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- शिलांग। मेघालय के पश्चिमी जैंतिया हिल्स जिले में कथित तौर पर जंगली मशरूम खाने से एक ही परिवार के तीन बच्चों की मौत हो गई और नौ अन्य बीमार हो गए। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। एक अधिकारी ने इसकी जानकारी दी। उपायुक्त बी एस सोहलिया ने बताया कि यह घटना सैफई गांव में हुई।उन्होंने बताया कि परिवार के 12 सदस्यों ने मशरूम खाया था उनमें से तीन बच्चों की मौत हो गई। शेष लोगों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज जारी है। उन्होंने बताया कि मृतकों की पहचान रिवांसाका सुचियांग (8), किटलांग डुचियांग (12) और वानसलन सुचियांग (15) के रूप में हुई है। उन्होंने बताया कि घटना की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। file photo
- गुवाहाटी । असम में बाढ़ की चपेट में आ जाने से तीन और लोगों की मौत होने के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 15 हो गई, जबकि छह लाख से अधिक लोग इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हैं। एक अधिकारिक बुलेटिन में यह जानकारी दी गई। असम के 11 जिलों में शुक्रवार को प्रभावित लोगों की संख्या 3.5 लाख थी, हालांकि असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की विज्ञप्ति में बताया गया कि प्रभावित जिलों की संख्या घटकर 10 हो गई है। कछार, हैलाकांडी और करीमगंज जिलों में 28 से 15 मई के बीच बाढ़ और तूफान से एक-एक व्यक्ति की मौत होने की जानकारी मिली है। एएसडीएमए के बुलेटिन में बताया गया कि राज्य की तीन प्रमुख नदियां कोपिली, बराक और कुशियारा में जल स्तर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। असम में बाढ़ के कारण 6,01,642 लोग प्रभावित हैं, जिसमें नागांव सबसे अधिक 2,79,345 लोग प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा होजाई जिले में 1,26,813 और कछार में 1,12,265 लोग प्रभावित हुए हैं। कुल मिलाकर 41,564 विस्थापित लोगों ने विभिन्न जिलों में स्थापित 187 राहत शिविरों में शरण ली है।
- बदायूं (उप्र) । उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के कोतवाली बिसौली क्षेत्र के बिसौली-आंवला मार्ग पर स्थित एक गांव में शनिवार दोपहर को पीपल के पेड़ के नीचे बैठे लगभग आधा दर्जन लोगों को बेकाबू पिकअप वाहन ने कुचल दिया, जिससे इस घटना में चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गयी जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी। पुलिस के अनुसार बिसौली कोतवाली इलाके के पैगाम भीकमपुर गांव में दोपहर बाद लगभग आधा दर्जन लोग चबूतरे पर बैठे हुए थे तभी बेकाबू पिकअप वाहन चबूतरे पर बैठे पर बैठे ग्रामीणों के ऊपर चढ़ गया और उन्हें कुचल दिया। उन्होंने बताया कि इस हादसे में प्रकाश(42), ब्रह्मपाल (35), धनपाल (55), ज्ञान सिंह (40) की मौके पर ही मौत हो गई जबकि रामवीर और नेत्रपाल गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्होंने बताया कि सभी घायलों को उपचार के लिये जिला अस्पताल भेजा गया है और हादसे के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई तथा गुस्साए लोगों ने सड़क जाम कर दिया। पुलिस ने पिकअप समेत चालक को हिरासत में ले लिया है। जिलाधिकारी (डीएम) मनोज कुमार ने बताया कि बिसौली कोतवाली क्षेत्र के पैगाम भीकमपुर गांव में एक पेड़ के नीचे बैठे लोगों पर पिकअप के चढ़ जाने से कुचल कर चार लोगों की मौत हो गयी, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गये । कुमार ने बताया कि दुर्घटना के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने मृतकों के शवों को नहीं उठाने दिया और सड़क को जाम कर दिया। जिलाधिकारी ने बताया कि स्थिति अब नियंत्रण में है। घटनास्थल पर अधिकारी और पर्याप्त पुलिस बल मौजूद हैं तथा मामले की जांच कराई जा रही है। उप जिलाधिकारी बिसौली कल्पना जायसवाल ने बताया कि गुस्साए ग्रामीणों को समझाकर मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने बताया कि मामले में अग्रिम कार्रवाई की जा रही है।
- भदोही (उप्र)। भदोही जिले में गंगा नदी में नहाने गये एक ही परिवार के छह लोग डूब गए जिनमें से तीन लोगों को मल्लाहों ने बचा लिया लेकिन पिता-पुत्र समेत तीन लापता हैं। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार दोपहर करीब एक बजे एक ही परिवार के छह लोग भीषण गर्मी में गंगा में स्नान करने गये थे। कोइरौना थाना के प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार राय ने बताया कि गंगा किनारे इटहरा गांव निवासी शेषमणि सिंह के परिवार के विकास, शक्ति, देवा, विनय सिंह, शिवा और किशन सभी गंगा में नहा रहे थे तभी वे गहरे पानी की तरफ चले गये। उन्होंने बताया कि ‘बचाओ-बचाओ' की पुकार सुनकर कुछ मल्लाहों ने तीन को डूबने से बचा लिया और विनय सिंह (38), उनका बेटे शिवा (13) और भतीजा किशन (12) तेज बहाव में बह गये। थाना प्रभारी ने बताया कि उनकी तलाश की जा रही है। राय ने बताया मौके पर कई गोताखोर और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) टीम के साथ स्थानीय मल्लाह तलाश में जुटे हैं, लेकिन शाम तक तीनों का पता नहीं चल सका।
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कन्याकुमारी (तमिलनाडु)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को यहां विवेकानंद रॉक मेमोरियल में 45 घंटे की अपनी ध्यान साधना पूरी की और कहा कि उन्हें एक दिव्य ऊर्जा का एहसास हुआ। ध्यान सत्र के समापन पर, सफेद वस्त्र पहने मोदी ने स्मारक के बगल में स्थित उस परिसर का दौरा किया, जहां तिरुवल्लुवर की 133 फुट ऊंची प्रतिमा स्थित है और वहां एक विशाल माला चढ़ाई। वह नौका द्वारा प्रतिमा परिसर गये और बाद में वह तट पर पहुंचे। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) एवं केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘विवेकानंद रॉक मेमोरियल पर अपनी ध्यान साधना पूरी करने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लिखते हैं: भारत के सबसे दक्षिणी छोर कन्याकुमारी में ‘विवेकानंद रॉक मेमोरियल' में जाकर मुझे एक दिव्य ऊर्जा का एहसास हुआ है।'' मोदी ने कहा, ‘‘इस शिला स्मारक पर मेरी ध्यान साधना, मेरे जीवन के अविस्मरणीय क्षणों में से एक है। मैं, मां भारती के चरणों में बैठकर एक बार फिर अपना संकल्प दोहराता हूं कि मेरे जीवन का हर क्षण, मेरे शरीर का हर कण, सदैव राष्ट्र की सेवा के लिए समर्पित रहेगा।'' उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्र की प्रगति और नागरिकों के कल्याण की कामना के साथ, मैं ‘मां भारती' को कोटि-कोटि नमन करता हूं।'' प्रधानमंत्री हेलीकॉप्टर से तिरुवनंतपुरम पहुंचे और वहां से दिल्ली के लिए रवाना हुए।
मोदी ने 30 मई को यहां पहुंचने पर भगवती अम्मन मंदिर में पूजा-अर्चना की और बाद में विवेकानंद रॉक मेमोरियल पहुंचे। स्मारक में अपने प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री ने ध्यान लगाया और सूर्योदय के समय ‘सूर्य अर्घ्य' दिया।सूर्य अर्घ्य' के तहत भगवान सूर्य को जल अर्पित कर उन्हें नमन किया जाता है।ध्यान साधना के लिए प्रधानमंत्री की कन्याकुमारी यात्रा का तमिलनाडु में सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) समेत ‘इंडिया' गठबंधन के घटक दलों ने विरोध किया। प्रधानमंत्री के प्रवास के मद्देनजर द्रमुक नेता एवं तमिलनाडु के जल संसाधन मंत्री दुरईमुरुगन ने आरोप लगाया कि पर्यटकों को उस क्षेत्र में जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है, जिससे स्थानीय व्यवसाय पर गंभीर असर पड़ा है। तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के. सेल्वापेरुन्थगई ने शनिवार को संवाददाताओं से कहा, ‘‘कोई व्यक्ति 14 कैमरों के सामने बैठकर ध्यान कैसे कर सकता है? क्या यह ध्यान है? यह ध्यान साधना चुनावी राजनीति को ध्यान में रखकर की गई है।'' कन्याकुमारी सूर्योदय और सूर्यास्त के दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है और मेमोरियल तट के पास एक छोटे-से टापू पर स्थित है। प्रधानमंत्री ने 30 मई की शाम को विवेकानंद रॉक मेमोरियल में ध्यान साधना शुरू की थी और शनिवार को इसे पूरा कर लिया। -
अहमदाबाद. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शनिवार को कहा कि भगवान सोमनाथ सनातन संस्कृति में गौरव के प्रतीक हैं। शाह ने कहा कि उन्होंने शुक्रवार को गुजरात में भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग मंदिर में पूजा-अर्चना करते हुए सभी की समृद्धि की कामना की। मंदिर का प्रबंधन करने वाले श्री सोमनाथ ट्रस्ट के न्यासियों में से एक शाह ने शुक्रवार शाम को 'ध्वज पूजा' की। अनुष्ठान के बाद ध्वज मंदिर के शीर्ष पर फहराया गया। शाह ने शनिवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर पोस्ट किया, "जय श्री सोमनाथ। प्रथम ज्योतिर्लिंग श्री सोमनाथ महादेव अविरल, अमिट और अडिग सनातन संस्कृति के गौरव प्रतीक हैं। ये हमें अनेक संघर्षों के बाद भी दृढ़ रहने की प्रेरणा देते हैं। बाबा सोमनाथ के दर्शन व पूजन-अर्चन कर सभी के कल्याण व भारत की निरंतर समृद्धि की कामना की।'' शाह ने सोमनाथ जाने से पहले शुक्रवार शाम को राजकोट अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर अपने संक्षिप्त ठहराव के दौरान, पिछले शनिवार को टीआरपी गेम जोन में लगी भीषण आग के बाद की गई कार्रवाई का जायजा लिया, जिसमें 27 लोगों की जान चली गई थी। भाजपा की एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि गांधीनगर के सांसद शाह ने जिलाधिकारी को गांधीनगर क्षेत्र में हैजा के प्रसार को रोकने के लिए आवश्यक निवारक उपाय करने का निर्देश दिया। इसमें कहा गया है, "शाह ने महामारी को नियंत्रित करने और प्रभावित लोगों को उचित उपचार सुनिश्चित करने के लिए गांधीनगर के हैजा प्रभावित क्षेत्रों में एहतियाती उपाय करने के लिए आवश्यक निर्देश भी दिए।
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इटावा/ इटावा सफारी पार्क में शेरनी नीरजा ने चार शावकों को जन्म दिया है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि नीरजा का यह पहला प्रजनन है और नवजात शावक तथा शेरनी दोनों ही स्वस्थ हैं। इटावा सफारी पार्क के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पटेल ने बताया कि शेरनी नीरजा ने अपने पहले प्रसव में शुक्रवार रात्रि नौ बजकर 50 मिनट पर एक शावक को जन्म दिया तदुपरांत 10 बजकर 51 मिनट पर दूसरे, तीन बजकर 17 मिनट पर तीसरे और एक जून को सुबह 10 बजकर 50 मिनट पर चौथे शावक को जन्म दिया। पटेल ने बताया कि इसके साथ ही यहां शेरों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है।
उप निदेशक डॉ विनय कुमार सिंह ने बताया कि शेरनी नीरजा और उसके नवजात शावकों के स्वास्थ्य और व्यवहार पर निरंतर नजर रखी जा रही है। भीषण गर्मी से बचाव के लिए कूलर और पानी का छिड़काव किया रहा है। -
नयी दिल्ली.लोकसभा चुनाव के सातवें और अंतिम चरण में शनिवार को करीब 59.15 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया । भीषण गर्मी के बीच इस चरण में वाराणसी संसदीय क्षेत्र में भी मतदान हुआ, जहां से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लगातार तीसरी बार चुनाव लड़ रहे हैं। इस चरण में केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ की एक, पंजाब की सभी 13 और हिमाचल प्रदेश की चार, उत्तर प्रदेश की 13, पश्चिम बंगाल की नौ, बिहार की आठ, ओडिशा की छह और झारखंड की तीन लोकसभा सीट सहित 57 सीट पर मतदान हुआ। ओडिशा की शेष 42 विधानसभा सीट के वास्ते चुनाव और हिमाचल प्रदेश की छह विधानसभा सीट के लिए उपचुनाव भी इसी के साथ हुए। अंतिम चरण के मतदान के साथ ही 19 अप्रैल से शुरू हुई मैराथन मतदान प्रक्रिया का समापन हो गया। आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम की विधानसभाओं के लिए भी मतदान हुआ। भाजपा के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) लोकसभा चुनाव में लगातार तीसरी बार जीत दर्ज करके सत्ता बरकरार रखने की कोशिश कर रहा है। विपक्षी ‘इंडिया' कुछ राज्यों में संयुक्त लड़ाई लड़कर राजग का मुकाबला कर रहा है। निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित शाम 6.30 बजे की समय-सीमा के बाद प्रसारित कई ‘एग्जिट पोल' में भाजपा के नेतृत्व वाले राजग को पूर्ण बहुमत मिलने का अनुमान जताया गया। विपक्षी ‘इंडिया' गठबंधन के कई दलों के नेताओं ने चार जून को होने वाली मतगणना से पहले विपक्ष की तैयारियों का जायजा लेने के लिए शाम को बैठक की और दावा किया कि उन्हें 295 से अधिक सीट मिलेंगी, जो अगली सरकार बनाने के लिए पर्याप्त हैं। भाजपा अध्यक्ष जे. पी. नड्डा ने कहा कि लोगों ने एक समर्थ, शक्तिशाली, विकसित और आत्मनिर्भर भारत के लिए तथा तुष्टीकरण, भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार को दूर करने के लिए मतदान किया है। साथ ही, उन्होंने विश्वास जताया कि उनकी पार्टी 370 से ज्यादा और राजग 400 से अधिक लोकसभा सीट पर जीत दर्ज करेगा। अब सबका ध्यान चार जून को होने वाली मतगणना पर टिकी होगी। हालांकि अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में विधानसभा चुनाव की मतगणना दो जून को होगी। मतदान प्रतिशत बताने वाले निर्वाचन आयोग के एक ‘ऐप' पर रात आठ बजे तक जारी आंकड़ों के अनुसार आखिरी चरण में मतदान प्रतिशत 59.15 रहा। झारखंड में करीब 69.03 प्रतिशत मतदान हुआ। उत्तर प्रदेश में 55.60, पश्चिम बंगाल में 69.89, बिहार में 49.58 और हिमाचल प्रदेश में 67.39 प्रतिशत मतदान हुआ। पंजाब में 55.69 प्रतिशत, जबकि चंडीगढ़ में 62.80 प्रतिशत मतदान हुआ। ओडिशा में करीब 63.21 प्रतिशत मतदान हुआ। आम चुनाव के पहले छह चरणों में मतदान क्रमशः 66.14 प्रतिशत, 66.71 प्रतिशत, 65.68 प्रतिशत, 69.16 प्रतिशत, 62.2 प्रतिशत और 63.36 प्रतिशत रहा। निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं से अधिक से अधिक संख्या में मतदान करने और जिम्मेदारी एवं गर्व के साथ मतदान करने का आह्वान किया था। निर्वाचन आयोग ने अनेक चुनौतियों से पार पाते हुए मतदान केंद्रों तक पहुंचकर मतदान करने वाले मतदाताओं के प्रति शनिवार को ‘गहरी कृतज्ञता' व्यक्त की। निर्वाचन आयोग ने एक बयान में कहा, "भारतीय मतदाताओं ने 18वीं लोकसभा के गठन के लिए अपने सबसे प्रिय अधिकार का प्रयोग किया है। भारतीय लोकतंत्र और भारतीय चुनाव ने एक बार फिर कमाल किया है। महान भारतीय मतदाताओं ने जाति, पंथ, धर्म, सामाजिक-आर्थिक और शैक्षिक पृष्ठभूमि से परे जाकर एक बार फिर यह कर दिखाया । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण का मतदान आरंभ होने पर लोगों से बड़ी संख्या में वोट डालने का अनुरोध किया। प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एक्स' पर पोस्ट किया, ‘‘आइए, मिलकर अपने लोकतंत्र को और अधिक जीवंत बनाएं।'' प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘लोकसभा चुनाव 2024 के अंतिम चरण में आज मतदान हो रहा है। इस चरण के सभी मतदाताओं से मेरा निवेदन है कि लोकतंत्र के इस महापर्व में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। मुझे विश्वास है कि हमारे युवा और महिला मतदाता वोट डालने के लिए रिकॉर्ड संख्या में आएंगे।'' चुनाव मैदान में कुल 904 प्रत्याशी हैं। इनमें प्रमुख उम्मीदवारों में केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद की बेटी मीसा भारती और अभिनेत्री कंगना रनौत शामिल हैं। इस चरण में लगभग 5.24 करोड़ पुरुषों, 4.82 करोड़ महिलाओं और 3,574 ‘ट्रांसजेंडर' मतदाताओं सहित 10.06 करोड़ से अधिक नागरिक मतदान करने के लिए पात्र थे। अंतिम चरण के लिए प्रचार बृहस्पतिवार शाम को समाप्त हो गया था। चुनाव प्रचार के दौरान मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेताओं ने कांग्रेस और विपक्षी दलों के गठबंधन। बिहार की आठ लोकसभा सीट के साथ-साथ अगिआंव विधानसभा सीट पर भी उपचुनाव हो रहा है। लोकसभा चुनाव के लिए केंद्रीय मंत्री आर. के. सिंह और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद भी मैदान में हैं। झारखंड में दुमका, राजमहल और गोड्डा सीट पर इस चरण में मतदान हो रहा है। सबकी निगाहें दुमका पर टिकी हैं, जहां जेल में बंद झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की भाभी एवं भाजपा उम्मीदवार सीता सोरेन ‘इंडिया' गठबंधन के नलिन सोरेन के खिलाफ चुनाव लड़ रही हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की तीन बार विधायक रहीं सीता सोरेन लोकसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा में शामिल हुई थीं। ओडिशा में छह लोकसभा और 42 विधानसभा सीट के लिए मतदान हुआ।
विधानसभा अध्यक्ष प्रमिला मलिक, सरकार के मुख्य सचेतक प्रशांत मुदुली, ओडिशा भाजपा प्रमुख मनमोहन सामल और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बैजयंत पांडा चुनाव मैदान में हैं। पश्चिम बंगाल की दमदम, बारासात, बशीरहाट, जयनगर, मथुरापुर, डायमंड हार्बर, जादवपुर, कोलकाता दक्षिण और कोलकाता उत्तर सीट के लिए भी मतदान हो रहा है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के मौजूदा सांसद सुदीप बंदोपाध्याय, सौगत रॉय और माला रॉय, भाजपा की पूर्व केंद्रीय मंत्री देबाश्री चौधरी और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता सुजान चक्रवर्ती समेत कई दिग्गज उम्मीदवार मैदान में हैं। उत्तर प्रदेश की 13 सीट पर मतदान हुआ, जो सभी राज्यों में सबसे ज्यादा 80 लोकसभा सदस्य भेजता है।
पंजाब में, ‘इंडिया' गठबंधन के सहयोगी कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) 1996 के बाद पहली बार अपने दम पर चुनाव लड़ रहे हैं। हिमाचल प्रदेश में चार लोकसभा सीट- हमीरपुर, मंडी, कांगड़ा और शिमला और छह विधानसभा सीट-सुजानपुर, धर्मशाला, लाहौल और स्पीति, बड़सर, गगरेट और कुटलेहड़ के लिए उपचुनाव के तहत मतदान हो रहा है। सभी की निगाहें मंडी पर हैं, जहां भाजपा की कंगना रनौत का मुकाबला कांग्रेस के विक्रमादित्य सिंह के साथ है। -
नयी दिल्ली. निर्वाचन आयोग ने शनिवार को कहा कि लोकसभा चुनाव, आंध्र प्रदेश और ओडिशा की राज्य विधानसभाओं तथा विधानसभा उपचुनावों के लिए मतगणना चार जून को सुबह आठ बजे से शुरू होगी। इसने कहा कि सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में विधानसभा चुनावों के लिए मतों की गिनती रविवार सुबह छह बजे से शुरू होगी। सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में विधानसभा चुनावों के लिए मतों की गिनती की तारीख चार जून की जगह दो जून कर दी गई थी क्योंकि दोनों विधानसभाओं का कार्यकाल दो जून को समाप्त हो रहा है और इस दिन तक नए सदन का गठन किया जाना है। निर्वाचन आयोग ने शनिवार को एक बयान में मतगणना व्यवस्था, मतगणना प्रक्रिया, ईवीएम और पेपर ट्रेल मशीनों के भंडारण पर अपने द्वारा जारी नवीनतम निर्देश भी साझा किए। निर्देशों में से एक के अनुसार, चुनाव संचालन नियम, 1961 के नियम 54ए के अनुसार डाक मतपत्रों की गिनती सबसे पहले निर्वाचन अधिकारी की मेज पर शुरू की जाएगी। राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों, चुनाव अधिकारियों और जिला निर्वाचन अधिकारियों द्वारा रुझानों और परिणामों का प्रदर्शन स्थानीय स्तर पर भी डिजिटल डिस्प्ले पैनल के माध्यम से किया जाएगा।
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नयी दिल्ली .लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण का मतदान संपन्न होने के बाद आए कई एग्जिट पोल (चुनाव बाद सर्वेक्षण) में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को प्रचंड बहुमत मिलने का अनुमान लगाया गया है। इन सर्वेक्षणों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लगातार तीसरी बार केंद्र की सत्ता संभालने जा रहे हैं। इसके साथ इन सर्वेक्षणों में सत्तारूढ़ गठबंधन राजग के तमिलनाडु और केरल में अपना खाता खोलने और कर्नाटक में फिर से एकतरफा जीत हासिल करने का अनुमान जताया गया है। साथ ही, इन सर्वेक्षणों में बिहार, राजस्थान और हरियाणा जैसे कुछ राज्यों में भाजपा एवं राजग की सीटों की संख्या में कमी होने का अनुमान लगाया गया है। ‘रिपब्लिक टीवी-पी मार्क' के सर्वेक्षण में दावा किया गया है कि 543 सदस्यीय लोकसभा में सत्तारूढ़ गठबंधन 359 सीट तक जीत हासिल करेगा और विपक्षी ‘इंडिया' गठबंधन को 154 सीट मिलेंगी। 'रिपब्लिक टीवी-मैट्रिज़' के एग्जिट पोल में राजग को 353-368 सीट और विपक्ष को 118-133 सीट मिलने का अनुमान जताया गया है। ‘जन की बात' के सर्वेक्षण में सत्तारूढ़ राजग को 362-392 सीट और विपक्षी गठबंधन को 141-161 सीट दी गई हैं। ‘इंडिया टीवी-सीएनएक्स' ने अपने अनुमान में राजग को 371-401 और ‘इंडिया' गठबंधन को 109-139 सीटें दीं, जबकि ‘न्यूज नेशन' द्वारा अनुमान जताया गया है कि राजग को 342-378 और ‘इंडिया' गठबंधन को 153-169 सीट मिल सकती हैं। ‘एक्सिस माई इंडिया' और ‘टुडेज़ चाणक्य' सहित कई अन्य एग्जिट पोल ने रात 8.30 बजे तक पूर्ण अनुमानित परिणामों की भविष्यवाणी नहीं की थी। वर्ष 2019 के चुनाव में भाजपा ने 303 सीट जीती थी, जबकि राजग की संख्या 353 थी। कांग्रेस को 53 सीट और उसके सहयोगियों को 38 सीट मिली थीं। इस लोकसभा चुनाव में भाजपा से मुकाबला करने के लिए विपक्षी दलों द्वारा 'इंडिया' गठबंधन का गठन किया गया। मोदी ने सातवें एवं अंतिम चरण का मतदान संपन्न होने के बाद विश्वास जताया कि लोगों ने राजग की सरकार को फिर से चुनने के लिए रिकॉर्ड संख्या में मतदान किया है। उन्होंने यह भी कहा कि ‘‘अवसरवादी इंडी गठबंधन'' मतदाताओं के साथ तालमेल बिठाने में विफल रहा, जिन्होंने उनके "प्रतिगामी राजनीति'' को खारिज कर दिया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने विपक्षी ‘इंडिया' गठबंधन की बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा कि यह गठबंधन 295 से अधिक सीट जीतेगा।
- मुंबई. सभी क्षेत्रों में कंपनियों में नेतृत्व वाली भूमिकाओं के लिए महिलाओं की नियुक्तियां 2024 की शुरुआत में बढ़कर 23.2 प्रतिशत हो गई हैं। बृहस्पतिवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि नियोक्ता अब भी शीर्ष प्रबंधन में लैंगिक समानता हासिल नहीं कर पाए हैं। पेशेवर नेटवर्किंग मंच ‘लिंक्डइन' और सार्वजनिक नीति परामर्श फर्म क्वॉन्टम हब की संयुक्त रिपोर्ट - ‘कॉरपोरेट इंडिया में नेतृत्व में महिलाएं' के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में नेतृत्वकारी भूमिकाओं के लिए महिलाओं की नियुक्तियों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। नेतृत्व वाली भूमिकाओं के लिए महिलाओं की नियुक्तियां 2016 में 18.8 प्रतिशत से बढ़कर 2021 में 25.2 प्रतिशत के शीर्ष स्तर तक पहुंच चुकी हैं। ...और 2024 की शुरुआत में यह 23.2 प्रतिशत हो गई है। रिपोर्ट में लिंक्डइन के आर्थिक ग्राफ आंकड़ों से प्राप्त जानकारी का उपयोग किया गया है, जो मंच पर विभिन्न क्षेत्रों से उपलब्ध डेटा पर आधारित है। लिंक्डइन के आर्थिक ग्राफ आंकड़ों से पता चलता है कि कार्यबल में महिला कर्मचारियों की कुल संख्या में वृद्धि हुई है। यह 2016 में 23.9 प्रतिशत से बढ़कर 2024 में 26.8 प्रतिशत हो गई है। वरिष्ठ नेतृत्व वाली भूमिकाओं में महिलाओं का प्रतिशत 2016 के 16.6 प्रतिशत से बढ़कर 2023 में 18.7 प्रतिशत हो गया, लेकिन 2024 में यह थोड़ा कम होकर 18.3 प्रतिशत हो गया है। हालांकि, यह वर्ष के अंत तक ठीक हो सकता है।
- नयी दिल्ली. भारत में छत पर लगने वाले सौर ऊर्जा संयंत्र (रूफटॉप सोलर) स्थापित करने की दर मार्च तिमाही में सालाना आधार पर 26 प्रतिशत घटकर 367 मेगावाट रह गई है। मेरकॉम कैपिटल की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। इसमें कहा गया है कि छतों पर सौर संयंत्र लगाने की लागत बढ़ने की वजह से इसकी स्थापना की दर में गिरावट आई है। शोध कंपनी की बृहस्पतिवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, देश में पिछले साल पहली तिमाही के दौरान इस खंड में 485 मेगावाट की सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित की गई थी। मेरकॉम की रिपोर्ट ‘पहली तिमाही में भारत में छत पर सौर संयंत्र का बाजार' के अनुसार, मार्च तिमाही में भारत में 367 मेगावाट के सौर संयंत्र स्थापित किए गए। इसमें अक्टूबर-दिसंबर, 2023 तिमाही के 406 मेगावाट की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत की गिरावट आई है और पिछले साल की समान तिमाही के 485 मेगावाट की तुलना में यह 24 प्रतिशत कम है। भारत में छत पर लगने वाली सौर क्षमता की स्थापना संयुक्त रूप से मार्च, 2024 तक 10.8 गीगावाट थी।इसमें कहा गया, “स्थापनाओं में गिरावट का कारण मुख्य रूप से ‘पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना' कार्यक्रम के तहत अधिक आवेदन के कारण आवासीय ग्राहकों के सामने आवेदन प्रक्रिया में देरी था। घरेलू सामग्री जरूरतों (डीसीआर) का अनुपालन करने के लिए मॉड्यूल की कीमतों में वृद्धि ने ‘सूर्य गुजरात' कार्यक्रम के तहत क्षमता वृद्धि में और कमी ला दी है।” तिमाही आधार पर क्षमता वृद्धि में औद्योगिक क्षेत्र का योगदान सबसे अधिक रहा। यह कुल स्थापित क्षमता का लगभग 57 प्रतिशत था। वाणिज्यिक, आवासीय और सरकारी क्षेत्रों की हिस्सेदारी क्रमशः लगभग 28 प्रतिशत, 14 प्रतिशत और 1.1 प्रतिशत रही।
- छत्रपति संभाजीनगर. पिछले मानसून में कम बारिश होने के कारण महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में स्थित विश्व प्रसिद्ध एलोरा गुफाएं और अन्य स्मारक पानी की आपूर्ति के लिए 'टैंकर' पर निर्भर हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। राजस्व विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि छत्रपति संभाजीनगर में पिछले मानसून में 527.10 मिमी बारिश हुई थी जबकि इस अवधि के दौरान औसत वर्षा 637.50 मिमी होती है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के एक अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि बारिश उम्मीद से कम हुई। परिणामस्वरूप एलोरा गुफाएं, बीबी का मकबरा और औरंगाबाद गुफाओं जैसे कुछ स्मारकों के परिसर में बने जलस्रोत सूख गए हैं। उन्होंने कहा कि ये स्मारक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधिकार क्षेत्र में आते हैं और अब पानी की आपूर्ति के लिए टैंकरों पर निर्भर हैं। अधिकारी ने कहा, "एलोरा गुफा परिसर में पीने, बागवानी और साफ सफाई के लिए हर दिन पानी के दो टैंकर की आवश्यकता होती है।" उन्होंने कहा, "हम बीबी का मकबरा के लिए 5,000 लीटर के कम से कम दो टैंकर तथा औरंगाबाद गुफाओं के लिए हर दूसरे दिन एक टैंकर पानी ले रहे हैं।" अधिकारी ने बताया कि कभी-कभी बीबी का मकबरा में पर्यटकों की संख्या बढ़ने पर पानी के तीसरे टैंकर की भी जरूरत पड़ती है।
- वाशिंगटन.भारतीय मूल के एक प्रभावशाली अमेरिकी लेखक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने 10 साल के शासन के दौरान विकास पर ध्यान केंद्रित किया है और तीसरे बार उनके निर्वाचन से भारत को अगले पांच साल तक स्थिरता मिलेगी साथ ही उन्हें देश के समक्ष मौजूद कुछ प्रमुख चुनौतियों से निपटने का अवसर मिलेगा। प्रिंसटन निवासी भारतीय-अमेरिकी लेखक राजीव मल्होत्रा ने कहा, ‘‘भारत इन सभी चुनौतियों (देश के बाहर से आने वाली चुनौतियों) का डटकर मुकाबला कर सकता है। भारत, मोदी सरकार के कारण इन सभी चुनौतियों का मुकाबला कर सकता है। लोगों के तमाम दावों, तर्कों और आलोचनाओं के बावजूद हकीकत यही है कि उन्होंने विकास किया है और अधिक विकास की आवश्यकता है लेकिन उन्होंने विकास किया है।'' मल्होत्रा ने पिछले कुछ दशक में भारतीय संस्कृति और समाज के संबंध में पश्चिमी अकादमिक अध्ययन के विरोध में कई किताबें लिखी हैं। ‘स्नेक इन द गंगा: ब्रेकिंग इंडिया 2.0' उनकी नवीनतम पुस्तक है। उन्होंने भारतीय मीडिया की खबरों का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसा लग रहा है कि मोदी तीसरी बार सत्ता में आ रहे हैं, अपने दो कार्यकाल के दौरान मोदी सरकार ने विकास किया है जिससे समाज के सभी वर्गों को लाभ मिला है। उन्होंने कहा, ‘‘आप आंकड़ों के आधार पर देख सकते हैं कि गरीबों से लेकर अल्पसंख्यकों तक समाज के हर वर्ग को लाभ मिला है। आप संख्यात्मक रूप से देखा सकते हैं कि अब उनके पास सड़कें, साफ पानी, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, भोजन और शिक्षा है। तो लोगों को कहना होगा कि इस सरकार ने काम किया है जबकि पिछली सरकार गरीबी से लड़ने आदि के नारे लगा रही थी लेकिन काम नहीं कर रही थी।'' मल्होत्रा अमेरिका में ‘इनफिनिटी फाउंडेशन' के प्रमुख है। उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के हालिया बयान से सहमति जताई कि बाहरी ताकतों ने भारतीय चुनाव के परिणामों को प्रभावित करने की कोशिश की है। मल्होत्रा ने कहा, ‘‘सबसे पहले मैं यह कहना चाहता हूं कि मुझे जयशंकर की योग्यता, उनकी निर्भीकता और उनकी हाजिर जवाबी पसंद है। यह सब अच्छा है। लेकिन मैं यह कहूंगा कि मेरी एक आलोचना है कि वह पूर्वानुमान लगाने में सक्षम नहीं हैं। वह प्रतिक्रिया दे सकते हैं। वह यह पूर्वानुमान लगाने में असमर्थ हैं कि कमजोरियां कहां हैं, अगला हमला कहां से होने वाला है, बुरे लोग कौन हैं और इसे करने वाले कौन हैं।''
- गुवाहाटी. पारंपरिक 'मेखला चादर' और आभूषणों से सजी असम की पहली कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) वाली शिक्षिका 'आइरिस' ने गुवाहाटी के एक निजी स्कूल के छात्रों के सभी सवालों के तुरंत जवाब दिए। स्कूल की एक शिक्षिका ने बताया कि मानव सदृश रोबोट से जब पूछा गया कि हीमोग्लोबिन क्या होता है तो उसने छात्रों को सभी विवरणों के साथ इसका जवाब दिया। रॉयल ग्लोबल स्कूल की प्रवक्ता ने बताया, "चाहे सवाल उनके पाठ्यक्रम से संबंधित थे या किसी और विषय पर, 'आइरिस' ने उदाहरणों और संदर्भों के साथ तुरंत उनके जवाब दिए।" उन्होंने कहा कि जिज्ञासु छात्र, रोबोट की विभिन्न गतिविधियों में उत्सुकता से शामिल थे।बच्चों ने रोबोट से हाथ भी मिलाया तथा सीखने की प्रक्रिया मजेदार और आकर्षक रही।स्कूल की शिक्षिका ने कहा, "बच्चे बहुत उत्साहित हैं क्योंकि एआई शिक्षक के पास उनके सवालों के जवाब हैं।" रोबोट को नीति आयोग द्वारा शुरू की गई अटल टिंकरिंग लैब (एटीएल) परियोजना के तहत मेकरलैब्स एडु-टेक के सहयोग से विकसित किया गया है। स्कूल की शिक्षिका ने कहा कि 'आइरिस' शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के समाकलन में एक महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतीक है। प्रवक्ता ने कहा कि निजी स्कूल पूर्वोत्तर क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा को व्यक्तिपरक तथा अधिक आकर्षक बनाने के लिए रोबोट की क्षमताओं का लाभ उठाने को तत्पर है।
- देहरादून । उत्तराखंड में गर्म हो रही जलवायु के कारण पिछले सात सालों में प्रमुख फलों जैसे उच्च गुणवत्ता वाले सेबों, नाशपाती, आड़ू, आलूबुखारा और खूबानी के उत्पादन में जबरदस्त गिरावट आयी है। पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में शोध करने वाले संगठन 'क्लाइमेट ट्रेंडस' द्वारा किए गए एक अध्ययन में कहा गया है कि प्रमुख फलों के उत्पादन और उन्हें उगाए जाने वाले क्षेत्र में काफी कमी आयी है। अध्ययन के अनुसार, शीतोष्ण फलों की पैदावार में उष्णकटिबंधीय फलों के मुकाबले ज्यादा कमी आयी है । राज्य में बदलता तापमान औद्योनिकी (फल) उत्पादन में बदलाव को कुछ हद तक स्पष्ट कर सकता है। अध्ययन में कहा गया है कि गर्म होती जलवायु के कारण कुछ फलों की किस्में कम उत्पादक हो रही हैं जिसके कारण किसान उष्णकटिबंधीय विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं जो बदलती जलवायु परिस्थितियों के लिए बेहतर रूप से अनुकूल हैं । उत्तराखंड में बागवानी उत्पादन का क्षेत्र बहुत सिकुड़ गया है जिसके कारण भी प्रमुख फलों की पैदावार में भी 2016—17 और 2022—23 के बीच काफी कमी आयी। हिमालय के उंचाई वाले क्षेत्रों में उगाए जाने वाले शीतोष्ण फल जैसे नाशपाती, खूबानी, आलूबुखारा और अखरोट की पैदावार में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली है। अध्ययन के अनुसार, सेब उत्पादक क्षेत्र 2016—17 में 25,201.58 हेक्टेयर से घटकर 2022—23 में 11,327.33 हेक्टेयर रह गया और इसी के साथ सेब की पैदावार में करीब 30 फीसदी गिरावट आयी। नींबू की प्रजातियों के फलों की पैदावार 58 प्रतिशत तक सिकुड़ गयी। इसके मुकाबले उष्णकटिबंधीय फलों में जलवायु परिवर्तन का असर कम दिखा। उदाहरण के लिए, खेती के क्षेत्र में करीब 49 और 42 प्रतिशत कमी आने के बावजूद आम और लीची का उत्पादन अपेक्षाकृत स्थिर ही रहा और इनमें क्रमश: 20 और 24 फीसदी की कमी ही दर्ज की गयी। अध्ययन के अनुसार, अमरूद और करौंदा के उत्पादन में वृद्धि फलों के प्रकार में बदलाव की ओर संकेत करता है और किसानों को ऐसे फलों को उगाने में रूचि होती है जिनकी बाजार में मांग बेहतर हो या जो स्थानीय दशाओं के बेहतर अनुकूल हों। टिहरी में फलों के उत्पादन क्षेत्र में सर्वाधिक कमी आयी है जबकि दूसरा स्थान देहरादून का है ।दूसरी तरफ, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और हरिद्वार में फलों के उत्पादन क्षेत्र और उनकी पैदावार दोनों में गिरावट दर्ज की गयी । उत्तराखंड में बढ़ते तापमान के कारण बागवानी उत्पादन में इन गहन परिवर्तनों को आंशिक रूप से समझा जा सकता है। अध्ययन के अनुसार, उत्तरखंड में 1970 और 2022 के बीच 0.02 डिग्री सेल्सियस की वार्षिक दर से औसत तापमान बढ़ा है जबकि राज्य के उंचाई वाले क्षेत्रों में इसी अवधि के दौरान 1.5 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ। शोध में खुलासा हुआ है कि उंचाई वाले क्षेत्रों में जाड़ों में अपेक्षाकृत ज्यादा तापमान होने से बर्फ के गलने की गति तेज हुई जिससे बर्फ से ढंके क्षेत्र तेजी से कम हुए । पिछले करीब 20 सालों में राज्य के उंचाई वाले क्षेत्रों में जाड़ों के तापमान 0.12 डिग्री सेल्सियस की दर से बढ़े हैं। उत्तरकाशी, चमोली, पिथौरागढ़ और रूद्रप्रयाग जिलों में बर्फ से ढंके क्षेत्र 2000 के मुकाबले 2020 तक 90—100 किलोमीटर तक सिकुड़ गए हैं। जाड़ों में कड़कड़ाती ठंड और बर्फ उच्च हिमालयी क्षेत्र में उगने वाले सेब, आलूबुखारा, आड़ू, खुबानी और अखरोट में फूल आने और उनके बढ़ने के लिए जरूरी होते हैं । अपेक्षाकृत गर्म जाड़े, कम बर्फवारी, सिकुड़ता हिमाच्छादित क्षेत्र कलियों को खिलने में समस्या पैदा कर सकता है जिससे शीतोष्ण फलों में फूल खिलने और उसकी पैदावार पर प्रभाव पड़ सकता है । कृषि विज्ञान केंद्र आइसीएआर—सीएसएसआरआई के प्रमुख और वरिष्ठ वैज्ञानिक डा पंकज नौटियाल ने कहा, '“उच्च गुणवत्ता वाले सेब जैसी पारंपरिक शीतोष्ण फसलों को सुप्त अवधि (दिसंबर-मार्च) के दौरान 1200-1600 घंटों के लिए सात डिग्री सेल्सियस से कम तापमान की आवश्यकता होती है। पिछले 5-10 वर्षों में इस क्षेत्र में जितनी बर्फबारी हुई है उसकी तुलना में सेब को दो—तीन गुना अधिक बर्फबारी की आवश्यकता है जिससे फल की गुणवत्ता और उपज खराब हो गई है ।' रानीखेत के एक किसान मोहन चौबटिया ने कहा, ‘‘ बारिश और बर्फ कम होने से बहुत ही दिक्कत हो रही है ।' उन्होंने यह भी कहा कि पिछले दो दशकों में अल्मोड़ा में शीतोष्ण फलों का उत्पादन घटकर आधा रह गया है ।
- नयी दिल्ली। पंजाब के जिरकपुर में बीएमडब्ल्यू कार की टक्कर लगने के बाद 19 वर्षीय युवक की मौत हो गई। यह घटना तेज रफ्तार लग्जरी कारों से होने वाले हादसों की फेहरिस्त में नई है, जो लापरवाही से गाड़ी चलाने के भयावह परिणामों और इस बात को रेखांकित करती है कि कई बार रफ्तार का रोमांच तबाही का कारण बन जाता है। इस महीने देश में ऐसी चार घटनाएं हो चुकी हैं। मंगलवार रात को जिरकपुर शहर में तेज़ रफ्तार बीएमडब्ल्यू कार ने एक बाइक को जोरदार टक्कर मार दी, जिससे उसपर सवार तीन युवक हवा में उछल गए। इस घटना में एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई तथा शेष गंभीर रूप से जख्मी हो गए। मोहाली निवासी कार चालक को गिरफ्तार कर लिया गया और फिर ज़मानत पर छोड़ दिया गया। इस घटना से 11 दिन पहले, महाराष्ट्र के पुणे में नशे की हालत में तेज गति से चलाई जा रही पोर्श कार ने कथित तौर पर दो आईटी पेशेवरों की जान ले ली थी। इस हादसे में अनीश अवधिया और अश्विनी कोस्टा की मौत हो गई। पोर्श कार को 17-वर्षीय एक किशोर नशे की हालत में चला रहा था। अंधाधुंध रफ्तार से भागती कार ने दोनों आईटी पेशेवरों की मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी थी। तेज़ गति से चलाई जा रही कारों से होने वाले हादसे वाहन सवारों के लिए भी घातक होते हैं।इस दुर्घटना से दो दिन पहले, नोएडा में तेज गति से जा रही एक बीएमडब्ल्यू कार ने 16 मई को सुबह छह बजे एक ई-रिक्शा को टक्कर मार दी थी, जिससे एक नर्स सहित दो लोगों की मौत हो गई और तीन घायल हो गए। इसके बाद 26 मई की सुबह उत्तर प्रदेश के इसी शहर में तेज गति से जा रही एक ऑडी कार ने 64 साल के बुजुर्ग को टक्कर मार दी थी। बुजुर्ग जनक देव शाह की मौके पर ही मौत हो गई। सेक्टर 53 के गिझोर गांव के रहने वाले शाह दूध लेने जा रहे थे। उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले में नोएडा और ग्रेटर नोएडा शामिल हैं। गौतमबुद्ध नगर में पिछले साल 1,176 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिसमें 470 लोगों की मौत हो गई और 858 घायल हो गये। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, साल 2022 में जिले में सड़क दुर्घटना में 437 लोगों की मौत हुई और 856 लोग घायल हो गए। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि 2022 में देश भर में 4.61 लाख सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिसमें 1.68 लाख लोग मारे गए और 4.43 लाख लोग घायल हुए। जान गंवाने वाले 1.68 लाख लोगों में से 1.19 लाख की जान तेज गति के कारण हुए हादसों में गई। पिछले साल अगस्त में हरियाणा के नूंह में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर एक पेट्रोल टैंकर से रोल्स रॉयस फैंटम की टक्कर हो गई, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी। ट्रक गलत दिशा से आ रहा था और लिमोजिन की गति करीब 230 किमी प्रति घंटा थी। ट्रक में सवार दोनों लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कार में सवार लोग जख्मी हुए थे। लक्जरी कारों से सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या के बारे में गैर-सरकारी संगठन ‘सेव लाइफ फाउंडेशन' के संस्थापक पीयूष तिवारी ने कहा कि यह समस्या देश में त्रुटिपूर्ण लाइसेंसिंग प्रणाली के कारण उत्पन्न हो रही है। उन्होंने कहा, ‘‘अगर आपके पास एलएमवी लाइसेंस है तो आप 800 सीसी के इंजन वाली कार से लेकर हाईपॉवर वाली सुपर कार तक कुछ भी चला सकते हैं। लाइसेंसिंग प्रणाली में सुधार जरूरी है। वाहन चलाने की क्षमता के आधार पर लाइसेंस दिया जाना चाहिए।'' नवंबर 2022 में टाटा संस के पूर्व अध्यक्ष साइरस मिस्त्री और उनके दोस्त जहांगीर पंडोल की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। दोनों एक मर्सिडीज-बेंज एसयूवी से जा रहे थे, जिसे जहांगीर की पत्नी अनाहिता पंडोले चला रही थीं। रिपोर्ट के अनुसार, कार की गति 100 किमी प्रति घंटे से अधिक थी और यह सड़क के डिवाइडर से टकरा गई। मोटर वाहन दुर्घटनाओं ने पैदल चलने वालों को भी नहीं बख्शा है। भारत में सड़क दुर्घटना 2022 की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्गों पर 20,513 दुर्घटनाओं में 10,160 पैदल यात्रियों की मौत हुई है। तिवारी ने कहा कि सड़कों को सुरक्षित बनाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है कि पैदल चलने वालों के अनुकूल संरचनाएं बनाई जाएं।
- नयी दिल्ली। देश के विभिन्न हिस्सों में पड़ रही भीषण गर्मी की वजह से बिजली की अधिकतम मांग गुरुवार को रिकॉर्ड 250 गीगावाट पर पहुंच गई है। बिजली मंत्रालय ने यह जानकारी दी। गर्मी से राहत के लिए घरों एवं दफ्तरों में एयर कंडीशनर और कूलर का इस्तेमाल बढ़ने से बिजली की खपत बढ़ रही है। बिजली मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, बिजली की अधिकतम मांग या दिन में सबसे अधिक आपूर्ति गुरुवार को 250 गीगावाट (एक गीगावाट बराबर 1,000 मेगावाट) रही, जो अभी तक का सर्वाधिक आंकड़ा है। इससे पहले बुधवार को बिजली की अधिकतम मांग इस सत्र में 246 गीगावाट के उच्चस्तर पर पहुंच गई थी।मंत्रालय के आंकड़े के अनुसार देश भर में गैर-सौर ऊर्जा की मांग भी 29 मई को 234.3 गीगावाट के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई। यह मांग भीषण गर्मी, बढ़ती औद्योगिक और आवासीय बिजली खपत के संयुक्त प्रभाव को दर्शाती है। गुरुवार को उत्तरी क्षेत्र ने भी 86.7 गीगावाट की मांग पूरी की, जो सर्वकालिक उच्च स्तर है। वहीं पश्चिमी क्षेत्र ने 74.8 गीगावाट की अपनी अधिकतम मांग को छुआ। अबतक की सर्वाधिक बिजली खपत रिकॉर्ड सितंबर, 2023 में 243.27 गीगावाट का था।बिजली मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 23 मई को अधिकतम मांग 236.59 गीगावाट थी, जबकि 22 मई को यह 235.06 गीगावाट थी। दिल्ली में गुरुवार को न्यूनतम तापमान 30.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने दिन में बाद में हल्की बारिश और धूल भरी आंधी का अनुमान जताया है। दिल्ली के प्राथमिक मौसम केंद्र सफदरजंग वेधशाला में बुधवार को अधिकतम तापमान 46.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो 79 वर्षों में सबसे अधिक है। इससे पहले, यह 17 जून, 1945 को 46.7 डिग्री सेल्सियस था।बिजली मंत्रालय ने इस महीने की शुरुआत में मई के लिए दिन के समय 235 गीगावाट और शाम के समय 225 गीगावाट की बिजली मांग रहने का अनुमान जताया था। वहीं, जून के महीने में बिजली की खपत दिन में 240 गीगावाट और शाम के समय 235 गीगावाट रहने का अनुमान है। मंत्रालय ने इस साल गर्मी में बिजली की अधिकतम मांग 260 गीगावाट तक पहुंचने का अनुमान जताया है।भारत मौसम विज्ञान विभाग ने इस साल मार्च में अनुमान जताया था कि भारत में इस साल अधिक गर्मी और अधिक लू वाले दिन देखने को मिलेंगे। इसके लिए जिम्मेदार अल नीनो की स्थिति मई तक जारी रहने का अनुमान जताया गया था।
- जम्मू। जम्मू जिले में गुरुवार को श्रद्धालुओं को लेकर जा रही एक बस के सड़क से फिसलकर खाई में गिर जाने से 22 यात्रियों की मौत हो गयी तथा 57 घायल हो गये। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि यह दुर्घटना जिले के चौकी चोरा क्षेत्र के टुंगी मोड़ पर हुई। उन्होंने बताया कि बस करीब 150 फुट गहरी खाई में गिर गई। जम्मू के जिला मजिस्ट्रेट ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर बताया कि घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दे दिए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस घटना में 22 लोगों की मौत हो गई है और 57 लोग घायल हुए हैं। जम्मू एवं कश्मीर के उपराज्यपाल (एलजी) मनोज सिन्हा ने इस घटना में लोगों की मौत पर दुख प्रकट किया।इसके साथ ही एलजी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि जम्मू के अखनूर में हुई बस दुर्घटना में प्रत्येक मृतक के निकटतम परिजन को पांच-पांच लाख रुपये तथा घायलों को 50-50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी। पुलिस के एक प्रवक्ता ने बताया कि घटना अपराह्न 12 बजकर 35 मिनट की है। उन्होंने बताया कि पंजीकरण नंबर यूपी81सीटी-4058 वाली बस खाई में गिर गई। बस हरियाणा के कुरुक्षेत्र से श्रद्धालुओं को लेकर जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले के पौनी इलाके में शिवखोड़ी जा रही थी। बस ने अपना सफर उत्तर प्रदेश से शुरू किया था। पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि शवों को अखनूर में उप जिला अस्पताल में भिजवा दिया है। उन्होंने बताया कि घायलों को जम्मू में राजकीय मेडिकल कॉलेज-सह-अस्पताल (जीएमसी) में भर्ती कराया गया है। अधिकारियों ने बताया कि मृतकों में से एक महिला की पहचान उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ के निवासी राधेश्याम की पत्नी धरमपति (42) के रूप में हुई है। उन्होंने बताया कि अधिकतर पीड़ित उत्तर प्रदेश के हैं। सेना, पुलिस और स्थानीय लोगों ने शवों और घायलों को रस्सियों के सहारे खाई से बाहर निकाला।अधिकारियों ने बताया कि सेना ने बस को खाई से बाहर निकालने के लिए क्रेन का इस्तेमाल किया और अभियान अभी भी जारी है। अधिकारियों ने बताया कि घायलों में से छह की हालत गंभीर है और उन्हें पहले अखनूर अस्पताल ले जाया गया, जहां से उन्हें एंबुलेंस से जम्मू के जीएमसी अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल के प्रिंसिपल डॉ. आशुतोष गुप्ता ने कहा, ‘‘घायल हुए 36 से ज्यादा यात्रियों को जीएमसी अस्पताल लाया गया है। इनमें से छह की हालत गंभीर है। मरीजों का उपचार किया जा रहा है।'' अस्पताल में इलाज करा रहे घायलों में से एक अमर चंद ने कहा, ‘‘एक कार विपरीत दिशा से आ रही थी। चालक बस को एक तीखे मोड़ से निकाल रहा था, लेकिन वह विफल रहा, जिसके चलते वाहन खाई में गिर गया।'' घटना में घायल हुए लोगों ने बताया कि वे शिवखोड़ी की तीर्थयात्रा के लिए आए थे।वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (यातायात) फैजल कुरैशी, परिवहन आयुक्त सहित अन्य अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे और बचाव अभियान का निरीक्षण किया। एसएसपी और जम्मू के उपायुक्त घायलों का हालचाल जानने के लिए जीएमसी अस्पताल पहुंचे।उपराज्यपाल ने इस दुखद दुर्घटना में लोगों की मौत पर दुख व्यक्त किया है।सिन्हा ने अपने संदेश में कहा, ‘‘अखनूर में हुई बस दुर्घटना हृदय विदारक है। मैं इस दुर्घटना में हुई मौतों पर शोक व्यक्त करता हूं तथा ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि वे शोकाकुल परिवारों को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करें। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।'' उन्होंने यह भी लिखा, ‘‘प्रशासन शोक संतप्त परिवारों को हरसंभव सहायता प्रदान कर रहा है और घायलों को चिकित्सा सुविधाएं भी प्रदान कर रहा है।'' पिछले साल 15 नवंबर को डोडा में हुई इसी तरह की घटना के बाद यह इस क्षेत्र में सबसे बड़ी दुर्घटना है जिसमें त्रुंगल-अस्सार इलाके में यात्रियों से भरी एक बस सड़क से फिसलकर 300 फुट गहरी खाई में गिर गई थी, जिससे 39 लोगों की मौत हो गई थी और 19 घायल हो गए थे।
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इंफाल.मणिपुर की इंफाल घाटी में भारी बारिश के कारण आई बाढ़ से तीन लोगों की मौत हो गई और हजारों लोग प्रभावित हुए हैं। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि बुधवार को सेनापति जिले के थोंगलांग रोड पर भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन में 34 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हो गए। वहीं 83 वर्षीय एक महिला उफनती सेनापति नदी में डूब गई। उन्होंने बताया कि इंफाल में बुधवार को 75 वर्षीय एक व्यक्ति बारिश के दौरान बिजली के खंभे के संपर्क में आ गया और करंट लगने से उसकी मौत हो गई। उन्होंने बताया कि इंफाल नदी के उफान पर होने से कई इलाकों में पानी भर गया है और इंफाल घाटी में सैकड़ों घरों में पानी घुस गया है, जिसकी वजह से लोगों को पास के सामुदायिक भवनों में शरण लेनी पड़ी है। उन्होंने बताया कि नम्बुल नदी के उफान पर होने के कारण इंफाल पश्चिम जिले के कम से कम 86 इलाकों में बाढ़ आने की सूचना है, जिनमें खुमान लम्पक, नगरम, सागोलबंद, उरीपोक, केसामथोंग और पाओना इलाके शामिल हैं। एक अधिकारी ने बताया, "लगातार बारिश के कारण इंफाल पूर्वी जिले के केरांग, खाबम और लैरीयेंगबाम लेईकाई क्षेत्रों के पास इंफाल नदी का तट टूट गया है और पानी कई क्षेत्रों में घुस गया है, जिससे सैकड़ों घर जलमग्न हो गए हैं। एक अधिकारी ने कहा, "इंफाल पूर्वी जिले के हेंगांग और खुरई विधानसभा क्षेत्रों के कई इलाके बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।" मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने कहा, "कई इलाकों में नदी के तटबंध टूटने के कारण अनेक लोग और पशु प्रभावित हुए हैं। राज्य सरकार के अधिकारी, सुरक्षा और एनडीआरएफ कर्मी और स्थानीय स्वयंसेवकों सहित सभी संबंधित अधिकारी प्रभावित लोगों को सहायता प्रदान करने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं। फंसे हुए लोगों को नावों से सुरक्षित क्षेत्रों में पहुंचाया जा रहा है।" -
नयी दिल्ली. चक्रवात रेमल के प्रभाव से दक्षिण-पश्चिम मानसून ने बृहस्पतिवार को केरल तट और पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में दस्तक दे दी। मौसम विभाग के पूर्वानुमान से एक दिन पहले ही दक्षिण-पश्चिम मानसून ने दस्तक दे दी है। मौसम वैज्ञानिकों ने कहा कि चक्रवात ने मानसून के प्रवाह को बंगाल की खाड़ी की ओर खींच लिया, जो पूर्वोत्तर में समय से पहले मानसून के दस्तक देने का एक कारण हो सकता है। चक्रवाती तूफान 'रेमल' रविवार को पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के तट से टकराया था।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने कहा, ''दक्षिण-पश्चिम मानसून केरल में दस्तक दे चुका है और आज यानी 30 मई 2024 को पूर्वोत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों की ओर बढ़ गया है।'' इससे पहले 15 मई को मौसम विभाग ने मानसून के 31 मई को केरल में दस्तक देने की घोषणा की थी।
केरल में पिछले कुछ दिनों से भारी बारिश हो रही है, जिसके परिणामस्वरूप मई में अतिरिक्त बारिश दर्ज की गयी है। केरल में मानसून के आगमन की सामान्य तिथि एक जून और अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा, नगालैंड, मेघालय, मिजोरम, मणिपुर व असम में मानसून के दस्तक देने की तिथि पांच जून है। -
मुंबई.भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चालू वित्त वर्ष 2024-25 में भारतीय अर्थव्यवस्था के सात प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान लगाया है। आरबीआई ने बृहस्पतिवार को जारी अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने 2023-24 (अप्रैल 2023 से मार्च 2024 वित्त वर्ष) में मजबूत गति से विस्तार किया, जिससे वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर बढ़कर 7.6 प्रतिशत हो गई। यह 2022-23 में 7.0 प्रतिशत थी। यह लगातार तीसरे वर्ष सात प्रतिशत या उससे अधिक रही। आरबीआई ने कहा, ‘‘ 2024-25 के लिए वास्तविक (सकल घरेलू उत्पाद) जीडीपी वृद्धि 7.0 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जिसमें जोखिम दोनों तरफ समान रूप से संतुलित होंगे।'' इसमें कहा गया कि वित्त वर्ष 2023-24 में अर्थव्यवस्था ने लगातार चुनौतियों के बावजूद जुझारुपन दिखाया।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को दुनिया के पहले सिंगल-पीस थ्रीडी प्रिंटेड सेमी-क्रायोजेनिक इंजन द्वारा संचालित रॉकेट के सफल प्रक्षेपण को भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक ‘महत्वपूर्ण अवसर' बताया। चेन्नई स्थित अंतरिक्ष स्टार्ट-अप अग्निकुल कॉसमॉस ने श्रीहरिकोटा में अपने स्वयं के लॉन्च पैड से खुद से तैयार की गई थ्री डी-प्रिंटेड सेमी-क्रायोजेनिक रॉकेट ‘अग्निबाण' की उप-कक्षीय परीक्षण-उड़ान सफलतापूर्वक भरी। इसके साथ यह ऐसा करने वाली भारत की दूसरी निजी कंपनी बन गई। मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘एक उल्लेखनीय उपलब्धि जो पूरे देश को गौरवान्वित करेगी!
उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया के पहले सिंगल-पीस 3 डी प्रिंटेड सेमी-क्रायोजेनिक इंजन द्वारा संचालित अग्निबाण रॉकेट का सफल प्रक्षेपण भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है और हमारी युवा शक्ति की उल्लेखनीय सफलता का एक वसीयतनामा है। अग्निकुल कॉसमॉस टीम को उनके भविष्य के प्रयासों के लिए मेरी शुभकामनाएं।'' -
नई दिल्ली. चेन्नई के अंतरिक्ष 'स्टार्ट-अप' ‘अग्निकुल कॉसमॉस' ने बृहस्पतिवार को श्रीहरिकोटा स्थित अपने प्रक्षेपण स्थल से अपने स्वदेश निर्मित '3डी-प्रिंटेड सेमी-क्रायोजेनिक रॉकेट अग्निबाण' का उप-कक्षीय परीक्षण सफलतापूर्वक किया। अग्निकुल कॉसमॉस ऐसा करने वाली यह भारत की दूसरी निजी इकाई बन गई है। चार असफल प्रयासों के बाद बृहस्पतिवार को परीक्षण बिना किसी लाइव स्ट्रीमिंग के, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के श्रीहरिकोटा में स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में कुछ गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में किया गया। इसरो ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "अग्निबाण सॉर्टेड-01 मिशन के उनके प्रक्षेपण स्थल से सफल प्रक्षेपण के लिए अग्निकुल कॉसमॉस को बधाई। यह एक बड़ी उपलब्धि है...।'' भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (आईएन-स्पेस) के अध्यक्ष पवन गोयनका ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कहा, "अग्निकुल कॉसमॉस द्वारा अग्निबाण एसओआरटीईडी के सफल प्रक्षेपण से बहुत प्रसन्न हूं। यह भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक क्षण है।" अग्निकुल द्वारा अग्निबाण सब-ऑर्बिटल टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटर (एसओआरटीईडी) को प्रक्षेपित करने का 22 मार्च से यह पांचवां प्रयास था। भारतीय अंतरिक्ष संघ (आईएसपीए) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल ए के भट्ट (सेवानिवृत्त) ने कहा, "यह भारत के फलते-फूलते निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए एक बहुत बड़ा प्रोत्साहन और गर्व का क्षण है और यह हमारे लिए भविष्य में क्या छिपा है, इसकी एक झलक मात्र है। इसके पीछे की पूरी टीम को हमारी हार्दिक बधाई और उनके भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएं।" कंपनी के अनुसार अग्निबाण एक अनुकूलन योग्य दो-चरणीय प्रक्षेपण यान है जो 300 किलोग्राम तक का पेलोड (भार) लगभग 700 किलोमीटर की कक्षा में ले जा सकता है। यह रॉकेट तरल और गैस प्रणोदकों के मिश्रण के साथ एक अर्ध-क्रायोजेनिक इंजन का उपयोग करता है। यह एक ऐसी तकनीक है जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा अपने किसी भी रॉकेट में अभी तक प्रदर्शित नहीं किया गया है।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार की शाम यहां प्रसिद्ध विवेकानंद रॉक मेमोरियल में 45 घंटे तक चलने वाली अपनी ध्यान साधना शुरू की। निकटवर्ती तिरुवनंतपुरम से हेलीकॉप्टर द्वारा यहां पहुंचने के बाद मोदी ने भगवती अम्मन मंदिर में पूजा की और नौका सेवा के जरिये रॉक मेमोरियल पहुंचे तथा ध्यान साधना शुरू की।
प्रधानमंत्री की ध्यान साधना एक जून तक चलेगी। धोती और सफेद शॉल ओढ़े मोदी ने मंदिर में पूजा-अर्चना की और गर्भगृह की परिक्रमा की। पुजारियों ने एक विशेष आरती की और उन्हें मंदिर का प्रसाद दिया गया, जिसमें एक शॉल और मंदिर के देवता की फ्रेमयुक्त तस्वीर शामिल थी। बाद में, वह राज्य सरकार के जहाजरानी निगम द्वारा संचालित नौका सेवा के जरिये रॉक मेमोरियल पहुंचे और ‘ध्यान मंडपम’ में ध्यान लगाना शुरू किया।ध्यान लगाना शुरू करने से पहले, मोदी कुछ देर के लिए मंडप की ओर जाने वाली सीढ़ियों पर खड़े रहे। प्रधानमंत्री एक जून को अपनी रवानगी से पहले स्मारक के पास तमिल कवि तिरुवल्लुवर की प्रतिमा को देखने के लिए भी जा सकते हैं।भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने शिवगंगा में पत्रकारों से बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा को पूरी तरह से ‘निजी’ यात्रा बताया। उन्होंने कहा, ‘‘यह प्रधानमंत्री की निजी यात्रा है।’’उन्होंने कहा कि यही कारण है कि उनकी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इस कार्यक्रम में भाग नहीं लिया। जहां एक ओर थानथई पेरियार द्रविड़ कषगम सहित अन्य संगठनों ने मदुरै में मोदी के विरोध में काले झंडे दिखाए, तो वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर भी कई लोगों ने ‘गो बैक मोदी’ लिखा।एक जून को लोकसभा चुनाव के सातवें एवं अंतिम चरण के मतदान के मद्देनजर उनके ध्यान कार्यक्रम के प्रसारण का राजनीतिक विरोध किया जा रहा है। मोदी के इस कार्यक्रम के मद्देनजर कड़ी सुरक्षा सहित सभी इंतजाम पूरे कर लिये गये हैं।प्रख्यात हिंदू संत (विवेकानंद) के नाम पर बना यह स्मारक समुद्र के मध्य में स्थित है। यह पहली बार है जब प्रधानमंत्री इस स्मारक पर ठहरेंगे। यह स्मारक स्वामी विवेकानंद को श्रद्धांजलि स्वरूप बनाया गया है। प्रधानमंत्री ने 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रचार समाप्त होने के बाद केदारनाथ गुफा में भी इसी तरह ध्यान लगाया था।मोदी की यात्रा से पहले सुरक्षा बढ़ा दी गई है। उनके प्रवास के दौरान दो हजार पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे। इसके साथ ही भारतीय तटरक्षक बल और भारतीय नौसेना भी कड़ी निगरानी रखेगी।



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