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  रात में स्क्रीन की ब्लू लाइट आपकी नींद को कैसे प्रभावित करती है?

  आज के समय में ज्यादातर लोग रात को सोने से पहले मोबाइल, लैपटॉप या टीवी में लगे रहते हैं, जिसके बाद लोगों को सोने में परेशानी होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में अच्छी नींद और नींद की गुणवत्ता में सुधार करने से अक्सर लोगों को सोने से पहले मोबाइल और टीवी जैसी स्क्रीन वाली चीजों का इस्तेमाल बंद करने की सलाह दी जाती है, लेकिन क्या वाकई रात में स्क्रीन की ब्राइटनेस आपकी नींद को कैसे प्रभावित करती है?  
रात में स्क्रीन की ब्राइटनेस नींद को कैसे प्रभावित करती है?
  "रात में तेज ब्राइटनेस वाली स्क्रीन का इस्तेमाल करने से व्यक्ति की नींद में काफी परेशानी हो सकती है। मोबाइल फोन, टैबलेट, लैपटॉप और टीवी से निकलने वाली नीली रोशनी यानी ब्लू लाइट निकलती है, जो सीधे शरीर के नेचुरल स्लीप-वेक साइकिल पर असर डालती है, जिसे सर्कडियन रिदम भी कहा जाता है। ब्लू लाइट मेलाटोनिन के प्रोडक्शन को कम करती है। बता दें, मेलाटोनिन हार्मोन आपको नींद दिलाने के लिए जिम्मेदार होता है। जब मेलाटोनिन का लेवल कम होता है, तो आपका ब्रेन ज्यादा देर तक अलर्ट रहता है, जिससे सोना मुश्किल हो जाता है।"
  नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अध्ययन के अनुसार, रात को कंप्यूटर स्क्रीन की नीली रोशनी (ब्लू लाइट) नींद और बायोलॉजिकल रिदम को गंभीर रूप से बाधित करती है। ये ब्लू लाइट व्यक्ति के शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन को कम करती है, शरीर के तापमान को बढ़ाती है और सुबह की एकाग्रता को प्रभावित करती है। लाइट की तीव्रता के मुकाबले उसकी वेवलेंथ स्वास्थ्य पर अधिक बुरा प्रभाव डालता है।
 नींद की क्वालिटी होती है प्रभावित
 , "रात में तेज रोशनी वाली स्क्रीन आपके दिमाग को यह भी सिग्नल देती है कि अभी भी दिन है। इससे नींद आने में देर होती है और नींद की क्वालिटी कम हो जाती है। अगर आप सो भी जाते हैं, तो सोने से पहले तेज रोशनी में रहने से नींद हल्की हो सकती है और आप बार-बार जाग सकते हैं, साथ ही, ऐसा लंबे समय तक करने से समय के साथ, खराब नींद मूड, कॉन्संट्रेशन, इम्यूनिटी और पूरी हेल्थ पर बुरा असर डाल सकती है।"
 अच्छी नींद और नींद की गुणवत्ता में सुधार के लिए क्या करें?
 नींद की गुणवत्ता में सुधार करने और अच्छी नींद को बढ़ावा देने के लिए कुछ हेल्दी आदतों को अपनाना बेहद जरूरी हो जाता है।
-शाम को स्क्रीन की ब्राइटनेस कम करें।
-नाइट मोड या ब्लू लाइट फिल्टर का इस्तेमाल करें।
-सोने से कम से कम 30-60 मिनट पहले स्क्रीन का इस्तेमाल बंद कर दें और इसके इस्तेमाल से बचें।
-अंधेरा और शांत नींद का माहौल बनाएं।
-सोने से पहले स्क्रीन का इस्तेमाल न करने और शांति का माहौल बनाकर सोने से आपके शरीर को आरामदायक नींद के लिए नेचुरली तैयार होने में मदद मिलती है।
 निष्कर्ष
रात को स्क्रीन की ब्राइटनेस आपकी नींद को प्रभावित करती है। रात को सोने से पहले ब्लू लाइट का ब्राइटनेस के साथ इस्तेमाल करने से नींद की क्वालिटी प्रभावित होती है और ऐसा लंबे समय तक करने से काम पर फोकस करने में परेशानी होने, नींद के प्रभावित होने, मूड पर असर पड़ने, इम्यूनिटी पर असर पड़ने और स्वास्थ्य पर बुरा असर होने जैसी समस्याएं होती हैं। ऐसे में नींद से जुड़ी समस्याओं से बचने के लिए शाम को स्क्रीन की ब्राइटनेस कम करें। नाइट मोड या ब्लू लाइट फिल्टर का इस्तेमाल करें, सोने से 30-60 मिनट पहले स्क्रीन का इस्तेमाल बंद करें, अंधेरा और शांत नींद का माहौल बनाएं। इसके अलावा, नींद से जुड़ी अधिक समस्या महसूस होने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

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