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नयी दिल्ली. संसद ने सोमवार को ‘अधिवक्ता (संशोधन) विधेयक, 2023' को मंजूरी प्रदान कर दी। इस विधेयक का मकसद अदालत परिसरों में दलालों की भूमिका को खत्म करना है। लोकसभा ने विधेयक पर विस्तृत चर्चा और विधि मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के जवाब के बाद ध्वनिमत से स्वीकृति दी। राज्यसभा में यह विधेयक पिछले मानसून सत्र में पारित किया गया था। लोकसभा में विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए मेघवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने यह तय किया है कि उन औपनिवेशिक कानूनों को निरस्त किया जाएगा जो अनुपयोगी हो चुके हैं। उन्होंने कहा, ‘‘इस संशोधन को लाने का उद्देश्य पूरी तरह पवित्र है।''
मंत्री ने कहा कि मौजूदा सरकार में 1486 औपनिवेशिक कानून समाप्त कर दिए गए, जबकि संप्रग सरकार के 10 साल के कार्यकाल में एक भी ऐसा कानून खत्म नहीं किया गया। कांग्रेस सांसद कार्ति चिदम्बरम ने विधेयक पर लोकसभा में चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि छोटी अदालतों में छोटे-मोटे दलालों के खिलाफ पहल करने के साथ-साथ केंद्र को ‘बड़ी मछलियों' को पकड़ने के लिए प्रावधान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस विधेयक के समर्थन में है, लेकिन जटिल विधिक प्रक्रिया और सामाजिक असमानता के कारण दलाल पैदा होते हैं। भाजपा सांसद जगदम्बिका पाल ने विधेयक पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि सरकार अपना औचित्य खो चुके ब्रिटिशकालीन कानूनों को निरस्त करने के प्रति वचनबद्ध है। भाजपा के ही पी. पी. चौधरी ने कहा कि न्यायपालिका में दलालों की मौजूदगी का नुकसान समाज के अंतिम छोर के लोग उठाते हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की सदस्य सुप्रिया सुले ने विधेयक वापस लेने, स्थायी समिति को समीक्षा के लिए भेजने तथा एक विस्तारित विधेयक पेश करने की सरकार से मांग की। विधेयक पर चर्चा में कई अन्य सदस्यों ने भी भाग लिया।
विधेयक पर चर्चा और मंत्री के जवाब के बाद सदन ने इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया।
सरकार ने भारतीय विधिज्ञ परिषद (बीसीआई) के परामर्श से लीगल प्रैक्टिशनर्स एक्ट, 1879 को निरस्त करने और अधिवक्ता अधिनियम, 1961 में संशोधन करने का निर्णय लिया है। विधेयक का उद्देश्य ‘अनावश्यक अधिनियमों' की संख्या कम करने के लिए अधिवक्ता अधिनियम, 1961 में ‘लीगल प्रैक्टिशनर्स एक्ट, 1879' की धारा 36 के प्रावधानों को शामिल करना है। यह धारा अदालतों में दलालों की सूची तैयार करने और प्रकाशित करने की शक्ति प्रदान करती है। -
अमरावती. आंध्र प्रदेश के पश्चिम-मध्य और तटीय दक्षिण क्षेत्र में मंडरा रहा चक्रवात ‘मिगजॉम' गंभीर चक्रवाती तूफान में तब्दील हो गया है, जिससे राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश हो रही है। एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। अमरावती मौसम विज्ञान केंद्र के एक अधिकारी ने बयान में कहा कि गंभीर चक्रवाती तूफान के धीरे-धीरे तेज होने और उत्तर की ओर लगभग समानांतर और दक्षिण आंध्र प्रदेश तट के करीब बढ़ने तथा नेल्लोर और मछलीपट्टनम के बीच, बापटला के करीब से गुजरने की संभावना है। बयान में कहा गया कि सोमवार सुबह साढ़े आठ बजे तक मौसम प्रणाली आठ किमी प्रति घंटे की गति से उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ गई और दक्षिण आंध्र प्रदेश और उससे सटे उत्तरी तमिलनाडु तटों के क्षेत्र में केंद्रित हो गई। अधिकारी ने कहा कि यह चेन्नई से 90 किमी पूर्व से उत्तर-पूर्व, नेल्लोर से 17 किमी दक्षिण-पूर्व, पुडुचेरी से 200 किमी उत्तर-पूर्व, बापटला से 300 किमी दक्षिण से दक्षिण-पूर्व और मछलीपट्टनम से 320 किमी दक्षिण में केंद्रित है। मौसम प्रणाली के कारण 100-110 किमी प्रति घंटे की रफ्तार तक हवाएं चलने का अनुमान है। मौसम विभाग ने सोमवार से बुधवार तक अगले तीन दिन में आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में आंधी के साथ भारी बारिश का पूर्वानुमान दोहराया है। चक्रवाती तूफान ‘मिगजॉम' के मद्देनजर राज्य के कई स्थानों पर भारी वर्षा हो रही है। लगातार बारिश के कारण, तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) ने अस्थायी रूप से भक्तों को श्री कपिलतीर्थम झरने पर पवित्र स्नान करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया है।
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आइजोल. जोरम पीपुल्स मूवमेंट (जेडपीएम) ने मणिपुर विधानसभा की 40 में से 27 सीट जीतकर सोमवार को राज्य में स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया। निर्वाचन आयोग की तरफ से यह जानकारी दी गई। जीत हासिल करने वाले जेडपीएम के प्रमुख नेताओं में पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार लालदुहोमा शामिल हैं। उन्होंने सेरछिप सीट पर मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) के जे. माल्सावमजुआला वानचावंग को 2,982 मतों से हराया। राज्य में मिजो नेशनल फ्रंट को नौ सीटों पर जीत मिली है जबकि एक सीट पर उसका उम्मीदवार आगे है। उसने जिन सीटों पर जीत हासिल की उनमें हाच्चेक, मामिक, तुइरियाल, सेरलुई, तुइवावल, ईस्ट तुइपुई, वेस्ट तुइपुई, थोरंग और तुईछांग शामिल हैं। भाजपा ने पलक और सैहा सीट अपने नाम कर ली है। कांग्रेस ने लांग्तलाई वेस्ट सीट पर जीत हासिल की।
निर्वाचन आयोग के अनुसार, चुनाव में जिन नेताओं को हार का सामना करना पड़ा उनमें उप मुख्यमंत्री और एमएनएफ उम्मीदवार तावंलुइया शामिल हैं जो तुइचांग में जेडपीएम उम्मीदवार से हार गए। इसके अलावा स्वास्थ्य मंत्री और एमएनएफ उम्मीदवार आर लालथंगलियाना दक्षिण तुईपुई में जेडपीएम के जेजे लालपेखलुआ से हार गए और ग्रामीण विकास मंत्री लालरुआत्किमा को आइजोल वेस्ट-द्वितीय सीट पर जेडपीएम के उम्मीदवार लालनघिंगलोवा हमार से हार झेलनी पड़ी। आयोग ने बताया कि मुख्यमंत्री जोरमथंगा आइजोल ईस्ट-प्रथम सीट पर जेडपीएम उम्मीदवार लालथनसांगा से 2,101 मतों से हार गए। जेडपीएम ने जिन सीट पर जीत हासिल की, उनमें कोलासिब, चालफिल, तवी, आइजोल नॉर्थ-प्रथम, आइजोल नॉर्थ-द्वितीय, आइजोल नॉर्थ-तृतीय, आइजोल ईस्ट-प्रथम, आइजोल ईस्ट-द्वितीय, आइजोल वेस्ट-प्रथम, आइजोल वेस्ट-द्वितीय, आइजोल वेस्ट-तृतीय, आइजोल साउथ-प्रथम, आइजोल साउथ-द्वितीय, आइजोल साउथ-तृतीय, लेंगतेंग, तुइचांग, चम्फाई नॉर्थ, चम्फाई साउथ, तुइकुम, ह्रांगतुर्जो, साउथ तुइपुई, लुंगलेई नॉर्थ, लुंगलेई ईस्ट, लुंगलेई वेस्ट, लुंगलेई साउथ, लांग्तलाई ईस्ट और सेरछिप शामिल हैं ।
मिजोरम विधानसभा के लिए मतदान सात नवंबर को हुआ था और राज्य के 8.57 लाख मतदाताओं में से 80 प्रतिशत से अधिक ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। चुनाव में 18 महिलाओं सहित कुल 174 उम्मीदवार मैदान में थे। मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ), जोरम पीपुल्स मूवमेंट (जेडपीएम) और कांग्रेस ने 40-40 सीटों पर चुनाव लड़ा, जबकि भाजपा ने 23 सीटों पर उम्मीदवार उतारे। मिजोरम में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ने वाली आम आदमी पार्टी (आप) ने चार सीटों पर चुनाव लड़ा। इसके अलावा 17 निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में थे। -
नई दिल्ली। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं के खिलाफ अपराध के रजिस्टर मामलों की संख्या 2021 में 428,278 की तुलना में 2022 में 4 प्रतिशत बढ़कर 445,256 हो गई। 20 लाख से ज्यादा आबादी वाले मेट्रो शहरों में, 2022 में ऐसे अपराधों की वृद्धि 12.3 प्रतिशत बढ़कर 48,755 हो गई।
राज्यों के बात करें, तो उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ सबसे ज्यादा अपराध दर्ज किए गए। पिछले साल यूपी में ऐसे मामलों की संख्या 56,083 थी। “भारत में अपराध 2022” रिपोर्ट के अनुसार, 2021 में, यूपी में 49,385 ऐसे मामले दर्ज किए गए थे। 2022 में, यूपी के बाद महाराष्ट्र (45,331 मामले) और राजस्थान (45,058 मामले) थे। आंकड़ों से पता चला कि भारत के ज्यादातर राज्यों में महिलाओं के खिलाफ मामलों की संख्या में वृद्धि हुई है।केंद्र शासित प्रदेशों में, दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ सबसे ज्यादा अपराध दर्ज किए गए। भले ही यह 2021 में दर्ज मामलों से कम था, लेकिन यह संख्या 2020 में दिल्ली में दर्ज 10,093 मामलों से काफी ज्यादा थी।महानगरीय शहरों में, महिलाओं के खिलाफ सबसे ज्यादा अपराध दिल्ली शहर में 14,158 दर्ज किए गए। इसके बाद मुंबई में 6,176 मामले और बेंगलुरु में 3,924 मामले थे।दिलचस्प बात यह है कि महिलाओं के खिलाफ कुल अपराध की दर – प्रति 100,000 महिलाओं पर ऐसे मामले – जयपुर में सभी मेट्रो शहरों में सबसे ज्यादा थी। रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 में शहर में प्रति 100,000 महिलाओं पर महिलाओं के खिलाफ अपराध के 239.3 मामले दर्ज किए गए। इसके बाद दिल्ली में 186.9 और इंदौर में 174.3 मामले दर्ज किए गए।राज्यों में, महिलाओं के खिलाफ अपराध की सबसे ज्यादा दर हरियाणा (118.7) में दर्ज की गई, इसके बाद तेलंगाना (117) और राजस्थान (115.1) का स्थान है।कुल मिलाकर, 2022 में अपराध दर 66.4 थी, जबकि 2021 में यह 64.5 थी।भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत महिलाओं के खिलाफ अपराध के ज्यादातर मामले “पति या उसके घरवालों द्वारा क्रूरता” (31.4 प्रतिशत) कैटेगरी के तहत दर्ज किए गए थे। इसके बाद “महिलाओं की किडनैपिंग” (19.2 प्रतिशत), “महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से हमला” (18.7 प्रतिशत), और “बलात्कार” (7.1 प्रतिशत) का नंबर आया। -
नई दिल्ली। चक्रवाती तूफान ‘मिगजॉम’ के प्रभाव से चेन्नई और इसके आसपास के जिलों में सोमवार को भी भारी बारिश जारी रही। इस तूफान के पांच दिसंबर को आंध्र प्रदेश के समुद्र तट से टकराने की संभावना है। लगातार भारी बारिश के कारण शहर के निचले और रिहायशी इलाकों में पानी भर गया। नगर निगम के कर्मचारी शहर में जगह-जगह भरे पानी को निकालने की कोशिश में जुटे हैं।
चक्रवाती तूफान ‘मिगजॉम’ के प्रभाव के कारण चेन्नई और आसपास के चेंगलपेट, कांचीपुरम और तिरुवल्लूर जिलों में रविवार देर रात से भारी बारिश जारी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के मुताबिक चक्रवाती तूफान तीन दिसंबर को रात साढ़े ग्यारह बजे पुडुचेरी से करीब 210 किलोमीटर पूर्व-उत्तरपूर्व, चेन्नई से 150 किलोमीटर पूर्व-दक्षिणपूर्व बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिम में केंद्रित है।इसके पांच दिसंबर को पूर्वाह्न उत्तर-उत्तरपश्चिम की ओर मजबूत होकर आंध्र प्रदेश के नेल्लोर और मछलीपट्टनम के समुद्र तट से टकराने की संभावना है। चक्रवात की वजह से रेल एवं हवाई सेवाओं को रद्द किया गया है या उनमें देरी हुई है। - आइजोल। जोरम पीपल्स मूवमेंट (जेडपीएम) ने मणिपुर विधानसभा की 40 में से 24 सीट जीतकर सोमवार को राज्य में बहुमत हासिल कर लिया। निर्वाचन आयोग ने यह जानकारी दी।आयोग ने बताया कि मिजोरम विधानसभा चुनाव के लिए सोमवार को जारी मतगणना के बीच जेडपीएम 24 सीट जीतने के अलावा 3 अन्य सीट पर आगे है। जीत हासिल करने वाले जेडपीएम के प्रमुख नेताओं में पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार लालदुहोमा शामिल हैं। उन्होंने सेरछिप सीट पर मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) के जे. माल्सावमजुआला वानचावंग को 2,982 वोट से हराया।जेडपीएम ने जिन सीट पर जीत हासिल की, उनमें कोलासिब, चालफिल, तवी, आइजोल नॉर्थ-द्वितीय, आइजोल वेस्ट-प्रथम, आइजोल वेस्ट-द्वितीय, आइजोल वेस्ट-तृतीय, आइजोल साउथ-प्रथम, आइजोल साउथ-तृतीय, लेंगतेंग, तुइचांग, चम्फाई नॉर्थ, तुइकुम, ह्रांगतुर्जो, साउथ तुइपुई, लुंगलेई वेस्ट, लुंगलेई साउथ और लांग्टलाई ईस्ट शामिल हैं।सत्तारूढ़ एमएनएफ ने सात सीट जीत ली हैं और वह तीन सीट पर आगे है। भाजपा ने पलक और सैहा सीट अपने नाम कर ली है। कांग्रेस एक सीट पर बढ़त बनाए हुए है।
- नयी दिल्ली । अधिक वजन होने से ‘एसएआरएस-सीओवी-2’ संक्रमण के प्रति शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया बाधित हो सकती है, लेकिन कोविड-19 टीकाकरण द्वारा प्रदान की जाने वाली सुरक्षा पर इसका असर नहीं होता। एक अध्ययन में यह दावा किया गया है। ‘क्लीनिकल एंड ट्रांसलेशनल इम्यूनोलॉजी’ जर्नल में प्रकाशित यह अध्ययन इस बात पर आधारित है कि कैसे कोविड-19 अधिक वजन वाले लोगों को प्रभावित करता है।ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड विश्वविद्यालय में पीएचडी उम्मीदवार मार्कस टोंग ने कहा, “हमने पहले यह दिखाया है कि ज्यादा वजन होना (केवल मोटा होना नही), ‘एसएआरएस-सीओवी-2’ के खतरे को बढ़ाता है।”टोंग ने कहा, ‘‘लेकिन इससे पता चलता है कि ज्यादा वजन होने से संक्रमण के प्रति कमजोर प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया उत्पन्न होती है, लेकिन टीकाकरण के प्रति यह बेअसर रहती है।”शोधकर्ताओं की एक टीम ने उन लोगों के रक्त के नमूने एकत्र किए जो कोविड-19 से उबर चुके थे और अध्ययन अवधि के दौरान संक्रमण के लगभग 13 महीने बाद तक दोबारा संक्रमित नहीं हुए थे।टोंग ने कहा, ‘‘संक्रमण के तीन महीने बाद, एक उच्च बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) कम एंटीबॉडी स्तर से जुड़ा था’’उन्होंने कहा, “संक्रमण के 13 महीने बाद, एक उच्च बीएमआई, कम एंटीबॉडी गतिविधि और प्रासंगिक बी कोशिकाओं के प्रतिशत में कमी देखी गई थी। यह कोशिका कोविड-19 से लड़ने वाले एंटीबॉडी बनाने में मदद करती है।” क्वीन्सलैंड विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर किर्रस्टी शॉर्ट ने कहा कि परिणामों से स्वास्थ्य नीति में मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा ‘‘अगर संक्रमण से अधिक वजन वाले लोगों में गंभीर बीमारी और कमजोर प्रतिक्रिया का खतरा बढ़ता है तो इस समूह को पुन: संक्रमित होने का खतरा भी अधिक है। यह देखते हुए इस समूह के लिए टीकाकरण आवश्यक हो जाता है।’’
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नई दिल्ली। मिजोरम चुनाव में बहुमत के आंकड़ों के पास पहुंची ज़ोरम पीपुल्स मूवमेंट (ZPM) ने जश्न मनाना भी शुरू कर दिया है। और इस बीच सबकी निगाहें हैं 74 वर्षीय पूर्व आईपीएस (IPS) अफसर लालदुहोमा पर, जो कि ज़ोरम पीपुल्स मूवमेंट की तरफ से मुख्यमंत्री के उम्मीदवार हैं।
इस चुनाव में मिज़ोरम में सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी जेडपीएम के अध्यक्ष लालडुहोमा मिज़ोरम के एक पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं। 1977 में आईपीएस बनने के बाद उन्होंने गोवा में एक स्क्वाड लीडर के तौर पर काम किया। तैनाती के दौरान उन्होंने तस्करों पर बड़ी कार्रवाई की। पुलिस अधिकारी के तौर पर उनकी उपलब्धियां सुर्खियां में रहती थीं। इसके बाद एक उन्हें एक बड़ी जिम्मेदारी मिली, 1982 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सुरक्षा प्रभारी पद लालडुहोमा को नियुक्त किया था। पुलिस उपायुक्त के रूप में विशेष पदोन्नति दी गई थी। गौरलतब है कि राजीव गांधी की अध्यक्षता में 1982 एशियाई खेलों की आयोजन समिति के सचिव भी थे।लालडुहोमा ने साल 1984 में पुलिस सेवा से इस्तीफा दिया, इसके बाद वे कांग्रेस में शामिल हो गए। इसी साल यानी 1984 में दिसंबर में लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज कर लालडुहोमा संसद पहुंचे थे। 1988 में कांग्रेस की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद उन्हें दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित किया गया था, जिसके कारण उन्हें लोकसभा की सदस्यता गंवानी पड़ी थी।लालदुहोमा के प्रयास से जेडपीएम(ज़ोरम पीपुल्स मूवमेंट) अस्तित्व में आया। पिछले विधानसभा चुनाव में लालडुहोमा ने तत्कालीन मुख्यमंत्री लालथनहलवा को करारी शिकस्त दी, जिसके बाद से वे राजनीतिक गलियारों में सुर्खियां बन गए। उस वक्त लालडुहोमा की गठित पार्टी को चुनाव आयोग से मान्यता नहीं मिल सकी, जिसके कारण उन्हें निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनावी मैदान में उतरना पड़ा था।कुछ समय बाद, जेडपीएम को चुनाव आयोग से राजनीतिक दल के तौर पर मान्यता मिली। इस दौरान पार्टी के अध्यक्ष के तौर पर लालडुहोमा को चुना गया। इस आधार पर उन्हें अपनी विधानसभा सदस्यता को गंवाना पड़ा।बता दें 27 नवंबर 2020 को मिज़ोरम राज्य में विधानसभा की सदस्यता गंवाने वाले लालडुहोमा पहले विधायक बन गए थे। हालांकि राजनीतिक विशेषज्ञ इस घटना को लालडुहोमा के लिए संजीवनी बताते हैं। 2021 में सेरछिप सीट पर हुए उपचुनाव में उन्होंने इसे मुद्दा बना दिया। इस उपचुनाव में उन्हें फिर से विधानसभा पहुंचा दिया था। - लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अध्यक्ष मायावती ने सोमवार को कहा कि मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम लोगों के गले से नीचे उतर पाना बहुत मुश्किल हैं और ऐसे ‘रहस्यात्मक’ मामले पर गंभीर चिंतन और उसके ‘समाधान’ की जरूरत है।मायावती ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर डाले गए सिलसिलेवार संदेशों में विस्तार से अपनी बात कही और चुनाव परिणाम के संदर्भ में जमीनी रिपोर्ट लेकर आगामी लोकसभा चुनाव की नए सिरे से तैयारी के लिए आगामी 10 दिसंबर को लखनऊ में पार्टी की अखिल भारतीय बैठक बुलाई है।उन्होंने कहा, ‘देश के चार राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के परिणाम एक पार्टी के पक्ष में एकतरफा होने से लोगों का अचंभित और चिंतित होना स्वाभाविक है। चुनाव के पूरे माहौल को देखते हुए ऐसा विचित्र परिणाम लोगों के गले के नीचे उतर पाना बहुत मुश्किल है।’बसपा अध्यक्ष ने एक अन्य पोस्ट में कहा, ‘पूरे चुनाव के दौरान माहौल एकदम अलग, कांटे के संघर्ष वाला और दिलचस्प था मगर चुनाव परिणाम उससे बिल्कुल अलग होकर पूरी तरह से एकतरफा हो जाना, यह ऐसा रहस्यात्मक मामला है जिस पर गंभीर चिंतन व उसका समाधान जरूरी है। लोगों की नब्ज पहचानने में भयंकर भूल-चूक चुनावी चर्चा का नया विषय है।’मायावती ने अगले पोस्ट में कहा, ‘बसपा के सभी लोगों ने पूरे तन मन धन व दमदारी के साथ यह चुनाव लड़ा। उन्हें ऐसे अजूबे परिणाम से निराश कतई नहीं होना है बल्कि बाबा साहब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर के जीवन संघर्षों से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने का प्रयास करते रहना है।’उन्होंने एक अन्य पोस्ट में कहा, ‘इस चुनावी परिणाम के संदर्भ में जमीनी रिपोर्ट लेकर आगे लोकसभा चुनाव की नए सिरे से तैयारी पर विचार विमर्श के लिए पार्टी की अखिल भारतीय स्तर पर बैठक आगामी 10 दिसंबर को लखनऊ में बुलाई गई है। चुनाव परिणाम से विचलित हुए बिना आंबेडकरवादी आंदोलन आगे बढ़ाने की हिम्मत कभी भी नहीं हारेगा।’देश के चार राज्यों के रविवार को आए विधानसभा चुनाव परिणाम में भारतीय जनता पार्टी ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में जीत दर्ज की है जबकि तेलंगाना में कांग्रेस ने विजय प्राप्त की है। बसपा ने मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में इस बार भी उम्मीदवार खड़े किए थे लेकिन राजस्थान (दो सीटें) को छोड़कर बाकी किसी राज्य में उसका खाता नहीं खुल सका।
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भोपाल .प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा को दो तिहाई बहुमत मिल गया है। निर्वाचन आयोग के अनुसार, प्रदेश की 230 विधानसभा सीट में से भाजपा के उम्मीदवार 159 सीट जीत चुके हैं जबकि चार सीट पर आगे चल रहे हैं। वहीं कांग्रेस ने अब तक 63 सीट पर जीत दर्ज की है और वह तीन सीट पर आगे चल रही है। भाजपा मध्य प्रदेश में सत्ता बरकरार रखने के साथ ही अपने विधायकों की संख्या बढ़ाने में सफल रही जबकि शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल के 10 से अधिक मौजूदा मंत्री पराजित हो गए हैं। जिन अन्य प्रमुख मंत्रियों को हार का सामना करना पड़ा उनमें अटेर से अरविंद भदोरिया, हरदा से कमल पटेल और बालाघाट से गौरीशंकर बिसेन शामिल हैं। इनके अलावा हारने वाले मंत्रियों में बड़वानी से प्रेम सिंह पटेल, बमोरी से महेंद्र सिंह सिसोदिया, बदनावर से राजवर्धन सिंह, ग्वालियर ग्रामीण से भारत सिंह कुशवाह, अमरपाटन से रामखेलावन पटेल, पोहरी से सुरेश धाकड़ और परसवाड़ा से रामकिशोर कावरे शामिल हैं। एक अन्य मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के भतीजे राहुल सिंह लोधी को खरगापुर से हार का सामना करना पड़ा।
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नयी दिल्ली. केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने रविवार को कहा कि तीन राज्यों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत लोगों के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘अटूट जुड़ाव' का साक्ष्य है । सूचना एवं प्रसारण मंत्री ठाकुर ने कहा कि मतदाताओं ने कांग्रेस एवं उसकी गारंटी को पूरी तरह खारिज कर दिया है तथा भाजपा के सुशासन, विकास एवं कल्याणकारी राजनीति पर भरोसा जताया है। उन्होंने कहा, ‘‘ये जीत मोदीजी के नेतृत्व और भाजपा में लोगों के लगातार बढ़ते विश्वास को दर्शाती हैं। यह जनता के अपने प्रिय प्रधानमंत्री और उनकी सुशासन, विकास एवं गरीब कल्याण की राजनीति के साथ अटूट जुड़ाव को दर्शाता है। '' भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कांग्रेस पर चुनाव प्रचार अभियान के लिए जातीय मुद्दे को उठाने तथा ‘बांटो एवं राज करो' की नीति अपनाने का आरोप लगाया। ठाकुर ने कहा, ‘‘आज मोदी जी द्वारा दिये गये जाति मॉडल को पूरे देश में स्वीकार किया गया है। आज देश में केवल चार जातियां-- युवा, किसान, महिलाएं एवं गरीब हैं। देश बस विकास चाहता है।
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नागपुर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि भारत ने विकास की दिशा में अच्छी गति हासिल कर ली है और देश के पास मौजूद विशाल ज्ञान आधार तथा अनुसंधान क्षमता के कारण जल्द ही सब कुछ ठीक हो जाएगा। भागवत ने नागपुर में धर्मार्थ न्यास मध्य भारत आयुर्विज्ञान संस्थान (सीआईआईएमएस) में अगली पीढ़ी की अनुक्रमण सुविधाओं के उद्घाटन के अवसर पर मेडिकल शोधार्थियों, चिकित्सकों और वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि विदेशी आक्रमण से पहले भारत विज्ञान और अन्य विधाओं में बहुत आगे था, जिसके बाद गुलामी और अन्य कारकों के कारण देश थोड़ा पीछे चला गया। आरएसएस प्रमुख ने कहा कि नए पहलुओं पर ज्ञान संचय करने और उसे दुनिया के साथ साझा करने की क्षमता रखने वाले भारत ने पिछले 20 वर्षों में बहुत अच्छी प्रगति की है। भागवत ने कहा, ‘‘देश ने आज विकास की दिशा में बहुत अच्छी गति हासिल की है और दुनिया कई क्षेत्रों में हमसे सीख रही है। आज नयी पीढ़ी में कई अन्वेषक हैं। लेकिन, मुझे लगता है कि जिस गति से समाज आगे बढ़ रहा है और विज्ञान के क्षेत्र में काम करने वाले लोग जिस गति से आगे बढ़ रहे हैं, सरकार और प्रशासन को उनके साथ अपनी गति को बनाए रखना थोड़ा मुश्किल हो रहा है। सरकार को उन्हें प्रोत्साहित करना होगा और नीतियां देनी होंगी। जड़ों तक पहुंचने में थोड़ा समय लग रहा है। समस्या पहुंचने में देरी की है।'' उन्होंने कहा, ‘‘मैं आपको गारंटी के साथ कहना चाहता हूं कि बहुत जल्द भारत में ऐसा समय आएगा कि ये सारी शिकायतें नहीं रहेंगी। चूंकि, आप मुसीबत में हैं तो यह आपके लिए कठिन होगा। ये सब होने में समय लगता है। लेकिन, बहुत ही कम समय में ये सारी चीजें सही हो जाएंगी।
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नई दिल्ली। संसद का शीतकालीन सत्र कल से शुरू होगा। यह सत्र इस महीने की 22 तारीख तक चलेगा। 19 दिन में 15 बैठके होंगी। संसद सत्र में कुल 21 विधेयक पेश किये जायेंगे। सरकार ने सत्र की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने में सहयोग के लिए सभी राजनीतिक दलो के साथ कल सर्वदलीय बैठक की। सत्र के पहले दिन कल तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा पर पैसे लेकर प्रश्न पूछने के आरोप के सिलसिले में आचार समिति की रिपोर्ट लोकसभा में पेश की जाएगी। यह 17वीं लोकसभा का अंतिम पूर्णकालिक सत्र होगा।
- नयी दिल्ली। तीन राज्यों में विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की बड़ी जीत की ओर बढ़ने के बीच केंद्रीय मंत्री और पार्टी के राजस्थान चुनाव प्रभारी प्रह्लाद जोशी ने रविवार को कहा कि लोगों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व का समर्थन करने के साथ ही कांग्रेस के झूठे वादों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि परिणाम दिखाते हैं कि लोगों ने मोदी की ‘गारंटी पूरा करने की गारंटी' को स्वीकारा है और वे यह भी मानते हैं कि कांग्रेस केवल वादे करती है लेकिन उन्हें कभी पूरा नहीं करती। ‘कांग्रेस की गारंटी' के जवाब में भाजपा ने इस बार के विधानसभा चुनाव में ‘मोदी की गारंटी' को मुद्दा बनाया था और इसमें वह सफल भी हुई। यह पूछे जाने पर कि राजस्थान के नए मुख्यमंत्री का नाम कब तय किया जाएगा, जोशी ने कहा कि यह भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के मार्गदर्शन और अपने नवनिर्वाचित विधायकों के परामर्श से ‘बहुत जल्द और सुचारू रूप से' होगा। राजस्थान से भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का ‘जादू' इस रेगिस्तानी राज्य में काम नहीं आया और लोगों ने ‘मोदी की गारंटी' को अपनाया। मेघवाल ने पार्टी के चुनाव प्रभारी के तौर पर जोशी के चुनाव प्रबंधन के तरीके की भी प्रशंसा की और कहा कि उन्होंने सभी की बात सुनी और निष्पक्ष भाव से काम किया। उत्तराखंड के बाद यह दूसरा राज्य है जहां कर्नाटक के नेता को विधानसभा चुनाव का प्रभारी बनाया गया था। राजस्थान में पार्टी के कई क्षत्रप और मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं। तेलंगाना के चुनाव परिणामों पर जोशी ने कहा कि कांग्रेस को भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर का फायदा मिला। उन्होंने कहा कि दक्षिण के इस राज्य में भाजपा को और भी मेहनत करते हुए आगे बढ़ने की जरूरत है। जोशी ने कहा कि अगर विपक्ष सोमवार से शुरू हो रहे संसद के आगामी शीतकालीन सत्र को बाधित करता है तो आने वाले दिनों में उसे इससे भी बदतर परिणाम भुगतने होंगे।
- इंदौर। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत का श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व को देते हुए भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने रविवार को दावा किया कि उनका दल अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में 400 से ज्यादा सीट जीतेगा। विजयवर्गीय ने इंदौर में संवाददाताओं से कहा,"मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में हम प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व के कारण चुनाव जीते हैं। हम आने वाले लोकसभा चुनाव में 400 से ज्यादा सीट जीतेंगे।" क्या मध्यप्रदेश में जीत का श्रेय राज्य सरकार की ‘लाडली बहना' योजना को जाता है? इस सवाल पर उन्होंने जवाब दिया कि कुछ "दरबारी पत्रकार" इस बात को स्थापित करने में लगे हैं। क्या विजयवर्गीय मुख्यमंत्री पद की दौड़ में हैं? इस सवाल पर उन्होंने कहा,"मैं भाजपा कार्यकर्ता मात्र हूं और किसी दौड़ में शामिल नहीं हूं। मैं काल्पनिक प्रश्नों का जवाब नहीं देता।" उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के पास "नेता, नीति और अच्छी नीयत" का अभाव है और विधानसभा चुनावों में जनता ने इस पार्टी को आईना दिखा दिया है।"
- भोपाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव प्रचार के दौरान मध्यप्रदेश में 14 रैलियों को संबोधित किया और युवा मतदाताओं तक पहुंच बनाकर उन्हें विभिन्न मोर्चों पर पिछली कांग्रेस सरकारों की विफलताओं की याद दिलाई और सभी वर्गों के विकास पर जोर दिया। मोदी की अपील का मध्यप्रदेश में महिलाओं समेत मतदाताओं पर असर हुआ, जहां सत्तारूढ़ भाजपा ने 43 सीटें जीती हैं और 230 निर्वाचन क्षेत्रों में से 122 पर आगे चल रही है । पिछले महीने मप्र में चुनाव की घोषणा के बाद प्रधानमंत्री ने एक रोड शो का भी नेतृत्व किया था।जैसा कि भाजपा ने मध्यप्रदेश में सत्ता विरोधी लहर को हराने के लिए एक रणनीति तैयार की, जहां वह 2003 से सत्तारूढ़ है (दिसंबर 2018 से मार्च 2020 तक 18 महीनों को छोड़कर) मोदी भगवा पार्टी के पारंपरिक समर्थकों के अलावा महिलाओं, युवाओं, आदिवासियों समेत मतदाताओं के विभिन्न वर्गों तक पहुंचे। भाजपा के प्रचार नारे "एमपी के मन में मोदी, मोदी के मन में एमपी" को चुनाव प्रचार के दौरान व्यापक स्वीकृति मिली थी। चुनाव प्रचार के अंतिम दिन, मोदी ने तीन चुनावी रैलियों को संबोधित किया और एक रोड शो का नेतृत्व किया।'' मोदी के साथ केंद्रीय गृह मंत्री और रणनीतिकार अमित शाह भी शामिल हुए। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए शाह ने चुनाव में राम मंदिर का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के लोग तीन दिसंबर को फिर से दिवाली मनाएंगे जब विधानसभा चुनाव के लिए वोटों की गिनती होगी और 22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर का उद्घाटन होगा। सितंबर में, शाह ने चुनाव प्रबंधन और 17 नवंबर के चुनावों के लिए रणनीति बनाने का काम अपने ऊपर ले लिया। शाह ने मध्यप्रदेश का सघन दौरा किया। चुनाव टिकटों के वितरण पर असंतोष को दबाने के लिए, उन्होंने तीन दिनों तक राज्य में डेरा डाला। उन्होंने विद्रोहियों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया और भाजपा कार्यकर्ताओं और अन्य नेताओं तक पहुंच बनाई। चूंकि भाजपा के शीर्ष नेता आगे बढ़कर नेतृत्व कर रहे थे, मतदाताओं के बीच "मामा" के नाम से लोकप्रिय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने प्रमुख लाडली बहना योजना का प्रचार किया, जो महिलाओं के बीच हिट हो गई है। योजना के तहत महिलाओं को प्रति माह 1,250 रुपये मिलते हैं। राज्य की 2.72 करोड़ महिला मतदाताओं में से लाभार्थी महिलाओं की संख्या चौंका देने वाली 1.31 करोड़ है। चौहान मध्यप्रदेश के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्री हैं।केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को मध्य प्रदेश चुनाव के लिए भाजपा की चुनाव प्रबंधन समिति का संयोजक नियुक्त किया गया, जबकि कांग्रेस ने सत्ता में आने पर नारी सम्मान निधि के तहत महिलाओं को 1,500 रुपये की वित्तीय सहायता देने का वादा किया था । चौहान ने महिलाओं को 1,000 रुपये प्रति माह प्रदान करके लाडली बहना योजना शुरू की। उन्होंने सहायता को किस्तों में बढ़ाकर 3,000 रुपये करने का वादा किया और 250 रुपये मासिक बढ़ोतरी लागू की।
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नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिव्यांगों को सशक्त बनाने पर बल दिया है। आज नई दिल्ली में अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस पर राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान करते हुए, उन्होंने कहा कि दुनिया की आबादी में 15 प्रतिशत लोग दिव्यांग हैं।
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि दिव्यांगजनों का संघर्ष और उनकी उपलब्धियां लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। राष्ट्रपति ने दिव्यांगों के सशक्तिकरण की दिशा में उल्लेखनीय प्रयासों के लिए लोगों, संस्थाओं, संगठनों, राज्य और जिले को कुल 30 पुरस्कार प्रदान किए।इस अवसर पर सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार ने कहा कि दिव्यांगजनों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए एक करोड़ से अधिक विशिष्ट दिव्यांग पहचान-पत्र बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों के लिए रोजगार में चार प्रतिशत की आरक्षण की व्यवस्था की गई है। डॉ. वीरेन्द्र कुमार ने कहा कि दिव्यांगजनों के समग्र विकास में भारतीय संकेत भाषा संस्थान और दिव्यांग खेल प्रशिक्षण केंद्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। -
नई दिल्ली। राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना विधानसभा चुनाव परिणाम को लेकर गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर रविवार (3 दिसंबर) को बड़ा हमला किया. उन्होंने कहा कि आज के चुनाव परिणामों ने यह साबित कर दिया है कि तुष्टीकरण और जाति में बांटने की राजनीति के दिन समाप्त हो चुके हैं.
अमित शाह ने कहा, ''जनता के दिल में सिर्फ और सिर्फ मोदी जी हैं. नया भारत पॉलिटिक्स ऑफ परफॉरमेंस पर वोट देता है. इस अपार समर्थन के लिए मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान की जनता को नमन करता हूं. बीजेपी की इस भव्य विजय पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को बहुत-बहुत बधाई.''
- जयपुर। राजस्थान विधानसभा चुनाव में रविवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के जीत की ओर बढ़ने के मद्देनजर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने चुनाव परिणामों को ‘‘अप्रत्याशित’’ बताते हुए कहा कि वह इसे ‘‘विनम्रतापूर्वक’’ स्वीकार करते हैं। कांग्रेस नेता गहलोत ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘राजस्थान की जनता द्वारा दिए गए जनादेश को हम विनम्रतापूर्वक स्वीकार करते हैं। यह सभी के लिए एक अप्रत्याशित परिणाम है।’’उन्होंने कहा, ‘‘यह हार दिखाती है कि हम अपनी योजनाओं, कानूनों और नवाचारों को जनता तक पहुंचाने में पूरी तरह कामयाब नहीं रहे।’’गहलोत ने कहा, ‘‘मैं नई सरकार को शुभकामनाएं देता हूं। मेरी उन्हें सलाह है कि हम काम करने के बावजूद कामयाब नहीं हुए, इसका मतलब यह नहीं कि वे सरकार में आने के बाद काम ही ना करें। हमने पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस), चिरंजीवी सहित जो तमाम योजनाएं शुरू की हैं एवं विकास की जो रफ्तार इन पांच सालों में राजस्थान को दी है वे इसे आगे बढ़ाएं।’’ राजस्थान के विधानसभा चुनाव में भाजपा जीत की ओर बढ़ती दिख रही है। निर्वाचन आयोग के अनुसार, भाजपा के उम्मीदवार 53 सीट जीत चुके हैं और 62 सीट पर आगे हैं। कांग्रेस ने अब तक 27 सीट पर जीत दर्ज की है और वह 42 पर आगे है।
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नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने रविवार को दावा किया कि तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) का अच्छा प्रदर्शन उसकी सफलता से ज्यादा कांग्रेस की ‘विफलता’ है। मध्य प्रदेश और राजस्थान दोनों राज्यों में भाजपा जीत की ओर बढ़ रही है, जबकि छत्तीसगढ़ में उसने काफी बढ़त हासिल कर ली है।
तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष ने सोशल मीडिया पर संदेश में कहा, “इन तीन राज्यों में यह भाजपा की सफलता से ज्यादा कांग्रेस की विफलता है।” कांग्रेस तेलंगाना में भारत राष्ट्र समिति (BRS) पर जीत हासिल करती हुई दिख रही है। घोष ने दावा किया कि राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में चुनावों के नतीजे कुछ ही महीने दूर लोकसभा चुनाव से पहले एक महत्वपूर्ण चुनावी घटनाक्रम है, लेकिन इसका आम चुनावों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “टीएमसी वह पार्टी है जो देश में भाजपा को हराने की लड़ाई में नेतृत्व प्रदान कर सकती है।” टीएमसी नेता ने दावा किया कि इन राज्यों में चुनाव जीतने के लिए अन्य पार्टियों ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की कल्याणकारी योजनाओं को आत्मसात किया है। - भोपाल। मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर सत्ता में आने जा रही है. शुरुआती रुझानों के मुताबिक पार्टी प्रदेश में बंपर जीत के साथ दोबारा वापसी कर रही है. माना जा रहा है कि बीजेपी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के जनकल्याणकारी योजनाओं के चलते फिर से सत्ता हासिल करने में सफल रही है. यहां कुछ जनकल्याणकारी योजनाओं के बारे में बताया गया है कि कैसे ये योजनाएं बीजेपी के लिए गेम चेंजर साबित हुई और फिर से बीजेपी के लिए सत्ता का द्वार खुला.लाडली बहना योजनामुख्यमंत्री लाडली बहना योजना की शुरुआत शिवराज सिंह चौहान ने 5 मार्च 2023 को की थी. इस योजना के तहत राज्य की 1 करोड़ 25 लाख महिलाओं को प्रति माह 1-1 हजार रुपए सहायता दी जा रही है. महिलाओं को इसकी पहली किस्त 10 जून को मिली थी. यह योजना बीजेपी के लिए फायदेमंद साबित हुई और इसके चलते महिला वोटर्स बीजेपी की ओर झुकें.किसानों का कर्ज माफकिसानों की कर्ज माफी की प्रक्रिया कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने शुरू की थी लेकिन साल 2020 में जब कमलनाथ की सरकार गिर गई तो कुछ किसान कर्ज माफी से रह गए थे, जिनपर काफी ब्याज चढ़ गया था. इसके बाद शिवराज सरकार ने कर्ज माफी की प्रक्रिया शुरू की और 11 लाख 19 हजार किसानों का लगभग 2 हजार 123 करोड़ रुपए का कर्ज माफ कर दिया. किसानों का कर्ज माफ सरकार के लिए फायदेमंद रहा और इसने बीजेपी के दोबारा सत्ता में लौटने में मदद की.संविदा कर्मचारी को रिन्यू नहीं कराना होगा अनुबंधमध्य प्रदेश सरकार ने कुछ महीने पहले घोषणा की कि अब राज्य में संविदा पर काम कर रहे कर्मचारी को हर साल अपना अनुबंध रिन्यू नहीं करवाना होगा. इसके साथ ही सरकार ने संविदा कर्मचारियों का अनुबंध समाप्त कर दिया है. इसके अलावा सरकार ने सरकारी कर्मचारियों की तरह उनके लिए भी अच्छे वेतन, भत्ता, अवकाश, बीमा आदि की सुविधा प्रदान करने की घोषणा की.आंगनबाड़ी सेविकाओं के वेतन में वृद्धिशिवराज सरकार ने राज्य में काम कर रही आंगनवाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं के वेतन में भी बढ़ोतरी की है. सरकार ने आंगनबाड़ी सेविकाओं के वेतन को 3 हजार प्रतिमाह से बढ़ाकर 13000 रुपए प्रतिमाह कर दिया. इसके अलावा आंगनबाड़ी सहायिकाओं के वेतन को बढ़ाकर 750 रुपए से बढ़ाकर 5750 रुपए प्रति महीने कर दिया. इसके अलावा सरकार ने घोषणा की कि रिटायरमेंट के बाद आंगनबाड़ी सेविकाओं को 1 लाख 25 हजार रुपए और आंगनवाड़ी सहायिकाओं को 1 लाख रुपए दिए जाएंगे.मुख्यमंत्री सीखो कमाओ योजना’ का फायदामध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बीते 4 जुलाई को ‘मुख्यमंत्री सीखो कमाओ योजना’ की शुरुआत की. इस योजना के तहत 29 साल तक के युवाओं को अलग-अलग संस्थाओं में काम का प्रशिक्षण दिया जाएगा. काम सीखने के दौरान युवाओं को 8 हजार से 10 हजार रुपए प्रति महीने भी दिए जा रहे हैं. अभी सरकार ने 12204 संस्थाओं को इसके लिए अनुबंध किया है. इसमें अबतक 4 लाख 64 हजार युवाओं ने रजिस्ट्रेशन करवाया है.इसके अलावा रोजगार सहायकों को दोगुना वेतन, छात्राओं के लिए ई-स्कूटर, कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में वृद्धि और सीएम राइज स्कूल जैसी योजनाओं ने शिवराज सरकार के पक्ष में काम किया.
- भोपाल। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का करिश्मा, केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रणनीति और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की महत्वाकांक्षी ‘लाडली बहना योजना’ से भाजपा प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में शानदार जीत की ओर अग्रसर है।यह योजना इस साल 10 जून को लागू की गई जिसके तहत महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये देने से शुरुआत हुई। लाडली बहना योजना के अंतर्गत प्रदेश के 2.72 करोड़ महिला मतदाताओं में से 1.31 करोड़ महिलाओं को वर्तमान में 1,250 रुपये प्रति माह दिया जा रहा है। चौहान ने सत्ता में वापस आने पर इस योजना के तहत राशि को धीरे-धीरे बढ़ाकर प्रतिमाह 3,000 रुपये करने का वादा किया था। यह योजना भी कांग्रेस के सत्ता में आने के सपनों पर पानी फिरने की बड़ी वजह रही। मध्य प्रदेश में बीजेपी 162 सीट से आगे चल रही है जिसके मद्देनजर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, अश्विनी वैष्णव, नरेंद्र सिंह तोमर और राज्य भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा ने भोपाल में श्यामा प्रसाद मुखर्जी और दीनदयाल उपाध्याय को श्रद्धांजलि अर्पित की।चुनाव की घोषणा के बाद मोदी ने प्रदेश में 14 जनसभाओं को संबोधित करने के साथ-साथ एक रोड शो भी किया। मध्य प्रदेश में सत्ता बरकरार रखने के लिए भाजपा ने प्रधानमंत्री के करिश्मे पर काफी भरोसा किया है। उनकी रैली में भारी भीड़ उमड़ी।पार्टी के इस चुनाव प्रचार में ‘एमपी के मन में मोदी, मोदी के मन में एमपी’ मुख्य नारा रहा।भाजपा ने सत्ता विरोधी लहर के मद्देनजर मध्यप्रदेश में सबसे लंबे समय तक सेवारत मुख्यमंत्री चौहान को अपनी पार्टी का मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं किया था। 17 दिसंबर 2018 से 23 मार्च 2020 तक कांग्रेस शासन को छोड़कर भाजपा आठ दिसंबर 2003 से करीब उन्नीस साल से राज्य में सत्ता में है।चुनाव प्रचार के अंतिम दिन मोदी ने तीन चुनावी रैलियों को संबोधित किया और एक रोड शो का नेतृत्व किया, जबकि शाह ने भी ऐसा ही किया।भाजपा के ‘चाणक्य’ माने जाने वाले शाह ने राज्य का व्यापक दौरा किया। टिकट बंटवारे के बाद असंतोष को दूर करने के लिए वह एक बार तीन दिन तक मध्यप्रदेश में रहे। उन्होंने बागियों को चुनाव मैदान से अपना नाम वापस लेने के लिए मजबूर किया और पार्टी कार्यकर्ताओं को उत्साहित किया।सितंबर में शाह ने चुनाव प्रबंधन को नियंत्रित करने और रणनीतियों को तैयार करने का कठिन काम अपने ऊपर ले लिया। सत्ता विरोधी लहर को दूर रखने के लिए उन्होंने चौहान को मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर पेश नहीं किया।भाजपा के 2003 में सत्ता में आने के बाद यह पहला मौका था जब भाजपा ने अपने मुख्यमंत्री उम्मीदवार का चेहरा पेश नहीं किया। चौहान को चुनाव से पहले जनता तक पहुंचने के लिए जन आशीर्वाद यात्रा का नेतृत्व करने के अवसर से भी वंचित कर दिया गया था। इसके बजाय, राज्य के पांच अलग-अलग इलाकों से पांच जन आशीर्वाद यात्राएं निकाली गईं, जिन्हें पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा एवं केंद्रीय मंत्रीगण अमित शाह, नितिन गडकरी एवं राजनाथ सिंह ने हरी झंडी दिखाई। शाह ने मध्य प्रदेश के लिए योजना बनाते समय कई समीकरणों का ध्यान रखा। मध्यप्रदेश में भाजपा 2018 में हुए विधानसभा चुनावों में मामूली अंतर से कांग्रेस से हार गई थी, जिसके चलते कमलनाथ के नेतृत्व में तब कांग्रेस सरकार बनी थी। लेकिन 15 महीने बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ करीब 22 कांग्रेस विधायक भाजपा में शामिल हो गये थे, जिसके चलते कांग्रेस सरकार गिर कर 23 मार्च 2020 में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में फिर भाजपा सत्ता में वापस आई।
- -दिल्ली और पंजाब में अपनी सरकार के साथ आम आदमी पार्टी (आप) राष्ट्रीय दलों में तीसरे स्थान परनई दिल्ली। .चार राज्यों के विधानसभा चुनावों में से तीन में स्पष्ट जीत की ओर बढ़ रही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) यदि इन राज्यों में सरकार बना लेती है तो वह अब अपने दम पर 12 राज्यों में सत्ता में होगी, जबकि दूसरी सबसे बड़ी राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस राजस्थान और छत्तीसगढ़ में हारने के बाद तीन राज्यों में सिमट जाएगी।दिल्ली और पंजाब में अपनी सरकार के साथ आम आदमी पार्टी (आप) राष्ट्रीय दलों में तीसरे स्थान पर है। केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा उत्तराखंड, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, गुजरात, गोवा, असम, त्रिपुरा, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश में सत्ता में है और आज जारी मतगणना के रुझान यदि परिणामों में बदल जाते हैं तो वह मध्य प्रदेश में सत्ता बरकरार रखेगी तथा राजस्थान और छत्तीसगढ़ को कांग्रेस से छीन लेगी।इसके अलावा, भाजपा चार राज्यों – महाराष्ट्र, मेघालय, नगालैंड और सिक्किम में सत्तारूढ़ गठबंधन का भी हिस्सा है। कांग्रेस अब अपने दम पर तीन राज्यों – कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना में सत्ता में होगी। तेलंगाना में कांग्रेस अपनी निकटतम प्रतिद्वंद्वी सत्तारूढ़ भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) को हराकर जीत की राह पर है।कांग्रेस बिहार और झारखंड में सत्तारूढ़ गठबंधन का भी हिस्सा है और तमिलनाडु में शासन करने वाली द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) की सहयोगी है। हालांकि, वह राज्य सरकार का हिस्सा नहीं है। नतीजों ने एक प्रमुख विपक्षी दल के रूप में आप की स्थिति को मजबूत किया। वह दो राज्यों में सरकार के साथ दूसरी सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी बन गई है, क्योंकि कांग्रेस की हिस्सेदारी में गिरावट आई है।आप नेता जैस्मीन शाह ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘आज के परिणामों के बाद, आम आदमी पार्टी दो राज्य सरकारों – पंजाब और दिल्ली के साथ उत्तर भारत में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के रूप में उभरी है।’’ वर्तमान में भारत में छह राष्ट्रीय दल – भाजपा, कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी (बसपा), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) और आप हैं।विधानसभा चुनाव का अगला दौर 2024 में होगा जब सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा और आंध्र प्रदेश में चुनाव होंगे। जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव भी लंबित हैं। चूंकि इस दौर में कई मौजूदा सांसदों ने विधानसभा चुनाव लड़ा है, इसलिए लोकसभा की उन सीट के खाली होने की उम्मीद है। हालांकि, चूंकि आम चुनाव अगले साल होने हैं, इसलिए विधायक के रूप में चुने जाने पर सांसदों के सीट खाली करने पर भी कोई उपचुनाव नहीं होगा।
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दिल्ली। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान चुनावों में पार्टी की बढ़त के बाद पार्टी मुख्यालय में भाजपा कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाया।
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जयपुर। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता वसुंधरा राजे ने कहा, "राजस्थान की यह जो शानदार जीत है, यह प्रधानमंत्री मोदी जिनका मंत्र था- सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास, यह उसकी जीत है। उनकी दी हुई गारंटी की जीत है, यह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रणनीति की जीत है और यह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा के कुशल नेतृत्व की जीत है...यह जीत जनता की है जिसने कांग्रेस को नकारते हुए भाजपा को अपनाने का काम किया है...। "पूर्व मुख्यमंत्री और झालरापाटन से भाजपा उम्मीदवार, वसुंधरा राजे 53,193 वोटों के अंतर से जीत गईं, उन्हें कुल 1,38,831 वोट मिले।
वसुंधरा राजे ने प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव के परिणामों में उनकी पार्टी की जीत पर प्रतिक्रिया जताते हुए रविवार को कहा कि जनता ने कांग्रेस के कुशासन को नकार दिया है।
राज्य की 200 में से 199 सीट पर मतदान 25 नवंबर को हुआ था। करणपुर सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी के निधन के कारण चुनाव स्थगित कर दिया गया है।




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