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 आपके मोबाइल पर आसानी से मिल जाएंगे ब्‍लड डोनरः अजय काले

0- रक्तदान दिवस विशेष: महाराष्‍ट्र मंडल के अध्‍यक्ष काले अब तक 68 बार, वरिष्ठ सभासद अरविंद जोशी कर चुके हैं 180 बार रक्‍तदान
0- दोनों दानदाता रक्‍तदान अभियान में लगभग प्रतिदिन ही जुटे रहते हैं, साथ ही लोगों को ब्‍लड डोनेट करने के लिए करते हैं प्रेरित
रायपुर। दूसरों की जिंदगी बचाने के लिए रक्तदान करना जरूरी है। ऑपरेशन की स्थिति में लगभग सभी मरीजों को रक्त की जरूरत पड़ती है। हमारे खानपान के कारण हमारा ह्यूमोग्लोबिन लेवल 12.5 प्रतिशत से कम हो जाता है। इसलिए हमें ब्लड की जरुरत पड़ती है और ऐसी जरूरतों पर लोग सामाजिक संगठनों और स्वयं सेवकों को फोन कर डोनर पूछते हैं। मैं कहता हूं कि आपके मोबाइल में भी ब्‍लड डोनर हैं, पहले आप उन्हें फोन लगाएं। नहीं मिलने पर सामाजिक संगठनों की ओर मदद की उम्मीद लगाएं। महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष और चार दशकों से 68 बार रक्तदान कर चुके अजय मधुकर काले ने विश्व रक्तदान की पूर्व संध्या पर उक्‍ताशय के विचार व्‍यक्‍त किए। 
काले कहते हैं कि उन्होंने पिछले 41 सालों में 68 मरीजों को रक्तदान कर उनके जीवन की रक्षा में अपना सहयोग दिया। दूसरे रक्त समूह के खून के लिए भी कई बार उस समय तक उच्च स्तरीय प्रयास किया जब तक उक्‍त मरीजों के लिए समुचित खून की व्‍यवस्‍था नहीं हो गई। काले ने कहा कि उन्होंने पहली बार सन् 1985 में रक्तदान किया। उस समय से ही वे समाजसेवा के प्रति समर्पित हो गए थे। मंडल अध्‍यक्ष काले के मुताबिक तक उन्‍होंने आज तक कम से कम 300 लोगों को प्रेरित कर‍के रक्‍तदान के लिए तैयार किया है। हर व्‍यक्ति के मोबाइल में रक्‍तदाताओं की सूची होनी चाहिए। ये सूची आपके आप उस समय आसानी से उपलब्‍ध और सक्रिय रहेगी, जब आप स्‍वयं भी दूसरों की जान बचाने के लिए स्‍वस्‍फूर्त खून देने के लिए आगे आएंगे। रक्‍तदान के अलावा वे स्‍वयं देहदान कर चुके हैं और इसके लिए भी वे यथासंभव दानदाताओं को तैयार करते रहते हैं। 
महाराष्ट्र मंडल के आजीवन सभासद अरविंद जोशी ने बताया कि उन्होंने अब तक 180 बार रक्तदान किया। पहली बार 1989-90 में किया था। जब वे एक फार्मा कंपनी काम करते थे, उस समय कांच की बोतल में ब्लड कलेक्ट किया जाता था। उस काल से वे रक्‍तदान कर रहे हैं। फिर प्लास्टिक के बैग का दौर आया। तब लोगों को इसके लिए जागरूक करने एक कैंप चलाया गया। उस कैंप में लोगों को विश्वास दिलाने के लिए पहली बार रक्तदान किया गया। फिर 38 सालों से यह सिलसिला जारी है। 
बताते चलें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में सालाना एक करोड़ यूनिट रक्त की जरूरत पड़ती है, लेकिन उसकी उपलब्ध सिर्फ 75 लाख यूनिट है। 25 लाख यूनिट ब्लड की कमी से हर साल हजारों लोग की जान चली जाती है। ब्लड डोनेशन करके न सिर्फ आप दूसरों की जान बचा सकते हैं, बल्कि अपनी सेहत को भी सुधार सकते हैं।
 

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