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श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश) .भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) जनवरी में प्रस्तावित भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान (जीएसएलवी) के जरिए श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से 100वां प्रक्षेपण करने की उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल कर लेगा। एक शीर्ष अधिकारी ने यह जानकारी दी। इसरो के अध्यक्ष एस. सोमनाथ ने कहा कि सोमवार को पूरा हुआ पीएसएलवी-सी60 मिशन श्रीहरिकोटा से 99वां प्रक्षेपण था। इस मिशन के तहत इसरो की ‘स्पेस डॉकिंग' क्षमता प्रदर्शित करने में मदद के मकसद वाले दोनों अंतरिक्ष यान सफलतापूर्वक अलग हो गए और उन्हें सोमवार देर रात पृथ्वी के निचले वांछित कक्ष में स्थापित कर दिया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘आप सभी ने ‘स्पाडेक्स' (स्पेस डॉकिंग एक्सपेरीमेंट) रॉकेट के शानदार प्रक्षेपण को देखा और यह सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किसी यान का 99वां प्रक्षेपण था इसलिए यह एक बहुत महत्वपूर्ण संख्या है। हम अगले वर्ष की शुरुआत में 100वां प्रक्षेपण करेंगे।'' अंतरिक्ष विभाग के सचिव सोमनाथ ने पीएसएलवी-सी60 मिशन के तहत ‘स्पेस डॉकिंग एक्सपेरीमेंट' अंतरिक्ष यान ‘ए' और ‘बी' को वृत्ताकार कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किए जाने के बाद संवाददाताओं को इसरो के भावी प्रक्षेपणों की जानकारी देते हुए कहा, ‘‘2025 में हम कई मिशन पूरे करेंगे जिनकी शुरुआत जनवरी के महीने में जीएसएलवी द्वारा (नेविगेशन उपग्रह) एनवीएस-02 के प्रक्षेपण से होगी।'' इसरो ने जीएसएलवी के जरिए दूसरी पीढ़ी के ‘नेविगेशन' उपग्रह एनवीएस-01 का मई 2023 में सफल प्रक्षेपण किया था और फिर इसे सफलतापूर्वक भूस्थैतिक स्थानांतरण कक्षा (जीटीओ) में स्थापित कर दिया। जीएसएलवी यान ने 2,232 किलोग्राम वजनी एनवीएस-01 उपग्रह को भूस्थैतिक स्थानांतरण कक्षा (जीटीओ) में स्थापित कर दिया। एनवीएस-01 भारतीय नक्षत्र-मंडल नेविगेशन (नाविक) सेवाओं के लिए परिकल्पित दूसरी पीढ़ी के उपग्रहों में से पहला उपग्रह है।
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अहमदाबाद. मुंबई के आयुष म्हात्रे ने मंगलवार को यहां नगालैंड के खिलाफ विजय हजारे ट्रॉफी मैच के दौरान लिस्ट ए क्रिकेट में 150 से अधिक रन बनाने वाले सबसे कम उम्र का खिलाड़ी होने का नया विश्व रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने हमवतन यशस्वी जयसवाल के रिकॉर्ड को पीछे छोड दिया। म्हात्रे ने 17 साल और 168 दिन की उम्र में भारतीय सलामी बल्लेबाज जायसवाल द्वारा बनाए गए पिछले रिकॉर्ड को तोड़ दिया। जायसवाल 17 साल और 291 दिन के थे, जब उन्होंने 2019 में झारखंड के खिलाफ मुंबई के लिए खेलते हुए यह उपलब्धि हासिल की थी। इस सत्र की शुरुआत में घरेलू दिग्गज मुंबई के लिए पदार्पण करने वाले म्हात्रे ने 11 छक्कों और 15 चौकों की मदद से केवल 117 गेंदों पर 181 रन बनाए। उनकी इस पारी से मुंबई ने 50 ओवर में सात विकेट पर 403 रन बनाये। मुंबई के विरार उपनगर के रहने वाले म्हात्रे ने इस सत्र की शुरुआत में टीम में शामिल होने के बाद से सभी प्रारूपों में शानदार प्रदर्शन किया है। वह ईरानी कप विजेता मुंबई टीम का हिस्सा थे जिसने अक्टूबर में 27 साल के अंतराल के बाद शेष भारत को हराकर ट्रॉफी जीती थी। रणजी ट्रॉफी में अपने पदार्पण पर म्हात्रे ने 71 गेंदों में 52 रनों की शानदार पारी खेली लेकिन मुंबई ने यह सत्र का पहला मैच बड़ौदा के खिलाफ गंवा दिया। म्हात्रे ने इसके बाद महाराष्ट्र के खिलाफ 232 गेंदों में 22 चौकों और चार छक्कों की मदद से 176 रनों की शानदार पारी खेली जिससे मुंबई यह मैच नौ विकेट से जीता था। वह इसके बाद त्रिपुरा और ओडिशा के खिलाफ प्रभाव नहीं छोड़ सके थे लेकिन सेना के खिलाफ 149 गेंद में 116 रन की पारी के साथ प्रथम श्रेणी में अपना दूसरा शतक ठोका। उन्होंने इसके बाद अंडर-19 एशिया कप में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया। म्हात्रे ने जापान (54) और यूएई (नाबाद 67) के खिलाफ अर्धशतकीय पारियां खेली लेकिन बांग्लादेश के खिलाफ फाइनल में सस्ते में आउट हो गये। वह सैयद मुश्ताक अली टी20 ट्रॉफी में नहीं खेले लेकिन उन्होंने 50 ओवर के राष्ट्रीय टूर्नामेंट में कर्नाटक के खिलाफ 78 रन की शानदार पारी के साथ वापसी की।
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नयी दिल्ली. बंजर भूमि सौर पैनलों से ढकने और समुद्र तट पर विशाल पवन चक्कियां लगाने के साथ ही देश ने 200 गीगावाट से अधिक स्थापित क्षमता हासिल कर ली है। अगले साल 2025 में निवेश दोगुना होकर 32 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने के अनुमानों के साथ भारत ने स्वच्छ ऊर्जा महाशक्तियों की सूची में अग्रणी स्थान हासिल किया है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, 2030 तक भारत की वार्षिक नवीकरणीय क्षमता वृद्धि, चीन सहित किसी भी अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्था की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। इसके मुताबिक भारत की क्षमता वृद्धि 2023 में 15 गीगावाट से 2030 में 62 गीगावाट तक चार गुना से अधिक हो सकती है। वर्ष 2024 के अंत तक, देश की स्थापित क्षमता 205 गीगावाट तक पहुंच गई। कार्बन उत्सर्जन को कम करने और जीवाश्म ईंधन (पेट्रोल, डीजल) की जगह हरित ईंधन के उपयोग की प्रतिबद्धता के तहत घरेलू सौर पीवी और पवन टरबाइन विनिर्माण को बढ़ाया जा रहा है। भारत ने 2070 तक शुद्ध रूप से शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है। इसके तहत 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य बना रहा है। केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा, ''हमने 2024 के 11 महीनों (एक जनवरी 2024 से 30 नवंबर 2024 तक) के दौरान देश में कुल 24.72 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता वृद्धि दर्ज की, जबकि पिछले साल इसी अवधि में क्षमता वृद्धि 11.83 गीगावाट थी।'' एक गणना के मुताबिक 50 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता वृद्धि के लिए 2,75,000 करोड़ रुपये या 32.35 अरब डॉलर का निवेश करना होगा। जोशी ने कहा कि 2024 नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक उल्लेखनीय वर्ष रहा है और ''हम इस क्षेत्र के विकास को आगे बढ़ाने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं।'' उन्होंने कहा कि दिसंबर 2023 में 1.23 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ी गई, जिसका अर्थ है कि पूरे 2023 में 13.06 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ी गई। वर्ष 2024 में 30 नवंबर तक जोड़ी गई 24.72 गीगावाट क्षमता में 20.85 गीगावाट सौर ऊर्जा, 3.22 गीगावाट पवन ऊर्जा, आधा गीगावाट यानी 500 मेगावाट जैव ऊर्जा और 90 मेगावाट लघु जल विद्युत ऊर्जा और 60 मेगावाट बड़ी जल विद्युत ऊर्जा शामिल हैं। देश में इस अवधि (जनवरी से नवंबर) के दौरान जोड़ी गई कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता (28.46 गीगावाट) में इनकी हिस्सेदारी 86.86 प्रतिशत है। जोशी ने बताया कि छत पर सौर ऊर्जा लगाने और एक करोड़ घरों को हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने के लिए पीएम-सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के लिए अब तक 1.5 करोड़ से अधिक पंजीकरण हो चुके हैं और अब तक 6.85 लाख से अधिक घरों में ये उपकरण लगाए जा चुके हैं। उन्होंने 2025 की चुनौतियों के बारे में कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन की लागत को और कम करने के लिए नई नीतियां तैयार की जाएंगी।
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नयी दिल्ली. भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) ने तीसरे पक्ष के ऐप प्रदाता ‘व्हाट्सएप पे' को यूपीआई उपयोगकर्ता जोड़ने पर लगाई गई सीमा तत्काल प्रभाव से हटा दी है। एनपीसीआई ने एक बयान में कहा कि इस सीमा को हटाए जाने के साथ ही व्हाट्सएप पे अब भारत में अपने सभी उपयोगकर्ताओं तक यूपीआई सेवाओं का विस्तार कर सकता है। इससे पहले, एनपीसीआई ने व्हाट्सएप पे को चरणबद्ध तरीके से अपने यूपीआई उपयोगकर्ता आधार का विस्तार करने की अनुमति दी थी। पहले यह सीमा 10 करोड़ उपयोगकर्ताओं तक थी जिसे एनपीसीआई ने अब हटा दिया है।
इस अधिसूचना के साथ एनपीसीआई ने व्हाट्सएप पे पर उपयोगकर्ता को जोड़ने की सीमा पर लगी पाबंदी हटा दी है। हालांकि व्हाट्सएप पे इस समय तीसरे पक्ष के ऐप प्रदाताओं (टीपीएपी) पर लागू सभी यूपीआई दिशानिर्देशों और परिपत्रों का पालन करना जारी रखेगा। एनपीसीआई भारत में एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) ढांचे को नियंत्रित करती है। यह देश में खुदरा भुगतान और निपटान प्रणाली (आईबीए) के संचालन की मूल इकाई है। -
नयी दिल्ली. वैश्विक संघर्षों और भूराजनीतिक विखंडन से भरे इस साल में भारत ने अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया और करीब 4.22 लाख करोड़ रुपये की रक्षा खरीद को अंतिम रूप दिया। इस साल भारत और चीन की सेनाओं ने पूर्वी लद्दाख में सीमा पर टकराव वाले स्थानों से अपने सैनिकों को वापस बुलाने का काम पूरा कर लिया। भारत और चीन ने 21 अक्टूबर को हुए समझौते के बाद वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास डेमचोक और देपसांग पर टकराव के अंतिम दो बिंदुओं से अपने-अपने बलों को वापस बुला लिया। गलवान घाटी में चार साल पहले दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुई घातक झड़पों के बाद से भारत और चीन के संबंध तनावपूर्ण बने हुए थे। ऐसे में इस समझौते से दोनों देशों के संबंधों में जमी बर्फ पिघल गई। इस बीच, लगभग 3,500 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) की रक्षा कर रही भारतीय सेना ने इस साल आक्रामक रुख बनाए रखा तथा वास्तविक सीमा के पास चीन की ओर पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखने के लिए अपने समग्र निगरानी तंत्र को मजबूत किया। इस वर्ष भारत ने अहम समुद्री क्षेत्र में अपनी सामरिक ताकत का विस्तार किया। भारतीय नौसेना ने लाल सागर में और उसके आसपास मालवाहक पोतों पर बड़ी संख्या में ड्रोन और मिसाइल हमले कर रहे हूती उग्रवादियों से निपटने के लिए 30 से अधिक पोत तैनात किए। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारतीय नौसेना ने 25 से अधिक ऐसी घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए चार अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक मूल्य का लगभग 90 लाख मीट्रिक टन माल ले जा रहे 230 से अधिक वाणिज्यिक पोत को सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुंचाया। रक्षा मंत्रालय ने वर्ष के अंत में समीक्षा में कहा कि भारतीय नौसेना की त्वरित कार्रवाई से 400 से अधिक लोगों की जान बच गई। भारत ने प्रमुख जलमार्गों में अपनी सामरिक ताकत का लाभ उठाया तथा हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ाने के चीन के लगातार प्रयासों की पृष्ठभूमि में महासागर पर अपने प्रभाव को मजबूती से स्थापित किया। रक्षा मंत्रालय ने वर्ष के अंत में जारी रिपोर्ट में बताया कि रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) और रक्षा खरीद बोर्ड (डीपीबी) ने 2024 (नवंबर तक) में 4,22,129 करोड़ रुपये के 40 पूंजी अधिग्रहण प्रस्तावों के लिए आवश्यकता की स्वीकृति (एओएन) प्रदान की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारतीय वायु सेना के लिए सी-295 परिवहन विमानों का उत्पादन करने के लिए अक्टूबर में ‘टाटा एयरक्राफ्ट कॉम्प्लेक्स' का उद्घाटन किया। वायुसेना को 21,935 करोड़ रुपये के पहले से तय सौदे के तहत 56 सी-295 परिवहन विमान मिल रहे हैं जिनमें 40 विमान भारत में बनाए जाएंगे। इसके अलावा स्वदेशी रूप से निर्मित अरिहंत श्रेणी की परमाणु ऊर्जा चालित पनडुब्बी ‘आईएनएस अरिघाट' को 29 अगस्त को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया। सरकार ने स्वदेशी रूप से डिजाइन की गई दो परमाणु हमलावर पनडुब्बियों के निर्माण को भी मंजूरी दी है। एक अन्य कदम के तहत भारत ने सेना की लड़ाकू क्षमता को बढ़ाने के लिए अमेरिकी कंपनी ‘जनरल एटॉमिक्स' से लगभग चार अरब अमेरिकी डॉलर की लागत से 31 प्रीडेटर ड्रोन खरीदने के लिए अक्टूबर में अमेरिका के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। भारत के स्वदेशी हल्के टैंक ने 4,200 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर विभिन्न दूरियों से सटीकता के साथ लगातार कई राउंड गोलाबारी करके एक ''बड़ी उपलब्धि'' हासिल की है। भारत ने नवंबर में के-4 नामक एक परमाणु सक्षम बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया जिसकी मारक क्षमता 3,500 किलोमीटर है। इसी महीने भारत ने लंबी दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया। भारत का रक्षा उत्पादन 2023-2024 में 1,26,887 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 16.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। संचार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध विशेषज्ञ एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी अप्रैल में आर हरि कुमार के सेवानिवृत्त होने के बाद 26वें नौसेना प्रमुख बने। जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने जून में 30वें थलसेना प्रमुख के रूप में कार्यभार संभाला। इससे पहले जनरल मनोज पांडे इस पद पर सेवारत थे। एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने सितंबर में एयर चीफ मार्शल वी आर चौधरी की सेवानिवृत्ति पर भारतीय वायु सेना के प्रमुख का पदभार संभाला।
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नयी दिल्ली। प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) के सचिव वी श्रीनिवास ने मंगलवार को बताया कि हाल ही में संपन्न एक अभियान के दौरान करीब तीन करोड़ सेवा वितरण आवेदनों का निपटारा किया गया और इस अभियान का मकसद मुख्यतया जमीनी स्तर पर शासन को और अधिक आसान बनाना है। उन्होंने कहा कि 19-24 दिसंबर तक चलाए गए राष्ट्रव्यापी ‘‘प्रशासन गांव की ओर'' अभियान के जरिए सरकार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण को लागू करने की कोशिश की और हर स्तर पर प्रक्रियाओं को सरल बनाकर पारिस्थितिकी तंत्र को पारदर्शी और तेज बनाया है। श्रीनिवास ने कहा, ‘‘लोक शिकायतों के निस्तारण, सेवा वितरण आवेदनों के निपटान सहित विभिन्न नागरिक केंद्रित कदमों के जरिए सरकार ने सेवा वितरण तंत्र की पहुंच का विस्तार किया तथा उन्हें और अधिक प्रभावी बनाया।'' उन्होंने कहा कि आम लोगों को सरकार के करीब लाने के लिए प्रौद्योगिकी की अपार क्षमता पर जोर दिया जा रहा है, जो नागरिकों को सशक्त बनाने के लिए शक्तिशाली औजार के साथ ही दिन-प्रतिदिन के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने का एक माध्यम है। राजस्थान कैडर के 1989 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी श्रीनिवास ने कहा कि ‘‘प्रशासन गांव की ओर'' अभियान देश भर के 700 से अधिक जिलों में चलाया गया। उन्होंने कहा कि सेवा वितरण श्रेणी के तहत कुल 2,99,64,200 आवेदनों का निपटारा किया गया और 18.29 लाख जन शिकायतों का निवारण किया गया।
- इंदौर (मध्यप्रदेश)। इंदौर में मरणोपरांत अंगदान करने वाले 69 वर्षीय कारोबारी के दोनों हाथ मुंबई के 28 साल के व्यक्ति को प्रत्यारोपित किए गए हैं, जिससे युवक को नयी जिंदगी मिलने की राह आसान हो गई है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि इंदौर के टाइल्स व्यापारी सुरेंद्र पोरवाल (69) का शहर के एक निजी अस्पताल में 23 दिसंबर को अपेंडिक्स का ऑपरेशन किया गया था जिसके बाद मस्तिष्क आघात होने से उन्हें दिमागी रूप से मृत घोषित कर दिया गया। उन्होंने बताया कि दो साल पहले ब्रेन हेमरेज के कारण पोरवाल की सर्जरी की गई थी।अधिकारियों ने बताया कि जैन समुदाय से ताल्लुक रखने वाले पोरवाल की अंतिम इच्छा के अनुसार उनके परिजन उनके मरणोपरांत अंगदान के लिए खुद आगे आए। उन्होंने बताया कि शल्य चिकित्सकों ने 69 वर्षीय कारोबारी के दिमागी तौर पर मृत शरीर से दोनों हाथ, यकृत (लिवर) और दोनों गुर्दे (किडनी) सोमवार शाम हासिल कर लिए। इंदौर सोसायटी फॉर ऑर्गन डोनेशन के संस्थापक सचिव डॉ. संजय दीक्षित ने बताया, "पोरवाल के मरणोपरांत अंगदान से मिले दोनों हाथों को विशेष उड़ान के जरिये मुंबई भेजा गया। इन हाथों को मुंबई के एक निजी अस्पताल में 28 वर्षीय व्यक्ति के शरीर में सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया गया।" उन्होंने बताया कि इस व्यक्ति को कुछ साल पहले बिजली का तेज झटका लगा था जिसके बाद उसके दोनों हाथों ने काम करना बंद कर दिया था। इंदौर में अंगदान को बढ़ावा देने वाले सामाजिक संगठन "मुस्कान" के कार्यकर्ता संदीपन आर्य ने बताया कि पोरवाल के दो गुर्दे स्थानीय अस्पतालों में भर्ती दो मरीजों को प्रत्यारोपित किए गए, जबकि उनके यकृत को विशेष उड़ान से मुंबई भेजा गया और वहां के एक अस्पताल में भर्ती मरीज में इस अंग का प्रत्यारोपण किया गया। उन्होंने बताया कि पोरवाल के परिजनों ने उनकी त्वचा और आंखें भी दान कर दी हैं।चश्मदीदों ने बताया कि अंगदान के बाद पोरवाल की पार्थिव देह को मंगलवार को स्थानीय अस्पताल में भावभीनी विदाई दी गई। स्ट्रेचर पर रखी उनकी देह को एम्बुलेंस तक पहुंचाने के लिए लाल कालीन बिछाई गई और अस्पताल के कतार में खड़े चिकित्सकों और अन्य कर्मचारियों ने उन पर फूल चढ़ाकर अंगदानी के प्रति सम्मान जताया।
- अयोध्या/मथुरा/वाराणसी। नए वर्ष के जश्न के लिए उत्तर प्रदेश के प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों... अयोध्या, वाराणसी और मथुरा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। सुरक्षा उपायों और विस्तृत भीड़ प्रबंधन योजनाओं के साथ, भगवान राम की जन्मभूमि से जुड़ा पवित्र शहर अयोध्या 2025 की आध्यात्मिक शुरुआत के लिए मंदिरों और पवित्र स्थलों पर आने वाले तीर्थयात्रियों की भारी भीड़ को समायोजित करने के लिए तैयार हैं। अयोध्या में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी जा रही है, खासकर नवनिर्मित राम मंदिर में भगवान राम का आशीर्वाद लेने के लिए हजारों लोग आ रहे हैं। अयोध्या और पास के फैजाबाद में होटल पूरी तरह से आरक्षित हो चुके हैं और मंदिर ट्रस्ट ने अपेक्षित भीड़ को प्रबंधित करने के लिए दर्शन का समय बढ़ा दिया है।एक होटल के मालिक अंकित मिश्रा ने कहा, "हम श्रद्धालुओं का स्वागत करने के लिए तैयार हैं और हमारे सभी कमरे 15 जनवरी तक आरक्षित हैं।" हिंदू नववर्ष मार्च-अप्रैल के आसपास मनाया जाता है, लेकिन कई श्रद्धालु अंग्रेजी कैलेंडर वर्ष के पहले दिन रामलला के दर्शन करते हैं। स्थानीय पुजारी रमाकांत तिवारी ने बताया, "कई लोग भगवान राम के आशीर्वाद के साथ वर्ष की शुरुआत करना चाहते हैं।" राम मंदिर में भगवान राम के बाल विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा के बाद, 2025 पहला नववर्ष है, जो इसे महत्वपूर्ण अवसर बनाता है। अयोध्या के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) राजकरण नैयर ने राम मंदिर, हनुमानगढ़ी और गुप्तार घाट जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाने की पुष्टि की है। भगवान शिव की आध्यात्मिक नगरी वाराणसी में इस नववर्ष में बड़ी संख्या में आगंतुकों के आने की उम्मीद है।शहर की पुलिस ने व्यापक सुरक्षा उपाय लागू किए हैं, जिसमें अस्सी घाट और संकट मोचन मंदिर सहित प्रमुख स्थानों पर 45 ड्यूटी पॉइंट बनाए गए हैं। काशी जोन के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) गौरव बंसल ने पुष्टि की कि प्रमुख स्थानों पर एनडीआरएफ, जल पुलिस और पीएसी की टीमें तैनात की गई हैं। अनुमानित पांच से सात लाख आगंतुकों के साथ, मंदिर क्षेत्र को पाँच सेक्टरों में विभाजित किया गया है, और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए 12 त्वरित प्रतिक्रिया दल तैयार हैं। मथुरा-वृंदावन में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ है। मंदिर के अधिकारियों ने बुजुर्गों, बीमारों और बच्चों से भीड़भाड़ वाले समय में मंदिर में आने से बचने का आग्रह किया है। बांके बिहारी मंदिर के प्रबंधक मुनीश शर्मा ने कहा, "हम श्रद्धालुओं को असुविधा से बचने के लिए दर्शन करने से पहले भीड़ का आकलन करने की सलाह देते हैं।" मंदिर ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सख्त वन-वे प्रवेश और निकास प्रणाली लागू की है। सुरक्षा कर्मियों की संख्या बढ़ा दी गई है और वृंदावन में भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। मंदिरों तक दर्शनार्थियों को ले जाने के लिए ई-रिक्शा शुरू किए गए हैं। पुलिस ने सुगम आवागमन और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बैरियर लगाए हैं और अधिकारियों को तैनात किया है। साथ ही विभिन्न मार्गों से आने वाले दर्शनार्थियों के लिए विशेष पार्किंग व्यवस्था की गई है।
- भुवनेश्वर । वर्ष 2024 में ओडिशा के राजनीतिक परिदृश्य में बड़े बदलाव दिखे जब अजेय समझी जाने वाली नवीन पटनायक के नेतृत्व वाली सरकार का लगभग 25 साल का शासन समाप्त हो गया और राज्य में पहली बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सत्ता में आई। यह पटनायक की पहली चुनावी हार थी। ओडिश में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एकसाथ हुए थे। विधानसभा चुनाव में पटनायक की पार्टी बीजू जनता दल (बीजद) 2019 में जीती गई 113 सीट से घटकर 51 सीट पर आ गई, बल्कि लोकसभा में भी उसका सफाया हो गया क्योंकि वह 21 में से कोई भी संसदीय सीट जीतने में विफल रही। राज्य के पांच बार मुख्यमंत्री रहे पटनायक कांताबंजी सीट पर भाजपा के लक्ष्मण बाग से 16,000 से अधिक मतों से हार गए तथा हिन्जिली विधानसभा क्षेत्र को लगभग 4,000 मतों के मामूली अंतर से बचाने में सफल रहे। भाजपा ने 147 सदस्यीय विधानसभा में 78 सीट जीती, जबकि कांग्रेस को 14 सीट पर जीत मिली। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने एक सीट जीती, जबकि तीन निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी जीत दर्ज की।भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित अपने शीर्ष नेतृत्व के साथ चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंककर इतिहास रच दिया, हालांकि उसे बीजद के 40.22 प्रतिशत के मुकाबले 40.07 प्रतिशत वोट ही मिले। भाजपा ने ‘उड़िया अस्मिता' के सहारे सत्ता हासिल की और बीजद को एक ‘‘बाहरी'' व्यक्ति वी.के. पांडियन द्वारा संचालित पार्टी के रूप में चित्रित किया। वी.के. पांडियन, पटनायक के करीबी तमिल आईएएस (भारतीय प्रशासनिक सेवा) अधिकारी थे, जिन्होंने नौकरशाही छोड़ दी थी और चुनावी पराजय के बाद राजनीति भी छोड़ दी थी। भाजपा ने सरकार चलाने की जिम्मेदारी अपेक्षाकृत कम चर्चित चेहरे मोहन चरण माझी को देकर सबको चौंका दिया। मुख्यमंत्री का पदभार संभालने के बाद क्योंझर के आदिवासी नेता माझी ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में पुरी के प्रतिष्ठित जगन्नाथ मंदिर के सभी चार द्वारों को फिर से खोलने का फैसला किया, जिसका चुनाव से पहले भाजपा ने वादा किया था। उन्होंने मंदिर के खजाने या रत्न भंडार के दरवाजे भी 46 साल बाद खोलने के आदेश दिए ताकि उन्हें सूचीबद्ध किया जा सके और मरम्मत की जा सके। साथ ही मंदिर की सुरक्षा, संरक्षा और सौंदर्यीकरण के लिए 500 करोड़ रुपये की राशि को मंजूरी दी। नयी सरकार ने धान के लिए 3,100 रुपये प्रति क्विंटल न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को भी मंजूरी दी और महिलाओं के लिए वित्तीय सहायता योजना ‘सुभद्रा योजना' शुरू की, जिसके तहत 21-60 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं को पांच वर्षों में 50,000 रुपये दिए जाएंगे। दूसरी ओर, बीजद के भीतर भारी असंतोष के बीच पटनायक ने विपक्ष के नेता का पदभार संभाला। बीजद नेताओं के भाजपा में शामिल होने का चुनाव-पूर्व चलन जारी रहा, जिसमें दो राज्यसभा सदस्य, ममता मोहंता और सुजीत कुमार सत्तारूढ़ खेमे में शामिल हो गए और उपचुनावों में फिर से निर्वाचित हुए। इससे बीजद की राज्यसभा की संख्या घटकर सात रह गई और उच्च सदन में भाजपा की ताकत बढ़ गई। आलोचनाओं के बीच पटनायक ने पांडियन का बचाव किया, उनके ‘‘उत्कृष्ट कार्य'' की सराहना की तथा हार के लिए भाजपा के ‘‘नकारात्मक चुनाव प्रचार अभियान'' को जिम्मेदार ठहराया। घटती लोकप्रियता के बीच बीजद कई मुद्दों पर सरकार को घेरने में कुछ हद तक सफल रही, जिसमें एक सैन्य अधिकारी और उसकी मंगेतर पर पुलिस द्वारा हिरासत में कथित रूप से हमला करने सहित महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा भी शामिल है। घटना 15 सितंबर को हुई जब सैन्य अधिकारी और उसकी मंगेतर भुवनेश्वर के भरतपुर थाने में ‘रोड रेज' की घटना की शिकायत दर्ज कराने गए थे। आरोप है कि सैन्य अधिकारी की पिटाई की गई और उसकी मंगेतर को एक कोठरी में घसीटकर ले जाया गया, जहां कुछ पुरुष पुलिसकर्मियों ने उसकी पिटाई की तथा उससे छेड़छाड़ की। घटना पर मचे हंगामे के बीच सरकार ने पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया, जांच का जिम्मा अपराध शाखा को सौंप दिया और एक न्यायिक आयोग गठित किया। इस साल राज्य को कंभमपति हरि बाबू के रूप में नया राज्यपाल भी मिला, जिन्होंने रघुबर दास की जगह ली। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री दास ने अपने बेटे पर एक ऑन-ड्यूटी सरकारी अधिकारी के साथ कथित तौर पर मारपीट करने के आरोप के चलते महीनों के जनता के आक्रोश के बीच बमुश्किल 14 महीने तक पद पर रहने के बाद इस्तीफा दे दिया था। जुलाई में पुरी स्थित राजभवन में भाजपा के नेतृत्व वाली नयी सरकार ने एक बड़ी रथ यात्रा की मेजबानी की थी, जिसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी हिस्सा लिया था। आरोप है कि राज्यपाल के बेटे ललित कुमार और उसके चार दोस्तों ने सहायक अनुभाग अधिकारी बैकुंठ प्रधान के साथ मारपीट की थी।
- नयी दिल्ली. भारत का विदेशी कर्ज इस साल सितंबर में बढ़कर 711.8 अरब डॉलर हो गया। यह जून, 2024 की तुलना में 4.3 प्रतिशत अधिक है। वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर, 2023 के अंत में, विदेशी कर्ज 637.1 अरब डॉलर था। ‘भारत की तिमाही विदेशी ऋण' शीर्षक से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि सितंबर, 2024 में, देश का विदेशी ऋण 711.8 अरब डॉलर था। यह जून, 2024 के मुकाबले 29.6 अरब डॉलर अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर, 2024 में विदेशी ऋण और सकल घरेलू उत्पाद का अनुपात 19.4 प्रतिशत था, जो जून, 2024 में 18.8 प्रतिशत था। इसमें कहा गया है, ‘‘सितंबर, 2024 की स्थिति के अनुसार भारत के विदेशी कर्ज में 53.4 प्रतिशत के साथ अमेरिकी डॉलर में ऋण की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही। इसके बाद भारतीय रुपया (31.2 प्रतिशत), जापानी येन (6.6 प्रतिशत), एसडीआर (विशेष आहरण अधिकार) (पांच प्रतिशत) और यूरो (तीन प्रतिशत) का स्थान रहा।'' इसमें कहा गया है कि केंद्र एवं राज्य सरकारों के साथ-साथ गैर-सरकारी क्षेत्र का बकाया विदेशी ऋण सितंबर, 2024 के अंत में जून, 2024 की तुलना में बढ़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, बाह्य कर्ज में ऋण सबसे बड़ा घटक था। इसकी हिस्सेदारी 33.7 प्रतिशत थी। इसके बाद क्रमश: मुद्रा और जमा (23.1 प्रतिशत), व्यापार ऋण और अग्रिम (18.3 प्रतिशत) और ऋण प्रतिभूतियां (17.2 प्रतिशत) का स्थान रहा। सितंबर, 2024 के अंत में मूल राशि और ब्याज भुगतान वर्तमान प्राप्तियों का 6.7 प्रतिशत था, जबकि जून, 2024 में यह 6.6 प्रतिशत था।
- प्रयागराज. महाकुम्भ 2025 के दौरान रेलवे ने 10,000 से अधिक नियमित और 3000 से अधिक विशेष ट्रेन चलाने की तैयारी की है। अधिकारियों के मुताबिक, इन 3,000 विशेष ट्रेन में से 1800 ट्रेन छोटी दूरी के लिए, 700 ट्रेन लंबी दूरी के लिए और 560 ट्रेन रिंग रेल पर चलाई जाएंगी। उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक उपेंद्र चंद्र जोशी ने पत्रकारों को बताया कि प्रयागराज-अयोध्या-वाराणसी-प्रयागराज, प्रयागराज-संगम प्रयाग-जौनपुर-प्रयाग-प्रयागराज, गोविंदपुरी-प्रयागराज-चित्रकूट-गोविंदपुरी और झांसी-गोविंदपुरी-प्रयागराज-मानिकपुर-चित्रकूट-झांसी मार्गों पर रिंग रेल की योजना तैयार की गई है। उन्होंने बताया कि प्रयागराज जंक्शन, सूबेदारगंज, नैनी, प्रयागराज छिवकी, प्रयाग जंक्शन, फाफामऊ, प्रयागराज रामबाग, प्रयागराज संगम और झूंसी सहित कुल नौ रेलवे स्टेशन के साथ-साथ मेला क्षेत्र में कुल 560 टिकटिंग पॉइंट उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जोशी ने बताया कि इन काउंटर से प्रतिदिन लगभग 10 लाख टिकट वितरित किए जा सकेंगे। रेलवे ने महाकुम्भ मेला के दृष्टिगत अब अग्रिम रेलवे टिकट 15 दिन पूर्व लेने की सुविधा शुरू की है। उन्होंने बताया कि महाकुम्भ -2025 में भारी भीड़ को देखते हुए भारतीय रेलवे के सभी हिस्सों से रेलवे सुरक्षा बल और राजकीय रेलवे पुलिस के 18,000 से अधिक जवानों को ड्यूटी पर प्रयागराज लाया जा रहा है। इस दौरान प्रयागराज जंक्शन पर नगर की तरफ से प्रवेश और सिविल लाइन की तरफ से निकासी की व्यवस्था रहेगी। महाप्रबंधक ने बताया कि प्रयागराज जंक्शन पर छह बेड वाला ‘आबज़र्वेशन रूम' बनाया गया है जहां यात्रियों को चिकित्सा सहायता देने के लिए सभी प्रकार के उपकरण जैसे ऑक्सीजन सिलेंडर, ईसीजी मशीन, ग्लूकोमीटर, नेब्यूलाइज़र, स्ट्रेचर आदि उपलब्ध कराए गए हैं। जोशी ने बताया कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी नियंत्रण कक्षों में लाइव फुटेज के साथ 1186 सीसीटीवी कैमरे क्रियाशील रहेंगे जिनमें से करीब 116 कैमरों में असामाजिक तत्वों की पहचान करने के लिए कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित ‘फेस रिकग्निशन सिस्टम' उपलब्ध है।
- महू (मप्र). रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को कहा कि कृत्रिम मेधा (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-एआई) आधारित युद्ध और साइबर हमले जैसे गैर-परंपरागत तरीके बड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं। मध्यप्रदेश के महू छावनी में ‘आर्मी वॉर कॉलेज' (एडब्ल्यूसी) में अधिकारियों को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि भारत का रक्षा निर्यात 21 हजार करोड़ रुपये को पार कर गया है जो कि एक दशक पहले दो हजार करोड़ रुपये था। उन्होंने कहा कि 2029 तक 50 हजार करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात को हासिल करने का लक्ष्य है।सिंह ने कहा, ‘सूचना युद्ध, एआई आधारित युद्ध, छद्म युद्ध, विद्युत-चुंबकीय युद्ध, अंतरिक्ष युद्ध और साइबर हमले जैसे गैर-परंपरागत तरीके आज के समय में बड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं।'' उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सेना को ऐसे हमलों से लड़ने के लिए अच्छी तरह से प्रशिक्षित और सुसज्जित होना चाहिए। उन्होंने महू में प्रशिक्षण केंद्रों की उनके बहुमूल्य योगदान के लिए सराहना की। उन्होंने कहा कि लगातार बदलते समय में सीमांत प्रौद्योगिकियों में महारत हासिल करना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि सैन्य प्रशिक्षण केंद्र भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए सैनिकों को सुसज्जित और तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सिंह ने कहा, ‘‘हमारा रक्षा निर्यात, जो एक दशक पहले लगभग 2,000 करोड़ रुपये का था, आज 21,000 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड आंकड़े को पार कर गया है। हमने 2029 तक 50 हजार करोड़ रुपये का निर्यात लक्ष्य रखा है।'' उन्होंने कहा कि भारत में निर्मित उपकरण दूसरे देशों को निर्यात किए जा रहे हैं।सिंह ने बदलते समय के अनुसार अपने प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में लगातार सुधार करने और कर्मियों को हर तरह की चुनौती के लिए तैयार करने के प्रयास के लिए प्रशिक्षण केंद्रों की सराहना की। रक्षा मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार तीनों सेनाओं के बीच एकीकरण और एकजुटता को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, ‘‘आने वाले समय में सशस्त्र बल बेहतर और अधिक कुशल तरीके से चुनौतियों का सामना करने में सक्षम होंगे।'' सिंह ने कहा कि महू छावनी में सभी विंग के अधिकारियों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण दिया जाता है।उन्होंने अधिकारियों से इन्फैंट्री स्कूल में हथियार प्रशिक्षण, ‘मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग' (एमसीटीई) में एआई और संचार प्रौद्योगिकी और एडब्ल्यूसी में जूनियर और सीनियर कमांड में नेतृत्व जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण के माध्यम से एकीकरण को बढ़ावा देने की संभावना तलाशने का आग्रह किया। सिंह ने कहा कि भविष्य में कुछ अधिकारी रक्षा अताशे के रूप में काम करेंगे और उन्हें वैश्विक स्तर पर राष्ट्रीय हितों को सुरक्षित करने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘जब आप रक्षा अताशे का पद संभालेंगे, तो आपको सरकार के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को आत्मसात करना चाहिए। आत्मनिर्भरता के माध्यम से ही भारत अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत कर सकता है और विश्व मंच पर अधिक सम्मान हासिल कर सकता है।'' रक्षा मंत्री रविवार से मध्यप्रदेश के दो दिवसीय दौरे पर हैं।रक्षा मंत्री ने भारत को दुनिया की सबसे मजबूत आर्थिक और सैन्य शक्तियों में से एक बनाने के लिए सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा, ‘‘आर्थिक समृद्धि तभी संभव है जब सुरक्षा पर पूरा ध्यान दिया जाए। सुरक्षा व्यवस्था भी तभी मजबूत होगी जब अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। दोनों एक दूसरे के पूरक हैं।'' सिंह ने सीमाओं की सुरक्षा और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सबसे पहले लोगों को सहायता देने में सशस्त्र बलों की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्र की रक्षा के लिए यह समर्पण और लगातार बदलती दुनिया में खुद को अद्यतन रखने की भावना हमें दूसरों से आगे ले जा सकती है।'' आर्मी वॉर कॉलेज में सिंह को कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल एचएस साही ने संघर्ष के सभी क्षेत्रों में युद्ध लड़ने के लिए सैन्य नेताओं को प्रशिक्षित करने और सशक्त बनाने की दिशा में संस्थान की भूमिका और महत्व के बारे में जानकारी दी। इस अवसर पर थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी और सेना के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।एक विज्ञप्ति में कहा गया कि रक्षा मंत्री को मित्र देशों के अधिकारियों को प्रशिक्षित करने और सैन्य कूटनीति में महत्वपूर्ण योगदान देने के माध्यम से संस्थान की वैश्विक उपलब्धियों के बारे में भी जानकारी दी गई। इससे पहले रक्षा मंत्री ने इन्फैंट्री मेमोरियल पर शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित की।
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उज्जैन (मध्यप्रदेश). रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने सोमवार को मध्यप्रदेश में उज्जैन शहर के प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना की। सिंह ने कहा कि भगवान महाकाल के दर्शन कर वह धन्य हो गए हैं। केसरिया रंग की धोती पहने मंत्री ने मंदिर के गर्भगृह में करीब 20 मिनट तक पूजा-अर्चना की। बाद में उन्होंने मंदिर के नंदी हॉल में ध्यान किया। सिंह रविवार से मध्यप्रदेश के दो दिवसीय दौरे पर हैं। महाकालेश्वर मंदिर देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। सिंह ने रविवार को इंदौर जिले में दो सदी से भी अधिक पुरानी महू छावनी में सेना के जवानों को संबोधित किया। उन्होंने महू में डॉ. बी.आर. आंबेडकर की समाधि पर श्रद्धांजलि भी अर्पित की।
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नयी दिल्ली. देश भर से कुल 2,361 एनसीसी कैडेट सोमवार को दिल्ली छावनी में शुरू हुए और एक महीने तक चलने वाले गणतंत्र दिवस शिविर में भाग ले रहे हैं। इस वार्षिक कार्यक्रम में 917 बालिका कैडेट भी भाग लेंगी जो अब तक की सबसे बड़ी संख्या है। कुल 2,361 एनसीसी कैडेट में से 114 जम्मू कश्मीर और लद्दाख से तथा 178 पूर्वोत्तर क्षेत्र से हैं। रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि इसके अलावा 'यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम' के तहत 14 मित्र देशों के कैडेट और अधिकारी भी शिविर में भाग लेंगे। एनसीसी गणतंत्र दिवस शिविर-2025 आज सर्व धर्म पूजा के साथ दिल्ली छावनी के करिअप्पा परेड ग्राउंड में शुरू हुआ। मंत्रालय ने बताया कि शिविर में सभी 28 राज्यों और आठ केंद्र शासित प्रदेशों के कुल 2,361 कैडेट भाग ले रहे हैं। बयान में कहा गया, "917 बालिका कैडेट की भागीदारी के साथ इस वर्ष के शिविर में बालिका कैडेट की सबसे बड़ी संख्या होगी।" राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल गुरबीरपाल सिंह ने प्रतिष्ठित शिविर के लिए चुने जाने पर सभी कैडेट को बधाई देते हुए उनका स्वागत किया।
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श्रीहरिकोटा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की स्पेस डॉकिंग की क्षमता प्रदर्शित करने में मदद करने के मकसद से दो अंतरिक्ष यान सफलतापूर्वक अलग हो गए और उन्हें सोमवार देर रात पृथ्वी के निचले वांछित कक्ष में स्थापित कर दिया गया है। यह प्रोद्यौगिकी भविष्य में अंतरिक्ष अभियान के लिए इसरो की मदद करेगी।
अभियान के निदेशक एम जयकुमार ने कहा, स्पैडेक्स अंतरिक्ष यान की जहां तक बात है, पीएसएलवी सी-60 अभियान पूरा हुआ। इस अभियान को इसरो द्वारा 2035 तक खुद का अंतिरक्ष स्टेशन स्थापित करने से पहले का एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पीएसएलवी सी-60 अभियान के कारण भारत एक विशिष्ट क्लब में शामिल हो जाएगा, क्योंकि वह इस महत्वपूर्ण लक्ष्य को कुछ दिन में हासिल कर लेगा। पीएसएलवी रॉकेट की लंबाई 44.5 मीटर है और इसके जरिये दो अंतरिक्ष यान- स्पेसक्राफ्ट ए (एसडीएक्स01) और स्पेसक्राफ्ट बी (एसडीएक्स02) को भेजा गया, जिसमें प्रत्येक का वजन 220 किलोग्राम है। इससे स्पेस डॉकिंग, सैटेलाइट सर्विसिंग और अंतरग्रहीय मिशनों में मदद मिलेगी। पच्चीस घंटे की उल्टी गिनती के समापन पर, पीएसएलवी-सी60 अपनी 62वीं उड़ान पर इस स्पेसपोर्ट के प्रथम ‘लॉन्च पैड' से गाढ़ा नारंगी रंग का धुआं छोड़ते हुए ऊपर उठा। इसरो वैज्ञानिकों के अनुसार, दो अंतरिक्ष यान स्पेसक्राफ्ट ए (एसडीएक्स01) या ‘चेजर' और स्पेसक्राफ्ट बी (एसडीएक्स02) या ‘टारगेट' समान गति और दूरी से यात्रा करने के बाद लगभग 470 किमी की ऊंचाई पर एक साथ जुड़ जाएंगे। अंतरिक्ष डॉकिंग प्रौद्योगिकी में महारत हासिल करके, इसरो अपने मिशन क्षितिज का विस्तार करने के अलावा अपने परिचालन लचीलेपन को बढ़ावा देने की तैयारी में है। यह प्रौद्योगिकी भारत की अंतरिक्ष की कुछ महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति के लिए जरूरी है, जिनमें चंद्रमा पर भारत की यात्रा, चंद्रमा से नमूने प्राप्त करना (चंद्रयान-4 मिशन), भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन का निर्माण और संचालन शामिल है। इसरो ने कहा, स्पेस डॉकिंग तकनीक तब आवश्यक होती है जब सामान्य मिशन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए कई रॉकेट लॉन्च करने की आवश्यकता होती है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के बाद भारत स्पेस डॉकिंग तकनीक वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा। चीन, रूस और अमेरिका ने पहले ही यह तकनीक हासिल कर ली है।
अंतरिक्ष यान वांछित कक्षा में स्थापित कर दिया गया है। आने वाले दिनों में वैज्ञानिक दोनों के बीच की दूरी को कम करके उन्हें मिलाने के उपाय करेंगे, जिससे अंततः अंतरिक्ष यान को डॉकिंग में लाया जा सकेगा। - नयी दिल्ली। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में अगले महीने होने वाले महाकुंभ में भाग लेने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या पर नजर रखने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से लैस कैमरे, आरएफआईडी रिस्टबैंड और मोबाइल ऐप ट्रैकिंग जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। हर 12 साल में आयोजित होने वाला यह विशाल धार्मिक आयोजन प्रयागराज में 13 जनवरी से शुरू होगा। उत्तर प्रदेश के मंत्री सुरेश खन्ना ने 45 दिवसीय इस आयोजन के लिए किए जा रहे इंतजामों का ब्योरा साझा करते हुए कहा कि महाकुंभ में भाग लेने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या को उन्नत तकनीक का उपयोग करके कुशलतापूर्वक प्रबंधित किया जाएगा। खन्ना ने यहां एक ‘रोड शो' में कहा, ‘‘पहली विधि विशेषता आधारित खोज है, जहां लोगों की, कैमरों का इस्तेमाल करके निगरानी की जाएगी। दूसरी विधि में आरएफआईडी रिस्टबैंड शामिल हैं, जो तीर्थयात्रियों को प्रदान किए जाएंगे। इन रिस्टबैंड के माध्यम से, आरएफआईडी रीडर का इस्तेमाल करके प्रवेश और निकास के समय का पता लगया जाएगा।''उन्होंने कहा, ‘‘तीसरा तरीका मोबाइल ऐप ट्रैकिंग है, जहां तीर्थयात्रियों की सहमति से मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करके जीपीएस के माध्यम से उनके स्थान को ट्रैक किया जाएगा।'' मंत्री ने कहा कि सरकार दिव्य, भव्य और डिजिटल महाकुंभ के लिए तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा, ‘‘तैयारियों में एक खास वेबसाइट और ऐप, 11 भाषाओं में एआई-संचालित चैटबॉट, लोगों और वाहनों के लिए क्यूआर-आधारित पास, एक बहुभाषी डिजिटल खोया-पाया केंद्र, साफ-सफाई और टेंट के लिए आईसीटी निगरानी, भूमि और सुविधा आवंटन के लिए सॉफ्टवेयर, बहुभाषी डिजिटल साइनेज (वीएमडी), एक स्वचालित राशन आपूर्ति प्रणाली, ड्रोन-आधारित निगरानी और आपदा प्रबंधन, 530 परियोजनाओं की निगरानी के लिए सॉफ्टवेयर, एक इन्वेंट्री ट्रैकिंग प्रणाली और गूगल मैप पर सभी स्थानों का एकीकरण शामिल है।'' खन्ना ने कहा कि पर्यटकों को पार्किंग की समस्या का सामना न करना पड़े, इसके लिए व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा, ‘‘इस संबंध में 101 स्मार्ट पार्किंग स्थल बनाए गए हैं, जो प्रतिदिन पांच लाख वाहनों को समायोजित करने में सक्षम हैं। पार्किंग क्षेत्र 1867.04 हेक्टेयर में फैला है, जो 2019 में पार्किंग के लिए आवंटित 1103.29 हेक्टेयर की तुलना में 763.75 हेक्टेयर अधिक है। इन पार्किंग स्थलों की निगरानी एकीकृत कमांड सेंटर के माध्यम से की जाएगी।''
- मथुरा (उप्र)। औद्योगिक घराने टाटा समूह और धार्मिक संस्था 'इस्कॉन' ने ब्रज के प्राचीन कुण्डों के जल को आचमन योग्य बनाने का जिम्मा लिया है। इसके लिए दोनों ने कुल 15 कुण्डों को चिन्हित किया है। बाकी कुण्डों के उद्धार के लिए मथुरा—वृन्दावन विकास प्राधिकरण (एमवीडीए) स्वयं कार्य करेगा।उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं मथुरा—वृन्दावन विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष श्याम बहादुर सिंह ने बताया कि ब्रज में अनेक ऐसे प्राचीन कुण्ड मौजूद हैं, जो धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व के हैं। परिषद द्वारा इनके सौंदर्यीकरण के साथ—साथ जल की गुणवत्ता सुधारने का काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इन्हीं में 15 कुण्डों के उद्धार के लिए टाटा समूह और धर्म प्रचार संस्था 'इस्कॉन' आगे आए हैं। इनमें से टाटा समूह ने आठ कुण्डों और सात कुण्डों की जिम्मेदारी इस्कॉन ने ली है। पांच कुण्डों के जल शोधन का जिम्मा खुद एमवीडीए ने लिया है। सिंह ने बताया कि मथुरा जिले में कुल 2052 जल इकाइयां मौजूद हैं। इनमें से 288 इकाइयों का शुमार कुण्डों के तौर पर होता है। हालांकि इनमें से अधिकांश देखरेख के अभाव में जीर्ण शीर्ण अवस्था में हैं। इन कुण्डों के पानी की गुणवत्ता भी ठीक नहीं है। इनका धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व भी है। उन्होंने बताया कि ब्रज तीर्थ विकास परिषद द्वारा इनमें से दो दर्जन प्राचीन कुण्डों का पुनरुद्धार कराया गया है। यह प्रक्रिया निरंतर जारी है। इसके साथ ही अब तीर्थ विकास परिषद ने ब्रज के इन प्राचीन कुण्डों का सौंदर्यीकरण करने व उनके जल की गुणवत्ता को सुधारने के लिए निजी संस्थाओं की मदद लेना शुरु किया है। सिंह ने बताया कि इस प्रक्रिया में टाटा गुप के साथ इस्कॉन की मदद ली जा रही है। टाटा समूह ने गोवर्धन के मानसी गंगा, राधाकुण्ड, कृष्ण कुण्ड, अष्ठसखी कुध्ड, शांतनु कुण्ड, गरुड़ गोविंद कुण्ड व नरी सेमरी कुण्ड को गोद लिया है। उन्होंने बताया कि इस्कॉन ने बरसाना के प्रिया कुण्ड सहित पावन सरोवर, वृषभानु कुण्ड, व्हिक कुण्ड, जल विहार कुण्ड, कृष्ण कुण्ड आदि कुण्डों को अपनाते हुए उनके पानी को आचमन योग्य बनाने की जिम्मेदारी ली है। इसके लिए एक विस्तृत कार्ययोजना भी तैयार कर ली गई है। उन्होंने बताया कि मथुरा-वृन्दावन विकास प्राधिकरण ललिता कुण्ड, वृंदा कुण्ड, नारद कुण्ड, सौभरि कुण्ड एवं आट्स से सुनरख तक ड्रेन का सौंदर्यीकरण कर उनके जल को स्वच्छ बनाने का काम करेगा।
- नयी दिल्ली। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वितुल कुमार केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के महानिदेशक का कार्यभार संभालेंगे। सीआरपीएफ के वर्तमान महानिदेशक अनीश दयाल सिंह मंगलवार को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश कैडर के 1993 बैच के आईपीएस अधिकारी कुमार वर्तमान में सीआरपीएफ के विशेष महानिदेशक के पद पर कार्यरत हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी एक आदेश में कहा गया है कि सक्षम प्राधिकार ने मणिपुर कैडर के 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी अनीश दयाल सिंह के 31 दिसंबर, 2024 को सेवानिवृत्त होने पर नियमित महानिदेशक की नियुक्ति होने तक या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, सीआरपीएफ के महानिदेशक के पद का कार्यवाहक प्रभार वितुल कुमार को सौंपने की मंजूरी दे दी है।
- नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जिमी कार्टर के निधन पर सोमवार को शोक व्यक्त किया और उन्हें महान दूरदर्शी राजनेता बताया, जिन्होंने वैश्विक शांति और सद्भाव के लिए अथक प्रयास किया। प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एक्स' पर कहा, ‘‘अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जिमी कार्टर के निधन से बहुत दुख हुआ। वह एक महान दूरदर्शी राजनेता थे। उन्होंने वैश्विक शांति और सद्भाव के लिए अथक काम किया। भारत-अमेरिका के बीच मजबूत संबंधों को बढ़ावा देने में उनका योगदान एक स्थायी विरासत छोड़ गया है। उनके परिवार, दोस्तों और अमेरिका के लोगों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं।'' नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित एवं अमेरिका के 39वें राष्ट्रपति जिमी कार्टर का रविवार को निधन हो गया। वह 100 वर्ष के थे। सबसे लंबे समय तक जीवित रहे अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति कार्टर ने 1977 से 1981 तक इस पद पर सेवाएं दी थीं। कार्टर भारत की यात्रा करने वाले तीसरे अमेरिकी नेता थे और उनकी यात्रा के दौरान उनके सम्मान में हरियाणा के एक गांव का नाम उनके नाम पर कार्टरपुरी रखा गया था।
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महाकुंभनगर। 'मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत' महाकुंभ में आने वाले 40 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं की सुरक्षा और उन्हें सुगमता से मेले तक पहुंचाने के साथ ही सकुशल घर वापसी का 'फुल प्रूफ़ प्लान' तैयार किया गया है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि अगले महीने प्रयागराज में शुरू हो रहे महाकुंभ की अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस ने मजबूत सात चक्रीय सुरक्षा घेरा बनाया है जिसमें प्रयागराज पुलिस की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रयागराज पुलिस कुम्भ मेला पुलिस के लिए बाहरी घेरे का काम करेगी। उन्होंने बताया कि इस बाहरी घेरे को सुदृढ़ बनाए रखने के लिए प्रयागराज पुलिस ने शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में अस्थाई पुलिस थाने और चौकियां स्थापित की हैं। इसके अलावा पीएसी, एनडीआरएफ, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल, बीडीडीएस, एएस चेक टीम मुस्तैदी से तैनात रहेंगी। कुम्भ मेले के दौरान मेला क्षेत्र के अलावा शहर और ग्रामीण क्षेत्रो के लिए पुलिस फ़ोर्स रिज़र्व में भी रहेंगी। सूत्रों ने बताया कि प्रयागराज पुलिस आयुक्तालय में अब 44 नहीं बल्कि 57 थाने होंगे। रेलवे स्टेशन, बस अड्डों, हवाई अड्डे और अन्य मार्गो से आने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षित मेला क्षेत्र तक पहुंचाने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस ने नए अस्थाई थाने और चौकियां स्थापित की हैं। प्रयागराज के पुलिस आयुक्त तरुण गाबा ने बताया कि 13 अस्थाई पुलिस थाने और 23 चौकियां स्थापित की जा रही हैं। साथ ही अर्द्धसैनिक बल, पीएसी, बम निरोधक दस्ता और अन्य बल भी तैनात रहेंगे। आयुक्तालय क्षेत्र के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 10 हज़ार पुलिसकर्मियों की तैनाती की जा रही है। पुलिस आयुक्त ने बताया कि कुंभ मेला क्षेत्र की तरफ जाने वाले और वापसी के विभिन्न मार्गों को चिन्हित किया गया है। इन्हीं मार्गों पर प्रमुख रूप से अस्थायी थाने और चौकियां स्थापित की गई हैं और अन्य पुलिस बल की तैनाती की जा रही है जिससे यातायात व्यवस्था सुचारू रहे, साथ ही बड़ी तादाद में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके। उन्होंने बताया कि साथ ही आठ जोन और 18 सेक्टर भी बनाए गए हैं, जिनमें क्रमशः अपर पुलिस अधीक्षक तथा पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारी प्रभारी बनाए गए हैं।
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नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में दो दिनों की बारिश और कोहरे के बाद तापमान में भारी गिरावट देखी गई है। पहाड़ों पर बर्फबारी और बारिश जारी रहने के कारण पूरे उत्तर भारत में भीषण शीतलहर का प्रकोप जारी है। अब, भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में भीषण ठंड और घने कोहरे की चेतावनी जारी की है। IMD ने कहा है कि आने वाले दिनों में स्थिति और खराब होने की उम्मीद है।
नए साल में कोहरा और भीषण शीत लहर की चेतावनीIMD के अनुसार, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के कुछ इलाकों में 30 दिसंबर से 1 जनवरी तक भीषण शीत लहर चलेगी। इन इलाकों में तापमान सामान्य से 3 से 5 डिग्री सेल्सियस कम रहने वाला है, साथ ही नए साल के दिन ठंड और बढ़ जाएगी। 4 जनवरी तक घना कोहरा छाए रहने की संभावना है।बर्फबारी से पहाड़ों में जनजीवन अस्त-व्यस्तजम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में बर्फबारी आगे भी जारी रहने की उम्मीद है। पिछले दो दिनों में हुई भारी बारिश ने प्रदेश के निवासियों और पर्यटकों के सामान्य जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। सड़कें बंद होने के बाद भारी बर्फबारी के बीच फंसे लोगों को निकालने के प्रयास जारी हैं। 28 दिसंबर को एक दिन के लिए बंद किए गए जम्मू हाईवे पर यातायात फिर से शुरू हो गया है।आज सुबह 8:00 बजे दिल्ली का तापमान 12 डिग्री सेल्सियस था। दिन के पूर्वानुमान के अनुसार आसमान साफ रहेगा और कुछ इलाकों में कोहरा छाया रहेगा। न्यूनतम और अधिकतम तापमान क्रमश: 11.05 डिग्री सेल्सियस और 21.07 डिग्री सेल्सियस रहेगा। 31 दिसंबर को दिल्ली में न्यूनतम और अधिकतम तापमान क्रमश: 13.66 डिग्री सेल्सियस और 21.52 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।बारिश के बाद प्रदूषण में कमीदिल्ली-एनसीआर में बीते दो दिनों से हल्की बारिश के बाद प्रदूषण में कमी आई है। दिल्ली में कुछ जगहों पर AQI 150 के आस-पास पहुंच गया है। - इंदौर/ वर्ष 1984 की भोपाल गैस त्रासदी के लिए जिम्मेदार ‘यूनियन कार्बाइड' कारखाने के 337 टन जहरीले कचरे को इंदौर के पास पीथमपुर की एक औद्योगिक अपशिष्ट निपटान इकाई में नष्ट किए जाने की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। यह अपशिष्ट राज्य की राजधानी में स्थित ‘यूनियन कार्बाइड' कारखाने में पड़ा है जहां से दो और तीन दिसंबर 1984 की दरमियानी रात जहरीली गैस ‘मिथाइल आइसोसाइनेट' का रिसाव हुआ था। दुनिया की सबसे भीषण औद्योगिक त्रासदियों में गिनी जाने वाली इस घटना में 5,479 लोगों की मौत हो गई थी और पांच लाख से अधिक लोग स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और दीर्घकालिक विकलांगताओं से पीड़ित हो गए थे। अधिकारियों ने बताया कि भोपाल गैस त्रासदी के बाद से बंद पड़े ‘यूनियन कार्बाइड' कारखाने के 337 टन रासायनिक कचरे को पीथमपुर में एक निजी कंपनी की अपशिष्ट निपटान इकाई तक पहुंचाने के लिए व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। पीथमपुर, राज्य का प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र है। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने भोपाल गैस त्रासदी के 40 साल बाद भी ‘यूनियन कार्बाइड' कारखाने के जहरीले कचरे का निपटारा नहीं होने पर नाराजगी जताते हुए तीन दिसंबर को राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि इस कचरे को तय अपशिष्ट निपटान इकाई में चार हफ्तों के भीतर भेजा जाए। राज्य के गैस राहत और पुनर्वास विभाग के निदेशक स्वतंत्र कुमार सिंह ने कहा, ‘‘भोपाल गैस त्रासदी का कचरा एक कलंक है जो 40 साल बाद मिटने जा रहा है। हम इसे सुरक्षित तौर पर पीथमपुर भेजकर नष्ट करेंगे।" उन्होंने कहा कि इस रासायनिक कचरे को भोपाल से पीथमपुर भेजने के लिए करीब 250 किलोमीटर लंबा ‘ग्रीन कॉरिडोर' बनाया जाएगा। ‘ग्रीन कॉरिडोर' का मतलब सड़क पर यातायात को व्यवस्थित करके कचरे को कम से कम समय में गंतव्य तक पहुंचाने से है। सिंह ने इस कचरे को पीथमपुर भेजकर नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू किए जाने की कोई विशिष्ट तारीख बताने से इनकार कर दिया, लेकिन सूत्रों का कहना है कि उच्च न्यायालय के निर्देश के मद्देनजर यह प्रक्रिया जल्द शुरू हो सकती है। गैस राहत और पुनर्वास विभाग के निदेशक ने बताया कि पीथमपुर की अपशिष्ट निपटान इकाई में शुरुआत में कचरे के कुछ हिस्से को जलाकर देखा जाएगा और इसके ठोस अवशेष (राख) की वैज्ञानिक जांच की जाएगी ताकि पता चल सके कि इसमें कोई हानिकारक तत्व बचा तो नहीं रह गया है। सिंह ने कहा, ‘‘अगर जांच में सब कुछ ठीक पाया जाता है, तो कचरे को तीन महीने के भीतर जलाकर भस्म कर दिया जाएगा। वरना इसे जलाने की रफ्तार धीमी की जाएगी जिससे इसे भस्म होने में नौ महीने तक लग सकते हैं।'' उन्होंने बताया कि भस्मक में कचरे के जलने से निकलने वाले धुएं को चार स्तरों वाले विशेष फिल्टर से गुजारा जाएगा ताकि आस-पास की वायु प्रदूषित न हो और इस प्रक्रिया के पल-पल का रिकॉर्ड रखा जाएगा। सिंह ने बताया कि कचरे के भस्म होने और हानिकारक तत्वों से मुक्त होने के बाद इसके ठोस अवशेष (राख) को दो परतों वाली मजबूत ‘मेम्ब्रेन' (झिल्ली) से ढक कर ‘लैंडफिल साइट' में दफनाया जाएगा ताकि यह अपशिष्ट किसी भी तरह मिट्टी और पानी के संपर्क में न आ सके। उन्होंने कहा कि कचरे को प्रदेश सरकार, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की निगरानी में विशेषज्ञों का दल सुरक्षित तरीके से नष्ट करेगा और इसकी विस्तृत रिपोर्ट उच्च न्यायालय में प्रस्तुत की जाएगी। स्थानीय लोगों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं के एक तबके का दावा है कि ‘यूनियन कार्बाइड' के 10 टन कचरे को वर्ष 2015 में पीथमपुर की अपशिष्ट निपटान इकाई में परीक्षण के तौर पर नष्ट किए जाने के बाद आस-पास के गांवों की मिट्टी, भूमिगत जल और जल स्रोत प्रदूषित हो गए हैं। गैस राहत और पुनर्वास विभाग के निदेशक सिंह ने इस दावे को गलत बताते हुए कहा, "2015 के इस परीक्षण की रिपोर्ट और सारी आपत्तियों की जांच के बाद ही पीथमपुर की अपशिष्ट निपटान इकाई में ‘यूनियन कार्बाइड' के कारखाने के 337 टन कचरे को नष्ट करने का फैसला किया गया है। इस इकाई में कचरे को सुरक्षित तरीके से नष्ट करने के सारे इंतजाम हैं और चिंता की कोई भी बात नहीं है।'' बहरहाल, करीब 1.75 लाख की आबादी वाले पीथमपुर में यूनियन कार्बाइड का जहरीला कचरा जलाने की योजना को लेकर आम लोगों की चिंताएं अब तक दूर नहीं हुई हैं। इस कचरे के पीथमपुर की अपशिष्ट निपटान इकाई में जल्द पहुंचने की खबरों के बीच रविवार को बड़ी तादाद में जुटे लोगों ने अपने हाथ पर काली पट्टी बांधी और रैली निकालकर विरोध जताया। "पीथमपुर क्षेत्र रक्षा मंच" नाम के समूह की अगुवाई में निकाली गई रैली में शामिल लोगों ने अपने हाथों में "पीथमपुर को भोपाल नहीं बनने देंगे" और "पीथमपुर बचाओ, जहरीला कचरा हटाओ" जैसे नारों वाली तख्तियां थाम रखी थीं। प्रदर्शनकारियों में शामिल राजेश चौधरी ने कहा, "हम चाहते हैं कि यूनियन कार्बाइड कारखाने का कचरा नष्ट किए जाने से पहले वैज्ञानिकों द्वारा पीथमपुर की आबो-हवा की फिर से जांच की जाए। हम अदालत में भी अपना पक्ष रखने की पूरी कोशिश करेंगे।" इंदौर के पड़ोस के धार जिले के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में छोटी-बड़ी 1,250 इकाइयां हैं। पीथमपुर औद्योगिक संगठन के अध्यक्ष गौतम कोठारी ने कहा, "हम यूनियन कार्बाइड कारखाने के कचरे को पीथमपुर की औद्योगिक अपशिष्ट निपटान इकाई में जलाने के लिए किए गए इंतजामों से संतुष्ट हैं। इस कचरे के निपटान को कोरी आशंकाओं के आधार पर हौवा नहीं बनाया जाना चाहिए और स्थानीय लोगों को डरना नहीं चाहिए।" उन्होंने हालांकि कहा कि अगर इस कचरे को नष्ट किए जाने के दौरान पीथमपुर में कोई दुर्घटना होती है, तो उनका संगठन आंदोलन करेगा।
- भुवनेश्वर. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को ओडिशा के कालाहांडी जिले के गोलामुंडा ब्लॉक के किसानों की क्षेत्र में ‘सब्जी क्रांति' के लिए सराहना की। मोदी ने ‘मन की बात' कार्यक्रम में किसान उत्पादक संघ (एफपीओ) की स्थापना करने और आधुनिक प्रौद्योगिकी का उपयोग कर कालाहांडी जिले में ‘सब्जी क्रांति' लाने के लिए किसानों की सराहना की। कालाहांडी को कभी गरीबी और लोगों के पलायन की भयावह स्थिति के लिए जाना जाता था।उन्होंने कहा, “जहां, कभी किसान, पलायन करने को मजबूर थे, वहीं आज, कालाहांडी का गोलामुंडा ब्लॉक एक सब्जी केंद्र बन गया है। यह परिवर्तन कैसे आया? ” मोदी ने कहा, “इसकी शुरुआत सिर्फ 10 किसानों के एक छोटे से समूह से हुई। इस समूह ने मिलकर एक ‘किसान उत्पाद संघ' की स्थापना की, खेती में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया, और आज उनका ये संघ करोड़ों का कारोबार कर रहा है। आज 200 से अधिक किसान इस संघ से जुड़े हैं, जिनमें 45 महिला किसान भी हैं।” उन्होंने कहा, “ये लोग मिलकर 200 एकड़ में टमाटर की खेती कर रहे हैं, 150 एकड़ में करेले का उत्पादन कर रहे हैं। अब इस संघ का सालाना कारोबार भी बढ़कर डेढ़ करोड़ से ज्यादा हो गया है। आज कालाहांडी की सब्जियां, न केवल ओडिशा के विभिन्न जिलों में बल्कि, दूसरे राज्यों में भी पहुंच रही हैं, और वहां का किसान, अब, आलू और प्याज की खेती की नई तकनीकें सीख रहा है।” प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘कालाहांडी की यह सफलता हमें सिखाती है कि संकल्प शक्ति और सामूहिक प्रयास से क्या नहीं किया जा सकता। मैं आप सभी से आग्रह करता हूं कि अपने क्षेत्र में किसान उत्पाद संघ को प्रोत्साहित करें, किसान उत्पादक संगठनों से जुड़ें और उन्हें मजबूत बनाएं।'' ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, “ ओडिशा के कालाहांडी जिले में गोलामुंडा आज ‘सब्जी केंद्र' बन गया है। किसान अब किसान उत्पादन संघों के माध्यम से हाथ मिला रहे हैं और आधुनिक खेती के तरीकों का उपयोग कर रहे हैं। 200 से अधिक किसान इसमें शामिल हुए हैं, जिनमें 45 महिला किसान शामिल हैं। ओडिशा के कृषि एवं किसान सशक्तिकरण विभाग के सचिव अरबिंद पाधी ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, “आज (रविवार को) प्रधानमंत्री के मन की बात में हमारे कृषि उत्पादन केंद्र पहल को देखकर गर्व हुआ! कालाहांडी के गोलामुंडा में किसान उत्पादन संघ की सफलता का एक शानदार उदाहरण है। मुझे गांव का दौरा करने और परिवर्तनकारी बदलाव को प्रत्यक्ष रूप से देखने का सौभाग्य मिला है।”
- नयी दिल्ली. एक सदी पुराने आपराधिक कानूनों को बदलकर आधुनिक और प्रौद्योगिकी आधारित आपराधिक न्याय प्रणाली शुरू करने के लिए नए कानूनों का क्रियान्वयन, विवादास्पद संशोधित नागरिकता अधिनियम (सीएए) को लागू करना और मणिपुर में हिंसा को रोकने के लिए कार्रवाई करना, ये कुछ ऐसे प्रमुख कार्य रहे जिनमें वर्ष 2024 में केंद्रीय गृह मंत्रालय व्यस्त रहा। जम्मू-कश्मीर में बिना किसी बड़ी घटना के विधानसभा चुनाव कराने में निर्वाचन आयोग की सहायता करना तथा नक्सल प्रभावित राज्यों और पूर्वोत्तर क्षेत्र में हिंसा को कम करना देश के इस महत्वपूर्ण मंत्रालय की अन्य प्रमुख उपलब्धियां रहीं। तीन नए आपराधिक कानूनों - भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम - ने क्रमशः औपनिवेशिक युग के भारतीय दंड संहिता, आपराधिक प्रक्रिया संहिता और 1872 के भारतीय साक्ष्य अधिनियम का स्थान लिया। नए कानून एक जुलाई से लागू हो गए हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि नए कानून न्याय प्रदान करने को प्राथमिकता देंगे, जबकि औपनिवेशिक काल के कानून दंडात्मक कार्रवाई को प्राथमिकता देते थे। उनका कहना था, ‘‘ये कानून भारतीयों द्वारा, भारतीयों के लिए और भारतीय संसद द्वारा बनाए गए हैं और औपनिवेशिक आपराधिक न्याय कानूनों के अंत का प्रतीक हैं।'' नए कानून आधुनिक न्याय प्रणाली पर आधारित हैं, जिनमें ‘जीरो एफआईआर', पुलिस शिकायतों का ऑनलाइन पंजीकरण, एसएमएस जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से समन और सभी जघन्य अपराधों के लिए घटनास्थलों की अनिवार्य वीडियोग्राफी जैसे प्रावधान शामिल हैं। सीएए को इस साल मार्च में लागू किया गया था और मई में कानून के तहत 14 लोगों के पहले समूह को भारतीय नागरिकता प्रदान की गई थी। सीएए के तहत बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से सताए गए ऐसे हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई प्रवासियों को भारत की नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है, जो 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले भारत आए थे। वर्ष 2019 में कानून बनने के कुछ दिनों बाद ही सीएए को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई थी, लेकिन जिन नियमों के तहत भारतीय नागरिकता दी जानी थी, वे लगभग चार साल की देरी के बाद 11 मार्च को अधिसूचित किए गए। वर्ष 2019 में सीएए के खिलाफ देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए और आंदोलनकारियों ने इसे ‘‘भेदभावपूर्ण'' करार दिया। देश के विभिन्न हिस्सों में सीएए विरोधी प्रदर्शनों या पुलिस कार्रवाई के दौरान सौ से अधिक लोगों की जान चली गई। मणिपुर में हिंसा की घटनाएं जारी हैं, जहां बहुसंख्यक मेइती और आदिवासी कुकी के बीच मई 2023 में जातीय संघर्ष देखा गया था। लगभग 260 लोगों की मौत, सैकड़ों के घायल होने और हजारों लोगों के विस्थापन के बाद भी पूर्वोत्तर राज्य में शांति नहीं आ पा रही है। केंद्र सरकार ने संघर्षरत समुदायों को बातचीत की मेज पर लाने के प्रयास किए हैं, फिर भी वहां छिटपुट हिंसा जारी है। इस हिंसा से वरिष्ठ राजनेता भी अछूते नहीं हैं। नवंबर में इंफाल घाटी के विभिन्न जिलों में भीड़ ने कई भाजपा विधायकों, जिनमें से एक वरिष्ठ मंत्री हैं, और एक कांग्रेस विधायक के आवासों में आग लगा दी तथा मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के पैतृक घर पर धावा बोलने का भी प्रयास किया। राज्य की नाजुक स्थिति को देखते हुए केंद्र ने नवंबर में हिंसा प्रभावित जिरीबाम सहित मणिपुर के छह पुलिस थाना क्षेत्रों में सशस्त्र बल विशेष शक्तियां अधिनियम (अफस्पा) को फिर से लागू कर दिया। केंद्र ने 24 दिसंबर को पूर्व केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला को मणिपुर का नया राज्यपाल नियुक्त किया, जो स्पष्ट रूप से राज्य में स्थायी शांति स्थापित करने में मदद करने का प्रयास था। पिछले महीने गृह मंत्रालय ने यह स्पष्ट कर दिया कि कोई भी गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) जो विकास विरोधी गतिविधियों, धर्मांतरण, दुर्भावनापूर्ण इरादे से विरोध प्रदर्शन भड़काने, आतंकवादी या कट्टरपंथी संगठनों से संबंध रखने में शामिल है, उसका विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 (एफसीआरए) पंजीकरण रद्द कर दिया जाएगा।
- नयी दिल्ली. इस साल मनमोहन सिंह, जाकिर हुसैन, अमीन सयानी, श्याम बेनेगल, फली एस नरीमन, बुद्धदेव भट्टाचार्य और ए रामचंद्रन समेत अपने-अपने क्षेत्र की कई मशहूर हस्तियों ने दुनिया को अलविदा कह दिया। राजनीति, व्यवसाय, कानून और अर्थशास्त्र के क्षेत्रों ने कम्युनिस्ट नेता सीताराम येचुरी और बुद्धदेव भट्टाचार्य, व्यवसायी-परोपकारी रतन टाटा, कानूनी दिग्गज फली एस नरीमन और ए जी नूरानी तथा अर्थशास्त्री बिबेक देबरॉय जैसे दिग्गजों को खो दिया। वर्ष के अंतिम दिनों में देश ने अपने एक और सच्चे सपूत को खो दिया। भारत के सबसे बड़े नेताओं में से एक और आर्थिक सुधारों के जनक, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 26 दिसंबर को अंतिम सांस ली। कांग्रेस नेता ने 1990 के दशक में देश को आर्थिक संकट से उबारने के लिए नीतियां बनाकर राष्ट्र को प्रगति के पथ पर अग्रसर किया। इससे पहले, रतन टाटा की मृत्यु ने कारोबारी क्षेत्र में एक अपूरणीय शून्य पैदा कर दिया। टाटा समूह के पूर्व अध्यक्ष ने नमक से लेकर सॉफ्टवेयर बनाने तक समूह का विस्तार करके इसे नयी ऊंचाइयों पर पहुंचाया। सुशील कुमार मोदी, नटवर सिंह, ओम प्रकाश चौटाला और एसएम कृष्णा जैसे प्रमुख नेताओं ने भी इस वर्ष अंतिम सांस ली। गायक पंकज उधास, प्रभा अत्रे और उस्ताद राशिद खान, भरतनाट्यम नृत्यांगना यामिनी कृष्णमूर्ति और तबला वादक जाकिर हुसैन के निधन से इस वर्ष कला के क्षेत्र में भी बड़ी क्षति हुई। जनवरी में शास्त्रीय गायक राशिद खान का निधन हो गया। खान ने अपनी आवाज से ‘‘जब वी मेट'' के ‘‘आओगे जब तुम'' और ‘‘मॉर्निंग वॉक'' के ‘‘भोर भयो'' जैसे गीतों को अमर कर दिया। भारत ने किराना घराने की सबसे पुरानी गायिकाओं में से एक, प्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका प्रभा अत्रे को भी खो दिया। पद्म भूषण से सम्मानित अत्रे का ख्याल, ठुमरी, दादरा और ग़ज़ल सहित विभिन्न संगीत शैलियों पर असाधारण अधिकार था। अपनी सदाबहार गजलों के लिए मशहूर पंकज उधास ने ‘‘चांदी जैसा रंग है तेरा'', ‘‘फिर हाथ में शराब है'', और ‘‘और आहिस्ता'' जैसे गीतों से इस शैली को लोकप्रिय बनाया। उनकी आवाज ने ‘‘चिट्ठी आई है'', ‘‘ना कजरे की धार'', और ‘‘जीयें तो जीयें कैसे'' जैसे हिंदी फिल्मी गानों में चार चांद लगा दिये। बहुमुखी प्रतिभा की धनी यामिनी कृष्णमूर्ति को उत्तर भारत में भरतनाट्यम को लोकप्रिय बनाने का श्रेय दिया जाता है। उन्हें भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी, कर्नाटक गायन और वीणा में महारत हासिल थी। कला के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें पद्म श्री (1968), पद्म भूषण (2001) और पद्म विभूषण (2016) से सम्मानित किया गया। जाकिर हुसैन की मृत्यु से देश ने अपनी पीढ़ी के सबसे महत्वपूर्ण कलाकारों में से एक को भी खो दिया। अपने पिता अल्ला रक्खा के पदचिह्नों पर चलते हुए तबला वादक न केवल घर-घर में मशहूर हुए, बल्कि उन्होंने इस वाद्य यंत्र को विश्व स्तर पर लोकप्रिय बनाया और अपने करियर में चार ग्रैमी पुरस्कार जीते। संगीत के क्षेत्र की एक और बड़ी शख्सियत शारदा सिन्हा का भी इस साल निधन हो गया। भोजपुरी और मैथिली लोक संगीत को लोकप्रिय बनाने वाली सिन्हा अपने भक्ति गीतों के जरिये छठ पूजा की आवाज बन गईं। उन्होंने ‘‘कहे तो से सजना'' और ‘‘तार बिजली'' जैसे हिंदी फिल्मी गीतों में भी अपनी आवाज से अनूठी छाप छोड़ी। साहित्य जगत ने शायर मुनव्वर राणा, केकी एन दारूवाला, उषा किरण खान, सुरजीत पातर और मालती जोशी जैसे जाने-माने नाम खो दिए। अवधी और उर्दू में लिखने वाले राणा ने फारसी और अरबी शब्दावली से अपरिचित पाठकों के लिए शायरी को सुलभ बनाया। शायर अपने राजनीतिक विचारों के लिए भी जाने जाते थे, जो अक्सर लोकप्रिय राय के विपरीत होते थे। खाना पकाने की ‘दम पुख्त' परंपरा को जिंदा करने वाले शेफ इम्तियाज कुरैशी का भी इस साल निधन हो गया। अवधी व्यंजनों में पारंगत कुरैशी ने ‘दाल बुखारा', ‘दम पुख्त बिरयानी', ‘काकोरी कबाब', ‘लहसुन की खीर' और ‘वरकी पराठा' जैसे व्यंजनों को लोकप्रिय बनाया। कला क्षेत्र में मशहूर हनीफ कुरैशी भी इस साल गुजर गए। कुरैशी ने ‘स्ट्रीट आर्ट' के क्षेत्र में क्रांति ला दी और दिल्ली में लोधी आर्ट डिस्ट्रिक्ट, मुंबई में ससून डॉक आर्ट प्रोजेक्ट और बैंगलोर मेट्रो सहित सार्वजनिक कला परियोजनाओं के पीछे प्रेरक शक्ति थे। फिल्म और फैशन की दुनिया के भी कुछ नामी सितारों का साथ छूट गया। समानांतर सिनेमा के दो सबसे अग्रणी चेहरे श्याम बेनेगल और कुमार साहनी के निधन से बड़ा खालीपन पैदा हो गया। साहनी को ‘‘माया दर्पण'' और ‘‘कस्बा'' तथा बेनेगल को ‘‘अंकुर'', ‘‘मंथन', ‘निशांत' जैसी सिनेमाई कृतियों के लिए हमेशा याद किया जाएगा। सबसे प्रसिद्ध भारतीय फैशन डिजाइनरों में से एक रोहित बल ने भी इस साल अलविदा कह दिया। निर्देशक संगीत सिवन और अभिनेता ऋतुराज सिंह एवं अतुल परचुरे भी इस साल अलविदा कहने वालों में शामिल थे। दृश्य कला के क्षेत्र ने चित्रकार ए रामचंद्रन को खो दिया। भारत में सार्वजनिक प्रसारण का पर्याय माने जाने वाले रेडियो प्रस्तोता अमीन सयानी भी इस साल हम सब का साथ छोड़ गए।








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