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- मुंबई. करीब 42 प्रतिशत महिलाओं को कार्यस्थल पर भेदभाव का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद कॉरपोरेट क्षेत्र में कार्यरत 90 प्रतिशत महिलाएं अपने करियर में आगे बढ़ने के लिए ‘अतिरिक्त मेहनत' करने को तैयार हैं। एक सर्वेक्षण में यह निष्कर्ष सामने आया है। वैश्विक पेशेवर सेवा फर्म एऑन ने ‘2024 वॉयस ऑफ वुमेन स्टडी इंडिया' शीर्षक से जारी अध्ययन रिपोर्ट में कहा है कि कॉरपोरेट नौकरी कर रही 42 प्रतिशत महिलाओं ने कार्यस्थल पर पक्षपात या संभावित पक्षपात का सामना करने की बात कही है। वहीं 37 प्रतिशत महिला कर्मचारियों को असंवेदनशील व्यवहार का अनुभव भी करना पड़ा है। हालांकि, 90 प्रतिशत से अधिक महिलाओं ने कहा कि वे प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद अपने करियर में आगे बढ़ने के लिए अतिरिक्त समय देने, चुनौतीपूर्ण कामों के लिए खुद आगे आने और खुद को बेहतर बनाने के लिए तैयार हैं। सर्वेक्षण में शामिल करीब छह प्रतिशत महिलाओं ने कम-से-कम एक बार यौन उत्पीड़न का सामना करने की पीड़ा भी जताई है। हालांकि, इनमें से आधे से भी कम महिला कर्मचारियों ने आधिकारिक तौर पर अपने नियोक्ता को इस घटना की सूचना दी। एऑन का अध्ययन भारत में 560 से अधिक कंपनियों की लगभग 24,000 पेशेवर महिलाओं से मिले जवाबों पर आधारित है। अध्ययन के मुताबिक, तीन-चौथाई कामकाजी महिलाओं ने कहा कि मातृत्व अवकाश के बाद उन्हें एक-दो साल के लिए करियर में झटका झेलना पड़ा। वहीं करीब 40 प्रतिशत महिलाओं को मातृत्व अवकाश पर जाने से वेतन पर नकारात्मक असर देखने को मिला और उनकी भूमिका को भी बदल दिया गया। वरिष्ठ प्रबंधन और नेतृत्व की भूमिकाओं में मौजूद 34 प्रतिशत महिलाओं ने भी भेदभाव के संकेत दिए जबकि शुरुआती स्तर की नौकरियों में 17 प्रतिशत महिलाओं को पक्षपात झेलना पड़ा। इसका असर यह हुआ कि पक्षपात की शिकार लगभग 21 प्रतिशत महिलाओं ने एक वर्ष से भी कम समय में संगठन छोड़ने का संकेत दिया। एऑन के लिए भारत में मुख्य कार्यपालक अधिकारी (प्रतिभा समाधान) नितिन सेठी ने कहा, ‘‘कार्यस्थल पर पक्षपात व्यवसायों के कुशल और प्रतिबद्ध महिलाओं को कार्यबल में शामिल करने और बनाए रखने के प्रयासों में बाधा बन रहा है... समावेशी कार्य संस्कृति का निर्माण नेतृत्व की प्राथमिकता में होना चाहिए।''
- पणजी. गोवा के सरकारी और सहायता-प्राप्त स्कूल छात्रों को परंपरागत विषयों के साथ कोडिंग और रोबोटिक्स की भी शिक्षा दे रहे हैं। इससे नए दौर के लिए विद्यार्थियों के तैयार होने के साथ नए अवसरों की दुनिया भी खुल रही है। गोवा के इन स्कूलों में लगभग 65,000 छात्र सरकार के महत्वाकांक्षी कौशल विकास कार्यक्रम के तहत कम उम्र में ही कोडिंग और रोबोटिक्स के गुर सीख रहे हैं। इस कार्यक्रम का उद्देश्य स्कूली छात्रों को भविष्य के लिए तैयार करना है। गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने हाल ही में विधानसभा को जानकारी दी थी कि राज्य सरकार स्कूली छात्रों को नए कौशल से लैस करने के लिए ‘स्कूलों में कोडिंग और रोबोटिक्स शिक्षा' (केयर्स) योजना लागू कर रही है ताकि वे उद्योग के लिए तैयार हों। सावंत ने कहा था कि इस योजना को सरकारी और सहायता-प्राप्त स्कूलों में सफलतापूर्वक लागू किया गया है और अब विद्यार्थी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा पा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा था कि कोविड-19 महामारी के दौरान गोवा के सभी स्कूलों के कंप्यूटर शिक्षकों को ‘मास्टर ट्रेनर' बनने के लिए प्रशिक्षित किया गया था। इस योजना के तहत स्कूलों को कोडिंग एवं रोबोटिक्स उपकरण मुफ्त में दिए जा रहे हैं। गोवा सरकार की केयर्स परियोजना के निदेशक डॉ. विजय बोर्गेस ने कहा कि यह योजना पिछले चार वर्षों से सभी मिडिल स्कूलों में 65,000 छात्रों को लक्षित करके लागू की जा रही है। इसके लिए इंजीनियरिंग पेशेवरों को फेलो नियुक्त किया गया है। उन्होंने कहा कि इस योजना का उद्देश्य नवोन्मेषक, प्रौद्योगिकी के लिए तैयार और ‘आत्मनिर्भर भारत' के निर्माण में मददगार विद्यार्थियों को तैयार करना है। पणजी से 110 किलोमीटर दूर कैनकोना तालुका के गावडोंग्रिम गांव में सरकारी स्कूल के प्रधानाध्यापक दामोदर गांवकर ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र भी कोडिंग एवं रोबोटिक्स में गहरी दिलचस्पी दिखा रहे हैं और बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं। स्कूल के छात्र भी इन विषयों को सीखने में बहुत उत्साहित हैं। छात्र समृद्ध देवीदास ने कहा, ‘‘मुझे कोडिंग और रोबोटिक्स सीखने में बहुत मजा आता है। मुझे कई नई चीजें पता चलती हैं। इससे मेरी रचनात्मक सोच भी बढ़ती है।
- नयी दिल्ली. सरकार ने बुधवार को राज्यसभा में कहा कि पिछले पांच साल में सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई करने के दौरान कुल 377 लोगों की मौत हो गई, लेकिन हाथ से मैला ढोने की प्रथा की कोई रिपोर्ट नहीं है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने एक सवाल के लिखित जवाब में राज्यसभा को बताया कि 2019 से 2023 तक सीवर और सेप्टिक टैंक की जोखिमपूर्ण सफाई करते हुए कुल 377 लोगों की मौत हुई। उन्होंने कहा कि लेकिन देश में हाथ से मैला ढोने की प्रथा की कोई रिपोर्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि हाथ से मैला ढोने वाले कर्मियों के नियोजन का निषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013 के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए विभिन्न कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने का अनुरोध किया गया है।
- वायनाड. केरल में वायनाड के भूस्खलन प्रभावित चूरलमाला के निवासी जयन 29 जुलाई की रात अपने घर में गहरी नींद में सो रहे थे। उनके आवास में बाहर हो रही मूसलाधार बारिश की तेज आवाजें आ रही थीं। जयन मंगलवार रात डेढ़ बजे तेज आवाज सुनकर जगे। जब वह अपने घर के बाहर निकले तो उन्होंने देखा कि उनके घर के बाहर बाढ़ का पानी बह रहा है और लोग अपनी छतों पर भागते हुए मदद के लिए चिल्ला रहे हैं। जयन ने मंगलवार की सुबह के समय की भयावह घटनाओं को याद करते हुए कहा, ‘‘वहां बिजली या रोशनी नहीं थी। हमने बाढ़ के पानी के दूसरी तरफ लोगों को मदद के लिए चिल्लाते देखा, लेकिन कोई भी उनके पास नहीं पहुंच सका क्योंकि कीचड़ और पानी का तेज बहाव किसी को भी उनके पास जाने से रोक रहा था।'' जयन और उनके परिवार के सदस्य अस्थायी तौर पर मजदूरी का काम करते हैं। आमतौर पर वे रात का खाना खाने के बाद रात 9.30 बजे के आसपास सो जाते थे। सोमवार की रात को भी, इलाके के अन्य लोगों की तरह, यह परिवार भी रात 9.30 बजे के आसपास सोने चला गया, इस बात से अनजान कि उनके साथ इतनी बुरी घटना घटने वाली है। चूरलमाला में लोगों को लगा कि रात डेढ़ बजे हुआ भूस्खलन ही एकमात्र घटना होगा, और कई लोग यह उम्मीद करते हुए बिस्तर पर चले गए कि मदद के लिए चिल्लाने वाले अन्य लोग सुरक्षित होंगे। जयन ने कहा, ‘‘लेकिन, तड़के करीब 3.30 बजे तेज आवाज हुई और सबकुछ एक झटके में खत्म हो गया। बड़े-बड़े पत्थरों और कीचड़ ने उन सभी घरों को बहा दिया, जहां लोग पहले मदद के लिए चिल्ला रहे थे। हमें समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें, क्योंकि हमारे सामने कीचड़, पानी और मलबा बह रहा था।'' इलाके के ज्यादातर घर कुछ ही समय में गायब हो गए और आसपास जीवन का कोई निशान नहीं बचा। कीचड़-पत्थरों से भरे पानी ने मकानों को तहस-नहस कर दिया, जिनमें लोग रहते थे। एक ऐसा इलाका जो कभी जीवन से भरा हुआ था, अचानक नदी में बदल गया और चारों तरफ कीचड़ एवं मलबा बिखरा हुआ था। जो लोग सुरक्षित बच गए, वे रोते हुए अपने प्रियजनों का नाम पुकार रहे थे। जयन की पत्नी के रिश्तेदार लापता हैं। यह परिवार सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र में रहता था। रुंधे गले से जयन ने कहा, ‘‘मेरी पत्नी के परिवार के 11 सदस्य लापता हैं। हमने मलप्पुरम जिले के नीलांबुर में चलियार नदी से बरामद एक बच्चे के शव की पहचान अपने एक रिश्तेदार के रूप में की है। हमें अब तक केवल तीन शव मिले हैं और बाकी अभी भी लापता हैं।'' जयन उस स्थान पर प्रतीक्षा कर रहे हैं, तथा घटनास्थल से बचाए गए प्रत्येक व्यक्ति को गौर से देखते हैं तथा यह सुनिश्चित करते हैं कि वह व्यक्ति उनकी पत्नी के परिवार का तो नहीं है। चिंतित और थके हुए नजर आ रहे जयन ने कहा, ‘‘मैं यहां इंतजार कर रहा हूं, उम्मीद है कि हमें अपने लापता परिवार के सदस्यों के बारे में कुछ जानकारी मिलेगी।'' उनका इंतजार कुछ और दिनों तक चल सकता है क्योंकि बचावकर्मी क्षेत्र में कीचड़ और मलबे के बीच मृतकों की तलाश कर रहे हैं तथा किसी को जीवित निकाले जाने की उम्मीद कर रहे हैं। जयन की तरह कई लोग इस क्षेत्र में भटक रहे हैं, बचाव दल के पास भाग रहे हैं, जो शवों को बाहर निकाल रहे हैं तथा अपने प्रियजनों के अंतिम दर्शन की उम्मीद कर रहे हैं, जो अचानक आई बाढ़ में बह गए।
- नयी दिल्ली. पश्चिमी दिल्ली के रोहिणी इलाके में 15 वर्षीय एक किशोरी की आटा गूंथने वाली मशीन में हाथ और सिर फंसने से मौत हो गई। इस मशीन का इस्तेमाल मोमोज और स्प्रिंग रोल बनाने में किया जाता था। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी। पुलिस के मुताबिक घटना मंगलवार शाम बेगमपुर इलाके में हुई, जहां एक कमरे के अंदर मशीन चल रही थी। उसने बताया कि पीड़िता काम कर रही थी, तभी उसका हाथ मशीन में फंस गया और उसका सिर आटा गूंथने वाले टब में चला गया। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, ‘‘मंगलवार शाम 7.18 बजे बेगमपुर थाने में एक पीसीआर कॉल आई, जिसमें बताया गया कि बेगमपुर इलाके के हनुमान चौक के पास आटा गूंथने वाली मशीन में एक लड़की फंसी हुई है।'' उन्होंने बताया, ‘‘हमारी टीम मौके पर पहुंची और पाया कि मशीन बड़ी नहीं थी, लेकिन प्रारंभिक जांच से पता चला है कि लड़की का हाथ टब के अंदर फंस गया था, जिसके कारण मशीन ने उसे अंदर खींच लिया।'' अधिकारी ने बताया कि जब पुलिस टीम मौके पर पहुंची तो लड़की गंभीर रूप से घायल थी और उसका सिर मशीन में फंसा हुआ था। पुलिस ने बताया कि उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस के मुताबिक मामले में सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। उसने बताया कि वह पीड़िता के परिवार से बात कर उसकी वास्तविक उम्र का पता लगा रही है ताकि यह जानकारी मिल सके कि कहीं वह बाल मजदूर के तौर पर तो काम नहीं कर रही थी।
- बांदा (उप्र) . बांदा जिले की एक अदालत ने अपनी पत्नी की हत्या करने के जुर्म में एक व्यक्ति को बुधवार को मौत की सजा सुनाई। दोषी अपनी पत्नी का सिर काटकर थाने ले गया था। लोक अभियोजक विजय बहादुर सिंह परिहार ने बताया कि अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद जिला एवं सत्र अदालत के न्यायाधीश डॉ बब्बू सारंग ने करीब चार साल पहले फरसे से हमलाकर अपनी पत्नी विमला की हत्या करने के मामले में दोषी पाए जाने पर पति किन्नर यादव (39) को मौत की सजा सुनाई और उस पर 10 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। उन्होंने बताया कि घटना की प्राथमिकी मृत महिला के पिता रामशरण यादव ने दर्ज करवाई थी।प्राथमिकी में आरोप लगाया गया था कि बबेरू कस्बे के नेता नगर मोहल्ले में रहने वाले किन्नर यादव को शक था कि उसकी पत्नी का पड़ोस में रहने वाले व्यक्ति से अवैध संबंध है और उसने नौ अक्टूबर 2020 को पड़ोसी को घर बुलाया और फिर फरसे से हमलाकर उसका एक कान काट दिया। इसमें कहा गया था कि जब उसे बचाने के लिए विमला आई तो यादव ने उस पर भी हमला कर दिया और उसका सिर धड़ से अलग कर दिया। उन्होंने बताया कि यादव उसका कटा हुआ सिर बबेरू थाने ले गया था। परिहार ने बताया कि इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से 11 गवाह अदालत में पेश किए गए।
- खरगोन . मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के एक गांव में बुधवार शाम को नहाते समय दो बहनों की डूबने से मौत हो गई। एक अधिकारी ने बताया कि घटना बालकवाड़ा थाने के अंतर्गत आने वाले बदिया गांव के पास स्थित एक तालाब में हुई। उप निरीक्षक एचसी पिपलिया ने बताया कि तीन बच्चियां कुंडिया तालाब में नहा रही थी, तभी वे डूबने लगी।उन्होंने बताया कि ग्रामीणों ने उनमें से एक को बचा लिया, जबकि 11 वर्षीय राधा और कृष्णा की डूबने से मौत हो गई। ये दोनों चचेरी बहने थी। गांव के गोविंदा परदेशी ने बताया कि वे अपने मवेशी चराने आई थी।
- सागर . मध्यप्रदेश के सागर में 32 वर्षीय एक महिला और उसकी दो नाबालिग बेटियां अपने घर पर मृत पाई गई हैं। पुलिस को उनकी हत्या कर दिये जाने का संदेह है। एक अधिकारी ने बताया कि मंगलवार रात सिविल लाइन थानाक्षेत्र के नेपाल पैलेस इलाके में यह महिला और उसकी बेटियां घर में खून से लथपथ मृत पायी गयीं। पुलिस के अनुसार मृतकों की पहचान वंदना और उनकी बेटियों-- अवंतिका (आठ) और अंविका (तीन) के रूप में हुई है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) संजीव उइके ने बताया, ‘‘वंदना अपने पति विशेष पटेल और अपनी दो बेटियों के साथ नेपाल पैलेस इलाके में रहती थी। मंगलवार रात वंदना और उनकी एक बेटी के शव रसोई में पड़े मिले, जबकि छोटी बेटी का शव बेडरूम में मिला।'' उन्होंने कहा, प्रथम दृष्टया यह हत्या का मामला है और इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच के लिए करीब 10 टीम गठित की गई हैं। सूत्रों ने बताया कि वंदना का पति जिला अस्पताल में काम करता है।
- मेरठ/लखनऊ । उत्तर प्रदेश के मेरठ में गुरुवार को शासन के आदेश पर डीएम और एसएसपी ने कांवड़ियों पर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा की। एक आधिकारिक बयान के मुताबिक जिलाधिकारी दीपक मीणा और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विपिन ताड़ा ने हेलीकॉप्टर से कांवड़ियों पर फूलों की बारिश की। इस दौरान बाबा औघड़नाथ मंदिर पल्लवपुरम, बागपत फ्लाईओवर, सिवाया टोल, दौराला और सकौती सहित राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या—58 पर कांवड़ियों पर फूल बरसाए गए। इस दौरान कावड़ मार्ग का हवाई सर्वेक्षण भी किया गया है।बयान के अनुसार उत्साहित कांवड़ियों ने भगवान भोलेनाथ और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रशंसा में नारे भी लगाए।मेरठ से प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक जिलाधिकारी मीणा ने कहा कि कांवड़ यात्रा मार्ग पर कांवड़ियों की सुविधा का पूरा ख्याल रखा जा रहा है। साथ ही सुरक्षा के चाक—चौबंद बंदोबस्त किए गए हैं। मेरठ में एक दिन पहले भी बुलडोजर से पुष्प वर्षा की गई थी। इसके बाद अब हेलीकॉप्टर से फूलों की बारिश की गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांवड़ यात्रा की तैयारी बैठक में अधिकारियों को आवश्यकतानुसार कांवड़ियों पर पुष्प वर्षा करने के आदेश दिये थे।
- नयी दिल्ली । भारत में जुलाई के महीने में सामान्य के मुकाबले नौ प्रतिशत अधिक बारिश हुई, जबकि देश के मध्य क्षेत्र में 33 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने गुरुवार को यह जानकारी दी। आईएमडी प्रमुख मृत्युंजय महापात्र ने एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि मध्य भारत के हिस्सों में अच्छी बारिश हुई, जिससे कृषि को लाभ हो रहा है। मध्य भारत कृषि के लिए मानसून की वर्षा पर बहुत अधिक निर्भर है। आईएमडी के आंकड़ों के मुताबिक, पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल में गांगेय के मैदानी इलाकों और पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में कम बारिश हुई है।
- शिमला। हिमाचल प्रदेश में बादल फटने की दो घटनाओं में तीन लोगों की मौत हो गयी तथा करीब 40 लोग लापता हो गए हैं। अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि बारिश के कारण कई मकान बह गए और सड़कें तथा दो जल विद्युत परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हो गयी हैं। शिमला के पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार गांधी ने ‘ बताया कि शिमला में रामपुर उपमंडल के समाघ खुद (नाला) में बादल फटने से दो लोगों की मौत हो गयी तथा 28 अन्य लापता हो गए हैं। दो लोगों को घटनास्थल से बचाया गया है। उपायुक्त अनुपम कश्यप ने बताया कि बादल फटने की घटना देर रात करीब एक बजे हुई।उन्होंने बताया कि सड़कों के बह जाने के कारण बचाव अभियान चुनौतीपूर्ण हो गया है।राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने बताया कि राज्य में भारी बारिश और बादल फटने के कारण व्यापक पैमाने पर नुकसान पहुंचा है।उन्होंने बताया कि प्रभावित इलाकों में सड़क संपर्क बाधित हुआ है। वाहनों के गुजरने के लिए बनाए चार पुल और पैदल पुल बह गए हैं, बचाव अभियान संचालित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सेब की फसल भी बर्बाद हो गयी है।घटनास्थल पर मौजूदा उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक ने बताया कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस, पुलिस और होम गार्ड ने बचाव अभियान शुरू कर दिया है और लापता लोगों की तलाश के लिए ड्रोन का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।मंडी जिले के पधर में थालटूखोद इलाके में बादल फटने की एक अन्य घटना में बुधवार रात को एक व्यक्ति की मौत हो गयी तथा नौ अन्य लापता हो गए।कुछ मकान ढह गए हैं और सड़क संपर्क बाधित हो गया है। मंडी जिला प्रशासन ने भारतीय वायु सेना और एनडीआरएफ से मदद मांगी है।ब्यास नदी के उफान पर होने के कारण चंडीगढ़-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गया है। कुल्लू के भागीपुल में भी मकानों के क्षतिग्रस्त होने की खबरें आ रही हैं और पार्वती नदी तथा मलाना खुद में बाढ़ के कारण कुल्लू के भुंटार इलाके में भी अलर्ट जारी किया गया है।मनाली-चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग कई स्थानों पर भूस्खलन के कारण टूट या है और ब्यास नदी का पानी मंडी के पंडोह में कुछ घरों में घुस गया है।कुछ लोगों के लापता होने तथा इलाके में मकानों तथा दुकानों के ढह जाने की भी सूचना है।अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में सभी शैक्षणिक संस्थानों को बंद कर दिया गया है और प्राधिकारियों का पूरा ध्यान बचाव एवं राहत अभियानों पर है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बादल फटने के बाद सचिवालय में एक आपात बैठक बुलायी है।
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नयी दिल्ली. देश में ‘तरंग शक्ति' नामक सबसे बड़ा बहुपक्षीय हवाई अभ्यास दो चरणों में आयोजित किया जाएगा, जो भारत के सैन्य दमखम प्रदर्शित करेगा तथा उसमें भाग ले रही वायु सेनाओं को आपस में मिलकर काम करने व अभियान चलाने का मंच उपलब्ध करेगा। वायुसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ‘तरंग शक्ति' का पहल चरण 6-14 अगस्त तक तमिलनाडु के सुलूर में आयोजित किया जाएगा, जबकि दूसरा चरण 29 अगस्त से 14 सितंबर तक राजस्थान के जोधपुर में आयोजित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 51 देशों को इसमें हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित किया गया था और उनमें से करीब 30 उसमें हिस्सा लेंगे। अधिकारी ने बताया कि वायुसेना के एलसीए तेजस, मिराज 2000, राफेल लड़ाकू विमान ‘तरंग शक्ति' अभ्यास में हिस्सा लेंगे। वायुसेना के उपप्रमुख (वायस चीफ ऑफ एयर स्टाफ) एयर मार्शल ए पी सिंह ने वायुसेना के एक अधिकारी द्वारा कंप्यूटर के जरिये प्रस्तुति दिये जाने के बाद संवाददाताओं से कहा कि यह अभ्यास भारत के सैन्य दमखम को प्रदर्शित करेगा और रक्षा क्षेत्र में उसे ‘आत्मनिर्भरता' की ओर ले जाएगा। अधिकारी ने बताया कि फ्रांस के राफेल, जर्मनी के टाइफून, ऑस्ट्रेलिया के एफ-18 विमान आदि अभ्यास ‘तरंग शक्ति' में हिस्सा लेंगे।
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश में पिछले 24 घंटों में बारिश से जुड़ी घटनाओं समेत विभिन्न आपदाओं में 15 लोगों की मौत हो गई। एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। राहत आयुक्त ने बुधवार को यहां बताया कि मंगलवार शाम छह बजे से बुधवार को इसी अवधि तक 15 लोगों की मौत हो गयी, जिसमें चंदौली में चार, बांदा और गौतमबुद्ध नगर में तीन-तीन, प्रयागराज में दो, प्रतापगढ़, गोंडा और इटावा में एक-एक व्यक्ति हुई। राहत आयुक्त की रिपोर्ट के मुताबिक, बारिश से जुड़ी घटनाओं जैसे बिजली गिरने, डूबने और सांप काटने की वजह से यह मौतें हुईं। सिंचाई विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, बदायूं के कछला पुल पर गंगा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।
रिपोर्ट में बताया गया कि फिलहाल राज्य में केवल सात जिले (कुल 75 में से) अयोध्या, बलिया, लखीमपुर खीरी, फर्रुखाबाद, सीतापुर, बहराइच और हरदोई बाढ़ प्रभावित हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित जिलों में राहत और बचाव कार्य जारी है। -
नयी दिल्ली. संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने बुधवार को कहा कि उसने परिवीक्षाधीन आईएएस (भारतीय प्रशासनिक सेवा) अधिकारी पूजा खेडकर की उम्मीदवारी रद्द कर दी है और भविष्य में किसी भी परीक्षा में उनके शामिल होने पर रोक लगा दी है। आयोग ने एक बयान में कहा, ‘‘यूपीएससी ने उपलब्ध रिकॉर्ड की सावधानीपूर्वक जांच-पड़ताल की है और उन्हें सीएसई-2022 नियमों के प्रावधानों का उल्लंघन करने का दोषी पाया है।'' इसमें कहा गया है कि सीएसई-2022 (सिविल सेवा परीक्षा-2022) के लिए उनकी अनंतिम उम्मीदवारी ‘‘रद्द'' कर दी गई है और भविष्य में किसी भी परीक्षा में उनके शामिल होने या चयन पर ‘‘स्थायी रूप से रोक'' लगा दी गई है। आयोग ने कहा कि पिछले 15 वर्षों में खेडकर का यह “एकमात्र मामला” है, जिसमें वह यह पता नहीं लगा सका कि खेडकर ने एक अभ्यर्थी के लिए सीएसई परीक्षा में बैठने के लिए निर्धारित प्रयासों से ज्यादा बार परीक्षा दी, क्योंकि “उसने न सिर्फ अपना नाम बदला, बल्कि अपने माता-पिता के नाम भी बदल दिए।” इसमें कहा गया है कि यूपीएससी एसओपी को और मजबूत करने की प्रक्रिया में है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भविष्य में इस तरह के मामले की पुनरावृत्ति न हो। आयोग ने कहा कि पूजा मनोरमा दिलीप खेडकर को अपनी पहचान ‘फर्जी' बताकर परीक्षा के लिए स्वीकृत सीमा से अधिक अवसर ‘धोखाधड़ी' से प्राप्त करने को लेकर 18 जुलाई को कारण बताओ नोटिस (एससीएन) जारी किया गया था। बयान में कहा गया है कि उसे 25 जुलाई तक एससीएन पर अपना जवाब देना था, लेकिन उसने अपना जवाब देने के लिए आवश्यक दस्तावेज जुटाने के वास्ते चार अगस्त तक का समय मांगा। आयोग ने कहा कि यूपीएससी ने उसे 30 जुलाई को अपराह्न साढ़े तीन बजे तक अपना जवाब देने के लिए ‘अंतिम मौका'' दिया था, लेकिन वह ‘‘निर्धारित समय के भीतर अपना स्पष्टीकरण देने में विफल रहीं।'' आयोग ने कहा कि खेडकर के मामले की पृष्ठभूमि में, उसने पिछले 15 वर्षों (2009-2023) के दौरान सिविल सेवा परीक्षाओं में शामिल हुए 15,000 से अधिक अंतिम उम्मीदवारों को लेकर इस बात की ‘गहन जांच' की कि उन्होंने कितनी बार प्रयास किया था। इस विस्तृत कवायद के बाद, खेडकर के मामले को छोड़कर, किसी भी अन्य अभ्यर्थी ने सीएसई नियमों के तहत निर्धारित प्रयासों की संख्या को पार नहीं किया। बयान के मुताबिक, खेडकर के मामले में यूपीएससी की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) यह पता नहीं लगा सकी कि उसने परीक्षा में बैठने के प्रयासों की निर्धारित संख्या को पार कर लिया है। इसका मुख्य कारण यह था कि उसने न सिर्फ अपना नाम बदला बल्कि अपने माता-पिता के नाम भी नाम बदल दिए। झूठे प्रमाण पत्र (विशेष रूप से ओबीसी और पीडब्ल्यूबीडी श्रेणियों के लिए) प्रस्तुत करने के संबंध में शिकायतों के मुद्दे को उठाते हुए यूपीएससी ने कहा कि आयोग सिर्फ प्रमाण पत्रों की “प्रारंभिक” जांच करता है जैसे कि क्या प्रमाण पत्र सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किया गया है, प्रमाण पत्र किस वर्ष से संबंधित है, प्रमाण पत्र जारी करने की तिथि क्या है, क्या प्रमाण पत्र पर कोई ‘ओवरराइटिंग' है और प्रमाण पत्र का प्रारूप आदि। बयान के मुताबिक, “आम तौर पर, अगर प्रमाणपत्र सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किया गया होता है, तो उसे वास्तविक मान लिया जाता है। यूपीएससी के पास न तो अधिकार है और न ही हर साल उम्मीदवारों द्वारा जमा किए जाने वाले हजारों प्रमाणपत्रों की सत्यता की जांच करने का साधन है।” यूपीएससी ने कहा कि यह माना जाता है कि प्रमाण पत्रों की वास्तविकता की जांच और सत्यापन उन अधिकारियों द्वारा किया जाता है, जिनके पास यह काम करने का अधिकार है। यूपीएससी ने खेडकर के खिलाफ इस आरोप में पुलिस में मामला दर्ज कराया है कि उसने अपनी फर्जी पहचान बताकर सिविल सेवा परीक्षा में निर्धारित प्रयासों से अधिक बार परीक्षा देकर धोखाधड़ी की है।
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वायनाड . केरल के वायनाड जिले में भूस्खलन की घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 167 हो गई है और 200 से अधिक लोग घायल हुए हैं। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। बचाव दल ने तलाशी अभियान के दूसरे दिन मलबे में फंसे लोगों को खोजने के प्रयास तेज कर दिए हैं। वायनाड जिला प्रशासन ने इस आपदा में 167 लोगों की मौत होने की पुष्टि की। जिला प्रशासन ने कहा कि 167 मृतकों में 22 बच्चे भी शामिल हैं। इसने कहा कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों से 219 लोगों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है और उनमें से 78 का इलाज अभी भी जारी है। केरल के मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन कहा, ‘‘वायनाड में बचाव अभियान जारी है। हमने अपनी धरती पर पहले कभी ऐसे भयानक दृश्य नहीं देखे हैं।'' इससे पहले, विजयन ने तिरुवंनतपुरम में संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि वायनाड जिले के भूस्खलन प्रभावित इलाकों से 144 शव बरामद किए गए हैं जिनमें 79 पुरुष और 64 महिलाएं शामिल हैं। मुख्यमंत्री विजयन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में आपदा में जान गंवाने वालों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की गई। विजयन ने कहा कि जिले के मुंडक्कई और चूरलमाला इलाकों में दृश्य भयानक हैं। उन्होंने कहा, ‘‘ये दोनों इलाके पूरी तरह से नष्ट हो गए हैं।'' उन्होंने कहा कि आपदा क्षेत्र से अधिक से अधिक लोगों को बचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘दो दिन के बचाव अभियान में 1,592 लोगों को बचाया गया। समन्वित और व्यापक प्रयासों के तहत इतने कम समय में अधिक से अधिक लोगों को बचाया जा सका है।'' विजयन ने बताया कि पहले चरण में आपदा के निकटवर्ती क्षेत्रों के 68 परिवारों के 206 लोगों को तीन शिविरों में स्थानांतरित किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘इनमें 75 पुरुष, 88 महिलाएं और 43 बच्चे शामिल हैं।
भूस्खलन के बाद जारी बचाव अभियान के परिणामस्वरूप फंसे हुए 1,386 लोगों और अपने घरों में फंसे लोगों को बचाया गया। उन्होंने कहा कि इसके अलावा बच्चों और गर्भवती महिलाओं समेत 8,017 लोगों को जिले में 82 शिविरों में स्थानांतरित किया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘मेप्पडी में आठ शिविर हैं, जहां फिलहाल 421 परिवारों के 1,486 लोग रह रहे हैं।'' इस बीच थलसेना, नौसेना और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के बचाव दल मलबे में दबे लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं। रक्षा विभाग की ओर से जारी बयान के अनुसार, क्षेत्र में तैनात सेना की टुकड़ियों ने मंगलवार रात तक प्रभावित क्षेत्रों से लगभग एक हजार लोगों को बचाया। इसके अलावा, वायुसेना तलाशी और बचाव कार्यों में समन्वय के लिए प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर रही है। सेना के जवान, एनडीआरएफ, राज्य आपात सेवा के जवान और स्थानीय लोगों समेत बचावकर्मी, कई इलाकों में बारिश जारी रहने के बावजूद इस कठिन अभियान को अंजाम देने के लिए सभी बाधाओं से जूझ रहे हैं। भूस्खलन की घटनाएं मंगलवार को तड़के हुईं, जिससे अपने घरों में सो रहे लोगों को जान बचाने का मौका तक नहीं मिल सका। बुधवार सुबह भूस्खलन से तबाह मुंडक्कई गांव में बचाव अभियान फिर से शुरू होने पर जमींदोज हुए मकानों के अंदर बैठे और लेटी हुई अवस्था में शवों के भयावह दृश्य देखने को मिले। कुछ स्थानों पर बचावकर्मियों ने लोगों को सुरक्षित ढंग से निकालने के लिए रस्सियों का उपयोग करके पुल बनाए। जोखिम भरे इलाकों में लोगों को लकड़ी के प्लेटफार्म पर बैठाकर उफान पर आई नदी के पार पहुंचाया गया। केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी केरल के वायनाड जिले में भूस्खलन की स्थिति पर करीबी नजर रख रहे हैं। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने बचाव प्रयासों के लिए राज्य को हरसंभव सहायता देने का वादा किया है। कुरियन ने वायनाड में भूस्खलन से प्रभावित लोगों से मुलाकात की।
बुधवार को यहां एक प्रेस विज्ञप्ति में कुरियन के हवाले से कहा गया, ‘‘केंद्र सरकार स्थिति पर नजर रख रही है। प्रधानमंत्री स्थिति पर नजर रख रहे हैं और उन्होंने मुझे प्रभावित इलाकों का दौरा करने के लिए भेजा है।'' उन्होंने कहा, ‘‘गृह मंत्रालय के दोनों नियंत्रण कक्ष चौबीसों घंटे स्थिति पर नजर रख रहे हैं और राज्य को हरसंभव सहायता मुहैया करा रहे हैं।'' मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया कि सेना वायनाड के चूरलमाला में बचाव कार्यों के लिए एक बेली पुल का निर्माण करेगी। केरल सरकार ने वायनाड में आपदाग्रस्त इलाकों से बचाए गए लोगों को तत्काल चिकित्सा सहायता मुहैया कराने के लिए चूरलमाला में नियंत्रण कक्ष में ऑक्सीजन से लैस एम्बुलेंस के साथ एक चिकित्सा केंद्र बनाने का फैसला किया है। वायनाड में मंगलवार तड़के मुंडक्कई, चूरलमाला, अट्टामाला और नूलपुझा गांवों में मूसलाधार बारिश के बाद बड़े पैमाने पर भूस्खलन की घटनाएं हुई थीं। -
नयी दिल्ली. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बुधवार को राज्यसभा में कहा कि केंद्र सरकार ने पिछले 4-5 वर्षों में शिक्षा क्षेत्र में रिक्त पदों पर 40,000 से अधिक लोगों की नियुक्ति की है। प्रधान ने कहा कि आईआईटी जैसे उच्च शैक्षणिक संस्थानों में उद्योग से अनुभवी लोगों को लाने के लिए प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस (पीओपी) प्रणाली शुरू की गई है। विश्वविद्यालयों द्वारा नियुक्त किए जाने वाले पीओपी ‘‘आवश्यकता-आधारित'' होते हैं, न कि यह कोई स्थायी पद है। प्रधान ने कहा कि पीओपी शिक्षा में विशेषज्ञता और नए विचार लाएंगे।
प्रधान ने कहा, पीओपी नयी शिक्षा नीति के तहत एक प्रमुख सिफारिश है। अब आम सहमति है कि डिग्री के अलावा हमें योग्यता को भी महत्व देना होगा।'' शिक्षा को रोजगारपरक और उद्यमिता की ओर ले जाने का प्रयास किया जा रहा है। इसलिए, उद्योग और शिक्षा के बीच संबंध आवश्यक है। मंत्री माकपा सदस्य जॉन ब्रिटास द्वारा पूछे गए पूरक प्रश्न का उत्तर दे रहे थे, जिन्होंने पूछा था कि क्या सरकार ने पीओपी के लिए 10 प्रतिशत शैक्षणिक पद आरक्षित किए हैं और क्या इससे उच्च संस्थानों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण कम हो जाएगा। ब्रिटास ने कहा कि लगभग 26 प्रतिशत शैक्षणिक पद और 46 प्रतिशत अन्य पद अभी रिक्त हैं और क्या इस तरह की पीओपी प्रणाली युवाओं के लिए रोजगार के अवसर को प्रभावित करेगी। प्रधान ने कहा, ‘‘हमने पिछले 4-5 वर्षों में रिक्त पदों पर 40,000 से अधिक लोगों को नियुक्त किया है।'' उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय या कॉलेजों के किसी भी मौजूदा पद पर कब्जा नहीं करेगा। राकांपा सांसद फौजिया खान जानना चाहती थीं कि कितनी महिला प्रोफेसरों को पीओपी के रूप में नियुक्त किया जाता है। इस पर प्रधान ने कहा कि यह विशेष संस्थानों की आवश्यकता, व्यक्ति की योग्यता और क्षमता पर निर्भर करता है। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यक्रमों में सरकारी कर्मचारियों के हिस्सा लेने पर लगी रोक को हटाने संबंधी कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) का आदेश अपनी वेबसाइट पर डाला है। डीओपीटी का नौ जुलाई का कार्यालय परिपत्र (ज्ञापन) मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया गया है। उच्च न्यायालय ने कहा था कि केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय को इसे अनिवार्य रूप से अपनी आधिकारिक वेबसाइट के होम पेज पर डालना चाहिए। गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर डाले गए डीओपीटी के आदेश में कहा गया है, ‘‘...30 नवंबर 1966, 25 जुलाई 1970 और 28 अक्टूबर 1980 के विवादित कार्यालय ज्ञापनों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का उल्लेख हटाने का निर्णय लिया गया है।'' मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने कहा कि केंद्र को यह अहसास करने में करीब पांच दशक लग गए कि आरएसएस जैसे ‘अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त' संगठन को उन संगठनों की सूची में डाल दिया गया था जिनमें शामिल होने पर सरकारी कर्मचारियों पर रोक लगी हुई है। उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार के सेवानिवृत कर्मी पुरुषोत्तम गुप्ता की रिट याचिका का 25 जुलाई को निस्तारण करते हुए यह टिप्पणी की थी।
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नयी दिल्ली, दिल्ली की एक अदालत ने एक कुत्ते पर ज्वलनशील पदार्थ फेंकने के अपराध में 70 वर्षीय व्यक्ति को एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। इसके कारण कुत्ते की एक आंख खराब हो गई थी। अदालत ने कहा कि ‘‘एक मूक प्राणी के लिए जीवन उतना ही प्रिय है जितना किसी मनुष्य के लिए। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ऋचा शर्मा ने कहा कि यह ‘‘गंभीर और संगीन'' अपराध रोंगटे खड़े कर देने वाला है तथा इसने अदालत की अंतरात्मा को झकझोर दिया है और किसी भी तरह की नरमी बरतने से समाज में प्रतिकूल संदेश जाएगा। शर्मा महेंद्र सिंह के खिलाफ मामले की सुनवाई कर रही थीं।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 7 फरवरी 2020 को दिल्ली के पहाड़गंज इलाके में जब शिकायतकर्ता के कुत्ते ने सिंह पर भौंकना शुरू किया तो उसने अपने घर के अंदर से एक ज्वलनशील तरल पदार्थ लाकर कुत्ते के उपर फेंक दिया। शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता रिदम शील श्रीवास्तव पेश हुए। अदालत ने कहा, "एक मूक प्राणी के लिए जीवन उतना ही प्रिय है जितना कि किसी भी इंसान के लिए। एक इंसान से यह उम्मीद की जाती है कि वह यह याद रखे कि जानवरों के प्रति उसका व्यवहार मानवता को दर्शाता है। जानवरों के प्रति दयालु होना हमारी जिम्मेदारी है।" न्यायालय ने 27 जुलाई को अपने फैसले में कहा, ‘‘दोषी ने ऐसा अपराध किया है जो न केवल इस न्यायालय की अंतरात्मा को झकझोरता है बल्कि रोंगटे खड़े कर देने वाला भी है। कुत्ते पर कोई ज्वलनशील पदार्थ फेंकना गंभीर और संगीन कृत्य है जिसके कारण उसकी एक आंख चली गई तथा ऐसे व्यक्ति को कम सजा देकर छोड़ देना और दोषी के प्रति कोई नरमी बरतना समाज में एक प्रतिकूल संदेश देगा।''
- लखनऊ. छल-कपट या या जबर्दस्ती धर्मांतरण के मामलों में उम्रकैद के प्रावधान वाला उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध (संशोधन) अधिनियम, 2024 मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को प्रदेश विधानसभा से पारित हो गया। पहले किसी महिला को धोखा देकर और उसका धर्मांतरण कर उससे शादी करने के दोषी पाये जाने वाले के लिए अधिकतम 10 साल तक की सजा एवं 50,000 रुपये के जुर्माने का प्रावधान था। विधानसभा में मंगलवार को संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने सदस्यों से विधेयक को पारित करने का अनुरोध किया। विधेयक के पक्ष में सदस्यों की संख्या अधिक होने पर अध्यक्ष ने इसे पारित किये जाने की घोषणा की। इसके पहले कांग्रेस विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा 'मोना' और सपा के कई सदस्यों ने इस विधेयक को प्रवर समिति को सौंपने का प्रस्ताव दिया, लेकिन प्रवर समिति को सौंपने के विरोध में सदस्यों की संख्या अधिक होने की वजह से यह प्रस्ताव गिर गया। इस संशोधित अधिनियम में छल-कपट या जबर्दस्ती कराये गये धर्मांतरण के मामलों में कानून को पहले से सख्त बनाते हुए अधिकतम आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है। संशोधित विधेयक में किसी महिला को धोखे से जाल में फंसाकर उसका धर्मांतरण करने, उससे अवैध तरीके से विवाह करने और उसका उत्पीड़न करने के दोषियों को अधिकतम आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है। पहले इसमें अधिकतम 10 साल की कैद का प्रावधान था। खन्ना ने सदन में सोमवार को उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध (संशोधन) अधिनियम, 2024 पेश किया था। इसमें प्रस्ताव किया गया है कि कोई व्यक्ति धर्मांतरण कराने के इरादे से किसी को अगर धमकी देता है, उस पर हमला करता है, उससे विवाह करता है या करने का वादा करता है या इसके लिए साजिश रचता है, महिला, नाबालिग या किसी की तस्करी करता है तो उसके अपराध को सबसे गंभीर श्रेणी में रखा जाएगा। संशोधित अधिनियम में ऐसे मामलों में 20 वर्ष कारावास या आजीवन कारावास का प्रावधान किया गया है। जब यह विधेयक के रूप में पहली बार पारित करने के बाद कानून बना तब इसके तहत अधिकतम 10 साल की सजा और 50 हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया गया था। अब इसमें जुर्माने की राशि पीड़ित के चिकित्सकीय खर्च को पूरा करने और उसके पुनर्वास व्यय पर आधारित होगी। खन्ना ने संशोधित विधेयक के प्रारूप पर चर्चा करते हुए कहा कि न्यायालय धर्म संपरिवर्तन के पीड़ित के लिए मुआवज़ा भी स्वीकृत करेगा, जो अधिकतम पांच लाख रुपये तक हो सकता है और यह जुर्माना के अतिरिक्त होगा और इसका भुगतान अभियुक्त करेगा। उन्होंने कहा कि इसमें यह भी व्यवस्था दी गयी है कि यदि कोई विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन के संबंध में किन्हीं विदेशी अथवा अविधिक संस्थाओं से धन प्राप्त करेगा, उसे सात वर्ष से 14 वर्ष तक की कठोर कैद हो सकती है। इसमें दस लाख रुपये जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है। संशोधित प्रावधान के तहत यह व्यवस्था दी गयी है कि धर्मांतरण मामलों में अब कोई भी व्यक्ति प्राथमिकी दर्ज करा सकेगा। इससे पहले मामले की सूचना या शिकायत देने के लिए पीड़ित व्यक्ति, उसके माता-पिता, भाई-बहन का होना जरूरी था, लेकिन अब दायरा बढ़ा दिया गया है। अब कोई भी इसकी सूचना लिखित तौर पर पुलिस को दे सकता है। संशोधित मसौदे में यह प्रस्ताव किया गया है कि ऐसे मामलों की सुनवाई सत्र अदालत से नीचे नहीं होगी और लोक अभियोजक को मौका दिए बिना जमानत याचिका पर विचार नहीं किया जाएगा। प्रस्तावित मसौदे के तहत इसमें सभी अपराध गैर-जमानती बना दिए गए हैं। इसके पहले कांग्रेस विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा ‘मोना' ने विधेयक को प्रवर समिति को सौंपे जाने पर जोर देते हुए कहा ,‘‘जोर जबर्दस्ती से धर्म परिवर्तन कराने का साथ न हमारी संस्कृति देती है, न यहां बैठे किसी सदस्य की मंशा है।'' उन्होंने कहा, ‘‘अगर किसी का जबरन धर्म परिवर्तन कराया जाता है, तो सर्वप्रथम यह दंडनीय अपराध होना चाहिए, कड़े कानून बनने चाहिए, परंतु उसके साथ-साथ इस मामले पर बहुत संवेदनशील होना पड़ेगा।'' मोना ने कहा, ‘‘कुछ धर्म परिवर्तन स्वैच्छिक होते हैं और संविधान व्यक्ति को जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार देता है।'' उन्होंने कहा कि सजा की अवधि बढ़ाये जाने के कारण आरोपी गिरफ्तार किए जाएंगे और उन्हें जमानत नहीं मिल पाएगी और मामला सत्र न्यायालय में जाएगा। उन्होंने ऐसे मामलों पर विचार करने के लिए एक आयोग या ‘जूरी' बनाने का सुझाव दिया, जिसमें सभी उम्र और वर्गों के सदस्य हों। कांग्रेस नेता ने कहा कि यह राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक मुद्दा है। नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने आशंका जताई कि इससे फर्जी मामले बढ़ेंगे और एक धारा जोड़ने का सुझाव दिया, जिसमें अगर आरोपी व्यक्ति को रिहा कर दिया जाता है, तो (झूठी) प्राथमिकी दर्ज करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में पुलिसकर्मियों के लिए कम से कम एक साल की सजा का प्रावधान होना चाहिए, जिससे ऐसे मामलों में झूठे मुकदमे दर्ज करने से बचा जा सके। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने नवंबर 2020 में जबरन धर्मांतरण रोकने के लिए अध्यादेश जारी किया था। बाद में उत्तर प्रदेश विधानमंडल के दोनों सदनों से विधेयक पारित होने के बाद उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम-2021 को कानूनी मान्यता मिली थी।
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बेलगावी . कर्नाटक के बेलगावी जिले के निपानी तालुक के यमगरनी गांव में हाल में एक विचित्र मामला सामने आया। स्थानीय लोगों ने काले कुत्ते को फूल-मालाएं पहनाकर घुमाया और उसके सम्मान में एक दावत का आयोजन किया। गांव वालों के लिए खोए हुए कुत्ते का वापस आना एक चमत्कार था। प्रेमपूर्वक ‘महाराज' नाम से पुकारा जाने वाला कुत्ता दक्षिण महाराष्ट्र के तीर्थनगर पंढरपुर में भीड़ में खो गया था, लेकिन अपने दम पर लगभग 250 किलोमीटर की यात्रा करके उत्तरी कर्नाटक के बेलगावी के गांव में वापस आ गया। जून के अंतिम सप्ताह में, जब ‘महाराज' के मालिक कमलेश कुंभर पंढरपुर में वार्षिक ‘वारी पदयात्रा' पर निकले थे, तब वह भी उनके साथ चल दिया था। कुंभर ने कहा कि वह हर साल आषाढ़ एकादशी और कार्तिकी एकादशी के मौके पर पंढरपुर जाते हैं।
उन्होंने कहा कि इस बार भी कुत्ता उनके साथ गया था।कुंभर ने कहा, “‘महाराज' (कुत्ता) को हमेशा भजन सुनना पसंद है। एक बार वह मेरे साथ महाबलेश्वर के निकट ज्योतिबा मंदिर की पदयात्रा पर गया।” लगभग 250 किलोमीटर तक वह कुत्ता अपने मालिक और उनके दोस्तों के साथ गया।कुंभर ने कहा कि विठोबा मंदिर के दर्शन करने के बाद उन्होंने पाया कि कुत्ता लापता हो गया है।उन्होंने कहा कि जब वह कुत्ते को ढूंढने लगे, तो वहां लोगों ने बताया कि वह किसी दूसरे समूह के साथ चला गया है। कुंभर ने कहा, “मैंने फिर भी उसे हर जगह खोजा, लेकिन वह मुझे नहीं मिला। तो, मैंने सोचा कि शायद लोग सही कह रहे थे कि वह किसी और के साथ चला गया। मैं 14 जुलाई को अपने गृह नगर लौट आया।” कुंभर ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि अगले ही दिन “ ‘महाराज' मेरे घर के सामने खड़ा पूंछ हिला रहा था, जैसे कि कुछ हुआ ही न हो। वह अच्छी तरह से खाया-पिया और बिल्कुल ठीक लग रहा था।” उन्होंने कहा, “घर से लगभग 250 किलोमीटर दूर खोए कुत्ते का घर वापस लौटना चमत्कार ही है। हमारा मानना है कि भगवान पांडुरंग ने उसका मार्गदर्शन किया।” - मुंबई ।मुंबई में अपने घर में भाई-बहनों के साथ खेलते समय रस्सी की सीढ़ी में उलझने से सात साल की एक बच्ची की मौत हो गई। पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि यह घटना शिवाजी नगर इलाके में एक घर की है। उन्होंने बताया कि दोपहर को माता-पिता के किसी कार्य से घर से बाहर जाने पर आकृति सिंह अपने भाई-बहनों और एक दोस्त के साथ लुका-छिपी का खेल खेल रही थी। उन्होंने बताया कि इसी दौरान रस्सी की सीढ़ी उसके गले में उलझ गई। अधिकारी ने बताया कि उसकी बड़ी बहन ने मदद के लिए आवाज लगाई, जिसके बाद पड़ोसियों ने बच्ची को एक निजी अस्पताल पहुंचाया, लेकिन उपचार शुरू होने से पहले ही उसकी मौत हो गई। उन्होंने बताया कि आकस्मिक मौत का मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच जारी है। file photo
- जयपुर। राजस्थान के राजसमंद जिले में एक निर्माणाधीन इमारत की छत गिरने से चार मजदूरों की मौत हो गई और छह अन्य घायल हो गए। राजसमंद के जिला अधिकारी डॉ. भंवर लाल ने बताया, ''खमनोर इलाके में मेघवाल समुदाय के एक सामुदायिक भवन का निर्माण किया जा रहा था। देर रात 13 मजदूर वहां काम कर रहे थे कि इसी दौरान छत गिर गई।'' लाल ने बताया कि 10 मजदूर छत के मलबे के नीचे दब गए, जिनमें से दो की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। उन्होंने बताया कि पांच घायलों को राजसमंद जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि एक अन्य को गंभीर हालत के कारण उदयपुर जिला अस्पताल ले जाया गया है। लाल के अनुसार, मृतकों की पहचान कालू लाल, शांति लाल, भगवती लाल और भंवर लाल के रूप में की गई है।
- जालना । महाराष्ट्र के जालना जिले में एक तेज रफ्तार ट्रक ने राहगीरों को टक्कर मार दी और इस घटना में छह साल की एक बच्ची सहित कम से कम तीन व्यक्तियों की मौत हो गई, जबकि एक बच्चा घायल है। पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी। यह घटना जालना शहर से 65 किलोमीटर दूर मंथा कस्बे में हुई। मृतकों की पहचान सीमा चव्हाण (34), रामचंद्र राठौड़ (60) और मारिया पठान (6) के रूप में हुई है।पुलिस ने बताया कि चालक द्वारा वाहन पर नियंत्रण खो देने के कारण ट्रक ने राहगीरों को टक्कर मार दी। पुलिस ने बताया कि चव्हाण और पठान की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि राठौड़ ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। उन्होंने बताया कि दुर्घटना में जान गंवाने वाली सीमा की चार वर्षीय बेटी रसिका चव्हाण को गंभीर चोटें आईं हैं। पुलिस ने ट्रक चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है।
- रतलाम/सिवनी (मध्य प्रदेश)। मध्य प्रदेश के रतलाम और सिवनी जिलों में मोटरसाइकिल दुर्घटनाओं में तीन लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी। सहायक उपनिरीक्षक (एएसपी) सुनील सिंह राघव ने बताया कि रतलाम में औद्योगिक क्षेत्र पुलिस थाने के अंतर्गत बरबड़ रोड पर एक मोटरसाइकिल के सड़क के डिवाइडर से टकरा जाने से तीन लोग घायल हो गए। राघव के अनुसार, तीनों घायलों को अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने दो को मृत घोषित कर दिया, जबकि एक अन्य का इलाज जारी है। उन्होंने बताया कि मृतकों की पहचान दल्ला (30) और विशाल (24) के रूप में की गई है। धुमा थाना प्रभारी सतीश उइके ने बताया कि सिवनी में जबलपुर-लखनादौन राजमार्ग पर धूमा गांव के पास तेज रफ्तार से आ रही एक कार ने मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी। उन्होंने बताया कि इस हादसे में 22 वर्षीय एक महिला की मौत हो गई और दो अन्य लोग घायल हो गए। उइके के मुताबिक, हादसे के शिकार लोग कॉलेज से घर लौट रहे छात्र थे। उन्होंने बताया कि मृतक की पहचान प्रथमा कुसरे (22) के रूप में हुई है और घायलों का अस्पताल में इलाज किया जा रहा है।
- नयी दिल्ली। सरकार ने मंगलवार को राज्यसभा में कहा कि आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन के लिए उसे दो अभ्यावेदन प्राप्त हुए हैं, लेकिन वर्तमान में आयोग के गठन का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने एक सवाल के लिखित जवाब में राज्यसभा को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा, " आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन के लिए जून 2024 में दो अभ्यावेदन प्राप्त हुए हैं। वर्तमान में सरकार के पास ऐसा कोई प्रस्ताव (आयोग के गठन का) विचाराधीन नहीं है।" आठवें वेतन आयोग को एक जनवरी, 2026 को लागू किया जाना है। आमतौर पर, सरकारी कर्मचारियों के वेतन में संशोधन करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा हर 10 साल में वेतन आयोग का गठन किया जाता है। सातवें वेतन आयोग का गठन फरवरी 2014 में किया गया था। इसकी सिफारिशें एक जनवरी 2016 से लागू की गईं।










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