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देहरादून. उत्तराखंड में सोमवार को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू कर दी गयी जिसके साथ ही यह स्वतंत्र भारत में ऐसा करने वाला पहला राज्य बन गया है। यहां मुख्यमंत्री आवास में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिसूचना जारी कर यूसीसी को लागू किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने इसके क्रियान्वयन के लिए नियमावली तथा विवाह, तलाक, सहवासी संबंध के अनिवार्य आनलाइन पंजीकरण हेतु एक पोर्टल की शुरुआत की। पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने यूसीसी लाने का वादा किया और इसकी शुरुआत के मौके पर राज्य मंत्रिमंडल के सदस्य, विधायक और अनेक नेता मौजूद थे। यूसीसी पोर्टल पर सबसे पहले मुख्यमंत्री ने अपने विवाह का पंजीकरण कराया। कार्यक्रम में मौजूद प्रदेश की मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने उनके विवाह पंजीकरण का प्रमाणपत्र उन्हें सौंपा। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने यूसीसी के तहत पंजीकरण कराने वाले पांच व्यक्तियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि यह केवल उत्तराखंड के लिए नहीं बल्कि पूरे देश के लिए ऐतिहासिक दिन है। उन्होंने कहा, ‘‘इसी क्षण से उत्तराखंड में पूरी तरह से यूसीसी लागू हो गयी है और प्रदेश के सभी नागरिकों के संवैधानिक और नागरिक अधिकार एक समान हो गए हैं।'' मुख्यमंत्री ने यूसीसी का पूरा श्रेय राज्य की जनता को देते हुए कहा कि यह उनके लिए भावनात्मक क्षण है कि उन्होंने 2022 में जनता से जो वायदा किया था, उसे वह पूरा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड से यूसीसी की गंगा निकालने का श्रेय केवल जनता को जाता है । धामी ने कहा कि उनकी पार्टी ने अपने सभी वैचारिक संकल्पों जैसे जम्मू—कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाना, तीन तलाक समाप्त करना, सीएए लागू करना और अयोध्या में भव्य राममंदिर बनाने को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पूरा कर लिया है। उन्होंने कहा कि अब केवल यूसीसी का संकल्प बचा था जिसे उत्तराखंड में लागू करके उसे भी पूरा करने की दिशा में अपने कदम बढ़ा दिये हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि जिस प्रकार से पतित पावनी मां गंगा उत्तराखंड से निकलकर पूरे देश को जीवन देने का काम करती है, उसी प्रकार से उत्तराखंड से निकली यूसीसी की गंगा की धारा सभी देशवासियों को निकट भविष्य में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी । मुख्यमंत्री ने इस बात को फिर दोहराया कि यूसीसी किसी भी धर्म या पंथ के खिलाफ नहीं है और इसके जरिए किसी को निशाना नहीं बनाया जा रहा है। धामी ने कहा, ‘‘किसी को टारगेट करने जैसी कोई बात नहीं है। यह समाज की कुप्रथाओं को मिटाकर सभी नागरिकों में समानता से समरसता स्थापित करने का एक कानूनी प्रयास है।'' उन्होंने कहा कि कानून के माध्यम से किसी भी धर्म की मूल मान्यताओं और प्रथाओं को नहीं बदला गया है और केवल कुप्रथाओं को दूर किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रमुख मुस्लिम देशों सहित विश्व के सभी सभ्य देशों में पहले से ही समान नागरिक संहिता लागू है । समान नागरिक संहिता को धर्म, जाति, लिंग के आधार पर होने वाले भेदभाव को समाप्त करने का एक संवैधाानिक उपाय बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे सभी धर्म की महिलाओं को भी समान अधिकार प्राप्त हो गए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘इसके लागू होने से प्रदेश में सच्चे अर्थों में महिला सशक्तिकरण और सुरक्षा सुनिश्चित होगी। इसके द्वारा हलाला, इददत, बहुविवाह और तीन तलाक जैसी कुप्रथाओं पर पूरी तरह से रोक लगायी जा सकेगी।'' उन्होंने कहा कि इस कानून में सभी धर्मों के लोगों के लिए विवाह, विवाह-विच्छेद एवं उत्तराधिकार से संबंधित नियमों को समान कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी धर्मों के लोग अपने रीति रिवाजों के माध्यम से विवाह कर सकते हैं और इसमें कोई परिवर्तन नहीं किया गया है, लेकिन सभी धर्मों में विवाह की न्यूनतम उम्र लड़कों के लिए 21 वर्ष और लड़कियों के लिए 18 वर्ष तय कर दी गयी है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा, सभी धर्मों में पति या पत्नी के जीवित रहते हुए दूसरे विवाह को पूर्णत: प्रतिबंधित कर दिया गया है। धामी ने कहा कि यूसीसी के तहत सभी धर्मों और समुदायों में बेटी को भी संपत्ति में समान अधिकार मिलेगा जबकि संपत्ति के अधिकार में बच्चों में किसी प्रकार का भेद नहीं किया जाएगा चाहे वे विवाह से उत्पन्न हुए हों या सहवासी संबंध से। जनजातियों को यूसीसी के दायरे से बाहर रखे जाने पर उठ रहे सवालों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 342 के तहत वर्णित जनजातियों को इस संहिता से बाहर रखा गया है ताकि उनके रीति रिवाजों का संरक्षण किया जा सके। उन्होंने कहा कि वैसे भी संविधान में उन्हें कुछ विशेषाधिकार मिले हुए हैं । उन्होंने यूसीसी तैयार करने के लिए उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति का आभार जताया जिन्होंने अधिनियम का मसौदा तैयार करने में दो लाख 35 हजार से ज्यादा लोगों से सुझाव लिए। उन्होंने प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह सहित अधिनियम की नियमावली बनाने वाली समिति का भी आभार जताया । उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी उनके मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद दिया । मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उत्तराखंड में यूसीसी लागू करके हम संविधान निर्माता बाबा साहेब भीम राव आंबेडकर सहित संविधान सभा के सभी सदस्यों को अपनी सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। धामी ने इस मौके पर 27 जनवरी की तारीख को उत्तराखंड में हर साल समान नागरिक संहिता दिवस के रूप में मनाए जाने की घोषणा की। उत्तराखंड में यूसीसी को लागू करना प्रदेश में 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान सत्ताधारी भाजपा द्वारा किए गए प्रमुख वादों में से एक है। मार्च 2022 में दोबारा सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में मंत्रिमंडल की पहली ही बैठक में यूसीसी प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए उसका मसौदा तैयार करने के लिए विशेषज्ञ समिति के गठन पर मुहर लगा दी गयी थी। न्यायमूर्ति देसाई की अध्यक्षता में 27 मई 2022 को विशेषज्ञ समिति गठित की गयी जिसने लगभग डेढ़ साल की मेहनत से राज्य में विभिन्न वर्गों से बातचीत के आधार पर चार ‘वाल्यूम' में तैयार अपनी विस्तृत रिपोर्ट दो फरवरी 2024 को राज्य सरकार को सौंपी । इसके आधार पर सात फरवरी 2024 को राज्य विधानसभा के विशेष सत्र में यूसीसी विधेयक पारित कर दिया गया। इसके एक महीने बाद 12 मार्च 2024 को राष्ट्रपति ने भी विधेयक को अपनी मंजूरी दे दी । इसके बाद अधिनियम को लागू करने के लिए उसकी नियमावली तैयार की गयी जिसे हाल ही में राज्य मंत्रिमंडल ने अपनी मंजूरी दे दी थी। इसी के साथ यूसीसी के लागू होने का रास्ता साफ हो गया।
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नयी दिल्ली. नागर विमानन मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि प्रयागराज की उड़ानों के किराये को युक्तिसंगत बनाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। मंत्रालय ने कहा कि महाकुंभ के मद्देनजर बढ़ी हुई यातायात मांग को पूरा करने के लिए उड़ानों की संख्या बढ़ा दी गई है। प्रयागराज में 26 फरवरी तक महाकुंभ चलेगा। प्रयागराज के लिए हवाई किराये में बढ़ोतरी को लेकर चिंताओं के बीच, विमानन नियामक डीजीसीए के अधिकारियों ने पिछले हफ्ते एयरलाइन प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। इस दौरान उनसे उड़ानें बढ़ाने और टिकट की कीमतों को युक्तिसंगत बनाने का आग्रह किया गया। इस समय विभिन्न भारतीय शहरों से प्रयागराज के लिए लगभग 80,000 मासिक सीटों के साथ 132 उड़ानें संचालित हो रही हैं। शहर दिसंबर, 2024 में आठ शहरों से सीधे जुड़ा था, जबकि अब इस संख्या बढ़कर 17 हो गई है। मंत्रालय ने बयान में कहा कि श्रीनगर और विशाखापत्तनम सहित 26 शहर सीधी और ठहराव के साथ उड़ानों के जरिये प्रयागराज से जुड़े हैं। बयान के मुताबिक, नागर विमानन मंत्री के राम मोहन नायडू ने एयरलाइन कंपनियों से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि खासतौर से स्नान पर्वों के दौरान हवाई किराये नियंत्रण में रहें। इसमें कहा गया कि नायडू के निर्देशों के अनुसार विशेष स्नान पर्व के दौरान हवाई किराये पर नियंत्रण रहे, इसलिए डीजीसीए ने एयरलाइन कंपनियों को यात्रियों को समायोजित करने के लिए पर्याप्त क्षमता सुनिश्चित करने की सलाह दी है। ऐसे में अकासा एयर 28 और 29 जनवरी को अहमदाबाद से विशेष उड़ानें संचालित करेगी। फरवरी में अहमदाबाद से नौ उड़ानें और बेंगलुरु से प्रयागराज के लिए 12 उड़ानें संचालित करने की योजना है। स्पाइसजेट फरवरी, 2025 में दिल्ली, चेन्नई, गुवाहाटी, बेंगलुरु, अहमदाबाद, मुंबई, जयपुर और हैदराबाद से प्रयागराज के बीच उड़ान सेवा शुरू करने की तैयारी में है।
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प्रयागराज । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज सोमवार को अपने परिवार के साथ प्रयागराज के महाकुंभ नगर स्थित पवित्र अक्षयवट मंदिर पहुंचे। उनके साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्य दो उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक भी मौजूद रहे। अक्षयवट मंदिर में मुख्य पुजारी ने वेद मंत्रों का उच्चारण कर पूजा-अर्चना की।इस मौके पर अमित शाह और उनके परिवार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मिलकर अक्षयवट आरती में भाग लिया और प्रार्थना की। इसके बाद अमित शाह ने मुख्यमंत्री और संत समाज के सदस्यों के साथ अक्षयवट की परिक्रमा की। उन्होंने आगामी महाकुंभ कार्यक्रमों की तैयारियों पर भी चर्चा की।
अमित शाह के परिवार जिसमें उनकी पत्नी सोनल शाह, बेटा जय शाह, बहू और पोते-पोतियां शामिल थे ने भी धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। गौरतलब है कि अक्षयवट का धार्मिक महत्व काफी ज्यादा है जैसा हिंदू ग्रंथों जैसे पुराणों और महाभारत में भी उल्लखित है। माना जाता है कि भगवान राम ने अपने 14 वर्ष के वनवास के दौरान इस पेड़ के नीचे ध्यान किया था। इससे पहले अमित शाह ने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दो उपमुख्यमंत्रियों और साधु-संतों के साथ संगम में स्नान किया और अपने परिवार के साथ-साथ नागरिकों की भलाई के लिए प्रार्थना की। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बातचीत की इस दौरान उनके दूसरे कार्यकाल के लिए बधाई दी। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच एक भरोसेमंद और लाभकारी संबंध है। दोनों देश मिलकर वैश्विक शांति, समृद्धि और सुरक्षा के लिए काम करेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप को “मेरा प्रिय मित्र” कहकर संबोधित किया। यह बातचीत राष्ट्रपति ट्रंप के 20 जनवरी को दूसरे कार्यकाल के लिए शपथ ग्रहण के बाद दोनों नेताओं के बीच पहली बार हुई।प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा “अपने प्रिय मित्र राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात करके खुशी हुई। उनके ऐतिहासिक दूसरे कार्यकाल पर उन्हें बधाई दी। हम एक भरोसेमंद और लाभकारी साझेदारी के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम अपने लोगों के कल्याण और वैश्विक शांति, समृद्धि और सुरक्षा के लिए साथ काम करेंगे।”गौरतलब है कि राष्ट्रपति ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री मोदी की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने विशेष दूत के रूप में भाग लिया था। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी का एक विशेष पत्र भी राष्ट्रपति ट्रंप को सौंपा।वहीं राष्ट्रपति ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत पर ही प्रधानमंत्री मोदी ने शुभकामनाएं भेजी थीं। उन्होंने लिखा “मेरे प्रिय मित्र राष्ट्रपति @realDonaldTrump को अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के रूप में ऐतिहासिक शपथ ग्रहण के लिए बधाई! मैं फिर से आपके साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हूं ताकि हमारे दोनों देशों का लाभ हो और दुनिया के लिए एक बेहतर भविष्य बनाया जा सके। आपके सफल कार्यकाल की शुभकामनाएं।” -
- मानव कोशिकाओं और पर्यावरण में आसानी से लगाएगा पारे का पता
नई दिल्ली। आईआईटी गुवाहाटी के वैज्ञानिकों ने आज 27 जनवरी को बताया कि उन्होंने एक खास तरीके का नैनोमटेरियल विकसित किया है जो पारे जैसे खतरनाक धातु का सटीक तरीके से पता लगा सकता है। यह तकनीक न केवल मानव शरीर की कोशिकाओं में बल्कि पर्यावरण में भी पारे की मौजूदगी का पता लगाने में मदद करेगी।पारा एक जहरीला धातु है जो दूषित पानी, भोजन, हवा या त्वचा के संपर्क से शरीर में प्रवेश कर तंत्रिका तंत्र, किडनी और दिल जैसे अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में आईआईटी गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने एक खास धातु हैलाइड पेरोवस्काइट नैनोक्रिस्टल्स तैयार किए हैं जो पारे की पहचान करने के साथ-साथ मानव कोशिकाओं को कोई नुकसान भी नहीं पहुंचाते।कैसे काम करता है यह नैनोमटेरियल?आईआईटी गुवाहाटी के भौतिकी विभाग के प्रोफेसर सैकत भौमिक ने बताया कि ये नैनोक्रिस्टल्स बहुत संवेदनशील हैं और पारे की थोड़ी-सी मात्रा का भी पता लगा सकते हैं। पारंपरिक इमेजिंग तकनीकें अक्सर कोशिकाओं की गहराई में साफ तस्वीरें नहीं खींच पातीं लेकिन इन नैनोक्रिस्टल्स में मल्टीफोटॉन एब्जॉर्प्शन की क्षमता अधिक है इससे कोशिकाओं की गहराई तक स्पष्ट और विस्तृत तस्वीरें ली जा सकती हैं।ये नैनोक्रिस्टल्स एक खास तरह की हरी रोशनी उत्सर्जित करते हैं जिससे पारे का पता आसानी से लगाया जा सकता है। इसे और स्थिर बनाने के लिए सिलिका और पॉलिमर की कोटिंग की गई है जिससे ये पानी में लंबे समय तक चमक और अपनी क्षमता बनाए रखते हैं। यह नैनोमटेरियल सिर्फ पारे की पहचान तक सीमित नहीं है। इसे अन्य जहरीले धातुओं की पहचान, दवाओं के वितरण, और इलाज की प्रभावशीलता को रीयल-टाइम में मॉनिटर करने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। -
नई दिल्ली। उत्तराखंड ‘समान नगारिक संहिता’ (यूसीसी) लागू करने करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। सीएम आवास के मुख्य सेवक सदन में सोमवार को एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। ‘समान नागरिक संहिता उत्तराखंड- 2024’ को लागू किए जाने पर नियमावली और पोर्टल का लोकार्पण किया। इसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यूसीसी किसी धर्म के खिलाफ नहीं बल्कि सबके लिए है।
आज का दिन न केवल हमारे उत्तराखंड, बल्कि पूरे भारत के लिए ऐतिहासिक हैसीएम धामी ने कहा कि आज का दिन न केवल हमारे उत्तराखंड, बल्कि पूरे भारत के लिए ऐतिहासिक है, क्योंकि आज हम समानता स्थापित करने के मकसद से बनाई ‘समान नागरिक संहिता’ को देवभूमि उत्तराखंड में लागू करने जा रहे हैं। मैं उन सभी का धन्यवाद करता हूं, जिन्होंने ‘समान नागरिक संहिता’ को बनाने की दिशा में अपना अहम योगदान दिया।उन्होंने कहा, “यूसीसी बनाने वाली हमारी टीम ने 2 लाख 35 हजार लोगों को इससे जोड़ने का प्रयास किया। इस संबंध में सभी राजनीतिक दलों से सुझाव भी लिए गए। लेकिन, सही मायने में अगर इस गंगा को निकालने का श्रेय किसी को जाता है, तो वह देवभूमि उत्तराखंड है।”उत्तराखंड की जनता ने हमें इसके लिए अपना आशीर्वाद दियासीएम धामी ने आगे कहा कि उत्तराखंड की जनता ने हमें इसके लिए अपना आशीर्वाद दिया। आज यूसीसी लागू करके हम लोग संविधान निर्माता बाबा भीमराव अंबेडकर को श्रद्धासुमन अर्पित करते हैं। हमने जनता से किया हुआ अपना वादा पूरा किया है।यूसीसी महिलाओं को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाएगापुष्कर धामी के अनुसार यूसीसी महिलाओं को सशक्त बनाने में यह अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा, “यूसीसी से महिलाएं सशक्त होंगी और हलाला, बहुविवाह जैसी कुप्रथा पर रोक लगेगी। यूसीसी से समाज में एकरूपता आएगी। इससे सभी नागरिकों के अधिकार और दायित्व एक समान होंगे।”जो कहा, वो कियाउल्लेखनीय है कि 2022 के चुनाव से एक दिन पहले सीएम धामी ने यूसीसी की घोषणा की थी। सरकार बनाने के बाद मार्च 2022 की पहली कैबिनेट में समिति गठन को मंजूरी दी गई। इसे लेकर समिति ने ढाई लाख लोगों से 20 लाख सुझाव ऑफलाइन और ऑनलाइन प्राप्त किए थे। - प्रयागराज । इंटरनेशनल स्पेस सेंटर (आईएसएस) ने रविवार रात को अंतरिक्ष से महाकुम्भ की आश्चर्यचकित कर देने वाली तस्वीरें कैद की हैं। इन तस्वीरों में महाकुंभ मेले का अद्भुत नजारा देखने को मिला। इसमें गंगा नदी के तट पर दुनिया का सबसे बड़ा मानव समागम रौशनी से जगमगा रहा है। इन तस्वीरों को आईएसएस से एस्ट्रोनॉट डॉन पेटिट ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर शेयर किया है।प्रयागराज से आ रही तस्वीरों को देखकर पूरी दुनिया विस्मितमहाकुम्भ दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन है, जिसमें लाखों श्रद्धालु गंगा नदी में डुबकी लगाकर आध्यात्मिक शांति प्राप्त करते हैं। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु संगम स्नान कर इस सुखद और धार्मिक अनुभूति को महसूस कर सकें हैं। प्रयागराज से आ रही तस्वीरों को देखकर पूरी दुनिया विस्मित है। महाकुम्भ मेला को सिर्फ जमीन से ही नहीं बल्कि अंतरिक्ष से भी कैप्चर किया जा रहा है।गंगा नदी के किनारे अनोखे दृश्यअंतरिक्ष से ली गई यह तस्वीरें पृथ्वी पर इस धार्मिक आयोजन की विशालता को दर्शा रही हैं। तस्वीरों में महाकुम्भ मेले की भव्य रौशनी और विशाल मानव भीड़ ने गंगा नदी के किनारे को अनोखे दृश्य में बदल दिया।तस्वीरें महाकुम्भ को लेकर पूरी दुनिया का ध्यान खींचने वाली हैंअंतरिक्ष से ली गईं ये तस्वीरें महाकुम्भ को लेकर पूरी दुनिया का ध्यान खींचने वाली हैं। डॉन पेटिट ने तस्वीरें साझा करते हुए लिखा है कि अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से खींची गई तस्वीरों में 2025 के महाकुंभ मेले का अद्भुत नजारा देखने को मिला। गंगा नदी के तट पर दुनिया का सबसे बड़ा मानव समागम रौशनी से जगमगा रहा था।अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री ने इन तस्वीरों को खींचाआपको बता दें, अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री और केमिकल इंजीनियर डोनाल्ड रॉय पेटिट, जो अपनी कक्षा में खगोल-फोटोग्राफी और इनोवेशन के लिए मशहूर हैं। उन्होंने इन तस्वीरों को खींचा। पेटिट अंतरिक्ष में बनाई गई पहली पेटेंटेड वस्तु “जीरो जी कप” के आविष्कारक भी हैं। पेटिट विगत 555 दिनों से आईएसएस में हैं और 69 वर्ष की आयु में नासा के सबसे वृद्ध सक्रिय एस्ट्रोनॉट हैं।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के 76वें गणतंत्र दिवस पर दी गई बधाई और शुभकामनाओं के लिए वैश्विक नेताओं का आभार प्रकट किया है। पीएम मोदी ने आज (सोमवार) भारत के 76वें गणतंत्र दिवस पर शुभकामनाओं के लिए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और आयरलैंड के प्रधानमंत्री माइकल मार्टिन को धन्यवाद दिया। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर फ्रांस के राष्ट्रपति से कहा कि पर हम जल्द ही पेरिस में एआई एक्शन समिट में मिलेंगे। वहीं, थाईलैंड की प्रधानमंत्री पेटोंगटारन शिनावात्रा को धन्यवाद देते हुए एक्स पर उनकी एक पोस्ट के जवाब में उन्होंने कहा कि थाईलैंड के साथ हमारे बहुत ही अहम हैं। क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और लोगों से लोगों का जुड़ाव बढ़ाने पर निरंतर सहयोग की उम्मीद करता हूं।
पीएम मोदी ने कहा-हम जल्द ही पेरिस में एआई एक्शन समिट में मिलेंगेप्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के 76वें गणतंत्र दिवस पर शुभकामनाओं के लिए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और आयरलैंड के प्रधानमंत्री माइकल मार्टिन को धन्यवाद दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर फ्रांस के राष्ट्रपति के किए एक पोस्ट का जवाब देते हुए पीएम मोदी ने कहा, “मेरे प्रिय मित्र राष्ट्रपति @EmmanuelMacron. भारत के 76वें गणतंत्र दिवस पर आपकी शुभकामनाएं बहुत ही सराहनीय हैं। पिछले साल इस अवसर पर आपकी गरिमामयी उपस्थिति वास्तव में हमारी रणनीतिक साझेदारी और स्थायी मित्रता में एक महत्वपूर्ण पल था। मानवता के बेहतर भविष्य के लिए हम जल्द ही पेरिस में एआई एक्शन समिट में मिलेंगे।”कल 26 जनवरी, गणतंत्र दिवस के अवसर पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने पीएम मोदी को गणतंत्र दिवस की बधाई देते हुए एक्स पर एक पोस्ट में कहा था कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए कार्रवाई पर शिखर सम्मेलन के लिए फरवरी में फ्रांस में आपसे मिलने की उम्मीद है।आयरलैंड के प्रधानमंत्री के पोस्ट का जवाब देते हुए पीएम मोदी ने कहावहीं, एक्स पर आयरलैंड के प्रधानमंत्री के पोस्ट का जवाब देते हुए पीएम मोदी ने कहा, “प्रधानमंत्री @MichealMartinTD, शुभकामनाओं के लिए आपको धन्यवाद। मुझे पूरा विश्वास है कि लोकतंत्र में साझा विश्वास और आस्था पर आधारित भारत और आयरलैंड के बीच दोस्ती के स्थायी बंधन आने वाले समय में और मजबूत होते रहेंगे।”बधाई और शुभकामनाओं के लिए पड़ोसी देशों के प्रधानमंत्रियों का आभार प्रकट कियाआपको बता दें रविवार को प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के 76वें गणतंत्र दिवस पर दी गई बधाई और शुभकामनाओं के लिए वैश्विक नेताओं का आभार प्रकट किया। पड़ोसी देश नेपाल के प्रधानमंत्री द्वारा एक्स पर किये गए एक पोस्ट के प्रति उत्तर में प्रधानमंत्री ने एक्स पर कहा था कि भारत अपने गणतंत्र के 75 वर्ष पूरे कर रहा है, हम दोनों देशों के लोगों के बीच मित्रता के ऐतिहासिक बंधन को बड़ी गहराई से संजोते हैं। मुझे विश्वास है कि आने वाले समय में यह और भी सशक्त होगा।इसके अलावा प्रधानमंत्री ने मॉलदीव के राष्ट्रपति द्वारा एक्स पर किये गए पोस्ट को साझा करते हुए अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि भारत के गणतंत्र दिवस पर आपकी शुभकामनाओं के लिए राष्ट्रपति @MMuizzu आपका धन्यवाद। मैं भारत और मॉलदीव के बीच दीर्घकालिक साझेदारी के बारे में आपकी भावना से पूरी तरह सहमत हूं। हम मित्रता एवं सहयोग की इन साझेदारियों को और गहरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।भूटान के प्रधानमंत्री द्वारा एक्स पर की गई पोस्ट के प्रति उत्तर में पीएम मोदी ने इस तरह अपने विचारों को व्यक्त किया। उन्होंने एक्स पर कहा कि हम भारत और भूटान के बीच अद्वितीय एवं विशेष साझेदारी को बहुत अधिक महत्व देते हैं।थाईलैंड की प्रधानमंत्री पेटोंगटारन शिनावात्रा को दिया धन्यवादरविवार को एक्स पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के 76वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर शुभकामनाएँ देने के लिए थाईलैंड की प्रधानमंत्री पेटोंगटारन शिनावात्रा को धन्यवाद दिया। एक्स पर थाईलैंड की प्रधानमंत्री की एक पोस्ट का जवाब देते हुए, पीएम मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री सुश्री पेटोंगटारन शिनावात्रा आपकी शुभकामनाओं की हार्दिक सराहना करते हैं क्योंकि हम भारतीय गणतंत्र के गौरवशाली 75 वर्ष का जश्न मना रहे हैं। थाईलैंड के साथ हमारे बहुत ही अहम हैं। क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और लोगों से लोगों का जुड़ाव बढ़ाने पर निरंतर सहयोग की उम्मीद करता हूं। - प्रयागराज । प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ में धर्म संसद की शुरुआत हो रही है। ऐसे में अभिनेता सुनील शेट्टी ने सोमवार को देशभर के हिंदुओं से उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ में आध्यात्मिक गुरु और भागवत कथा वाचक देवकीनंदन ठाकुरजी महाराज द्वारा आयोजित धर्म संसद में शामिल होने की अपील की।सनातन बोर्ड की स्थापना के लिए जोरसुनील शेट्टी ने खुद रिकॉर्ड किए गए एक वीडियो में लोगों से धर्म संसद में शामिल होने का आग्रह किया और इस बात पर जोर दिया कि इस आयोजन का मुख्य लक्ष्य हिंदू मंदिरों, गुरुकुलों और गौशालाओं की सुरक्षा के उद्देश्य से सनातन बोर्ड की स्थापना के लिए दबाव बनाना है।अभिनेता ने कहा, “प्रयागराज महाकुंभ में एक ऐतिहासिक क्षण आने वाला है; सनातन बोर्ड की स्थापना के लिए एक आंदोलन के तहत 27 जनवरी को करोड़ों लोग सनातन धर्म की भक्ति में एकजुट होंगे।” उन्होंने सामूहिक कार्रवाई का आह्वान करते हुए कहा, “यह हमारे मंदिरों, गुरुकुलों और गौशालाओं की रक्षा के लिए है। इसलिए आइए हम सब भक्ति और प्रतिबद्धता के साथ एकजुट हों; ‘शांति सेवा शिविर प्रयागराज’ में हमारे साथ जुड़ें।”बीजेपी सांसद हेमा मालिनी ने किया समर्थनवहीं बीजेपी सांसद हेमा मालिनी ने भी इस आयोजन के लिए अपना समर्थन व्यक्त किया, उन्होंने कहा कि धर्म संसद का आयोजन देवकीनंदन ठाकुरजी महाराज द्वारा सनातन बोर्ड के गठन और सनातन धर्म की सुरक्षा पर चर्चा के लिए किया जा रहा है।बीजेपी सांसद ने कहा, “यह सभी सनातनियों के लिए सौभाग्य की बात है कि प्रयागराज में 144 वर्षों के बाद महाकुंभ हो रहा है। 27 जनवरी को देवकीनंदन ठाकुरजी महाराज के नेतृत्व में सनातन बोर्ड के गठन और सनातन धर्म की सुरक्षा पर चर्चा के लिए धर्म संसद का आयोजन किया जा रहा है।”देवकीनंदन ठाकुर महाराज ने कार्यक्रम का उद्देश्य दोहराते हुए कहा, “हम सभी चाहते हैं कि सनातन बोर्ड का गठन हो। हम सरकार के समक्ष प्रस्ताव रख रहे हैं। सभी धर्माचार्य चाहते हैं कि सनातन का कल्याण हो और मंदिर सुरक्षित रहें- इसके लिए धर्म संसद शुरू होने वाली है। मैं इसकी तैयारियों की देखरेख करने जा रहा हूं। बड़ी संख्या में लोग आ रहे हैं।”इस कार्यक्रम में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज, जगद्गुरु निम्बार्काचार्य श्रीजी महाराज, आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज, महामंडलेश्वर संतोष दास जी महाराज, सतुआ बाबा जी, जगद्गुरु राघवाचार्य जी महाराज सहित कई प्रमुख संतों, गुरुओं और सनातन नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है।
- प्रयागराज । प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने आज सोमवार को संगम में आस्था की डुबकी लगाई। उनके साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक भी मौजूद रहे। जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि और योग गुरु बाबा रामदेव ने भी इस स्नान में भाग लिया। स्नान के बाद अमित शाह ने लेटे हनुमान मंदिर में दर्शन और पूजन किया।महाकुंभ में अमित शाह करीब पांच घंटे तक रहे और इस दौरान उन्होंने संगम पर स्नान के साथ-साथ श्रद्धालुओं और संतों से संवाद भी किया। अमित शाह के बेटे जय शाह भी परिवार के साथ महाकुंभ पहुंचे और सभी ने संगम में स्नान किया।गौरतलब है कि महाकुंभ में श्रद्धालुओं का आना लगातार जारी है। उत्तर प्रदेश सूचना विभाग के मुताबिक, अब तक 13.21 करोड़ से ज्यादा लोग संगम में डुबकी लगा चुके हैं। यह आंकड़ा दिन-प्रतिदिन तेजी से बढ़ता ही रहा है। वहीं महाकुंभ ने “वसुधैव कुटुंबकम” का संदेश दिया है जहां देश-विदेश से आए लोग जाति-धर्म की सीमाओं को पार कर संगम में एक साथ स्नान कर रहे हैं। इस बार महाकुंभ में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। सड़क, रेल और हवाई मार्ग से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। सुरक्षा के लिए एआई तकनीक, सीसीटीवी कैमरे और खोया-पाया केंद्र सक्रिय हैं। चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात है जिससे महाकुंभ को सुरक्षित और सुगम बनाया जा सके।
- प्रयागराज । महापर्व महाकुंभ का दिव्य-भव्य आयोजन प्रयागराज में संगम तट पर हो रहा है। महाकुंभ में त्रिवेणी संगम में पवित्र स्नान करने प्रतिदिन लाखों, करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु प्रयागराज आ रहे हैं। महाकुंभ में अब तक 13 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु संगम में स्नान कर चुके हैं। आगामी 29 जनवरी को महाकुंभ के सबसे बड़े अमृत स्नान मौनी अमावस्या की तैयारी हो रही है।मौनी अमावस्या के पर्व पर 10 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए प्रयागराज रेल मंडल ने भी विशेष प्रबंध किए हैं। मौनी अमावस्या पर्व के दिन प्रयागराज रेल मंडल ने शहर के सभी स्टेशनों पर यात्रियों के आने और जाने के लिए विशेष योजना बनाई है।मौनी अमावस्या के अमृत स्नान पर लगभग 10 करोड़ लोगों के प्रयागराज आने का अनुमान व्यक्त किया जा रहा है। 25 जनवरी से ही लगभग 1 करोड़ यात्री प्रतिदिन महाकुंभ में आने लगे हैं। इतनी भारी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा और उनकी सुगम निकासी के लिए प्रयागराज रेल मंडल ने शहर के सभी स्टेशनों के लिए विशेष योजना और कुछ प्रतिबंध लागू किए हैं। ये प्रतिबंध मौनी अमावस्या के स्नान पर्व के एक दिन पहले और दो दिन बाद तक लागू रहेंगे।मौनी अमावस्या के स्नान पर्व के दिन प्रयागराज जंक्शन पर प्रवेश केवल सिटी साइड, प्लेटफॉर्म नंबर 1 की ओर से दिया जाएगा। निकास केवल सिविल लाइंस साइड, प्लेटफार्म न. 6 की ओर से होगा। आरक्षित यात्रियों, जिनका पहले से टिकट रिजर्व है, उन्हें सिटी साइड के गेट नंबर 5 से अलग से प्रवेश दिया जाएगा। जबकि, अनारक्षित यात्रियों को दिशावार कलर कोडेडे आश्रय स्थलों के माध्यम से प्रवेश कराया जाएगा।टिकट के लिए आश्रय स्थलों में ही अनारक्षित टिकट काउंटर, एटीवीएम और मोबाइल टिकटिंग की व्यवस्था रहेगी। भीड़ के अतिरिक्त दबाव का प्रबंधन करने के लिए खुसरो बाग में 1 लाख लोगों के ठहरने के लिए होल्डिंग एरिया का निर्माण किया गया है।मौनी अमावस्या पर्व पर नैनी जंक्शन में प्रवेश केवल स्टेशन रोड से और निकास केवल मालगोदाम की ओर से होगा। आरक्षित यात्रियों को गेट नंबर 2 से अलग से प्रवेश दिया जाएगा। वहीं, प्रयागराज छिवकी स्टेशन पर प्रवेश केवल प्रयागराज-मिर्जापुर राजमार्ग को जोड़ने वाले सीओडी मार्ग से और निकास केवल जीईसी नैनी रोड की ओर से होगा।आरक्षित यात्री गेट नंबर 2 से प्रवेश करेंगे। सूबेदारगंज स्टेशन में प्रवेश झलवा, कौशाम्बी रोड की ओर से होगा, जबकि निकास केवल जीटी रोड की ओर होगा। आरक्षित यात्री गेट नंबर 3 से प्रवेश करेंगे। अनारक्षित यात्रियों के लिए सभी स्टेशनों पर दिशावार कलर कोडेड आश्रय स्थल बनाए गए हैं। जहां से यात्रियों को उनके जाने के गंतव्य स्टेशन के मुताबिक आश्रय स्थलों में अलग-अलग कलर के टिकट के हिसाब से प्लेटफार्म में पहुंचाया जाएगा। जहां से नियमित और मेला स्पेशल ट्रेनों से यात्रियों को उनके गंतव्य स्टेशनों तक पहुंचाया जाएगा।
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महाकुंभनगर. आधुनिक पीढ़ी को भगवान शिव से जुड़े विभिन्न पहलुओं के पीछे छिपे विज्ञान से अवगत कराने और उन पहलुओं की दैनिक जीवन में प्रासंगिकता के बारे में जानकारी देने के उद्देश्य से शैव-फैशन शो कार्यक्रम का आयोजन किया गया। संस्थान की प्रवक्ता, साध्वी तपेश्वरी भारती ने बताया कि सेक्टर-नौ में स्थित दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के शिविर में हुए शैव-फैशन शो के लिए दिल्ली से आए मॉडलों ने शिवमय गीत संगीत पर महादेव के विभिन्न स्वरूपों को मंच पर बखूबी दर्शाया। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में साध्वी डॉक्टर निधि भारती ने भगवान शिव के विभिन्न आभूषणों एवं वेशभूषा जैसे कि उनकी जटाजूट, त्रिशूल, बाघम्बर वस्त्रों इत्यादि के पीछे छिपे विज्ञान और उनकी आध्यात्मिक प्रासंगिता उजागर की। साध्वी तपेश्वरी भारती ने बताया कि कार्यक्रम में भगवान महादेव के तांडव पर आधारित अनोखे व्यायाम भी सिखाये गए। उन्होंने कहा, “महाकुंभ के महापर्व में आधुनिक पीढ़ी को भगवान शिव के प्रतीकों के पीछे छिपे सनातन विज्ञान से परिचित कराने की सख़्त जरूरत है ताकि वे सभी ध्यान के विज्ञान के जरिए तृतीय नेत्र से उस शिव-तत्व का दर्शन कर सकें और फिर उसी ज्ञान से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं को अपनाकर अपने जीवन को आनंदमय बना सकें।” इस कार्यक्रम का समापन आनंद नृत्य के साथ हुआ जिसमें भगवान शिव के विभिन्न नामों का रॉक-धुनों के साथ अनूठा मिश्रण देखने को मिला। दर्शकों ने भगवान शिव के भजनों का खूब आनंद लिया।
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विदेशी चंदा मिलने का रास्ता साफ: सूत्र
नयी दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर को विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम यानी एफसीआरए के तहत लाइसेंस प्रदान किया है ताकि वह विदेश से धन प्राप्त कर सके। सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी। मंदिर का प्रबंधन फिलहाल एक अदालत कर रही है, जिसने एक प्रबंधन समिति गठित की है।
सूत्रों ने बताया कि इस मंदिर को एफसीआरए, 2010 के तहत लाइसेंस दिया गया है। मौजूदा प्रबंधन समिति ने एफसीआरए लाइसेंस के लिए आवेदन किया था। इस मंदिर का प्रबंधन पहले पुजारियों का एक परिवार करता था और यह निजी प्रबंधन के अधीन था।
गृह मंत्रालय ने उचित आवेदन और अदालत की मंजूरी के बाद एफसीआरए के तहत विदेशी धन प्राप्त करने का लाइसेंस दिया है। सूत्रों ने बताया कि आवेदन के अनुसार, मंदिर को अपने खजाने में काफी विदेशी मुद्रा प्राप्त हुई और वह विदेश से दान स्वीकार करने का इच्छुक है। कानून के अनुसार, विदेशी दान प्राप्त करने वाले सभी गैर सरकारी संगठनों को एफसीआरए के तहत पंजीकरण कराना होता है। -
नई दिल्ली। 76वें गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान कर्तव्य पथ पर सीआरपीएफ (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) की 148 सदस्यीय महिला टुकड़ी ने ‘नारी शक्ति’ का अद्भुत प्रदर्शन किया। इस टुकड़ी का नेतृत्व असिस्टेंट कमांडेंट ऐश्वर्या जॉय एम ने किया। यह महिला टुकड़ी देश के अलग-अलग हिस्सों में तैनात इकाइयों से चुनी गई है जो उग्रवाद विरोधी, नक्सलवाद विरोधी और कानून व्यवस्था की ड्यूटी में सक्रिय हैं। इसमें भारत के हर कोने से महिलाएं शामिल हैं जो एक ‘मिनी इंडिया’ की झलक दिखाती हैं।
दिल्ली पुलिस की ऑल-विमेन बैंड ने भी दूसरी बार गणतंत्र दिवस परेड में भाग लिया। इस बैंड का नेतृत्व बैंड मास्टर रूयांगुनुओ केंस ने किया। दिल्ली पुलिस के ब्रास और पाइप बैंड में चार महिला सब-इंस्पेक्टर और 64 महिला कांस्टेबल शामिल थीं। दिल्ली पुलिस की मार्चिंग टुकड़ी जिसने 16 बार सर्वश्रेष्ठ मार्चिंग टुकड़ी का पुरस्कार जीता है का नेतृत्व अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (एडीसीपी) ऋषि कुमार सिंह ने किया।वहीं रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की 92 सदस्यीय टुकड़ी ने ‘वीर सैनिक’ धुन पर मार्च करते हुए सलामी दी। इस टुकड़ी का नेतृत्व डिविजनल सिक्योरिटी कमिश्नर आदित्य ने किया। आरपीएफ ने अपनी सतर्कता, शक्ति और सेवा का प्रदर्शन किया। भारतीय रेलवे की सुरक्षा में उनकी अहम भूमिका है। अब तक आरपीएफ के 1087 जवान ड्यूटी पर अपने प्राणों की आहुति दे चुके हैं। उनका आदर्श वाक्य है – ‘सेवा ही संकल्प’।इसके बाद सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की ऊंटों पर सजी-धजी टुकड़ी ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। इन ऊंटों को रंग-बिरंगे परिधानों में सजाया गया था। राजस्थान और कच्छ के कठिन इलाकों में यह ऊंट ‘मरुस्थल के जहाज’ कहे जाते हैं। - महाकुंभनगर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज दौरे पर शनिवार को दक्षिण भारत की श्रृंगेरी पीठ के शंकराचार्य श्री श्री विधुशेखर भारती जी महाराज से भेंट कर उनका अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि “श्रृंगेरी पीठ के पूज्य शंकराचार्य के प्रयागराज पधारने से बहुत आनंद की अनुभूति हो रही है। आपके आगमन से महाकुंभ को पूर्णता मिल रही है।” एक आधिकारिक बयान के अनुसार शंकराचार्य की ओर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दक्षिण रीति से स्वागत किया गया और उन्हें कुंभ के स्वरूप के रूप में नारियल भेंट किया गया। वहीं, मुख्यमंत्री ने भी शंकराचार्य को शॉल ओढ़ाकर और फल भेंटकर उनका अभिनंदन किया। श्रृंगेरी पीठ के शंकराचार्य श्री श्री विधुशेखर भारती जी महाराज से भेंट के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा, “लंबे अंतराल के बाद दक्षिण की श्रृंगेरी पीठ का महाकुंभ के महाआयोजन में आगमन हो रहा है। इससे महाकुंभ की शोभा और अधिक बढ़ गई है।” उन्होंने कहा, “यह आनंद का विषय है कि इस महाकुंभ में श्रृंगेरी पीठ के शंकराचार्य पांच दिन का प्रवास करेंगे, यह हमारे लिए आशीर्वाद की तरह है।” योगी ने कहा, “प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन आपका आभारी है। कुंभ जैसे आयोजन को भव्य और दिव्य बनाने में आपकी उपस्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी।” इस दौरान मुख्यमंत्री ने शंकराचार्य को महाकुंभ की व्यवस्था, संतों की भागीदारी और वैश्विक स्तर पर लोगों के आगमन से जुड़ी सभी जानकारियां प्रदान कीं। बयान में कहा गया कि श्रृंगेरी पीठ के शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री द्वारा महाकुंभ के विषय में दी गई जानकारी पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने महाकुंभ में की गई व्यवस्थाओं और सुविधाओं की प्रशंसा की। अपनी सेवा में जुटे लोगों को भी उन्होंने आशीर्वाद दिया। शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री को दक्षिण पीठ की परंपरा के विषय में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 48 वर्ष पहले गुरु के गुरु कुंभ में अमावस्या के समय एक दिन का स्नान करने के लिए यहां आए थे, लेकिन औपचारिक रूप से दक्षिण से कोई शंकराचार्य 150 वर्षों के बाद महाकुंभ में सम्मिलित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि पांच दिन के प्रवास के अवसर पर वह शास्त्रार्थ के साथ ही अमावस्या पर शंकराचार्यों के साथ त्रिवेणी संगम स्नान में भी सम्मिलित होंगे। उन्होंने अपने प्रवास और इसके बाद कार्यक्रमों के विषय में भी बताया। इस पर मुख्यमंत्री ने शंकराचार्य से काशी प्रवास के अवसर पर शास्त्रार्थ सभा और प्रवचन करने का भी निवेदन किया। जिस पर शंकराचार्य ने भी अपनी सहमित दी। वाराणसी के अन्नपूर्णा मंदिर में कार्यक्रम को लेकर भी शंकराचार्य की ओर से सहमति प्रदान की गई।इससे पूर्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सेक्टर-19 स्थित श्री कल्याण सेवा आश्रम, अमरकंटक के आश्रम भी पहुंचे और यहां उन्होंने सद्गुरुदेव बाबा कल्याण दास जी महाराज से शिष्टाचार भेंट की और उनके साथ व्यक्तिगत चर्चा की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने महाकुंभ में सरकार के द्वारा की गई व्यवस्थाओं और सुविधाओं के विषय में भी उनसे बातचीत की। करीब 10 मिनट तक चली इस मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री अपने अगले कार्यक्रम की ओर बढ़ गए। मध्यप्रदेश के प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक तीर्थ स्थल पवित्र नगरी अमरकंटक में कल्याण सेवा आश्रम वर्ष 1977 से जन सेवा, समाज सेवा आध्यात्मिक एवं धार्मिक गतिविधियों को अपना उद्देश्य बनाकर निरंतर कार्य कर रहा है।
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श्रीनगर,। वर्षों की कड़ी मेहनत व समर्पण और कुछ इंजीनियरिंग चमत्कारों के बाद आखिरकार कश्मीर की रेल संपर्कता का सपना शनिवार को उस समय सच हो गया जब विशेष रूप से डिजाइन की गई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन यहां पहुंची और संचालन परीक्षण पूरा किया। ट्रेन अपने पहले परीक्षण के तहत जम्मू के कटरा से श्रीनगर स्टेशन पर पहुंची। यह शुक्रवार को जम्मू पहुंची थी। पूर्वाह्न 11:30 बजे जैसे ही वंदे भारत एक्सप्रेस स्टेशन पर पहुंची, इसका स्वागत नारों और भारतीय रेलवे की प्रशंसा के साथ किया गया। सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग और रेलवे अधिकारी ट्रेन का इंतजार कर रहे थे, उनमें से कई लोग ट्रेन में सवार अधिकारियों का स्वागत करने के लिए मालाएं लेकर आए थे। यहां स्टेशन पर कुछ देर रुकने के बाद ट्रेन अपना परीक्षण पूरा करने के लिए बडगाम स्टेशन के लिये रवाना हो गई। उत्तर रेलवे के मुख्य क्षेत्र प्रबंधक (श्रीनगर) साकिब यूसुफ ने कहा कि संचालन परीक्षण का पूरा होना एक ऐतिहासिक क्षण है। उन्होंने कहा, “यह एक ऐतिहासिक कदम है। यह कश्मीर को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने के हमारे प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण को दर्शाता है।” यूसुफ ने कहा कि परीक्षण का उद्देश्य यह भी पता लगाना था कि ट्रेन विभिन्न खंडों पर कितना समय लेगी।
उन्होंने कहा कि परीक्षण का सफल समापन पिछले 10 वर्षों में लाइन को पूरा करने के लिए की गई कड़ी मेहनत का परिणाम है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कटरा से ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। रेलवे सुरक्षा आयुक्त ने कटरा-बारामूला खंड पर ट्रेन सेवा संचालन के लिए हरी झंडी दे दी थी। कटरा में होने वाले उद्घाटन समारोह की तारीख अभी घोषित नहीं हुई है। रेलवे ने उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (यूएसबीआरएल) परियोजना के 272 किलोमीटर हिस्से पर काम पूरा कर लिया है। अधिकारियों के अनुसार, रेलवे बोर्ड ने पिछले साल आठ जून को वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन का अनावरण किया था। ट्रेन में जलवायु संबंधी विशेषताएं शामिल हैं। इसमें उन्नत ताप प्रणालियां शामिल हैं जो पानी व जैव-शौचालय के टैंकों के जल को जमने से रोकती हैं। -
महाकुंभनगर । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को महाकुंभ मेले को एकता का संदेश देने वाला तथा देश और दुनिया का सबसे बड़ा आयोजन बताते हुए कहा कि सनातन धर्म एक विराट वट वृक्ष की तरह है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म एक विराट वट वृक्ष है और इसकी तुलना किसी झाड़ और झंखाड़ से नहीं होनी चाहिए। एक बयान के मुताबिक प्रयागराज दौरे पर आए मुख्यमंत्री ने शनिवार को अखिल भारतीय अवधूत भेष बारह पंथ-योगी महासभा द्वारा आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया। योगी ने कहा, ''दुनिया के अंदर अन्य संप्रदाय हो सकते हैं, उपासना विधि हो सकती है, लेकिन धर्म तो एक ही है और वह है सनातन धर्म। यही मानव धर्म है। भारत में जितनी भी उपासना विधियां हैं वह अलग पंथ और संप्रदाय से भले ही जुड़ी हों, लेकिन निष्ठा और आस्था सब की सनातन धर्म से जुड़ी हुई है। सबका उद्देश्य तो एक ही है। इसलिए महाकुंभ के इस पावन आयोजन पर हम सबको पूरी दुनिया से आए लोगों को एक ही संदेश देना है, जिसके बारे में प्रधानमंत्री जी का कहना है कि महाकुंभ का संदेश, एकता से ही अखंड रहेगा देश।'' उन्होंने कहा कि याद रखना, भारत सुरक्षित है तो हम सब सुरक्षित हैं। भारत सुरक्षित है तो हर पंथ, हर संप्रदाय सुरक्षित है और अगर भारत के ऊपर कोई संकट आएगा तो सनातन धर्म पर संकट आएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सनातन धर्म पर संकट आएगा तो भारत के अंदर कोई भी पंथ और संप्रदाय अपने आप को सुरक्षित महसूस ना करे। वह संकट सबके ऊपर आएगा, इसलिए संकट की नौबत आने ना पाए, इसके लिए एकता का संदेश आवश्यक है। योगी ने कहा कि यह हम सबका सौभाग्य है कि इस महाकुंभ के आयोजन से जुड़ने का अवसर प्राप्त हो रहा है। पौष पूर्णिमा और मकर संक्रांति के दिन कोटि-कोटि श्रद्धालु मां गंगा, मां यमुना, मां सरस्वती की पावन त्रिवेणी के संगम पर डुबकी लगाकर अभिभूत हुए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बार-बार कहते हैं की यह सदी भारत की सदी है, भारत की सदी का मतलब हर एक क्षेत्र में भारत को विकास की बुलंदियों को छूना है। लेकिन, प्रत्येक क्षेत्र में देश उन बुलंदियों को तब छू सकेगा जब उस क्षेत्र से जुड़े हुए प्रतिनिधि अपने दायित्वों का ईमानदारी पूर्वक निर्वहन करेंगे। जो राजनीति में हैं वह राजनीति के क्षेत्र में काम कर रहे हैं, सीमा पर सेना देश की सुरक्षा का काम कर रही है और धार्मिक जगत से जुड़े हुए हमारे पूज्य संत भी अपना दायित्व निभा रहे हैं। योगी ने कहा,'' आपने देखा होगा कि किस तरह से पवित्र भाव के साथ महाकुंभ का आयोजन हो रहा है। कोटि-कोटि श्रद्धालु आ रहे हैं। आज यहां पर वर्तमान में दो करोड़ श्रद्धालु मौजूद हैं। सभी सड़कों पर लोगों की भीड़ मौजूद है। यह सिलसिला लगातार चलेगा। पिछले 10 दिनों के अंदर महाकुंभ के पावन त्रिवेणी संगम में 10 करोड़ से अधिक श्रद्धालु स्नान कर चुके हैं और अगले 35 दिन के अंदर यह संख्या 45 करोड़ पहुंचने वाली है। योगी ने चेताया कि आज जितना सकारात्मक माहौल है, उतनी ही चुनौतियां भी हैं। देश की एकता को, समाज की एकता को कहीं भी खंडित नहीं होने देना है। उन्होंने कहा, ‘‘कुछ लोग हमें बांटना चाहते हैं, भाषा के नाम पर बांटने का काम कर रहे हैं। उन लोगों के किसी भी षड़यंत्र में हमारे पूज्य संतों को नहीं पड़ना है। कोई ऐसी नकारात्मक टिप्पणी हम लोग अपने स्तर पर ना करें।'' एक बयान के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विभिन्न तीर्थ स्थलों से आए श्री महंत, आचार्य और योगेश्वर का सम्मान किया। उन्होंने जूना पीठाधीश्वर अवधेशानंद गिरि महाराज, परमात्मानंद महाराज और निर्मलानंद महाराज को शॉल ओढ़ाकर और गोरखनाथ जी की प्रतिमा भेंट कर उनका स्वागत किया। इनके साथ ही सतुआ बाबा, सुदर्शनाचार्य महाराज, स्वामी धीरेंद्र और स्वामी जितेंद्रनाथ का भी सम्मान किया गया। उन्होंने रामानुजाचार्य, श्रीधराचार्य, शेरनाथ महाराज, उमेशनाथ महाराज, कृष्णनाथ महाराज, समुद्रनाथ महाराज, संख्यनाथ महाराज, रामनाथ महाराज, श्री महंत सोमवरनाथ महाराज और मिथिलेशनाथ महाराज का भी अभिनंदन किया।
- प्रयागराज ।उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 13 जनवरी से आयोजित महाकुंभ में अब तक 10 करोड़ से ज्यादा लोगों ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई है। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में भारी संख्या में श्रद्धालु यहां पर पहुंचेंगे। इसे लेकर रेल, बस अड्डों पर गाड़ियों की संख्या बढ़ाई गई है। मौनी अमावस्या पर जहां रेलवे 150 मेला स्पेशल ट्रेनों का संचालन कर रहा है तो वहीं बस अड्डों से कई बसों का संचालन किया जाएगा। प्रयागराज रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सहलूयित को देखते हुए स्लीपिंग पॉड की सुविधा दी जा रही है।स्लीपिंग पॉड के प्रभारी योगेंद्र पांडे ने बताया कि स्लीपिंग पॉड जनता के लिए अच्छी तरह से सुसज्जित हैं, जिसमें आगंतुकों के लिए फोन, लैपटॉप चार्ज करने की व्यवस्था है। इसके अलावा आगंतुकों के आराम के लिए पानी और शौचालय की उचित व्यवस्था की गई है। महाकुंभ मेले को ध्यान में रखते हुए प्रयागराज रेलवे स्टेशन पर ये 70 स्लीपिंग पॉड बनाए गए हैं। इनमें कई सिंगल स्लीपिंग पॉड, महिलाओं के लिए पिंक स्लीपिंग पॉड और डबल स्लीपिंग पॉड के साथ-साथ फैमिली पॉड भी शामिल हैं।यहां आने वाले श्रद्धालु भी राज्य सरकार की व्यवस्था से काफी खुश हैं। एक श्रद्धालु ने बताया कि यहां आकर काफी अच्छा लगा। महाकुंभ वाकई अद्भुत है। हर किसी को इसे देखना चाहिए। तैयारियां बहुत बढ़िया हैं, और यहां सब कुछ खूबसूरती से व्यवस्थित है।
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नई दिल्ली। आज पूरा देश हर्षोल्लास के साथ गणतंत्र दिवस मना रहा है। उत्तर से लेकर दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक राष्ट्रीय पर्व की धूम है। पंजाब के वाघा-अटारी बॉर्डर पर पूरी आन-बान-शान के साथ तिरंगा फहराया गया जिसे देखने के लिए भारी संख्या में लोग जुटे। इस मौके पर बीएसएफ कमांडेंट हर्ष नंदन जोशी ने सभी नागरिकों को गणतंत्र दिवस की बधाई दी। कमांडेंट हर्ष नंदन जोशी ने जवानों को मिठाई खिलाई और उनका मुंह मीठा कराया। इस दौरान उन्होंने कहा कि किसी को भी देश की सुरक्षा व्यवस्था से छेड़छाड़ करने की इजाजत नहीं दी जाएगी चाहे वह पड़ोसी देश ही क्यों न हो। उन्होंने यह भी कहा कि बीएसएफ के जवान उनके परिवार के सदस्य जैसे हैं। गणतंत्र दिवस के मौके पर विभिन्न राज्यों में अलग-अलग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जा रहा है।
वहीं चेन्नई के मरीना बीच पर गणतंत्र दिवस समारोह का आयोजन किया गया है। इस अवसर पर तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि और मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन भी मौजूद हैं। बता दें, इस वर्ष के गणतंत्र दिवस समारोह का विषय “स्वर्णिम भारत : विरासत और विकास” है जिसका उद्देश्य देश की प्रगति और सांस्कृतिक धरोहर को उजागर करना है।मुंबई के मीरा भायंदर वसई विरार पुलिस आयुक्तालय के परिमंडल 3 के प्रांगण में गणतंत्र दिवस के अवसर पर ध्वजारोहण समारोह आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में डीसीपी जयंत बजबले ने झंडा फहराया। कार्यक्रम में विभिन्न पुलिस स्टेशनों के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक और स्थानीय स्कूलों के छात्र-छात्राएं भी उपस्थित थे। सभी ने मिलकर इस अवसर पर देशभक्ति का उत्सव मनाया और राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान व्यक्त किया। समारोह के दौरान डीसीपी ने पुलिसकर्मियों और नागरिकों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं। -
नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत तमाम नेताओं ने गणतंत्र दिवस की देशवासियों को शुभकामनाएं दीं हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने संविधान को हर भारतीय का सुरक्षा कवच बताया। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “सभी देशवासियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। हमारे महान स्वतंत्रता सेनानियों के न्याय, स्वाधीनता, समानता और भाईचारे के मूल्यों पर आधारित हमारा संविधान भारतीय गणतंत्र का गौरव है धर्म, जात, क्षेत्र, भाषा से परे हर भारतीय का सुरक्षा कवच है इसका सम्मान और रक्षा करना हम सभी का कर्तव्य है।”
वहीं वायनाड सांसद प्रियंका गांधी ने ‘एक्स’ पर लिखा, “सभी देशवासियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। आज ही के दिन हमारा संविधान लागू हुआ था जिसने हर एक नागरिक को न्याय, स्वतंत्रता, समानता और मानवीय गरिमा की गारंटी दी। हमारा संविधान एक-एक भारतीय के अधिकारों का रक्षा कवच है। हमारे संविधान की रक्षा के लिए हमारा संकल्प चट्टान की तरह मजबूत है।” सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी एक्स पोस्ट पर इस दिन की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 76वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिल्ली स्थित अपने आवास पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया। उन्होंने एक वीडियो संदेश भी जारी किया। ओम बिरला ने अपने वीडियो संदेश में कहा “प्रिय देशवासियों, 76वें गणतंत्र दिवस पर आप सभी को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं। 75 वर्षों की गौरवशाली यात्रा में भारत का आधुनिक गणतंत्र अधिक समर्थ और समृद्ध हुआ है। देश ने तरक्की के अनेक आयाम छुए हैं। देश का प्रत्येक नागरिक आज संकल्प ले कि हम लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी भागीदारी को बढ़ाएंगे। हम स्वतंत्रता, समानता, न्याय और बंधुता के हमारे आदर्शों को और अधिक मजबूत बनाएंगे जिससे हमारा गणतंत्र और अधिक समृद्ध हो। आज के दिन हम अपने उन मनीषियों को भी याद करें जिन्होंने देश की स्वतंत्रता में भूमिका निभाई, तथा संविधान निर्माण और राष्ट्र के विकास में अथक योगदान दिया।” -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज 26 जनवरी को नई दिल्ली स्थित नेशनल वॉर मेमोरियल पर शहीदों को श्रद्धांजलि देकर गणतंत्र दिवस समारोह की शुरुआत की। उनके साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी मौजूद रहे। प्रधानमंत्री ने शहीदों की स्मृति में पुष्पचक्र अर्पित किया और देश के वीर सैनिकों को याद किया।
प्रधानमंत्री द्वारा पुष्पचक्र अर्पित करने के बाद इंटर-सर्विसेज गार्ड के कमांडर अमित राठी ने 21 गार्ड्स और 6 बगुलरों के साथ सलामी शस्त्र और शोक शस्त्र के आदेश दिए। लास्ट पोस्ट की धुन पूरे माहौल को भावुक बना दिया इस दौरान सभी अधिकारियों ने शहीदों को सलामी दी और दो मिनट का मौन रखा।इस साल, 40 वर्षों बाद फिर से एक पुरानी परंपरा को पुनर्जीवित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति को भारतीय सेना की सबसे वरिष्ठ रेजिमेंट राष्ट्रपति के अंगरक्षकों के द्वारा कर्तव्य पथ तक पारंपरिक बग्गी में ले जाया गया। कर्तव्य पथ पर पहुंचने पर राष्ट्रपति और मुख्य अतिथि का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गर्मजोशी से स्वागत किया। प्रधानमंत्री ने वहां उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और उनकी पत्नी सुदेश धनखड़ का भी अभिवादन किया।इसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और गणतंत्र दिवस समारोह का नेतृत्व किया। उनके साथ इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबावो सुबियांतो भी मौजूद थे जो इस वर्ष के मुख्य अतिथि हैं। राष्ट्रगान की धुन के साथ स्वदेशी 105 मिमी लाइट फील्ड गन से 21 तोपों की सलामी दी गई। -
नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कर्तव्य पथ पर तिरंगा फहराया। 21 तोपों की सलामी के बाद परेड शुरू हुई। इंडोनेशिया के जवान भी इस परेड में शामिल हुए। उनके साथ इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो भी थे जो इस वर्ष के समारोह के मुख्य अतिथि हैं। परंपरा के मुताबिक दोनों राष्ट्रपतियों को भारतीय सेना की सबसे वरिष्ठ रेजिमेंट, ‘राष्ट्रपति के अंगरक्षक’ द्वारा कर्तव्य पथ तक ले जाया गया। 40 वर्षों से बंद परंपरा को पुनर्जीवित करते हुए वे ‘पारंपरिक बग्गी’ में सवार होकर समारोह में पहुंचे।
उनके आगमन पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गर्मजोशी से स्वागत किया। प्रधानमंत्री ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और उनकी पत्नी सुदेश धनखड़ का भी कर्तव्य पथ पर स्वागत किया। राष्ट्रगान के बीच राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया जिसके बाद स्वदेशी 105-एमएम लाइट फील्ड गन का उपयोग करके 21 तोपों की सलामी दी गई।इस वर्ष के गणतंत्र दिवस समारोह में संविधान के लागू होने के 75 वर्ष पूरे होने पर ध्यान केंद्रित किया गया और “जन भागीदारी” पर जोर दिया गया। इस उत्सव में भारत की सांस्कृतिक विविधता, एकता, समानता, विकास और सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया गया। सांस्कृतिक मंत्रालय के 300 कलाकारों के साथ वाद्य यंत्र बजाते हुए परेड निकली। कलाकारों द्वारा शहनाई, नादस्वरम, मशक बीन, बांसुरी, शंख और ढोल जैसे पारंपरिक संगीत वाद्ययंत्रों की मदद से “सारे जहां से अच्छा” बजाया गया। समारोह में वैश्विक स्पर्श जोड़ते हुए 152 सदस्यों वाली इंडोनेशियाई राष्ट्रीय सशस्त्र बलों की मार्चिंग टुकड़ी और 190 सदस्यों वाली इंडोनेशिया की सैन्य अकादमी का सैन्य बैंड भी परेड में शामिल हुआ। -
देहरादून. उत्तराखंड में जल्द लागू होने वाले समान नागरिक संहिता (यूसीसी) अधिनियम में सैनिकों के लिए “प्रिविलेज्ड वसीयत” का प्रावधान किया गया है जिसके तहत वे अपनी वसीयत अपने हाथ से लिख या मौखिक रूप से निर्देशित करके भी तैयार कर सकते हैं। राज्य में सशस्त्र बलों में उत्कृष्ट योगदान देने की परंपरा के मद्देनजर किए गए प्रिविलेज्ड वसीयत के प्रावधान के अनुसार सक्रिय सेवा या तैनाती पर रहने वाले सैनिक, वायुसैनिक या नौसैनिक अपनी वसीयत को सरल और लचीले नियमों के तहत भी तैयार कर सकते हैं-चाहे वह हस्तलिखित हो, मौखिक रूप से निर्देशित की गई हो, या गवाहों के समक्ष शब्दशः प्रस्तुत की गई हो। इस प्रावधान का मूल उद्देश्य यह है कि कठिन व उच्च-जोखिम वाली परिस्थितियों में तैनात सैनिक भी अपनी संपत्ति-संबंधी इच्छाओं को प्रभावी ढंग से दर्ज करा सकें। उदाहरण के लिए अगर कोई सैनिक स्वयं अपने हाथ से वसीयत लिखता है, तो उसके लिए हस्ताक्षर या साक्ष्य (अटेस्टेशन) की औपचारिकता आवश्यक नहीं होगी, बशर्ते यह स्पष्ट हो कि वह दस्तावेज उसी की इच्छा से तैयार किया गया है। इसी तरह, यदि कोई सैनिक मौखिक रूप से दो गवाहों के समक्ष अपनी वसीयत की घोषणा करता है तो उसे भी 'प्रिविलेज्ड वसीयत' माना जाएगा। हालांकि, यह एक माह बाद स्वतः अमान्य हो जाएगी यदि वह व्यक्ति तब भी जीवित है और सक्रिय सेवा जैसी उसकी विशेष सेवा-स्थितियां समाप्त हो चुकी हैं। उत्तराखंड में यूसीसी अधिनियम को लागू करना प्रदेश में 2022 में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा किए गए प्रमुख वादों में से एक है। मार्च में दोबारा सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में मंत्रिमंडल की पहली ही बैठक में यूसीसी प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए उसका मसौदा तैयार करने के लिए विशेषज्ञ समिति के गठन पर मुहर लगा दी गयी थी। उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में 27 मई 2022 को गठित विशेषज्ञ समिति ने लगभग डेढ़ साल की मेहनत से तैयार अपनी रिपोर्ट दो फरवरी 2024 को राज्य सरकार को सौंपी जिसके बाद मार्च 2024 में राज्य विधानसभा ने इसे पारित कर दिया। उसके बाद 12 मार्च 2024 को राष्ट्रपति ने भी उसे अपनी मंजूरी दे दी जिसके बाद वह अधिनियम बन गया। यूसीसी अधिनियम लागू होने के बाद उत्तराखंड स्वतंत्र भारत का ऐसा पहला राज्य होगा जहां सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून होगा। मुख्यमंत्री पहले ही इसे जनवरी में लागू करने की घोषणा कर चुके हैं। यूसीसी अधिनियम की नियमावली को भी हाल में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक की मंजूरी मिल चुकी है और ऐसा माना जा रहा है कि जल्द ही इसे प्रदेश में लागू कर दिया जाएगा। 'प्रिविलेज्ड वसीयत' को भविष्य में सैनिक द्वारा एक नयी प्रिविलेज्ड वसीयत, या साधारण वसीयत बनाकर रद्द या संशोधित भी किया जा सकता है। यूसीसी अधिनियम में वसीयत बनाना किसी के लिए अनिवार्य नहीं है और यह केवल एक व्यक्तिगत निर्णय है। हालांकि, जो व्यक्ति अपनी संपत्ति के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश निर्धारित करना चाहता है, उसके लिए अधिनियम में एक सुरक्षित और सरल व्यवस्था की गयी है।
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नयी दिल्ली. गोवा की 100 वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी, 150 महिलाओं को पुरुष प्रधान क्षेत्र ढाक वादन में प्रशिक्षित करने वाले पश्चिम बंगाल के ढाक वादक और कठपुतली का खेल दिखाने वाली पहली भारतीय महिला उन 30 गुमनाम नायकों में शामिल हैं जिन्हें पद्मश्री से सम्मानित करने की घोषणा की गई है। सरकारी बयान में शनिवार को यह जानकारी दी गई। गोवा के स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली लीबिया लोबो सरदेसाई ने पुर्तगाली शासन के खिलाफ लोगों को एकजुट करने के लिए 1955 में एक जंगली इलाके में भूमिगत रेडियो स्टेशन ‘वोज दा लिबरडाबे (वॉयस ऑफ फ्रीडम)' की स्थापना की थी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 76वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर सरदेसाई को पद्मश्री से सम्मानित करने की घोषणा की। पुरस्कार पाने वालों में पश्चिम बंगाल के 57 वर्षीय ढाक वादक गोकुल चंद्र डे भी शामिल हैं जिन्होंने पुरुष-प्रधान क्षेत्र में 150 महिलाओं को प्रशिक्षण देकर लैंगिक रूढ़िवादिता को तोड़ा। डे ने ढाक प्रकार का एक हल्का वाद्ययंत्र भी बनाया, जो वजन में पारंपरिक वाद्ययंत्र से 1.5 किलोग्राम कम था। उन्होंने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व किया और पंडित रविशंकर तथा उस्ताद जाकिर हुसैन जैसी हस्तियों के साथ कार्यक्रम किए। पद्मश्री सम्मान की सूची में शामिल महिला सशक्तीकरण की मुखर समर्थक 82 वर्षीय सैली होलकर ने लुप्त हो रही माहेश्वरी शिल्प कला को पुनर्जीवित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और पारंपरिक बुनाई तकनीकों में प्रशिक्षण देने के लिए मध्य प्रदेश के महेश्वर में हथकरघा स्कूल की स्थापना की। रानी अहिल्याबाई होल्कर की विरासत से प्रेरित और अमेरिका में जन्मीं सैली होलकर ने बुनाई की 300 साल पुरानी विरासत को पुनर्जीवित करने के लिए अपने जीवन के पांच दशक समर्पित कर दिए।
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नयी दिल्ली. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को कहा कि देश का संविधान भारतवासियों की सामूहिक अस्मिता का मूल आधार है तथा यह ‘‘विलक्षण ग्रंथ'' सभी नागरिकों को एक परिवार की तरह एकता के सूत्र में पिरोता है। राष्ट्रपति ने 76वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर शनिवार को राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि भारत में जो आज व्यापक परिवर्तन हुआ वो संविधान में निर्धारित रूपरेखा के बिना संभव नहीं हो सकता था। मुर्मू ने कहा, ‘‘भारत के गणतांत्रिक मूल्यों का प्रतिबिंब हमारी संविधान सभा की संरचना में भी दिखाई देता है। उस सभा में देश के सभी हिस्सों और सभी समुदायों का प्रतिनिधित्व था। सबसे अधिक उल्लेखनीय बात यह है कि संविधान सभा में सरोजिनी नायडू, राजकुमारी अमृत कौर, सुचेता कृपलानी, हंसाबेन मेहता और मालती चौधरी जैसी 15 असाधारण महिलाएं भी शामिल थीं।'' राष्ट्रपति ने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में जब महिलाओं की समानता को एक सुदूर आदर्श समझा जाता था तब भारत में महिलाएं, राष्ट्र की नियति को आकार देने में सक्रिय योगदान दे रही थीं। मुर्मू ने कहा, ‘‘हमारा संविधान एक जीवंत दस्तावेज इसलिए बन पाया है, क्योंकि नागरिकों की निष्ठा, सदियों से, हमारी नैतिकता-परक जीवन-दृष्टि का प्रमुख तत्व रही है। हमारा संविधान, भारतवासियों के रूप में, हमारी सामूहिक अस्मिता का मूल आधार है जो हमें एक परिवार की तरह एकता के सूत्र में पिरोता है।'' उनके अनुसार, पिछले 75 वर्षों से संविधान ने देश की प्रगति का मार्ग प्रशस्त किया है।
मुर्मू ने कहा, ‘‘आज के दिन, हम, संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉक्टर भीमराव आंबेडकर, सभा के अन्य प्रतिष्ठित सदस्यों, संविधान के निर्माण से जुड़े विभिन्न अधिकारियों और ऐसे अन्य लोगों के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं जिनके कठिन परिश्रम के फलस्वरूप हमें यह विलक्षण ग्रंथ प्राप्त हुआ।'' उन्होंने कहा कि संविधान लागू होने के बाद के ये 75 वर्ष हमारे युवा गणतंत्र की सर्वांगीण प्रगति के साक्षी हैं। राष्ट्रपति ने इस बात का उल्लेख किया, ‘‘स्वाधीनता के समय और उसके बाद भी देश के बड़े हिस्से में घोर गरीबी और भुखमरी की स्थिति बनी हुई थी। लेकिन, हमारा आत्म-विश्वास कभी डिगा नहीं। हमने ऐसी परिस्थितियों के निर्माण का संकल्प लिया जिनमें सभी को विकास करने का अवसर मिल सके। हमारे किसान भाई-बहनों ने कड़ी मेहनत की और हमारे देश को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाया।'' उन्होंने कहा, ‘‘हमारे मजदूर भाई-बहनों ने अथक परिश्रम करके हमारे अवसरंचना और विनिर्माण क्षेत्र का कायाकल्प कर दिया। उनके शानदार प्रदर्शन के बल पर आज भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व के आर्थिक परिदृश्य को प्रभावित कर रही है। आज का भारत, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नेतृत्व की स्थिति हासिल कर रहा है। संविधान में निर्धारित रूपरेखा के बिना यह व्यापक परिवर्तन संभव नहीं हो सकता था।''















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