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- कोलकाता। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शनिवार को इस बात पर जोर दिया कि अयोध्या में राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के दौरान विपक्षी नेताओं की मौजूदगी उन नेताओं को उस भूमिका में ला देती जिसमें वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सहायक की भूमिका में नजर आते।थरूर ने संबंधित समारोह को भी मोदी का बताया है।उन्होंने 22 जनवरी के कार्यक्रम में शामिल न होने के कांग्रेस नेतृत्व के फैसले का समर्थन करते हुए आम चुनाव खत्म होने के बाद वहां जाने की इच्छा व्यक्त की और कहा कि तब तक मंदिर की ओर से राजनीतिक ध्यान हट जाएगा।तिरुवनंतपुरम के सांसद ने कहा, ‘‘कांग्रेस की स्थिति बहुत स्पष्ट है। कांग्रेस पार्टी के सदस्य अपने धर्म और आस्था के पालन के लिए स्वतंत्र हैं और पार्टी सभी के धर्म का सम्मान करती है। इसलिए मैं मंदिरों में पूजा-अर्चना के लिए जाता हूं, न कि राजनीतिक कार्यक्रमों के लिए।’’उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘यह विशेष कार्यक्रम (प्राण प्रतिष्ठा समारोह) अनिवार्य रूप से आमंत्रित विपक्षी नेताओं को प्रधानमंत्री अभिनीत तमाशे के लिए एक तरह की सहायक भूमिका में धकेलने वाला था। मैंने नहीं सोचता कि कांग्रेस को ऐसी सहायक भूमिका निभाने की जरूरत है।’’पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व प्रमुख सोनिया गांधी और लोकसभा में विपक्ष के नेता अधीर रंजन चौधरी सहित कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने राम मंदिर प्रतिष्ठा समारोह के निमंत्रण को 'सम्मानपूर्वक अस्वीकार' कर दिया था।थरूर ने इस बात पर भी जोर दिया कि लोगों को यह समझना चाहिए कि भगवान राम या किसी भी हिंदू देवी-देवता पर भाजपा का एकाधिकार नहीं है।उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘लेकिन मुझे पूरा यकीन है कि बड़ी संख्या में कांग्रेस के लोग राजनीति से इतर (अयोध्या) मंदिर जाएंगे। मैं स्वयं (अयोध्या) जाकर मंदिर देखना पसंद करूंगा, लेकिन मैं ऐसा केवल (आम) चुनाव के बाद ही करूंगा, जब सारा राजनीतिक ध्यान खत्म हो जाएगा। हम भाजपा की राजनीतिक कवायद का हिस्सा नहीं बनना चाहते।’’थरूर ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और कांग्रेस के बीच चल रहे सीट-बंटवारे के विवाद पर किसी सवाल का जवाब देने को लेकर अनिच्छा जताई और कहा कि इस मामले पर पार्टी नेतृत्व विचार कर रहा है।उन्होंने कहा, ‘‘इस पूरे गठबंधन या सीट-बंटवारे पर राज्य-दर-राज्य आधार पर चर्चा की जा रही है। किसी के पास भी एकतरफा समाधान नहीं है।”थरूर ने इस सवाल को भी टाल दिया कि क्या कांग्रेस, टीएमसी के समर्थन से पश्चिम बंगाल में जीवित रहना चाहती है।उन्होंने कहा, ‘‘हम सभी का ध्यान भाजपा-नीत केंद्र सरकार को सत्ता से बेदखल करने की अनिवार्य आवश्यकता पर है। नयी दिल्ली में मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को बदलना होगा और यही हम सभी का अंतिम उद्देश्य है।”बिहार के मुख्यमंत्री एवं जद(यू) अध्यक्ष नीतीश कुमार के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा के साथ हाथ मिलाने की संभावना पर थरूर ने कहा, ''मैं मीडिया में इस पर नजर रख रहा हूं। यह मेरी जिम्मेदारी के क्षेत्र में नहीं है। जब ऐसा कोई घटनाक्रम होगा, तो आप इस बारे में पार्टी की ओर से अवश्य सुनेंगे।”
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नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों और राज्यपालों तथा केंद्रशासित प्रदेशों के उपराज्यपालों को पत्र लिखा है और उनसे 29 जनवरी को विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों की उपस्थिति में परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का प्रसारण दूरदर्शन और निजी टेलीविजन चैनलों पर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत के भविष्य के निर्माताओं में उत्साह लाने के लिए परीक्षाओं के उत्सव - परीक्षा पे चर्चा में सहयोग करना चाहिए ।केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इस वर्ष परीक्षा पे चर्चा के लिए तकरीबन 2 करोड़ 26 लाख विद्यार्थियों और शिक्षकों और अभिभावकों ने पंजीकरण कराया है। पिछले वर्ष 2023 में इस कार्यक्रम में 38 लाख 80 हजार प्रतिभागी थे।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने युवाओं को विकसित भारत का वास्तुकार बताते हुए उनकी सरकार द्वारा उठाए गए कई कदमों पर शनिवार को प्रकाश डाला और कहा कि इसने युवाओं और महिलाओं को सशक्त बनाया है। उन्होंने यहां वार्षिक ‘एनसीसी-पीएम' रैली में युवाओं से कहा, ‘‘आप एक विकसित भारत के वास्तुकार हैं।'' उन्होंने कहा कि महिलाएं पहले सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक ही सीमित थीं लेकिन उनकी सरकार ने तीनों सेवाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों को उनके लिए खोल दिया है और वे हर जगह अपनी छाप छोड़ रही हैं। उन्होंने कहा कि इस साल गणतंत्र दिवस परेड उन्हें (महिलाओं को) समर्पित थी।
मोदी ने कहा, ‘‘जब देश बेटों और बेटियों की प्रतिभा को समान अवसर देता है, तो इसका प्रतिभा भंडार व्यापक हो जाता है।'' प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले 10 वर्ष में केंद्रीय सुरक्षा बलों में महिलाओं की संख्या दोगुनी हो गई है और कहा कि राज्यों को भी इसी तरह के रास्ते पर चलने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि डिजिटल क्रांति हो रही है और इससे युवाओं की रचनात्मकता को सबसे ज्यादा फायदा होता है। मोदी ने कहा कि लोग एक दशक पहले 2जी और 3जी बुनियादी ढांचे के लिए संघर्ष कर रहे थे, जबकि 5जी और ‘ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क' अब हर गांव तक पहुंच रहा है। पिछली सरकारों पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने जानबूझकर सीमावर्ती गांवों के विकास की उपेक्षा की और इन्हें देश का अंतिम गांव बताया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने बड़े पैमाने पर इन गांवों का विकास किया है और वे बड़े पर्यटन केंद्र के रूप में उभरेंगे तथा इन गांवों को अब देश के ‘‘पहले गांव'' के रूप में देखा जाता है। स्वयं सहायता समूहों की 100 से अधिक महिलाएं इस कार्यक्रम में उपस्थित थीं। उन्होंने कहा कि सरकार ने उनके विकास के लिए ‘वाइब्रेंट विलेज' कार्यक्रम शुरू किया है। उन्होंने कहा कि भारत अब तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप पारिस्थितिकी तंत्र है, जिसमें 1.25 लाख से अधिक ‘स्टार्ट-अप' और 100 से अधिक ‘यूनिकॉर्न' हैं। जब किसी स्टार्टअप का मूल्य एक अरब डॉलर को पार कर जाता है तो उसे ‘यूनिकॉर्न' कहा जाता है।
उन्होंने कहा कि लाखों युवाओं को इन कंपनियों में गुणवत्तापूर्ण नौकरियां मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल अर्थव्यवस्था भारत की युवा शक्ति की नई ताकत और पहचान बनेगी। मोदी ने कहा कि एक योग्य सरकार भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए वर्तमान में निर्णय लेती है और उसकी प्राथमिकताएं स्पष्ट होती हैं। उन्होंने कहा कि 25 वर्ष में भारत को एक विकसित देश बनाने के उनकी सरकार के प्रयासों का सबसे बड़ा लाभार्थी मोदी नहीं, बल्कि स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ने वाले युवा होंगे। उन्होंने कहा कि भारत अब दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता और आयातक बन गया है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि मोबाइल डेटा बेहद किफायती दर पर उपलब्ध हो। उन्होंने कहा, ‘‘पिछले 10 वर्ष में, भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था हमारे युवाओं के लिए ताकत का एक नया स्रोत बन गई है।'' उन्होंने बताया कि वह स्वयं एनसीसी कैडेट थे। उन्होंने एनसीसी के कैडेटों से कहा कि वे ‘‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत'' के विचार पर प्रकाश डालें। -
आज 26 जनवरी 2024 को नई दिल्ली के कर्तव्य-पथ पर गणतंत्र-दिवस परेड में छत्तीसगढ़ की झांकी बस्तर की आदिम जनसंसद मुरिया दरबार प्रदर्शित की गई। इस झांकी में जनजातीय समाज में आदिम-काल से उपस्थित लोकतांत्रिक चेतना के प्रमाण स्वरूप जगदलपुर के मुरिया दरबार और बड़े डोंगर के लिमऊ राजा को विषय-वस्तु के रूप में प्रस्तुत किया गया। छत्तीसगढ़ के लोक-संगीत से सजी इस झांकी में परब नृत्य भी प्रस्तुत किया गया। झांकी की सजावट जनजातीय शिल्पों से की गई थी, जिसमें बेलमेटल और टेराकोटा शिल्प के सौंदर्य को प्रदर्शित किया गया। कर्तव्य-पथ पर दर्शक-दीर्घा में उपस्थित विशिष्ट-जनों और आम नागरिकों ने इस झांकी की सराहना की है।
परेड में शामिल विभिन्न राज्यों की झांकियों के बारे में आम-नागरिकों की राय लेने के लिए रक्षा मंत्रालय ने आज एक पोल की शुरुआत की है। इसकी समय-सीमा कल 27 जनवरी को शाम 5.30 बजे तक है। सभी नागरिकों से अनुरोध है कि कृपया छत्तीसगढ़ की झांकी के संदर्भ में अपनी राय अवश्य देवें।
*वोटिंग के लिए प्रक्रिया*
1. भारत सरकार की MyGov एप को प्ले स्टोर से डाउन लोड करें।
2. साइनअप करके अपने आपको रजिस्टर करें।
3. फिर साइन-इन करें। आप अपने मोबाइल नंबर और ओटीपी के माध्यम से साइन इन कर सकते हैं।
4. डैशबोर्ड में पोल/सर्वे बटन पर क्लिक करें।
5. वोट फॉर योर फेबरेट टेबल्यू एट रिपब्लिक डे 2024 लिंक के नीचे कंट्रीब्यूट नाऊ बटन दबाएं।
6. अब छत्तीसगढ़ थीम आदिम जनसंसद ऑफ बस्तर मुरिया दरबार को चुने और सबमिट करें।
7. आपका वोट दर्ज हो जाएगा। - नयी दिल्ली। )पंचायती राज मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि 75वें गणतंत्र दिवस समारोह में हिस्सा लेने के लिए पंचायती राज संस्थानों के कई निर्वाचित प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है। मंत्रालय ने यहां जारी बयान में बताया कि देश भर से पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों और उनके जीवनसाथी सहित लगभग 500 मेहमानों को यहां कर्तव्य पथ पर परेड देखने के लिए आमंत्रित किया गया है। मंत्रालय ने बताया कि ये प्रतिनिधि उन पंचायतों से चुने गए हैं जिन्हें गत वर्षों में राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार से सम्मानित किया गया था या उनकी पंचायतों ने उल्लेखनीय कार्य किया है। मंत्रालय ने कहा, ‘‘इसका उद्देश्य सरकार के ‘जनभागीदारी' दृष्टिकोण के तहत पंचायत प्रतिनिधियों को राष्ट्रीय उत्सव में भाग लेने का अवसर प्रदान करना है। यह पहल अत्यधिक महत्व रखती है क्योंकि यह राष्ट्रीय उत्सव में पंचायत प्रतिनिधियों को मान्यता देकर और उन्हें शामिल करके लोकतांत्रिक लोकाचार को मजबूत करती है।'' बयान के मुताबिक आमंत्रित जनप्रतिनिधि और उनके जीवनसाथी नयी दिल्ली के कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड देखेंगे और उसके बाद वे ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री गिरिराज सिंह से उनके आवास पर मुलाकात करेंगे। इस दौरान ग्रामीण विकास राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते और पंचायती राज राज्य मंत्री कपिल मोरेश्वर पाटिल भी उपस्थित रहेंगे। file photo
- मुंबई। दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड के मौके पर ‘बॉम्बे सैपर्स' की टुकड़ी का नेतृत्व एक महिला अधिकारी करेंगी। इस रेजिमेंट की टुकड़ी में सभी पुरुष अधिकारी शामिल होंगे। बॉम्बे सैपर्स के तीन सदी पुराने इतिहास में पहली बार एक महिला अधिकारी परेड के दौरान टुकड़ी की अगुवाई करेंगी। आठ साल पहले ‘कोर ऑफ इंजीनियर्स' की 115 इंजीनियर रेजिमेंट में नियुक्त होने वाली 31 वर्षीय मेजर दिव्या त्यागी के लिए यह एक अनोखी उपलब्धि है। एक अधिकारी ने ‘ बताया कि मेजर त्यागी उस दल का नेतृत्व करेंगी, जिसमें एक अधिकारी, दो जूनियर कमीशंड अधिकारी और 144 अन्य रैंक के जवान शामिल हैं। ये टुकड़ी पिछले छह महीने से परेड के लिए लगातार अभ्यास कर रही है। मेजर त्यागी गणतंत्र दिवस परेड में कॉन्टिनजेंट कमांडर के रूप में बॉम्बे सैपर्स की पुरुष टुकड़ी का नेतृत्व करने वाली पहली महिला अधिकारी होंगी। सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक मेजर त्यागी वर्तमान में पुणे जिले के खड़की में ‘बॉम्बे इंजीनियरिंग ग्रुप एंड सेंटर' में तैनात हैं। चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी से अकादमी कैडेट एडजुटेंट के रूप में उत्तीर्ण हुईं त्यागी सितंबर 2016 में बॉम्बे सैपर बनीं। बॉम्बे इंजीनियर ग्रुप जिसे बॉम्बे सैपर्स के रूप में जाना जाता है, थलसेना के इंजीनियर्स कोर की एक रेजिमेंट है।
- नयी दिल्ली ।भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष जे पी नड्डा ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मौजूदगी में आगामी लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी के प्रचार अभियान का गीत जारी किया। पार्टी की ओर से जारी इस गीत के वीडियो में इस बात को रेखांकित किया गया है कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने वादों को और कैसे लोगों के सपनों को पूरा किया। इसमें दर्शाया गया है कि जब 2014 में लोगों ने उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में चुना तब देश की क्या हालत थी और पिछले 10 सालों में वह समाज के हर वर्ग के लिए क्या बदलाव लाए। इस गीत का मुख्य वाक्य है ‘सपने नहीं हकीकत बुनते हैं, तभी तो सब मोदी को चुनते हैं'।पार्टी ने कहा कि यह गीत ‘मोदी की गारंटी' पर आधारित लोकप्रिय भावना को दर्शाता है।नड्डा ने भाजपा की युवा इकाई भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) की ओर से आयोजित ‘नमो नवमतदाता सम्मेलन' के दौरान यह गीत जारी किया। प्रधानमंत्री मोदी भी इस कार्यक्रम में वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से शामिल हुए। उन्होंने युवा मतदाताओं को संबोधित भी किया। इस अवसर पर भाजपा अध्यक्ष ने कहा, ‘‘मोदी सपनों को हकीकत में बदलते हैं और कई पीढ़ियों से वादों और सपनों को पूरा करने की गारंटी देते हैं। दशकों या यहां तक कि 500 साल तक के सपने भी उनके द्वारा पूरे किए गए हैं।'' पार्टी नेताओं ने कहा कि इसी विषय का उपयोग करते हुए कई अन्य संबंधित अभियानों की भी योजना बनाई गई है।भाजपा के एक नेता ने कहा कि कुछ दिनों में अलग-अलग शैलियों में गीत जारी किए जाएंगे। इसके अलावा डिजिटल होर्डिंग, बैनर, फिल्में और विज्ञापन सभी चरणबद्ध तरीके से लाए जाएंगे। उन्होंने कहा, ‘‘इनमें यह बताया जाएगा कि मोदी ने विभिन्न क्षेत्रों में क्या हासिल किया है और कैसे अपने वादों को पूरा किया है।'
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नयी दिल्ली । गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर वीरता और सेवा पदक की विभिन्न श्रेणियों में 1,000 से अधिक पुलिस कर्मियों को सम्मानित किया गया है। इसमें 277 वीरता पदक शामिल हैं। गुरुवार को एक सरकारी बयान में यह जानकारी दी गई। केंद्रीय गृह मंत्रालय के बयान के अनुसार हाल में पदकों की समीक्षा के बाद गणतंत्र दिवस, 2024 के अवसर पर पुलिस, दमकल सेवा, होम गार्ड और नागरिक सुरक्षा एवं सुधारात्मक सेवा के कुल 1,132 कर्मियों को वीरता और सेवा पदक से सम्मानित किया गया है। कुल 16 वीरता और सेवा पदकों को मिलाकर अब चार श्रेणियों में कर दिया गया है। इन पदकों को अब वीरता के लिए राष्ट्रपति पदक (पीएमजी), वीरता के लिए पदक (जीएम), विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक (पीएसएम) और सराहनीय सेवा के लिए पदक (एमएसएम) के रूप में वर्गीकृत किया गया है। बयान में कहा गया है कि 277 वीरता पुरस्कारों में से 119 वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में तैनात कर्मियों को और 133 जम्मू-कश्मीर क्षेत्र के कर्मियों को दिए गए हैं। शीर्ष श्रेणी का पीएमजी पदक सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के दो कर्मियों को ‘‘कांगो गणराज्य (एमओएनयूएससीओ) में संयुक्त राष्ट्र मिशन के तहत शांति स्थापना के प्रतिष्ठित कार्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए मरणोपरांत प्रदान किया गया है। दोनों बुटेम्बो में मोरक्कन रैपिड डिप्लॉयमेंट बटालियन (एमओआरडीबी) शिविर में बीएसएफ की 15वीं कांगो टुकड़ी का हिस्सा थे।'' जुलाई, 2022 में कांगो में कार्रवाई के दौरान बीएसएफ के हेड कांस्टेबल सांवला राम विश्नोई और शिशु पाल सिंह शहीद हो गए थे। बयान में कहा गया है कि पीएमजी और जीएम पदक क्रमशः ‘‘वीरता के दुर्लभ विशिष्ट कार्य'' और ‘‘वीरता के विशिष्ट कार्य'' के आधार पर प्रदान किए जाते हैं। सबसे अधिक 72 वीरता पदक जम्मू-कश्मीर पुलिस कर्मियों को मिले। उसके बाद केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों को 65, महाराष्ट्र से 18, छत्तीसगढ़ से 26, झारखंड से 23, ओडिशा से 15, दिल्ली पुलिस से आठ कर्मियों और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के 21 जवानों को पदक से सम्मानित किया गया है। file photo
- नयी दिल्ली । पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू, अभिनेत्री वैजयंतीमाला बाली, अभिनेता कोनिडेला चिरंजीवी, सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक दिवंगत बिंदेश्वर पाठक, उच्चतम न्यायालय की पहली महिला न्यायाधीश दिवंगत एम. फातिमा बीवी और ‘बॉम्बे समाचार' के मालिक होर्मुसजी एन. कामा सहित 132 प्रतिष्ठित शख्सियतों को पद्म पुरस्कार से सम्मानित किए जाने की गुरुवार को घोषणा की गई।एक आधिकारिक बयान के अनुसार, 75वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती, ताइवान की कंपनी फॉक्सकॉन के अध्यक्ष यंग लियू, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता राम नाइक, दिवंगत अभिनेता विजयकांत, गायिका उषा उत्थुप और परोपकारी किरण नादर को भी प्रतिष्ठित नागरिक पुरस्कारों से सम्मानित करने की घोषणा की गई। सरकार ने मंगलवार को पहले ही घोषणा कर दी थी कि वह बिहार के दो बार मुख्यमंत्री रहे कर्पूरी ठाकुर को मरणोपरांत देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न से सम्मानित करेगी। पद्म पुरस्कार पाने वालों में 34 गुमनाम नायक हैं, जिनमें भारत की पहली महिला हाथी महावत पार्वती बरुआ, आदिवासी पर्यावरणविद चामी मुर्मू, मिजोरम का सबसे बड़ा अनाथालय चलाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता संगथंकिमा और प्लास्टिक सर्जन प्रेमा धनराज शामिल हैं। जिन पांच प्रतिष्ठित व्यक्तियों को देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म विभूषण से सम्मानित किया जा रहा है उनमें नायडू, बाली, चिरंजीवी, पाठक और भरत नाट्यम नृत्यांगना पद्मा सुब्रमण्यम शामिल हैं। बीवी, कामा, चक्रवर्ती, यंग, विजयकांत, उत्थुप, नाइक, गुजराती अखबार ‘जन्मभूमि' के समूह संपादक और सीईओ कुंदन व्यास, अभिनेता और निर्देशक दत्तात्रय अंबादास मयालू, पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री सी.पी. ठाकुर और भाजपा नेता ओलानचेरी राजगोपाल सहित 17 प्रमुख व्यक्तियों को पद्म भूषण से सम्मानित किए जाने की घोषणा की गई। टेनिस खिलाड़ी रोहन बोपन्ना, नादर, हॉकी खिलाड़ी हरबिंदर सिंह, पेशेवर स्क्वैश खिलाड़ी जोशना चिनप्पा, पापुआ न्यू गिनी की संसद के लिए चुने गए भारतीय मूल के पहले व्यक्ति ससींद्रन मुथुवेल और बैंकर कल्पना मोरपारिया उन 110 हस्तियों में शामिल हैं जिन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। बांग्लादेश की रवीन्द्र संगीत प्रतिपादक रेजवाना चौधरी बान्या, सौ साल की फ्रांसीसी योग शिक्षिका चार्लोट चोपिन, गायक सुरेंद्र मोहन मिश्रा को पद्मश्री दिया गया है। बयान में कहा गया, "पद्म विभूषण' असाधारण और विशिष्ट सेवा के लिए दिया जाता है; 'पद्म भूषण' उच्च कोटि की विशिष्ट सेवा के लिए और 'पद्म श्री' किसी भी क्षेत्र में विशिष्ट सेवा के लिए दिया जाता है। पुरस्कारों की घोषणा हर साल गणतंत्र दिवस के अवसर पर की जाती है।" प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में, कहा, "उन सभी को बधाई जिन्हें पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। भारत विभिन्न क्षेत्रों में उनके योगदान को महत्व देता है। वे अपने असाधारण कार्यों से लोगों को प्रेरित करते रहें।" गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने पद्म पुरस्कार समारोह को "तर्कसंगत" बनाया है ताकि इसे सामाजिक परिवर्तन के लिए अग्रणी उदाहरण स्थापित करने वाले व्यक्तियों की सराहना करने का एक मंच बनाया जा सके।
- नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने के लिए भारत पहुंचे फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को उपहार में अयोध्या के राम मंदिर की प्रतिकृति दी। प्रधानमंत्री मोदी 22 जनवरी को मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल हुए थे।मैक्रों का स्वागत करने के लिए मोदी जयपुर पहुंचे जहां दोनों नेताओं ने ऐतिहासिक शहर का दौरा किया और इसके कुछ प्रतिष्ठित स्थानों पर गए।
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जाजपुर. ओडिशा के जाजपुर जिले में आठ मार्च को महाशिवरात्रि के अवसर पर भगवान शिव की 123 फुट ऊंची मूर्ति का अनावरण किया जाएगा। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह मूर्ति बरहा क्षेत्र विकास परियोजना के तहत बैतरणी नदी के तट पर बरहानाथ मंदिर के पास बनाई जा रही है। परियोजना में शामिल एक अधिकारी ने कहा कि आगंतुकों को लिफ्ट या सीढ़ियों का उपयोग करके भगवान शिव की मूर्ति के दर्शन करने और बैतरणी नदी के सामने के विहंगम दृश्य का आनंद लेने का अवसर मिलेगा। मूर्ति का निर्माण नयी दिल्ली स्थित एक निजी कला संगठन द्वारा किया गया है।
मूर्ति के अलावा पर्यटकों के लिए एक खूबसूरत पार्क और फव्वारा भी बनाया जा रहा है। अधिकारी ने बताया कि बरहा क्षेत्र आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मूर्ति के पास एक विश्राम गृह भी बनाया जाएगा। स्थानीय निवासी देबदत्त मिश्रा ने कहा, ‘‘पवित्र बैतरणी नदी के तट पर स्थापित मूर्ति जिले के पर्यटन में इजाफा करेगी।'' जाजपुर में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, दश्वमेध घाट, बरहा मंदिर, बरुनी घाट और मां बिराजा मंदिर जैसे आकर्षण इस क्षेत्र में पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। -
भुवनेश्वर. संबलपुर में एक मंदिर के पुनर्विकास की परियोजना शुरु होने के अवसर पर शनिवार को ओडिशा में स्कूल और कॉलेज बंद रहेंगे। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लोगों को समलेश्वरी मंदिर क्षेत्र प्रबंधन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पहल (एसएएमएएलईआई) परियोजना के उद्घाटन में शामिल होने की सुविधा देने के लिए यह निर्णय लिया गया। 27 जनवरी को महीने का चौथा शनिवार होने के कारण सभी सरकारी कार्यालय बंद रहेंगे।
मुख्यमंत्री नवीन पटनायक लगभग 40 एकड़ क्षेत्र में फैली, 200 करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजना का शुभारंभ करने वाले हैं। परियोजना में मंदिर का सौंदर्यीकरण, आसपास के क्षेत्र का पुनर्विकास, एक हैरिटेज गलियारे का निर्माण और आधुनिक सुविधाओं की व्यवस्था करना शामिल है। -
नयी दिल्ली. माइक्रोसॉफ्ट इंडिया ने अपने अनुवादक मंच माइक्रोसॉफ्ट ट्रांसलेटर में दो और भारतीय भाषाओं छत्तीसगढ़ी तथा मणिपुरी को शामिल किया है। इसके साथ ही माइक्रोसॉफ्ट ट्रांसलेटर अब कुल 20 आधिकारिक भारतीय भाषाओं में अनुवाद करने में मदद करेगा। इनमें असमिया, बंगाली, बोडो, डोगरी, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मैथिली, मलयालम, मणिपुरी, मराठी, नेपाली, उड़िया, पंजाबी, सिंधी, तमिल, तेलुगु और उर्दू के साथ-साथ दो अन्य स्थानीय भाषाएं भोजपुरी तथा छत्तीसगढ़ी शामिल हैं। यह देश की 95 प्रतिशत से अधिक आबादी द्वारा बोली जाने वाली भाषाएं हैं। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, ‘‘ आधिकारिक भाषाओं से परे विस्तार प्रौद्योगिकी के लोकतंत्रीकरण के प्रति माइक्रोसॉफ्ट के समर्पण को रेखांकित करता है।'' माइक्रोसॉफ्ट ने कहा कि छत्तीसगढ़ी और मणिपुरी को शामिल करना अपनी नवीन भाषा प्रौद्योगिकियों तथा समाधानों के जरिए भारत की भाषाई विविधता का समर्थन और उन्हें सशक्त बनाने की कंपनी की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
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नयी दिल्ली. अयोध्या के राम मंदिर में रामलला के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा को ‘ऐतिहासिक' करार देते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बृहस्पतिवार को कहा कि भविष्य में जब भी इस घटना को व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा जाएगा तब इसका मूल्यांकन भारत द्वारा अपनी सभ्यतागत विरासत की निरंतर खोज में युगांतरकारी आयोजन के रूप में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राम मंदिर न केवल जन-जन की आस्था को व्यक्त करता है,बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में देशवासियों की आस्था का प्रमाण भी है। राष्ट्रपति ने 75वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में सरकार द्वारा शुरू की गई कल्याणकारी योजनाओं सहित विभिन्न मुद्दों का जिक्र किया और कहा कि वह दिन गौरव भरा होगा जब भारत ऐसे कुछ देशों में शामिल हो जाएगा जहां शायद ही कोई बेघर हो। राष्ट्रपति ने विश्व के कई देशों के बीच चल रहे संघर्षों व मानवीय त्रासदियों पर चिंता जताई। साथ ही भगवान बुद्ध से लेकर वर्धमान महावीर और सम्राट अशोक से लेकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी तक के अहिंसा के मार्ग को अपनाने का उल्लेख करते हुए उम्मीद जताई कि शांति स्थापित करने के रास्ते खोज लिए जाएंगे। उन्होंने कहा, ‘‘इस सप्ताह हमने अयोध्या में प्रभु श्रीराम के जन्मस्थान पर निर्मित भव्य मंदिर में स्थापित मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा का ऐतिहासिक समारोह देखा। भविष्य में जब इस घटना को व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा जाएगा, तब इतिहासकार, भारत द्वारा अपनी सभ्यतागत विरासत की निरंतर खोज में युगांतरकारी आयोजन के रूप में इसका विवेचन करेंगे। यह मंदिर न केवल जन-जन की आस्था को व्यक्त करता है,बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में हमारे देशवासियों की अगाध आस्था का प्रमाण भी है। मुर्मू ने कहा, ‘‘हमारे गणतंत्र का 75वां वर्ष, कई अर्थों में, देश की यात्रा में एक ऐतिहासिक पड़ाव है। यह उत्सव मनाने का विशेष अवसर है...कल हम संविधान के प्रारंभ का उत्सव मनाएंगे। संविधान की प्रस्तावना "हम, भारत के लोग", इन शब्दों से शुरू होती है। ये शब्द, हमारे संविधान के मूल भाव अर्थात् लोकतंत्र को रेखांकित करते हैं।'' उन्होंने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था लोकतंत्र की पश्चिमी अवधारणा से कहीं अधिक प्राचीन है, इसीलिए भारत को "लोकतंत्र की जननी" भी कहा जाता है। मुर्मू ने कहा कि संविधान सभा ने सुशासन के सभी पहलुओं पर लगभग तीन वर्ष तक विस्तृत चर्चा की और हमारे राष्ट्र के महान आधारभूत ग्रंथ, यानी भारत के संविधान की रचना की। उन्होंने कहा कि आज हम सब देशवासी उन दूरदर्शी जन-नायकों और अधिकारियों का कृतज्ञता-पूर्वक स्मरण करते हैं जिन्होंने हमारे भव्य और प्रेरक संविधान के निर्माण में अमूल्य योगदान दिया था। उन्होंने कहा, ‘‘हमारा देश स्वतंत्रता की शताब्दी की ओर बढ़ते हुए अमृत काल के प्रारंभिक दौर से गुजर रहा है। यह एक युगांतरकारी परिवर्तन का कालखंड है। हमें अपने देश को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का सुनहरा अवसर मिला है। इसके लिए मैं सभी देशवासियों से संविधान में निहित हमारे मूल कर्तव्यों का पालन करने का अनुरोध करूंगी।'' राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘गणतंत्र दिवस, हमारे आधारभूत मूल्यों और सिद्धांतों को स्मरण करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। जब हम, उनमें से किसी एक बुनियादी सिद्धान्त पर चिंतन करते हैं, तो स्वाभाविक रूप से अन्य सभी सिद्धांतों पर भी हमारा ध्यान जाता है...बी. आर. आंबेडकर के प्रबुद्ध मार्गदर्शन में प्रवाहित, इन मूलभूत जीवन-मूल्यों और सिद्धांतों में रची-बसी संविधान की भावधारा ने, सभी प्रकार के भेदभाव को समाप्त करने के लिए सामाजिक न्याय के मार्ग पर हमें अडिग बनाए रखा है।'' उन्होंने इस मौके पर दिग्गज समाजवादी नेता कर्पूरी ठाकुर का भी जिक्र किया जिन्हें पिछले दिनों ही भारत रत्न दिए जाने की घोषणा की गई। उन्होंने कहा, ‘‘कर्पूरी ठाकुर जी पिछड़े वर्गों के सबसे महान पक्षकारों में से एक थे जिन्होंने अपना सारा जीवन उनके कल्याण के लिए समर्पित कर दिया था।'' राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘पिछले गणतंत्र दिवस के बाद के एक वर्ष पर नजर डालें तो हमें बहुत प्रसन्नता होती है। भारत की अध्यक्षता में दिल्ली में जी20 शिखर सम्मेलन का सफल आयोजन एक अभूतपूर्व उपलब्धि थी।'' उन्होंने कहा कि जब संसद ने ऐतिहासिक महिला आरक्षण विधेयक पारित किया तो देश, स्त्री-पुरुष समानता के आदर्श की ओर आगे बढ़ा। उन्होंने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम', महिला सशक्तीकरण का एक क्रांतिकारी माध्यम सिद्ध होगा। इससे हमारे शासन की प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने में भी बहुत सहायता मिलेगी।'' मुर्मू ने कहा, ‘‘इसी अवधि में भारत, चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के क्षेत्र पर उतरने वाला पहला देश बना। चंद्रयान-3 के बाद इसरो ने एक सौर मिशन भी शुरू किया। वर्ष 2024 के दौरान अन्य कई अंतरिक्ष अभियानों की योजना बनाई गई है। यह प्रसन्नता का विषय है कि भारत की अंतरिक्ष यात्रा में अनेक नयी उपलब्धियां हासिल की जाने वाली हैं।'' उन्होंने कहा कि भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम का उद्देश्य, संपूर्ण मानवता के कल्याण के लिए, विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भूमिका को और अधिक विस्तार तथा गहराई प्रदान करना है। उन्होंने कहा, ‘‘ इसरो के कार्यक्रम के प्रति देशवासियों में जो उत्साह दिखाई देता है उससे नयी आशाओं का संचार हो रहा है। अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में उपलब्धियों ने, युवा पीढ़ी की कल्पना शक्ति को नए पंख दिए हैं। अंतरिक्ष विज्ञान की इन उपलब्धियों से युवाओं, विशेषकर युवा महिलाओं को यह प्रेरणा मिलेगी कि वे, विज्ञान और प्रौद्योगिकी को अपना कार्यक्षेत्र बनाएं।'' मुर्मू ने कहा कि सभी नागरिकों के जीवन-यापन को सुगम बनाने के लिए अनेक समयबद्ध योजनाएं भी कार्यान्वित की जा रही हैं। घर में सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल की उपलब्धता से लेकर अपना घर होने के सुरक्षा-जनक अनुभव तक, ये सभी बुनियादी न्यूनतम आवश्यकताएं हैं, न कि विशेष सुविधाएं। उन्होंने कहा, ‘‘ये मुद्दे, किसी भी राजनीतिक या आर्थिक विचारधारा से परे हैं और इन्हें मानवीय दृष्टिकोण से ही देखा जाना चाहिए। सरकार ने, केवल जन-कल्याण योजनाओं का विस्तार और संवर्धन ही नहीं किया है, अपितु जन-कल्याण की अवधारणा को भी नया अर्थ प्रदान किया है। हम सभी उस दिन गर्व का अनुभव करेंगे जब भारत ऐसे कुछ देशों में शामिल हो जाएगा जहां शायद ही कोई बेघर हो। '' रूस-यूक्रेन और हमास-इजराइल के मध्य जारी संघर्षों के बीच राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि जब दो परस्पर विरोधी पक्षों में से प्रत्येक मानता है कि केवल उसी की बात सही है और दूसरे की बात गलत है तो ऐसी स्थिति में समाधान-परक तर्क के आधार पर ही आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से तर्क के स्थान पर आपसी भय और पूर्वाग्रहों ने भावावेश को बढ़ावा दिया है, जिसके कारण अनवरत हिंसा हो रही है। राष्ट्रपति ने कहा कि बड़े पैमाने पर मानवीय त्रासदियों की अनेक दुखद घटनाएं हुई हैं और पूरा देश इस मानवीय पीड़ा से अत्यंत व्यथित है। उन्होंने भगवान बुद्ध के शब्द ‘न हि वेरेन वेरानि, सम्मन्तीध कुदाचनम्, अवेरेन च सम्मन्ति, एस धम्मो सनन्तनो' का उल्लेख किया जिसका अर्थ है कि यहां कभी भी शत्रुता को शत्रुता के माध्यम से शांत नहीं किया जाता है, बल्कि अ-शत्रुता के माध्यम से शांत किया जाता है। यही शाश्वत नियम है। राष्ट्रपति ने बुद्ध के साथ ही वर्धमान महावीर और सम्राट अशोक से लेकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी तक को याद किया और कहा कि भारत ने सदैव एक उदाहरण प्रस्तुत किया है कि अहिंसा केवल एक आदर्श मात्र नहीं है जिसे हासिल करना कठिन हो, बल्कि यह एक स्पष्ट संभावना है। उन्होंने कहा, ‘‘यही नहीं, अपितु अनेक लोगों के लिए यह एक जीवंत यथार्थ है। हम आशा करते हैं कि संघर्षों में उलझे क्षेत्रों में, उन संघर्षों को सुलझाने तथा शांति स्थापित करने के मार्ग खोज लिए जाएंगे।
वैश्विक पर्यावरण संकट का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि इस समस्या से निजात पाने में भी भारत का प्राचीन ज्ञान, विश्व-समुदाय का मार्गदर्शन कर सकता है। उन्होंने कहा कि भारत ने, पर्यावरण के प्रति सचेत जीवन-शैली अपनाने के लिए, ‘लाइफ मूवमेंट ' शुरू किया है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे देश में जलवायु परिवर्तन के मुद्दे का सामना करने में व्यक्तिगत व्यवहार-परिवर्तन को प्राथमिकता दी जा रही है तथा विश्व समुदाय द्वारा इसकी सराहना की जा रही है। हर स्थान के निवासी अपनी जीवन-शैली को प्रकृति के अनुरूप ढालकर अपना योगदान दे सकते हैं और उन्हें ऐसा करना ही चाहिए। इससे, न केवल भावी पीढ़ियों के लिए पृथ्वी का संरक्षण करने में सहायता मिलेगी बल्कि, जीवन की गुणवत्ता भी बढ़ेगी।'' मुर्मू ने कहा, ‘‘हमारी स्वाधीनता के सौ वर्ष पूरे होने तक की, अमृत काल की अवधि के दौरान अभूतपूर्व तकनीकी परिवर्तन भी होने जा रहे हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग जैसे तकनीकी बदलाव, असाधारण गति के साथ, हमारे दैनिक जीवन का अंग बन गए हैं। कई क्षेत्रों में भविष्य से जुड़ी आशंकाएं चिंतित करती हैं, लेकिन अनेक उत्साह-जनक अवसर भी दिखाई देते हैं, विशेषकर युवाओं के लिए।'' उन्होंने कहा, ‘हमारे युवा, वर्तमान की सीमाओं से परे जाकर नयी संभावनाएं तलाश रहे हैं। उनके मार्ग से बाधाओं को दूर करने और उन्हें अपनी पूरी क्षमता का उपयोग करने की सुविधा प्रदान करने के लिए हमें हर संभव प्रयास करना है।'' इसके साथ ही राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘मैं अपने उन किसानों और मजदूर भाई-बहनों के प्रति आभार व्यक्त करती हूं जो, चुपचाप मेहनत करते हैं तथा देश के भविष्य को बेहतर बनाने में बहुत बड़ा योगदान देते हैं।'' उन्होंने कहा, ‘‘ गणतन्त्र दिवस की पूर्व संध्या पर, सभी देशवासी हमारे सशस्त्र बलों, पुलिस और अर्ध-सैन्य बलों का भी कृतज्ञता-पूर्वक अभिनंदन करते हैं। उनकी बहादुरी और सतर्कता के बिना, हम उन प्रभावशाली उपलब्धियों को प्राप्त नहीं कर सकते थे जो हमने हासिल कर ली हैं।'' इस मौके पर उन्होंने आह्वान किया, ‘‘आइए, हम सब यथाशक्ति राष्ट्र और देशवासियों की सेवा में स्वयं को समर्पित करने का संकल्प करें। इस शुभ संकल्प को सिद्ध करने के प्रयास हेतु आप सभी को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं!''
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को पूर्ण बहुमत के साथ स्थिर सरकार चुनने की वकालत की और युवा मतदाताओं से लोकसभा चुनाव में परिवारवादी पार्टियों को हराने का आह्वान करते हुए कहा कि उनके वोट ही भारत की दशा व दिशा तय करेंगे। राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की युवा इकाई भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) की ओर से आयोजित ‘नमो नवमतदाता सम्मेलन' को वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से संबोधित करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि परिवारवादी पार्टियों की सरकारों के कार्यकाल में भारत के युवाओं का भविष्य ‘अंधकारमय' बना दिया गया था जबकि मौजूदा केंद्र सरकार उन्हें उस स्थिति से बाहर निकाल कर लायी। उन्होंने कहा कि उस समय की युवा पीढ़ी ने अपने भविष्य की संभावनाओं को लेकर सरकार से किसी प्रकार की उम्मीद ही छोड़ दी थी। मोदी ने युवाओं से आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा के घोषणापत्र के लिए सुझाव देने का आग्रह किया और कहा कि श्रेष्ठ सुझाव साझा करने वाले चुनिंदा लोगों से वह व्यक्तिगत रूप से मिलेंगे। प्रधानमंत्री ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का नाम लिए बिना उनका गंभीर मूल्यांकन प्रस्तुत किया और 2014 में सत्ता में आने के बाद उनकी सरकार द्वारा लाए गए बदलावों को सामने रखा। उन्होंने कहा कि तब भ्रष्टाचार और घोटाले सुर्खियां बनते थे लेकिन इन दिनों विभिन्न क्षेत्रों में विश्वसनीयता और सफलता की कहानियों के बारे में बात की जाती है। उन्होंने कहा, ‘‘यह मोदी की गारंटी है। आपके सपने मेरा संकल्प हैं।
उन्होंने कहा कि युवा हमेशा उनकी प्राथमिकता रहे हैं और ‘डिजिटल इंडिया', ‘स्टार्ट-अप इंडिया' जैसी कई विकास योजनाओं और विभिन्न क्षेत्रों में सुधारों के अलावा बुनियादी ढांचे में भारी निवेश ने उनके लिए असीमित अवसर पैदा किए हैं। उन्होंने युवाओं को पूर्ण बहुमत वाली स्थिर सरकार होने के फायदे गिनाते हुए कहा कि इससे अनुच्छेद 370 को निरस्त करने व अयोध्या में रामलला के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा का इंतजार खत्म होता है और वैश्विक स्तर पर भारत की साख भी बढ़ती है। प्रधानमंत्री ने युवाओं से कहा कि उनकी सरकार उनके सपनों को पूरा करने और उनकी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए दिन-रात काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पहली बार मतदान करने वाले मतदाता भाजपा के विकास के एजेंडे का समर्थन करते हैं। मोदी ने कहा, ‘‘मुझे खुशी है कि आज भारत का नौजवान देश के समक्ष मौजूद चुनौतियों को समझ रहा है। इसलिए वह भ्रष्टाचार के खिलाफ है। वह परिवारवाद के खिलाफ है।'' उन्होंने कहा कि परिवारवाद ऐसी बीमारी है जो देश के युवाओं को आगे बढ़ने से रोकती है। उन्होंने कहा, ‘‘आपने देखा है परिवारवादी पार्टियों में दूसरे युवा कभी आगे नहीं बढ़ पाते। परिवारवादी पार्टियों के नेताओं की सोच युवा विरोधी होती है। इसलिए आपको अपने वोट की ताकत से ऐसी परिवारवादी पार्टियों को हराना है।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि जब पूर्ण बहुमत वाली स्थिर सरकार होती है तो देश बड़े फैसले लेता है और दशकों से लटकी हुई समस्याओं को सुलझाकर आगे बढ़ता है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारी सरकार ने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाकर दशकों का इंतजार खत्म किया। हमारी पूर्ण बहुमत की सरकार ने सेना के जवानों के लिए वन रैंक, वन पेंशन लागू कर देश के पूर्व फौजियों का चार दशक का इंतजार समाप्त किया। यह हमारी सरकार है जिसे अयोध्या में रामलला के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा का साक्षी होने का अवसर मिला। जब पूर्ण बहुमत की सरकार होती है तो नीति और निर्णयों में भी स्पष्टता होती है।'' मोदी ने कहा कि इसका असर वैश्विक स्तर पर भारत की साख पर भी होता है। उन्होंने कहा, ‘‘आज दुनिया में भारत की साख नयी ऊंचाई पर है।'' संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए मोदी ने आरोप लगाया कि उसने देश के युवाओं का भविष्य अंधकारमय बना दिया था। उन्होंने कहा, ‘‘10-12 साल पहले भारत में जिस तरह की परिस्थिति थी, उसने देश के युवाओं का भविष्य अंधकारमय बना दिया था। आज देश में रोजगार के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं...आज स्थितियां बदली हैं। आज हर दिन एक नई खबर आती है कि आज इस क्षेत्र में भारत ने नया मुकाम हासिल किया। साल 2014 से पहले की पीढ़ी ने तो इसकी उम्मीद भी छोड़ दी थी।'' प्रधानमंत्री ने युवाओं से कहा कि उस समय के अखबारों में आए दिन भ्रष्टाचार की खबरें सुर्खियां बनती थीं और हजारों करोड़ रुपये के घोटाले तो सामान्य सी बात थी। उन्होंने कहा, ‘‘उस समय आए दिन देश के नौजवान सड़कों पर तत्कालीन सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते थे। मुझे संतोष है कि हम उस अंधकारमय स्थिति को दूर कर पाए हैं।'' उन्होंने कहा कि उन दिनों भारत दुनिया की पांच सबसे नाजुक अर्थव्यवस्थाओं में शामिल था और दुनिया सोचती थी कि भारत खुद भी डूबेगा और हमें भी ले डूबेगा। मोदी ने कहा, ‘‘आज भारत दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और दुनिया सोचती है कि भारत के विकास से उसका भी विकास होगा। आने वाले कुछ ही वर्षों में भारत दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शुमार हो जाएगा और भारत की अर्थव्यवस्था सात हजार अरब को पार कर जाएगी।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि इसका लाभ भारत के युवाओं को ही होगा क्योंकि उनके लिए नए-नए क्षेत्रों में रोजगार के बहुत सारे नए मौके आएंगे। उन्होंने कहा कि आज जब देश वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनने के लक्ष्य पर काम कर रहा है तो युवा मतदाताओं का वोट तय करेगा कि भारत की दिशा क्या होगी। उन्होंने कहा कि 18 से 25 वर्ष की आयु ऐसी होती है जब किसी का भी जीवन बहुत से बदलावों का साक्षी बनता है और इन्हीं बदलावों के बीच नवमतदाता वर्ग को एक और जिम्मेदारी साथ-साथ निभानी है। भाजयुमो ने दावा किया कि इस कार्यक्रम में आगामी लोकसभा चुनाव में पहली बार मतदान के पात्र 40 लाख से अधिक युवाओं ने देशभर के 5,800 स्थानों से भाग लिया। -
नयी दिल्ली. गणतंत्र दिवस समारोहों के मद्देनजर राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं और नगर में 70,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन 70,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों में से 14,000 की तैनाती गणतंत्र दिवस परेड की सुरक्षा के लिए कर्तव्य पथ और उसके आसपास की जाएगी। पुलिस ने दिल्ली में शुक्रवार को सुचारू यातायात के लिए परामर्श जारी किया है जिनमें यातायात व्यवस्था और प्रतिबंधों का जिक्र है। अधिकारियों ने बताया कि इस साल की परेड को देखने के लिए कर्तव्य पथ पर आने वाले करीब 77,000 आमंत्रित लोगों की सुरक्षा के लिए व्यापक प्रबंध किए गए हैं। विशेष पुलिस आयुक्त (सुरक्षा) दीपेंद्र पाठक ने बुधवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि गणतंत्र दिवस के मद्देनजर दिल्ली के चारों ओर व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है। पाठक ने कहा कि 26 जनवरी समारोह के लिए सुरक्षा, यातायात और जिला इकाइयां केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय के साथ काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि कर्तव्य पथ पर करीब 14,000 सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कमांडो, त्वरित प्रतिक्रिया दल, पीसीआर वैन, तोड़फोड़ रोधी बल और ‘स्वाट' दलों को कर्तव्य पथ और शहर में विभिन्न रणनीतिक स्थानों पर तैनात किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस ने हवाई खतरों से निपटने के लिए भी तैयारी की है। पाठक ने कहा कि पुलिस ने यह सुनिश्चित किया है कि सोमवार को अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद दिल्ली के "संवदेनशील" इलाकों में शांति बनी रहे। विशेष पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था, जोन दो) मधुप तिवारी ने कहा कि परेड में कम से कम 77,000 आमंत्रित लोगों के आने की उम्मीद है। तिवारी ने कहा, "हमने सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नयी दिल्ली जिले को, जहां परेड होगी, 28 जोन में बांटा है। प्रत्येक जोन का नेतृत्व डीसीपी या अतिरिक्त डीसीपी स्तर के अधिकारी करेंगे।" उन्होंने कहा कि लापता व्यक्तियों के लिए बूथ, हेल्पडेस्क, प्राथमिक चिकित्सा केंद्र और अलग सुविधा बूथ स्थापित किए गए हैं, जहां आगंतुक परेड से पहले अपने वाहन की चाबियां जमा कर सकते हैं। तिवारी ने लोगों से समय से कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने और गहन जांच के दौरान सुरक्षा कर्मियों के साथ सहयोग करने का भी अनुरोध किया। प्रवेश द्वार पर जूतों की जांच के सवाल पर तिवारी ने कहा, ''जामा तलाशी'' की जाएगी।
यात्रा परामर्श के मुताबिक, परेड सुबह 10.30 बजे विजय चौक से शुरू होगी और लाल किला मैदान की ओर बढ़ेगी। सुबह 9.30 बजे राष्ट्रीय युद्ध स्मारक, इंडिया गेट पर संबंधित समारोह होगा। परामर्श में कहा गया है कि परेड विजय चौक, कर्तव्य पथ, सी-हेक्सागन, सुभाष चंद्र बोस गोल चक्कर, तिलक मार्ग, बहादुर शाह जफर मार्ग, नेताजी सुभाष मार्ग और लाल किले से होकर गुजरेगी। बृहस्पतिवार शाम छह बजे से कर्तव्य पथ पर विजय चौक से इंडिया गेट तक किसी यातायात की अनुमति नहीं होगी। यह रोक परेड खत्म होने तक जारी रहेगी। परामर्श के अनुसार शुक्रवार सुबह 10.30 बजे से तिलक मार्ग, बहादुर शाह जफर मार्ग और नेताजी सुभाष मार्ग पर यातायात की अनुमति नहीं होगी। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) के एक बयान में कहा गया है कि जिन लोगों के पास गणतंत्र दिवस समारोह के लिए वास्तविक ई-निमंत्रण कार्ड या ई-टिकट होंगे, उन्हें सरकार द्वारा जारी पहचान पत्र दिखाने पर स्टेशनों पर कूपन जारी किए जाएंगे, जो केंद्रीय सचिवालय और उद्योग भवन स्टेशन से बाहर निकलने के लिए मान्य होंगे। -
जम्मू. जम्मू कश्मीर में शांति के एक नये युग की शुरूआत होने का उल्लेख करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बृहस्पतिवार को कहा कि अनुच्छेद 370 हटाये जाने के बाद केंद्र शासित प्रदेश में आतंकी घटनाएं 66 फीसदी और नागरिकों की हत्याओं में 81 प्रतिशत की कमी आई है। शाह ने वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, जम्मू कश्मीर को पर्यटन केंद्र के रूप में तब्दील करने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को दिया। शाह ने जम्मू में 100 ई-बसों को हरी झंडी दिखाई और जम्मू कश्मीर प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों तथा अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति पाने वालों को नियुक्ति पत्र सौंपे। उन्होंने कहा, ‘‘मैं आपसे कहना चाहता हूं कि अनुच्छेद 370 को रद्द करने के बाद आतंकवाद से जुड़े मामलों में 66 प्रतिशत की कमी आई है। नागरिकों की हत्याओं में 81 प्रतिशत और सुरक्षा बलों की हत्याओं में 48 प्रतिशत की कमी आई है।'' उन्होंने कहा कि इससे यह प्रदर्शित होता है कि जम्मू कश्मीर में खुशहाली, शांति और सामान्य स्थिति का एक नया युग शुरू हुआ है। केंद्र ने पूर्ववर्ती राज्य जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को पांच अगस्त 2019 को रद्द कर दिया था। साथ ही, सरकार ने इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों--जम्मू कश्मीर और लद्दाख-- में विभाजित कर दिया। शाह ने कहा कि 2000 में जम्मू कश्मीर में पथराव की 2,654 घटनाएं हुई थीं लेकिन 2023 में ऐसी एक भी घटना नहीं हुई। उन्होंने कहा, ‘‘2010 में करीब 132 बंद के आयोजन किये गए लेकिन 2023 में एक भी नहीं किया गया। 2010 में करीब 112 नागरिकों की पथराव की घटनाओं में मौत हुई लेकिन 2023 में पथराव में एक भी नागरिक ने जान नहीं गंवाई। करीब 6,235 नागरिक 2010 की अवधि के दौरान घायल हुए।'' मंत्री ने कहा कि जम्मू कश्मीर में आतंकवाद के वित्तपोषण पर भी नकेल कसी गई है।
उन्होंने कहा, ‘‘संपत्ति सील और कुर्क की जा रही। उनकी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए कई आतंकी संगठनों को प्रतिबंधित किया गया है।'' मोदी की प्रशंसा करते हुए शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री ने जम्मू कश्मीर को एक पर्यटन केंद्र में बदल दिया है जो कभी आतंकवाद के लिए जाना जाता था। उन्होंने कहा, ‘‘बम विस्फोट, गोलीबारी, पथराव और बंद के युग की जगह शिक्षा, स्कूल, कॉलेज, मेडिकल कॉलेज, प्रबंधन संस्थान, उद्योग और बुनियादी ढांचे ने ले ली है। यह एक बड़ा बदलाव है जो जम्मू कश्मीर में हो रहा है।'' शाह ने कहा कि जम्मू कश्मीर में 2019-20 में 297 करोड़ रुपये का निवेश हुआ था और यह 2022-23 में बढ़ कर 2,153 करोड़ रुपये हो गया। उन्होंने जम्मू कश्मीर के युवाओं से मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाने और देश के लोकतांत्रिक ढांचे का हिस्सा बनने की अपील की। उन्होंने कहा, ‘‘पत्थर की जगह जम्मू कश्मीर के युवाओं के हाथों में अब कंप्यूटर हैं और वे जम्मू कश्मीर की प्रगति में योगदान दे रहे हैं।''
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नई दिल्ली। 75वें गणतंत्र दिवस समारोह 2024 के अवसर पर, देश के विभिन्न राज्यों के योग शिक्षक/प्रशिक्षक विशेष आमंत्रित अतिथि के रूप में कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड देखेंगे। भारत सरकार ने देश भर में जमीनी स्तर पर योग के माध्यम से प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करने में उल्लेखनीय योगदान देने के लिए291 योग शिक्षकों और प्रशिक्षकों को उनके परिवार के सदस्यों के साथ आमंत्रित किया है। ये योग प्रशिक्षक/शिक्षक आयुष मंत्रालय के राष्ट्रीय आयुष मिशन की प्रमुख योजना के तहत कार्य कर रहे एएचडब्ल्यूसी (आयुष स्वास्थ्य और कल्याण केन्द्र) के माध्यम से प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल/कल्याण से संबंधित क्षेत्र में संलग्न हैं। गणतंत्र दिवस कार्यक्रम के बाद सभी विशेष आमंत्रित अतिथिकेन्द्रीय आयुष तथापत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल के साथ उनके आवास पर बातचीत भी करेंगे।
एएचडब्ल्यूसी से जुड़े ये योग शिक्षक/प्रशिक्षक आयुष के प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल से संबंधित क्षेत्र में योग के माध्यम से चलने वाले कल्याण अभियान का हिस्सा हैं। ये प्रशिक्षक/शिक्षक न केवल लोगों को आवश्यक योग संबंधी प्रशिक्षण प्रदान करते हैं, बल्कि प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल की जरूरतों का भी ध्यान रखते हैं। इन सभी ने अपने-अपने क्षेत्रों में अपनी उल्लेखनीय उपस्थिति दर्ज कराई है। गणतंत्र दिवस परेड 2024 देखने के बाद, ये विशेष आमंत्रित अतिथि दिल्ली में विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों का दौरा करेंगे और योग के बारे में अपने जमीनी प्रयासों एवं अनुभवों के बारे में केन्द्रीय आयुष तथापत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री के साथ बातचीत भी करेंगे।योग को अब पूरे विश्व में मान्यता मिल गई है। आयुष मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में, संपूर्ण सरकार के दृष्टिकोण के साथदेशभर के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर योग को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने का सुझाव दिया था। लोगों को योग के प्रति जागरूक करने के लिए अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन किया जा रहा है। योग के प्राचीन भारतीय दर्शन पर आधारित मन और शरीर को अनुशासितरखने की विधा को यूनेस्को की अमूर्त विश्व विरासत की सूची में भी शामिल किया गया है। केन्द्र सरकार ने योगासन को खेल विधा के रूप में भी मान्यता दी है और इसे प्राथमिकता की श्रेणी में रखा है। योग को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। कई विश्वविद्यालयों ने योग से संबंधित पाठ्यक्रम शामिल किए हैं। आयुष मंत्रालय ने वन-स्टॉप स्वास्थ्य समाधान के रूप में नमस्ते योग ऐप की शुरुआत की है, जो लोगों को आसानी से योग से संबंधित जानकारी, योग कार्यक्रमों और योग कक्षाओं तक पहुंचने में सक्षम बनाता है। इसी तरह, योग का लाभ दुनिया भर में पहुंचाने के लिए वाई-ब्रेक और डब्ल्यूएचओ-एम योगा भी लॉन्च किया गया है।देश भर में एएचडब्ल्यूसी (आयुष स्वास्थ्य और कल्याण केन्द्र) लोगों के स्वास्थ्य संबंधी कल्याण के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। योग इन एएचडब्ल्यूसी का महत्वपूर्ण हिस्सा है और शिक्षक/प्रशिक्षक योग को जमीनी स्तर तक ले जाने में उल्लेखनीय भूमिका निभाते हैं। file photo -
नई दिल्ली। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने 75वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर सशस्त्र बल कर्मियों के लिए 84 मेंशन-इन-डिस्पैच को स्वीकृति दी है, जिनमें 10 मरणोपरांत भी शामिल हैं। इनमें सेना के लिए 68-ऑपरेशन रक्षक के लिए 34, ऑपरेशन स्नो लेपर्ड के लिए 16, ऑपरेशन मेघदूत के लिए सात, ऑपरेशन सहायता के लिए तीन, ऑपरेशन सिधरा के लिए दो, ऑपरेशन सीएएस इवैक्यूएशन के लिए तीन, विभिन्न ऑपरेशन के लिए तीन शामिल है। इसमें भारतीय वायु सेना के लिए 16- ऑपरेशन कावेरी के लिए 15 और विभिन्न ऑपरेशन के लिए एक शामिल है।
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शाहजहांपुर . जिले में बृहस्पतिवार को सुबह घने कोहरे के बीच ऑटोरिक्शा और टैंकर में हुई भीषण टक्कर में 12 लोगों की मौत हो गई। पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा ने बताया कि बरेली-फर्रुखाबाद मार्ग पर अल्लाहगंज थाना क्षेत्र के तहत सुगसुगी ग्राम के पास जलालाबाद की ओर जा रहे ऑटोरिक्शा को विपरीत दिशा से आ रहे एक टैंकर ने टक्कर मार दी। उन्होंने बताया कि इस घटना में ऑटो रिक्शा सवार 12 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। मरने वालों में बुजुर्ग महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। मीणा ने बताया कि घटना स्थल पर पहुंची पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मृतकों की पहचान की कोशिश की जा रही है।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि स्थिर सरकार बड़े निर्णय लेती है। उनकी सरकार ने दशकों से लंबित मुद्दों का समाधान किया है। राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर भारतीय जनता युवा मोर्चा द्वारा आयोजित नमो नवमतदाता सम्मेलन को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए श्री मोदी ने कहा कि बहुमत की सरकार हो तो नीतियों और फैसलों में स्पष्टता दिखती है। उन्होंने कहा कि जब भी वे विश्व के नेताओं से मिलते हैं तो वे ही उनसे अकेले नहीं मिलते हैं बल्कि एक सौ चालीस करोड़ भारतीय भी उनसे मिलते हैं। श्री मोदी ने कहा कि आज भारतीय पासपोर्ट को विश्वभर में गर्व से देखा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि युवा मतदाता अपने मतों से देश की दिशा और दशा तय करेंगे। मतदाता सूची में उनके नाम पंजीकृत होने से वे देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया के निर्णायक सदस्य बन गए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि वे ऐसे समय में मतदाता बने हैं जब अमृतकाल की शुरुआत हुई है। उन्होंने कहा कि उनके एक वोट में बहुत बड़ी शक्ति है।श्री मोदी ने कहा कि आज लोग विश्वसनीयता की बात करते हैं ना कि भ्रष्टाचार की। लोग सफलता की बात करते हैं, घोटालों की नहीं। प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले भारत पांच सबसे कमजोर अर्थव्यवस्था की सूची में था। पिछले दस से बारह वर्षों के हालात ने देश के युवाओं का भविष्य अंधकारमय बना दिया था। श्री मोदी ने कहा कि आज भारत विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत विश्व की तीन शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में होगा। -
जम्मू। अयोध्या स्थित राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर कथित रूप से ‘आपत्तिजनक सामग्री' पोस्ट करने के आरोप में जम्मू-कश्मीर के राजौरी और रियासी जिलों में कई लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बीच कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर‘संवेदनशील सामग्री' पोस्ट की जिससे ‘शांतिपूर्ण माहौल खराब' होने की आशंका थी। उन्होंने बताया कि पुलिस ने इसे गंभीरता से लिया है और इन लोगों के खिलाफ एक समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में मामला दर्ज किया है। पुलिस ने कहा कि इसी तरह के मामले में रियासी जिले में पुलिस ने एक शख्स के खिलाफ सोशल मीडिया पर‘आपत्तिजनक सामग्री' पोस्ट करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की है। रियासी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अमित गुप्ता ने लोगों को सलाह दी है कि वे सोशल मीडिया पर ऐसी कोई भी आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट करने से बचें जिससे शांति और सौहार्द में बाधा उत्पन्न हो सकती हो। उन्होंने कहा, “सभी सोशल मीडिया मंचों पर नजर रखी जा रही है और सभी पोस्ट तथा टिप्पणियों की निगरानी की जाएगी। भड़काऊ और नफरत फैलाने वाली सामग्री पोस्ट करने वाले शख्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
- कोलकाता। नोबेल पुरस्कार विजेता अब्दुलरजाक गुरनाह ने कहा कि युवा लेखकों को लिखना जारी रखना चाहिए और अपने विचारों को कलमबद्ध करने की इच्छा होनी चाहिए। तंजानिया में जन्मे प्रसिद्ध ब्रिटिश उपन्यासकार अब्दुलरजाक गुरनाह ने कहा कि एक अकादमिक और एक लेखक की कार्य दिनचर्या के बीच कोई वास्तविक टकराव नहीं होता और इसमें संतुलन बनाया जा सकता है। उन्हें साहित्य के लिए 2021 का नोबेल पुरस्कार दिया गया था। गुरनाह मंगलवार को यहां 12वें टाटा स्टील कोलकाता साहित्य महोत्सव में सम्मानित अतिथि के रूप में एक परिचर्चा में भाग ले रहे थे। वह केंट विश्वविद्यालय में अंग्रेजी और उत्तर औपनिवेशिक साहित्य के एमिरिटस प्रोफेसर हैं। उन्होंने युवा लेखकों को सलाह देते हुए कहा, ‘‘हिम्मत मत हारिए। बस लिखते रहिए। अपने विचारों को कलमबद्ध करने की इच्छा होनी चाहिए।'' यह पूछे जाने पर कि जब उन्हें शोध प्रबंध लिखना होता है और किसी साहित्यिक कृति पर काम करना होता है तो क्या दोनों के बीच कोई द्वंद्व होता है तो गुरनाह ने कहा, ‘‘ मुझे नहीं लगता कि अकादमिक जगत और साहित्यिक कार्यों के प्रबंधन के बीच कोई वास्तविक (टकराव) है। दोनों को समायोजित किया जा सकता है। यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस समय काम करते हैं।'' गुरनाह ने पैराडाइज (1994), बाय द सी (2001), डेजर्टन (2005), आफ्टरलाइव्स (2020) जैसी युगांतकारी गद्य को लिखा है। पांच दिवसीय साहित्यिक सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने वहां मौजूद गुरनाह से कहा, ‘‘हम आपका स्वागत करते हैं, हम बंगाल के लोगों की ओर से आपके प्रति अपना सम्मान व्यक्त करते हैं।'' पांच दिवसीय साहित्यिक सम्मेलन का आयोजन भव्य विक्टोरिया मेमोरियल के विशाल प्रांगण में हो रहा है जिसकी पृष्ठभूमि में सफेद इमारत है। इस दौरान विश्व भर के साहित्य और कला जगत के प्रतिष्ठित व्यक्ति अपनी बात रखेंगे।
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अयोध्या. अयोध्या में नवनिर्मित राम मंदिर में रामलला की पोशाक को डिजाइन करने वाले मनीष त्रिपाठी ने कहा कि भगवान राम के साथ दिव्य संबंध ने उन्हें इस कार्य को पूरा करने में मदद की। त्रिपाठी ने बुधवार को कहा, ‘‘हमने काशी (वाराणसी) में भगवान के लिए पीतांबरी (पीला) कपड़ा तैयार कराया। इसकी खास बात यह है कि इसे तैयार करने में रेशम के साथ-साथ सोने और चांदी के तार का भी इस्तेमाल किया गया है।'' उन्होंने पोशाक तैयार करने में इस्तेमाल की गई सामग्री और डिजाइन के बारे में कहा, ‘‘हमने पोशाक पर जो कढ़ाई की है, उसमें वैष्णव प्रतीक हैं।'' उन्होंने कहा, ‘‘सबसे बड़ी चुनौती ऐसा कपड़ा तैयार करना था जो बाल स्वरूप और भगवान की भव्यता के अनुरूप हो। मैंने भगवान से मुझे रास्ता दिखाने के लिए प्रार्थना की और उन्होंने मुझे उसके लिए संकेत दिखाए और ज्ञान दिया ताकि मैं ऐसा कपड़ा तैयार कर सकूं।'' लखनऊ में जन्मे और पले-बढ़े युवा डिजाइनर ने कहा कि 500 से अधिक वर्षों से इस आंदोलन का इंतजार कर रहे भक्तों की कल्पना और उम्मीदों पर खरा उतरना भी एक चुनौती थी। त्रिपाठी ने कहा, ‘‘पोशाक को लेकर सभी से बहुत अच्छी प्रतिक्रिया मिलने के बाद मैं बहुत गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं।" उन्होंने कहा, ‘‘मुझे मेरी मां और मेरी पत्नी से सबसे अच्छी प्रतिक्रिया मिली, जिन्होंने अपने चेहरे पर मुस्कान और आंखों में आंसू के साथ पोशाक की सराहना की।''
- अयोध्या/लखनऊ (उप्र) । अयोध्या स्थित राम मंदिर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच बुधवार को भी रामलला के दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रद्धालुओं की भीड़ के बेहतर प्रबंधन के लिये सभी सम्बन्धित विभागों और जिलों के बीच बेहतर तालमेल बनाने के निर्देश दिये हैं। दोपहर तक करीब तीन लाख लोगों ने रामलला के दर्शन किये। मंदिर को उसके अभिषेक समारोह के एक दिन बाद 23 जनवरी को लोगों के लिए खोल दिया गया था। जिला प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि एक अनुमान के मुताबिक दोपहर तक लगभग तीन लाख लोगों ने राम लला के दर्शन किए। भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था की देखरेख कर रहे विशेष पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने ' बताया, " कल और आज की व्यवस्था में केवल इतना ही परिवर्तन है कि हमने दर्शन के लिए आने वाले भक्तों के लिए एक बेहतर कतार प्रणाली लागू की है। हमने अलग-अलग कतारों में सुचारू प्रवेश और निकास सुनिश्चित करने के लिए समर्पित चैनल तैनात किए हैं। स्थिति अब पूरी तरह अनुकूल और नियंत्रण में है।” \गृह विभाग के प्रमुख सचिव संजय प्रसाद ने मंदिर में भीड़ प्रबंधन के लिए उठाए गए कदमों के बारे में पूछे जाने पर कहा, ''आप खुद देख सकते हैं, कहीं लम्बी कतारें नहीं हैं। सुबह सात बजे से पहले भी लोग आ गये थे। सब लोग आराम से कतार में लगे हुए थे। उसके बाद से उनका दर्शन अनवरत चल रहा है।''इस बीच, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में एक उच्चस्तरीय बैठक में अयोध्या में रामलला के दर्शनार्थियों की भारी भीड़ को देखते हुए परिवहन विभाग, नगर विकास और पुलिस विभाग के बीच तालमेल और अंतरराज्यीय/अंतर्जनपदीय संवाद और समन्वय बनाये रखने के निर्देश देते हुए अयोध्या आने के लिए अतिरिक्त बसों का संचालन अभी स्थगित रखने की हिदायत दी है। राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री ने मंगलवार को अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि ट्रस्ट के पदाधिकारियों एवं स्थानीय प्रशासन के साथ परिस्थितियों का जायजा लेने के बाद बुधवार को अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने अयोध्या में श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़ के लिए दर्शन और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की समीक्षा करते हुए हर श्रद्धालु के सहज, सुगम एवं संतोषपूर्ण दर्शन के लिए आवश्यक प्रबंध करने के निर्देश दिए हैं। आदित्यनाथ ने कहा कि मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव, परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव और नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव बेहतर समन्वय से श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए जरूरी इंतजाम सुनिश्चित कराएं। उन्होंने यह भी कहा कि साथ ही अयोध्या की सीमा से सटे जिलों के साथ अयोध्या प्रशासन के अधिकारी अंतरराज्यीय संवाद और सम्पर्क बनाये रखें। मुख्यमंत्री ने कहा कि किस दिशा से कितने श्रद्धालुओं का आगमन हो रहा है, इसका आकलन करते हुए उसके अनुसार जरूरी प्रबंध किए जाएं। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह बेहतर होगा कि अति विशिष्ट और अन्य गणमान्य लोग अयोध्या आने का कार्यक्रम बनाने से एक सप्ताह पहले स्थानीय प्रशासन या श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास अथवा राज्य सरकार को सूचित कर दें। मुख्यमंत्री ने कहा कि दर्शन-पूजन कर चुके श्रद्धालुओं को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए परिवहन निगम की बसों की व्यवस्था हो, विभिन्न नगरों से अयोध्या आने के लिए अतिरिक्त बसों का संचालन अभी स्थगित रखा जाए। उनका कहना था कि दर्शन के बाद जिस मार्ग के श्रद्धालुओं की संख्या ज्यादा हो उस ओर बसें लगाकर श्रद्धालुओं को गंतव्य तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि ऐसे रूट चिन्हित कर आवश्यकतानुसार रेलवे से समन्वय करते हुए रेलगाडि़यों के संचालन की भी कोशिश की जाए तथा परिवहन मंत्री खुद इस व्यवस्था को सुनिश्चित कराएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या में पूरे देश से श्रद्धालुओं का आगमन हो रहा है जो स्वाभाविक भी है। उनका मानना था कि हर श्रद्धालु की सुरक्षा, सुविधा एवं सुगम दर्शन की व्यवस्था करना सरकार का कर्तव्य है। दर्शनार्थियों की भीड़ के प्रबंधन में स्थानीय प्रशासन और मंदिर न्यास के बेहतर समन्वय की भी जरूरत बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भीड़ प्रबंधन के तहत राम पथ, भक्ति पथ, धर्म पथ और जन्मभूमि पथ पर, जहां भी दर्शनार्थी हों वे कतारबद्ध खड़े हों, भीड़ न लगे, कतार लगातार चलती रहे। उन्होंने बुजुर्गों, बच्चों और महिलाओं का विशेष ध्यान देने पर जोर देते हुए कहा कि दर्शनार्थियों की भावनाओं का सम्मान करते हुए प्रमुख पथों पर कम आवाज में राम भजन बजाये जाएं एवं सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों का व्यवहार भी मर्यादित रहे। उन्होंने कहा कि उल्लास भरे वातावरण में कुछ अराजक तत्व माहौल को खराब करने की कोशिश कर सकते हैं, ऐसे में यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी गीत-संगीत/नारेबाजी अथवा किसी भी अन्य कृत्य से किसी की धार्मिक भावनाओं का अपमान न हो। उन्होंने कहा कि अगर कोई ऐसा करता हुआ पाया जाए तो उनके विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाए।

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