ओमप्रकाश पेशे से अधिवक्ता बताए गए हैं।
- नयी दिल्ली। भारत और चीन ने सोमवार को संबंधों के ‘पुनर्निर्माण' के लिए कई उपायों की घोषणा की जिसमें इस साल गर्मियों में कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू करना और सीधी उड़ानें बहाल करने पर सैद्धांतिक रूप से सहमत होना शामिल है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी की चीन के उप विदेश मंत्री सुन वेइदोंग के साथ बीजिंग में व्यापक वार्ता के बाद इन निर्णयों की घोषणा की गई। विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्षों ने सीमापार नदियों से संबंधित आंकड़ों और अन्य सहयोग का प्रावधान पुनः शुरू करने को लेकर चर्चा के लिए भारत-चीन विशेषज्ञ स्तरीय तंत्र की बैठक शीघ्र बुलाने पर भी सहमति व्यक्त की। विदेश मंत्रालय के अनुसार विदेश सचिव ने विदेश मंत्री वांग यी और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के अंतरराष्ट्रीय विभाग के मंत्री लियू जियानचाओ से भी मुलाकात की। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि मिसरी और सुन ने भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों की स्थिति की व्यापक समीक्षा की और संबंधों में स्थिरता और पुनर्निर्माण करने के लिए कुछ जन-केंद्रित कदम उठाने पर सहमति व्यक्त की। इसमें कहा गया, ‘‘इस संदर्भ में दोनों पक्षों ने 2025 की गर्मियों में कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर शुरू करने का फैसला किया। प्रासंगिक तंत्र मौजूदा समझौतों के अनुसार ऐसा करने के तौर-तरीकों पर चर्चा करेगा।'' विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘वे दोनों देशों के बीच सीधी हवाई सेवाएं फिर शुरू करने के लिए सैद्धांतिक रूप से सहमत हुए। दोनों पक्षों के संबंधित तकनीकी अधिकारी जल्द ही इसके लिए एक अद्यतन रूपरेखा पर बातचीत करेंगे।" इसमें कहा गया कि दोनों पक्षों ने मीडिया और थिंक टैंक के बीच बातचीत आदि को अधिक बढ़ावा देने और सुविधाजनक बनाने के लिए उचित कदम उठाने पर सहमति व्यक्त की। इसमें पिछले वर्ष अक्टूबर माह में कज़ान में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच हुई वार्ता का भी उल्लेख किया गया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि जैसा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच अक्टूबर में कज़ान में हुई बैठक में सहमति बनी थी, विदेश सचिव मिसरी और चीनी उप विदेश मंत्री सुन ने भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों की स्थिति की "व्यापक" समीक्षा की और संबंधों को ‘‘स्थिर करने और पुनर्निर्माण" करने के लिए कुछ जन-केंद्रित कदम उठाने पर सहमति व्यक्त की। कैलाश मानसरोवर यात्रा के साथ-साथ दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें 2020 में निलंबित कर दी गईं थीं।विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘दोनों पक्षों का मानना है कि 2025 जो भारत और चीन के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ है, का उपयोग एक-दूसरे के बारे में बेहतर जागरूकता पैदा करने और जनता के बीच आपसी विश्वास और भरोसा बहाल करने के लिए सार्वजनिक कूटनीति प्रयासों को दोगुना करने के लिए किया जाना चाहिए।'' मिसरी ने रविवार को बीजिंग की अपनी दो दिवसीय यात्रा शुरू की, जिसका मुख्य उद्देश्य सन के साथ बातचीत करना था। पिछले महीने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने बीजिंग का दौरा किया था और सीमा विवाद पर विशेष प्रतिनिधि (एसआर) वार्ता के ढांचे के तहत चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ बातचीत की थी।
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नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में धार्मिक स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं/पर्यटकों की तादाद में भारी इजाफा हुआ है। काशी विश्वनाथ कारीडोर और अयोध्या में राम मंदिर बनने के बाद प्रदेश में आने वाले पर्यटकों की तादाद तेजी से बढ़ी है। बीते साल प्रदेश का रुख करने वाले पर्यटकों की संख्या में 30 फीसदी से ज्यादा की वृद्धि हुई है।
यूपी में तेजी से बढ़ रहा धार्मिक पर्यटनराज्य में आने वाले पर्यटकों की संख्या में वर्ष 2023 की तुलना में वर्ष 2024 में लगभग 17 करोड़ की वृद्धि दर्ज की गई है। उत्तर प्रदेश में बीते साल 65 करोड़ पर्यटक आए हैं जबकि 2023 में यह संख्या 48 करोड़ थी। इनमें भी धार्मिक महत्व के शहरों अयोध्या, काशी, मथुरा और प्रयागराज में ही 41.50 करोड़ से ज्यादा पर्यटक आए हैं। राम मंदिर निर्माण के बाद वर्ष 2024 में सबसे ज्यादा श्रद्धालुओं/पर्यटकों की आमद अयोध्या में दर्ज की गयी है। पर्यटन विभाग की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक देश के साथ-साथ विदेशों में भी उत्तर प्रदेश का आकर्षण बढ़ा है। एक वर्ष में विदेशी पर्यटकों की संख्या में लगभग 7 लाख की बढ़ोतरी देखने को मिली है।यूपी बना घरेलू पर्यटकों की पहली पसंदप्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि वर्ष 2022 से राज्य घरेलू पर्यटकों की पहली पसंद बना हुआ है। विदेशी पर्यटकों के आगमन में भी यह उपलब्धि हासिल की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में वर्ष 2024 में कुल 64,90,76,213 पर्यटक आए, जबकि 2023 में कुल 48,01,27,191 पर्यटकों का आना हुआ था। इस प्रकार एक वर्ष में कुल 16,89,49,022 की वृद्धि हुई। बीते वर्ष 22,69,067 विदेशी पर्यटक आए थे, जबकि 2023 में 16,01,503 विदेशी पर्यटक थे। इस प्रकार एक वर्ष में विदेशी पर्यटकों की संख्या में लगभग 6,67,564 की वृद्धि दर्ज की गई है।राम मंदिर बनने के बाद अयोध्या में तेजी से बढ़ी पर्यटकों की संख्यापर्यटन मंत्री ने बताया कि श्रीराम जन्मभूमि में श्री रामलला के विराजमान होने के बाद अयोध्या में पर्यटकों की संख्या में तेज गति से वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2024 में वहां कुल 16,44,19,522 श्रद्धालु पहुंचे, जबकि वर्ष 2023 में यह संख्या 5,75,70,896 थी। इस प्रकार एक वर्ष में 10,68,48,626 की वृद्धि हुई है। काशी में वर्ष 2024 में 11,00,97,743 श्रद्धालु आए, जबकि 2023 में कुल 10,18,67,618 श्रद्धालु पहुंचे थे। इस प्रकार पर्यटकों की संख्या में 82,30,125 की वृद्धि दर्ज हुई है।मथुरा में इस वर्ष 9,00,81,788 श्रद्धालु पहुंचे, जबकि वर्ष 2023 में 7,79,27,299 श्रद्धालु पहुंचे थे। इस प्रकार 1,21,54,489 की वृद्धि हुई है। प्रयागराज में वर्ष 2024 में 51,262,806 पर्यटक आए, जबकि वर्ष 2023 में 5,06,71,622 पर्यटक पहुंचे थे। इस प्रकार 5,91,184 पर्यटकों की संख्या में वृद्धि हुई।विदेशी पर्यटकों को लुभाने में आगरा नंबर वनजयवीर सिंह ने बताया कि विदेशी पर्यटकों के आगमन में वर्ष 2024 में आगरा पहले स्थान पर रहा। यहां कुल 1,77,75,561 पर्यटक आए, जिसमें 14,65,814 विदेशी पर्यटक थे। वाराणसी में कुल 11,00,97,743 श्रद्धालु आए, जिसमें 3,09,932 पर्यटक विदेशी थे। इसी प्रकार, कुशीनगर में कुल 22,42,913 पर्यटक आए, जिसमें 2,51,251 विदेशी पर्यटक पहुंचे। कृष्ण नगरी मथुरा में वर्ष 2024 में कुल 9,00,81,788 श्रद्धालु आए, जिसमें 1,36,079 विदेशी पर्यटक थे। अयोध्या में कुल 16,44,19,522 श्रद्धालु पहुंचे, जिसमें 26,048 विदेशी पर्यटक हैं। -
नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष एवं अनुसंधान संगठन (ISRO) स्पेस में सेंचुरी लगाने के लिए तैयार है। श्रीहरिकोटा के अंतरिक्ष केंद्र से ISRO के ऐतिहासिक 100वें मिशन यानी GSLV रॉकेट के जरिए नेविगेशन सैटेलाइट (Navigation satellite) की लॉन्चिंग के लिए 27 घंटे की उल्टी गिनती मंगलवार को शुरू हो गई। यह मिशन इसलिए भी खास है क्योंकि इसरो के नए अध्यक्ष वी नारायणन के नेतृत्व में पहला मिशन होगा। उन्होंने 13 जनवरी को पदभार संभाला हैं।
ISRO के 100वें मिशन में क्या है खास?स्वदेशी क्रायोजेनिक चरण के साथ भू-समकालीन उपग्रह प्रक्षेपण यान (GSLV) अपनी 17वीं उड़ान में नेविगेशन सेटेलाइट NVS-02 को लेकर श्रीहरिकोटा के दूसरे लॉन्च पैड से 29 जनवरी को सुबह छह बजकर 23 मिनट पर प्रक्षेपित होगा। यह नेविगेशन सैटेलाइट ‘नेविगेशन विद इंडियन कांस्टेलेशन’ (नाविक) सीरीज का दूसरा सेटेलाइट है, जिसका उद्देश्य भारतीय उपमहाद्वीप के साथ-साथ भारतीय भूभाग से लगभग 1,500 किलोमीटर आगे के क्षेत्रों में यूजर्स को सटीक स्थिति, गति और समय की जानकारी प्रदान करना है। 27.30 घंटे की उल्टी गिनती सोमवार देर रात दो बजकर 53 मिनट पर शुरू हुई।यूआर सैटेलाइट सेंटर ने डिजाइन और डेवलप किया NVS-02 सैटेलाइट50.9 मीटर ऊंचा GSLV-F15 मिशन GSLV-F12 मिशन के बाद लॉन्च किया जा रहा है, जिसने 29 मई 2023 को पहले दूसरे पीढ़ी के सेटेलाइट NVS-01 को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में स्थापित किया था।NavIC में कुल पांच दूसरे पीढ़ी के सेटेलाइट शामिल हैं– NVS-01, NVS-02, NVS-03, NVS-04 और NVS-05। ये सेटेलाइट NavIC बेस लेयर कांस्टेलेशन को एडवांस फीचर्स के साथ मजबूत बनाने और सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए तैयार किए गए हैं।NVS-02 सेटेलाइंट, जिसे यूआर सेटेलाइट सेंटर द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है, लगभग 2,250 किलोग्राम वजनी है। इसमें NVS-01 की तरह ही C-बैंड में रेंजिंग पेलोड के अलावा L1, L5 और S बैंड में नेविगेशन पेलोड भी शामिल है।NVS-02 सेटेलाइट के फायदे क्या है?ISRO ने कहा कि इस सेटेलाइट का उपयोग मुख्य रूप से स्थलीय, हवाई और समुद्री नेविगेशन, सटीक कृषि, फ्लीट मैनेजमेंट, मोबाइल डिवाइस में लोकेशन आधारित सेवाओं, सेटेलाइटों के लिए ऑर्बिट निर्धारण, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) आधारित एप्लीकेशन, आपातकालीन सेवाओं और टाइमिंग सेवाओं के लिए किया जाएगा। - नयी दिल्ली. प्रयागराज में जारी महाकुंभ मेले से लौटे उद्योगपति गौतम अदाणी ने कहा कि दुनिया का सबसे बड़ा इंसानी समागम सिर्फ धार्मिक आयोजन न होकर टिकाऊ सभ्यता का एक खाका भी है। अदाणी समूह के चेयरमैन अदाणी ने पेशेवर नेटवर्किंग मंच ‘लिंक्डइन' पर एक ब्लॉग में महाकुंभ से जुड़े अपने अनुभवों को साझा किया। वह अपने परिवार के साथ 21 जनवरी को प्रयागराज में संगम तट पर चल रहे महाकुंभ में शामिल हुए। उन्होंने कहा, ‘‘जहां भारत एक वैश्विक महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर है, वहीं हमें याद रखना चाहिए कि हमारी ताकत सिर्फ उसमें नहीं है जो हम बनाते हैं, बल्कि उसमें है जो हम संरक्षित करते हैं। कुंभ सिर्फ एक धार्मिक समागम नहीं है, यह टिकाऊ सभ्यता का एक खाका है।'' उन्होंने कहा कि कुंभ मेला इस बात की याद दिलाता है कि असली मानदंड बही-खाते नहीं बल्कि मानवीय चेतना पर सकारात्मक प्रभाव के रूप में मापा जाता है। अदाणी ने कहा, ‘‘कुंभ में हमें भारत की ‘सॉफ्ट पावर' का सार देखने को मिलता है। यह एक ऐसी शक्ति है जो विजय में नहीं बल्कि चेतना में निहित है, प्रभुत्व में नहीं बल्कि सेवा में निहित है। भारत की असली ताकत इसकी आत्मा में निहित है, जहां वृद्धि सिर्फ आर्थिक शक्ति न होकर मानवीय चेतना और सेवा का संगम है।'' उन्होंने कहा कि कुंभ में पैमाना सिर्फ आकार के बारे में नहीं बल्कि प्रभाव के बारे में है।अदाणी समूह के प्रमुख ने कहा, ‘‘जब 20 करोड़ लोग समर्पण एवं सेवा के साथ इकट्ठा होते हैं, तो यह सिर्फ एक आयोजन नहीं बल्कि आत्माओं का एक अनूठा संगम होता है।''
- लुधियाना. एवन साइकिल्स के प्रबंध निदेशक (एमडी) ओंकार सिंह पाहवा ने प्रतिष्ठित पद्म श्री सम्मान के लिए उनका चयन करने पर सरकार को धन्यवाद दिया। पाहवा को वर्ष 2025 के लिए पद्म श्री सम्मान के लिए चुना गया है। उन्होंने इस सम्मान पर कहा, ‘‘यह मेरे लिए नहीं, बल्कि सरकार ने पूरे साइकिल उद्योग को सम्मानित किया है।'' सरकार द्वारा शनिवार को घोषित देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में सात पद्म विभूषण, 19 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री शामिल हैं। सोमवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान पाहवा ने बताया कि शनिवार रात को उनके एक सहयोगी ने फोन कर उन्हें पद्म श्री के चुने जाने के बारे में बताया। साइकिल उद्योग के प्रमुख ब्रांड में से एक एवन साइकिल्स के पास 2,000 से अधिक डीलरों का एक राष्ट्रव्यापी नेटवर्क है। एवन साइकिल्स दुनिया के 23 विभिन्न देशों में अपने उत्पादों का निर्यात करती है।पाहवा ने कहा कि उनकी कंपनी का अनुमानित वार्षिक कारोबार 1,150 करोड़ रुपये है और यह देश की शीर्ष दो सबसे बड़ी साइकिल निर्माताओं में से एक है।
- मुंबई. डिजिटल धोखाधड़ी की बढ़ती घटनाओं के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने सोमवार को बैंकों से इनपर लगाम लगाने के लिए मजबूत एवं सक्रिय प्रणाली बनाने के साथ जोखिमों को कम करने के लिए तीसरे पक्ष के सेवा-प्रदाताओं की निगरानी बढ़ाने का आग्रह किया। मल्होत्रा ने यहां सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों के प्रबंध निदेशकों एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारियों (सीईओ) से मुलाकात में यह बात कही। इस दौरान आरबीआई के डिप्टी गवर्नर- एम राजेश्वर राव, टी रबी शंकर और स्वामीनाथन जे भी मौजूद थे। बैठक में भारतीय रिजर्व बैंक के विनियमन और पर्यवेक्षण के प्रभारी कार्यकारी निदेशक भी शामिल हुए।आरबीआई गवर्नर ने डिजिटल धोखाधड़ी में वृद्धि पर चिंता व्यक्त की और बैंकों को ऐसे प्रयासों को विफल करने के लिए मजबूत एवं सक्रिय प्रणाली स्थापित करने की सलाह दी। आरबीआई की एक विज्ञप्ति के मुताबिक, सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े जोखिम के प्रबंधन और साइबर सुरक्षा पर चर्चा करते हुए मल्होत्रा ने बैंकों से तीसरे पक्ष के सेवा प्रदाताओं पर निगरानी बढ़ाने का आग्रह किया, ताकि उनसे उत्पन्न होने वाले जोखिमों को कम किया जा सके। बैठक में आरबीआई और बैंकों से साथ मिलकर काम करने की जरूरत पर बल दिया गया और बैंकों से कारोबारी सुगमता बढ़ाने के लिए सुझाव मांगे गए। इसके साथ ही मल्होत्रा ने बैंकों से निरंतर वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने, वित्तीय समावेश का विस्तार करने, डिजिटल साक्षरता में सुधार करने, ऋण की उपलब्धता और सामर्थ्य बढ़ाने, ग्राहक सेवा और शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करने और प्रौद्योगिकी में निवेश जारी रखने को कहा। इसके अलावा, आरबीआई प्रमुख ने घरेलू वित्तीय प्रणाली को जुझारू बनाने में बैंकों द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार किया और वैश्विक स्तर पर मौजूद कुछ मुख्य कमजोरियों को उजागर किया जो नकारात्मक जोखिम पैदा कर सकती हैं। यह बैठक केंद्रीय बैंक की अपनी पर्यवेक्षित संस्थाओं के वरिष्ठ प्रबंधन के साथ निरंतर संपर्क का एक हिस्सा थी। इस तरह की पिछली बैठक तीन जुलाई, 2024 को हुई थी।
- प्रयागराज । मां गंगा, मां यमुना और अदृश्य मां सरस्वती के पवित्र संगम में श्रद्धा और आस्था से ओत-प्रोत साधु-संतों, श्रद्धालुओं, कल्पवासियों, स्नानार्थियों और गृहस्थों का स्नान नित नए रिकॉर्ड बना रहा है। इसी क्रम में मौनी अमावस्या के अमृत स्नान से पूर्व दो दिनों (रविवार और सोमवार) को 3 करोड़ से ज्यादा लोगों ने त्रिवेणी संगम में पावन डुबकी लगाई।अब तक स्नानार्थियों की कुल संख्या हुई 14.76 करोड़रविवार को जहां 1.74 करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम स्नान किया तो वहीं सोमवार को रात 8 बजे तक 1.55 करोड़ श्रद्धालुओं ने पावन डुबकी लगाई। इसके साथ ही महाकुंभ में अब तक स्नानार्थियों की कुल संख्या 14.76 करोड़ हो गई।महाकुंभ में कुल 45 करोड़ से ज्यादा लोग आने की संभावनाउल्लेखनीय है कि पिछले गुरुवार को ही महाकुंभ में स्नानार्थियों की संख्या ने 10 करोड़ का आंकड़ा पार किया था। योगी सरकार का अनुमान है कि मौनी अमावस्या पर 10 करोड़ और पूरे महाकुंभ में कुल 45 करोड़ से ज्यादा लोग आएंगे।स्नानार्थियों के जोश और उत्साह में नहीं दिख रही कोई कमी प्रयागराज में श्रद्धालुओं, स्नानार्थियों के जोश और उत्साह में कोई कमी नहीं दिख रही है। पूरे देश और दुनिया से पवित्र त्रिवेणी में श्रद्धा और आस्था के साथ डुबकी लगाकर पुण्य प्राप्त करने के लिए श्रद्धालु प्रतिदिन लाखों की संख्या में प्रयागराज पहुंच रहे हैं। मौनी अमावस्या के सबसे प्रमुख अमृत स्नान को देखते हुए अब यह संख्या करोड़ों में पहुंच रही है। रविवार को रात 8 बजे तक 1.74 करोड़ लोगों ने तो सोमवार को 1.55 करोड़ लोगों ने त्रिवेणी संगम में स्नान कर लिया। इसमें 10 लाख कल्पवासियों के साथ-साथ देश-विदेश से आए श्रद्धालु एवं साधु-संत शामिल रहे। इसके साथ ही महाकुंभ में कुल स्नानार्थियों की संख्या 14.76 करोड़ पहुंच गई।मौनी अमावस्या से पूर्व रविवार को पूरे महाकुंभ मेला क्षेत्र में भक्तों का लगा रहा तांतामौनी अमावस्या को अमृत स्नान से पूर्व रविवार को पूरे महाकुंभ मेला क्षेत्र में भक्तों का तांता लगा रहा। देश के विभिन्न प्रातों और विश्व के कई देशों से आए श्रद्धालुओं ने पवित्र संगम में स्नान किया। संगम के तटों पर इस समय पूरे देश की विविध संस्कृतियों की झलक देखने को मिल रही है। ऊंच-नीच, जात-पात, पंथ से ऊपर उठकर लोग संगम स्नान कर एकता के महाकुंभ के संकल्प को साकार कर रहे हैं।यदि अब तक के कुल स्नानार्थियों की संख्या का विश्लेषण करें तो 27 जनवरी तक 14 करोड़ से ज्यादा लोग संगम में आस्था की डुबकी लगा चुके हैं। सर्वाधिक 3.5 करोड़ श्रद्धालुओं ने मकर संक्रांति के अवसर पर अमृत स्नान किया था, जबकि पौष पूर्णिमा के स्नान पर्व पर 1.7 करोड़ से ज्यादा लोगों ने पावन डुबकी लगाई थी। रविवार को 1.74 करोड़ लोगों ने स्नान किया तो सोमवार को भी ये संख्या 1.5 करोड़ के पार रही।शहरवासियों में भी खुशी की लहरमहाकुंभ में जहां एक ओर करोड़ों लोगों की भीड़ संगम स्नान के लिए पहुंच रही है तो प्रयागराज शहर का आम जनजीवन प्रतिदिन की तरह सुचारू रूप से चल रहा है। स्नानार्थियों का किसी तरह का कोई दबाव शहरी जीवन पर नहीं पड़ रहा है। जिला प्रशासन ने सिर्फ प्रमुख स्नान पर्वों के दिन कुछ बंदिशें लगाई हैं, जबकि बाकी दिन स्कूल, ऑफिस, कारोबार अपनी गति से आगे बढ़ रहे हैं। इससे शहरवासियों में भी खुशी की लहर है।
- अयोध्या । गणतंत्र दिवस पर श्रद्धालुओं का अयोध्या में ऐसा रेला उमड़ा कि हर कोई अचंभित रह गया। रामलला ने अपने पुराने रिकॉर्ड को तोड़ दिया। लाखों की संख्या में लोगों का जमावड़ा लगा हुआ है। जानकारी के मुताबिक, पिछले 30 घंटे में लगभग 25 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन को पहुंच चुके हैं। इसमें बड़ी संख्या में अभी भी श्रद्धालुओं के आने का क्रम जारी है। श्रद्धालु रामलला और हनुमानगढ़ी मंदिर की तरफ ही रुख कर रहे हैं। संभावना जताई जा रही है कि आने वाली अमावस्या, बसंत पंचमी पर्व तक अयोध्या श्रद्धालुओं से खचाखच भरी रहेगी।यूपी सरकार ने बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना की संभावना जताई थीप्रयागराज के महाकुंभ को देखते हुए प्रदेश की यूपी सरकार ने अयोध्या में पहले ही बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई थी। इसे लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यहां अधिकारियों को स्पष्ट कर दिया था कि अयोध्या में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की तकलीफ नहीं होनी चाहिए।मुख्यमंत्री के निर्देशों का पालन करते हुए जिला प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है। भीड़ प्रबंधन को लेकर मंडलायुक्त गौरव दयाल, आईजी प्रवीण कुमार और जिलाधिकारी चंद्र विजय सिंह लगातार मेला क्षेत्रों का निरीक्षण कर रहे हैं। वहीं, राम मंदिर में बैठक कर भीड़ के प्रबंधन का भी इंतजाम कर रहे हैं।सरकार ने अयोध्या में सड़कों का चौड़ीकरण करायाराम मंदिर को देखते हुए सरकार ने अयोध्या में सड़कों का चौड़ीकरण कराया। दिल्ली के कर्तव्य पथ की तरह अयोध्या में करोड़ों की लागत से रामपथ का निर्माण कराया गया, लेकिन संभावना से परे भीड़ पहुंचने के बाद रामपथ भी फुल हो गया। इसके अलावा राम मंदिर को जाने वाला मार्ग जन्मभूमि पथ और हनुमानगढ़ी को जाने वाला भक्तिपथ और धर्मपथ पर श्रद्धालुओं का रेला उमड़ता जा रहा है। अयोध्या की सभी गलियां श्रद्धालुओं से पटी पड़ी हैं।राम मंदिर में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए ट्रस्ट ने अंगद टीला से श्रद्धालुओं के निकास की व्यवस्था की थी, लेकिन भीड़ अप्रत्याशित होता देख तीन नंबर गेट से भी निकासी का रास्ता खोल दिया गया है। हनुमानगढ़ी पर डेढ़ किमी लगी लंबी लाइन को देखते हुए नई लेन तैयार की गई है।अयोध्या में वाहनों का प्रवेश बंद करा दिया गया हैभीड़ प्रबंधन को लेकर जिला प्रशासन की पहल से की गई पहल काफी काम आ रही है। बड़े वाहनों को मौनी अमावस्या को देखते हुए डायवर्जन किया जाना है। हालांकि, अभी से अयोध्या में वाहनों का प्रवेश बंद करा दिया गया है। ठहरने के लिए आश्रय स्थलों में 20 हजार लोगों के लिए व्यवस्था है।नगर आयुक्त संतोष शर्मा ने बताया कि सभी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। चौक-चौराहों पर श्रद्धालुओं के स्वागत को सजावट भी कराई गई है।भीड़ को देखते हुए राम मंदिर और हनुमानगढ़ी पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। महिला पुलिसकर्मियों को भी उतारा गया है। सादी वर्दी में भी पुलिस संदिग्धों पर नजर रखे हुए है। ट्रैफिक कर्मी यातायात को नियंत्रित किए हुए हैं।
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नई दिल्ली। दिल्ली के बुराड़ी इलाके में सोमवार शाम को एक चार मंजिला इमारत गिरने से अब तक 2 लोगों की मौत हो गई है। बताया जा रहा है कि मंगलवार सुबह तक 12 लोगों को राहत एवं बचाव टीम ने बचाया है और घटनास्थल पर रेस्क्यू ऑपरेशन अभी भी जारी है।
दरअसल, बुराड़ी इलाके में सोमवार शाम को एक चार मंजिला इमारत अचानक गिर गई थी। इस हादसे में कई लोग मलबे के नीचे दब गए थे। घटना की जानकारी मिलने के बाद मौके पर पहुंची रेस्क्यू टीम ने बचाव अभियान शुरू किया। दिल्ली पुलिस के डीसीपी राजा बांठिया ने बताया कि यह बिल्डिंग हाल ही में बनी थी और करीब एक से डेढ़ साल पहले इसका निर्माण शुरू हुआ था। इसमें कोई स्थायी निवासी नहीं था, केवल श्रमिकों का आना-जाना था। घटना की जांच की जाएगी और बिल्डर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।उन्होंने कहा कि शाम करीब 6:52 बजे पीसीआर कॉल आई थी कि कौशिक एन्क्लेव, बुराड़ी में एक बिल्डिंग गिर गई है। सूचना मिलते ही पुलिस और फायर टीम मौके पर पहुंची। इस दौरान कौशिक एन्क्लेव में स्थित एक चार मंजिला बिल्डिंग का ढहना पाया गया।इस घटना पर दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी ने दुख जताया। उन्होंने एक्स पर लिखा, “बुराड़ी में इमारत गिरने की यह घटना बेहद दुखद है। मैंने स्थानीय प्रशासन से बात की है कि राहत और बचाव कार्य तेजी से सुनिश्चित किया जाए, प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता दी जाएगी।” - भुवनेश्वर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज मंगलवार सुबह ओडिशा स्थित भुवनेश्वर के जनता मैदान में ‘उत्कर्ष ओडिशा, मेक-इन-ओडिशा कॉन्क्लेव’ का उद्घाटन किया। कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा है, ”पूर्वी भारत देश के विकास में एक ग्रोथ इंजन है। इसमें ओडिशा की अहम भूमिका है।”ग्लोबल ग्रोथ में भारत की बड़ी हिस्सेदारीपीएम ने आगे जोड़ते हुए कहा, इतिहास साक्षी है, जब ग्लोबल ग्रोथ में भारत की बड़ी हिस्सेदारी थी, तब पूर्वी भारत का अहम योगदान था। पूर्वी भारत में देश के बड़े इंडस्ट्रियल हब थे, बड़े पोर्ट्स थे, ट्रेड हब थे। ओडिशा साउथ ईस्ट एशिया में होने वाले ट्रेड का प्रमुख सेंटर हुआ करता था। यहां के प्राचीन पोर्ट्स एक प्रकार से भारत के गेट-वे हुआ करते थे।ओडिशा नए भारत के आशावाद और मौलिकता का प्रतीकउन्होंने कहा, ओडिशा वास्तव में उत्कृष्ट है। ओडिशा नए भारत के आशावाद और मौलिकता का प्रतीक है। ओडिशा अवसरों की भूमि है और यहां के लोगों ने हमेशा बेहतर प्रदर्शन करने का जुनून दिखाया है।भारत ग्रीन फ्यूचर और ग्रीन टेक पर कर रहा ध्यान केंद्रितप्रधानमंत्री मोदी ने कहा, भारत ग्रीन फ्यूचर और ग्रीन टेक पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। सोलर-विंड-हाइड्रो हो, ग्रीन हाइड्रोजन हो ये विकसित भारत की एनर्जी सिक्योरिटी को पावर करने वाले हैं। पीएम मोदी ने कहा, 21वीं सदी के भारत के लिए ये दौर कनेक्टेड इंफ्रास्ट्रक्चर और मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी का है।ओडिशा में पर्यटन की अपार संभावनाएंउन्होंने कहा, ओडिशा में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। आज भारत का फोकस है- ‘वेड इन इंडिया’, आज भारत का मंत्र है- ‘हील इन इंडिया’ और इसके लिए ओडिशा का नेचर यहां की प्राकृतिक सुंदरता बहुत मददगार है। कॉन्सर्ट इकोनॉमी से टूरिज्म बढ़ता है और जॉब्स क्रिएट होती हैपीएम ने कहा, युवा प्रतिभाओं के विशाल समूह और संगीत समारोहों के लिए विशाल दर्शक वर्ग के साथ, भारत में संगीत समारोह अर्थव्यवस्था के विकास की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने अपने शब्दों में कहा, दुनिया के बड़े-बड़े कलाकार, बड़े-बड़े आर्टिस्ट, भारत की तरफ आकृषित हो रहे हैं। कॉन्सर्ट इकोनॉमी से टूरिज्म भी बढ़ता है और बड़ी संख्या में जॉब्स क्रिएट होती है।भारत करोड़ों लोगों की आकांक्षाओं से प्रेरित होकर विकास पथ पर बढ़ रहा आगेपीएम मोदी ने कहा, आज भारत करोड़ों लोगों की आकांक्षाओं से प्रेरित होकर विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, आज भारत विकास के ऐसे पथ पर चल रहा है, जिसको करोड़ों लोगों की एस्पिरेशंस ड्राइव कर रही हैं। एआई.. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ही नहीं बल्कि एस्पिरेशंस ऑफ इंडिया हमारी ताकत है।वहीं सम्मेलन में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने प्रधानमंत्री मोदी की राज्य की लगातार यात्राओं पर प्रकाश डाला, उन्होंने कहा कि पिछले सात महीनों में यह उनकी पांचवीं यात्रा थी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री हमेशा ओडिशा के लिए महत्वपूर्ण पहल करते हैं और इस बार की घोषणा से राज्य के विकास में बड़ा बदलाव आएगा।उल्लेखनीय है, ‘उत्कर्ष ओडिशा, मेक-इन-ओडिशा कॉन्क्लेव’ ओडिशा सरकार द्वारा आयोजित एक प्रमुख वैश्विक निवेश शिखर सम्मेलन है, जिसका उद्देश्य राज्य को पूर्वोदय विजन के केंद्र और भारत में एक प्रमुख निवेश गंतव्य और औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित करना है। ओडिशा का लक्ष्य दो दिवसीय सम्मेलन के माध्यम से पांच लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित करना है, जिसमें 3.5 लाख रोजगार सृजन का अनुमान है।ऐसे में इस कार्यक्रम में निवेश और व्यापार के अवसरों के लिए एक संपन्न केंद्र के रूप में राज्य की अपार क्षमता को प्रदर्शित किया गया है। राज्य एक बड़े औद्योगिक परिवर्तन के लिए तैयार हो रहा है, सम्मेलन का ध्यान औद्योगिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और 2036 तक ओडिशा को देश के शीर्ष पांच आर्थिक राज्यों में स्थान दिलाने पर केंद्रित है। भारत और 12 अन्य देशों के दूतों, निवेशकों और उद्योगपतियों सहित 7,000 से अधिक प्रतिनिधि इस शिखर सम्मेलन में भाग ले रहे हैं।
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आगरा (उप्र). उत्तर प्रदेश में लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर फतेहाबाद थाना इलाके में हुए एक सड़क हादसे में दंपति और दो बच्चों समेत चार लोगों की मौत हो गयी। पुलिस ने सोमवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि मृतकों की पहचान ओमप्रकाश (42), उनकी पत्नी पूर्णिमा सिंह (34), बेटी अहाना (12) और बेटे विनायक (चार) के रूप में हुई है। उसने बताया कि ओमप्रकाश रविवार रात को अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ कुंभ स्नान करके लौट रहे थे तभी आधी रात करीब साढ़े बारह बजे थाना फतेहाबाद इलाके में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे पर उनकी कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई। पुलिस ने बताया कि कार बेकाबू हो गई और डिवाइडर तोड़ते हुए दूसरी तरफ खड़े डीसीएम कैंटर से टकरा गई। उसने बताया कि इस हादसे में ओमप्रकाश और उनके परिवार के तीन अन्य लोगों की मौके पर ही मौत हो गयी।
फतेहाबाद के सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) अमरदीप ने बताया कि शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है।
उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि चालक को झपकी लगने के कारण कार बेकाबू हो गई। मामले की जांच की जा रही है। -
महाकुंभ नगर . केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कहा कि धर्म नगरी प्रयागराज में एकता और अखंडता के इस महापर्व में वह संगम स्नान करने और संतजनों का आशीर्वाद लेने के लिए उत्सुक हैं। शाह ने सोशल मीडिया मंच “एक्स” पर एक पोस्ट में कहा “‘महाकुंभ' सनातन संस्कृति की अविरल धारा का अद्वितीय प्रतीक है। कुंभ समरसता पर आधारित हमारे सनातन जीवन-दर्शन को दर्शाता है।” उन्होंने आगे कहा “आज धर्म नगरी प्रयागराज में एकता और अखंडता के इस महापर्व में संगम स्नान करने और संतजनों का आशीर्वाद लेने के लिए उत्सुक हूँ।” अमित शाह सोमवार को प्रयागराज में महाकुंभ में स्नान करेंगे। गृह मंत्री के पुरी के शंकराचार्य और द्वारका के शंकराचार्य सहित कई संतों से मिलने की उम्मीद है। महाकुंभ 13 जनवरी से शुरू हुआ है और 26 फरवरी तक चलेगा।
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नयी दिल्ली. सर्पदंश की समस्या के “पूरे देश में” व्याप्त होने का उल्लेख करते हुए उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को केंद्र से कहा कि वह सभी राज्यों को साथ लेकर चिकित्सा सुविधाओं में सर्पदंश का उपचार उपलब्ध कराने के लिए “कुछ करे”। न्यायमूर्ति बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति एस.वी.एन. भट्टी की पीठ एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें कहा गया था कि सांप के काटने के इलाज में महत्वपूर्ण ‘विष रोधी' (एंटी-वेनम) की कमी के कारण देश एक बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का सामना कर रहा है। पीठ ने केंद्र के वकील से कहा, “आप राज्यों को भी इसमें शामिल कर सकते हैं। समस्या पूरे देश में है।”
इसमें आगे कहा गया, “आप सभी राज्यों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर कुछ करने का प्रयास कर सकते हैं। यह कोई विरोधात्मक मुकदमा नहीं है।” केन्द्र के वकील ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर उठाए गए कदमों की जानकारी रिकार्ड में रखेगी। कुछ राज्यों के वकीलों ने कहा कि वे इस मामले में अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करेंगे, जिसके बाद पीठ ने उन्हें छह सप्ताह का समय दिया और मामले की सुनवाई उसके बाद के लिए स्थगित कर दी। पिछले साल 13 दिसंबर को सर्वोच्च न्यायालय ने वकील शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी द्वारा दायर याचिका पर केंद्र और अन्य से जवाब मांगा था। याचिका में पीड़ितों की जान बचाने के लिए स्वास्थ्य केंद्रों, सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में ‘विष रोधी' और सर्पदंश उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। अधिवक्ता चांद कुरैशी के माध्यम से दायर याचिका में तर्क दिया गया कि विश्व में सर्पदंश से होने वाली मौतों की सबसे अधिक दर वाले देश भारत में हर साल लगभग 58,000 मौतें होती हैं। इसमें तर्क दिया गया कि, “इतनी अधिक मृत्यु दर के बावजूद, एंटीवेनम (पॉलीवेनम) की कमी है।”
याचिका में कहा गया है कि देश के कई ग्रामीण क्षेत्रों में ‘विष रोधी' दवा का पर्याप्त स्टॉक नहीं है, जिसके कारण सर्पदंश पीड़ितों के उपचार में देरी होती है। इसलिए याचिका में सर्पदंश रोकथाम स्वास्थ्य मिशन चलाने और विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में मृत्यु दर को कम करने के लिए जन जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश देने का अनुरोध किया गया। याचिका में सरकारी जिला अस्पतालों और चिकित्सा महाविद्यालयों में मानक चिकित्सा मानदंडों के अनुसार विशेष प्रशिक्षित डॉक्टरों के साथ सर्पदंश उपचार और देखभाल इकाइयां स्थापित करने के निर्देश देने का अनुरोध भी किया गया है।








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