पोषण देखरेख (फोस्टर केयर) योजना से बच्चों को मिल रहा परिवार जैसा वातावरण
रायपुर । देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों को सुरक्षित एवं पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराने हेतु पोषण देखरेख (फोस्टर केयर) योजना प्रभावी रूप से संचालित की जा रही है। इस योजना के अंतर्गत बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के आदेश से बच्चों को ऐसे परिवार में रखा जाता है, जो उनके जैविक अथवा दत्तक माता-पिता नहीं होते, परंतु उन्हें परिवार जैसा स्नेह, संरक्षण और मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
पोषण देखरेख में बच्चे का सर्वोत्तम हित सर्वोपरि रखा जाता है। प्रयास किया जाता है कि बच्चे को उसके सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिवेश के अनुरूप ही परिवार में रखा जाए। प्रत्येक बच्चे को परिवार जैसे वातावरण में बड़े होने का अधिकार है। सभी निर्णय बच्चे की सुरक्षा, आवश्यकता एवं उपयुक्तता को ध्यान में रखते हुए केस-टू-केस आधार पर लिए जाते हैं।
बच्चे को अपनी राय देने का अधिकार है तथा उसकी आयु एवं समझ के अनुसार उसकी बात का सम्मान किया जाता है। सगे भाई-बहनों को यथासंभव एक ही परिवार में रखा जाता है। यदि अलग करना आवश्यक हो, तो दोनों की सहमति (जहाँ आवश्यक हो) तथा बाल कल्याण समिति की अनुमति अनिवार्य होती है।
इस योजना के अंतर्गत 6 वर्ष से अधिक आयु के वे बच्चे पात्र होते हैं, जो बाल देखरेख संस्थाओं (सीबीआई) में निवासरत हों, जिनसे मिलने कोई नहीं आता हो, जिनके अभिभावक अयोग्य हों अथवा जिन्हें देशीय या अंतरदेशीय दत्तक ग्रहण में स्थान न मिल पाया हो तथा ‘हार्ड टू प्लेस’ या विशेष आवश्यकता श्रेणी में आते हों।
फोस्टर केयर दो प्रकार की होती है :- अल्पकालीन : अधिकतम 1 वर्ष तक, दीर्घकालीन : 1 वर्ष से अधिक, अधिकतम 18 वर्ष की आयु तक, जिसे बाल कल्याण समिति द्वारा समय-समय पर समीक्षा कर बढ़ाया जा सकता है।रायपुर जिले के 12 वर्षीय योगेश के सिर से कम उम्र में ही माता-पिता का साया उठ गया था। वह भिक्षावृत्ति कर जीवन यापन कर रहा था। जिला बाल संरक्षण इकाई, रायपुर द्वारा 8 वर्ष की आयु में उसका रेस्क्यू कर बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। समिति के आदेशानुसार उसे बाल देखरेख संस्था में संस्थागत किया गया।
संस्था में रहते हुए बालक का चयन पोषण देखरेख कार्यक्रम के अंतर्गत किया गया। पोषक अभिभावक का गृह अध्ययन पूर्ण होने के उपरांत संबंधित अनुमोदन समिति द्वारा बालक को फोस्टर केयर में दिए जाने की अनुशंसा की गई। उचित मिलान के पश्चात बालक को पोषक परिवार में स्थापित किया गया।
वर्तमान में योगेश अपने पोषक परिवार के साथ सुरक्षित वातावरण में रहकर कक्षा 7वीं में अध्ययन कर रहा है। यह उदाहरण दर्शाता है कि पोषण देखरेख योजना बच्चों के जीवन में नई आशा, सुरक्षा एवं उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त कर रही है।
जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे जरूरतमंद बच्चों को परिवार जैसा स्नेह एवं संरक्षण देने के लिए आगे आएं और समाज में सकारात्मक परिवर्तन के सहभागी बनें।







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