'भारत के दिव्य चरित्र : जैनत्व से प्रेरणा' पर मार्गदर्शन करने मीनाक्षी लेखी से भेंट
- सकल जैन समाज की ओर से दो भाषाओं में पुस्तक प्रकाशन की पहल को पूर्व केंद्रीय मंत्री ने सराहा
रायपुर। जैन धर्म की महान विभूतियों पर आधारित अनुसंधान जनित प्रस्तावित पुस्तक 'भारत के दिव्य चरित्र : जैनत्व से प्रेरणा' के संदर्भ में सकल जैन समाज के समन्वयक मंडल ने सुप्रसिद्ध अधिवक्ता व पूर्व केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी से मुलाकात कर उनका मार्गदर्शन प्राप्त किया।
भेंट के दौरान प्रतिनिधि मंडल ने पुस्तक की अवधारणा, उद्देश्य, सामाजिक व राष्ट्रीय उपयोगिता से उन्हें अवगत कराया। यह कृति सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य से लेकर डॉ. विक्रम साराभाई तक जैन परंपरा से प्रेरित 13 महान विभूतियों के जीवन, त्याग व राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को शोधपरक रूप में प्रस्तुत करेगी।
संयोजक प्रवीण सिंगी ने इस अवसर पर पुस्तक की विस्तृत विषय-सूची का संपूर्ण विवरण प्रस्तुत करते हुए प्रत्येक अध्याय की वैचारिक रूपरेखा से उन्हें अवगत कराया।
मीनाक्षी लेखी ने इस अवसर पर कहा कि प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव द्वारा प्रतिपादित 'असि-मसि-कृषि' आधारित इकोलॉजिकल जीवन प्रणाली व जैन दर्शन के सिद्धांत आज के ग्लोबल वार्मिंग और युद्ध के लिए आतुर युग में सर्वाधिक प्रासंगिक हो चुके हैं। उनके अनुसार यह अनुसंधान जनित पुस्तक समय की आवश्यकता है। यह कृति वैश्विक स्तर पर विशेष रूप से युवा पीढ़ी के लिये प्रेरक संसाधन सिद्ध होगी। उन्होंने पुस्तक को दो भाषाओं (हिंदी और अंग्रेज़ी) में प्रकाशित करने की योजना की सराहना करते हुए इसके व्यापक सामाजिक प्रचार-प्रसार के लिए भी उपयोगी सुझाव दिये।
प्रतिनिधि मंडल ने उनके मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि यह पुस्तक जैन दर्शन को आधुनिक भारत और विश्व की चुनौतियों से जोड़ने वाली एक सशक्त वैचारिक सेतु बनेगी। प्रतिनिधि मंडल में विकास दुग्गड़ (सीए), चंद्रकांत लुंकड़, प्रवीण कुमार जैन, उत्तम संखलेचा, हर्ष बैद व गगन बरड़िया शामिल थे।










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