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कृषि की नवीनतम एवं आधुनिक तकनीकों को अपनाएं कृषक: विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह

-कृषि विज्ञान केन्द्र सुरगी में जैविक कृषि कार्यशाला सह कृषक सम्मेलन आयोजित
-प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, नवाचार एवं उत्पादन क्षमता बढ़ाने में सुरगी मॉडल बना प्रदेश में मिसाल
-सुरगी-खरखरा डायवर्सन नहर लाईनिंग का 19 करोड़ रुपए का कार्य शीघ्र होगा पूर्ण
 रायपुर। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह  सोमवार को राजनांदगांव  जिला के कृषि विज्ञान केन्द्र, सुरगी में आयोजित जैविक कृषि कार्यशाला सह कृषक सम्मेलन में शामिल हुए। इस अवसर पर उनका खुमरी पहनाकर आत्मीय स्वागत किया गया। विधानसभा अध्यक्ष ने कार्यक्रम स्थल पर लगाए गए विभिन्न कृषि एवं जैविक उत्पादों के स्टॉलों का अवलोकन किया तथा उत्कृष्ट कार्य करने वाले कृषकों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।
 कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में किसानों के हित में अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में यूरिया की बाजार कीमत लगभग 2,220 रुपए प्रति क्विंटल है, किंतु केंद्र सरकार की सब्सिडी नीति के कारण किसानों को यह मात्र 266 रुपए में उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं बढ़ रही हैं। ऐसे में किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती की दिशा में आगे बढ़ते हुए गोबर खाद एवं जैविक खाद का अधिकाधिक उपयोग करना चाहिए।
डॉ. रमन सिंह ने कहा कि राजनांदगांव जिले में कृषि गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्थापित कृषि विज्ञान केन्द्र, सुरगी आज प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है। यहां छह राज्यों के विद्यार्थी अध्ययन एवं अनुसंधान के लिए आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि सुरगी उनका गोद ग्राम है, जहां निरंतर विकास कार्य संचालित किए जा रहे हैं। सुरगी-खरखरा डायवर्सन नहर लाईनिंग का 19 करोड़ रुपए का कार्य 95 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है। वहीं शिवनाथ डायवर्सन से जुड़ी मुख्य नहर एवं लघु नहरों का कार्य लगभग 27 करोड़ रुपए की लागत से कराया जा रहा है, जिसका 90 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है।
उन्होंने बताया कि सुरगी सौर चलित सिंचाई परियोजना, कृषि महाविद्यालय, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, हाई स्कूल, विद्युत उपकेन्द्र, शौचालय उन्नयन तथा विभिन्न अधोसंरचनात्मक कार्यों सहित ग्राम पंचायत सुरगी में करोड़ों रुपए के विकास कार्य संपादित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि उन्नत खेती, नवाचार, उत्पादन क्षमता वृद्धि, कम लागत में बेहतर उत्पादन तथा आधुनिक तकनीकों के उपयोग के कारण सुरगी मॉडल प्रदेशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा ड्रोन एवं आधुनिक मशीनों के माध्यम से कृषि कार्यों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे किसानों को नई तकनीकों का लाभ मिल रहा है। उन्होंने कृषकों से कार्यशाला में प्राप्त ज्ञान एवं तकनीकों को अपने खेतों में लागू करने का आह्वान किया।
सांसद श्री संतोष पाण्डेय ने कहा कि प्राकृतिक खेती वर्तमान समय की आवश्यकता है। रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के बढ़ते उपयोग से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। उन्होंने किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए गोबर, गौमूत्र से निर्मित जीवामृत एवं नीमास्त्र के उपयोग के लाभ बताए। उन्होंने कहा कि जैविक उत्पादों की बाजार में मांग लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में जिले में लगभग 550 हेक्टेयर क्षेत्र में जैविक खेती की जा रही है, जिसका प्रमाणीकरण भी कराया जा रहा है। उन्होंने ग्राम भर्रेगांव की महिला स्व-सहायता समूह द्वारा प्राकृतिक उत्पाद निर्माण एवं विपणन के कार्य की सराहना की।
समाजसेवी श्री कोमल सिंह राजपूत ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकास, विश्वास एवं जनकल्याण की भावना के साथ कार्य किए जा रहे हैं। कृषि प्रधान क्षेत्र सुरगी में कृषि विज्ञान केन्द्र की स्थापना से किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों का लाभ मिल रहा है।
कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने बताया कि खरीफ वर्ष 2025 में धान विक्रय करने वाले 1 लाख 24 हजार 101 किसानों को कृषक उन्नयन योजना के तहत 1,484 करोड़ रुपए की राशि उनके खातों में अंतरित की गई। किसानों को 454.12 करोड़ रुपए की अंतर राशि का भुगतान भी किया गया। उन्होंने बताया कि खरीफ 2026 में धान के स्थान पर दलहन, तिलहन, लघुधान्य एवं कपास की खेती करने वाले कृषकों को 15 हजार रुपए प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान किया गया है, जो पूर्व में 11 हजार रुपए प्रति एकड़ थी। इसके अतिरिक्त सभी प्रकार की खरीफ फसलों पर 10 हजार रुपए प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि का प्रावधान है।
कलेक्टर ने बताया कि जिले के किसानों ने रबी वर्ष 2025-26 में लगभग 70 प्रतिशत क्षेत्र में फसल चक्र परिवर्तन करते हुए मक्का, चना, मसूर एवं सरसों जैसी फसलों की खेती कर 19 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की उपज का विक्रय कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। पीएम-आशा योजना के तहत जिले में पहली बार दलहन एवं तिलहन फसलों की समर्थन मूल्य पर खरीदी की गई, जिसके अंतर्गत 16,224 क्विंटल चना, मसूर एवं सरसों का उपार्जन कर किसानों को 9.37 करोड़ रुपए से अधिक का लाभ मिला। उन्होंने बताया कि पॉपकॉर्न कंपनी के साथ अनुबंध के माध्यम से किसानों से 5 करोड़ रुपए मूल्य का मक्का खरीदा गया है तथा भविष्य में सोयाबीन की खरीदी भी की जाएगी।
 
उप संचालक कृषि श्री टीकम सिंह ठाकुर ने बताया कि खरीफ 2026 के लिए जिले में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक एवं बीज उपलब्ध हैं। समितियों के माध्यम से 45,650 मीट्रिक टन उर्वरक वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अब तक 34,480 मीट्रिक टन उर्वरक का भंडारण तथा 26,183 मीट्रिक टन का वितरण किया जा चुका है। किसानों को समय पर कृषि ऋण, उन्नत बीज एवं उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिले में 43 नई सेवा सहकारी समितियों की स्थापना की गई है।
 
कार्यक्रम में कृषक श्री एनेश्वर वर्मा एवं प्राकृतिक खेती से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूह की सदस्य श्रीमती नीता साहू ने अपने अनुभव साझा किए। इस अवसर पर जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित राजनांदगांव के अध्यक्ष श्री सचिन बघेल, उपाध्यक्ष श्री भरत वर्मा, श्री संतोष अग्रवाल, कृषक प्रतिनिधि, कृषि वैज्ञानिक, जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में कृषक उपस्थित थे।

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