भारतीय जनसंपर्क उद्योग के 2030 तक 4,500 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान: रिपोर्ट
नयी दिल्ली. भारत का जनसंपर्क (पीआर) उद्योग वित्त वर्ष 2030 तक 4,500 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2025-26 में यह उद्योग 11 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 3,230 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। पब्लिक रिलेशंस कंसल्टेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (पीआरसीएआई) की स्प्रिंट 2026 रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2025-26 में 11 प्रतिशत की वृद्धि दर पिछले एक दशक की 12 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) की तुलना में कुछ कम रही, जो इस उद्योग के परिपक्व होने का संकेत देती है। यहां बृहस्पतिवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारतीय पीआर उद्योग की एशिया-प्रशांत बाजार में हिस्सेदारी 12.6 प्रतिशत रही। रिपोर्ट के अनुसार, 2022 से 2026 के बीच प्रमुख ग्राहक श्रेणियों में सरकारी क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग तीन गुना बढ़कर चार प्रतिशत से 11 प्रतिशत हो गई। वहीं, उद्योग के प्रमुख ग्राहक रहे निजी कंपनियों की हिस्सेदारी 48 प्रतिशत से घटकर 42 प्रतिशत रह गई। समान अवधि में स्टार्टअप की हिस्सेदारी लगभग चार गुना बढ़कर छह प्रतिशत से 22 प्रतिशत हो गई। रिपोर्ट के मुताबिक, पीआर उद्योग में कृत्रिम मेधा (एआई) पर निवेश पिछले तीन साल में राजस्व के दो प्रतिशत से बढ़कर सात प्रतिशत हो गया है। हालांकि, बड़ी, मझोली और उभरती कंपनियां एआई को लेकर अलग-अलग रणनीतियों पर काम कर रही हैं।


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