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नई दिल्ली। भारत-अमेरिका ट्रेड डील होने से भारत को हर क्षेत्र में फायदा होने की बात कही जा रही है। विशेषज्ञ इसे देश के विकास में एक बड़ा मील का पत्थर बता रहे हैं। ब्रह्मोस एयरोस्पेस के पूर्व प्रमुख और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. ए. शिवथनु पिल्लै ने कहा कि भारत तेजी से रक्षा और आर्थिक शक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसकी बड़ी वजह देश में बनी (स्वदेशी) हाइपरसोनिक तकनीक और तेजी से बढ़ता अंतरिक्ष क्षेत्र है।
कोयंबटूर में मीडिया से बात करते हुए डॉ. पिल्लै ने बताया कि भारत अब सामान्य मिसाइल तकनीक से आगे बढ़कर ‘सुपर ब्रह्मोस’ पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि अभी ब्रह्मोस मिसाइल की गति मैक-3 है, लेकिन लक्ष्य इसे मैक-7 जैसी हाइपरसोनिक गति तक ले जाना है। उन्होंने समझाया कि गति जितनी ज्यादा होगी, मिसाइल की ताकत उतनी ही ज्यादा होगी। इतनी तेज मिसाइल को दुश्मन का रक्षा तंत्र पकड़ नहीं पाएगा। भारत ने पहले ही 1,000 सेकंड तक हाइपरसोनिक तकनीक का सफल परीक्षण कर लिया है, जिससे वह दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल हो गया है।डॉ. पिल्लै ने कहा कि फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइल देने के बाद कई अन्य देशों ने भी इसमें रुचि दिखाई है। उन्होंने बताया कि ‘सिंधुरा ऑपरेशन’ में ब्रह्मोस की सफलता के बाद इसकी मांग और बढ़ी है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि भारतीय सेना को जो ब्रह्मोस दी जाती है, वह निर्यात की जाने वाली मिसाइलों से ज्यादा उन्नत होती है। उन्होंने सरकार द्वारा रिसर्च और डेवलपमेंट (आरएंडडी) पर बढ़ाए गए खर्च और एएमसीए जैसे स्वदेशी फाइटर जेट प्रोजेक्ट की भी तारीफ की।डॉ. पिल्लै ने आगे कहा कि भारत इस समय दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और जल्द ही जर्मनी को पीछे छोड़कर तीसरे स्थान पर पहुंच सकता है। गगनयान मिशन के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि पहले बिना इंसान वाले मिशन भेजे जाएंगे, जिनमें एक रोबोट लड़की होगी, जिससे अंतरिक्ष से वापसी और सुरक्षा की जांच की जाएगी। उसके बाद प्रशिक्षित अंतरिक्ष यात्रियों को भेजा जाएगा।उन्होंने बताया कि भारत में अब करीब 400 अंतरिक्ष स्टार्टअप काम कर रहे हैं, जैसे अग्निकुल और स्काईरूट। ये इसरो के प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि उसके सहयोगी हैं और सैटेलाइट व रॉकेट की बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद कर रहे हैं।डॉ. पिल्लै ने कहा कि वे 40 साल तक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के साथ जुड़े रहे और आज भी भारत उनके दिखाए रास्ते पर चलकर एक विकसित देश बनने की ओर बढ़ रहा है।भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने भी भारत-अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह कदम दोनों देशों के लोगों, उद्योगों और रोजगार सृजन के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा।उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक नीतियों की तारीफ करते हुए कहा कि भारत की नीतियां आज दुनिया के लिए मिसाल बन गई हैं। चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति का भारत पर भरोसा इस रिश्ते को और मजबूत करता है। इस समझौते से व्यापार में स्थिरता आएगी, निवेशकों को भरोसा मिलेगा और सप्लाई चेन मजबूत होंगी।उन्होंने बताया कि यह समझौता सिर्फ टैरिफ घटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे उद्योग, तकनीक और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार और उद्योग के बीच भरोसे और साझेदारी से देश में बड़े सुधार हुए हैं और भारतीय उद्योग अब वैश्विक स्तर पर मजबूत भूमिका निभाने के लिए तैयार है।वहीं, विदेश मामलों के विशेषज्ञ डॉ. शैलेंद्र के. देओलंकर ने कहा कि हम इस पूरे मामले को भारत की जीत के रूप में देखते हैं। अप्रैल 2025 में डोनाल्ड ट्रम्प ने 50 प्रतिशत टैरिफ की घोषणा की थी, जिसमें से 25 प्रतिशत टैरिफ रूस से तेल खरीदने के कारण भारत को दंडित करने के लिए लगाया गया था। भारत अभी भी रूस से तेल खरीदता है, लेकिन अब यह कम हो गया है। उन्होंने कहा कि यह उन्होंने एकतरफा रूप से घोषित किया था और अब उन्होंने इसे एकतरफा रूप से वापस भी ले लिया है।देओलंकर ने कहा कि अब भारत को मुख्य रूप से पांच क्षेत्रों में लाभ दिखाई देता है। इनमें पहला क्षेत्र ऑटो उद्योग है, जिसमें ऑटो पार्ट्स और ऑटो कंपोनेंट्स अहम हैं। दूसरा क्षेत्र रत्न और आभूषण है। तीसरा क्षेत्र वस्त्र और चमड़ा है, और चौथा क्षेत्र कृषि, मत्स्य पालन और डेयरी उत्पाद है। ये चारों मुख्य क्षेत्र श्रम प्रधान हैं, जहां एमएसएमई की बहुत बड़ी भूमिका है।उन्होंने आगे कहा कि इस डील से भारत को विशेष रूप से वस्त्रों के क्षेत्र में लाभ होगा, जिनमें कालीन, चादरें, तकिए के कवर और पर्दे शामिल हैं, और इनकी पहले की तरह आपूर्ति फिर से शुरू हो जाएगी। वहीं, भारत को एक बार फिर अमेरिका में बड़ा बाजार मिलेगा। यही सबसे बड़ा फायदा होगा। इसके अलावा, राजकोट चैंबर ऑफ कॉमर्स के सेक्रेटरी पार्थ गणात्रा ने इस महत्वपूर्ण डील पर अपनी राय देते हुए कहा कि अमेरिका के साथ हुए इस व्यापार समझौते से राजकोट, सौराष्ट्र समेत राज्य भर के उद्योगों को नई संजीवनी मिलेगी।उन्होंने कहा कि पहले 25 प्रतिशत टैरिफ होने के चलते निर्यात में लगभग 35 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। अब टैरिफ घटकर 18 प्रतिशत होने से एक्सपोर्ट को फिर से गति मिलेगी। उन्होंने बात करते हुए कहा कि टैरिफ बढ़ने के दौरान उद्योगपतियों ने अन्य देशों में भी एक्सपोर्ट करना शुरू कर दिया था। अब अमेरिका में राहत मिलने से और अन्य नए बाजार जुड़ने से निर्यात में भारी बढ़ोतरी होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि इस डील से खास तौर पर कृषि उपकरण, फार्मास्यूटिकल्स, मसाला, मशीन पार्ट जैसे चीजों का एक्सपोर्ट बढ़ेगा और इन्हें बढ़ावा मिलेगा। साथ ही इससे स्थानीय स्तर पर भी रोजगार बढ़ेगा।( -
नई दिल्ली। नासा ने चंद्रमा के लिए प्रस्तावित Artemis II मिशन को मार्च तक के लिए टाल दिया है। यह फैसला ईंधन भरने के दौरान किए गए एक अहम परीक्षण में हाइड्रोजन लीक पाए जाने के बाद लिया गया।
यह मिशन चार अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से चंद्रमा की परिक्रमा पर भेजने वाला था। पहले इसका प्रक्षेपण 6 फरवरी को तय था, लेकिन फ्लोरिडा में ठंडे मौसम और तेज हवाओं के कारण इसे 8 फरवरी तक टाल दिया गया था।NASA प्रशासक Jared Isaacman ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि वेट ड्रेस रिहर्सल पूरी होने के बाद फरवरी की लॉन्च विंडो से बाहर निकलने का फैसला किया गया है और अब मार्च में जल्द से जल्द लॉन्च का लक्ष्य रखा गया है।उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष यात्रियों, कर्मचारियों, प्रणालियों और आम जनता की सुरक्षा NASA की सर्वोच्च प्राथमिकता है और मिशन तभी लॉन्च किया जाएगा जब एजेंसी पूरी तरह से तैयार होगी।31 जनवरी से शुरू हुआ यह दो दिवसीय परीक्षण कैनेडी स्पेस सेंटर में किया गया, जिसमें स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट के टैंकों में क्रायोजेनिक ईंधन सफलतापूर्वक भरा गया। हालांकि, मंगलवार को यह परीक्षण उस समय रोकना पड़ा जब टेल सर्विस मास्ट अंबिलिकल के इंटरफेस पर तरल हाइड्रोजन का रिसाव पाया गया।इंजीनियरों ने कई घंटों तक इस रिसाव को ठीक करने की कोशिश की, लेकिन वे इसमें सफल नहीं हो सके। NASA के अनुसार, काउंटडाउन के दौरान जब लगभग 5 मिनट शेष थे, तब हाइड्रोजन रिसाव की दर अचानक बढ़ने पर ग्राउंड लॉन्च सीक्वेंसर ने अपने आप काउंटडाउन रोक दिया।इसके अलावा, ओरायन क्रू मॉड्यूल हैच प्रेसराइजेशन से जुड़ा एक वाल्व, जिसे हाल ही में बदला गया था, उसे दोबारा कसने की जरूरत पड़ी, जिससे परीक्षण प्रक्रिया में अपेक्षा से अधिक समय लगा। इसके बावजूद NASA ने कहा कि कई चुनौतियों के बावजूद परीक्षण के अधिकांश उद्देश्य पूरे किए गए।अब लॉन्च से पहले मार्च में दूसरी वेट ड्रेस रिहर्सल किए जाने की संभावना है। इस बीच, Artemis II के अंतरिक्ष यात्रियों को क्वारंटीन से बाहर कर दिया जाएगा, जिसमें वे 21 जनवरी से ह्यूस्टन में थे। अगले संभावित लॉन्च से लगभग दो सप्ताह पहले वे दोबारा क्वारंटीन में जाएंगे।यह 10 दिन का मिशन भविष्य के Artemis III मिशन की तैयारी करेगा, जिसे 2027 में लॉन्च किया जाना है। इसी मिशन के तहत इंसान पहली बार चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेंगे और वहां दीर्घकालिक मौजूदगी की शुरुआत करेंगे। Artemis II के चालक दल में NASA के कमांडर Reid Wiseman, पायलट Victor Glover, मिशन स्पेशलिस्ट Christina Koch और Canadian Space Agency के अंतरिक्ष यात्री Jeremy Hansen शामिल हैं। - नयी दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच एक व्यापार समझौते पर सहमति बनी है, जिसके तहत अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर लगने वाला जवाबी शुल्क मौजूदा 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से फोन पर बातचीत के बाद यह जानकारी दी। ट्रंप ने दावा किया कि भारत अमेरिका के खिलाफ शुल्क और गैर-शुल्क बाधाओं को खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ेगा। मोदी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''आज अपने प्रिय मित्र राष्ट्रपति ट्रंप से बात करके बहुत अच्छा लगा। यह जानकर बेहद खुशी हुई कि अब 'मेड इन इंडिया' उत्पादों पर शुल्क घटकर 18 फीसदी रह जाएगा। इस शानदार घोषणा के लिए भारत की 1.4 अरब जनता की ओर से राष्ट्रपति ट्रंप को हार्दिक धन्यवाद।'' मोदी ने कहा कि जब दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र एक साथ मिलकर काम करते हैं, तो इससे लोगों को लाभ होता है और पारस्परिक लाभकारी सहयोग के अपार अवसर खुलते हैं। मोदी ने कहा कि वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए राष्ट्रपति ट्रंप का नेतृत्व अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत शांति के लिए उनके प्रयासों का पूर्ण समर्थन करता है। मोदी ने कहा, ''मैं उनके साथ मिलकर काम करने और हमारी साझेदारी को अभूतपूर्व ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए तत्पर हूं।'' ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा, "प्रधानमंत्री मोदी से मित्रता व उनके प्रति सम्मान के मद्देनजर तथा उनके अनुरोध पर तत्काल प्रभाव से अमेरिका और भारत के बीच एक व्यापार समझौते पर सहमति बनी है, जिसके तहत अमेरिका जवाबी शुल्क 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करेगा।" उन्होंने कहा कि भारत भी इसी तरह अमेरिका के खिलाफ अपनी शुल्क और गैर-शुल्क बाधाओं को खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ेगा। ट्रंप के अनुसार, इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने काफी बड़े स्तर पर अमेरिकी उत्पादों को खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है। उन्होंने कहा कि इसमें 500 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक के अमेरिकी ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, कृषि, कोयला और अन्य उत्पादों की खरीद शामिल है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "भारत के साथ हमारे पहले से शानदार संबंध और मजबूत होंगे। प्रधानमंत्री मोदी और मैं काम करके दिखाते हैं। अधिकतर लोगों के बारे में यह बात नहीं कही जा सकती।"
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नयी दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि केंद्रीय बजट में आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिए निवेश को प्राथमिकता दी गई है और राजकोषीय घाटे की स्थिति से पता चलता है कि सरकार की प्राथमिकता वृद्धि है। सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करने के एक दिन बाद संवाददाताओं से बातचीत में यह भी कहा कि सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव वैश्विक अनिश्चितता के कारण है और कई केंद्रीय बैंक पीली धातु में निवेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ''इससे यह भी पता चलता है कि निवेशकों को किसी एक विशेष मुद्रा पर भरोसा नहीं है और इसीलिए सोने की खरीदारी में होड़ मची है।'' वायदा एवं विकल्प खंड में प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) में वृद्धि के बारे में वित्त मंत्री ने कहा कि यह सट्टेबाजी वाले वायदा एवं विकल्प कारोबार में कदम रखने वालों को हतोत्साहित करने के लिए है। बजट में वायदा अनुबंधों पर एसटीटी (प्रतिभूति सौदा कर) को 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। विकल्प प्रीमियम और विकल्प उपयोग पर एसटीटी को मौजूदा क्रमश: 0.1 प्रतिशत और 0.125 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। सेबी के अध्ययन के अनुसार, वायदा एवं विकल्प खंड में खुदरा निवेशकों के 90 प्रतिशत से अधिक सौदों में नुकसान होता है। पूंजी बाजार नियामक ने अतीत में इस तरह के लेन-देन को कम करने के लिए कदम भी उठाए हैं। सीतारमण ने कहा, "हमने केवल वायदा एवं विकल्प व्यापार को ही छुआ है। जिसमें काफी सट्टेबाजी है। मुझे कई लोगों के फोन आए हैं, जो कह रहे हैं कि उनके बच्चे भारी नुकसान उठा रहे हैं और सरकार से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। एफ एंड ओ में एसटीटी की वृद्धि लोगों के इस क्षेत्र में कदम रखने को हतोत्साहित करेगी।'' बजट में राजकोषीय मजबूती के रास्ते पर चलते हुए, अगले वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.3 प्रतिशत रखा गया है, जबकि मार्च, 2026 को समाप्त होने वाले वित्त वर्ष के लिए यह 4.4 प्रतिशत है। सीतारमण ने कहा कि राजकोषीय घाटे का लक्ष्य प्रत्येक वर्ष की आर्थिक स्थिति पर निर्भर करता है और अतीत में सरकार ने पिछले वित्त वर्ष की तुलना में राजकोषीय घाटे को कुछ आधार अंक कम रखा है। उन्होंने कहा कि इस वित्त वर्ष में ''सरकार की प्राथमिकता वृद्धि है, इसलिए मैं 4.3 प्रतिशत के घाटे के लक्ष्य से संतुष्ट हूं।'' वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि विनिवेश और परिसंपत्ति मौद्रीकरण की गति जारी रहेगी। सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के अधिक विनिवेश को प्रोत्साहित करेगी। सीतारमण ने कहा कि आईडीबीआई बैंक का रणनीतिक विनिवेश सही दिशा में है और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम में हिस्सेदारी की बिक्री की गति गैर-कर राजस्व की दिशा तय करेगी। उन्होंने यह भी विश्वास जताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में जीएसटी दर में कटौती और आयकर छूट सीमा में वृद्धि के कारण हाल ही में निजी उपभोग में जो वृद्धि हुई है, वह आने वाले महीनों में भी जारी रहेगी।
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नयी दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि सरकार की नौ मार्च से शुरू होने वाले बजट सत्र के दूसरे चरण में दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक, 2025 पेश करने की योजना है। संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट दे दी है। दिवाला कानून में प्रस्तावित संशोधन समयबद्धता और दक्षता को और बेहतर बनाने में मदद करेंगे। साथ ही भारत की ऋण शोधन व्यवस्था को वैश्विक सर्वोत्तम गतिविधियों के अनुरूप बनाएंगे। उन्होंने लोकसभा में बजट 2026-27 पेश करने के एक दिन बाद मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि संसदीय समिति ने दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) से संबंधित प्रस्तावित कानून पर अपनी रिपोर्ट दे दी है। कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय की जिम्मेदारी भी संभाल रही सीतारमण ने कहा, ''मुझे उम्मीद है कि कुछ शर्तों के अधीन, समिति के सुझावों को शामिल करते हुए दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक को नौ मार्च से शुरू होने वाले बजट सत्र के दूसरे चरण में पेश किया जाएगा।'' यह 2016 में लागू हुए आईबीसी अधिनियम का सातवां संशोधन होगा। अंतिम संशोधन 2021 में हुआ था।
उल्लेखनीय है कि सरकार ने 12 अगस्त, 2025 को लोकसभा में दिवाला एवं और ऋण शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) में संशोधन के लिए एक विधेयक पेश किया था। इसमें दिवाला समाधान आवेदनों की स्वीकृति में लगने वाले समय को कम करने सहित कई बदलाव के प्रस्ताव किए गए। विधेयक को लोकसभा की प्रवर समिति को विचार के लिए भेजा गया था। समिति ने दिसंबर, 2025 में अपनी रिपोर्ट दे दी। - रायपुर। भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष द्वय डॉ. सरोज पाण्डेय कहा है कि केन्द्रीय बजट में रिफॉर्म ओवर रेटॉरिक के मार्गदर्शक सिद्धांत के तहत सरकार ने देश की संभावनाओं को प्रदर्शन में बदलने के लिए तीन पवित्र कर्तव्य तय किए हैं : उत्पादकता और ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस बढ़ाकर आर्थिक विकास को तेज़ और टिकाऊ बनाना, जनता की आकांक्षाओं को पूरा करना, उन्हें समृद्धि का मजबूत भागीदार बनाना, और सबका साथ, सबका विकास के विज़न को साकार करना ताकि हर क्षेत्र और समुदाय को अवसर मिले। 500 जलाशयों का इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट, महिला समूहों और FPO लिक, इन्क्लूसिव ग्रोथ बजट की विशेषता है। इससे भारत के कोस्टल क्षेत्रों के अलावा इनलैण्ड सेक्टर को भी बढ़ावा मिलेगा। यह कदम जल संसाधनों को आय के स्थायी स्रोत में बदलते हुए मछुआरों, महिला समूहों और छोटे उत्पादकों को संगठित बाजार से जोड़कर समावेशी विकास को जमीन पर लाएगा।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को भारतीय तटरक्षक बल को उसके स्थापना दिवस पर बधाई दी और कहा कि समुद्री सुरक्षा, त्वरित आपदा प्रतिक्रिया और देश के समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के प्रति उसकी अटूट प्रतिबद्धता सराहनीय है। भारतीय तटरक्षक बल की स्थापना 1977 में इसी दिन भारत के महासागर और अपतटीय संपदा, जिसमें तेल, मछली और खनिज शामिल हैं, की रक्षा करने, संकट में फंसे नाविकों की सहायता करने और समुद्र में जीवन एवं संपत्ति की सुरक्षा करने के उद्देश्य से की गई थी। मोदी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''तटरक्षक बल के स्थापना दिवस पर उनके सभी पद के अधिकारियों, कर्मियों को हार्दिक शुभकामनाएं। उन्होंने हमारे तटों पर एक अडिग ढाल बनकर अपनी पहचान बनाई है। समुद्री सुरक्षा, त्वरित आपदा प्रतिक्रिया और हमारे समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता सराहनीय है।'' भारतीय तटरक्षक बल के उद्देश्यों में समुद्र से संबंधित समुद्री कानूनों को लागू करना, अवैध शिकार, तस्करी और नशीले पदार्थों पर रोक लगाना, समुद्री पर्यावरण और पारिस्थितिकी का संरक्षण करना तथा दुर्लभ प्रजातियों की रक्षा करना, वैज्ञानिक डेटा एकत्र करना और युद्ध के दौरान नौसेना को सहायता प्रदान करना भी शामिल है।
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नयी दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को आम बजट 2026-27 पेश करते हुए छात्रों, तकनीकी पेशेवरों और स्थानांतरित एनआरआई जैसे छोटे करदाताओं के लिए छह महीने की विदेशी संपत्ति खुलासा योजना का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि पहले अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष अपील की अवधि के लिए जुर्माने की राशि पर करदाताओं पर कोई ब्याज नहीं देना होगा, चाहे परिणाम कुछ भी हो। वित्त मंत्री ने 31 जनवरी, 2026 तक किए गए निवेश पर अधिसूचित सहकारी समितियों द्वारा प्राप्त लाभांश आय के लिए तीन साल की छूट का भी प्रस्ताव दिया। सरकार हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, पूर्वी घाट की अराकू घाटी और पश्चिमी घाट में पारिस्थितिक रूप से टिकाऊ पर्वतीय मार्ग विकसित करेगी।
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नयी दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को देश भर में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व के स्थानों समेत सभी अहम जगहों के बारे में जानकारी को डिजिटल स्वरूप प्रदान करने के लिए एक 'राष्ट्रीय गंतव्य डिजिटल ज्ञान ग्रिड' बनाने का प्रस्ताव रखा। सीतारमण ने लोकसभा में आगामी वित्त वर्ष के लिए केंद्रीय बजट पेश करते हुए हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू कश्मीर में 'पारिस्थितिकीय तौर पर टिकाऊ' पर्वतीय मार्गों को विकसित करने और एक 'राष्ट्रीय आतिथ्य-सत्कार संस्थान' (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी) बनाने का भी प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा, ''रोजगार पैदा करने, विदेशी मुद्रा विनिमय से कमाई करने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ाने में पर्यटन क्षेत्र की बड़ी भूमिका है। मैं मौजूदा राष्ट्रीय होटल प्रबंधन एवं कैटरिंग टेक्नोलॉजी परिषद के उन्नयन के लिए एक राष्ट्रीय आतिथ्य-सत्कार संस्थान बनाने का प्रस्ताव रखती हूं।'' वित्त मंत्री ने कहा कि यह शिक्षा क्षेत्र, उद्योग और सरकार के बीच सेतु की तरह काम करेगा।
सीतारमण ने बजट भाषण में लोथल, धौलावीरा, राखीगढ़ी, सारनाथ, हस्तिनापुर, लेह पैलेस समेत पुरातात्विक महत्व के 15 स्थलों का विकास 'जीवंत अनुभव वाले सांस्कृतिक गंतव्यों' के रूप में करने का भी प्रस्ताव रखा। उन्होंने एक भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) के साथ मिलकर हाइब्रिड मोड में उच्च गुणवत्ता वाले 12 सप्ताह के मानकीकृत प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से ''20 प्रतिष्ठित पर्यटन स्थलों पर 10,000 गाइड का कौशल बढ़ाने के लिए एक पायलट योजना'' का भी प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि सरकार पांच 'पूर्वोदय' राज्यों में पांच पर्यटन गंतव्य बनाएगी और 4,000 ई-बसों के लिए प्रावधान करेगी। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को घोषणा की कि सरकार प्रमुख औद्योगिक 'लॉजिस्टिक' केंद्रों के आसपास पांच विश्वविद्यालय टाउनशिप स्थापित करेगी। लोकसभा में 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश करते हुए सीतारमण ने देश के प्रत्येक जिले में एक बालिका छात्रावास स्थापित करने की भी घोषणा की। देश में 700 से अधिक जिले हैं।
वित्त मंत्री ने कहा कि बजट में मुंबई स्थित 'इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज' को 15,000 माध्यमिक विद्यालयों में 'कंटेंट लैब' स्थापित करने के लिए समर्थन देने का प्रस्ताव है। -
नयी दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को कहा कि 'लखपति दीदी योजना' की सफलता को आगे बढ़ाते हुए, स्वयं सहायता समूहों की महिला उद्यमियों के लिए सामुदायिक स्वामित्व वाली खुदरा दुकानें स्थापित की जाएंगी। लोकसभा में केंद्रीय बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने इसे स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के सदस्यों के लिए ''उद्यमों के मालिक'' बनने की दिशा में ''अगला कदम'' बताया। सीतारमण ने कहा, '' लखपति दीदी कार्यक्रम की सफलता को आगे बढ़ाते हुए, मैं महिलाओं को ऋण-आधारित आजीविका से उद्यमों की मालिक बनने की दिशा में अगला कदम उठाने में मदद करने का प्रस्ताव करती हूं।'' उन्होंने कहा, '' स्वयं सहायता उद्यमी - शी मार्ट को उन्नत एवं नवोन्मेषी वित्त साधनों के माध्यम से संकुल-स्तरीय संघों के भीतर सामुदायिक स्वामित्व वाली खुदरा दुकान के रूप में स्थापित किया जाएगा।'' लखपति दीदी, स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की वह महिला सदस्य होती है जिसकी वार्षिक घरेलू आय कम से कम एक लाख रुपये हो। ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, अब तक दो करोड़ से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं और लक्ष्य 2027 तक तीन करोड़ महिला एसएचजी सदस्यों की वार्षिक आय को एक लाख रुपये तक पहुंचाना है।
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नयी दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ग्रामीण आय में विविधता लाने और पारंपरिक कृषि से बाहर रोजगार अवसर पैदा करने के मकसद से रविवार को पशुपालन, मत्स्य पालन और उच्च मूल्य वाले कृषि क्षेत्रों के लिए कई पहल की बजट 2026-27 में घोषणा की। सीतारमण ने संसद में वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश करते हुए कहा कि पशुपालन ग्रामीण कृषि आय का करीब 16 प्रतिशत योगदान देता है जिसमें गरीब और सीमांत किसानों की आमदनी भी शामिल है। उन्होंने 20,000 से अधिक पशु-चिकित्सा पेशेवरों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए ऋण-सम्बद्ध पूंजी सब्सिडी योजना का प्रस्ताव भी रखा। यह योजना पशु चिकित्सा महाविद्यालय, अस्पताल, निजी कॉलेज, डायग्नोस्टिक लैब और प्रजनन सुविधाओं की स्थापना को बढ़ावा देगी। सीतारमण ने कहा कि मत्स्य पालन क्षेत्र में सरकार 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों का समेकित विकास करने के साथ तटीय क्षेत्रों में मूल्य शृंखला को मजबूत करेगी। इससे स्टार्टअप, महिलाओं की अगुवाई वाले समूहों और मछली पालक किसान संगठनों के जरिये बाजार संबद्धता बनाई जा सकेगी। वित्त मंत्री ने पशुपालन उद्यमिता के लिए ऋण-सम्बद्ध सब्सिडी कार्यक्रम लाने की भी घोषणा की, जिसमें पशुधन, डेयरी और पॉल्ट्री केंद्रित एकीकृत मूल्य शृंखला के निर्माण और आधुनिकीकरण पर जोर रहेगा। तटीय किसानों के लिए नारियल संवर्धन योजना भी प्रस्तावित की गई है, जिसके तहत पुराने एवं गैर-उत्पादक वृक्षों की जगह नई किस्मों को लगाया जाएगा। सीतारमण ने कहा कि एक करोड़ किसानों समेत करीब तीन करोड़ लोग अपनी आजीविका के लिए नारियल पर निर्भर हैं और भारत दुनिया में नारियल का सबसे बड़ा उत्पादक है। सरकार भारतीय काजू और कोको कार्यक्रम के जरिये उत्पादन और प्रसंस्करण में आत्मनिर्भरता, निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और 2030 तक उन्हें विश्वस्तरीय प्रीमियम ब्रांड में बदलने की योजना बना रही है। इसके अतिरिक्त, चंदन की खेती और उत्पाद प्रसंस्करण को बढ़ावा देकर भारत की सांस्कृतिक एवं सामाजिक धरोहर से जुड़े भारतीय चंदन पारिस्थितिकी को पुनर्जीवित करने का प्रस्ताव भी इस बजट में रखा गया है। पहाड़ी क्षेत्रों में पुराने बागों के पुनरुत्थान और अखरोट, बादाम एवं चिलगोजा (पाइन नट्स) की उच्च-घनत्व वाली खेती को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष योजना भी पेश की गई है, जिसमें युवा सहभागिता से मूल्य संवर्धन पर खास ध्यान रहेगा।
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नयी दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को 2026-27 के वार्षिक बजट में बैटरी भंडारण के लिए लिथियम-आयन सेल के विनिर्माण में उपयोग होने वाली पूंजीगत वस्तुओं पर मूल सीमा शुल्क छूट के विस्तार की घोषणा की। अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री ने सीएनजी में मिश्रित बायोगैस पर उत्पाद शुल्क की गणना करते समय बायोगैस के पूरे मूल्य को बाहर रखने का प्रस्ताव भी रखा। उन्होंने कहा, "मैं बैटरी के लिए लिथियम-आयन सेल के विनिर्माण में उपयोग होने वाली पूंजीगत वस्तुओं पर दी जाने वाली मूल सीमाशुल्क छूट को बढ़ाने का प्रस्ताव करती हूं। साथ ही मैं सौर कांच के विनिर्माण में उपयोग होने वाले सोडियम एंटी मोनेट के आयात पर भी मूल सीमा शुल्क छूट देने का प्रस्ताव करती हूं।" भारत में महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण के लिए आवश्यक पूंजीगत वस्तुओं के आयात पर बुनियादी सीमा शुल्क से छूट प्रदान करने का प्रस्ताव है। बायोगैस मिश्रित सीएनजी के संबंध में उन्होंने कहा, ''मैं बायोगैस मिश्रित सीएनजी पर देय केंद्रीय उत्पाद शुल्क की गणना करते समय बायोगैस के संपूर्ण मूल्य को बाहर रखने का प्रस्ताव करती हूं।'' उन्होंने कहा कि सरकार दुर्गापुर में एक सुव्यवस्थित केंद्र के साथ एक एकीकृत पूर्वी तट औद्योगिक गलियारा विकसित करेगी। पूर्वोदय राज्यों और पूर्वोत्तर क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने के बारे में उन्होंने कहा, ''मैं दुर्गापुर में एक सुव्यवस्थित केंद्र के साथ एक एकीकृत पूर्वी तट औद्योगिक गलियारे के विकास पांच पूर्वोदय राज्यों में पांच पर्यटन स्थलों के निर्माण और पूर्वोत्तर क्षेत्र में बौद्ध स्थलों के लिए 4,000 ई-बस के प्रावधान का प्रस्ताव करती हूं।'' उन्होंने कहा कि बजट में भारत में निर्मित वस्तुओं या नगण्य आयात वाली वस्तुओं पर सीमा शुल्क में छूट को समाप्त करने का प्रस्ताव है।
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नयी दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को कहा कि 'भारत के बाहर रहने वाले व्यक्तिगत व्यक्ति' (पीआरओआई) अब पोर्टफोलियो निवेश योजना के जरिये सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों में इक्विटी निवेश कर सकेंगे। सीतारमण ने संसद में वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए कहा कि पीआरओआई के लिए निवेश सीमा को भी अब पांच प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा जा रहा है। इसके साथ ही वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार कॉरपोरेट बॉन्ड सूचकांक पर कोष एवं डेरिवेटिव्स तक उपयुक्त पहुंच के लिए एक ढांचा विकसित करने का प्रस्ताव कर रही है। उन्होंने अपने बजट भाषण में कहा कि सरकार पांच लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में आधारभूत संरचना के विकास पर ध्यान देना जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि गुजरात के जामनगर में स्थित विश्व स्वास्थ्य संगठन का वैश्विक परंपरागत औषधि केंद्र अद्यतन किया जाएगा। साथ ही देश की दूरबीन और खगोल विज्ञान अवसंरचना को भी उन्नत करने का प्रस्ताव है। बजट के मुताबिक, पर्यटन एवं कौशल विकास क्षेत्र में सरकार 20 प्रतिष्ठित पर्यटन स्थलों पर 10,000 गाइड के कौशल उन्नयन के लिए पायलट योजना शुरू करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में पर्वतारोहण में विश्वस्तरीय अनुभव प्रदान करने की क्षमता मौजूद है। इसके अलावा केंद्र सरकार हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में पर्यावरण-संवेदनशील पर्यटन मार्ग भी विकसित करेगी।
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इंदौर/इंदौर में रविवार को एक मैराथन में दौड़ रहे 25 वर्षीय युवक की संदिग्ध तौर पर दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। पुलिस के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) तुषार सिंह ने बताया कि 'इंदौर मैराथन' में दौड़ रहे आर्यन तोड़ी (25) इस मुकाबले की 'फिनिशिंग लाइन' से करीब 150 मीटर पहले अचेत होकर गिर गए और वहां मौजूद एक चिकित्सक ने उन्हें 'सीपीआर' (कार्डियो-पल्मोनरी रिससिटेशन) दिया लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ। 'सीपीआर' एक आपातकालीन जीवन-रक्षक प्रक्रिया है, जिसे तब किया जाता है जब किसी व्यक्ति की सांस या दिल की धड़कन रुक जाती है। उन्होंने बताया कि तोड़ी को नजदीक के शासकीय महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय ले जाया गया जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। एसीपी ने बताया, ''हमें पता चला है कि तोड़ी मैराथन से पहले एकदम स्वस्थ लग रहे थे। पहली नजर में लगता है कि मैराथन में दौड़ते वक्त दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हुई। उनकी मौत की वजह की पुष्टि के लिए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।'' 'दिल से दौड़ें, दिल के लिए' के नारे के साथ आयोजित 'इंदौर मैराथन' के 12वें संस्करण में देशभर के सैकड़ों धावकों ने हिस्सा लिया।
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नयी दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को घोषणा की कि अगले पांच सालों में ऑप्टोमेट्री, रेडियोलॉजी, एनेस्थीसिया और एप्लाइड साइकोलॉजी समेत अलग-अलग क्षेत्रों में करीब एक लाख सहायक स्वास्थ्य पेशेवरों (एएचपी) को जोड़ा जाएगा। सीतारमण ने लोकसभा में केंद्रीय बजट पेश करते हुए कहा कि एएचपी के लिए मौजूदा संस्थानों को उन्नत किया जाएगा और निजी तथा सरकारी क्षेत्र में नए एएचपी संस्थान बनाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इससे स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत के युवाओं के लिए कौशल वाले रोजगारों के नए रास्ते बनेंगे। उन्होंने कहा, ''इसमें ऑप्टोमेट्री, रेडियोलॉजी, एनेस्थीसिया, ओटी टेक्नोलॉजी, एप्लाइड साइकोलॉजी और व्यवहार संबंधी सेहत समेत 10 चुने हुए क्षेत्र शामिल होंगे और अगले पांच साल में एक लाख एएचपी जुड़ेंगे।'' वित्त मंत्री ने कहा, ''बुजुर्गों और सहायक देखभाल सेवाओं के लिए एक मजबूत देखभाल प्रणाली बनाई जाएगी।
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नई दिल्ली।‘ वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को देश का आम बजट 2026 पेश किया है। यह मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का दूसरा पूर्ण बजट है। बजट को पेश करते हुए वित्त मंत्री ने तमाम सेक्टर्स के लिए कई बड़े ऐलान किए। इसी बीच, बजट को लेकर अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिक्रिया सामने आई है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में बजट को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इसमें देश की नारी शक्ति का सशक्त प्रतिबिंब झलकता है। महिला वित्त मंत्री के रूप में निर्मला सीतारमण ने लगातार 9वीं बार देश का बजट प्रस्तुत करके नया रिकॉर्ड बनाया है। यह बजट 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं को दिखाता है। यह सुधारों की यात्रा को मजबूत करता है और विकसित भारत के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार करता है।उन्होंने कहा कि भविष्य को ध्यान में रखकर इस बजट को पेश किया गया है। इससे छोटे व्यापारियों को काफी फायदा होगा। ये विकसित भारत की गति को तेज करने वाला बजट है। ये बजट अपार अवसरों का राजमार्ग है। ये बजट वर्तमान के सपनों को साकार करता है और भारत के उज्ज्वल भविष्य की नींव को सशक्त करता है। ये बजट 2047 के विकसित भारत की हमारी ऊंची उड़ान का मजबूत आधार है। मित्रों, भारत जिस सुधार की रफ्तार पर आज चल रहा है, उसे इस बजट से नई ऊर्जा और गति मिलेगी।पीएम मोदी ने कहा कि आज भारत जिस रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार है, इस बजट से उसे नई ऊर्जा और नई गति मिलेगी। इस बजट से यूथ की उड़ान के लिए आसमान खुल गया है। भारत तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बनने जा रहा है। बजट से भारत की ग्लोबल पोजीशन मजबूत होगी। ये बजट भारत की वैश्विक भूमिका को नए सिरे से सशक्त करता है। भारत के 140 करोड़ नागरिक तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनकर ही संतुष्ट नहीं हैं। हम जल्द से जल्द दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना चाहते हैं। ये करोड़ों देशवासियों का संकल्प है।उन्होंने कहा कि यह बजट भरोसे पर आधारित गवर्नेंस और मानव-केंद्रित आर्थिक ढांचे के विजन को दिखाता है। यह एक खास बजट है जो राजकोषीय घाटे को कम करने और महंगाई को कंट्रोल करने को प्राथमिकता देता है, साथ ही ज्यादा पूंजीगत खर्च और मजबूत आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाता है। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में आगे कहा कि विश्व के एक विश्वसनीय लोकतांत्रिक भागीदार और विश्वसनीय गुणवत्ता आपूर्तिकर्ता के रूप में भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है। हाल ही में जो बड़े-बड़े व्यापार सौदे भारत ने किए हैं, जिसका मुख्य लाभ भारत के युवाओं को मिला, भारत के लघु और मध्यम उद्योग के लोगों को मिला, इस दिशा में बजट में बड़े-बड़े कदम दिए गए हैं।पीएम मोदी ने कहा कि यह बजट सिर्फ आज की जरूरतें पूरी नहीं करता, बल्कि 2047 के विकसित भारत की नींव को भी मजबूत करता है। उन्होंने इसे ‘अवसरों का हाईवे’ बताते हुए कहा कि भारत अब केवल सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनकर रुकना नहीं चाहता, देश की नजरें अब दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य पर टिकी हैं। इस बजट में मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई रफ्तार देने के लिए महत्वाकांक्षी रोडमैप प्रस्तुत किया गया है। इस बजट में नई उभरती इंडस्ट्रीज यानी सनराइज सेक्टर्स को जिस बढ़ोतरी के साथ समर्थन दिया गया है, वह अभूतपूर्व है।उन्होंने आगे कहा कि हाल ही में भारत ने कई बड़े ट्रेड डील फाइनल किए हैं, जिन्हें अक्सर ‘सभी डील की जननी’ कहा जाता है। यह पक्का करने के लिए कि ज्यादा से ज्यादा फायदा युवाओं और एमएसएमई तक पहुंचे, बजट में कई जरूरी कदम उठाए गए हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए, बजट में कई बड़े कदम शामिल किए गए हैं। इनमें डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का विकास, नेशनल वॉटरवे का विस्तार, हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का निर्माण, और टियर 2 और टियर 3 शहरों के विकास पर खास ध्यान देना शामिल है। इसके अलावा, म्युनिसिपल बॉन्ड को बढ़ावा देने का मकसद शहरी इलाकों के लिए एक मजबूत आर्थिक बुनियाद देना है। ये सभी कदम मिलकर विकसित भारत की दिशा में प्रगति को तेज करेंगे। - इंदौर.। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रविवार को पेश केंद्रीय बजट की सराहना करते हुए कहा कि यह बजट भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के नजरिये से पेश किया गया है। यादव ने इंदौर में संवाददाताओं से कहा, ''आम बजट भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के नजरिये से पेश किया गया है। इसमें गरीबों, युवाओं, अन्नदाताओं और महिलाओं समेत सभी वर्गों के कल्याण पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है।'' उन्होंने बायोफार्मा, कृत्रिम मेधा (एआई), शहरी विकास, वस्त्र निर्माण, पर्यटन और अन्य क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देने के बजट प्रस्तावों का उल्लेख किया और कहा कि भारत को सशक्त बनाने के प्रति लक्षित बजट से देश में आर्थिक वृद्धि को रफ्तार मिलेगी। यादव ने कहा कि बजट में देश के विनिर्माण क्षेत्र के रणनीतिक विकास के लिए पर्याप्त धनराशि का आवंटन किया गया है। उन्होंने कहा, ''बजट में भारत को विनिर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने के कई उपाय किए गए हैं। इससे विनिर्माण क्षेत्र में कई देशों की चुनौतियों से निपटने में हमारी सरकार सक्षम होगी।'' मुख्यमंत्री ने बजट में कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों की दवाएं सस्ती करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि बजट में केंद्र ने राज्यों को वित्त आयोग के अनुदान के रूप में 2026-27 के लिए 1.40 लाख करोड़ रुपये उपलब्ध कराने का प्रावधान किया है जिससे मध्यप्रदेश भी लाभान्वित होगा। यादव ने आगामी वित्त वर्ष के दौरान केंद्र के राजकोषीय घाटे में कटौती करके इसे सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.30 प्रतिशत पर रखे जाने के लक्ष्य और आयकर तंत्र में छोटे करदाताओं के लिए प्रक्रियाएं आसान करने के बजट प्रस्तावों की भी सराहना की।
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नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने केंद्रीय बजट की तारीफ करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह बजट विकसित भारत के संकल्प को गति देने वाला है, जिसमें गरीब, किसान, महिला और युवा सहित समाज के हर वर्ग के सशक्तिकरण का स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत किया गया है।
भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि कर्तव्यनिष्ठ प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में कर्तव्य भवन से बना और कर्तव्य पथ पर चलने के संकल्प को साकार करता बजट 2026 में देश के भविष्य के प्रति सरकार की स्पष्ट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। पीएम मोदी के नेतृत्व में लगातार नौवीं बार देश का बजट प्रस्तुत करने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को हार्दिक बधाई। यह उपलब्धि नीति स्थिरता और सुशासन का सशक्त प्रमाण है।उन्होंने कहा कि सबका साथ, सबका विकास के संकल्प को सिद्धि तक ले जाने वाला यह बजट वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति को रेखांकित करता है, जहां 7 प्रतिशत से अधिक विकास दर के साथ इन्फ्लेशन दर पर प्रभावी नियंत्रण संभव हुआ है, जो विकसित भारत 2047 की दिशा में एक सशक्त पहल है। यह बजट यूथ ड्रिवन बजट है। विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026 जैसे मंचों के माध्यम से युवाओं द्वारा साझा किए गए नवाचारी विचारों ने इस बजट के प्रमुख प्रावधानों को आकार दिया है।नितिन नवीन ने कहा कि इस बजट में मैन्युफैक्चरिंग के माध्यम से रोजगार सृजन पर विशेष बल दिया गया है। इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल्स, सेमीकंडक्टर, केमिकल, कंटेनर और स्पोर्ट्स मैन्युफैक्चरिंग को गति देने के साथ इलेक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट के लिए 40 हजार करोड़ और बायोफार्मा उद्योग के लिए 10,000 करोड़ के प्रावधान आत्मनिर्भर भारत की दिशा में मजबूत कदम हैं।उन्होंने आगे कहा कि महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल के जरिए खादी और ग्रामीण शिल्प को वैश्विक पहचान मिलेगी। टूरिज्म और संस्कृति केंद्रों का विकास, 20 नए अंतर्देशीय जलमार्ग, पटना और वाराणसी में शिप रिपेयर इकोसिस्टम, तथा रोड ट्रांसपोर्ट और डिफेंस सेक्टर में बढ़ा निवेश रक्षा क्षेत्र के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।यह बजट गरीब, किसान, महिला, युवा सहित समाज के हर वर्ग के कल्याण के साथ विकसित भारत के संकल्प को साकार करने वाला है। इसके लिए प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करता हूं तथा केंद्रीय वित्त मंत्री एवं उनकी पूरी टीम को हृदय से धन्यवाद देता हूं। -
नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को भारत में अहम खनिजों से जुड़ी एक बड़ी और खास पहल का ऐलान किया। इसका मकसद देश में रेयर अर्थ मिनरल्स के क्षेत्र को मजबूत करना है।
लोकसभा में बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि सरकार ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे खनिजों से भरपूर राज्यों को रेयर अर्थ कॉरिडोर बनाने में मदद करेगी। ये कॉरिडोर ऐसे खास केंद्र होंगे, जहां रेयर अर्थ मिनरल्स से जुड़ा पूरा काम एक ही जगह होगा।इन रेयर अर्थ कॉरिडोर में खनन, प्रोसेसिंग, रिसर्च और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग तक सभी काम शामिल होंगे। यानी जमीन से खनिज निकालने से लेकर उनसे आधुनिक चीजें बनाने तक का पूरा सफर भारत में ही होगा।यह घोषणा नवंबर 2025 में शुरू की गई रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट योजना को आगे बढ़ाने का कदम है। इसका उद्देश्य है कि भारत इस क्षेत्र में अपनी घरेलू ताकत बढ़ाए और आयात पर निर्भरता कम करे।फिलहाल भारत रेयर अर्थ मिनरल्स के लिए काफी हद तक चीन से आयात पर निर्भर है। यह चिंता का विषय है, क्योंकि रेयर अर्थ मिनरल्स का इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा तकनीक और आधुनिक उद्योगों में होता है।वित्त मंत्रालय ने कहा कि हमारे पास पर्याप्त कच्चे माल हैं और तटीय क्षेत्र इन खनिजों से भरपूर हैं। सरकार चाहती है कि भारत खुद इन जरूरी खनिजों का उत्पादन करे, ताकि देश की सप्लाई चेन सुरक्षित रहे और राष्ट्रीय सुरक्षा व आर्थिक विकास को मजबूती मिले।ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु को ऐसे ही नहीं चुना गया है। इन राज्यों के समुद्री तटों पर मोनाजाइट और अन्य बीच सैंड मिनरल्स बड़ी मात्रा में पाए जाते हैं, जिनमें रेयर अर्थ तत्व भरपूर होते हैं।ये कॉरिडोर केवल खनिज निकालने तक सीमित नहीं रहेंगे। यहां हाई-वैल्यू प्रोसेसिंग और रेयर अर्थ मैग्नेट बनाने का काम भी होगा, जिससे भारत को अपने ही खनिजों से ज्यादा फायदा मिलेगा।उद्योग विशेषज्ञों ने इस कदम को चीन के लगभग एकाधिकार के खिलाफ भारत की मजबूत रणनीति बताया है। उनका कहना है कि इससे वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति बेहतर होगी।यह योजना नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन के उद्देश्यों से मेल खाती है और खनन क्षेत्र में हाल के सुधारों को भी आगे बढ़ाती है, जिनका मकसद काम को ज्यादा पारदर्शी और आसान बनाना है।यह ऐलान दिखाता है कि भारत जरूरी खनिजों के मामले में आत्मनिर्भर बनना चाहता है, जो देश की औद्योगिक और ऊर्जा बदलाव की योजना का अहम हिस्सा है।वित्त मंत्री के इस फैसले से निवेश बढ़ने, नए रोजगार पैदा होने और खनिज तकनीक में नवाचार आने की उम्मीद है। इससे भारत ग्रीन एनर्जी और एडवांस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी मजबूत होगा। हालांकि अभी फंडिंग, समयसीमा और प्रोत्साहनों की पूरी जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन ये रेयर अर्थ कॉरिडोर सरकार की रणनीतिक मैन्युफैक्चरिंग योजना में एक बड़ा और साहसिक कदम माने जा रहे हैं। -
नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने केंद्रीय बजट की तारीफ करते हुए रक्षा क्षेत्र के लिए 7.85 लाख करोड़ रुपए आवंटित किए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह जनभावनाओं और जन-अपेक्षाओं पर खरा उतरने वाला बजट है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक संदेश में कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में तैयार और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की तरफ से पेश इस शानदार बजट के लिए मैं उन्हें हार्दिक बधाई देता हूं। यह जनभावनाओं और जन-अपेक्षाओं पर खरा उतरने वाला बजट है। साथ ही, यह बजट प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के संकल्प को सशक्त आधार देता है, जिसमें समाज के सभी वर्गों के उत्थान के लिए समुचित प्रावधान किए गए हैं।”उन्होंने कहा, “इस बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए 7.85 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किए जाने पर मैं प्रधानमंत्री मोदी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की ऐतिहासिक सफलता के बाद आए इस बजट ने देश की रक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के हमारे संकल्प को सुदृढ़ किया है।”राजनाथ सिंह ने कहा कि इस साल हमारी सेनाओं के कुल पूंजीगत व्यय के लिए 2.19 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस बजट का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष हमारी तीनों सेनाओं के आधुनिकीकरण का है। इसके लिए इस साल 1.85 लाख करोड़ रुपए की प्रोविजनिंग की गई है, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में लगभग 24 प्रतिशत अधिक है। इस वृद्धि के परिणामस्वरूप हमारी सैन्य क्षमता और अधिक सशक्त होगी।रक्षा मंत्री ने कहा, “भूतपूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण को भी इस बजट में प्रमुख स्थान मिला है। पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत वर्तमान वर्ष की तुलना में लगभग 45 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी करते हुए 12,100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। यह बजट सुरक्षा, विकास और आत्मनिर्भरता के संतुलन को मजबूत करता है।” -
नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026-27 में देश के रक्षा क्षेत्र के लिए 7.8 लाख करोड़ रुपए का आवंटन किया है। यह राशि पिछले वित्त वर्ष के 6.81 लाख करोड़ रुपए की तुलना में करीब 15 प्रतिशत ज्यादा है। बजट में रक्षा बलों के लिए सैन्य उपकरणों की खरीद के लिए 2.19 लाख करोड़ रुपए रखे गए हैं। यह रकम पूंजीगत खर्च का हिस्सा है और यह वित्त वर्ष 2025-26 में दिए गए 1.80 लाख करोड़ रुपए से लगभग 21.8 प्रतिशत अधिक है।
रक्षा बजट में ये बढ़ोतरी ऐसे समय में की गई है, जब हाल ही में भारत ने कश्मीर में हुए आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर चलाया और दुनिया भर में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहे हैं। यह कदम सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ नीति के अनुरूप है, जिसमें देश में ही रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है।वित्त मंत्री ने यह भी प्रस्ताव रखा कि विमानों के रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल के लिए इस्तेमाल होने वाले पुर्जों को बनाने में लगने वाले कच्चे माल के आयात पर बेसिक कस्टम ड्यूटी माफ की जाएगी। इससे रक्षा क्षेत्र की कंपनियों को फायदा मिलेगा।बजट 2026-27 पर प्रतिक्रिया देते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर की ऐतिहासिक सफलता के बाद यह बजट देश की रक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के संकल्प को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह बजट सुरक्षा, विकास और आत्मनिर्भरता के बीच संतुलन बनाता है।इस बजट का रुख पहले से चल रही उस रणनीति को आगे बढ़ाता है, जिसमें सेना के आधुनिकीकरण, एयर डिफेंस सिस्टम और नई पीढ़ी के प्लेटफॉर्म पर ज्यादा खर्च किया जा रहा है।कैपेक्स में बढ़ोतरी का कारण फाइटर जेट, युद्धपोत, मिसाइल, तोप और अन्य आधुनिक रक्षा उपकरणों के लिए ज्यादा बजट दिया जाना है। रक्षा उपकरणों की खरीद के लिए ज्यादा बजट मिलने से सरकारी रक्षा कंपनियोंके साथ-साथ निजी क्षेत्र की सप्लायर कंपनियों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है, क्योंकि पूरे सेक्टर में ऑर्डर तेजी से बढ़े हैं।सरकारी क्षेत्र की जिन कंपनियों को फायदा होने की संभावना है, उनमें हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) शामिल हैं, जो सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए उपकरण बनाती हैं।इसके अलावा मिधानी, बीईएमएल, भारत डायनामिक्स जैसी छोटी निजी कंपनियों और ड्रोन सेक्टर से जुड़े स्टार्टअप्स को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। यह सब भारत में ही रक्षा उपकरणों की खरीद को बढ़ावा देने की सरकार की नीति का हिस्सा है।( -
नई दिल्ली। केंद्रीय बजट 2026-27 में स्वास्थ्य क्षेत्र को प्राथमिकता देते हुए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के लिए 1,06,530.42 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है, जो वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमानों से लगभग 10 प्रतिशत अधिक है। यह बढ़ोतरी पिछले 12 वर्षों में स्वास्थ्य बजट की कुल 194 प्रतिशत से अधिक वृद्धि को दर्शाती है, जो 2014-15 के मुकाबले अतिरिक्त 70,349.75 करोड़ रुपए का निवेश है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश बजट में स्वास्थ्य सेवा पारिस्थितिकी तंत्र के परिवर्तन, सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज और समावेशी विकास पर मजबूत फोकस किया गया है।
बजट में प्रमुख योजनाओं को बढ़ावा दिया गया है। प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (पीएम-एबीएचआईएम) के लिए आवंटन 67.66 प्रतिशत बढ़कर 4,770 करोड़ रुपए हो गया है, जिसमें केंद्रीय क्षेत्र घटक के तहत 570 करोड़ रुपए और केंद्र प्रायोजित योजना के तहत पूंजीगत व्यय 4,200 करोड़ रुपए शामिल हैं। यह क्रिटिकल केयर ब्लॉक, एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाएं और जिला एवं उप-जिला अस्पतालों के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण है।प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (पीएमएसएसवाई) के तहत आवंटन 11,307 करोड़ रुपए तक बढ़ाया गया, जो पिछले संशोधित अनुमान से 407 करोड़ रुपए (3.73 प्रतिशत) अधिक है। इससे नए एम्स की स्थापना, मौजूदा संस्थानों का संचालन और सरकारी मेडिकल कॉलेजों का अपग्रेडेशन संभव होगा।राष्ट्रीय एड्स और एसटीडी नियंत्रण कार्यक्रम (एनएसीओ) के लिए आवंटन 30.64 प्रतिशत बढ़कर 3,477 करोड़ रुपए किया गया, जिसमें ब्लड ट्रांसफ्यूजन सेवाओं के लिए 275 करोड़ रुपए (37.50 प्रतिशत वृद्धि) का प्रावधान है। यह रक्त सुरक्षा, उपलब्धता और गुणवत्ता मानकों को मजबूत करेगा। स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (डीएचआर) का आवंटन 24 प्रतिशत बढ़कर 4,821.21 करोड़ रुपए से अधिक हो गया, जो चिकित्सा अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देगा।बजट ने ‘बायो फार्मा शक्ति’ नामक 10,000 करोड़ रुपए की राष्ट्रीय पहल शुरू की है, जो बायोलॉजिक्स, बायोसिमिलर और फार्मा अनुसंधान को प्रोत्साहित करेगी। सीडीएससीओ की वैज्ञानिक क्षमता बढ़ाकर दवा विनियमन ढांचे को मजबूत किया जाएगा। संबद्ध स्वास्थ्य पेशेवरों (एएचपी) और क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्रों के निर्माण पर फोकस है, जिसमें 1.5 लाख कैरगिवर्स को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है। हर जिला अस्पताल में ट्रॉमा सेंटर स्थापित किए जाएंगे, जिससे 24×7 आपातकालीन देखभाल सुनिश्चित होगी।कैंसर और दुर्लभ बीमारियों की दवाओं पर सीमा शुल्क में कमी से इलाज लागत और जेब खर्च कम होगा। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई) के लिए 9,500 करोड़ रुपए और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के लिए 39,390 करोड़ रुपए का आवंटन बढ़ाया गया है, जो प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा, मातृ-शिशु स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण को मजबूत करेगा।यह बजट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को स्वास्थ्य के माध्यम से साकार करने की दिशा में एक मजबूत कदम है, जो बुनियादी ढांचे, अनुसंधान, कुशल मानव संसाधन और सस्ती स्वास्थ्य सेवा पर केंद्रित है। - नयी दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पूंजीगत व्यय का लक्ष्य बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये किया जाएगा, जो चालू वित्त वर्ष के लिए 11.2 लाख करोड़ रुपये है। उन्होंने साथ ही देश में बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के लिए कई उपायों की घोषणा की।लोकसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार, छोटे व मझोले शहरों में बुनियादी ढांचे का विकास जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि सरकार बुनियादी ढांचा क्षेत्र के लिए जोखिम गारंटी कोष स्थापित करने का भी प्रस्ताव करती है। सीतारमण ने कहा कि घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने के लिए निर्माण व अवसंरचना उपकरणों के संवर्धन को एक योजना शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार आईसीएआई, आईसीएसआई जैसे व्यावसायिक संस्थानों को अल्पकालिक 'मॉड्यूलर' पाठ्यक्रम तैयार करने में सहायता देने का भी प्रस्ताव करती है।
- नयी दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए 'चैंपियन' लघु एवं मझोले उद्यमों (एसएमई) को तैयार करने को 10,000 करोड़ रुपये का कोष स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते हुए उन्होंने वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिए कंटेनर विनिर्माण की एक योजना का भी प्रस्ताव दिया। वित्त मंत्री ने अपने भाषण में तकनीकी वस्त्रों के मूल्यवर्धन पर केंद्रित मेगा टेक्सटाइल पार्क स्थापित करने और पांच उप-भागों वाले एक एकीकृत कपड़ा कार्यक्रम का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत में उच्च गुणवत्ता वाली किफायती खेल सामग्री के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरने की क्षमता है। इसके अलावा, खादी हथकरघा को मजबूत करने के लिए 'महात्मा गांधी ग्राम स्वराज' पहल और 200 पुराने औद्योगिक क्लस्टर को पुनर्जीवित करने की योजना का भी प्रस्ताव रखा गया है।



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