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धमधागढ़ हेरिटेज वॉक 8 मार्च को:  दो पूर्व कुलपति समेत प्रोफेसर होंगे शामिल

 - पुरखौती विरासत को जानने-समझने का अनूठा प्रयास

धमधा। धमधा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को जानने-समझने के उद्देश्य से “धमधागढ़ हेरिटेज वॉक – पुरखौती विरासत भ्रमण” का आयोजन 8 मार्च (रविवार) को किया गया है। इसमें दो पूर्व कुलपति डॉ. एसके पांडेय एवं डॉ. एसके पाटिल समेत 20 प्रोफेसर, प्रिंसिपल व कवि लेखक शामिल होंगे। इसमें 
इतिहास, संस्कृति और विरासत संरक्षण से जुड़े प्रबुद्ध जन भाग लेंगे।
 
यह आयोजन धर्मधाम गौरवगाथा समिति, धमधा द्वारा किया जा रहा है। हेरिटेज वॉक में पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के पूर्व कुलपति श्री एस.के. पांडेय, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के पूर्व कुलपति डॉ. एसके पाटिल, भिलाई से प्रोफेसर एवं पूर्व सदस्य सचिव छत्तीसगढ़ राज्य साक्षरता प्राधिकरण डॉ. डी.एन. शर्मा, उत्कृष्ठा स्वयंसेवी संस्था की अध्यक्ष श्रीमती शालू मोहन, संडे टाइम्स के संपादक श्री दीपक दास, संपूर्णानंद महाविद्यालय की प्राचार्य एवं इंटैक संयोजक डॉ. हंसा शुक्ला, कवयित्री श्रीमती विद्या गुप्ता, छायाचित्रकार श्री कांतिकुमार सोलंकी, राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक डॉ. प्रज्ञा सिंह, छत्तीसगढ़ हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ साहित्यकार श्री रवि श्रीवास्तव, एम.जे. कॉलेज भिलाई के प्राचार्य डॉ. अनिल चौबे, सुप्रसिद्ध कलाकार डॉ. महेश चतुर्वेदी, साडा सिरपुर के पूर्व मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री राजेंद्र राव, सामाजिक कार्यकर्ता सुश्री ममता, भिलाई महिला कॉलेज की पूर्व प्राचार्य डॉ. संध्या मदन मोहन, बाल साहित्यकार श्री कमलेश चंद्राकर, अभिनव जीवन कल्याण समिति दुर्ग के अध्यक्ष श्री जगमोहन सिन्हा, इंजीनियर एवं समाजसेवी श्री रमेश पटेल ने इसमें शामिल होने की सहमति प्रदान की है।
इसमें भारतीय राष्ट्रीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत न्यास (INTACH) भिलाई-दुर्ग के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। 
समिति के संयोजक वीरेंद्र देवांगन एवं सामर्थ्य ताम्रकार ने बताया कि यह विरासत भ्रमण केवल ऐतिहासिक स्थलों का अवलोकन भर नहीं होगा, बल्कि धमधा के इतिहास से जुड़े कई रोचक सवालों के उत्तर भी तलाशे जाएंगे। इसमें यह जानने का प्रयास होगा कि छत्तीसगढ़ के 36 गढ़ों में धमधा का नाम क्यों शामिल नहीं है, छै आगर छै कोरी तरिया किस प्रकार मोतियों की माला की तरह जुड़े थे, गोंड राजा कब और किस मार्ग से धमधा पहुंचे थे, त्रिमूर्ति महामाया मंदिर और राजा किला किस प्रकार अभेद किले के रूप में प्रसिद्ध थे तथा बूढ़ादेव मंदिर का इतिहास और धमधा के राजा की मनौती क्या थी।
इसके अलावा प्रतिभागियों को धमधा के प्राचीन कांसा उद्योग में लोटा ढलने की प्रक्रिया, सौ वर्ष पुराने घरों और दुकानों के इतिहास सहित कई ऐतिहासिक तथ्यों से अवगत कराया जाएगा। इन विषयों से जुड़ी कई जानकारियां अंग्रेजों के समय की पुस्तकों और शोध से प्राप्त हुई हैं।
कार्यक्रम के तहत सुबह 9 बजे पंडितवा तालाब से विरासत भ्रमण प्रारंभ होगा, जो चौखड़िया तालाब, महामाया मंदिर, राजा किला होते हुए तमेरपारा स्थित कांसा उद्योग और प्राचीन बसाहट तक जाएगा। इसके बाद दोपहर 3 बजे (संभावित) रेस्ट हाउस में संगोष्ठी आयोजित की जाएगी, जिसमें विरासत संरक्षण के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा होगी।
 
आयोजकों ने बताया कि इस पुरखौती विरासत भ्रमण में शामिल होने के लिए पूर्व पंजीयन अनिवार्य है और पंजीयन पूरी तरह नि:शुल्क रहेगा। इच्छुक प्रतिभागी दिए गए संपर्क नंबरों पर पंजीयन करा सकते हैं।
आयोजकों का कहना है कि यह आयोजन केवल एक भ्रमण नहीं, बल्कि अपनी ऐतिहासिक धरोहर को नए नजरिए से देखने, समझने और उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का सामूहिक प्रयास है।

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